प्रेम से अधिक प्रिय कोई एहसास नहीं जो इसे नहीं समझते उनसे प्रेम की आस नहीं। बसाया कभी था जिसको ह्रदय में, अब उसी को मेरे प्रेम का एहसास नहीं।😥😥

जीवन की अभिलाषा है तू ही हार तू ही आशा है मैं बढ़ जाती हूँ जानबूझ कर तेरी गोद में सर को रख कर मिलता कितना सन्तोष मुझे व्यक्त नहीं कर सकती हूँ माँ मैं […]

हमारी हार हमारी जीत हो तुम हे अर्द्धांगिनी ! मेरी प्रीत हो तुम मेरे जीवन सफर की राजदार हो मेरे प्रणय का परिहार हो गीत की पहली पँक्ति सावन की बहार हो। हे अर्द्धांगिनी! सर्वस्व […]

कविता तुम ही तो साथी हो, संवेदना हो, प्रेम हो, लगाव हो, जुड़ाव हो, भावों का प्रवाह हो। बिछुड़न की आह हो, दिल की चाह हो। संगीत की गान हो, सुर की तान हो, शरीर […]

घनघोर बादल गरज रहे हैं सर्द हवाओं के झोंके मन को भिगो रहे हैं बीत गई अब तपन भरी रातें सर्द दिनकर’ सुबह को नमन कर रहे हैं गुलदाऊदी के पुष्प अब खिलने को हैं […]

अपने गुनाहों को मैं हमेशा छुपा लेती हूँ शर्म आती है तो नजरों को झुका लेती हूँ दीवार पर दिखते हैं कारनामे जब अपने आवेश में आकर मैं दीपक को बुझा देती हूँ ।

उर्दू मेरी जबान नहीं उसकी मुझे पहचान नहीं पर फिर भी प्यारी लगती है हिंदी जैसी लगती है इसमें सुंदर शब्दों को खिलते खेलते लफ्जों को एक नई पहचान मिली जैसे भावों को जान मिली […]

जीवन पर्यंत दुख दिया मैंने एक भी सुख ना दिया मैंने ओ मां ! मुझे माफ कर दे तेरा होकर भी, तेरे लिए कुछ ना किया मैंने तूने हर समय मेरा खयाल रखा मैंने तुझे […]

मन तेरे से पहले भी संसार अपनी मस्त चाल चलता था बाद में भी संसार अपनी गति में चलता जायेगा। सुबह, दोपहर शाम अपनी गति में होते जायेगी, मौसम ठंडा, गर्मी, बारिश अपनी गति से […]

सुबह तुम बहुत मनोहर हो, शीतल, शांत, साफ हो बहुत मनोरम हो। उड़गन का चहचहाना हो नए फूलों का खिलना हो, नई किरणों से मिलना हो नई आशा जगाना हो, बीती को भुलाना हो, नया […]

श्याम वर्ण के बादलों से, जब गगन घिर जाएगा। नीला नीला आसमान, मेघों के पीछे छुप जाएगा। तब जल की गिरे फुहार, शीतल-शीतल चले बयार। भीगेगी तब धरती सारी, भीगेगा संसार॥ _______✍गीता

जिसके सहारे जग को देखा उसे ही शिकायत करते देखा आशाओं के तार लगाकर असली नकली प्यार दिखाकर अपने इतने पास बुलाकर न समझाना समझाते देखा नेह के दावे इतने सारे सामने आकर पांव पसारे […]

हिंदी दिवस स्पेशल:- —————— हिंदी हमारी मां है हिंदी हमारी पहचान करो इसका सम्मान सभी हिंदी है बहुत महान हिंदी है बहुत महान देश की शान हमारी हिंदी है हमको अपनी जान से प्यारी दिल […]

विष मेरे भीतर जमा मत जमा होना, तनिक भी नहीं, जरा भी नहीं। न चाह कर भी तू बिछाने लगता है परतें, जिससे शिखर के बजाय नीचे की तरफ खींचती हैं गरतें। प्रेम की धारा […]

हिंदी है भारत की भाषा, मेरे देश की पहचान है। हिंदी की श्रीवृद्धि हो, ऐसा मेरा अरमान है। हिंदी से हिंदुस्तान है, हिंदी ही हमारी पहचान है। यह वह भाषा है, जिसमें हम हॅंसते गाते […]

हिंदी दिवस 14 सितंबर आज मनाया जाता है, राजभाषा बनी थी हिंदी, भारत के मस्तक की बिंदी, इस बिंदी की चमक बढ़ाने दिवस मनाया जाता है। खूब बधाई, खूब बधाई इस अवसर पर आप सबको, […]

हिंदी दिवस आया है मित्रों, आपको शुभकामना, खूब फूले खूब खिल जाये यही शुभकामना। यह हमारी शान है पहचान है, अभिमान है। वाङ्गमय में है भरा खूब सारा ज्ञान है।

हिंदी दिवस की है बधाई खूब सारी आप सबको, मातृभाषा के दिवस की है बधाई आप सब को। आज के ही दिन बनी थी राजभाषा हिन्द की, एकता में बांधने की एक आशा हिन्द की।

नहीं भुलाता है मन दर्द मिला हो जिस पथ चल रहे थे स्वयं की गति में छिला था कंटक बन पग। लहूलुहान हो गया था मन लगाई मरहम पट्टी वैद्य बनकर जिसने दर्द दूर किया […]

तुम्हारी तरह खूबसूरत, हरियाली, खुशहाली चारों तरफ, खिली हुई है, प्रेम की हवा चल रही है, दर्द की दवा बन रही है, यूँ ही दिखते रहना नजरों के सामने ही रहना ऐसा कह रही है।

कुछ तो करना होगा बेरोजगारी को मिटाने के लिए कुछ नई नीतियाँ कुछ नए प्रयास, करें जिससे युवा अहसास कि जीवन की गाड़ी वो भी चला लेंगे, दो रोटी कमा लेंगे।

मन को सम्भाल कर रखा है तेरी यादों को सहेज कर रखा है आँख में आँसू रोज आने लगे हैं, क्योंकि जो कल मेरा था वो आज किसी और का हो चुका है।

एक जैसी नहीं रहती परिस्थितियां सुधरती हैं बिगड़ती हैं परिस्थितियां परिस्थितियां हैं जिनसे हर प्राणी जूझता आया उन्हीं ने है तपाया और खरा सोना बनाया है। चमक खाली नहीं होती वरन खाकर थपेड़ों को किया […]

उम्मीद छोड़ कर तुम थक हार कर न बैठो जब तक न पा सको तुम तब तक न हार बैठो। पाने का यदि इरादा सचमुच रखोगे मन में, पा लोगे मन की मंजिल तुम आजमा […]

================== किसी व्यक्ति के चित्त में जब हीनता की भावना आती है तब उसका मन उसके द्वारा किये गए उत्तम कार्यों को याद दिलाकर उसमें वीरता की पुनर्स्थापना करने की कोशिश करता है। कुछ इसी […]

धरा पर किसका ये बसेरा है नीर गिरता है ये नया सवेरा है अश्क से धुल ​गए हैं जख्म अब तो चहुँ ओर छाया कैसा अंधेरा है ? लब को लब नहीं कहा जाता दर्द […]

ऐ ज़िन्दगी सुन, कितनी बदल गयी हो तुम। हॅंसती खिलखिलाती थी कभी, अब रहने लगी हो गुमसुम। वही ठंडी हवाएँ, वही बादल बरसते, फिर ये नैना मेरे नीर लिए क्यूँ तरसते। ऐसी आशा ना थी […]

क्या करीने से महफ़िल सजी आपकी फिर क्यों रहमत नहीं है अजी आपकी आँखों का है धोखा या धोखा मिट रहा खो गया है चैन ,सुकून मिलता नहीं हुस्नवालों में होती है ,चाहत नहीं फिर […]

नींद भी आखिर बनाई क्या रब ने पूरा इंसान खो जाता है, दिन भर संघर्ष करता है रात को सो जाता है। कभी-कभी असलियत में सपने बो जाता है, हँसते हँसते रो जाता है, जागता […]

सोचो कभी तुमसे मुलाकात हुई तो आमने सामने तुम और मै इतने अभिमान कितने शर्म सोचो कभी तुमसे मुलाकात हुई तो और तुम किसी और के हम उस पुराने वकत के गुलाम बने हुए है […]

मौसम तुम भी बदलते रहे, बदलते रहे। कभी सुखा गए, कभी अंकुर उगाकर फूल खिलाकर फल लगाकर, फल पकाकर, बांट गए। फिर पतझड़ बना गए। फिर नई कोपलें फूटी पुरानी धारणाएं टूटी, नई जुड़ी, फिर […]

गुलाब खिल जाना, सुंगध मिल जाना हवा चले जब भी, पात हिल जाना, पता चले कि गीली मिट्टी है, भावना लिख दी है, कहीं है रेत पड़ी कहीं पे गिट्टी है। कहीं हैं ठोस ईंटें […]

देख कर मुग्ध हूँ मैं तेरा सलोना रूप हे केशव ! तू है मेरे मन का वो प्रकाशित भाग ! जिसके होने से होता है मुझे अर्जुन होने का आभास। मुखचंद्र की इतनी अप्रतिम और […]

मेरी हर बात को तुम समझ लेना, मेरी इकरार की भाषा तुम जान लेना, मन में उमड़ती लहरों को तुम समेट लेना, मेरे अधरों की प्यास तुम बुझा देना, मेरे गीतों को बस तुम गुनगुनाते […]

खुले हैं द्वार चले आओ तुम अब हमको न यूं सताओ तुम। जिंदगी तो पहले ही बेवफा थी अब किस्मत को बेवफा ना बनाओ तुम। दीप टिम टिम से जगमगाते हैं भंवरे भी प्रेम गीत […]

एक कवि हो कर एक कवि का दर्द कहां समझते हो, प्यार करते हो मुझसे पर मुझको कहां समझते हो ? नींद में लेते हो तुम किसी और का नाम….! बेवफा तो नहीं पर वफादार […]

हम कैसे करें ऐतबार! कर भी लें कैसे तुमसे प्यार! क्या भरोसा है कि तुम हमें दगा ना दोगे मेरे हाँथों को उम्र भर के लिए थाम लोगे। जब अपनों ने ही अपना ना समझा, […]

अवनि और अम्बर का कब मिलन हुआ, देखा दूर क्षितिज में तो मिलने का बस भ्रम हुआ । नभ ने बरसा कर रिमझिम जल, खूब नेह दिया धरा को तपती धरती पर गिरता पानी, कह […]

क्या वो मेरा पहला प्यार था जब तुम्हारा स्पर्श इस दिल की धड़कनों को चेतक बना देता था या तुम्हारी लटों का उड़ कर बार बार मेरे चेहरे पे आना मुझे बेसुध कर जाना छण […]

सोने को नित धारण कर शीशमहल में सोने वाली सोने से कितना प्यार तुझे शिकायत मुझसे है लेकिन इज़हार प्यार का करती हो कैसा मुझसे है तकरार तुझे भोर के जैसी निर्मल काया स्वर्णमयी रंग […]

मेरे जीवन की एक वक्त के सत्य घटना को साझा करता ये गीत – सहारे अब सभी छूटे ना कोई काम आया है पकड़कर प्रभु तेरा दामन तुझे अपना बनाया है।। भरोसा दोस्तों पर था […]

कितना रोए, कितना तड़पे, मचाए कितना शोर ! तू किसी और का हो चुका है यह समझाएं कैसे दिल को ? तड़प है, नशा है, जुनून है तेरे इश्क का बिखरे जा रहे हैं हम […]

गलियारों में अंधियारे हैं निश्चित ही सब दुखियारे हैं नहीं हैं खाने को कुछ दाने दूर दूर से सब प्यारे हैं कर्तव्यों की बलिवेदी पर बैठा है कोई शस्त्र पकड़कर पर दुनिया की रीत यही […]

आकांक्षाओं के तिमिर में स्मृतियों का बसेरा है जीवन है अंधकार युक्त और खुशियों का सवेरा है बीत जाती हैं कई शामें बिस्तर की सिलवटों में लिहाफ ओढ़ कर यह वक्त गुजर जाता है उंगलियों […]

पिछले कुछ दिनों से फिर आ रही है उनकी याद उसकी याद में दर्द है और थोड़ी सी प्यास भूल तो गए थे हम दो-चार लोगों से मिलकर उसे, पर अब वो लोग ही ना […]

गंध भरे महूबे मन छू गए सकारे यादों की दोपहरी चढ़ आयी द्वारे गूँज उठी सुधियों नूतन नमराइयाँ कूँक रहे कण्ठ आज दर्द की रुबाइयाँ डूब गए गागर में सागर रतनारे गंध भरे महूबे मन […]