महेश गुप्ता जौनपुरी
मुस्कुराना
May 25, 2020 in मुक्तक
मन को अपने खुश रखना सिखों,
जीवन को अपने जीना सिखों ।
विकट परिस्थितियां सुलझ जायेगी,
दर्द में भी तुम मुस्कुराना सिखों।।
✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
कर्म कसौटी
May 25, 2020 in मुक्तक
कर्म कसौटी ऐंसा है धर्म,
बीज के आधार पर देता फल,
बोया बबूल तो उगते कांटें,
फल मिलें आज नहीं तो कल।।
✍महेश गुप्ता जौनपुरी
वृक्ष लगाओ वृक्ष बचाओ
May 25, 2020 in मुक्तक
वृक्ष लगाओ वृक्ष बचाओ जीवन को खुशहाल बनाओ,
धरा को सुसज्जित करके वायुमंडल को स्वच्छ बनाओ।
वृक्ष लगाओ वृक्ष बचाओ तन मन को प्रफुल्लित कर जाओ,
सुखी धरती पर वृक्ष लगाकर बादल से वर्षा करवाओ।।
महेश गुप्ता जौनपुरी
जिंदगी
May 23, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
जिंदगी
ये मेरी जिंदगी मुझे क्या से क्या बना दिया।
इस लाकडाउन में जीना मरना सिखा दिया।।
उम्र में पहली बार सुकून के पल दे दिया ।
परिवार के संग हंसने खेलने का वक्त दे दिया।।
मुसीबत को अपना ढाल बनाकर कर जीना सीखों ।
गरिबों को रोटी का निवाला ये हमदर्द तुम देना सीखों।।
ये बला कट जायेगा धीरे धीरे सम्भलना सीखों ।
करके शुक्रिया वीर योद्धा का तुम लड़ना सीखों।।
कैसे शुक्रगुजार करूं मैं तेरा ये खुबसूरत जिंदगी।
कैद पशु पक्षी के जीवन को दे दिया नया जिंदगी।।
प्रकृति के झोंके से खिल रहा मदमस्त ये जिंदगी ।
फिज़ा में बिखेर कर खुशबू दे दिया इंसा को जिंदगी।।
एक एक बात समझ में आया अब मुझको।
वक्त की मार ने सबक सिखाया है सबको ।।
अमीरी गरिबी की फर्क नहीं अब शायद तुझको ।
वक्त के काल को समझ कर नमन करो तुम सबको।।
महेश गुप्ता जौनपुरी
वृक्षारोपण
May 22, 2020 in मुक्तक
तप रही धरा को सुसज्जित फिर से करना है,
वृक्षारोपण करके धरा को हरा भरा बनाना है।
वृक्षारोपण का संकल्प इंसा को लेना होगा,
वायुमंडल को बचाने के लिए वृक्ष लगाना होगा।।
महेश गुप्ता जौनपुरी
सोचा था जो वो पुरा ना हो सका
May 21, 2020 in मुक्तक
सोचा था जो वो पुरा ना हो सका
बदलते हालात को देख मैं अपना ना हो सका
आंखों के आंसूओं को मैं अपने पोंछ ना सका
टुटते बिखरते देखता रहा मैं कुछ कर ना सका
सोचा था जो वो मेरा सपना पुरा ना हो सका
बदलते काल चक्र में मैं किसी का ना हो सका
रिस्तें पर दाग लगाकर मैं खुद का ना हो सका
ख्वाहिशों को मैं अपने रूसवा मैं कर ना सका
सोचा था जो वो मेरा सपना पुरा ना हो सका
अरमानों को मैं ढ़ोता रहा उड़ान दे ना सका
अपने अन्दर के इच्छाओं को मैं खो ना सका
आश लगाए बैठा रहा मैं कुछ कर ना सका
सोचा था जो वो मेरा सपना पुरा ना हो सका
महामारी के काल में मैं खामोश रह ना सका
आवाज़ उठाता रहा लेकिन मैं पलायन रोक ना सका
मजदूरों का दर्द देखकर मैं सह ना सका
सोचा था जो वो मेरा सपना पुरा ना हो सका
महेश गुप्ता जौनपुरी
लेख
May 20, 2020 in Other
कर सकें तो मदद करें मजदूर पर राजनिति नहीं
आये दिन देखने को मिल रहा है सभी राजनीति पार्टियां मजदूरों पर राजनीति करने के लिए सोशल मीडिया पर एंव टीवी चैनलों पर तेजी से जुटे हुए है। मैं जानना चाहता हूं कि आखिर यह कहां तक सही है राजनीति पार्टीयों का कहना है कि हमारे ध्दारा मजदूरों के हित में तमाम प्रकार की सुविधाओं पर कार्य किया जा रहा है। भूखे को भोजन प्यासे को पानी एवं पैदल मजदूरों के लिए साधन का व्यवस्था किया जा रहा हैं। इसके बावजूद भी मजदूर रोड़ पर बिलख रहे हैं तड़प रहें हैं भूखे पेट व बिना किसी यातायात व्यवस्था के बिना सकैडों किलोमीटर दूर चलने पर मजबूर है। इन सारे विफलताओं के बावजूद भी मजदूरों के ऊपर राजनीति बन्द होने का नाम नहीं ले रहा है। पलायन करना मजबूरों का मजबूरी नहीं बल्कि सरकार के विफलताओं का संदेश है अगर मजदूर को खाने के लिए भोजन मिलता और उनके समस्याओं को ध्यान में रखा जाता तो मजदूर कदापि पलायन का विचार अपने मन में नहीं लाते। लेकिन मजदूर के समस्याओं को गिने चुने नेता ही समझ पा रहें हैं बाकि अन्य नेता इस मौके का फायदा उठाकर अपना राजनीति कैरियर को चमकाने में लगें हैं। शायद उन्हें इस बात की खबर तक नहीं जिन्हें वे वर्षो से बेवकूफ समझते आ रहें हैं अब वे समझदार हो गये है सही गलत के मायने को समझने लगे हैं। मजदूरों के दुःख दर्द को समझते हुए कुछ लोग निस्वार्थ भाव से सेवा कर रहे हैं भला हो सभ्य समाज एवं एनजीओ का जो मजदूरों को निरन्तर खाने पीने का सामान मजदूरों को हाईवे से लेकर गली मोहल्ले चौराहों तक उपलब्ध करा रहा है। यहां तक एनजीओ भटकते मजदूरों को आराम करने के लिए टेंट व्यवस्था एवं रोगी मजदूरों को दवा मुहैया करा कर उनके आंसुओं को पोंछ रहा है नहीं तो कोरोना के आंकड़ों से ज्यादा भूख से मरने वालों का आंकड़ा होता। तब राजनीति पार्टीयों को अपना मुंह छिपाना पड़ता अगर राजनीति पार्टियां सच में मजदूरों के लिए कुछ करना चाहती है तो उन्हें सड़कों पर चल रहे नंगें पांव मजदूर, भूखे मजदूर,लाचार मजदूर का सहायता करें और उन्हें उनके घर तक सुरक्षित पहुंचाएं। तभी उनके राजनीति का मकसद पूर्ण होगा टीवी चैनल पर बैठकर डिबेट करने से और भाषण देने से मजदूरों का कभी भला नहीं हो सकता इस बात को राजनिति पार्टीयों को बखूबी समझना चाहिए।
महेश गुप्ता जौनपुरी
जौनपुर उत्तर प्रदेश
मोबाइल – 9918845864
अस्त व्यस्त
May 20, 2020 in मुक्तक
अस्त ब्यस्त लस्त में भी खुद को जिंदा रखता,
खून पसीने को बहाकर खेत हरा भरा रखता।
प्रकृति के हालातों से कभी नहीं झुकता,
मेहनत के डर से किसान कभी नहीं भागता।।
✍ महेश गुप्ता जौनपुरी