तुम लाख बिठा लो पहरे तुम्हारे दर पर आऊंगी जरूर !! ना उतरा है ना उतरेगा कभी तेरी आँखों का सुरूर !!
तुम लाख बिठा लो पहरे तुम्हारे दर पर आऊंगी जरूर !! ना उतरा है ना उतरेगा कभी तेरी आँखों का सुरूर !!
फिर बैसाखी आई है देखो आज पंजाब में। दर्द पुराना जाग गया है उन सूखे हुए घाव में।। क्रूर फिरंगी ने हम पर कितना जुल्म किया था। जालियावाला बाग में वीरों जन समूह भून दिया […]
जब शोर मचा होता है दिल में खामोशी अच्छी लगती है ————— रात होती है ख्वाबों में तो मायूसी अच्छी लगती है ————— गूंजती है जब बेचैनी तो खामोशी अच्छी लगती है —————-
किसी को मिलती है जन्नत की रौनक किसी के आशियाने में अँधेरा पसरा हुआ है खुदा से पूंछ्ना है मुझे
बसंत ऋतु में जब बहा बसंती ब्यार। गिरने लगी आसमान से सावन के फुहार।। कहीं दूरऽ से जब कोयलिया मधुर गीत सुनाए । दिल के बगिया में सैंकड़ों कलियां खिल जाए।। ए रिमझिम के नजारा […]
जंग- ए-आजादी के हमसफर अब काहे को मतभेद है। कूपहि भंग पड़ी है भैया यही भाव कचोट रहा यही दिल की खेद है।।
दो मित्रों का जोड़ा भैया अमर इतिहास बनाया था। एक थे ब्राह्मण एक मुस्लिम थे रिश्ता खास बनाया था।। जंग- ए-आजादी में कूद गए थे राम -लखन की जोड़ी बनकर। “सरफरोशी की तमन्ना “गाए फिरते […]
मेरे ह्रदय में स्पंदन होता है हे राम! अब हर दम होंठो पर बस नाम तुम्हारा होता है
‘ज’कार जन्मविच्छेद करे ‘प’कार करे पाप का नाश। नाम जपो रे राम जपो सब सुलभ सदा साकेत निवास।।
घर से तू बाहर न निकलो जनाब हर गली में कोरोना का पहरा है। हाथ धोओ रे साबुन से बारम्बार हर गली में कोरोना का पहरा है।। नाक मूँह पर लगाओ हमेशा नकाब हर गली […]
लहर उठी वैराग्य की , अरु हरिदर्शन की भूख। धन सम्पति सब लुटा दिए कुटिया तक दी फूक।।
नेता से अभिनेता अच्छा ये मेरा मन भी कहता है। कभी हँसाए कभी रुलाए कभी उपदेशक बन कहता है। नेता से अभिनेता अच्छा है ये मेरा मन भी कहता है।। कभी दिलाए गुस्सा और कभी […]
आओ साथी करे हम कोरोना पे कड़ाई। यही से होगी हमारी भारत की लड़ाई ।। वार पे वार हम सहते गए,अब न सहेंगे । चलो चलें हम करे पीड़ितों की भलाई।। यही बनता है हमारा […]
दुनिया रुपी रंगमंच पे नाटक निश-दिन होता है। कभी प्यार है, कभी पछाड़ है। नाचे गाए कोई कोई हँसता रोता है।। नाटक के इस पृष्टभूमि पर सकल जीव अभिनेता है। कोई बना किसान यहाँ पर […]
दर्द के रिश्ते यूँ ही नहीं निभाये जाते मुस्कुराना पड़ता है ——— गहरे जख्म खाने के बाद दिल में लिपटे रहते हैं गम झूँठी हँसी दिखानी पड़ती है —————— चलना पड़ता है राह पर ठोकर […]
ये दर्द के रिश्ते यूँ ही नहीं निभाये जाते मुस्कुराना पड़ता है गहरे जख्म खाने के बाद
Sitting on the swing by the window Looking over the giant tree outside, I pause to think and wonder At how this new phase unfolds in life… It’s been a crazy month lately And they […]
घर के भीतर बैठे हैं हम डरकर नहीं कोरोना से। रहे स्वस्थ समाज हमारा बचकर आज कोरोना से।। पीठ नहीं हम दिखा रहे हैं लड़कर जीतेंगे कोरोना से। ‘विनयचंद ‘रहे देश हमारा सुखी सुरक्षित नित […]
धवल चन्द्र सम उसका चेहरा । कनक कपोल पे एक तील का पहरा। अरुण अधर अनार कली सम।। भृकुटी कमान नजर शर शोभित । कुहू कुम्भ लट घुर्मित केशपाश से शोभित। भधुर बोल बड़ मधुर […]
एहसास की पावन चौकी पर भाव की मूरत बैठी है ———————- शब्द अलंकार से सुसज्जित हैं और कल्पना की आराधना होती है ———————— इसी को कहते हैं काव्य सौन्दर्य जो हर कवि की आत्मा कहलाती […]
,,,,,,क्या कम है (कविता) Independence day कौन कहता है हमारे वतन में, प्रेम की गंगा नहीं बहती है। हिमालय से गंगा, यमुना, और सरस्वती के मिलन ए क्या कम है? यही वो देश है जो […]
आँचल में अपने छुपाकर वो, दुनियाँ की बुराइयों से बचाती है सारे जहान की खुशियाँ अपने दामन में लिपटाकर हमपर लुटाती है वही आँचल लाज़ बचाता है, और उसी से पसीना सुखाती है स्त्री की […]
दशरथ के घर जन्मे राम पर आनन्द अवध में छाया है। केवल कौशल्या कैकेयी नाहीं हर घर हर नर मंगल गाया है ।। हुआ विवाह राम का जब से घर-घर मधुर सुमंगल छाया है। वनवासी […]
प्रभु का नाम जप ले प्राणी। तेरी दो दिन की जिन्दगानी।। एक दिन बीता खाते-पीते। रात भी बीती सोते-सोते।। नया सबेरा पाकर भैया क्यों करता रे आनाकानी।। तेरी़़़़ दिन दुपहरिया साँझ बीतते ना देर लगेगी […]
महामारी से मुक्ति प्रार्थना —————————— हे दुख भंजन दयानिधे कृपासिंधु . .. भव पार करें। करो कृपा हम दीनजनों पर, दूर करो सब कष्ट धरा पर। करे तपस्या सब जन घर पर, बंद पड़े प्रभु […]
हास्य ब्यंग्य कविता- थक गया मै | बढ़ गया लोकडाउन घर मे पक गया मै | माँजकर बरतन झाड़ू पोंछा थक गया मै | करता था कभी श्रीमती जी के आराम को | करके रोज […]
भोजपुरी गीत- करा ना नादानी पिया | माना मोर कहनवा करा ना नादानी पिया | घरवे मे रहा मती जा खरिहानी पिया | फइलल बा कोरोनावा सगरो नगरिया | मती जा बहरिया रहा हरदम पजरिया […]
माथे पे आज पसीना के बूंद आया है क्यों। जो कल तक थे हमारे आज अजनबी है क्यों।। दामन – ए – यार का जब साथ पकड़ा था मैने। हल्की मुस्कान से हम पर वार […]
ये कैसा वक्त है शताब्दियों सा लगता है हर पल मुझको घड़ी की सुइयां स्थिर ही रहती हैं ना जाने क्यूँ
मधुमास बिगत माधव बड़ आयल। नवल हास परिहास जग छायल।। फूल खिलल बगिया में देखू आमक गाछी टिकुला सॅ छायल। कटहर कोचरल जामुन मजरल गन्ध सुगन्ध चहुदिश छायल।। “पिया -पिया “जौं पपिहा बाजय झणिक उठल […]
मापदंड ———- कुंठित हृदय से उपजती विषाक्त बेल, लील जाती है कितनी ही हरी कोपले। उनको कुचलती कोपलों से निकली, दर्दनाक चीखों का शोर दब जाता है फाइलों तले। उस हत्या के साथ पूरे परिवार […]
ग़ज़ल ——- दूरियां ,नज़दीकियां, खुशफहमियां तेरे साथ में, हम मिले ना थे कभी पर बह गए जज्बात में। 1. मौसमै अंदाज था कुछ खास था उस रात में, थे गिरफ्त में इश्क के उस बेवजह […]
गजल- कोरोना शैतान क्यो है | काफिया – आन ,रदीफ़ – क्यो है खौफ मे कोरोना से इंसान क्यो है | घर अपने आदमी परेशान क्यो है | हुआ लॉक डाउन लॉक घर मे रहो […]
भोजपुरी गीत- अब कोरोनवा ना | मिले कईसे आई सजनी तोर भवनवा ना | डर लागे हमके पड़ल पीछे अब कोरोनवा ना | ढेर दिन बीतल तोहसे मिले नाही पवली | तरस गईले नैना तोहके […]
शिखर धरा, गगन, मृदुल पवन हिले तेरी एक हूंक से, जो तू चले बिना रुके मंजिलें दिखे तुझे। समुंद्र भी दे रास्ता जो तू कहे जब गूंज से, चमकीला हो ये आसमान पसीने की तेरी […]
युवा पीढ़ी रचो इतिहास लिखो शौर्य की अद्भुत कहानी देश को भय मुक्त करो। भ्रष्टाचार, दुर्दभ्य दानवता के खिलाफ नए युग का सृजन करो। आओ युवा पीढ़ी! नारियों को अत्याचारों से मुक्त करो। हे राष्ट्र […]
उम्मीद की किरण जगमग आई है, आज फिर याद मुझे तेरी ओर लाई है। जमाने की तपिश, जिम्मेदारियों का बोझ.. सहते -सहते दबी राख सुगबुगाई है। तपती मनस्थली पर स्नेह की बूंदे छलकी, सूखी धरती […]
कोई पी के जहर भी अमर हो गया। किसी का जीवन भी यारों जहर हो गया।। मौत आई थी जिसकी़ वो मर न सका। मौत की सब गलियाँ और शहर हो गया।।
फिक्र कहाँ उस रस्सी को जान किसी के जाने को। गले लगाया जिसने उसको मरने को छोड़ दिया दीवाने को।।
एक कांच का टुकड़ा दर्पण बनकर सबका रूप दिखता है। बना कांच एक चूड़ियाँ जग में बनिताओं का दिल हर्षाता है।। ये कांच कांच है ‘विनयचंद ‘सुन कांच पे आंच न आवे । साहित्य जगत […]
आँखों में अश्क लिए शायद,मेरे कब्र पे आ गया है कोई। मैं नहीं था बे-वफा शायद, यही गीत गुनगुना रहा है कोई।।
स्त्री ऐसी वाणी है हर भाग में पायी जाती है ये तो ऐसा गीत है जो हर राग में गाई जाती है पिता और भाई के संरक्षण में रहती है संरक्षण में वह रहती है,शासन […]
नजर तुम्हारी देख रही है मुझको चिलमन के पार से। एक दीदार तो दे दो जानम मैं भी तो देखूँ तुझको प्यार से।।
क्रोध न करना कभी उन पर जो सत्य दिखाने वाले हैं। नाजुक कांच है दर्पण में जो शक्ल दिखाने वाले हैं ।।
हटा दो चिलमन बीच से नजरे दीदार माँगती है। नफरत न करना मुझ से ये रूह प्यार माँगती है।।
खुद से रुबरू होने के लिए दर्पण की जरुरत होती है। खुदा से रुबरू होने के लिए समर्पण की जरुरत होती है।।
जो इंसानियत की दुश्मन बन जाये, वो जमाअत कैसी। खुदा ने भी लानत भेजी होगी, इबादत की ये बात कैसी। खुद की नहीं ना सही, अपनों की तो परवाह कर लेते, जिन्हें अपनों की परवाह […]
हिन्दी कविता- समय गिन रहा | लोक डाउन हुआ है हर कोई समय गिन रहा है | खत्म कब होगा बाहर का बनवास | हर कोई समय गिन रहा है | खाये जा रहा डर […]
भोजपुरी गीत – तनी कोरोनवा से बचके | चला गोरी तनी कोरोनावा से बचके | जइहा बजरिया रईहा लोगवा से हट के | चला गोरी तनी कोरोनावा से बचके | जइबु जे बज़रिआ कोरोनवा लगी […]
तमाम जिंदगी बिता दी मैंने तुम्हें मनाने में और कितना वक्त लगेगा तुमको लौट आने में
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