जब बात नहीं होती तुमसे शब्द मेरे खो जाते हैं कलम की कूँची टूट जाती कागज उड़ उड़ जाते हैं जो तुम संग लाई थी अपने खुशियां वह खो जाती हैं बिन तेरे भाव मेरे […]

एक दिन धरा की गोद में डाला मैंने अंकुरित बीज जैसे ईश्वर बांधे खग को मातृत्व ताबीज उस बीज को जल दे देती हो जान कभी अनजान फिर उस नन्हे शिशु में देखो दो दिन […]

मुझे कैद गुलामी पसंद नहीं मुझे उड़ने दो मुझे उड़ना है इस अंबर की रणभूमि में मुझे खोल के पंख उतरना है मेरा जीता जीवन मृत् हो गया घर की चार लकीरों में मैं उड़ […]

मुझे कैद गुलामी पसंद नहीं मुझे उड़ने दो मुझे उड़ना है इस अंबर की रणभूमि में मुझे खोल के पंख उतरना है मेरा जीता जीवन मृत् हो गया घर की चार लकीरों में मैं उड़ […]

जहां झर झर झर झर झरने की आवाज की गुंजन होती हो जहां धरती निज संतानों को यूं देख मनोरंजित होते हो मेरा जी करता वहां जाऊं मैं कहीं काश वह बस जाऊं मैं बैठूं […]

जब महाशक्ति का स्वागत होगा ढोल नगाड़े करेंगे गुंजन विशिष्ट परिधान में होगा मनोरंजन तिलक लगाकर करेंगे अभिनंदन सब कुछ परंपरागत होगा जब महाशक्ति का स्वागत होगा सुरक्षाबलों का होगा घेरा मीडिया का भी लगेगा […]

बैरी नहीं वो होता, जो आईना दिखाता। एक सच्चा मित्र ही तो, गलतियां बताता। जब मित्र गलती पर हो, दे घर से वो निकाला, कोई हल बिना निकाले, परिवार ही हिला दे। फिर पूछता फिरे […]

जब कर्मपथ की मंज़िल को दो साथ चले दो साथ बढ़े कोई जीत गया कोई हार गया जो जीत गया उसने नाम बुलंद किया हारा उसने भी तो खूब प्रबंध किया त्याग समर्पण के बाद […]

धरती और दरख़्त ———————- तेज आंधी से झुका वह विशाल दरख़्त, धरती को बांहों में भरने को आतुर था। धरती देख झुकाव मतवाली थी प्रेम वर्षा को वो भी तो आतुर थी। तपती देह पर […]

इस लेखनी से लेख लिखे तो श्याम रचे मतवाले इस लेखनी से पल में धराधर अपने केस सवारे इस लेखनी ने लिख दिखाइ रामायण की गाथा भारत के इतिहास को इस बिन कोई जान न […]

सृजन और विनाश ———————– आदि शक्ति ने किया हम सब का सृजन, हम विध्वंस की ओर क्यों मुड़ते गए? हरी-भरी सुंदर थी वसुंधरा, उसे राख के ढेर में बदलते गए। धरती ने दिया बहुत कुछ […]

सृजन और विनाश ———————– आदि शक्ति ने किया हम सब का सृजन, हम विध्वंस की ओर क्यों मुड़ते गए? हरी-भरी सुंदर थी वसुंधरा, उसे राख के ढेर में बदलते गए। धरती ने दिया बहुत कुछ […]

मुझमे थोड़ी सी अच्छाई, शायद बाकी है इस लिए ठोकरे राहों में बेसुमार है मुझमे तेरी पड़छआई शायद बाकी है की आज भी टिका हुआ हूं जीवन के इस चक्रव्यू फसते जा रहा हूँ कौन […]

जीवन को बिताता है बेमतलब के दिखावे में तो स्वार्थ के बिछड़ने कहीं तेरी किस्मत सोएगी जब कर्म ब्रह्म लेखनी एक माला में पिरोए गी तो आडंबर की होड़ डोर थाम के ना होएगी कर […]

देख के जी कांप उठा पुलवामा की राह को बोलो कौन थाम पाएँ बेसहारा बाह को त्रिनेत्र खोल बैठे तेरी ओछी चाल पे भाग काल नाचता है तेरे अब कपाल पे ब्याह नहीं मेरा देश […]

लहरों से टकराने का दावा करने वाले अक्सर अपने ही आंसुओं में डूब जाते हैं हमने जो पूछा क्यों गम शुदा हो तुम तो हम से ही जाने क्यों रूठ जाते हैं

प्रेम की वैतरणी में बहना तुम्हारे साथ, एक अद्भुत एहसास। जान डाल दी हो जैसे मिट्टी की गुड़िया में किसी जादूगर ने, बना दिया उसे सिंड्रेला फिर एक बार। निमिषा सिंघल

निशा अंधेरी काली घाटी है तेरे काले केश केशो में फिर हीम के मोती खूब सजाया वेश ओस का चुनर ओढ़ के बैठे लोचन घुंघट डाला कलानरेश ने आके रची है ये पर्वत की बाला […]

कितना सरल है, सच को स्वीकार कर जीवन में विलय कर लेना संकोच ,कुंठा और अवसाद को खुद से दूर कर लेना जिनके लिए तुम अपने हो वो हर हाल में तुम्हारे ही रहेंगे, कह […]

हमने उम्रे गुज़ार दी तेरे इंतेज़ार पर तुझे आती है क्या याद कभी मेरे प्यार पर हमने फासले मिटा तेरे ऐतबार पर पर तुझसे एक कदम साथ चला ना गया

गुल -ए-गुलाब कहता है इतना हमसे ओ प्रीतम मजार -ए-शहीद पर चढ़ा देना। खुशबूओं से,सराबोर कर दूँगा तुझको जरा मेरा भी मान बढ़ा देना।।

वह तो रोज़ की तरह ही नींद से जागा था, लेकिन देखा कि उसके द्वारा रात में बिछाये गए शतरंज के सारे मोहरे सवेरे उजाला होते ही अपने आप चल रहे हैं, उन सभी की […]

आइये प्रपोज़ करें अनंत ब्रह्माण्डों तक फैले हुए अपने ही ईश्वर को। जो जनक है प्रेम का। आइये प्रपोज़ करें अपनी ही आकाशगंगा को। जिसकी संरचना में कहीं-न-कहीं हम सभी ढले हैं। आइये प्रपोज़ करें […]

जल कुकड़े हो क्या! गुम हो जाते हो भाप से। या सूखी धरती जिसे तलाश है बरखा की। या फिर भवरे हो,। जिसे फूल फूल मंडराना पसंद है पर जो भी हो हो तुम छलिया, […]

हमें नहीं पता तुम्हें नहीं पता, तू क्यों है लापता खुशनुमा लम्हा। क्यों सूख रहा है वह हरा दरख़्त, किसे मिलकर सींचा था पहली दफा। वो यादें गुमसुम है जहा बोली थी हमने प्यार की […]

जीवन की कड़वी सच्चाई एक माला चढ़ी तस्वीर में छिपी है कुछ समय पश्चात हो तस्वीर भी नहीं रहेगी। याद का क्या है याद तो आती जाती रहेगी, धूमिल हो जाएगी दूर जाती रेलगाड़ी की […]

रात चांदनी है आज, लेकिन उदास है, शायद मेरे दिल में किसी की याद का एहसास है। ये सर्द हवा ना जाने मेरे दिल में क्यूं चुभ रही है, शायद आज किसी को मेरी याद […]

झूठ बोलना प्यार में तुम्हारा, जैसी पूर्ण अधिकार था तुम्हारा। आंखों में तुम्हारे झूठ को पढ़ते चले गए, हंसते-हंसते तुम्हारे इश्क में फंसते चले गए। हठधर्मिता तुम्हारी स्वामित्वतता तुम्हारी, स्वीकारते गए, हर बात से तुम्हें […]

क्यों ना! क्षितिज के पार ….जाल डाल…. खींच ले वह आलौकिक नजारा, जहां बसे ग्रह नक्षत्रों का खेल …..बना देता हम सबको बेचारा। जब चाहा जिसे चाहा एक झटके में वो काटा!! डोर जिससे बंधा […]

वख्त की तेज़ धूप ने सब ज़ाहिर कर दिया है खरे सोने पर ऐसी बिखरी की उसकी चमक को काफ़ूर कर दिया है जब तक दाना डालते रहे चिड़िया उन्हें चुगती रही हुए जब हाथ […]

सुनहरी किरण जब मेरी खिड़कियों से झांकती हैं सीमेंट देती हूं पर्दे को मैं भी खिड़कियों के पट खोल के स्वागत है आपका कहती हूं रख देती है मेरे मुंह पर अपने अदृश्य हाथों को […]

करते हैं बहुत प्यार हम हिन्दुस्तान से अपने रहता है बहुत फक्र हिन्दुस्तान पर अपने इसकी एकता अखंडता पर हमको नाज़ है लहराता है तिरंगा हिन्दुस्तान पर अपने ।

गुजारिश करते हैं हम आज तुमसे एक मानोगे? लुटाओगे मुझ पर जान मेरी ही बात मानोगे। नही जाओगे तुम दूर अब गैरों की बाहों में सजाओगे नहीं सपनें तुम अब दूजी फिज़ाओं में । इस […]

भोजपुरी पारंपरिक होली 6 -दिल्ली मे उड़ेला अबीर | दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग | मोदी जी महनवा छप्पन इंची सिनवा | बदले देशवा के तकदीर | दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग | […]

भोजपुरी पारंपरिक होली 5-भंगिया पिये ना जा | भोला भंगिया पिये ना जा | कहे गौरा भोला भंगिया पिये ना जा | भोला भंगिया पिये ना जा | पीना जो होतो भोला लस्सी तू पिला […]

भोजपुरी पारंपरिक होली 4-कान्हा संग होली सखी खेलब ना कान्हा संग होरी | हरदम करे उ बलजोरी | जब हम जाई जमुना किनरवा | देले मोर मटकी के फोरी | सखी खेलब ना कान्हा संग […]

कभी -कभी तो आते हैं तुमसे मिलने! यूँ मुँह ना फेरो हमसे रूठे हो तो रूठे रहो नज़रें तो मिलाओ हमसे। इतना गुस्सा भी ठीक नहीं साहिब! यूँ मलाल लिये बैठे हो सज़ा देनी है […]

कभी -कभी तो आते हैं तुमसे मिलने! यूँ मुँह ना फेरो हमसे रूठे हो तो रूठे रहो नज़रें तो मिलाओ हमसे। इतना गुस्सा भी ठीक नहीं साहिब! यूँ मलाल लिये बैठे हो सज़ा देनी है […]