पहने सर पर नीली टोपी उछलता -कूदता आता है कभी इधर तो कभी उधर नाचता और नचाता है। भर अपने थैले में टॉफी बिस्कुट सबको लाता है हाथ मिलाकर बच्चों से एक जादू की झप्पी […]

बेवफाओं की कोई सूरत क्या होती है? नाखुदाओं की कोई मूरत क्या होती है? जब कौम की जागीरों में बँटा है आदमी, इंसानियत की कोई जरुरत क्या होती है? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

बेवफाओं की कोई सूरत क्या होती है? नाखुदाओं की कोई मूरत क्या होती है? जब कौम की जागीरों में बँटा है आदमी, इंसानियत की कोई जरुरत क्या होती है? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

बेवफाओं की कोई सूरत क्या होती है? नाखुदाओं की कोई मूरत क्या होती है? जब कौम की जागीरों में बँटा है आदमी, इंसानियत की कोई जरुरत क्या होती है? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

बेवफाओं की कोई सूरत क्या होती है? नाखुदाओं की कोई मूरत क्या होती है? जब कौम की जागीरों में बँटा है आदमी, इंसानियत की कोई जरुरत क्या होती है? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

बेवफाओं की कोई सूरत क्या होती है? नाखुदाओं की कोई मूरत क्या होती है? जब कौम की जागीरों में बँटा है आदमी, इंसानियत की कोई जरुरत क्या होती है? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मौत हासिल होती है इंसान के मरने पर! मिलता है अंधेरा उजालों के गुजरने पर! क्यों खौफ-ए-नाकामी है हर वक्त जेहन में? जब दर्द ही रहबर है खुशियों के मुकरने पर! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

चेहरे के हर भाव की जल्द ही कीमत लगने लगेगी, खामोशी, हंसी की दुकानों पर प्रदर्षनी लगने लगेगी, जेब खाली हो जायेगी सिर्फ भावों को सुनकर इनके, गहरी मगर ये मेरी बात सोंचो तो सच […]

तुम अक्सर आकर अपने मन की खुल के मुझसे कह लेती हो, धूप लगे जब तुमको मेरी छाया में तुम सो लेती हो, बहुत अकेला मैं भी सुनके चुप-चाप खड़ा रहा जाता हूँ, जब मुझको […]

अरे ,ओ जिन्दगी से निऱाश आदमी सुनो— सड़क पर भटकते हो क़्यो सुनो। कुछ तो कर्म करो—– अपने स्थिति को देखो कुछ तो शर्म करो।। कब –तक कोसते रहोगे,अपने भाग्य को, अंधकार से निकलने का […]

मेरा इस दुनिया मे कोई ना रहा , मै बेसहारा हो गया। जो मुझे रास्ते दिखा रहे थे , वही पराया हो गया।। कैसे चलुँ,—–कैसे चलूँ मै तो बेसहारा हो गया, ऐ जमाने ना हँसों […]

ज़माने से बेपरवाह रहती है दुनिया के दिखावे से अंजान है माँ तू ऐसी क्यों है जो मेरी खुशियों में अपनी खुशियाँ संजोए रहती है।। – मनीष

टूटते ख्वाबों के अफसाने बहुत से हैं! चाहत की शमा के परवाने बहुत से हैं! एक तू ही नहीं है आशिक पैमानों का, जामे‍‌-मयकशी के दीवाने बहुत से हैं! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

कितने मजबूर होकर यूँ हाथ फैलाते होंगे, भला किस तरह ये बच्चे सर झुकाते होंगे, उम्मीदों के जुगनू ही बस मंडराते होंगे, बड़ी मशक्कत से कहीं ये पेट भर पाते होंगे, तन पर चन्द कपड़े […]

कितने मजबूर होकर यूँ हाथ फैलाते होंगे, भला किस तरह ये बच्चे सर झुकाते होंगे, उम्मीदों के जुगनू ही बस मंडराते होंगे, बड़ी मशक्कत से कहीं ये पेट भर पाते होंगे, तन पर चन्द कपड़े […]

कब तक मै यूँ ख़ामोश रहूँगा, अब मुझे तू शब्दों में बयां हो जाने दे, कब तक मै राहों में यूँ भटकता रहूँगा, अब मुझे तू अपनी मन्ज़िल हो जाने दे, कब तक मैं यूँ […]

मित्रो , ईश्वर के आशीर्वाद से , आज मेरी रचना , एक बार फिर राष्ट्रीय अखबार “दैनिक वर्तमान ” मे प्रकशित हुई है जिससे मेरे साहित्यिक क्षेत्र को बल , संबल प्राप्त हुआ है। आपके […]

ज़िन्दगी जैसे शतरंज की बिसात हो गई, जिसने समझ ली उसकी जीत ना समझा जो उसकी मात हो गई, ज़िन्दगी जैसे…… बंट गए हैं चौंसठ खानों में हम कुछ इस तरह, जैसे खाने से हटते […]

हाथ में लेकर सीटी आता साइकिल पर होकर सवार एक डंडे पर ढेर से खिलौने जिसमे रहते उसके पास गली गली और सड़क सड़क बच्चों की खुशियाँ लाता है देख के बच्चे शोर मचाते खिलौने […]

हाथ में लेकर सीटी आता साइकिल पर होकर सवार एक डंडे पर ढेर से खिलौने जिसमे रहते उसके पास गली- गली और सड़क- सड़क बच्चों की खुशियाँ लाता है देख के बच्चे खुश शोर मचाते […]

दर–दर ठोकर खाया हूँ, जीवन से भी मै हारा हूँ। दे–दे सहारा —- तेरे पास मै आया हूँ।। नही मंजिल मिली नही किनारा,मुझे दे–दे सहारा, मेरा कोई नही ठिकाना है! मै हूँ बेसहारा– मुझे दे– […]

दर–दर ठोकर खाया हूँ, जीवन से भी मै हारा हूँ। दे–दे सहारा —- तेरे पास मै आया हूँ।। नही मंजिल मिली नही किनारा,मुझे दे–दे सहारा, मेरा कोई नही ठिकाना है! मै हूँ बेसहारा– मुझे दे– […]

भक्ति तुम बिन वैभव कहीं एक पल को रह न पाये, जबसे देखा तुमको मुझको कुछ और नज़र न आये, कितने दिन से बैठा था मैं कितने राज़ छुपाये, अब डरता हूँ कहीं आँखों से […]

तेरे कलाम में हर पहर पढ़ती रहती हूं तेरी हर नज्म में खुद को ढ़ूढती रहती हूं इक चाहत थी कि तुझसे किसी दिन मिलूं इसी ख्वाहिश में हर लम्हा गुजरती रहती हूं|

तेरी याद है दिल में दर्दे–तन्हाई सी! ख्वाहिशों की शक्ल में तैरती परछाई सी! चाहत हर पल गूँजती है मेरे सीने में, तेरी तमन्नाओं की जैसे शहनाई सी! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

पटना, छपरा दरभंगा तक सुख गया दाऱू का प्याला, हाजीपुर के पुल पर केले अब बेच रही मधुशाला। महफिल भी रूठ ग़यी , और नाच खत्म नागिन वाला। शांत– शांत अब लगे बराती—– जैसे लग […]

सुन ले पाकिस्तान, कश्मीर का ख्याल भी दिल मे मत लना। वरना जो भी दिये है,वो भी छीन लेगे पाकिस्तान।। अबकी बार कोई गलती मत करना कश्मीर पर वरना छीन लेगे—— १ अलतीत फोर्ट २ […]

क्यों कैद करते हो पंछियों को आज़ाद कर दो इनको सब आज इनको भी हक़ मिला हुआ है खुले आसमाँ में विचरण का जनाब गुलामी में जीना किसको पसंद है दे दो आज़ादी इनको भी […]