आज की नारी पड़ गयी भारी, कोई ना पार पाए ऐसी करती होशियारी। जीवन इसका WhatsApp पर व्यस्त रहता , चल जाए भाड़ मे दुनिया सारी। आज की नारी– फैशन की बात इससे ना पुछो […]

दुश्मनी ले, रहे हो बिना काम के!! ना तुम कुछ ले जा पाओगे, ना हम कुछ ले जा पायेगे।। केवल दो गज के कपड़े मेरे भी साथ जाएंगे, आपके साथ भी जाएंगे। दुनियादारी मुझे मालुम […]

कितनी भी धूप हो, कितनी भी ठण्ड हो काम पर अपने लगे ही रहते दिन हो या रात हो,सुबह हो शाम हो खेत पर हल को, चलाते ही रहते हर एक बीज को प्यार से […]

गर्मियों की छुट्टियाँ शुरू हुई हैं बच्चों में नई लहर दौड़ उठी है खेलेंगे -कूदेंगे अब दिन भर जमकर मस्ती और मस्ती खुलकर करेंगे दीदी भैया साथ गृह कार्य करेंगे विद्यालय से मिला कार्यकलाप करेंगे […]

कभी ठीक से अपने ही बिछाने पर सो भी तो नही सकते, ए ज़िन्दगी महसूस तो कर सकते है पर छू भी तो नही सकते काश अब ये भी समज ले कि कोशिश नही की थी हमने, कुछ भी […]

परिन्दा कैद से छूटा नही है छुडाने कोई भी आता नही है बहुत खामोश है दरिया के जैसे बहुत बेचैन है कहता नही है दिवाना बन गया है प्यार में वो वो लड़ता है मगर […]

छोड़कर सब कुछ यहीं पर एक दिन जाना है, लगा एक अजीब सा सदमा। आज तक जो किया कुछ ना हो सका अपना।। अगर यही हकीकत है,तो क्यो खुनी रात खेलते है,हम। तो क्यो खेत […]

आओ करीब तुम नूरानी रात हुई है! चाहत की फिर से दीवानी रात हुई है! तोड़कर जमाने की जंजीर-ए-रस्म को, आओ करीब तुम मस्तानी रात हुई है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

उल्झे हुए रास्तो से, मुझे अंजाम तक जाना हे, मंज़िल ना जाने कहा गुम हे, ना जाने किस राह गुज़र जाना हे.. मे थका हारा दर ब दर, पाओं मे भी चुभन सी हे, हाल […]

देख गुब्बारे वाले को जब बच्चे ने आवाज़ लगाई दिला दो एक गुब्बारा मुझको माँ से अपनी इच्छा जताई। देखो न माँ कितने प्यारे धूप में लगते चमकते सितारे लाल, गुलाबी, नीले ,पीले मन को […]

सबकी रातों में ख्वाबों की पहरेदारी रहती है, पर मेरी आँखों में खाली जिम्मेदारी रहती है, कहता हर शख्स है खुल कर दिल की अपने, पर मेरे चेहरे पे ठहरी सी दुनियाँदारी रहती है, सुना […]

डर के साये में खुद को दबाये बेटियाँ रहती हैं, बहुत कुछ है जो खुद ही छुपाये बेटियाँ रहती हैं, अपने को अपनों से पल-पल बचाये बेटियाँ रहती हैं, होठों को भला किस कदर सिलाए […]

आखरी उम्मीद थी वो भी टुट गई। तुझे से ही उम्मीद थी —- और तु ही हमको छोड़ गयी। एक आखरी उम्मीद थी वो भी टुट गई। मंजिल पर पहुँचना दुर की बात थी। पहले […]

तुमने उकटी है मेरी औकाद तुमने उकटी है मेरी औकाद तेरा भी कोई उकटे गा। अब मेरी बद्दुआएँ पीछे करेगी, हालत को कुछ एेसे बन जायेगे। अपनी बाल तु ऩोचेगी अपना सर खुद फोड़गी।। किस […]

संस्कारों के बीज यहाँ पर अक्सर बोये जाते हैं, सम्बंधों के वृक्षों पर नये पुष्प संजोये जाते हैं, मात-पिता, दादा-दादी और भाई बहन के नातों से, हर एक क्षण में खुशियों के कई रंग पिरोये […]

मिलने से पहले इतना मत घबराया करो, हर बात को यूँ मुझसे न बताया करो, देखना है गर उस खुदा की रहमत तो, सर ही नहीं दिल को भी तो झुकाया करो, चुप रहकर ही […]

मैने उसको, जब-जब देखा । सजते देखा, धजते देखा, संभलते देखा !! मैने उसको, गलियो मे सदियो से किसी का इंतजार करते देखा। मैने उसको जब– जब देखा हाथो मे पत्थर देखा।। ये जमीन तुने […]

अर्जियां लाया हूँ लिखकर चेहरे पर अपने, कलम को अपनी ज़रा विश्राम दिया है, झुकाया नहीं है आँखों को तेरे दर पर आज, पलकों को अपनी ज़रा आराम दिया है, छोड़ कर बैठा हूँ आज […]

मोबाइल की उपस्थिति में किताबों की अनुपस्थिति लग रही है, जिंदगी छोटे से गैजेट्स में डिजिटली कैद लग रही है।।  – राही (अंजाना)

हुआ बहुत अत्याचार —– अब हर घर से भगत सिह , सुखदेव निकलना चाहिए। रोज जो चेहरे बदलते है,लिबाजो कि तरह अब उसको फाँसी पर चढ़ाना चाहिए।। भगत, सुखदेव तुझ पर बहुत हुए अत्याचार, अब […]

मैं कैसे कह दूँ तुमसे प्यार नहीं रहा! तेरी गुफ्तगूं का इंतजार नहीं रहा! हर वक्त खिंचती हैं जब तेरी अदाऐं, मैं कैसे कह दूँ दिल बेकरार नहीं रहा! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तुम जो मुस्कुराती हो नजरें बदलकर! नीयत पिघल जाती है मेरी मचलकर! चाहत धधक जाती है जैसे जिगर में, हर बार जुस्तजू की आहों में ढलकर! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मैं कबतलक तेरा इंतजार करता रहूँ? मैं कबतलक तुम पर ऐतबार करता रहूँ? मुझे खौफ सताता है तेरी बेरुखी का, मैं कबतलक खुद को बेकरार करता रहूँ? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मैं कबतलक तेरा इंतजार करता रहूँ? मैं कबतलक तुम पर ऐतबार करता रहूँ? मुझे खौफ सताता है तेरी बेरुखी का, मैं कबतलक खुद को बेकरार करता रहूँ? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

एक मुक्तक श्री कलाम साहब के लिए – कोई उस खुदा को जाकर मेरा पैगाम दे दो , मेरे देश भारत को तुम उसका ईनाम दे दो ! मेरे मोला मेरे मालिक पर्वर्दीगार-ए-आलम , सारे […]

एक उम्मीद फिर हाथ से छुट गयी, देखते ही देखते एक और रिस्ता टुट गई। इस तरह तोड़ा है— मतलबी दुनिया मेरा दिल । अब जिन्दगी भी हमसे ऱूठ गयी।।

*“प्यार की निशानी “* ^^^^^^^^^^^^–^ गीतकार जानकीप्रसाद विवश मेरा हर शेर , तेरे प्यार की निशानी है। प्यार तेरा , मेरे जीवन की अमर कहानी है । मत समझ सिर्फ हँसी जिस्म से है प्यार […]

*दर्द से नाता* ******** गीतकार- जानकीप्रसाद विवश दर्द का जिंदगी से नाता है , बेहिसाबी से दर्द भी इसे निभाता है। न किसी को है , किसी की कभी कोई चिंता , दर्द की जिंदगी […]

जवाब… बस देती ही रही हूं जवाब… घर जाने से लेकर घर आने का जवाब… खाने से लेकर खाना बनाने का जवाब… बस देती ही रही हूं जवाब… चित्र से लेकर चरित्र का जवाब… सीता […]

ख़्वाबों से बाहर निकल के देखते हैं, चलो आज हकीकत से मिल के देखते हैं, बहुत दिन हुए अब छुपाये खुद को, चलो आज सबको रूबरू देखते हैं, बड़ी भीड़ है जहाँ तलक नज़र जाती […]

हर पल मेरी परवाह करते थकती क्यों तू न है, माँ मुझको इतना बतला दे तेरा भी क्या सपना है।।   चंदा मामा के किस्से कहकर कैसे हँसते-हँसते तू लोरियाँ सुनाती थी माँ मझको इतना […]

मेरे बातो पर उनको विश्वास नही होता, चाहे कुछ भी हम कर ले मेरे बातो पर उनको विश्वास नही होता।। एक पागल मै हूँ उन्हे हर पल याद करते हूँ पर वो कहती है,कि तेरे […]

यूं तो अरमानों के इरादे भी परेशान हैं, पानी की बूँदें भी आँखों की बारिश से हैरान हैं| पर जनाब हमारी गुस्ताखियों की भी हद नहीं होती, ऐसी केफ़ियत में अपनी ही परछाई में सुकून […]

हम जिंदगी में गम को कबतक सहेंगे? हम राह में काँटों पर कबतक चलेंगे? कदम तमन्नाओं के रुकते नहीं मगर, हम मुश्किले-सफ़र में कबतक रहेंगे? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मैं जी रहा हूँ तुमको पाने की आस लिए! मैं जी रहा हूँ सीने में तेरी प्यास लिए! यादें बंधी हुई हैं साँसों की डोर से, चाहत के रंगों में तेरा एहसास लिए! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

कुछ भी नहीं छुपाता हूँ मैं माँ को सब कुछ बताता हूँ, माँ मुझ पर प्यार लुटाती है मैं सब कुछ भूल जाता हूँ, मैं भूखा जब हो जाता हूँ माँ मुझको खूब खिलाती है, […]