माना के ज़हरीली ज़िन्दगी है मगर जिगर पाक रखते हैं, हम इन्सा नहीं जो दिल में कोई बात रखते हैं, यूँ तो गले लगाने की फितरत नहीं हमारी, मगर इरादे जो भी हो हम साफ़ […]
माना के ज़हरीली ज़िन्दगी है मगर जिगर पाक रखते हैं, हम इन्सा नहीं जो दिल में कोई बात रखते हैं, यूँ तो गले लगाने की फितरत नहीं हमारी, मगर इरादे जो भी हो हम साफ़ […]
किसी कलमकार की कलम के नखरे हजार देखो, कहीं बनाती किसी की ज़िन्दगी तो कहीं ये बिगाड़ देखो, किसी अस्त्र से कम नहीं है वजूद इसका, चाहे तो गिरा दे किसी के भी तख्तो ताज […]
यूँ तो हर एक नज़र को किसी का इंतज़ार है, किसे दिख जाये मन्ज़िल और कौन भटक जाए, कहना कुछ भी यहाँ दुशवार है, एक ही नज़र है फिर भीे पड़े हैं पर्दे हजार आँखों […]
माना के आँसूओ में वजन नहीं होता, पर एक भी जो छलक जाए तो मन हल्का हो जाता है।। – राही (अंजाना)
गुरु ज्ञान की पुस्तक हमको सही गलत का पाठ पढ़ाए, अन्धकार के पर्दे को नज़रों से सहज भाव से खोल दिखाए, जीवन एक जटिल पहेली जिसमें उलझे तो कोई सुलझ न पाए, पर गुरु मार्गदर्शक […]
तुम्हारे जाने से ज़िन्दगी उलझ सी गई है, तुम्हारे साथ में कुछ तो सुलझा सा था।। राही (अंजाना)
तुम्हारे जाने से ज़िन्दगी इतनी सी बदली हैं पहले मुस्कुराते थे..अकेले में भी अब सबके बीच हँसते हैं… – राजनंदिनी रावत
कभी सूनसान गली तो कभी खुले मैदान में पकड़ ली जाती है, तू क्यों कटी पतंग सी हर बार लूट ली जाती है, वो चील कौवों से नोचते कभी जकड़ लेते हैं तुझे, तू क्यों […]
कवि होना भी खुदा की रहमत का ही नमूना है वरना युं अपने दर्द को शब्दों में बयां कर पाना हर किसी के बस की बात नहीं।
पानी से भरी आखें लेकर मुझे घूरती ही रही शीशे के उस पार खड़ी लड़की उदास बहुत थी।
मकड़ी जैसे मत उलझो तुम गम के ताने बाने में, तितली जैसे रंग बिखेरो हँस कर इस ज़माने में..
मेरी आंखों में झाँक लो आकर जलते ख्वाब जो देखना चाहो।
तु आए और आकर लिपट जाए मुझसे उफ्फ ये मेरे महंगे ख्वाब
कितना खुश है वो मुझे भुलाकर ए खुदा मुझे भी उसके जैसा दिल दे दे….।
दौलत नहीं शोहरत नहीं न वाह वाह चाहिए कैसे हो कहां हो बस दो लफ्जों की परवाह चाहिए।।
जिन्दगी तेरी नराजगी से क्या होगा । ये मुस्कुराहट जिन्दगी का karzadar है।
तुम्हारे जाने से ज़िन्दगी उलझ सी गई है, तुम्हारे साथ में कुछ तो सुलझा सा था।। राही (अंजाना)
किसी कलमकार की कलम के नखरे हजार देखो, कहीं बनाती किसी की ज़िन्दगी तो कहीं ये बिगाड़ देखो, किसी अस्त्र से कम नहीं है वजूद इसका, चाहे तो गिरा दे किसी के भी तख्तो ताज […]
खामोशियाँ यूँही तो खामोश नहीं होती, कोई वजह तलाशो क्यों इनमें आवाज नहीं होती।। राही (अंजाना)
यूँ तो हल्की सी है ज़िन्दगी, वजन तो बस ख्वाइशों का है।। राही (अंजाना)
अँधेरे और रौशनी का कोई मलाल नहीं रखता, मैं ‘राही’ अपने दिल में कोई सवाल नहीं रखता।। राही (अंजाना)
गजल : कुमार अरविन्द जहां में चाहे गम हो या खुशी क्या | मेरे मा – बैन रंजिश दोस्ती क्या | खुदा मुझको यकीं खुद पे बहुत है | तो पंडित हो या चाहे मौलवी […]
यूं ही तुम ना आते सीने में ना चोरी मेरा दिल हो पाता ना कृष्ण मीठी रासलीला रचता ना इश्क का नाम यूं ही कोई जान पाता यूं ही ये दिल दीवाना ना होता काश […]
शाम हो गई तुम्हे खोजते माँ तुम कब आओगी जब आओगी घर तुम खाना तब ही तो मुझे खिलाओगी, रात भर न सो पाई करती रही तुम्हारा इंतजार सुबह होते ही बैठ द्वार निगाहें ढूंढ […]
कम्बख्त वो हमारे सामने बेवजह ही मुस्कुरा गऐ बेवजह ही हम उनकी बाहोँ में आ गऐ खबर न थी जमाने को इस नए चमन से रिश्ते की हम भी बेखबर जमाने से नैना लड़ाते चले […]
तलबगार है कई पर मतलब से मिलते हैं ये वो फूल हैं जो सिर्फ मतलबी मौसम में खिलते हैं रोक लगाती है दुनिया तमाम इन पर पर देखो मान ये इश्कबाज पक्के जो पाबंदियों में […]
काश भ्रष्टाचार न होता ,फिर भलों का दिल न रोता कानून ढंग से काम करता, काश भ्रष्टाचार न होता। लोकतंत्र भ्रष्ट न होता, रिश्वत का तो नाम न होता संसद ढंग से काम करता, काश […]
जो और कोई कह ना पाए कर ना पाए और कोई ऐसा जज्बा लिए संग में चलता है अकेला कोई। उसके पास अनूठी क्षमता और अनोखा ज्ञान है सदा ही कागज पर अपने रचता अलग […]
माँ तुम दिल में ठान लो कि मुझको दुनिया में लाओगी इस बार दुनिया कि मान कर मुझको नहीं मिटाओगी। क्या हक नहीं है मेरा माँ इस दुनिया में आने का क्या अरमान नहीं है […]
I TOLD UH GOD ONLY QUESTION ONE PLEASE TELL ME GOD WHAT IS THAT DAY HAPPEN WHY MY FATHER COME OUR HOME WHY HE LEFT MUMMA THAT DAY ALONE WHY THAT DAY I DON’T CRY […]
जमाने में रहे पर जमाने को खबर न थी ढिंढोरे की तुम्हारी आदत न थी अच्छे कामों का लेखा तुम्हारा व्यर्थ ही रह गया हमसे साथ तुम्हारा अनकहा सा कह गया जीतना ही सिखाया हारने […]
हर एक तनहा लम्हे में एक अर्थ ढूँढा करती थी| हर अँधेरी रुसवाई में गहरा अक्श ढूँढा करती थी | मैं मेरी परछाई में एक शख्स ढूँढा करती थी| मेरी मुझसे हुई जुदाई में कुछ […]
यूँ तो दिल उबल रहा है, शब्दों के उबाल से | और ये कम्बखत दिमाग कहता है, अपने ज़ज्बातों को संभाल ले |
वाह रे दुनिया ! मै चीखा–चिल्लया तेरी बातों से। “हाँ” मै चीख रहा हूँ,चिल्ला रहा हूँ,मेरा कोई औकाद नही किसी पर अवाज उठाने की! केवल जख्मों के छालों से सदा सुने है,सिसक -सिसक कर सोई […]
हमे तो मालुम था, पतझड़ मे पत्ते भी साथ छोड़ देते है,देखकर मेरी तबाही को अपनो भी साथ छोड़ देते है!! बस तु तो चलती हुई मुशाफीर थी- ये मतलबी दुनिया बाप को भी छोड़ […]
न जाने क्यों एक तन्हाई सी छा रही है, ज़िन्दगी एक कहानी सी बनती जा रही है। न जाने क्यों ये दिल खुद को अकेला पा रहा है , हकीकत से परे ही जा रहा […]
संघर्षों में जीवन की तू परिभाषा कहलाती है, रंग बिरंगी तितली सी तू इधर उधर मंडराती है, खुद को पल- पल उलझा कर तू हर मुश्किल सुलझाती है, खुली हवा में खोल के बाहें तू […]
अब मुझे मेरी जिन्दगी या श्मशान चाहिए!! गरीब हूँ मालिक मुझे मेरा सम्मान चाहिए । मै रोता रहता हूँ अमीर के अत्याचारो से,धिन जाती है मुझे अपने उपर हो रहे” मुझे समानता का अधिकार अपने […]
वस्ती की पुकार ———————————– डरावना–डरावना सी भय लगी इस वस्ती मे। चार–पाँच लफँगा हर मोड़ पर खड़ा इस वस्ती मे। कितना राज छुपाए डरा–डरा सा हूँ खादी पहने वाले के बच्चे बनकर लफँगा खड़े इस […]
गजल : कुमार अरविन्द नहीं तकदीर में जो मेरे क्यों फिर जुस्तजू करते | मेरी किस्मत में क्या है वो पता जाकर के यूं करते | रखी इज्जत हमेशा है जिसने अपना समझकर तो | […]
मुहँ लटकाए आख़िर तू क्यो बैठा है इस दुनिया में जो कुछ भी है पैसा है दुख देता है घर में बेटी का होना चोर -उचक्का हो लड़का पर अच्छा है कुछ भी हो औरत […]
मुहँ लटकाए आख़िर तू क्यो बैठा है इस दुनिया में जो कुछ भी है पैसा है दुख देता है घर में बेटी का होना चोर -उचक्का हो लड़का पर अच्छा है कुछ भी हो औरत […]
कुछ न कुछ टूटने का सिलसिला आज भी ज़ारी है इस दुनिया का डर प्यार पे आज भी भारी है।। टूटकर बिखरना, बिखरकर समिटना आज भी जारी है, पर पड़ जाए ना दरार इस बात […]
इतने हैं तेरे रूप के मैं सबको गिना नहीं पाउँगा, खोल कर रख दी पल्लू की हर एक गाँठ तुमने, मैं तुम्हारे प्रेम का किस्सा सबको सुना नहीं पाउँगा, डर कर छिप जाता था अक्सर […]
जो ऊँगली पकड़ चलाती है, जो हर दम प्यार लुटाती है, जो हमको सुलाने की खातिर, खुद भूखी ही सो जाती है, खेल खिलौने कपड़े लत्ते जो हमको दिलवाती है, खुद एक ही साड़ी में […]
न तुम हो न हम हैं फिर भी वो एहसास हर दम है, इशारों से बातें करना, मंद-मंद न चाह के भी मुस्कुराना, तेरी हर एक हलचल को मुझे तेरे करीब लाना, जिंदगी आज कुछ […]
अब तो संभलो…! —————————- स्वार्थ के हर रंग मेें रंग गया है दिल…..देखो और मुस्कुराकर कह रहें हैं— ये दुनियाँ कितनी रंगीन है……!! “मतलब” के रस्से से अब बँध गया है तन…….देखो प्यार के वो […]
गजल : कुमार अरविन्द मुहब्बत की गली कूचों में क्या है | इधर देखो मेरी आँखों में क्या है | बड़ा ही जोर है उन के जुबां में | नही तो जोर जंजीरों में क्या […]
जख्म जिन्दा है तेरी याद भी आ जाती है! बेकरार पल में तेरी आरजूू सताती है! मैं तन्हा हो गया हूँ गमें-अंजाम से मगर, ख्वाबों की चुभन से मेरी आँख भर आती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
मैं उसकी तलाश में हुँ जिसकी तलाश ” मैं ” हुँ… – राजनंदिनी रावत
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