“माँ” कितनी बार धुप मे खुन को जलाई तुने “माँ” मेरी लिए चंद रोटियाँ लाने मे। कितनी बार तुने खुशी बेच ली “माँ” तुने मुझे सुलाने मे।। कितनी बार दुसरे से लड़ गई ” माँ […]

असतील तुझ्या साठी हे फक्त दोन शब्द.. पण मी तुला मानलंय माझं आयुष्य, तुझं नाव जरी कोणाकडून ऐकलं, तर चेहऱ्यावर येत माझ्या हास्य… तू आहेस माझ्यासाठी खूप खास, करतोस तू माझ्या प्रत्येक श्वासात वास.. वाटतंय […]

सुबह के चार जैसे ही बजते हैं आँखें उसकी खुल जाती हैं इधर से उधर,उधर से इधर साफ़ सफाई से शुरुआत है करती खाना बना के सबको रखती बच्चों को विद्यालय छोड़ती नौकरी को तैयार […]

आई तुझ्यासाठी मी काय लिहू, कसे लिहू आणि किती लिहू, तुझ्या महतीसाठी शब्दच अपुरे आहेत, तुझ्या समोर सगळे जगच फिके आहे ।। आई तुझ्याबद्दल बोलायला मला, शब्दच उरणार नाहीत, आणि तुझे उपकार फेडायला मला हजारो […]

आई तुझ्यासाठी मी काय लिहू, आणि किती लिहू, तुझ्या महितीसाठी शब्दच अपुरे आहेत, तुझ्यासमोर सगळे जगच फिके आहे।। आई तुझ्या बद्दल बोलायला मला शब्दच उरणार नाहीत. आणि तुझे उपकार फेडायला मला हजारो जन्म पुरणार नाहीत।। […]

मैं जागता क्यों रहता हूँ तन्हा रातों में? नींद उड़ जाती है ख्वाहिशे-मुलाकातों में! सीने में नजरबंद हैं वस्ल़ की यादें, बेखुदी में रहता हूँ तेरे ख्यालातों में! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मैं जागता क्यों रहता हूँ तन्हा रातों में? नींद उड़ जाती है ख्वाहिशे-मुलाकातों में! सीने में नजरबंद हैं वस्ल़ की यादें, बेखुदी में रहता हूँ तेरे ख्यालातों में! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

दिल की बातो पर उनको एतबार नहीं होता। चाहे कुछ भी करले उन्हें हमसे प्यार नहीं होता।। एक हम हैं उन्हें याद हर पल करते रहते हैं। पर वो कहते बात करने का समय यार […]

रुलाता भी नहीं और खुश रहने भी नही देता। ख्वाबो मे आने का वादा कर सोने नही देता।। बड़े बे अदब और बेरहम है हमसफर मेरा। दर्द देता है हंस कर पर मरहम नहीं देता।। […]

मिली मुझे खुशियाँ (“रहस्य:) देवरिया मेरे होठों कि हॅशी तेरे आनें से है, मिली मुझे खुशीयाॅ तेरे बहाने से है,, “””””””” मेरे लबों कि मुस्कुराने की वजह , बे पनाह तेरा प्यार मुझपे लूटाने से […]

एक और ग़लत आंखों में ख्वाबो को सजाने की ” रहस्य ” देवरिया आंखों मे ख्वाबो को सजाने की हिमाकत ना करते। काश दिल में किसी को बसाने की हिम्मत ना करते।। %%%%%%% कबूल कहा […]

मित्रो , ईश्वर के आशीर्वाद से , आज मेरी रचना , एक बार फिर राष्ट्रीय अखबार “दैनिक वर्तमान ” मे प्रकशित हुई है जिससे मेरे साहित्यिक क्षेत्र को बल , संबल प्राप्त हुआ है। आपके […]

टूट गया हूँ मैं गमे-अंजाम देखकर! टूट गया हूँ मैं गमे-नाकाम देखकर! रो रही है चाहत राहे-तन्हाई में, तेरी बेवफाई का पैगाम देखकर! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

टूट गया हूँ मैं गमे-अंजाम देखकर! टूट गया हूँ मैं गमे-नाकाम देखकर! रो रही है चाहत राहे-तन्हाई में, तेरी बेवफाई का पैगाम देखकर! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

टूट गया हूँ मैं गमे-अंजाम देखकर! टूट गया हूँ मैं गमे-नाकाम देखकर! रो रही है चाहत राहे-तन्हाई में, तेरी बेवफाई का पैगाम देखकर! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

चल पड़ी उस राह पर,जहां काटें बहुत थे| माँ, तेरी फूल जैसी गोदी से उतरकर ये काटें बहुत चुभ रहे थे| चलते हुए एक ऐसा काटा चुभा था, कि ज़ख्म से खून आज भी निकल […]

तेरी जिन्दगी में हरपल कमी सी है! अश्क की आँखों में हरपल नमी सी है! दौर है कायम अभी तेरी यादों का, दर्द की ख्यालों में हरपल जमीं सी है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

आज मेरे पास सावन की मातृ दिवस की लिंक आई । फिर क्या इसे देखकर मुझे भी सनक आई । फिर मैने भी कलम उठाई । और पुरी महेनत से एक कविता बनाई । फिर […]

मेरे सितमगर फिर से कोई वादा न करो! मेरे दिल़ को तोड़ने का इरादा न करो! क्यों इम्तिहान लेते हो कई बार सब्र का? चाहत की बेचैनी को और ज्यादा न करो! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

जब पास तेरे कुछ ना हो उम्मीद किसी से कुछ ना हो अमावस की रात हो काला घाना अंधकार हो तब खुद को तू सवारना हिम्मत कभी ना हारना। जब मायूसियो की आंधी हो मुश्किलो […]

जब पास तेरे कुछ ना हो उम्मीद किसी से कुछ ना हो अमावस की रात हो काला घाना अंधकार हो तब खुद को तू सवारना हिम्मत कभी ना हारना। जब मायूसियो की आंधी हो मुश्किलो […]

जब पास तेरे कुछ ना हो उम्मीद किसी से कुछ ना हो अमावस की रात हो काला घाना अंधकार हो तब खुद को तू सवारना हिम्मत कभी ना हारना। जब मायूसियो की आंधी हो मुश्किलो […]

बहुत याद आते हैं वो दिन जब हम भी स्कूल जाते थे पीठ पर बस्ता, गले में बोतल खेलते- कूदते पहुँचते थे। कक्षा की वो प्रिय अध्यापिका प्यार से हमको पढ़ाती थीं जब भी कुछ […]

संघर्षों में जीवन की तू परिभाषा कहलाती है, रंग बिरंगी तितली सी तू इधर उधर मंडराती है, खुद को पल- पल उलझा कर तू हर मुश्किल सुलझाती है, खुली हवा में खोल के बाहें तू […]

एक युवती जब माँ बनती है, ममता के धागों से बच्चे का भविष्य बुनती है, ज़ज्बात रंग -बिरंगे उसके, बच्चे के रंग में ढलते हैं, दिल के तारों से हो झंकृत, लोरी की हीं गूंज […]

एक माँ ही तो है जिसने मुझसे और मैंने उससे बिना एक दूजे को देखे बेपनाह प्रेम और साथ निभाया है। एक माँ ही तो है जिसने मेरे बिना कुछ बोले मेरी हर एक बात […]

लाख अपने गिर्द हिफाजत की लकीरें खीचूँ, एक भी उन में नहीं “माँ ” तेरी दुआओं जैसी, लाख अपने को छिपाऊँ कितने ही पर्दों में, एक भी उन में नहीं “माँ” तेरे आँचल जैसा, लाख […]

कितनी दफ़ा उँगलियाँ अपनी जला दी तूने… ‘माँ’ मेरे लिए चंद, रोटियाँ फुलाने में ! कितनी दफ़ा रातें गवां दी, “माँ” तूने मुझे सुलाने में, कितनी दफ़ा आँचल भिगा दिया, “माँ” तूने मुझे चुपाने में, […]

जो मन की बंजर धरती में फूल खिलाये तुम, टूटी मेरी हिम्मत को जो फिर से जागाये तुम, बिखरे मेरे मन की चादर जो फिर से लगाये तुम, उजड़ी हुई बगिया में भी जो सुगन्ध […]

मन ******** मन की बंजर धरती पर फूल उगाए कौन मेरी सोई हिम्मत को,फिर से जगाए कौन बिखरा-बिखरा हैं मन मेरा टूटा टूटा जाए कल्पनाओ में मेरे फिर आये कौन जहाँ खो गई सुंगध सुमनों […]

रेत की जरूरत रेगिस्तान को होती ! सितारो की जरूरत आसमान को होती!!! आप हमे भुल जा कोई गम नही , मै लोहा हूँ मुझे सोना की जरूरत नही होती। मुझे तो मालुम था जब […]

रेत की जरूरत रेगिस्तान को होती ! सितारो की जरूरत आसमान को होती!!! आप हमे भुल जा कोई गम नही , मै लोहा हूँ मुझे सोना की जरूरत नही होती। मुझे तो मालुम था जब […]

खामोशी को समेटकर कुछ अल्फाजो का पिटारा लाया हूं, उस ख़ुदा से भी बढ़कर है वो जिसके बारे में आपको कुछ बताने आया हूं। उसकी हिदायतों से मैने जिंदगी के हर रंग में रंगना सीखा […]

लपेटकर कलाई में धागा जो रिश्ता बांधती है, जब कोई सुनता नहीं मेरी तो वो कहना मानती है, सर पर तो रखता हूँ मैं हाथ उसके प्यार से, मगर एक वो है जो मेरे लिए […]