Jo log mujhe samhte hai, Unhe mujhse safai chahiye nahi…. Or jo log mujhe samjhte hi nahi, Unhe safai dene ka koi fayda bhi nahi….
Jo log mujhe samhte hai, Unhe mujhse safai chahiye nahi…. Or jo log mujhe samjhte hi nahi, Unhe safai dene ka koi fayda bhi nahi….
सिर्फ एक तसवीर है , एक चेहरा है जानता नहीं हूँ कि कौन थी वो , पर आँखों में नूर देख यकीन से कहता हूँ कि जो भी थी , जैसी भी थी अच्छी थी वो , […]
बदलते रहते हैं ज़ुबा लोग पल दो पल में कई बार, मगर एक चेहरा बदलने में मुकम्मल वक्त लगता है, छुपाने से छिप जाते हैं राज़ सिरहाने में कई बार, मगर झूठ से पर्दे उठ […]
कोख़ से मैं कितना बचती रही, दुनिया में ला कर तुमने ठुकराया, शर्म मुझे है ऊपरवाले की इस रचना पर जहाँ जिस्म के भूखों को मैंने कदम-कदम पे पाया।। -मनीष
मुझको तेरी चाहते-नजर चाहिए! दिल में तमन्नाओं की लहर चाहिए! झिलमिलाते ख्वाब हों जुगनू की तरह, मुझको यादों का वही शहर चाहिए! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
किनारे पर भी रहूँ तो लहर डुबाने को आ जाती है, बीच समन्दर में जाने का हौंसला हर बार तोड़ जाती है, दिखाने को बढ़ता हूँ जब भी तैरने का हुनर, समन्दर की फिर एक […]
वो परछाईं सा साथ चलता रहा है, कभी दिखता तो कभी छिपता रहा है, दिन के उजाले की शायद समझ है उसको, तभी अंधेरे में ही अक्सर मिलता रहा है, कभी चाँद सा घटता तो […]
उसकी आबरु को यहाँ छीन लिया जाता हैं, जिस देश मे”बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ” का नारा दिया जाता हैं, हर छोटे मसले पर यहाँ बड़े फैसले होते हैं, बस अहम बात को दबा दिया जाता हैं, […]
भंवरों को नहीं भाता मकरंद तितलियां करती क्रंदन फिजा जो रुत बदल रही है अब हर कली धूप में जल रही है |
मैं कैसे कहूँ कि तेरा दीवाना नहीं रहा? मैं कैसे कहूँ कि तेरा परवाना नहीं रहा? मुझे खींचती है मधुशाला तेरे नयनों की, मैं कैसे कहूँ कि आशिके-पैमाना नहीं रहा? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
✍?(गीताज) ?✍ ———$—— ✍ विषाक्त है आज परिवेश देख। आक्रोश मे सुप्त आवेश देख।। कण कण मे है गुस्सा आलम मे नव क्रोध है धरती कुम्हला रही क्षण मे चढा अवरोध है पल बना है […]
✍?(गीताज ) ?✍ ——-$——- ✍ विष मय है आज देख परिवेश। आक्रोश मे घुला है सुप्त आवेश।। कण कण मे गुस्सा आलम मे नव क्रोध धरती है कुम्हलाई पल बना है अबोध क्षण बना है […]
भैय्या माँ के आशीर्वाद से आज मेरी रचना राष्ट्रीय समाचार पत्र “दैनिक वर्तमान ” मे प्रकाशित हुई है । जिससे मेरे साहित्यिक क्षेत्र को बल संबल प्राप्त हुआ है । आपके आशीर्वाद का आकांक्षी आपका-: […]
#जालियाँवाला_बाग़ #13अप्रैल कुछ दाग़ लगे जो इतिहास पे, वो दर्द बहुत दे जाते हैं, किस्से जब उसके सामने आते रूह तब-तब फिर काँप सी जाती है रोती है आत्मा मेरी भी जब जिक्र उस मंजर […]
लिकं पर मेरी ग़ज़ल सुने डॉ सुजीत जी की आवाज़ में और चैनल सब्सक्राइब जरूर करे । दोस्तो में लिकं शेयर करना ना भूले । आपका लकी निमेष
बचपन से ही जीवन के रंग में, मैं धीरे धीरे ढ़ल लेती थी, छोटे छोटे पैरों से अक्सर, मैं खुद अपने दम पर चल लेती थी, रिश्तों की एक मोटी चादर को, मैं साँझ सवेरे […]
जो करता रहा इंतज़ार पल पल, आज हर पल का वो हिसाब माँगता है, दिल के रिश्तों की कीमत और प्यार का खिताब माँगता हैं, कितना बदल गया है वो, हर बात पर अब ईनाम […]
प्रचंड ज्वार लाओ नव चेतना जगाओ इतिहास नव रचो तुम नित नव कुसुम खिलाओ तुम हो अखंड दीपक बुझने की बात छोड़ो इतिहास के रचयिता इतिहास फिर से मोड़ो
आसमान में पतंग, यारों का कोई यार नहीं दिखता, आज के रिश्तों में वो गहरा कोई प्यार नहीं दिखता, मिलते हैं ख़्वाबों में आकर चेहरे अंजाने अक्सर, मगर हकीकत में चेहरा कोई क्यों साफ़ नहीं […]
✍? ( अंदाज ) ?✍ —–$—‘ ✍ न हताश रख न उदास रख जिंदगी मे बस तू आस रख प्रतिकूलता से न तू डर कभी हौसला जीवन मे खास रख असफता पल है निखार का […]
चुप्पियाँ कहती हैं कितना बोलता हूँ मैं, सपने कहते है कितना जागता हूँ मैं, रास्ते कहते हैं कितना ठहरता हूँ मैं, लम्हें कहते हैं कितना सिमटता हूँ मैं, चादर कहती है कितना लिपटता हूँ मैं, […]
✍?(अंदाज)?✍ —–$—– ✍ जिंदगी मे व्यवहार जिंदा रखिए जिंदगी मे सुसंस्कार जिंदा रखिए रूठना मनाना क्रम है जीवन का रूठकर भी नेह धार जिंदा रखिए सच्चे प्रेम की परिभाषा यही है नेह का श्रद्धा आपार […]
गुजरती जाती है जिंदगी चुपके से लम्हो में छुपकर बहुत ढूढता हूं इसे, मगर कभी मिलती ही नहीं
बंद होकर भी आँखें कुछ बोल जाती हैं! राह तमन्नाओं की कुछ खोल जाती हैं! रोशनी जल जाती है यादों की शक्ल में, दर्द की लहरें जेहन में डोल जाती हैं! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
जख्म दबा – कर मुश्काता हूं | चुप रहकर मैं चिल्लाता हूं | मेरी बातें खुल न जाये | बातों से ‘ मैं बहकाता हूं | घर में ‘ आग लगा मत देना | पानी […]
मेरी शामें-तन्हाई न खाली जाएगी! मेरी जुबां पे फिर से आह डाली जाएगी! सोहबत बुरी है मेरी दिलजलों से साकी, मयखानों से गम की राह निकाली जाएगी! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
इक फरियाद थी मेरे दिल की आरजू थी इक दबी दबी सी सब अधूरी ही रह जायेंगी कह कर गया था वो अभी
तुम मेरी जिन्दगी से यादों को ले लो! तुम मेरे दर्द की फरियादों को ले लो! मैं कब तलक सहता रहूँ आहे-तमन्ना? तुम मेरे ख्यालों से इरादों को ले लो! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
हुआ हूँ ख़ाक यहां रह गया ‘ धुआं मेरा | किसी में दम है तो रोको ये कारवां मेरा | सभी ये कहते है अक्सर ज़मीन मेरी है | कोई ये क्यों नही कहता है […]
**मत करो देर”** मत करो देर , झटपट पाट दो , दिल की दरारों को । जमाना क्या कहेगा ,समझ़ो, जमाने के इशारों को । जिदों का यह अड़ियली रुख ,बहुत ज्यादा, नहीं अच्छा , […]
हमने चाहतों को सजाना छोड़ दिया तेरे जाते ही जमाना छोड़ दिया क्यों हम टूटते ही चले जा रहे हैं लगता है उसने बनाना छोड़ दिया नींद भी हमें अब कम आती है ख्वाबों ने […]
है अभी तूफान गर मेरी सफलता के पथ पर पर अब नहीं रुक सकता मैं जो हो चुका हूँ अग्रसर हूँ पथिक ऐसा जो नहीं रुक सकता ऐसे हारकर अंधेरी रात है तो क्या हुआ […]
अँधेरे और रौशनी के बीच का फर्क मिटाना चाहती हूँ, माँ की कोख से निकल बाहर मैं आना चाहती हूँ, जो समझते है बोझ मैं उनको जगाना चाहती हूँ, कन्धे से कन्धा मिलाकर अब दिखाना […]
सारा का सारा सागर हो , फिर भी , प्यास अधूरी । अगर भाग्य में प्यास लिखी , यह.किस्मत की मजबूरी। जानकी प्रसाद विवश
“”***जगत् का कल्याण हो “** *************** हे मात भवानी ,जग कल्याणी, भव का रूप सँवारो । भक्त जनों को, दैहिक दैविक, भौतिक तापों से उद्धारो। जब कृपा सभी पर बरसाती, सारे संकट मिट जाते । […]
कच्ची मिट्टी के जैसी मै धीरे धीरे धँसती हूँ मै लडकी हूँ इस आँगन की तब ही इतनी सस्ती हूँ लोग लगाएगें बोली मेरी बडे सलीके से लोग तमाशा देखेगें कि मै कितने में […]
तेरी आँखों के बिस्तर पर अपने प्यार की चादर बिछा दूँ क्या? तेरे ख़्वाबों के तकिये के सिरहाने मैं सर टिका लूँ क्या? कर दूँ मैं मेरे दिल के जज़्बात तेरे नाम सारे, दे इजाज़त […]
सर्दी गर्मी या वर्षा हो, चाहे अमावस रात हो हैं अडिग हर तूफानों में, चाहे पौष की ठंडी रात हो खड़े रहते हैं सरहद पर, चाहे गोली की बौछार हो मौत से होता है मिलन […]
✍?(अंदाज) ?✍ ——-$—— ✍ विकराल बन तू महाकाल बन मिसाल बन तू बेमिसाल बन अनंत अकूत अद्भुत साहस धर प्रचंड प्रबल प्रतिरुप विशाल बन बुराईया मिटा हटा कुरूप रीतियां संरक्षक सुसंस्कृती का ढाल बन सभ्यता […]
सोचता हूँ आज तुमसे मुलाकात कर लूँ! रात की तन्हाई में तुमसे बात कर लूँ! तेज कर लो तुम फिर से तीर-ए-नज़र को, जख्मों को सह लेने की करामात कर लूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
Hanju paa vich kalam de… Main eh shabad likhe ne lokan bhane geet hone…. main te dard likhe ne….
He did not raise his hands He did not push me back He did not come closer to me He did not touch my body Trust me, He did nothing abusive- Physically Yet, he managed […]
Walk around Walk onto all the corners of round Life is beautiful Just don’t bother who’s around Don’t think of beauty Instead, see the beauty Life will bring you everything Or it’s already given to […]
प्यार की कैद से रिहाई रव करे न कभी । इश्क की रिहाई से ,मौत भली होती है । – जानकी प्रसाद ‘विवश’
“दरारें दिल की” ******** दरारें दो दिलोंकी दिख न जायें, दुनिया वालों को। प्यार से पाट लो, कहीं प्यार न बदनाम हो जाए ।
मेरी जिंदगी गमों से डर पाएगी क्या? दिल में ख्वाहिश गैऱ की कर पाएगी क्या? सब्र अभी जिन्दा है जख्मों को सहने का, वस्ल से पहले तमन्ना मर पाएगी क्या? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तेरी यादों के कदम रुकते नहीं कभी! तेरी जुल्फों के सितम रुकते नहीं कभी! रोशनी उम्मीदों की जलती है हरदम, तेरी चाहत के वहम रुकते नहीं कभी! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
with every step i take u held me back I blamed you but that stopped me from failure with every words I said against u u remained silent with every step I take when I […]
आप जैसे, प्यारे मित्रों से जीवन सुहाना होता है। न चाह कर भी, जीवन जीने का बहाना होता है। जानकी प्रसाद विवश
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