✍?(अंदाज) ? —–($)—- ✍ दुःख मे भी मुस्कुराना सीखिए गम मे भी खिलखिलाना सीखिए उलझने आये चाहे जितने भी रंज मे भी मचल जाना सीखिए संताप है सब प्रारब्ध कर्मो का यह समझ सब्र लाना […]

✍?(अंदाज ) ?✍ —–($)—- ✍ हौसला बुलंद रखो धीर मन मे आयेगी बहार जरूर चमन मे नैराश्य को सदा ध्वस्त करो मेहनत संवारो हमेशा तन मे सर्वोच्चता सिध्द सव॔ श्रेष्ठ करो उत्साह रखो पल-पल यौवन […]

अभय गान अपने वाणी का मै स्वर आज सुनाता हूँ ले समसीर लेखनी की मै रण नवगीत सुनाता हूँ माँ वीणा पाणी के चरणो मे मै शीश झुकाता हूँ माँ रणचंडी के झंकृत की मै […]

‘गीत विधा ‘के लिए समर्पित मध्यप्रदेश की साहित्यिक, साँस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था “सृजक संसद ” के तत्वावधान में ,आयोजित काव्योत्सव में सुप्रतिष्ठित गीतकार जानकी प्रसाद विवश का हिंदी साहित्य में गीत विधा मे विशेष योगदान […]

“**भेद खोल दिया”** ^^^^^^^^^^^^^ भेद पायल ने दिल का खोल दिया , घुघरुओं ने भी क्या क्या बोल .दिया । बेखुदी बेसुधी तन मन की, सारी लाँघ गई , प्यार ने जिंदगी को , प्यारा […]

तेरी यादों के कदम रुकते नहीं कभी! तेरी जुल्फों के सितम रुकते नहीं कभी! रोशनी उम्मीदों की जलती है हरदम, तेरी चाहत के वहम रुकते नहीं कभी! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

बन्द पिंजरे से उड़ जाने का अरमान लिए बैठे हैं, कुछ परिंदे अपनी आँखों में आसमान लिए बैठे हैं, बनाये थे जो कभी रिश्ते इस ज़ालिम ज़माने से, आज उसी की बनाई सलाखों में नाकाम […]

✍? (अंदाज ) ?✍ ——-($)—— ✍ विद्रूपता का सव॔ विनाश करो कण -कण मे दृढ विश्वास भरो शौर्यशिलता का प्रतीक तुम बुद्धि मे विवेक गुण खास धरो चिंतन करो स्वास्थ्य मंथन करो सुखद सम्भाव रहे […]

खुद ही से खुद ही के परिचय की तलाश में, लोग भटकते हैं दरबदर कस्तूरी की तलाश में, यूँ तो तय हैं सभी किरदार कहानी के मगर, हर मोड़ पर बदलते हैं चेहरे नए चेहरे […]

सिर्फ़ अपनी झूठी शान दिखाते हैं लोग दिल छोटा रखते हैं इमारत बडी बनाते हैं लोग नफ़रत दिल मे है प्यार जताते है लोग अपने सच से हैं बेख़बर ओरो को आईना दिखाते हैं लोग […]

मैं जब कभी शाम की तन्हाइयों में चलता हूँ! मैं अपने ख्यालों की खामोशियों में ढलता हूँ! जब जिंदगी जलती है हालात की ज्वाला से, मैं वक्त की दीवारों पर बर्फ सा पिघलता हूँ! मुक्तककार- […]

मुझे यकीन है की इक रोज़ तेरा भी सवेरा होगा, अंधेरो का कोई साया ना होगा! इक रोज़ तेरा भी सब कुछ होगा, कुछ ना होने को कुछ ना होगा! इक रोज़ चाहा है जैसा […]

तेरे आ जाने से फिर बहार आ गयी है! हरतरफ तेरी खुशबू खुशगवार आ गयी है! वीरान था आलम मेरी तमन्नाओं का, मेरी जिन्दगी फिर से एक बार आ गयी है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मिल जायेगी ताबीर मेरे ख्वाबों की एक दिन, या ख्वाब बिखर जायें कुछ कह नहीं सकता। बह जाउं समंदर में तिनके की तरहं या फ़िर, मिल जाये मुझे साहिल कुछ कह नहीं सकता। इस पार […]

✍? (अंदाज )?✍ ✍ नव पल परिवेश का अहवान हो अंतर्मन मे नैतिक उत्थान हो जीवन है जग मे एक भीषण युद्ध विजय भाव का मन मे उफान हो निज लक्ष्य मिले हो सबका भला […]

✍? (अंदाज ) ?✍ ——($)—– ✍ बिषमताओ से टकराना जरूरी है संघर्ष के जल से नहाना जरूरी है जीवन है गतिमान लय का रूप जिंदगी मे संवर जाना जरूरी है प्रतिकूलता है वक्त का इम्तहान […]

गजल सबको रस्ता दिखा रहा हूं मैं | साथ ‘ मिट्टी उड़ा रहा हूं मैं | इन दरख्तों में अब भी जिंदा हूं | अपना साया मिटा रहा हूं मैं | मुझको लाकर लिटा गए […]

हमें आप जब कभी याद आने लगते हैं! हमें दर्द ख्वाहिशों के सताने लगते हैं! यूँ पास आ जाते हो मेरी निगाहों में, हमें ख्वाब गुफ्तगूं के जलाने लगते हैं! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

कौन है किसी का हमदर्द इस जमाने में? कैद ख्वाहिशें हैं हालात के तहखाने में! किसी को कहीं खौफ है हर वक्त उजालों से, कोई मश़गूल है ख्वाबों को जलाने में! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

//ग़ज़ल// जवां धडकनो को धड़कने दो यारों। जरा आशिकी औऱ बढ़ने दो यारों।१ महकता रहे गुल चमन प्यार का ही, फि़जा रुत सुहानी बहकने दो यारों ।२ करें प्यार इतना …समन्दर से गहरा, मुहब्बत जरा […]

गजल है चाह मिलूं उससे जो अक्सर नहीं मिलता | दीवार घरों में है मगर घर नहीं मिलता | ये आप भी देखें है कि बस मुझको भरम है | हर शख़्स परेशान है खुलकर […]

✍?अंदाज ?✍ ——-($)—— ✍ आलस्य न प्रमाद धर तनाव न अवसाद धर ऊमंग रख नस-नस मे उत्साह का स्वाद रख तरुणाई की बेला है जीत भाव आगाध रख संघर्ष से घबरा नही तरंगित शंखनाद रख […]

डूबती कश्तियों के सहारे बैठ कर क्या होगा, समन्दर के इतने किनारे बैठ कर क्या होगा, तैरना है तो लहरों के बीच जाना ही होगा, यूँ डर के दायरे में सिमट कर क्या होगा।। ~ […]

अपनी पलकों को इतना मत झपकाया कर, तू मेरे दिल को इतना मत धड़काया कर, हर बात तेरी किसी ज़ुबां की मोहताज तो नहीं, तू चुप रहकर भी अपने एहसास मुझे बताया कर, हवाओं को […]

✍? अर्जुन ?✍ ✍ अ– अन्याय /अनैतिकता विरोधी न्याय नैतिकता संपोषक ।। र– रक्षक मानवीय संवेदना सव॔धर्म समभाव संरक्षक ।। जु — जुझारू कम॔शील न्यायिक मानवता समरसता घोषक।। न– नमनीय जीवन चरित्र बनाके परमार्थ का […]

✍ ? गजल ?✍ ——-($)——- ✍ रक्त से सनी धरती लाल देख चहुंओर हाहाकार हाल देख समरसता जल रही धूं धूं कर सद्भावना है बदहाल देख हिंसा आतंक का है जोर प्रबल छल-कपट का रुप […]

अनुभव की राहों पर चलकर खुद मैंने भी देखा है, अपनों को अपनों से छलते खुद मैंने भी देखा है, आसमान को धरती से मिलते खुद मैंने भी देखा है, ख़्वाबों को यूँ पूरी रात […]

दफन होने से पहले, एक बार ये काम करके देखना! जो जुस्तजू हो, जीने की तो मुझपर भी मरकर देखना! आदत जो ना हो शिकायत करने की तो पास मेरे बैठकर देखना! चाहत जो ना […]

हर घड़ी तेरा तलबगार हूँ कबसे! तेरे इश्क में गिरफ्तार हूँ कबसे! अब कोई खौफ नहीं है अंजाम का, वक्ते-सितम के लिए तैयार हूँ कबसे! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

शायद मेरे गम की कभी रात आखिरी हो! मेरी तन्हाई से मुलाकात आखिरी हो! यूँ कबतलक चुभती रहेगी तेरी जुस्तजू? तेरी यादों से कभी तो बात आखिरी हो! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

सितम के दौर में सभी यार भूल जाते हैं! राह-ए-वफा को वफादार भूल जाते हैं! जब करवटें लेती है तस्वीर-ए-जिंदगी, उम्र भर किसी का इंतजार भूल जाते हैं! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

✍? गजल ?✍ ✍ तू ही हैअर्जुन आवाज सुन परिवेश का दर्दे साज सुन छटपटा रही धरती देख तू माहौल का क्रंदन आज सुन तेरे शौर्य मे बंधा है वर्तमान नव नीति का रम्य नाज […]