जब कभी तुम मेरी यादों में आते हो! धूप सा ख्यालों को हरबार जलाते हो! घुल जाती हैं साँसें चाहत के रंग में, चाँद की शकल में सामने आ जाते हो! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
जब कभी तुम मेरी यादों में आते हो! धूप सा ख्यालों को हरबार जलाते हो! घुल जाती हैं साँसें चाहत के रंग में, चाँद की शकल में सामने आ जाते हो! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
बाबुषा कोहली के साथ एक शाम बात ये 2017 की थी मैं साहित्य की साइटें खोज रहा था गूगल को खूब टटोल रहा था मिली मुझे फिर इसमें सफलता अच्छी रचनाओं का था उसमें छत्ता […]
आपकी ख्बाहिसों को पूरा करना जानता है दिल, चले आओ सजा लें हम किसी दिन, स्वप्न की महफिल । जानते हैं सभी, सपनों को इक दिन, टूटना पड़ता, टूटता तन, टूटता मन, छूट जाती है, […]
“**प्रातः अभिवादन “** प्यारे मित्रो , सपरिवारसहर्ष फागुनी सवेरे की उमंगों से भरे हर पल की शुभकामनाएँ स्वीकार करें । सविनय आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश,
es kaach ke ashiyane main dar pathar ka nahin pratibimb ka hain mukhotte ki aar main chipa chehra mera hain ya kisi aur ka hain zindagi ki hodh main pagla chala kis aud logon ne […]
“**जिन्दगी के तजुर्बे”** ************ जिंदगी के तजुर्बे सताते बहुत हैं , हँसाते बहुत हैं , रुलाते बहुत हैं । कभी हों अकेले , हाँ बिल्कुल अकेले, तजुर्बे साथ मन से निभाते बहुत हैं । *********^^^^^^^^************ […]
“**प्रातः अभिवादन “** *********** मित्रतामय जगत सारा , मित्रता ही महकती है । गुलाबों की तरह हर पल दुख के शूलों के संग रहती। निभा कर साथ, सुख दुख में , मित्र के सुख दुख […]
तेरी ख्वाहिश में हम क्या से क्या हो गये कभी अपने थे हम, अब बैगाने हो गये
नानकुन डेरा नानकुन डेरा , दू कोस के घेरा………. I दिन गनवा जिनगी के , सपना लाख हजार परगेस काबर फांदा म , जीयत तैं सरकार मोर मोर गठियावय , असल परय बदरा सुख्खा म […]
**छू पाना आसमां को “** ************* छू पाना आसमां को , माना जरा कठिन है । छू जाना दिलों का तो , आसान बहुत होता । विश्वास किसी को भी हो पाए नहीं इस पर […]
हर शख्स जमाने में बदल जाता है! वक्त की तस्वीरों में ढल जाता है! उम्मीद मंजिलों की होती है मगर, गमों की आग से ख्वाब जल जाता है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
*फागुनी सवेरे का अभिनन्दन “* ^^^^^^^^^^^^^^^^-^^^^-^ मित्रता का महकता रहे चंदन , मित्रता का मन करे वंदन. । अमर रहें मित्रता कोष मे , जग करे मित्रता अभिनन्दन । जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो , […]
“* सुवह को नमन “* **********प्यार के गीत गाती ,वसंती सुवह को नमन ।गंध बिखरा रही है ,सुगंधी मित्रता का चमन ।जानकी प्रसाद विवशपरम प्रिय मित्रो ,प्यार की लाली बिखेरतेमधुर प्रभात का प्यार भरा अभिवादनसपरिवारसहर्ष […]
*मन थिरक उठो…”* *********** कभी पुराने नहीं रहेंगे ये रसभरे , सुरीले गीत । सदा नयापन। देंगे मन को , यह है इन गीतों की रीत। आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश
चिरागों की बात मत करो उनका काम जलना है जब तन्हा मैं होता हूँ मेरे साथ जलते है जब साथ होती हो तुम मेरे हमें देख ये सारी रात जलते है बे बात जलते है […]
जिंदा की ललकार का वल कहाँ? मृत्यु का आवाहन करते हों? आत्ममंथन कर स्वयं विचार करो? नारी सम्मान में कितने शीष कटते है? इतियास पन्नो पर आहाकार करते हो? मन चंचल मे क्या क्या उमडता […]
**मोह रही मन”** मोह रही मन सभी के फागुनी बयार । शनैः शनेः उभर रहा है सृष्टि का निखार । धडकनें सुवह की सरगमें सुहावनी। भावनाएँ रंगभरी हुईं लुभावनी । कामनाओं पर चढ़ा छटा काअब […]
देख कर खामोश है, शहर मेरा. इतनी भी क्यां गिला तेरा. जब छोड़ कर आये मंजिल तेरी. सब चाह रहे दिल जवां मेरा. बड़े नाजुकाना संबंध मेरे मौकिल के. ऐसे ही नही दिल लगाना तेरा. […]
मैंने सारे जवाब जो तुझे ख़त किये है. दिल के फरमान काग़ज़ी किये है. बहोत उदास तेरी चाहतो का शोहबर इन दिनो. हमनें अपनी फरमाईश जो कियें है। शौहदा अवध लिखे भी कैसे शहर बदनाम […]
मुखौटे सजाये फिर रहे हो आजकल. दिल में जख्म़ लिये जिये जा रहे हो. हर किसी ने ओढ़ रक्खा मतलबी नकाब. एक दुशरे को दर्द दिये जा रहे है। न मंसूबा मेरी जवां हसरतें मुल्तवी […]
बड़े सलीके से मुखौटे के पीछे वो अपना चेहरा छुपा लेता है, अपनों की हंसी की खातिर वो अपना दर्द भुला लेता है, कितना मुश्किल है किरदार उस गरीब का यारों, जो गरीबी की एक […]
Kiya h aik asl antr insaan or asli janwr me Iska bodh krata h hme mukhota. M ho sktisali, blwan M ho hr cheej me bda or too h chota Yhi to h asli mukhota […]
Do trh ke hote hn mukhote Aik ko phnkr khud ko dikhate h bdda Orr Dusre ko phnkr kuch khud hi bn jate hn chote In mukhoto ka istemal hota h hr jgha Fir chahe […]
Scchai ko chupata h mukhota Boorai ka jhnda fhrata h mukhota Asliyt iske samne dikhai ni deti Or jhoot ka to surkhcha kbchh hota h mukhota Isse phnne se bn jate h log duniya ki […]
जब एक दिन तुम बिना बताये दूर कही मुझसे चली जाओगी वापस फिर से आओगी क्या वापस फिर से आओगी क्या मैं नाराज था तुमसे उस पल मुझे मनाने वाला कोई नही था अब फिर […]
सागर लहरें आग पानी जीवन की बस यही कहानी, ये जो है झीनी चादर जिंदगानी हमने- तुमने मिल बुनी है, रेशे-रेशे में घुली है तेरे-मेरे जज़्बातों की जवानी। सागर लहरें आग पानी जीवन की बस […]
जो मस्तियों का दौर था वो आज नहीं है! अब जिन्दगी में शौक का मिजाज नहीं है! टुकड़ों में नजर आती हैं वस्ल की रातें, अब जुस्तजू में जोश का अंदाज नहीं है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
परिस्थियों के एक जाले में बचपन बुना दिखता है, लकड़ी के फट्टे जैसा ये जीवन घुना दिखता है, लेखनी पकड़ने वाले हाथों का किस्सा ऐसा, मानो हर क्षण खुशियों का ईंटों से चुना दिखता है।। […]
दिल मे क्या दर्द है बताऊं क्या बोलो सहारा दोगे दिखाऊँ क्या।। आंखों में सन्नाटा नही ये आग है बोलो बुझाओगे करीब आऊं क्या।। तन्हाइयां बसी है मेरी दुनिया मे घंटियां बजाओगे लगवाऊं क्या।। होठों […]
सादर नमन ‘सावन’ २/२/२०१८ शीर्षक- ‘मुखौटा’ ———————————————– चहरे पर चहरे का खेल है, सूरत सीरत से बेमेल है, कोई हमको नहीं भाता, किसी को हम नहीं भाते, जाहिर सी बात है साहेब, मुखौटे बदलने के […]
नानकुन डेरा नानकुन डेरा , दू कोस के घेरा………. I दिन गनवा जिनगी के , सपना लाख हजार परगेस काबर फांदा म , जीयत तैं सरकार मोर मोर गठियावय , असल परय बदरा सुख्खा म […]
कोन गुनह के सजा म कोन गुनह के सजा म , जेमा आज धंधागेंव मय | रिस्ता नत्ता जाने कोन , बंधन म बंधागेंव मय || कोन घड़ी कोन पल रिहिस , जेमा हाँथ ले […]
मन के दर्पण पर कुछ प्रतिबिम्ब सा छा गया कुछ कहा नही उसने पर फिर भी कुछ कह गया जैसे भोर में कोई नया पुष्प खिल गया हलचल सी हुई फिर हृदय के कोने में […]
**माधवी – सवेरे”** ********* सुप्रभात माधवी-सवेरे का मन से अभिनन्दन , सुप्रभात, मंगलमय मित्रों का वन्दन । प्राची की लाली की टेर है सुहानी , रजनी की कालिमा का थमता स्पंदन। ^^^^^*** जानकी प्रसाद विवश […]
ਸਮਾਂ ਬਦਲ ਰਿਹਾ ਹੈਂ, ਲੋਕ ਬਦਲ ਰਹੇ ਨੇ। ਸੱਚ ਆਖਾ, ਸਭ ਦੇ ਸੌਂਕ ਬਦਲ ਰਹੇ ਨੇ। ਚੰਦ, ਸੂਰਜ ਤਾਂ ਓਹੀ ਜਾਪਦੇ ਬਸ ਮਨੁੱਖ ਹੀ ਬਦਲ ਗਏ ਨੇ। ਧਰਮ ਤਾਂ ਬਸ ਦਿਖਾਵਾ ਲਗਦਾ ਅੱਜ ਧਰਮੀ ਲੋਕ […]
तुम निश्चित ही सम्मान की हकदार होती पद्मावती तुम निश्चित ही सम्मान की हकदार होती पद्मावती बशर्ते तुमने सीता और अहिल्या की बजाय द्रौपदी का अनुसरण किया होता रानी झांसी की तरह लड़ा होता माना […]
सब मुखौटा है लगाए फिर रहे और सच को सब छिपाए फिर रहे एक वो है कुछ बताता ही नही एक हम है सब बताए फिर रहे लोग पैसो के लिये है बावले और रिश्तो […]
बोल दू ! जो बातें दबी है इस दिल में बोल दू! जो साँसे महसूस होने लगी है। मोड़ दू! इन नगमों का रुख तेरी तरफ। जैसे कड़ी धूप में पिघलती बर्फ के पानी मे […]
हाथों की लकीरें बनाकर भूल बैठा है, शायद खुदा मुझसे रूठ के बैठा है, कहानी में मेरा किरदार ‘गरीब’ लिखकर, वो मिट्टी से मेरा जीवन जोड़ बैठा है॥ राही (अंजाना)
बदल गया है दुनियाँ अब,यहां पैसे वालों का बोलबाला है, पहले रुतबा ज्ञानी का था,अब रुतबा बेईमानी का है!! सब कुछ पैसा ही है,हर जगह यही पाठ पढ़ाई जाती है, इंसान दूर हो रहे एक […]
आज अपने गम को मिटाने निकल पड़ा हूँ! आज तेरी याद को भुलाने निकल पड़ा हूँ! जाग उठी हैं रौनकें शामे–मयकदों की, आज लबों की प्यास बुझाने निकल पड़ा हूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
इक मुखौटा है जिसे लगा कर रखता हूं जमाने से खुद को छुपा कर रखता हूं दुनिया को सच सुनने की आदत नहीं सच्चाई को दिल में दबा कर रखता हूै बस रोना आता है […]
छोटे हैं मगर ये बड़ी बात कह रहे हैं, दो रोटी को तरसते ये हालात कह रहे हैं, छोड़ने को तैयार नहीं एक दूजे को अकेला, हाथों में डाले ये हाथ कह रहे हैं, ये […]
Kho jaunga khi m aik din Bo jaunga kuch to m aik din Hounga na jane kha m So jaunga khin m aik din. Pta to h ki kiya hdd h meri, Pr dr h […]
नक़ली चैहरो के नक़ली शहर में घूम रहे लिए नक़ली मुखौटा, मन में राम बगल में छुरी ,राम राम की माला जपता मुखौटा। दुनिया की भीड़ में शामिल हों, ईमानदारी की रस्में भूला, हर लम्हा […]
“* भावना-सागर”* ********* भावनाओं से बँधा संसार है , भावना के बिना , झूठा प्यार है । भावनाओं में अमर विश्वास है , भावना की तरी , बेड़ा पार है । जानकी प्रसाद विवश प्यारे […]
आज हवा भी जरा सी नम हो गयी है! गमे–जुदाई भी बेरहम हो गयी है! धड़कनों में उठ रही है दर्द की लहर, आँखों में नींद भी कुछ कम हो गयी है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
प्राण से प्यारे गणतंत्र, पल पल कोटि कोटि प्रणाम। “**फूली नहीं समाती,** छब्बीस जनवरी। खुशियों के गीत गाती छब्बीस जनवरी । गांधी भगत बिस्मिल , आजाद बोस की, कुर्बानियाँ सुनाती , छब्बीस जनवरी । रक्षा […]
कभी लफ़्जों में ढल जाती हूं कभी आखों में पिघल जाती हूं मैं तो तेरी खुशबू हूं हर तरफ़ बिखर जाती हूं
Muskurahat thi unk chehre pe, Or kajal bhi bigad rha tha, Unki aankho ka. #hemmu’s #collection
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.