तिरंगे के नीचे शान्ती के घोष में, मिशाले जलाली खूब हमनें!! मान मर्यादा स्वाभिमान का आवाहन, हाथो में बंदूके तलवारें उठाना हमकों!! इतियास दुहरा रहा गजनी की चाल, फिर से वगदादी दुहरा रहा हैं !! […]

जिंदा की ललकार का वल कहाँ? मृत्यु का आवाहन करते हों? आत्ममंथन कर स्वयं विचार करो? नारी सम्मान में कितने शीष कटते है? इतियास पन्नो पर आहाकार करते हो? मन चंचल मे क्या क्या उमडता […]