=============================== वो जो तेरी यादों का समंदर कभी सूखता ही नहीं । लाख भुलाना भी चाहा मगर दिल भूलता ही नहीं। हैं बरसता हुआ गम की घटा जो सावन ले आया, जुदा ए सनम तुम […]
=============================== वो जो तेरी यादों का समंदर कभी सूखता ही नहीं । लाख भुलाना भी चाहा मगर दिल भूलता ही नहीं। हैं बरसता हुआ गम की घटा जो सावन ले आया, जुदा ए सनम तुम […]
मत पूछो कि क्या हसरत है मेरी , हसरतें जताऊँ यह ना फ़ितरत है मेरी , जताने से मिल जाये मुझे चाहत जो मेरी , खुदी को जानता हूँ यह ना किस्मत है मेरी। मत […]
तेरी जुबां पर मेरा नाम कब आएगा? तेरी मुहब्बत का पैगाम कब आएगा? धधकी हुई चाहत है कबसे सीने में, शर्माती आँखों का सलाम कब आएगा? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तेरी जुबां पर मेरा नाम कब आएगा? तेरी मुहब्बत का पैगाम कब आएगा? धधकी हुई चाहत है कबसे सीने में, शर्माती आँखों का सलाम कब आएगा? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तेरी ख़ामोशी भी चर्चा में है, तू कुछ कहेगा तो मुद्दा ही बनेगा सनम। – राही (अंजाना)
****** तेरा ही चेहरा होगा ****** जब भी कोई ख्वाब तराशुगाँ, तेरा ही चेहरा होगा…. वो ही होंठ, वो ही आंख, वो ही रूप होगा…. ******** गिला रहता है चेहरे के नकाब से…… जो महरूम […]
“**मित्रता के तख्त पर”** मधुर प्रातः स्मरण “ नित शाखें प्यार की हैं झूमती , हर जिंदगी के. दरख्त पर । हर सुवह शाम की दुआ-सलाम, करते है मित्रता के तख्त पर । जानकी प्रसाद […]
****** तेरा ही चेहरा होगा ****** जब भी कोई ख्वाब तराशुगाँ, तेरा ही चेहरा होगा…. वो ही होंठ, वो ही आंख, वो ही रूप होगा…. ******** माना चेहरा उसका आफताबी होगा…… पर क्या मेरे लिए […]
मैं अंजान हूँ इस सफ़र में मुझे कुछ नहीं है आता तू ही बता मेरे साथी कैसे बढूँ इस डगर में। चुन ली है राह मैंने तेरे संग ज़िन्दगी की अब तू ही मेरा सहारा […]
क्यों मन हर पल रोता है, डरता क्यों उससे जो होता है, तेरी हिम्मत तेरे हाँथो, फिर भी दहसत में क्यों सोता है, अपना एक तू लक्ष्य बना हर सफर का अंत एक दिन तो […]
जिंदगी संग तो हर दिन की यारी है, तुम खुद ही बता दो मौत कब मिलने की तैयारी है।। -मनीष
नहीं थकती……। —————————- अश्रुपूरित नयन मेरे क्यों….? राह तुम्हारी ताकते नही थकती शून्यमात्र बिन तेरे-जीवन के पल “प्रीत”हमारी-कहते नही थकती मनुहार दिल की-सुने तेरा दिल भी “उम्मीदें”दिल की-सहते नही थकती गुदगुदाते मन को-मिलन के पल […]
तेरी याद जब कभी कहानी आती है! तेरे जख्म की नजर निशानी आती है! किस्तों में रात चुभती है तन्हाई की, करवटों में दर्द की रवानी आती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
न सवाल हुआ , न जवाब ही हमारी तन्हाई में । आंखों ही आंखों से बात हुई हमारी तन्हाई में । खामोशी को इकरार समझने लगे थे,ख्वाबों मे, पर जिंदगी है हकीकत समझ में आई […]
छुअन तुम्हारी अँगुलियों की, मेरे कपोलों पर, आज भी मौजूद है, तुम्हारी आँखों की शरारत मेरी, तासीर की हरारत में, आज भी ज़िंदा है, तुम तसव्वुर में जवान हो आज भी, हमारी मुहब्बत की तरह, […]
कोई बात है उनमें शायद जो याद आते है या फिर हमें बस याद करने की आदत हो गयी है
उसने देखा यूँ जैसे कभी देखा ही न था…… कभी आँखों में बसाया था, आज सरेराह बेगाना कर गया….. ********* **************** दिल में कसक ठहरी हुई हैं, मिलेगी तो पूछुगां…. गलती दोनों की थी, तो […]
*प्रातः अभिवादन* सुवह सुवह जो मित्रता की ना महक आये । जिंदगी व्यर्थ में , दिन -रात सी चली जाये । चंद लमहे ही सही ,दोस्तों के बीच जियें , जिंदगानी की कहानी नयी लिखी […]
जीवन जीना एक कला है प्रतिपल एक रंगोली है गर मानवता है दिल में तो प्रात-रात नित होली है ।। वसुधा अंबर में संगम का माध्यम दिनकर होता है तिल होता है चन्दा में भी […]
तुम मेरे ख्यालों में आकर चली जाती हो! तुम मेरी नींद को उड़ा कर चली जाती हो! आँखों में ठहर जाता है हुस्न का जादू, तुम मेरी प्यास को जगा कर चली जाती हो! मुक्तककार- […]
बेवजह शिकायते छोड़ दे आ जा रंग मौसम से मांग के आ जा अब के होली में अपने घर आ जा कुदरत ने कितने रंग ढ़ा रे है लूट ने मेरे संग मलंग आ जा […]
इस रंग बिरंगी होली की हर बात बहुत ही निराली है, जहाँ-जहाँ तक नज़रें जाती, मस्ती की हर तरफ तैयारी है, माँ के हाँथ के पकवानों को चखने किसी की घर जाने की तैयारी है, […]
प्यारे मित्रो, रविवारीय आनन्दमय सवेरे की, मंगलकामनाएँ सपरिवारसहर्ष स्वीकारें। आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश “उठो भी यार… देखो एक खुशनुमा सुबह बाँहें फैलाए तुम्हारा ही इंतजार कर रही है, तुम्हारे संग खिलखिलाने और दौड़ते-भागते […]
ग़रीब कौन है…? वो— जो कष्ट से जीवन जीता है मुफ़लिसी की घूंट पीता है कपड़े तन पे नहीं आनंद जीवन में नहीं सहमी मज़बूर ज़िन्दगी “पॉलीथिन”में ग़म डुबोने– की नाकाम कोशिश–और खुद ही मरती […]
मिल जाओ कहीं तो इत्तेफ़ाक़ ही कह दूंगा… किस्मत की अड़ में चुप कर … दिल क जज़्बात ही कह दूंगा… आँखों में मत देखना मेरी… ये गुमराह कर लेती है… छुपा राखी थी दिल […]
आप सभी को होली की रंगों भरी हार्दिक शुभकामनाएँ :::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: ऐसा रंग तो डालो पिया। सारा तन-मन रंग डालो पिया । सात रंगों की बरखा है आई , गुलाल अबीर उड़ा लो पिया। फूल पलाश […]
जरा सा मुस्कुरा?☺ देना होली मानाने से पहेले हर गम को जला ??देना होली जलाने से पहेले मत सोचना की किस किस ने दिल?? दुखाया है अब तक सबको माफ़ ??कर देना रंग लगाने से […]
“फागुन आया” फागुन आया चल रंग श्रृंगार कर ले। अपने तन मन को रंग प्रेम व्यापार कर ले रंग ले आज तु यह जग सारा, आया रंगो का मौसम रंगीला, उड़ा-उड़ा गुलाल नाचती गोपियां, देख […]
मन मन्दिर में जिसकी मूरत उसको दुनिया कहती माँ है माँ ममता की सच्ची मूरत जग में दुख को सहती माँ है ।। पुत्र नही तो दुख का मंजर पुत्र प्राप्ति पर भी दुख ऊपर […]
प्यारे मित्रो सुप्रभात अभिवादन , सपरिवारसहर्ष स्वीकार करें…. आपका अपना मित्र जानकी प्रसाद विवश “**आपकी खामोशियाँ “** ************* आपकी खामोशियाँ भी , हर घड़ी हैं बोलतीं , मौन रहकर भी , हृदय के ,भेद सारे […]
प्राण से ज्यादा,मित्र हो प्यारे , इस. नश्वर संसार में । तीर्थ राज संगम स्थित है , प्रिय मित्रों के प्यार में । व्यर्थ सभी तीर्थटन होते , बिना मित्रता-तीरथ के । सत्कर्मों के फल […]
कभी जिंदगी में चाहत मर नहीं पाती! कभी दौरे–मुश्किलों से डर नहीं पाती! हर वक्त नाकामी का खौफ़ है लेकिन, कभी आरजू ख्याल से मुकर नहीं पाती! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
जरूरी नहीं , हम गले ही लगाएँ । जरूरी नहीं ,आप मिलने ही आएँ। अमर प्रेम का ,ऐसा बंधन हमारा, करें याद हम , हम तुम्हें याद आएँ। ******जानकी प्रसाद विवश********** प्यारे मित्रो , पावन […]
निर्मम सिमट सिकुड़ वो सोया था अंधेरे चौराहेे चौखट पे वो खोया था चादर ओढ़े सिर छुपाए, पांव फिर भी निकली थी सन सनाती हवा चली पैरो को छू, निगली थी कांप गए बदन मेरे […]
संस्कार में दबे बच्चे से घूरते हुए अध्यापक ने सवाल पूछा, बेटा ये बताओ हम कौन? बच्चा मुस्कुराते बोला, अध्यापक जी आप गुरु हम शिष्य यानी गुरु धाम में हम पढ़ रहे आप पढ़ा रहे […]
मुझे मेरी तन्हाई कहीं मार न डाले! मुझे तेरी रुसवाई कहीं मार न डाले! हरतरफ नजरों में है यादों का समन्दर, मुझे तेरी परछाई कहीं मार न डाले! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
उडता पंछी नील गगन फैला विशाल हाथ।
मैं तेरी मुहब्बत को पाना चाहता हूँ! मैं तेरी निगाहों में आना चाहता हूँ! दीवानगी मचल रही है तेरी जिगर में, मैं तुमको जिन्दगी में लाना चाहता हूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
सोंचा नहीं था समन्दर के इतना किनारे निकल जाऊंगा, जिनसे डरता था उन्हीं लहरों के सहारे निकल जाऊंगा, जहाँ बनाता ही नहीं बह जाने के खौफ से रेत के मकाँ कोई, वहीं शौक से किरदार […]
मैं तेरे दर्द को ईनाम समझ लेता हूँ! मैं तेरी याद को पैगाम समझ लेता हूँ! ढूढता हूँ जब भी मदहोशी पैमानों की, मैं तेरी अदाओं को जाम समझ लेता हूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तिरंगे के नीचे शान्ती के घोष में, मिशाले जलाली खूब हमनें!! मान मर्यादा स्वाभिमान का आवाहन, हाथो में बंदूके तलवारें उठाना हमकों!! इतियास दुहरा रहा गजनी की चाल, फिर से वगदादी दुहरा रहा हैं !! […]
जब मेरी तेरी बात हो, लब्ज़ों को आराम हो बस आँखों ही आँखों में,अपनी दुआ सलाम हो कभी दूर से देख के मुझको, मन ही मन मुस्काती है, और बुलाती पास मुझे, पलकों के परदे […]
तुम कभी दिल से न रिश्ता तोड़ देना! तुम कभी तन्हा न मुझको छोड़ देना! मुश्किल है अब तुम बिन मेरी जिन्दगी, #राहे_दर्द पर न मुझको मोड़ देना! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
1. Before I met you.. I Don”t Understand “LOve Quotes” After I Met You I Strted Making It….. 2. Gmail…Instagram…facebook..Whatsapp… She Occupied place in every account of him… But She lost his ultimate goal of […]
मुझसे वो अब बड़ी तंगदिली से मिलता है ऐसे लगता है जैसे किसी अजनबी से मिलता है।। अब उसके मिलने में वो पहली जैसी बात कहाँ जमाने को दिखाने को ही शायद गले मिलता है।। […]
मैं तेरा कबतलक इंतजार करता रहूँ? तेरी आरजू को बेकरार करता रहूँ? थक गयी हैं कोशिशें मेरी उम्मीदों की, मैं तेरे प्यार पर ऐतबार करता रहूँ? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
Chahe ek lack log mil k, Mera bura soche, Bs ek tere acha sochne se, Sbki har ho jati hai..!!! #devil
“**मोह रही मन”** मोह रही मन सभी के फागुनी बयार । शनैः शनेः उभर रहा है सृष्टि का निखार । धडकनें सुवह की सरगमें सुहावनी। भावनाएँ रंगभरी हुईं लुभावनी । कामनाओं पर चढ़ा छटा काअब […]
रेत से बने इस रक्त के पुतले पर, रस्म ऐ रूह का रूतबा क्या कहूँ, बदलते रोज़ चेहरों के मुखौटे पर, जश्न ऐ जाम का कब्जा क्या कहूँ॥ राही (अंजाना)
जब कभी तुम मेरी यादों में आते हो! धूप सा ख्यालों को हरबार जलाते हो! घुल जाती हैं साँसें चाहत के रंग में, चाँद की शकल में सामने आ जाते हो! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
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