मैं कभी-कभी निकलता हूँ ज़माने में! शामे–गुफ्तगूं होती है मयखाने में! थक जाती है महफिल भी सब्र से मेरे, वक्त तो लगता है दर्द को भुलाने में! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय
मैं कभी-कभी निकलता हूँ ज़माने में! शामे–गुफ्तगूं होती है मयखाने में! थक जाती है महफिल भी सब्र से मेरे, वक्त तो लगता है दर्द को भुलाने में! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय
मेरी ग़ज़ल ” वतन” को पढे मेरी प्रोफाईल पर ।और कमेन्ट जरूर करे आपका लकी वतन
छोड़ चुके थे, जीवन अपना जीने की वो आशा मे। तोड चुके थे, अपना हर सपना सपनो की वो, आशा मे। अनेक हुए बलिदान ओर, कई ने दे दी अपनी जान लेकिन ठान उन्होंने रखा […]
दोस्ती का अजब सा किस्सा है दोस्त जीवन का अहम हिस्सा है । स्वार्थ का नामोनिशाँ तक है नहीं , जन्म जन्मों का अमर रिश्ता है । प्रिय मित्रों वसंती सवेरे की सरस. घड़ियों में […]
किशतो मे बटी है जिंदगी- खुशी की कमी गम की किशते कुछ ज्यादा हैं….!!! -Aakanksha?
मत करो तुम कोशिश जब वो आसान हो! खोज लो उजाले जब कभी वीरान हो! चाँद खींच लेना प्यार से आगोश में, राहे–जिन्दगी न तेरी सूनसान हो! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय (#मात्रा_भार_22)
संवेदनाएँ भी अपना अस्तित्व भूल गई हैं, शायद वेदनाएँ मुखौटा पहन कर मिली होंगी उनसे।
गणतंत्र दिवस है देखो आया झंडा हम फहरायेंगे अपने शहीदों को याद कर श्रद्धा सुमन चढ़ाएंगे गणतंत्र दिवस….. अपने देश में भारत माँ के नारे हम लगाएंगे शहीदों की बलिदानी को बच्चों को बतलायेंगे गणतंत्र […]
सूरज ऊगा था, उस दिन कुछ ऐसा नया जीवन मिला हो , लगा था कुछ वैसा आज़ाद पंछी की तरह जब ली थी साँस सबने, ना होगा स्वर्ग भी इस सुख के जैसा पर फिर […]
पहचान बड़ी कोशिशें की खुद को जानने की पहचानने की ज्ञानियों से चर्चा की पोथियाँ पढ़ी ध्यान लगाया पर आज जब बाजार गई तो समझ आया कि मैं ब्लाउज और पेटीकोट हूँ इससे अधिक कुछ […]
वतन पे है नजर जिसकी बुरी उसको मिटा देगें,,, सबक ऐसा सिखा देगें कि धड से सर उडा देगें।। जहाँ पानी बहाना है वहां पर खून देगें हम,,, वतन से प्यार कितना है जहाँ को […]
छोड़ कर एक घर को मैं एक घर चला आता हूँ, जाने कैसे इस सफर को मैं रोज़ दोहराता हूँ, उलझनों में जिंदगी के कितने तर्क सुलझाता हूँ, जाने कैसे इस जंग को मैं रोज […]
1857 में अंग्रेजों से लड़ कर एक जीती जंग निराली थी, जिसमे शामिल भगत राज गुरु झांसी वाली रानी थी, देश को स्वतंत्र कराने की जैसे सबने मन में ठानी थी, फिर गणतंत्र राज में […]
बात करूँगा दिल से, दिल को, छू कर जाने वालों की, आजादी की जंग में शामिल दिलवाले दीवानों की, आजाद,भगत सिंह, राज गुरु और झांसी वाली रानी की, बात करूँगा दिल से, दिल को, छू […]
अब दर्द ही तेरा बहाना रह गया है! ख्वाबों का ख्यालों में आना रह गया है! वक्त ने धुंधला दिया है यादों को मगर, दिल में चाहतों का फसाना रह गया है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
गणतंत्र दिवस की अरुणिम उषा में, राजपत की छवि निराली , हर रंगों की वेशभूषा में , भारत माता की छवि है प्यारी , उस पर तिरंगे का नील गगन में लहराना , जय हिन्द […]
….गणतंत्र दिवस…. लो फिर आ गई २६ जनवरी, नौजवानों को समझाने, क्या होता गणतंत्र ये, बलिदानों का गुण गाने, आज के हर युवा का फ़र्ज़ है ये, उन संघर्षों, उन वीरों को पहचानें, मौत चली […]
“**देख लिया”** ****** डूबकर देख लिया , जिस घड़ी से , तेरी आँखों में । नहीं अब डूबने से , जरा सा भी , डर हमें लगता । जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो . सवेरे […]
“**वसंतोत्सव-अभिनन्दन”** ******^^^****** कोयल के स्वर पड़े सुनाई , यह वसंत बेला सुखदायी । मधुऋतु में , माधुर्य पगा है, जीवन का हर क्षण । …..जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो वसंत पंचमी के ऋतु पर्व पर […]
वर्जिन मैं वर्जिन हूँ विवाह के इतने वर्षों के पश्चात् भी मैं वर्जिन हूँ संतानों की उत्पत्ति के बाद भी। वो जो तथाकथित प्रेम था वो तो मिलन था भौतिक गुणों का और यह जो […]
तन्हा रात हुई है फिर कुछ होने को है! किसी की यादों में जिन्दगी खोने को है! चाँद तमन्नाओं का फिर आया है नजर, मेरी जुस्तजू इरादों की रोने को है! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय
“**प्रात:अभिवादन”** ****^^^^*** तेरी इक मुसकराहट पर बहारें लौट आती हैं । तेरी इक मुसकराहट पर बहारें , गुल खिलाती हैं । महक जाता है तन मन और हर उजड़ा हुआ उपवन , प्यार की वसंती […]
जिंदगी का खेल अब तक समझ न आया वो दाव खेलते रहे, मैं हारता रहा
सुनो अमृता! सुनो अमृता! अच्छा हुआ जो तुम लेखिका थी क्योंकि अगर तुम लेखिका न होती तो निश्चित तौर तुम्हें चरित्रहीन और बदलचलन की श्रेणी में रखा जाता। अच्छा हुआ तुम असाधारण थी क्योंकि साधारण […]
आपके-गीत-क्रमांक-20- दिनांक-16 -01-2018 खूँटी और दीवार गीतकार-जानकी प्रसाद विवश साथ तुम्हारा मेरा…साथ तुम्हारा मेरा जैसे खूँटी ओर दीवार का। साथ हुआ है जिस पल से भी, हम दोनों ही साथ रहे। अपनी भार वहन क्षमता […]
कभी न कभी हमको हमारा मिल ही जाता है! कभी न कभी हमको सहारा मिल ही जाता है! जब भी चल पड़ते हैं कदम हिम्मत की राह पर, डूबती कश्ती को किनारा मिल ही जाता […]
सवेरे की मधुर मुसकान का अर्चन करें मन से । उजाले की अमर पहचान का , वंदन करें मन से । मित्रतामय उमंगों का चिर स्पंदन, निराला है , नमन हो मित्रता तीरथ की महिमा […]
जरूरत पे ली गई क़िस्त की कीमत, जान देकर जब किसी को चुकानी पड़े, बह रहे यूँही जल को बचाने की खातिर किसी को, नल पर भी जब ताले लगाने पड़े, प्यास पानी की हो […]
दिल है धड़कन है अभी तो जान है बाकी, जन्दगी के सफर में कई इम्तेहान हैं बाकी, जो प्रश्न हैं पूछे बड़े ज़ालिम ज़माने ने, निरउत्तर कर दिखाने का अभी अभिमान है बाकी, डुबाने को […]
प्राण से ज्यादा, मित्र हो प्यारे, इस. नश्वर संसार में । तीर्थ राज संगम स्थित है , प्रिय मित्रों के प्यार में । व्यर्थ सभी तीर्थटन होते , बिना मित्रता-तीरथ के । सत्कर्मों के फल […]
जीवन के खत पर लिखा वो पता हैं , मेरे मित्र ,मेरे लिए , देवता हैं। धड़ी चाहे सुख की, या हो चाहे दुख की, किसी पल नहीं वे , हुए लापता हैं । जीवन […]
आप जबसे जिन्दगी में मिल गये हैं! रास्ते मंजिल के फिर से खिल गये हैं! जागे हैं ख्वाबों के पल निगाहों में, जख्म भी जिगर के जैसे सिल गये हैं! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
वह बच सकती थी!!! वह बच सकती थी अगर वह चिल्ला सकती उस दिन जब खेल खेल में किरायेदार अंकल उसे गोद मे उठा दुलारने लगे और वह दुलार जब तकलीफदेह होने लगा तब वह […]
क्यों तुम भटक गये हो वस्ल की राहों में? क्यों तुम बिखर गये हो दर्द की आहों में? ढूँढती हैं मंजिलें रफ्तार हिम्मत की, क्यों तुम नजरबंद हो खौफ की बाँहों में? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
जबसे तेरे दर्द का पैगाम आ गया है! तबसे मेरी जिन्दगी में जाम आ गया है! मैं क्या करूँ नुमाइश अपनी तमन्नाओं की? जब तेरा बेवफाओं में नाम आ गया है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
चलते-चलते बहुत दूर निकल आई हूँ मैं, बहुत कुछ पीछे छोड़ आयी हूँ मैं, वो खुशियाँ, वो सपने, वो मस्ती के पल अपने… कुछ आँसू, कुछ यादें, कुछ लोगों से की बातें….. बस… छोड़ आयी […]
तुम मेरी जिन्दगी में खास बन गये हो! तुम मेरी मंजिलों की प्यास बन गये हो! हर वक्त तड़पाते हो आकर यादों में, तुम मेरे दर्द का एहसास बन गये हो! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय (23)
Life seemed so well, When I was naked. Then I was clothed with knowledge, It turned out to a puzzle. Easy at times, tougher the other times But every puzzle has its say. I was […]
ये कैसा तसव्वुर, कैसा रब्त, कैसा वक्त है, जो कभी होता भी नहीं, कभी गुजरता भी नहीं, ये कैसा रंग, कैसा वर्ण, कैसा रोगन है, जो कभी चढ़ता भी नहीं, कभी उतरता भी नहीं, ये […]
जा रही हूँ आज सबसे दूर, खुद की ही तलाश में। वहीं, जहाँ छोड़ आयी थी खुद को, किसी की याद में। पर अब उससे भी ज़्यादा मुझे ज़रूरत है मेरी। अब ढूंढना है मुझे […]
मैं आसमां की ऊंचाइयों को छू लूंगी, तू पिंजरा तो खोल ज़रा। मैं दिल की गहराइयों को छू लूंगी, तू1मुझे वक्त तो दे ज़रा। मैं हर कदम पर तेरा साथ दूंगी, तू मुझे समझ तो […]
Jb aankh khuli is duniya mein, Tb sbse hi anjaan thi m… Par phir bhi ek ehsas tha jisme Saara sukoon pa leti thi mein. Jb badi hui m thodi si, Tb is anjaano ki […]
अगर बैठना हैं, महोबत की नाव मे, तो एक बार हर किनारे से रिस्ते-नाते तोड़ने होंगे.. #devil
तेरा ख्याल मुझको तड़पाकर चला गया! अश्कों को निगाहों में लाकर चला गया! नींद भी आती नहीं है तेरी याद में, करवटों में दर्द को जगाकर चला गया! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय
अवसाद का विक्षोभ नीरव, चपल मन का क्लांत कलरव देखता पीछे चला है लगा मर्मित स्वरों के पर । शुष्क हिम सा विकल मरु मन, भासता गतिशील सा अब, भाव ऊष्मा जो समेटे बह चला […]
डूबकर देख लिया , जिस घड़ी से , तेरी आँखों में । नहीं अब डूबने से , जरा सा भी , डर हमें लगता । जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो . सवेरे की गुनगुनी अनुभूतियों […]
kon yaad rakhta hai raakh ko jismo ke sab diwaane hai iss janam mai nibha na sake saat janmo ki baat karte hai @@ SAGAR @@
sloth goti cholchey gari ajo thomkey daraye eye mon amari khub chena akta goli diye jekhaney hetey chilam bhalobashar sopno niye abujh se mon ajo korey smirti charon soney na kono baron moner ki esechey […]
दर्द तन्हा रातों की कहानी होते हैं! तड़पाते हालात की रवानी होते हैं! कभी होते नहीं जुदा यादों के सिलसिले, दौरे-आजमाइश की निशानी होते हैं! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय
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