( इस बार आर्यपुत्र आर्यन सिंह ने किसी प्रेमिका को याद करते हुए और करवा पर्व की कल्पना को संजोकर इस कविता को लिखा होगा ) कैसे कहें हम बात दिलों की हैं ये मोहब्बत […]

दो पल का है यह *स्वर्णिम जीवन* बाकी *सुख दुख* तो लगा रहेगा साथी नैतिकता* मानवता* सादगी* का गहना पहनकर सत्कर्म* करो मेरे साथी मत अभिमान करो इस तन पर यह तन तो हो जाना […]

मन के भाव लिखा करती हूँ, ज़िन्दगी की धूप और छाॅंव लिखा करती हूँ। कभी “खुशियाँ” तो कभी, “घाव” लिखा करती हूँ। आभार आपका आप इसे कविता कहते हैं, मैं तो बस जज़्बात लिखा करती […]

एक दुआ है खुदा से कि खुदा ऐसे ख्वाब ना दिखाएं जो पूरे ही ना हो ऐसे लोगों से ना मिलाए जो कभी अपने ना हो होठों पर मुस्कुराहट रलाने वाले लोग भले ही ना […]

दामिनी चमक रही है, यामिनी लरज़ रही है। अम्बर पर मेघा छाए, नीर बरसता ही जाए। मन मेरा घबराए देख कर ऐसा मौसम, तिमिर मुझको डराए। डर बढ़ता ही जाए, पवन चल रही सीली-सीली, भीग […]

अब आर्यपुत्र आर्यन सिंह का हृदय सांसारिक वस्तुओं से हटकर बैराग्य की तरफ आकर्षित होने लगा सो उन्होने विशुद्ध सरल भावनाओं को लेखनी के माध्यम से हम तक पहुंचाया – शून्य मार्ग पर चला पथिक […]

विपरीत परिस्थितियों में एक पुरुष का किंकर्तव्यविमूढ़ होना एक समान्य बात है । मानव यदि चित्तोन्मुख होकर समाधान की ओर अग्रसर हो तो राह दिखाई पड़ हीं जाती है। जब अश्वत्थामा को इस बात की प्रतीति […]

सर्द पवन का झोंका लेकर, आई ये बरसात है। बे मौसम ही आई लेकिन, कुछ तो इसमें बात है। भीगे सारे बाग-बगीचे, भीगे पुष्प और पात हैं। भीग गया है तन-मन सारा, भीग गये जज़्बात […]

मौन की भाषा में लिखकर आपको जो पंक्ति भेजी, वो समझ पाये नहीं क्या या रहा कुछ और कारण। राह में जो फूल हमने आपके स्वागत में डाले, आपने समझे वो कंटक या रहा कुछ […]

जीवन में बहुत सी कठिनाईयाँ आती हैं जाती हैं कभी तो रुलाती है तो कभी कुछ सिखाती हैं हम नहीं जान सकते हमारा भविष्य क्या है पर ये जो पल है हमारे हाथ में है […]

साहित्य ऐसा रचना कवि, जिसमें दिखाई दे समाज की छवि। बातें हों ऊंचे पर्वत, गहरे सागर की कभी बहती पवन कभी उगता रवि। दुख-सुख की चर्चा करे कवि, कभी बातें हों मुस्काने की। विरह की […]

अधूरी सी हो गई है ज़िन्दगी, अधूरा सा हो गया संसार है। पूरी ना हो पाई कुछ अभिलाषा, अधूरा सा रह गया प्यार है। अभी दर्द में बहुत हूँ, थोड़ा समय लगेगा मुस्काने में। दर्द […]

क्यों न कही कोई कविता बताओ, क्यों चुप हो ओ! कवि तुम। चारों तरफ है घोर अंधेरा, गाकर कविता कर दो सवेरा। फैल उजाला भीतर पहुँचे नहीं है निराशा यह मन कह दे। सोए हुए […]

लिख भेजा एक संदेश जा पहुंचा उनके पास आया ना कोई खत मुझे ना आया कोई जवाब ऐसा प्रेम किया हमनें ऐसी कैसी प्रीत ना ही मेरी हार हुई और ना ही हुई है जीत।

मन के रावण को मारने के लिए, दशहरा मनाया जाता है। किस-किस ने रावण को मारा कौन राम-मय हो कर आया है। दशहरा शुभ हो…. यह गीत तो सभी ने गाया है। कब यह देश […]

सदा रहेगी सच की जीत हारेगा वह रावण, जिसमें हो अन्याय भरा छल छन्द और घमंड। राम हमेशा लेंगे अवतार करेंगे लीलाएं सच को खूब सहारा देंगे, दुष्टजनों को दण्ड।

आहुति ——– अम्मा! तुमसे कहनी एक बात.. कैसे चलीं तुम? बाबूजी से दो कदम पीछे… या चलीं साथ। कैसे रख पाती थीं तुम बाबूजी को हाथों ही हाथ? जब मनवानी होती थी तुम्हें कोई बात.. […]

पल में काफी ताकत है उलट-पुलट कर देता है पल, अर्श से फर्श बता देता है, पल में प्रलय करता है पल पल में काफी ताकत है। अभी ठीक सब कुछ लेकिन पल में बिगड़ […]

करो प्रयास कुछ ऐसा युवा अब राह पा जायें खड़ा सकंट है रोजी का रोजगार पा जायें। पढ़ाई इस तरह की हो, पड़े मत बैठना खाली, पढ़ाई से बढ़ें आगे रहें ना एक भी खाली।

हम गलत हैं या सही हमें कुछ भी पता नहीं पता बस इतना चला है ये दिल मचल चला है फिर एक बार गुनाह करने चला है क्या करें, क्या कहे हम नहीं जानते ये […]

जिन्दगी में परेशानियां जब हद से बढ़ने लगे ये निगाहें निगाहों से लड़ने लगे मुकद्दर भी जब मुह फेर ले कोई तड़पता हुआ ही छोड़ दे तब जीवन में आगे बढ़ो अपने भावों को आवाज […]

तसव्वुर में भी हमने आज तक ऐसा नहीं सोचा नकबब्त इस कदर होगी नजर से दूर जाओगे। मगर जाओ भले ही दूर लेकिन हम निराली सी निगाहों से परस्तिश आपकी करके बुला लेंगे स्वयं के […]

जिंदगी जिस राह पर चल रही है, उसकी कोई मंजिल नहीं है, कश्ती साहिल पे थी सही, मजधार में डूब रही है, कत्ल हुआ है सर-ए-आम, पर तू मेरा कातिल नहीं है।

जिंदगी जिस राह पर चल रही है, उसकी कोई मंजिल नहीं है, कश्ती साहिल पे थी सही, मजधार में डूब रही है, कत्ल हुआ है सर-ए-आम, पर तू मेरा कातिल नहीं है।

मैं शिक्षक हूँ मुझसे अपेक्षा समाज करता है। मैं सत्य बोलूँ, सादा रहूँ , सादा पहनू , कम बोलूँ , खर्च ज्यादा करूँ। छात्रों को न मारू, न डांट लगाऊं, जो सरकार चाहे, बस वह […]

चुप न रहो कुछ बोलो अधर के खोलो पट कुछ बोलो, मौसम तो यह अब भी गरम है, थोड़ा सी बस हवा ही नरम है, मंहगाई का आज चरम है। बोलो ना कुछ बोलो, अधर […]

सिंहसवारी मां अष्टभुजाधारी पालनहारी–१ ममतामयी सौभाग्य प्रदायिनी भवमोचनी–२ वरदायिनी विमल मति देती पीडा़ हरती–३ जगजननी बारंबार प्रणाम है प्यारा धाम–४ करूं विनती मां झोलियां भरती तुझसे सृष्टि–५ स्वरचित एवं मौलिक रचना —✍️एकता गुप्ता *काव्या* उन्नाव […]

कभी-कभी लगता है हम दुनिया के सबसे बदकिस्मत इन्सान हैं पर°° जब अपने हाथ पैरों को सही सलामत देखते हैं तो अमीरी का एहसास होता है।। By pragya shukla

संसार में ईश्वर के बाद एक कवि ही है जो हथेली पर सूरज उगा सकता है और पथ्थर पिघला सकता है ये काम साधारण मानव की सामर्थ्य से बाहर है…

विपक्ष हो या आलोचक दोनों हमारी कमियों को उजागर करते हैं ————————- अतः सरकार हो या कवि उसे स्वयं को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

मत करना वो बात कि जिससे ठेस लगे सचमुच में, प्रेम ही जीवन, प्रेम ही सब कुछ, प्रेम-बोल हो मुख में। वो होते हैं सच्चे साथी साथ रहें जो दुख में, जो हों दुःख में […]

खेल में धूल से लतपथ हुआ तन हूँ मैं जो हुआ गीला पसीने से वही वसन हूँ मैं। रम रहा छोटी खुशी में इस तरह का मन हूँ मैं। कम नहीं होती मुहब्बत खुशमिजाजी मन […]

वाह क्या बात है! अजय मिश्र दोषी नहीं हैं और ना उनका बेटा ये तो साफ साफ जताता है कि तुम झूठे हो मक्कार हो और कुर्सी के लोभी हो। दोषी को निर्दोष बताया ये […]

ये अगर किसी को सांत्वना दें तो राजनीति आँकी जाती मोदी या योगी भ्रमण करें तो भावुकता क्यों दिख जाती! इतनी ओछी राजनीति तो पहले कभी नहीं हुई भारत की यह भूमि कभी इतनी धूमिल […]

जिसने कुचला गाड़ी से वह गोदी में बैठा है सीतापुर की जेल में बंद एक कांग्रेसी नेता है ये वर्तमान सरकार मुझे अंग्रेजों की याद दिलाती है जो बैठे हों गोदी में बस उनको न्याय […]

तुम्हें क्या लगता है योगी ? इंटरनेट बंद करने से तुम्हारे गुनाह छुप जायेंगे बीजेपी में रह कर कोई कुछ भी करे उसके पाप धुल जायेंगे हम सीतापुर वाले हैं साहब ! अगर सीतापुर में […]

धूम-फिर कर वहीं आ रहा हूँ आईना जिस जगह पर लगा है मासूमियत बहुत दूर है, पर्त क्या है वो जिसने ढका है। स्याह नयनों के नीचे पड़ी है, है जरूरत नहीं लाऊं काजल, ठीक […]

गुप्तगू कर चुके हैं गुमसुम से फिर अदा से बनाया गुलदस्ता बड़े ही प्यार भरे जाहिल हैं, आ गए मन में ऐसे आहिस्ता। इल्म था तब उन्हें मुहब्बत का जब कहीं नेह की इबादत थी, […]

मैं कौन हूँ, मेरा अस्तित्व क्या ? आशाकिरण हूँ, जलता दीया, गतिहीन हूँ, पर अचल नहीं, निर्भय ना सही, भयभीत नहीं। गुणवान नहीं, निर्गुण भी नहीं, तेजस ना सही, शीतल भी नहीं, आकारहीन, निराकार नहीं, […]

मैं कौन हूँ, मेरा अस्तित्व क्या ? आशाकिरण हूँ, जलता दीया, गतिहीन हूँ, पर अचल नहीं, निर्भय ना सही, भयभीत नहीं। गुणवान नहीं, निर्गुण भी नहीं, तेजस ना सही, शीतल भी नहीं, आकारहीन, निराकार नहीं, […]