कविता : देखो ,नया वर्ष आया है आ रहा व्योम से मदभरा प्यार बह रही हर गली में सुधा धार कौमुदी का बिखरता मदिर गान हर किरन के अधर पर सरस तान प्रगति का नया […]

जानते तो हैं लोग मुझे, पहचान अभी बाकी है ! चल रहा हूँ बड़ी देर से, पर एक उड़ान अभी बाकी है कुछ मंजिले अभी दूर हैं, कुछ रास्ते अभी बाकी हैं जो राह में […]

जीने के लिए लड़ना पड़ता है साहब भूख से रोटी पाने से अपने नीची जाती का होने से अपना तोह जन्म से ही तुम्हे जात नजर आता है तुमसे ज्यादा मेहनत करते है पर कोई […]

अश्वत्थामा दुर्योधन को आगे बताता है कि शिव जी के जल्दी प्रसन्न होने की प्रवृति का भान होने पर वो उनको प्रसन्न करने को अग्रसर हुआ । परंतु प्रयास करने के लिए मात्र रात्रि भर […]

दार्शनिक ————- जीवन मेरा दर्शन है, कर्म मेरा पथ प्रदर्शक है, मुड़ कर देखा बचपन को जन्म से बच्चा दार्शनिक है, उसमें गति मति थी, प्रकृति उसके करीब थी, था सब कुछ जन्म से ही […]

सुबह-सुबह सूरज की लाली, हिम से ढकी हुई हर डाली। पत्ते-पत्ते बूटे-बूटे पर, कुदरत ने कारीगरी कर डाली। बर्फ़ के फ़ाहे गिर रहे राहों पर, पवन भी सर्द चली है आली। बादलों ने घेरा है […]

सुबह-सुबह सूरज की लाली, हिम से ढकी हुई हर डाली। पत्ते-पत्ते बूटे-बूटे पर, कुदरत ने कारीगरी कर डाली। बर्फ़ के फ़ाहे गिर रहे राहों पर, पवन भी सर्द चली है आली। बादलों ने घेरा है […]

थम गया वक्त है, और आसमान झुक गया, ऐसी वीरगति को देख, एक पल को काल चक्र भी रूक गया। ऑंख में आ गए हैं ऑंसू.. श्रद्धांजलि देने को उनको, देश का तिरंगा झुक गया॥ […]

स्तब्ध देश नम आंखें हैं लाल खो दिया भारत ने इतने वीर सपूतों को आज खो दिया भारत ने। सबका हृदय द्रवित हो कर देता है श्रद्धांजलि उनको भारतमाता का बच्चा बच्चा देता है उनको […]

धूप समेटकर अपने सुनहरी वसन, चल पड़ी प्रीतम से करने मिलन ओढ़ कर सितारों भरी काली चुनर पलकों में सुनहरे ख्वाब सजाकर कर के वादा कल फिर आने का जग से, दुनियाँ को देने दीप्ति […]

धूप समेटकर अपने सुनहरी वसन, चल पड़ी प्रीतम से करने मिलन ओढ़ कर सितारों भरी काली चुनर पलकों में सुनहरे ख्वाब सजाकर कर के वादा कल फिर आने का जग से, दुनियाँ को, देने को […]

महाकाल क्रुद्ध होने पर कामदेव को भस्म करने में एक क्षण भी नहीं लगाते तो वहीं पर तुष्ट होने पर भस्मासुर को ऐसा वर प्रदान कर देते हैं जिस कारण उनको अपनी जान बचाने के […]

हिम को भी पिघलते देखा है, सूर्य की तपिश पा कर के। नदियों को जमते देखा है, चन्द्र की शीतलता पा के। ऑंख के ऑंसू भी ठहरे, जब साथ किसी अपने का पाया। बेचैनी में […]

न जाने क्या यह सपना हकीकत है, या हकीकत नहीं सपना ही सपना है। न रोक पाती हैं अन्य कोई सीमाएं, नेह से देख ले जो बस वही अपना है। दूर से दूर के भी […]

आगाज हिन्दुत्व का 6 दिसम्बर 2021 : आने वाला महान शौर्य दिवस कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन कृष्ण लला हम आएंगे अपना वचन निभाएंगे जहां पर जन्म हुआ माधव का मन्दिर वहीं बनाएंगे।। पहला पन्ना पूर्ण […]

विश्वास से संबल मिले, आशाओं के दीप जले, निराशा का भाव तजकर, कर्तव्य पथ बढ़ते चले। ********************** स्वाभिमान को ना चोट पहुंचे, अभिमान मन में ना पले, आत्मविश्वास से परिपूरित, उम्मीदों के सुमन खिले। ********************** […]

दिल टूटा है मगर याद धुंधला नहीं अगर तो क्या करे लोग छोर ऐ है मगर हम अकेले है अगर तो क्या करे खुदा तेरी नयमत देख लोग भूले ना भूले पल बीते ,जिए ना […]

ग़मगीन हालत में जो ला सके, अधरों पर मुस्कान। वही तो सच्चा मित्र है, उसकी निस्वार्थ मोहब्बत है महान। सुख-समय में करे जो हंसी-मजाक भी, संकट की घड़ी में जिम्मेदारी ले सुख देने की। दोस्त […]

जब अश्वत्थामा ने अपने अंतर्मन की सलाह मान बाहुबल के स्थान पर स्वविवेक के उपयोग करने का निश्चय किया, उसको महादेव के सुलभ तुष्ट होने की प्रवृत्ति का भान तत्क्षण हीं हो गया। तो क्या […]

हम अपनी रातों को गुलजार ना बैठे थे किसी बेवफा को अपना यार बना बैठे थे। सूंघ के देखा तो खुशबू तक नहीं आई, बासी फूलों से हम हार बना बैठे थे।

तू मेरा है मगर मेरा तो नहीं ये दिल तेरा है मगर तेरा तो नहीं एक उम्मीद की डोर है जिसने मुझको तुझसे बाँध रखा है तू रब है मेरा मगर मेरी मन्नत तो नहीं।

शर्मा शुक्ला मिश्रा यादव वर्मा वैश्य बनर्जी दोस्त। खतरनाक है सबमें लेकिन असल शक्ल में फर्जी दोस्त।। जिस थाली में करता भोजन उसी थाल को देता छेद। अपने घड़ियाली स्वभाव का नहीं तनिक भी उसको […]

जब-जब मेरी कलम चले, ऐसा कुछ लिखती जाऊँ। जीवन की सच्चाई कभी और कभी कल्पना में खो जाऊँ। जन-जन की बात लिखूँ मैं, और कभी लिख डालूँ मन की। कभी सिसकती साॅंसे सुन कर, लिख […]

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🙏🙏🙏🙏🙏💐💐 निष्ठा सच ईमानदारी से लड़ लड़ जूझ रही दुनियाँ। जो पारंगत षड़यंत्रों में उनको पूज रही दुनियाँ।। कम से कम प्रयास करके भी जमना चाहें चोटी पर। शोध कर रहे मिलकर प्यादे शह […]

कहीं दिन है कहीं रात है, कहीं धूप कहीं बरसात है। सुख और दु:ख आना-जाना है, यही ज़िन्दगी का अफ़साना है। लेकिन कुछ सुख-दुःख, ठहर से जाते हैं जीवन में सुख का ठहरना तो मन […]

जख़्म देकर वो मुझसे कहता है पीर दिल में तो नहीं उठती है । आँसू हैं तेरे या पानी हैं तू उदास क्यों नहीं दिखती है। तेरे होंठों की जो रंगत है क्यों मुझे फीकी […]

कुछ दिनों से दिल में लहरें सी उठती थी, उसके नाम से मन में एक आस सी जगती थी। वो मेरी आंखों का सिर्फ एक धोखा था, प्यार तो बहुत था पर प्रज्ञा’ पर एक […]

मेरी हर सांस में तुम ही हो मेरी हर बात में तुम ही हो। जीवन की सुंदर छवि में जब ढूंढती हूँ मैं, मेरे मन मन्दिर के प्राणनाथ तुम ही हो। परिवर्तन की इस लहर […]

किताबें और कलम होती हैं हमारी मार्गदर्शिका* हमारे जीवन में निभाती है महत्वपूर्ण भूमिका* ताउम्र हम सीखते हैं इनसे, ये हैं हमारी विरासत मानव विकास के लिए हैं सर्वोपरि दिग्दर्शिका* –✍️एकता गुप्ता *काव्या* उन्नाव उत्तर […]

क्या बात है कुछ बीते लम्हों की, ठहर से गये हैं जीवन में। बस गये तन मन में मेरे, जीवन की पूंजी बन कर के। बचपन की कुछ याद पुरानी, बस गई बन कर एक […]

हुकुमत की जंग में रिश्ते, नाते , सच्चाई, जुबाँ की कीमत कुछ भी नहीं होती । सिर्फ गद्दी हीं महत्त्वपूर्ण है। सिर्फ ताकत हीं काबिले गौर होती है। बादशाहत बहुत बड़ी कीमत की मांग करती […]

जीवन ज्योति की एक ललित सरिता बहे सुंदर सुकोमल कविता बने, हो चहुँ ओर प्रकाश फैला हुआ मेरी लेखनी में वो बात रहे। नहाए हुए से लगे शब्द मेरे भाव तो जैसे खो ही गए […]

जो सितारों को मुँह चिढाएँगे, आज वो दीप हम जलाएँगे। आँख दुनिया की चौंधियाएँगी, इस कदर रोशनी लुटाएँगे। जीते हैं अबभी जो अँधेरों में, उनको हम रोशनी में लाएँगे। जो हैं रूठे उन्हें लगाके गले, […]

अमावस की रात है , सुलगते से जज्बात हैं। एक दिया जलाकर करूँ रौशनी वो कहते यह बात हैं। दिया जलाकर मिटे अंधेरा, मन के तम का क्या करूँ। आज बाहर है रौशनी, मन के […]

इस दीवाली सबके हृदय में दया , शांति, करुणा और क्षमा का उदय हो, क्रोध और ईर्ष्या का नाश हो और प्रेम का प्रकाश हो।दीपावली के शुभ अवसर पर सबके शुभेक्षा की कामनाओं के साथ […]

धन का होना बहुत जरूरी है, धन से ही जिंदगी की भौतिक जरूरतें पूरी होती हैं। वर्तमान दौर में धन पर सम्मान टिका है, धनवान का सम्मान दिखा है। जिंदगी की दौड़ है, धन कमाने […]

गुड़ पिघल गया था मीठा सा जल हुआ, तुमने हमारे हेतु जब की थी जरा दुआ। गुड़ थे हम पिघल गए थे उस प्यार की नमी से, कोपल बने उगे थे पत्थर भरी जमीं से। […]

शिवजी के समक्ष हताश अश्वत्थामा को उसके चित्त ने जब बल के स्थान पर स्वविवेक के प्रति जागरूक होने के लिए प्रोत्साहित किया, तब अश्वत्थामा में नई ऊर्जा का संचार हुआ और उसने शिव जी […]

तुम्हारे बिन ये चार दिन हमने कैसे काटे हम नहीं जानते, तुम मेरे जीवन साथी हो पर मेरे कब तक हो यह भी हम नहीं जानते। तुम्हें रातों में नींद तो जरूर आई होगी, पर […]

जीवन की सत्यता में झांक कर अपने फर्ज को अदा करना सीखा है। गिरे तो कई बार पर गिर कर उठना भी सीखा है। यूं तो हम खड़े रहते हैं अपने फैसलों पर, पर कभी-कभी […]

आ रही है दीवाली अंधेरा दूर कर लूँ, तन में वो हो या मन में अंधेरा दूर कर लूँ। जहां तम भरा हो वहां पर एक दीपक रख दूँ, छोटी छोटी कमियाँ न ढक दूँ, […]

सूनी-सूनी सी फ़िज़ाऍं हैं, सूनी सी सब दिशाऍं हैं। आप नहीं हैं मेरी ज़िन्दगी में अगर, सूनी-सूनी सी लगती है ड़गर। हमें ही हमारी नहीं है खबर, किसी की हमको लगी है नजर। जुबाॅं चुप […]