अन्न उपजाऊं फिर खाना खाऊं, जन्म ले लिया किसान के देश कहे अन्नदाता मुझको, बैठा हूं सड़कों पर शान से। दिल्ली के बॉर्डर पर पड़ा हूं, अपने हक की खातिर मैं खेत छोड़ बॉर्डर पर […]

पर्वतों की गोद से निकल, झरने का जल बह चला। मिलन करूं मैं धरा से, यह कह कर चला। मिलन हुआ धरा से, पर उस मिलन में, घना ताप सहकर जल बना वाष्प,बने मेघ और […]

नारी को न समझो खिलौना मनुज, वह भी एक इंसान है। जन्म देती है इंसान को, सोचो कितनी महान है। बन कर मासूम सी बिटिया, तुम्हारा घर महकाने आई है। बन कर बहन जिसने, सजाई […]

कुछ दिनों से , एक इमारत का काम चल रहा था। वहीं आस-पास ही, कुछ मजदूरों का परिवार पल रहा था। छोटे-छोटे बच्चे, दिन भर खेलते रहते कुछ खेल। एक दूजे की कमीज़ पकड़कर, बनाते […]

लाल ओढ़नी ओढ़ कर, देखो पलाश इठलाते हैं। वन में फैली है अग्नि ज्वाला, ऐसा स्वरूप दिखलाते हैं। होली आने से पहले ही, पलाश ने कर ली तैयारी। लाल रंग के पुष्प खिला कर, महकाई […]

माघ मास का दिन पंचम, खेतों में सरसों फूल चमके सोने सम। गेहूं की खिली हैं बालियां, फूलों पर छाई बहार है, मंडराने लगी है तितलियां। बहार बसंत की आई है, सुखद संदेशे लाई है। […]

बैठे हैं आशा का दीप जलाए, उम्मीद की लौ मन में लगाए। व्यथा का तिमिर अड रहा, नैराश्य का आंचल बढ़ रहा नेत्र नीर नैनों में आए, प्रेम की दिल में ज्योत जलाए मन के […]

अपने मन का हर भाव लिखा करती हूं, कभी-कभी दुख तो कभी, अनुराग लिखा करती हूं। छोटी-छोटी मेरी खुशियां लिखने से बड़ी हो जाती हैं। बड़े-बड़े दुख के सागर, फ़िर मैं पार किया करती हूं। […]

बहुत दुख भरा दिवस है, आज राष्ट्रीय शोक का। टूटी थी किसी की राखी, और किसी मां की उजड़ी कोख का। इस दुख भरे दिवस को , आज,प्रेम दिवस ना कहना। आज ही के दिन….. […]

कोई सो रहा हो, शयन कक्ष में अंधकार भी हो रहा हो, सूर्य की किरणें आएंगी, आ कर उसे जगाएंगी ऐसा वह सोच रहा हो किंतु यदि उसी ने, किरणों के प्रवेश का, बंद कर […]

तुमने जो किया सब भला ही किया, तुमने जो दिया सब भला ही दिया। आरम्भ भी तुम्हीं से और अन्त भी तुम्हीं तक, तुम्हारा बहुत-बहुत आभार ज़िन्दगी । बिखरते ही जा रहे थे, एक माला […]

उत्तराखंड की ऋषि गंगा में, ढह गया एक हिम-खंड। कुछ ही पलों में गिरी हिम-शिला, और नदिया उफन गई, ढह गए और बह गए, उस नदिया में घर कई। एक सुरंग में काम कर रहे, […]

वाणी से ही विष बहे, और वाणी से ही,बहे सुधा-रस धार। मीठी वाणी बोलिए, यही जीवन का सार। कण-कण में ईश्वर बसते, यही प्रकृति का आधार। निज वाणी से मनुज, न करना किसी पर प्रहार। […]

आजकल चाय कॉफी का है सहारा, इसके बिना दिन कटे ना हमारा। हमें सिर उठाने की भी फुर्सत नहीं है, कभी कॉपी जांचो कभी प्रश्नपत्र बनाओ, कोई छात्र विद्यालय न आए तो उसको मनाओ। करके […]

सिर पर दुपट्टा मेरा, पैरों में झांझर। कमर में पानी की गगर बोले, धीरे-धीरे चल गोरी गांव में आकर, झांझर के घुंघरू छम-छम बोलें। सिर पर दुपट्टा मेरा, माथे पर बिंदिया है। कानों में मैंने […]

जब आंख से एक आंसू छलका, हो गया मन कुछ हल्का-हल्का। निकल गया था कुछ रुका-रुका सा, एक गुबार बीते कल का। वजन था आंसुओं में भी, कभी सोचा नहीं था ये संयम रखते रखते, […]

विद्यालयों में रौनक लग गई, देखो फ़िर से कक्षाएं लग गई। फ़िर से बच्चों का है शोर, प्री बोर्ड का अब है जोर। बच्चों मास्क लगाकर आओ, शिक्षा संग सेहत भी पाओ। मिल-जुल कर रहो […]

शुभ संकष्ट चतुर्थी आई है, गणपति का आशीष लाई है। भोग लगाएं तिलकुट का, हर बाधा दूर भगाई है। इस दिन गणपति की उपासना से, हर संकट का नाश हो, तन निरोगी और दीर्घायु बने, […]

शिशु वस्त्रालय के पुतले से, एक बालक कर रहा था बातें , कितने सुंदर वस्त्र तुम्हारे एक भी ऐसे नहीं पास हमारे। परसों मेरा जन्म-दिन है, नए वस्त्र पहनने का मन है, मां को मालकिन […]

पौष पूर्णिमा के चंद्र देखो, नभ में कैसे चमक रहे हैं। सर्द रातों में चांदनी सहित, देखो ना कैसे दमक रहे हैं। चांदनी भी ठंड में सिमटी सी जाए, चंद्र उसको देख-देख मुस्काएं। यह ठंड […]

समय कीमती धन है सबसे, सृष्टि का निर्माण हुआ है तब से। समय खर्च करने से आपको, कुछ धन मिल सकता है। किंतु धन खर्च करने से, बीता समय नहीं मिलता है। सोच समझ कर […]

यदि इच्छा-शक्ति हो सबल, तो हर कार्य करना हो सरल। योग्यता यदि कम भी है तो, इच्छा-शक्ति का विस्तार करो। किसी कार्य को कभी ना समझो भार, हर दायित्व से प्यार करो। फ़िर कठिन डगर […]

इन मैले वस्त्रों में घूमूं, अच्छा नहीं लगता है। मैं भी कुछ बनूं,उडूं गगन को चूमूं, मेरा मन भी करता है। माँ संग जाना बर्तन धोना, अच्छा नहीं लगता है। मैं भी कुछ पढूं-लिखूं, मेरा […]

गांव में आई हूं मैं । बहुत दिनों के बाद। खेतों में सरसों पीली देखी, गगन की रंगत नीली देखी। खूब चमकते तारे देखे, बहुत दिनों के बाद। गेहूं की सुनहरी बाली देखी, तरुवर की […]

सुन्दर-सुन्दर झांकियों में समाया भारत, आज राजधानी के राजपथ पर आया भारत। केरल कर्नाटक आंध्र प्रदेश अरुणाचल, सब की झांकी आई है। केरल ने नारियल के सुनहरे फाइबर से, सारी झांकी सजाई है। कर्नाटक ने […]

भारतीय होने पर गर्व है, आज 26 जनवरी का पर्व है। देश के दुश्मनों को मिलकर हराएं, आओ हर घर में तिरंगा फ़हराएं। ना केवल जश्न मनाना है, ना केवल झंडा फ़हराना है, जो कुर्बान […]

स्वप्न पलकों पर सुहाने सजते रहे, दीप मोहब्बत के जलते रहे। धड़कन भी गीत गुनगुनाने लगी, सांसे भी कविता सुनाने लगीं। पायल के घुंघरू सरगम बजाने लगे, कलाई के कंगन गीत गाने लगे, धानी चुनर […]

उस रात बहुत रोई थी, बहुत देर में मैं सोई थी। स्वप्न में तुम्हें बुला कर, कांधे पर सर रखकर, रोते-रोते सोई थी मैं उस रात बहुत रोई थी। यह था नेह तुम्हारा, एक बार […]

इस सर्दी के मौसम में, दिन कितनी जल्दी ढलता है। जिसके घर में प्रतीक्षारत हो कोई, उसका पग घर की ओर, जल्दी-जल्दी चलता है। इस सर्दी के मौसम में, दिन कितनी जल्दी ढलता है। जो […]

रविवार की छुट्टी थी, पर कोहरा कर्तव्य निभाने आ गया सर्दियों के मौसम में, और सर्दी बढ़ाने आ गया। धूप भी डर कर छुप गई है, ठंड का डंडा चलाने आ गया। घूम रहा है […]

बेटियों का कल बेहतर बनाने को, आओ उनका आज संवारें। बेटी पर अभिमान करो, जन्म लेने पर उसका सम्मान करो। बेटी को शिक्षा का अधिकार दो, बेटी को भी बेटों जैसा ही प्यार दो। उसकी […]

एक ऐसी ज़िन्दगी, जो किसी कला के साथ, एकान्त में जीना सिखा दे, स्वयं के लिए कुछ वक्त देना सिखा दे। प्रभु ने किया मुझे सम्मानित, एक ऐसी ही कला से जिसे लोग प्रभु का […]

कागज़ की कश्ती लेकर, दरिया पार करने चल दिए। हम कितने नादान थे, अरे! यह क्या करने चल दिए। बचपन तो नहीं था ना, कि कागज़ की कश्ती चल जाती, भरी दोपहर में यह क्या […]

कौन हमसे आगे निकल गया, कौन हमसे पीछे रह गया, केवल यही ना देखना मानव, देखना है तो यह भी देखना कि, कौन हमारे साथ है, जुड़ना बहुत बड़ी बात नहीं, जुड़े रहना बहुत बड़ी […]

**हास्य रचना** हिन्दी की परीक्षा थी उस दिन, चिंता से हृदय धड़कता था बूंदा-बांदी भी हो रही थी, रह-रहकर बादल गरजता था। भीगता-भागता विद्यालय पहुंचा, पर्चा हाथों में पकड़ लिया, फ़िर पर्चा पढ़ने बैठ गया, […]

प्रकृति से दूर हो रहा मानव दु:खों से चूर हो रहा मानव, वन प्रकृति की आभा बढ़ाते , शुद्ध पवन दे उम्र बढ़ाते वृक्ष बचाओ वृक्ष लगाओ वरना एक दिन पछताओगे, ना खाने को भोजन […]

किस्मत से ही मिलती है जगह किसी दोस्त के दिल में, यूं ही तो कोई शख्स, जन्नत का हकदार नहीं होता। अच्छे दोस्त मिलते हैं, अच्छे नसीब से ही, यूं ही तो किसी को किसी […]

नव वर्ष की उमंग सी होती है बेटियां, संगीत की तरंग सी होती है बेटियां मां-बाप के हर दर्द में रोती हैं बेटियां, सागर से निकले मोती सी होती है बेटियां सुमधुर काव्य-गायन सी होती […]

दिनकर आए हैं कई दिनों के बाद, विटामिन डी ले लो। बांट रहे हैं मुफ्त में सौगात, विटामिन डी ले लो। बातें करो धूप संग कुछ देर बैठ कर, किरणों को बैठाओ देकर आसन दिनकर […]

शब्द चाहे सरल हों, या फिर हों जटिल हृदय को करें प्रसन्न तो अर्थ है, वरना सब व्यर्थ है। यदि आपके शब्द, किसी के ह्रदय को करें स्पर्श तो समझो वाणी और कलम में, सरस्वती […]

निर्भय आगे बढ़ता चल, कोई रोके कोई टोके, किसी की बात से ना जल। किसी को देख कर बढ़ते, अक्सर लोग करते छल। कंटक बिछाने राहों में, कुछ हाथ आएंगे तो कंटक हटाने राहों से, […]

जब बच्चों में हैं भगवान, फिर क्यों मम्मी पापा खींचे कान क्योंकि कभी-कभी भगवान, शैतानी करने लगते हैं, बन करके नादान शोर मचाते हैं दिनभर, चुप हो जाएं तो है इनका एहसान अपनी मन मर्जी […]

देश में कोरोना से निपटने के टीके आ गए, बेफिक्र हो इनको लगवाया जाए। यह है इतिहास का सबसे वृहद अभियान, इसने भारत के सामर्थ्य को दिलवाया सम्मान। दिलवाया सम्मान, सभी देश तारीफ़ कर रहे, […]

मेरे घर के सामने वाले पड़ोसी ने, अपने घर की इमारत ऊंची उठाई। घर उनका है मैं कुछ कह भी ना पाई, पर मेरे आंगन की धूप हवा और चांदनी ने मुझसे शिकायत लगाई, फ़िर […]

15 जनवरी को हम थल सेना दिवस मनाएं, 73वें थल सेना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं तिरंगे की शान हैं सैनिक, भारत का मान हैं सैनिक, पूरी रात जो जागे सीमा पर, उसी का नाम है […]

फेंक रहे थे जब तुम खाना, मैं भोजन की आस में थी। रोटी संग सब्जी जी भी है क्या, मैं वहीं पास में थी। तुमने शायद देखा ना होगा, मैं काले मैले लिबास में थी। […]

धीमी-धीमी धूप संग में, मीठी-मीठी खुशियां लाई। तिल, गज्जक की खुशबू लेकर, सर्दी में संक्रान्ति आई। मकर संक्रान्ति मनाना है, गंगा जी में नहाना है गंगा जी ना जा पाओ तो, घर में जरूर नहाना […]

क्या हुआ.. आज मौसम को, बादल ही बादल हैं गगन में, सूरज भी नहीं दिखा, सर्दी बढ़ती ही जा रही जाने क्या है इसके मन में, धूप का ना नामो-निशां कहां छिपी हैं सूर्य-रश्मियां, थोड़ी […]

बेरोज़गारी बढ़ती ही जा रही है, सुरसा के मुख सम खुलती ही जा रही है। चयन हुआ पर नियुक्ति नहीं है, युवाओं की प्रतीक्षा बढ़ती ही जा रही है। दो-दो वर्ष से प्रतीक्षा कर रहे […]