आज की नारी, सीमित नहीं है घर की चार दिवारी तक। तन से कोमल मन से सशक्त है नारी … निभाए दोहरी ज़िम्मेदारी। शिक्षा, चिकित्सा का क्षेत्र हो, या हो फिर विज्ञान। आज की नारी […]
आज की नारी, सीमित नहीं है घर की चार दिवारी तक। तन से कोमल मन से सशक्त है नारी … निभाए दोहरी ज़िम्मेदारी। शिक्षा, चिकित्सा का क्षेत्र हो, या हो फिर विज्ञान। आज की नारी […]
प्री बोर्ड की परीक्षा का, परिणाम जब आया उसने अपेक्षा से कम ही अंकों को पाया। “क्यों अंक अच्छे नहीं आए हैं तेरे” वह खाता था डाँट पिता से साँझ और सवेरे। रोज़-रोज़ की डाँट […]
दर्पण कब खुद सजता है, दर्पण के आगे हम सजें। चाँद रहता है गगन में, पर मुझे लगे उतरे मेरे आँगन में हर रात को जब मैं सो जाऊं, वो रजत छिड़कने आ जाए तारों […]
पता नहीं कहाँ खो गई, वह छोटी सी प्यारी सी चिरैया। फिर से खेलने, फुदकने को, आँगन में आओ प्यारी गौरैया। किस की बुरी नजर है तुम पर, यह हमको बतलाओ। चीं-चीं चूँ-चूँ करने को, […]
ख़ामोशी की तह में, छिपा कर रखते हैं हम, अपने सारे ग़म। क्योंकि कर के कोलाहल, दिखाकर दुःख दर्द अपने नहीं मिटेंगे अन्धेरे ज़िन्दगी के। पीना ही पड़ता है, ख़ामोशी का हलाहल ज़िन्दगी के कुछ […]
नफ़रतों के बीज बोकर, प्रेम की फ़सलें उगाना। कैसे सम्भव हो सकेगा, यह जरा हमको बताना। शूल बो कर शूल उगेंगे, फूल बो कर फूल उगेंगे। यह तो प्रकृति का नियम है, इसमें कैसा है […]
ज़िन्दगी की राहें, सदा कुछ सिखाती ही जाएँ। कुछ लोग हाथ पकड़ कर, काम निकाल, छोड़ दें झटक कर। पकड़ कर राह सच्चाई की, कुछ निभाएँ साथ भी। रंग-बिरंगी दुनिया है यह, रंग सभी दिखलाते […]
कठपुतली तो देखी होगी ना…. हाँ, वही काठ की गुड़िया। जिसकी डोर रहती है सूत्रधार के हाथों में, वह अपनी उँगलियों से जैसे चाहे, उसे नचाता है…. दर्शकों को भी आनन्द आता है। लगता है […]
शिक्षा सबके लिए जरूरी, शिक्षा बिन ज़िन्दगी अधूरी। शिक्षा से ही है सम्मान, शिक्षित की एक पृथक पहचान। शिक्षा समृद्धि की कुंजी है, शिक्षा से मिलें संस्कार। शिक्षा मानवता का धर्म सिखाए, शिक्षा से हो […]
ज्यों सूर्य की किरण, मिटा देती है धरा का तम। वैसे ही एक आशा की किरण, संचार कर देती है खुशियों का बन कर जीवन की तरंग। आशा न टूटे कभी, निराश न होना मनुज। […]
अभी कोरोना खत्म नहीं है, अभी से घर से क्यों निकल रहे हो। अभी तो वैक्सीन लगी नहीं है, बढ़ रहा है यह रोग फ़िर से, यह बात समझ क्यों नहीं रहे हो। मास्क भी […]
*******हास्य रचना****** जब कोई करता है, मेरी कविता की बुराई, आत्मा रोती है मेरी, देती है रो-रो दुहाई। मरहम सा लग जाता है, उस वक्त….. जब आती हैं समीक्षाएं, दिल प्रसन्न हो उठता है। देने […]
कोरोना खत्म नहीं हुआ है, फिर भी बाहर घूमें लोग। मास्क भी नहीं लगा हो तो, लग जाएगा रोग। लग जाएगा रोग सेहत ठीक ना होगी। कहे “गीता” बाहर घूमना बंद करो तुम, नहीं रहोगे […]
सुना दो आज मुझको तुम, नज़्म कोई मोहब्बत की। हो जिसमें बस बात, कुछ तेरी कुछ मेरी। छोड़कर सब दुख दर्द दुनियां के, चलो, वक्त कुछ साथ बिताते हैं। कह दो आप कुछ अपनी, कुछ […]
कर्म किए जा ए इन्सान, फल की चिंता मत करना फल तो देगा ही भगवान। महाभारत के दौरान, अर्जुन के हृदय में उत्पन्न हुए थे कुछ भ्रम-भाव, उनका करने समाधान। श्री कृष्ण ने गीता का […]
माँ ममता का सागर है, प्रेम का छलकता गागर है। माँ की महिमा को यूं जानें, कि माँ हमें इस दुनियाँ से, नौ माह पूर्व ही जाने। हमें यह दुनियाँ दिखाने को, प्रभु ने चुन […]
देखो ये बादल बिना फ़िकर उड़ते फिरते इधर-उधर। कभी-कभी करते शैतानी, छम-छम खूब बरसाते पानी। सूख रही थी मेरी बगिया, जल बरसाने आए मेघा। बरखा रानी को संग लाए। बरस गई जब बरखा रानी, चलने […]
नारी स्नेह की मूरत है, लुटाती प्रेम और ममता। पुरुष पौरुष की सूरत है, उसका प्रेम नहीं थमता। देता है अधिक दिखावा करे कम, दे खुशियां मिटा दे गम। नारी ममता की मूरत है, पुरुष […]
हर ओर सत्यम शिवम सुंदरम, हर हृदय में हर-हर हैं। गरल कंठ में धारण कर, वो सरल भोले शंकर हैं व्याघ्र खाल तन पर लपेटे, भस्म-भभूत ललाट पर लगाए डम-डम डमरू बाजे जिनका, वो गिरीश […]
अपनी अपनी मेहनत का, खाए सब संसार कह गए विद्वान लोग, यही जीवन का सार जैसे हांडी काठ की, चढ़े ना दूजी बार। चढ़े न दूजी बार, एक बार ही चढ़ती है, मेहनत ही है […]
फिज़ाओं में गुलाब से बिखर गए, उनके आने से हम और निखर गए। सखियां भी पूछे हमें घेर कर, किसका हुआ है यह तुम पर असर। इठलाती, शरमाती सी फिरती हूं, लहराती जाए मेरी नीली […]
खुश रहो कहकर, दुआओं की पोटली माता-पिता ने, चुपके से सर पर छोड़ी। पता भी न चलने दिया, हर बार यही किया। और हम नासमझ, ज़िंदगी भर कामयाबी को, अपना मुकद्दर मानते रहे।। _____✍️गीता
हड़बड़ी में कभी-कभी, हो जाती है गड़बड़ी। इसलिए जो भी करना है सोच समझ कर करना है। कोई हमें डराए तो, नहीं किसी से डरना है। सूझ-बूझ से काम करें हम, आए रौशनी मिटेंगे सारे […]
होली के रंगों सी मुस्कुराए, दीवाली के दीपों सी जगमगाए, बेटी बनकर घर महकाती है, बहन बनकर लुटाती है स्नेह बनकर वनिता और वधू दूजे का घर अपनाती है। प्रयत्न करती है,सबको सुख देने का, […]
जिन्दा रहते हैं मोहब्बत के एहसास, करते हैं सदैव हृदय में वास। महकते हैं गुल बनकर यादों में, नहीं मोहताज हैं किन्हीं वादों के। बहुत खास होते हैं ये एहसास, प्रिय के पास होने का […]
मैं दौड़ती ही जा रही थी, ज़िन्दगी की दौड़ में। कुछ अपने छूट गए इसी होड़ में। मैं मिली जब कुछ सपनों से, बिछड़ गई कुछ अपनों से। दौड़ती जा रही थी मैं, किसी मंज़िल […]
नेकी कर दरिया में डाल, यह कहावत बड़ी कमाल। आओ सुनाऊं एक कहानी, नेकी करने की उसने ठानी। उस ने नेकी कर दरिया में डाली, वह नेकी एक मछली ने खा ली। नेकी खाकर मछली […]
मुस्कुरा कर बोलना, इन्सानियत का जेवर है। यूं तेवर न दिखलाया करो, हम करते रहते हैं इंतज़ार आपका, यू इंतजार न करवाया करो। माना गुस्से में लगते हो, बहुत ख़ूबसूरत तुम पर हर समय गुस्से […]
सब्र की जरूरत है, समय सब कुछ बदलता है। परिवर्तनशील इस संसार में, सांझ तक सूर्य भी ढलता है। जीवन में श्रेष्ठ कर्म करो, यह रामायण सिखाती है। द्वेष,बैर भाव और लालच को, महाभारत दर्शाती […]
एक युवती बन कर बेटी, मेरे घर आई है। अपने खेल खिलौने माँ के घर छोड़कर, हाथों में लगाकर मेहंदी और लाल चुनर ओढ़ कर मेरे घर आई है। छम छम घूमा करती होगी, माँ […]
कान्हा ने बोला राधा से, तेरी ये अखियां कजरारी। मन मोह लेती हैं मेरा प्यारी, इठलाती फिर राधा बोली। मोहन तुम्हारी मीठी बोली, हर लेती है हिय को मेरे, भागी भागी आती हूं सुन, मीठी […]
क्रोध हर लेता है मति, करता है तन-मन की क्षति। क्रोध की ज्वाला में न जल, क्रोध तुझे खाएगा प्रति पल। क्रोध का विष मत पीना, मुश्किल हो जाए जीना। छवि नहीं देख पाता है […]
जब हर ओर निराशा हो, आशा की किरण दिखा देना। जब राहों में हो घोर निशा, दीपक बन कोई राह दिखा देना। कोई साथ दे ना दे, तुम अपना हाथ बढ़ा देना। दर्द में जब […]
जंगल का दोहन कर डाला, इन्सान तेरे लालच ने। कुदरत के बनाए पशु-पक्षी भी ना छोड़े, इन्सान तेरे लालच ने। हाथी के दांत तोड़े, मयूर के पंख न छोड़े मासूम से खरगोश की नर्म खाल […]
किस मोड़ पर मंज़िल कर रही है इन्तज़ार, क्या पता … किस राह में हो जाए दीदार-ए यार क्या पता… जीत एक रास्ता है, हार एक अनुभव है जीवन का। कल क्या हो, किसी को […]
भवन बनाए आलीशान, फ़िर भी उसके रहने को नहीं है उसका एक मकान। झोपड़पट्टी में रहने को मजबूर है हाँ, वह एक मज़दूर है। मेहनत करता है दिन रात, फ़िर भी खाली उसके हाथ। रूखी- […]
सुन्दर सपने देख रही थी, अपनी माँ की कोख में। मात-पिता का प्यार मिलेगा, भाई का भी स्नेह मिलेगा यह सब सुख से सोच रही थी, सहसा समझ में आया कि एक कैंची मुझको नोंच […]
अपनी माँ को छोड़ कर, वृद्धाश्रम के द्वार पर। जैसे ही वो बेटा अपनी कार में आया, माँ के कपड़ों का थैला, उसने वहीं पर पाया। कुछ सोचकर थैला उठाकर, वृद्धाश्रम के द्वार पर आया। […]
सब फूलों ने मिलकर, महफ़िल एक सजाई। किस की सबसे सुन्दर रंगत, और किस की महक मन भायी। बेला चमेली और मोगरा ने महक कर, वेणी खूब सजाई। गेंदा और गुलाब ने, मन्दिर में धूम […]
सागर ने सरिता से पूछा, क्यों भाग-भाग कर आती हो। कितने जंगल वन-उपवन, तुम लांघ-लांघ कर आती हो। बस केवल खारा पानी हूं, तुमको भी खारा कर दूं। मीठे जल की तुम मीठी सी सरिता, […]
हवाओं ने मौसम का, रूख़ बदल डाला। बसन्त के आगमन का, हाल सुना डाला। नवल हरित पर्ण झूम-झूम लहराए। रंग-बिरंगे फूलों ने, वन-उपवन महकाए। बेला जूही गुलाब की, सुगंधि से हृदय हर्षित हुआ जाए। कोमल-कोमल […]
पारिजात के फूल झरे, तन-मन पाए आराम वहां। स्वर्ग से सीधे आए धरा पर, ऐसी मोहक सुगंधि और कहां। छोटी सी नारंगी डंडी, पंच पंखुड़ी श्वेत रंग की। सूर्य-किरण के प्रथम स्पर्श से, आलिंगन करते […]
“बदली जो उनकी आंखें इरादा बदल गया। गुल जैसे चमचमाया कि, बुलबुल मसल गया। यह कहने से हवा की छेड़छाड़ थी मगर खिलकर सुगंध से किसी का, दिल बहल गया।” सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की, […]
किसी की सिसकियां सुनती थी अक्सर, कोई दिखाई ना देता था। देखा करती थी इधर-उधर, व्याकुल हो उठती थी मैं, लगता था थोड़ा सा डर। एक दिन मेरा मन मुझसे बोला.. पहचान मुझे मैं ही […]
कहती है निशा तुम सो जाओ, मीठे ख्वाबों में खो जाओ। खो जाओ किसी के सपने में, क्या रखा है दिन-रात तड़पने में। मुझे सुलाने की कोशिश में, जागे रात भर तारे। चाँद भी आकर […]
मूसलाधार बारिश से जब, बर्बाद हुई फ़सल किसान की बदहाली मत पूछो उसकी, बहुत बुरी हालत है भगवन्, धरती-पुत्र महान की। भ्रष्टाचार खूब फैल रहा, काले धन की भी चिंता है। मगर किसी को क्यों […]
वह पढ़ना चाहता है जीवन से लड़ना चाहता है। आगे बढ़ना चाहता है किंतु क्या रोक रहा उसको, कोई टोक रहा उसको बाप कहे कुछ कर मजदूरी, ऐसी भी क्या है मजबूरी चंद सिक्कों की […]
वो बूढ़ी थी, गरीब थी भीख नहीं मांगी थी उसने, पैन बेच रही थी राहों में मेहनत का खाने की ठानी, मेहनत का ही खाती खाना मेहनत का ही पीती पानी। कहती थी यह पैन […]
अंधा ना कहो आँखों वालों, मुझे नेत्रहीन ही रहने दो। आँख नहीं ग़म का सागर है, कुछ खारा पानी बहने दो। तुम क्या समझो आँखों का न होना, एक छड़ी सहारे चलता हूं। अपने ही […]
आज फ़िर चाँद परेशान है, प्रदूषण में धुंधली हुई चाँदनी तारे भी दिखते नहीं ठीक से, आज आसमान क्यों वीरान है। आज फिर चाँद परेशान है। प्रदूषण का असर, चाँदनी पर हुआ चाँदनी हो रही […]
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