ये बेचारा दिल बस तुम पर मरता है पागल है जो तुमसे इतना प्यार करता है तुम्हारी बेरुखी से तो मौत अच्छी है पर ये दिल एक तेरी ख्वाहिश में धड़कता है…
ये बेचारा दिल बस तुम पर मरता है पागल है जो तुमसे इतना प्यार करता है तुम्हारी बेरुखी से तो मौत अच्छी है पर ये दिल एक तेरी ख्वाहिश में धड़कता है…
आज कुछ परेशान-सी हूँ मैं तेरी बेरुखी से हैरान-सी हूँ मैं जमीं पर पैर भी नहीं रुकते तितलियों के पंख भी रचते खाली मैदान-सा है दिल मेरा जहाँ परिंदे भी नहीं बसते दिल के फैसलों […]
आज मन में विचित्र-सा खयाल आया मेरा मन दुःखा और भर आया क्यों सदियों से प्रेंम की परीक्षा होती है क्यों पुरुष के पीछे स्त्री रोती है होती क्यों है हमेशा एकतरफा मोहब्बत क्यों कृष्ण […]
करता है कौन, किससे प्यार यहाँ ? प्यार तो है दो दिलों का व्यापार यहाँ… जिसमें अपनी पूंजी कोई और लगाता है पर उसका मुनाफा कोई और उठाता है…
वो आज कहने लगे हमसे लौट आओ फिर से मेरी जिन्दगी में बहार लौट आएगी… मैंने एक धुन में कहा- मैं गुजरा वक्त हूँ साहब जो घड़ी बीत गई फिर ना लौट आयेगी…
कभी हँसना कभी रोना सिखाती है जिन्दगी दो राहगीरों को पास लाती है जिन्दगी जब प्यार में पड़कर तड़प उठते हैं दो दिल क्या बताऊं कितना मुस्कुराती है जिन्दगी…
कितनी शिद्दत से हम तुझे चाहते थे तुझको अपना नसीब मानते थे.. ********************************* तुमने हमें छोंड़कर गैरों को मोहब्बत बक्शी पर हम तो फकत तुझे अपना मानते थे..
क्या कहें अब जब तू खफा ‘मैं फकीर और तू खुदा’ इबादत में तेरी मिट गया मेरा मजहब और मेरा खुदा…
ऐ खुदा ! क्यों है तू खफा किस बात की तू मुझे देता है सजा मेरा मुकद्दर रूठा मुझसे हमदम हुआ जबसे जुदा…
मेरे जज्बातों की कद्र कभी नहीं की उसने फकत आँसुओं की सौगात दी उसने हम उसी की खातिर मिट गये यारों! मेरे वजूद की कभी ना फिक्र की जिसने…
भागते रहे अक्सर हम उन लोगों के पीछे जिन्हें हम प्यार करते थे ! पर कुछ हाथ ना आया सिर्फ मायूसी के सिवा अब बस हम उनकी कद्र करते हैं जो हमारी कद्र करते हैं…
पैर जमीं पर ही रहने दो मेरे क्योंकि अक्सर आसमान की ऊंचाइयों से अपने दिखाई नहीं पड़ते…
थोड़ी देर के लिए थम गई थीं साँसें जब रुक गया था वो चलते-चलते, मुड़कर देखा एक बार जब उसने हम सहम गये और मध्यम हो गई साँसें.
यूं देखकर भी क्यों अनजान बनते हो देवता हो दिल के क्यों हैवान बनते हो मैं जानती हूँ तुम क्या हो क्यूं सबके सामने महान बनते हो..
वो हमसे कतराने लगें हैं धीरे- धीरे दूर जाने लगे हैं दिल में उनके जगह नहीं बची है हमारे लिए, तभी तो हमसे नजरें चुराने लगे हैं…
दीदार करके उसका मैं पाक हो गई मेरी मोहब्बत से जिन्दगी आबाद हो गई करता रहा वो मेरे इजहार का इन्तजार पर मैं किसी और की बाँहों का हार हो गई..!!
जाने क्या सोंचती रहती हूँ बस उसके ही खयालों में खोई रहती हूँ जिन्दगी अब फुर्सत कहाँ देती है अपनी उलझनों में ही उलझी रहती हूँ…
गीतों में सबसे प्यारा गीत हो तुम मेरे हमदम मेरे मनमीत हो तुम नहीं चाह मुझे आसमां की बुलंदियों की मेरी तो जीत हो तुम…
दिल टूट जाने के बाद भी प्यार है तुमसे ऐसा क्यों है नहीं जानती हूँ मैं बस इतना ही मालूम है मुझे कि आज भी बेपनाह तुझे चाहती हूँ मैं…
कभी-कभी सोंचती हूँ कि दूसरों को जो राय देती हूँ क्या उसे मैं स्वयं अपनाती हूँ ! क्या मैं अपने अन्दर की गन्दगी मिटा पाती हूँ ? जवाब आता है नहीं मैं तो सिर्फ भाषण […]
दशहरे का रावण सबसे पूछ रहा है हर वर्ष देखा है मैंने स्वयं को दशहरे पर श्रीराम के हाथों से जलते हुये, सभी को बुराई पर अच्छाई की जीत बताते हुये। उस लंकेश को तो […]
ना जाने आप में ऐसा क्या है जो सबका मन हर लेते हो… थोड़ी देर बैठो जिसके करीब उसके दिल में घर कर लेते हो..
तुम कहते हो प्यार नहीं तुमसे मान लेती हूँ तुम्हारी बात भी पर हम दोनों के बीच जो था वह सब क्या था ? रख लेते थे तुम मेरी गोद में सिर अपना तो चैन […]
सब सो जाते हैं पर मुझे नींद नहीं आती जितना उसको पाना चाहूँ उतना ही दूर चली जाती..! पलकें बंद करती हूँ स्वागत में उसके मन भी शांत रखती हूँ सुनती हूँ सदाबहार नगमें उसके […]
ना जाने किन खयालों में खोई रहती है दुनिया मेरा-मेरा करती रहती है दुनिया अपनी तो देह भी साथ नहीं देती सब कुछ यहीं रह जाता है फिर किस मद में चूर रहती है दुनिया […]
कितनी पागल हूँ मैं ये आज सोंचती हूँ तेरे चेहरे पर हर बार मरती हूँ.. सुनती हूँ तेरी आवाज तो मयूर-सा नाच उठता है मन मेरा तेरे करीब होने पर सिहर उठता है तन मेरा.. […]
बाहर से आवाज आई जब मैंने दरवाजा खोला तो तुम थे… तुम्हें सामने देखकर थोड़ी शर्म आई मैं रुकना चाहती थी कुछ बोलना चाहती थी तुम्हें छूकर महसूस करना चाहती थी पर शर्माकर वहाँ से […]
हमेशा रावण को क्यूं फूंका जाता है रावण तो कब का मर गया ! आज तो विभीषण ही विभीषण हैं उन्हें पहचान कर सचेत रहने की जरूरत है
दुनिया में हर तरीके के लोगों से मिलने के बाद दर-दर की ठोकरें खाने के बाद सभी के प्यार को आजमाकर गैरों से दिल पर चोट खाकर समझ आ गया मुझको, निरमोही है पर सच्चा […]
औरत मजह कोई दिल बहलाने वाला खिलौना नहीं जीती-जागती इंसान है कोई क्यों नहीं समझता कि उसमें भी जान है पुरुष स्त्री को सिर्फ विलासिता की वस्तु समझ लेता है उसकी भावनाओं के संग खेलकर […]
जीवन की रेखा बहुत लम्बी देखकर मेरी आँखों में आँसू आ गये आखिर अभी और कितनी तकलीफें झेलनी हैं मुझे ! कब तलक दर-दर की ठोकरें खानी हैं कब तलक आँसू यूं ही बहाने हैं […]
जान जोखिम में डालकर मेरी जान बचाई उसने अधजले बदन को भी प्यार से सराहा उसने मेरे आत्मविश्वास को अपने सहयोग से बढ़ाया उसने विवाह करके मुझसे अपना वादा निभाया उसने दिया जीवन भर अपना […]
सच में बहुत बुरी हूँ मैं कमियां ही कमियां हैं मुझमें एक भी अच्छाई नहीं है पर कमियों के साथ ही जो स्वीकार करती है मुझे वो है मेरी माँ… हर गलती पर मुझे डाटती […]
जब तुम सामने आए हम कुछ ना बोल पाए होंठ सिल गये और हाथ थरथराये क्या हुआ मुझको अचानक यह समझ ना मैं सकी कहना जो था मुझको तुमसे हाय! क्यों ना कह सकी कुछ […]
बहुत आहत हूँ मैं यूं समझ लो टूट गई हूँ मैं मेरी सहेली की दी हुई आखरी निशानी भी टूट गई सालों पहले जो घड़ी दी थी उसने आज टूट गई रोई हूँ बहुत परेशान […]
कई महीनों बाद आज अलमारी खोली तमाम तोहफे मिले कुछ किताबें और कुछ पुरानी तस्वीरें भी मिलीं उन तोहफों को घण्टों देखकर पुरानी यादें ताजा करती रही देखती रही मैं अपनी एक-एक तस्वीर को कितनी […]
आज बाजार में तुम्हें अचानक देखा ! मानो कोई सपना देखा पता नहीं किन खयालों में खोई थी कल रात जरा देर से सोई थी मन ही मन सोंच रही थी काश! तुम्हारे साथ बाजार […]
तमाम ख्वाहिशें नहीं हैं मेरी बस ‘दो मुट्ठी आसमां’ की ख्वाहिश है पंख हों उड़ने का हौसला हो और हों बेहिसाब मंजिलें उड़ चलूं जिसमें मैं अकेली ना हो कोई मुश्किलें.. चाहें जिस राह पर […]
मैं सोचती थी तुम बदल गये हो नये रंग, नए ढाँचे में ढल गये हो.. पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ तुम जैसे थे वैसे ही हो.. बस कुछ लोग पीठ पीछे तुम्हारी बुराई किया […]
दिल पर एक बोझ लिये घूमती हूँ ना जाने कहाँ रहती हूँ क्या सोंचती हूँ दिल की बेचैनी और बढ़ जाती है जब तेरे करीब से गुजरती हूँ तुम्हें हो ना हो मेरी जरूरत पर […]
अगर तुम होते तो और उम्मीद होती जीने की ————————————————– बहाने चार होते दुनिया से दिल लगाने के|
जो मेरा जिक्र किया करता था वो ही मेरी फिक्र किया करता था हम उसकी कद्र किया करते थे वो मेरी कद्र किया करता था
तुम नहीं हो तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता तन्हाई से निकलने का रस्ता नहीं मिलता गुजरा जाता है यूं तो दिन धीरे-धीरे पर जिन्दगी तुझ बिन बिताना अच्छा नहीं लगता…
तुम नहीं हो तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता तन्हाई से निकलने का रस्ता नहीं मिलता गुजरा जाता है यूं तो दिन धीरे-धीरे पर जिन्दगी तुझ बिन बिताना अच्छा नहीं लगता…
हम तुम्हें भूल गये! यह गलतफहमी पालकर बैठे थे एक दिन आ गये तुम अचानक सामने तब से दिल हार कर बैठे हैं..
देवीगीत:- ‘नवरात्रि स्पेशल’ ********************* माँ शेरोंवाली तेरी जय होवे ओ जोतावाली तेरी जय होवे| ‘प्रज्ञा’ झुकाए तेरे चरणों में शीश माँ माँ शेरोंवाली तेरी जय होवे| पूरी कर दे माँ मुरादें अपने भक्त की ओ […]
खो गये सारे शब्द अब जाने कहाँ ! जज्बात भी चादर ओढ़ सो गये कल्पना भी अब कहीं विचरण नहीं करती सपने सारे सपने हो गये मेरे अन्दर की कवयित्री अन्तस के आरेख’ बन गई […]
अब मेरी कलम में वो बात नहीं रही दिल के अल्फाजों में वो बात नहीं रही… लिखने को तो लिख देते हैं टूटी-फूटी शायरी पर जो बात पहले की कविताओं में हुआ करती थी वो […]
आज तुमसे बात करके लगा यूँ लगा जैसे वर्षों बाद मेरी साँस में साँस आई.. ना तुम बदले ना तुम्हारा अंदाज जैसे तुम थे वैसे ही हो जैसी मैं थी वैसी ही हूँ.. बदला तो […]
हमें थोड़ा-सा वक्त और दो हम अच्छे बन जाएगे जैसा तुम कहोगी वैसा ही कर जाएगे जितना करीब आओगी मेरे तुम उतना ही सबसे दूर चले जाएगे वादा है मेरा प्रज्ञा’ तुमसे एक दिन हम […]
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