एक माटी का दीपक सिखा गया खुलकर हँसना, हँसकर जीना, जीकर अपना सपना पूरा करना एक माटी का दीपक सिखा गया….. बोला प्रज्ञा ! मत रो पगली आज तो है दीवाली अपनी मुझे जला तू […]
एक माटी का दीपक सिखा गया खुलकर हँसना, हँसकर जीना, जीकर अपना सपना पूरा करना एक माटी का दीपक सिखा गया….. बोला प्रज्ञा ! मत रो पगली आज तो है दीवाली अपनी मुझे जला तू […]
मुझको तो बस तन्हाई में ही जीना है सिसक-सिसक कर रहना है घुट-घुट आँसू पीना है कोई ना समझा मेरी पीर को तो तुम क्या समझोगे ! नहीं किया कभी प्यार किसी ने तो तुम […]
टिमटिम करता देखो दीपक बच्चों इसे सजा दो अपने घर के हर कोने को रोशन आज बना दो बाल दिवस है प्यारे बच्चों आज तुम्हारा दिन है खूब जलाओ दीपक, फुलझड़ी क्योंकि दीवाली का दिन […]
नम हैं लोचन तिमिर के चारों तरफ फैला उजाला चीरता तम को चला कौमुदी से भरा प्याला रात बैठी गगन में देख अचरज चकित थी आज धरती गगन से भी मनमोहक थी, स्वच्छ थी. आसमां […]
सुबह होने में अभी कुछ रात बाकी है सो जाने दो मुझको जरा कुछ रात बाकी है…. मुझको टूटकर बिखरने में लगेगा कुछ और वक्त ! क्योंकि मुझमें अभी कुछ आस बाकी है…. वो मुझसे […]
आई शुभ दीवाली देखो आई शुभ दीवाली टिमटिम करते देखो दीपक आई शुभ दीवाली धनतेरस को खूब खरीदा हमनें सोना-चाँदी सज-धज देखो लक्ष्मी माँ आई आई शुभ दीवाली नर्कचतुर्दशी को हमने झाड़ा घर का कोना-कोना […]
चाइनीज झालर नहीं दीये जलाओ किसी गरीब के घर रोशनी करके दीपावली मनाओ झुग्गी, झोपड़ी वालों के भी अरमान होते हैं किसी एक के घर में प्रकाश तुम फैलाओ यूं तो अरबों की बारूद में […]
जिन्होंने दूर अनेकों रोग किये औषधियों पर कितने शोध किये उन धन्वन्तरि को नमन करती है प्रज्ञा जिन्होंने लाखों तन नीरोग किये..
पी लेती हूँ घूंट जहर का अमृत का अरमान नहीं जो समझे मेरे मन को ऐसा कोई इंसान नहीं दीप जले सपनों के कई पर नींदों ने झकझोर दिये सुमन खिले दरवाजे पर थे पर […]
भाग्य कहाँ ले जाता है और कहाँ मैं जाती हूँ ! प्रीत के बदले प्रीत लुटाती प्रीत नहीं मैं पाती हूँ.. जीत सके जो मेरा मन किसी में ऐसी बात कहाँ ! तुझे छोंड़ मैं […]
गर पढ़ते हो जिस्म मेरा तो सुन लो क्या तुम इस लायक हो! दर्द दिया करते हो मुझको चैन नहीं आने देते पढ़ते हो बस रूप मेरा कभी रूह में क्यों नहीं झांकते ! हाँ, […]
पटाखे ना जलाओ मित्र दीपों को जलाओ अपने मन के अन्धकार को मिटाओ राम आये अवध में तो हे देशवासियों ! अपने क्षेत्र को दीपों से सजाकर दीपावली मनाओ पटाखे जलाने से होता है प्रदूषण […]
पहले रहती थी खिलखिलाती मुस्कुराती मैं कली फिर आया एक भंवरा मेरे सम्मुख हे अली ! पी लिया उसने मेरे जीवन का सारा रस अली मुस्कुराती कली फिर सिसकते हुए रोने लगी मेरे जीवन की […]
जो बंदे बकरा-मुर्गा काट छौंककर खाते हैं वो मानुष भगवान के घर में उल्टा लटकाए जाते हैं निर्जीवों का तो इस जग में कोई मान नहीं क्या जीवित जीवों में भी कोई जान नहीं ? […]
वो छोटे-छोटे मासूम से थे कमरे में मेरे बैठे थे मैं गई रात को देर से थी उस समय थोड़ी-सी सर्दी थी फिर देखा मैंने उनको तो मन में हमदर्दी जाग उठी वह सिकुडे़-सिकुड़े बैठे […]
जाने क्यूँ तुम मुझे इतना चाहते हो ना चाहते हुए भी प्यार जताते हो हम किसी और की अमानत हैं साहब! क्यों हम पर इतना प्यार लुटाते हो ?
मैं पैदा हुआ तो था कुछ अजीब फूटा हुआ था मेरा नसीब शंकर-पार्वती का मिश्रित रूप हूँ मैं चुप रहो अर्धनारीश्वर हूँ मैं बचपन से ही मेरे साथ भेदभाव होता था शीशे को देखकर मुस्कुराता […]
वो उठा ले झाडू तो सबकी शामत आ जाती है मेरे पूरे दिन की मेहनत ना रास किसी को आती है हाथ में उसके पानी पकड़ाओ तब वो मैडम पीती हैं उम्र में हैं मुझसे […]
यूं नजरों से ना देख मुझे रूह में झांक कभी मैं क्या हूँ उसका परिचय तू पाएगा तभी रूप तो मेरा उजला-उजला बस दिल थोड़ा-सा काला है बता रही हूँ तुझको नजरों से क्योंकि तू […]
सब मुझे देख रहे थे ऐसे जैसे मैं कोई चीज बिकाऊ कुर्सी, मेज खरीदने जैसे वो कर रहे थे भाव-ताव क्या मेरा कोई स्वाभिमान नहीं क्या मैं कोई इंसान नहीं लड़कियों का इस देश में […]
सब मुझे देख रहे थे ऐसे जैसे मैं कोई चीज बिकाऊ कुर्सी, मेज खरीदने जैसे वो कर रहे थे भाव-ताव क्या मेरा कोई स्वाभिमान नहीं क्या मैं कोई इंसान नहीं लड़कियों का इस देश में […]
माँ मुझे बुला लो कुछ दिन अपने पास यहाँ कुछ भी अच्छा नहीं लगता प्यार तो सब करते हैं पर फिर भी कुछ नहीं जचता गोल-गोल रोटियां बनाकर तू मुझे जबरदस्ती खिलाती थी बुरा लगता […]
बड़ी ठण्ड है माँ ! बर्फ पड़ रही है तू क्यों आग-सी तप रही है ? बाहर इतनी धुंध छाई है माँ मेरी जान पर बन आई है लगाकर छाती से माँ बोली आ बेटा […]
दिल में छुपा एहसास हो तुम ऱब से भी ज्यादा खास हो तुम.. हमारे बीच है मीलों तक की दूरी पर साँसों से भी ज्यादा पास हो तुम.. कड़वा है ये सारा जग हमदम पर […]
जब तन्हाइयों में भी आराम आने लगे जब ख्वाब खुली आँखों का आसमान पाने लगे दिल की जमीं जब भीगने लगे आँसुओं से चाँदनी रात में जब अरमान जागने लगे तब समझ लेना चाहिए कि […]
अशोक वाटिका में कितना शोक ! माता सीता का दुःख देख हनुमान सके ना खुद को रोंक माता सीता के अग्नि मांगने पर डाली मुद्रिका हनुमान ने राम की महिमा से अशोक वाटिका में गुञ्जन […]
हम आदतों से अब बाज आने लगे तुमसे दूरियां बनाने लगे रोया करते थे रात भर तुम्हें याद करते हुए अब हम अपने आँसू छुपाने लगे सिसकियां अब कमरे में ही बंद रहती हैं बाहर […]
वो शाम याद है तुम्हें ! तुम बैठे थे बस स्टाप पर मैं वहाँ आई और तुम चले गये एक बार भी मुड़कर नहीं देखा तुमने मुझे ! मैं तुम्हारी इस बेरुखी से नाराज हो […]
कोरोना ने छीन ली जान कितना बेबस है इन्सान | (१) घूमा रहा सड़कों पर देखो अपने घर के अन्दर देखो संकट में हैं प्राण | कितना बेबस है इन्सान || (२) अस्त हुआ प्रगति […]
एक ही तो खिड़की थी जिससे दीदार हो जाता था खिड़की खोलने-बंद करने में ही इजहार हो जाता था आज वो भी बंद कर दी तुमने.! अब वो हंसी नजारे कैसे होंगे ? भेजा करते […]
याद आई मुझे वो घड़ी मेरी बहन की शादी थी बुआ की वो प्यारी लाडली थी मैं गई थी थोड़ा देर से ही जाकर जल्दी तैयार हुई जयमाला की बेला थी सारी बहनों को संग […]
साजन गये परदेश वो ना आए सखी… मैंने राह देखी खूब वो ना आए सखी… चूड़ियां भी खनकाई पायल भी झनकाई सुंदरवाली सेल्फी भी भेजी पर वो ना आए सखी… व्रत रखा मैंने उनकी खातिर […]
चाँद ने गोद में जाकर हिमालय की बिछाया बिस्तर सोने के लिए तभी एक टिमटिमाता तारा आकर रोने लगा कहने लगा ऐ चाँद ! आज कोई तेरा इन्तजार कर रहा है भूखा प्यासा रहकर उपवास […]
चाँद को देखा और छुप गई अपनी चादर में प्रज्ञा पीपल की टहनी को हटाकर चाँद ने झाँका जब मुझको मैं भोली फिर थोड़ा मुसकाई मुझको जब आई लज्जा करवाचौथ का व्रत रखकर मैं चाँद […]
हाथों में मेंहदी खूब रचाई है लाल चूनर से सिर की शोभा बढ़ाई है शादी का लहंगा-चूड़ी पहनकर माथे पर सिंदूर की लम्बी रेखा बनाई है चमकती बिंदी और लाली से घर में फैली है […]
तपकर धूप से मुझमें निखार आया है, शोलों पर चलकर अब सम्हलना आया है। कायनात में लिखूँगी अपने प्यार की कहानी, जुनून से अपने अब यह विश्वास आया है।
वो हुनर में हमारी बराबरी करने चले थे अरे ! वो नासमझ हैं ये क्या करने चले थे हमने तो तबाह कर दिया खुद को मोहब्बत में तब जाकर लिखना आया है वो तो जल्दबाजी […]
उनका नंबर भी है और मुलाकात के सिलसिले भी होते रहते हैं मुकद्दर ऐसा है हम फिर भी रोते रहते हैं बात सदियों से नहीं हुई उनसे ना हम उनकी तरफ देखते हैं आ भी […]
मैं थककर चूर थी जा बिस्तर पर लेटी थी साँसें तेज थीं बदन में अकड़न थी आँखें अधखुली थीं शायद नींद थी कुछ पुरानी-सी यादें कर रही बेचैन थी वो बहुत देर से देख रहा […]
बीत गईं लाखों शामें पर ना भूली वो रात अभी तक | तुमने छोंड़ दिया था जिस पथ पर मैं बैठी हूँ उस राह अभी तक | तुम हो धड़कन तुम ही हो दिल मेरा […]
हम हर किसी में कमियां ढूंढते थे, जब आईने के सामने आए तो निःशब्द हो गये..
बहुत उंगली उठाते थे हम उस पर, आज वो चला गया तो भी बेचैन-से हैं हम..
जब वो रोता हुआ घर से गया तो समझ आ गया हमको, वो इतना भी बुरा ना था जितना हम उसे समझते थे..
रो रहा था वो भी रो रहे थे हम भी.. लेकिन ना उसे हमारे आँसुओं की परवाह थी और ना हमें उसके जाने की..
हालात इतने भी बुरे ना थे कि वो रुक नहीं सकता था, हम इतने भी मजबूर ना थे कि उसे रोंक नहीं सकते थे..
वो जाते-जाते एक सबक सिखा गया कि कोई किसी का नहीं होता और कोई किसी के लिए नहीं रोता चार दिन का मेला है ये जिन्दगी ना कोई किसी के साथ जाता ना कोई किसी […]
वह पत्थर तोड़ती थी पर दिल की कोमल थी अपने सीने से लगाकर बच्चों को रखती थी भूँख जब लगती थी उसको तो बासी रोटियाँ पोटली से निकाल कर खा लेती थी पर अपने बच्चों […]
तहे-दिल से शुक्रिया ! मोहब्बत में जो रुसवा किया तुमने, ————————————————- हम तो बर्बाद हो जाते जो थोड़ा प्यार दे देते…
तुम्हारे लिए ही तो गजल, नज्में लिखती हूँ मैं मैं तो कुरान में भी पढ़ती हूँ तुम्हें | तुम्हें खो देने का खयाल इतना तड़पा देता है मुझे रात को जब भी आँख खुलती है […]
तुमसे दूर जाने के बहाने बहुत हैं साहब!! ————————————————- पर तुम्हारे पास आने के बहाने ढूंढते हैं हम
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.