विश्व शांति हो हो जाय अब, बुद्ध होय चहुँ ओर
सुख की वर्षा होय तब,मन ज्यूँ वन का मोर
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युद्ध नहीं समाधान है, समस्याओ का जान
चाहे गीता भगवात, चाहे पढ़े कुरान
Author: राकेश पाठक
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युद्ध =दोहे
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कहर =दोहे
सूनी सूनी सड़क है, सूना है संसार
पतझड़ जैसे पतन है, विलख रहे परिवार
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घर में कैदी की तरह, जीवन रहे विताय
कहर भयानक है बहुत, कुछ भी समझ न आय -
दोहे =नारी
अबला नहिं सबला हुई, घर से पंख पसार
बैठी है सर्वोच्च पद, देख रही संसार
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नारी से दुनिया चले, नारी है बलवान
पूजा होती है जहां, रहते हैं भगवान् -
कदम हटा ले
जुल्म की दुनिया में कदम रखने वाले
अभी समय है पीछे हटा ले
मरने के बाद भी सुख नहीं पाएगा
जीते जी दुनिया को स्वर्ग बना ले -
सीखो
पाना चाहते हो तो खोना सीखो
हँसने से पहले रोना सीखो
पाना चाहते हो प्यार अगर
प्रेम के बीज बोना सीखो -
धार्मिक
धार्मिक कैसे कहे जो धर्म के नाम पर लड़ जाते हैं
मत पाने के लिए कुछ लोग दंगे करवाते हैं
चोला पहनने से कोई संत नहीं होता
धार्मिक वो है जो प्रेम के दीपक जलाते हैं -
दोहे =बुरे दिन
बुरे दिनों में ही सदा, आए ईश्वर याद
बांकी दिन करता नहीं, मन ईश्वर फरियाद
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सदा बुरे दिन नहिं रहे, सुख की कीमत जान
बुरे दिनों से जुड़ गया, है रिश्ता भगवान् -
छंद सोरठा =ईश स्मरण
मत करियो अभिमान, रावण का जब नहिं रहा
मन सुमिरो भगवान्, जीवन की मंजिल वही
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दशरथ नंदन राम, मन मंदिर में आय कर
आप दया के धाम, दूर करो चिन्ताए सब -
ईश्वर के द्वार
जाओ ईश्वर द्वार पर, मांगो मत वरदान
तन मन धन सब कुछ करो, प्रभु चरणों में दान, सभी कुछ देकर गाओ
कर्ता है भगवान्, आप अभिमान मिटाओ
कह पाठक कविराय, पारिस्थित जैसी पाओ
भाव रखो संतोष, ईश दरवाजे जाओ -
फिजूल की कविताएँ
आजकल सावन में सारहीन अकविताओ का प्रभाव हो गया है
शायद श्रेष्ठ कवि होने का दावाव हो गया है
कवियों का मौन कुछ कहता है
मन में भी कोरोना का घेराव हो गया है -
बताओ तो
बड़ी भयानक ये महामारी है
ब्लैक फंगस का भी कहर जारी है
बताओ तो भगवान् क्या दुनिया के
अंत करने की शुरू हुई तैयारी है -
रोला छंद
कब से है बेकार, कोरोना पंगु बनाया
कुछ करिए सरकार, बहुत है मन घबराया
भगवन के भी द्वार, किसीने बंद कराया
व्याकुल है संसार, घरो मे आज समाया -
सोरठा छंद
अब जैसे असहाय, कभी नहीं पहले हुए
कोई लेव बचाय, कोरोना यमराज से
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उजड़ रहे परिवार, कहाँ गए भगवान् तुम
रोता है संसार, वैग्यानिक विचलित दिखे -
तबाही
पागल हाथी की तरह कोरोना आया
पूरे देश में तबाही मचाया
मंदिर मस्जिद बंद है कहाँ जाए
गिन नहीं सकते इतने चिता जलाया -
हाल मत पूछो
हाल मत पूछो बच्चो के रखवालों से
बंद पड़े हैं स्कूल यहां सालो से
जान है तो जहां है समझाते रहे
पंक्षी उड़ रहे असमय डालों से -
कब तक
न जाने कब घर से बाहर निकल पाएंगे
कब तक कोरोना योद्धा मारे जाएगे
दिल की धड़कन बढ़ जाती है समाचार सुन
आखिर कब तक लोग सदा के लिए सो जाएगे -
कोरोना
शरीर है कैद
मन भटक रहा है
कोरोना मानवता को
गटक रहा है
अस्पतालों में मानव
शिर पटक रहा है
गलियों मे पुलिस वाले
कहां भटक रहा है
काल ज्यूँ दरवाजे में
लटक रहा है
हाथ पाव हाथकड़ियां
मन चटक रहा है
राम जाने कब जाए
कोरोना खटक रहा है -
बरसात के दोहे
मेघ सुधा जल बरसते, धरती शीतल होय
मेढक गाते गीत औ, व्याकुलता दे खोय
2 काले काले मेघ तब, जल ले वसुधा पास
गरज चमक मानो कहे, बुझाओ अपनी प्यास
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जल स्रोतों को कर रहे, बादल जल का दान
सुखी हुए सब मीन सा, क्रषक उगाए धान -
पैसा
पैसा कमाने के चक्कर में अपनो को भूल गए
मिल गए पैसे तो सेठ जैसे फूल गए
सब कुछ नहीं है पैसा एहसास हुआ
जब हम भगवान् की स्कूल गए -
प्रार्थना
सच्चे मन से की गयी प्रार्थना कबूल होती है
माफ कर सकता है ईश्वर जो भूल होती है
मत बनो नास्तिक इसी में भलाई है
आदमी की औकात केवल धूल होती है -
मत उछल
मत उछल ऊँट जैसे. मन पहाड़ के नीचे खड़ा है
कोई न कोई जरूर तुझसे बड़ा है
सबसे शक्तिमान होने के सपने न देख
हर पतंग को जमी पे आना पड़ा है -
कविता का स्तर
मत गिराओ कविता का स्तर कविता डर जाएगी
पाठको और श्रोताओं की उम्मीद मर जायेगी
हर कोई कवि बनकर कुछ कहना चाहता है
जब कोई सुनेगा पढ़ेगा नहीं तो कविता क्या कर जाएगी -
कौन है
कहते तो बहुत है मगर सुनता कौन है
सब नेता हैं गद्दार तो इन्हे चुनता कौन है
दिखावा विलासिता के सामान लाए हो
मेहनत है किसकी गुनता कौन है -
महत्व
हंसी का महत्व क्या जाने जो रोए नहीं है
पाने का महत्व क्या जाने जो खोए नहीं है
नीद भूख प्यास की कीमत उनसे पूछो
जो कई दिनो से खाए पीए सोए नहीं है -
छल की दोस्ती
छल का चेहरा आलिंगन करने चला है
हार के डर से दोस्ती का हाथ बढ़ाता है
मुह में राम नाम बगल में छूरी है
वैर भाव अच्छा है दिल दोस्ती से घबराता है -
वो चले है
कुल्हाड़ी ले के हाथ में वो काटने चली है
मिलजुल के रह रहे थे वो काटने चले है
हर हाल में उन्हे कुर्सी को बचाना है
आतंकियों के तलवे वो चाटने चले हैं -
विग्यान
मत करो महाभारत सब नाश हो जाता है
राम चरित मानस मन क्यूँ नहीं दुहराता है
लालच व भय के वशीभूत मत तुम हो
विग्यान है वरदान अभिशाप क्यूँ बनाता है -
प्रेम
नफरत नहीं उगेगी यहां प्रेम बोया जाता है
संप्रदाय है नहीं जो भाई को लड़ाता है
सज्जन का वेश लेकर रावण है फिर चला
होगा न हरण सीता को मारना भी आता है और -
हिन्दुस्तानी
हर बार पड़ी जिसको मुह की खानी है
पर छोडता नहीं तू क्यूँ शैतानी है
अस्तित्व ही मिट जाएगा धरा से तुम्हारा
इक्कीसवीं सदी के हम हिंदुस्तानी है -
भली राह
हर बुर. कर्मो का परिणाम आएगा
बोया अगर बबूल आम नहीं खाएगा
सोच समझ कर ही कदम बढ़ाना
भली राह चल वरना पछताएगा -
गांधी जी
शांति और एकता की जंग को लडा
अहिंसा और प्रेम को जिसने किया बड़ा
पिता कहकर जिनका सम्मान करते हैं
जग में न दिखता कोई गाँधी जी से बड़ा -
भारत
जिसने सदा ही शांति का संदेश दिया है
विश्व गुरु के पद पर आसीन किया है
आए कई तूफान जिनका सामना किया
भारत ने सुधा देकर भी विष को पिया है -
भारत माता
माता भारत कथन है, मिलजुल रहना सीख
दुश्मन हमले कर रहा, सुन ले शरहद चीख
सुन ले शरहद चीख, देश के वीरो आओ
गांधी भगत सुभाष, धरोहर सभी बचाओ
कह पाठक कविराय, संघ का लेकर छाता
बरस रहा आतंक, बचाओ भारत माता -
सब धर्म समान
अपना तो एक धर्म है, पर सबका सम्मान
करने में सुख निहित है, ईश्वर एक समान
ईश्वर एक समान, छोटा बड़ा न कहिए
संविधान निरपेक्ष, सदा मर्यादा रहिए
कह पाठक कविराय, रहा बापू का सपना
अनेकता में एक भाव दे भारत अपना -
मानवता
मानव ही दानव बने, औ बनता भगवान्
मानव तन अनमोल है, मानवता है प्राण
मानवता है प्राण, धार्मिक झगड़े छोडो
ईश्वर सागर मान, नदी अवतार है जोडो
कह पाठक कविराय, एक उन्माद है दानव
ईर्ष्या नहीं सद्भाव, जोड़िए सब को मानव -
संसार परिवार
मानो अगर मानव संसार ही परिवार है
फिर क्यूँ उठा रहे बंदूक औ तलवार है
इंसानियत के नाते सहयोग सबका करना
कर्तव्य कर संसार में करना तुम्हें अधिकार है -
उपकार कीजिए
पाया है मानव तन तो उपकार कीजिए
छोटे बड़े सभी से ही प्यार कीजिए
उदर भरना जानवार भी जानते हैं खूब
नफरत से नहीं प्रेम से अधिकार कीजिए -
दूर ना हो
मिलता रहे प्यार अपनो से दूर ना हो
कर न सके बात इतना मजबूर न हो
समझे एक दूसरे के जज्बात को
किसी भी परिस्थिति में क्रूर ना हो -
बाधाएं
मत करो प्रार्थना बाधाओं को आने दो
मुकाबला करो और जाने दो
हिम्मत रखो तो बाधा॒एं झुक जाती है
कह दो बाधाओं से रोयेंगे नहीं गाने दो -
जीत और हार
नदी के किनारे है जीत और हार
नदी का बहता पानी है तुम्हारा प्यार
नौका की जरूरत नहीं साथ रहो
पार कर जाएंगे नदी की मझधार -
हार जाएंगे
अपनो से कैसी प्रतियोगिता हम हार जाएंगे
आँगे बढ़ेगे अपने हम मल्हार गाएंगे
तुम्हारी ऊंचाइयों की छाँव में रहकर हम
जीने के लिए तुमसे उपहार पाएंगे -
पछताएगे नहीं
मुश्किलों का दौर है घबराए गे नहीं घर के बाहर अभी जाएगे नहीं
छुआ छूत की बीमारी आई है
सावधान रहेगे तो पछताएगे नहीं -
हारे हुए योद्धा
वो भी योद्धा है जो जंग के मैदान में हार जाते हैं
पूंछता नहीं कोई समाज वाले भी मार जाते हैं
सहानुभूति की जरूरत है हारे हुए योद्धा को
पा जाए सहारा तो मंजिल के द्वार जाते हैं -
कलम
मुह जो नहीं कह सकता वो कलम कहेगी
जुल्म होगा तो चुप नहीं रहेगी
कलम को मत मानो कमजोर हथियार
अत्यचारियों के रक्त की धारा बहेगी -
सहयोग, श्रम, शांति
सहयोग, श्रम, शांति बहुत जरूरी है
करते रहे प्रयास भले मजबूरी है
मानवता के आभूषण है तीनो
इनके बिना मानवता अधूरी है -
कविता
कविता विचारों को व्यक्त करने का बहाना है
कविता सच्चाई को सुनना और सुनाना है
कविता अक्सर बन जाती है अपने आप
कविता संसार से रागात्मक संबंध बनाना है -
आदमी
एक रोटी के लिए अक्सर कुत्ते लड़ जाते हैं
आदमी वो है जो मिलबाँट कर खाते हैं
आदमी वो है भूखे रहकर मां की तरह
खाते हैं बाद में पहले खिलाते हैं -
बेकारी
बेकारी उत्पन्न हो, जब जनसंख्या बुद्धि
सीमित संसाधन नहीं, सबको सुख समृद्धि
सबको सुख समृद्धि, स्ववलंबी बन जाओ
कर दो लज्जा त्याग, नहीं बेकार कहाओ
कह पाठक कविराय, जीत हो जाय तुम्हारी
छोटा बड़ा न काम, करे जाए बेकारी -
बूढ़े और बच्चे
बच्चे बूढ़े एक से, दोनों को दे प्यार
दीपक हैं परिवार के, करते हैं उपकार
करते हैं उपकार, जरूरत इन्हे तुम्हारी
रखना सदा प्रसन्न, उठाओ जिम्मेदारी
कह पाठक कविराय, ये दोनों दिल के सच्चे
भूतकाल में वृद्ध, व भावी होते बच्चे -
कुण्डलिया छोटा परिवार
छोटा हो परिवार अब, रखना इसका ध्यान
जनसंख्या तलवार सी, निकल रही है म्यान
निकल रही है म्यान, समस्या होगी भारी
धरती का विस्तार, न होगी मारामारी
कह पाठक कविराय, शपथ लो जल ले लोटा
हम दो के दो चार, नियोजन से हो छोटा