विश्व शांति हो हो जाय अब, बुद्ध होय चहुँ ओर सुख की वर्षा होय तब,मन ज्यूँ वन का मोर 2 युद्ध नहीं समाधान है, समस्याओ का जान चाहे गीता भगवात, चाहे पढ़े कुरान

धार्मिक कैसे कहे जो धर्म के नाम पर लड़ जाते हैं मत पाने के लिए कुछ लोग दंगे करवाते हैं चोला पहनने से कोई संत नहीं होता धार्मिक वो है जो प्रेम के दीपक जलाते […]

बुरे दिनों में ही सदा, आए ईश्वर याद बांकी दिन करता नहीं, मन ईश्वर फरियाद 2 सदा बुरे दिन नहिं रहे, सुख की कीमत जान बुरे दिनों से जुड़ गया, है रिश्ता भगवान्

मत करियो अभिमान, रावण का जब नहिं रहा मन सुमिरो भगवान्, जीवन की मंजिल वही 2 दशरथ नंदन राम, मन मंदिर में आय कर आप दया के धाम, दूर करो चिन्ताए सब

जाओ ईश्वर द्वार पर, मांगो मत वरदान तन मन धन सब कुछ करो, प्रभु चरणों में दान, सभी कुछ देकर गाओ कर्ता है भगवान्, आप अभिमान मिटाओ कह पाठक कविराय, पारिस्थित जैसी पाओ भाव रखो […]

आजकल सावन में सारहीन अकविताओ का प्रभाव हो गया है शायद श्रेष्ठ कवि होने का दावाव हो गया है कवियों का मौन कुछ कहता है मन में भी कोरोना का घेराव हो गया है

न जाने कब घर से बाहर निकल पाएंगे कब तक कोरोना योद्धा मारे जाएगे दिल की धड़कन बढ़ जाती है समाचार सुन आखिर कब तक लोग सदा के लिए सो जाएगे

शरीर है कैद मन भटक रहा है कोरोना मानवता को गटक रहा है अस्पतालों में मानव शिर पटक रहा है गलियों मे पुलिस वाले कहां भटक रहा है काल ज्यूँ दरवाजे में लटक रहा है […]

मेघ सुधा जल बरसते, धरती शीतल होय मेढक गाते गीत औ, व्याकुलता दे खोय 2 काले काले मेघ तब, जल ले वसुधा पास गरज चमक मानो कहे, बुझाओ अपनी प्यास 3 जल स्रोतों को कर […]

पैसा कमाने के चक्कर में अपनो को भूल गए मिल गए पैसे तो सेठ जैसे फूल गए सब कुछ नहीं है पैसा एहसास हुआ जब हम भगवान् की स्कूल गए

मत गिराओ कविता का स्तर कविता डर जाएगी पाठको और श्रोताओं की उम्मीद मर जायेगी हर कोई कवि बनकर कुछ कहना चाहता है जब कोई सुनेगा पढ़ेगा नहीं तो कविता क्या कर जाएगी

हंसी का महत्व क्या जाने जो रोए नहीं है पाने का महत्व क्या जाने जो खोए नहीं है नीद भूख प्यास की कीमत उनसे पूछो जो कई दिनो से खाए पीए सोए नहीं है

नफरत नहीं उगेगी यहां प्रेम बोया जाता है संप्रदाय है नहीं जो भाई को लड़ाता है सज्जन का वेश लेकर रावण है फिर चला होगा न हरण सीता को मारना भी आता है और

हर बार पड़ी जिसको मुह की खानी है पर छोडता नहीं तू क्यूँ शैतानी है अस्तित्व ही मिट जाएगा धरा से तुम्हारा इक्कीसवीं सदी के हम हिंदुस्तानी है

जिसने सदा ही शांति का संदेश दिया है विश्व गुरु के पद पर आसीन किया है आए कई तूफान जिनका सामना किया भारत ने सुधा देकर भी विष को पिया है

माता भारत कथन है, मिलजुल रहना सीख दुश्मन हमले कर रहा, सुन ले शरहद चीख सुन ले शरहद चीख, देश के वीरो आओ गांधी भगत सुभाष, धरोहर सभी बचाओ कह पाठक कविराय, संघ का लेकर […]

अपना तो एक धर्म है, पर सबका सम्मान करने में सुख निहित है, ईश्वर एक समान ईश्वर एक समान, छोटा बड़ा न कहिए संविधान निरपेक्ष, सदा मर्यादा रहिए कह पाठक कविराय, रहा बापू का सपना […]

मानव ही दानव बने, औ बनता भगवान् मानव तन अनमोल है, मानवता है प्राण मानवता है प्राण, धार्मिक झगड़े छोडो ईश्वर सागर मान, नदी अवतार है जोडो कह पाठक कविराय, एक उन्माद है दानव ईर्ष्या […]

मानो अगर मानव संसार ही परिवार है फिर क्यूँ उठा रहे बंदूक औ तलवार है इंसानियत के नाते सहयोग सबका करना कर्तव्य कर संसार में करना तुम्हें अधिकार है

अपनो से कैसी प्रतियोगिता हम हार जाएंगे आँगे बढ़ेगे अपने हम मल्हार गाएंगे तुम्हारी ऊंचाइयों की छाँव में रहकर हम जीने के लिए तुमसे उपहार पाएंगे

वो भी योद्धा है जो जंग के मैदान में हार जाते हैं पूंछता नहीं कोई समाज वाले भी मार जाते हैं सहानुभूति की जरूरत है हारे हुए योद्धा को पा जाए सहारा तो मंजिल के […]

मुह जो नहीं कह सकता वो कलम कहेगी जुल्म होगा तो चुप नहीं रहेगी कलम को मत मानो कमजोर हथियार अत्यचारियों के रक्त की धारा बहेगी

कविता विचारों को व्यक्त करने का बहाना है कविता सच्चाई को सुनना और सुनाना है कविता अक्सर बन जाती है अपने आप कविता संसार से रागात्मक संबंध बनाना है

एक रोटी के लिए अक्सर कुत्ते लड़ जाते हैं आदमी वो है जो मिलबाँट कर खाते हैं आदमी वो है भूखे रहकर मां की तरह खाते हैं बाद में पहले खिलाते हैं

बेकारी उत्पन्न हो, जब जनसंख्या बुद्धि सीमित संसाधन नहीं, सबको सुख समृद्धि सबको सुख समृद्धि, स्ववलंबी बन जाओ कर दो लज्जा त्याग, नहीं बेकार कहाओ कह पाठक कविराय, जीत हो जाय तुम्हारी छोटा बड़ा न […]

बच्चे बूढ़े एक से, दोनों को दे प्यार दीपक हैं परिवार के, करते हैं उपकार करते हैं उपकार, जरूरत इन्हे तुम्हारी रखना सदा प्रसन्न, उठाओ जिम्मेदारी कह पाठक कविराय, ये दोनों दिल के सच्चे भूतकाल […]

छोटा हो परिवार अब, रखना इसका ध्यान जनसंख्या तलवार सी, निकल रही है म्यान निकल रही है म्यान, समस्या होगी भारी धरती का विस्तार, न होगी मारामारी कह पाठक कविराय, शपथ लो जल ले लोटा […]