जी रहे हैं स्वयं हम दिवास्वप्न में, खुद को भूले हुए हैं बड़े मग्न हैं। पीठ संसार के दर्द से फेरकर, आँख सबसे चुराकर बड़े मग्न हैं। ओढ़ कर तीन कम्बल पसीना हुआ, उस तरफ […]

गीत जिन पर लिखे वे पुराने हुए उनको देखे बिना भी जमाने हुए, अब सफर में जुड़े मित्र हैं सब नए वो पुराने न जाने कहाँ गुम हुए। बीतते रह गए दिन रही आस बस […]

जब तक खुले थे विद्यालय दिन में खाने को मिलता था, पानी की दाल भले ही थी पर कुछ जीने को मिलता था। कोविड़ क्या आया, क्या बोलें स्कूल के पट सब बंद हुए, थोड़ा […]

कूड़े के ढेरों में कुछ तो मिलेगा, जरा सा खुशी का सहारा मिलेगा। नन्हें हैं वे, रात भर सोचते हैं, प्रातः को कूड़े में पथ ढूंढते हैं। बहुत खुश हुए जब मिली एक कॉपी आधी […]

ठंड में ये भूख भी ज्यादा सताती है, है नहीं चर्बी मगर हड्डी हिलाती है। भाग पहुँचा रोज खाता हूँ मगर ये भूख भी लौट कर फिर से मेरा मन कुलबुलाती है। सोचता हूँ हम […]

जाने कहाँ विलीन हो जाते हैं, कल तक जो बोलते थे, मुस्कुराते थे अपनी भावना को व्यक्त करते थे वे, जाने क्यों माटी हो जाते हैं। शून्य हो जाते हैं। न कोई अहसास न कोई […]

आपकी किरणें ओ सूरज! सृष्टि को वरदान हैं, मूल हैं प्रकृति का बीज में ये प्राण हैं। पेड़-पौधे , जीव सारे आपके होने से हैं आपकी प्रभा के आगे दीप सब बौने से हैं। पालती […]

माता-पिता अकेले छोड़े हैं गांव में, कोई नहीं सहारा रोते हैं गांव में। तकलीफ और दुःख में पानी भी पूछने को, कोई नहीं है संगी जीवन है डूबने को। ताकत नहीं रही अब हाथों में […]

पत्थर हूँ मैं जिस पर घिस कर चन्दन माथे पर लगाने लायक होता है, शीतलता देता है, खुशबू बिखेरता है। थोड़ा सा मैं भी घिसता हूँ चन्दन के साथ, लेकिन आपको अहसास तक नहीं होने […]

हर एक कविता लिखता हूँ जो भी लक्षित नहीं कोई स्वयं लक्ष्य हूँ मैं। किसी से नहीं है अधिक प्यार मुझको किसी से नहीं कोई नफरत है मन में। स्वयं की खुशी को लिखता हूँ […]

सन इकहत्तर के जंगी जवानों, आपको हम सभी का नमन, आप जांबाज थे हिन्द के आपको हम सभी का नमन। ऐसी ताकत दिखाई थी सच में देखता रह गया था वो दुश्मन, धूल ऐसी चटाई […]

गीत ठंडक के गुनगुनाता हूँ, शूल सी चुभ रही हवाओं में खुद ही खुद दांत कटकटाता हूँ, ये जो संगीत है स्वयं उपजा, इसकी धुन में रहता हूँ जिगर को नचाता हूँ। राग में रागिनी […]

हां दोस्ती है, इन दिनों रजाई से उसको ओढ़े बिना नहीं कटते सुनहरे पल पहाड़ी रातों के। खुद की तारीफ के न पुल बांधो हम तो कायल रहे हैं वैसे ही तुम्हारी नेह भरी बातों […]

अपनी खुशियों पर रहें खुश दूसरों से क्यों भिड़ें, बात छोटी को बड़ी कर पशु सरीखे क्यों लड़ें। जिन्दगी जीनी सभी ने क्यों किसी को ठेस दें, हो सके तो कर भलाई प्रेम का संदेश […]

मत बहा आँसू पी जा दर्द भी है तो, काम ले हिम्मत से आंसू हैं अमी का जल, नहीं होना विकल सब कुछ ठीक होगा और आयेगा सुहाना कल। वक्त सब दिन एक सा रहता […]

किस तरफ की बात बोलूं कुछ समझ आता नहीं, सत्य क्या है झूठ क्या है कुछ समझ आता नहीं। एकतरफा बात सुनकर धारणा कुछ और थी दूसरे के पक्ष को सुन कुछ समझ आता नहीं। […]

खुशियाँ तो मन की उथल-पुथल से सीधी जुड़ी हुई हैं, मन में यदि संतुष्टि है तब हम जरा सी बात पर खुश हो सकते हैं, मजे में रह सकते हैं। मगर मन अनियंत्रित है, और […]

खूबरसूरत जिन्दगी आपके कारण ही है, आप हैं, तब है सभी कुछ जिन्दगी में रंग है। आप इस सूखी धरा में प्रेम की बरसात हैं, और क्या अवलम्ब खोजूँ आपका जब संग है। हों भले […]

मुहब्बत पवित्र है पवित्र से भी पवित्र है, अनुपमेय है, वह बंट नहीं सकती, सच्ची की मुहब्बत कभी घट नहीं सकती। न दिखावा इसमें न औपचारिकता, मुहब्बत देखती है बस वास्तविकता। मुहब्बत जीवनोदक है इसका […]

कोई यहाँ आया नहीं गीत भी गाया नहीं फिर मधुर सी गुनगुनाहट कान में कैसे बजी। क्या पवन संदेश लाई भूतकालिक प्रेम का या किसी शैतान भँवरे की है यह मुझ पर ठिठोली। पर लगा […]

बीते कल की नहीं कहानी तुम चलती साँसों में बसा आज हो तुम प्यार की, दिल्लगी की बात नहीं इससे बढ़कर रहे हो नाज हो तुम। अहमियत क्या बताएँ, कैसी है तन में धड़कन है […]

समकालीन कविता के जाने-माने नाम थे वह, हिंदी कविता की शान थे वह। राजनीतिक चेतना व मानवता की सुरम्य आभा से सरोबार थे वह, ‘पहाड़ पर लालटेन’ सी चमकती पहचान थे वह। संघर्ष में जूझती […]

ठंड बढ़ती जा रही है वह सिकुड़ता जा रहा है रात भर सिकुड़ा हुआ तन अकड़ता जा रहा है। सिर व पैरों को मिलाकर गोल बन सोने लगा, नींद फिर भी दूर ही थी क्या […]

मस्तमौला चाल मेरी मैं पुहुप हूँ गांव का आ गया तेरे शहर कंटक समझ मत पांव का। घूमता बेघर फिरा हूँ है मनोरथ छांव का जिंदगी वारिधि सरीखी क्या भरोसा नाव का।

श्वेत कागज में कलम घिसता हूँ, इधर-उधर की कहीं कुछ भी नहीं जो है दिल में उसे लिखता हूँ। विजुगुप्सा से दूर रहता हूँ प्रेम के भाव बिकता हूँ। मिट्टी में खेलते बच्चों की सच्ची […]

जो भी लिखता है मन स्वयं के लिए, प्यार-नफरत के भाव खुद के लिए। उसे न जोड़ना कभी भी अपने भावों के लिए अपनी चाहत के लिए। अलग ही रास्ते हैं न कोई वास्ते हैं, […]

वह सोचता है, यदि रूठ जाऊं तो वो मुझे मनाये वो सोचती है रूठने पर वो मुझे मनाये, एक सोचता है दूसरा मुझे मनाये रूठने पर न वो मनाती है न वो मनाता है, रूठना […]

चैन से अब सो रहा मन मत जगा अब आग तू, दूर हो जा स्वप्न से भी मत लगा अब आग तू। आग केवल शान्त है। भीतर पड़े हैं कोयले फूंक मत, रहने दे ऐसे […]

फूल बोने होंगे परिवेश में अपने खुशबू लुटानी होगी, उल्फत जगानी होगी, नफ़रतों की सारी कड़ियाँ मिटानी होंगी। जो हो सके न अपने जो दूर जा चुके हों कहकर पवन से खुशबू उन तक ले […]

मन उड़ान तेरी पंखों बिना चलती रही, उस तरफ फिर इस तरफ सब तरफ बहती रही। चैन आया हो कहीं ऐसा नहीं संभव हुआ, एक स्थल पर न टिक पाया फिरा विस्मित हुआ। आज मीठा […]

सुबह-सुबह की लालिमा बिखरी हुई है सब तरफ ओस की बूंद मोती सी बिखरी हुई है सब तरफ। भानु का नूर है आलोक चारों ओर फैला, धरा-आकाश मानो बन गए मजनूँ व लैला। स्वच्छ पावन […]

दर्द जीवन में है जो रख सरोकार उससे, किसी को ठेस मत दे कर ले प्यार सबसे। पोछ ले अश्क सबके कष्ट मत दे किसी को, भाव समभाव के रख कद्र दे दे सभी को। […]

रोशनी में चमकता कांच नहीं अंधेरे में जले, आप वो चिराग बनो मिटा तमस को, चमक फैलाओ भटकते हुए की पनाह बनो। बेसहारा, अनाथ हैं जो भी उन्हें सहारा दो, हो सके तो एक तिनके […]

छोटी-छोटी खुशियां हैं छोटे-छोटे बच्चों की, छोटी सी खुशी में वे सहज मुस्काते हैं। प्यार के जरा से बोल प्रीति कर दिल खोल, आप मुस्काओ तो सहज मुस्काते हैं । द्वेष, बैर, नफरत घृणा से […]

तर्क हैं वितर्क हैं पक्ष के भी विपक्ष के भी देख रहा हूँ टकटकी लगाये, कुछ फायदे की बात मेरे लिए भी हो। अब पाला पड़ने लगा है छतरहित घर में मेरे तीन शेड का […]

ओ! कविता के सृजनकर्ता, उठा कलम व जोश जगा। घिर से गए निराशा में जो, उनकी चिंता दूर भगा। यदि लिखना तू बंद करेगा, कैसे लहर चलाएगा डगमग पग धरते तरुण को, कैसे राह दिखाएगा। […]

ज्योति जल अंधेरा मिटा दे, न घबरा हवा की बातों से कितना बुझायेगी तुझे, कब तक रुलायेगी तुझे। ध्यान न दे बस रोशनी फैला, अंधेरा मिटा, सच को दिखा। आ दिये में तेल बनकर रुई […]

उलझा हुआ कलमकार हूँ, तमाम विषयों से घिरा चयन की छटपटाहट में लय से भटका हुआ हूँ। शब्द में निःशब्द भर मौन में गुंजायमान ला अंकित करने में असफल रहा हूँ। ठिठुरते बचपन की व्यथा […]

छोटी- छोटी पंक्तियाँ हैं ये जो शायरी की मेरी, इन्हीं में तुम्हारी सब खूबसूरती है भरी। उपमान नए औऱ पुराने मिला जुला के, वर्णन जैसा भी किया सच सच किया है। देर रात चाँद आया […]

जरूरी है नहीं हर फूल की खुशबू मेरी ही हो, मुझे मेरी जरूरत का मिले बाकी सभी का हो। हमेशा जिद कहाँ तक पूर्ण हो नादान मन की इस, हमेशा की जलन इसमें कभी चन्दन […]

चाँद तुम रात भर चले, चमके, न जाने कब से सिलसिला ये चला । अब तक चल रहा है, चलते ही जा रहा है। कोई जा रहा है, कोई आ रहा है, लेकिन तुम्हारा सिलसिला […]

बढ़ रही ठंड में गुनगुनी धूप सी तुम जिन्दगी में सुगंध फैलाती मनोहर धूप सी तुम। मुस्कुराहट इस तरह की नाजुक सी, ठोस के साथ में घुलती जरा सा भावुक सी। कभी आलिम कभी हो […]

खोजती रहती है दुनिया चैन मिलता ही नहीं, यह सही है वह सही है मन कहीं टिकता नहीं। आजकल की बात ही कुछ अलग सी हो गई असलियत के रंग का खून भी दिखता नहीं।

सामने बैठे हो सब कुछ बयान कर दो ना चाहना है अगर इजहार कर दो ना। उड़ा के नींद ऐसे बेखबर से सोते हो रखनी हैं दूरियां गर दिल्लगी क्यों बोते हो। बोल दो जो […]

आँखों को खोल दे जो ऐसी ही ताजगी हो तुम तो सुबह की चाय सी मीठी सी ताजगी हो। बाहर निकल के देखा पौधों में ओस सी हो, तुम ही तो जिन्दगी में सचमुच के […]

गीत एक लिख देना संगीत उसे दे देना, जब कहोगे गा दूँगा बस मुझे बता देना। नेह है या दूरी है जानना जरूरी है, मौन रह बता देना, हाल सब सुना देना। बोलना नहीं कुछ […]