खूब मनाओ तुम खुशी, इतना रख लो ध्यान, चमड़ी जिनकी खा रहे, उनमें भी है जान। उनमें भी है जान, मगर तुम खून पी रहे, पीकर खून निरीह का, खुशियां क्यों ढूंढ रहे। कहे ‘कलम’ […]

मुबारक आपको नव बरस में खूब खुशियों से भरी हों वादियां, जो जुटे मेहनत में हैं हो जाएं उनकी चांदियाँ। जल्दी से हों जिनकी रुकी हैं शादियां। झगड़ें नहीं जिनकी हुई हैं शादियां खूब खुशियों […]

नए वर्ष के स्वागत का जोश पुराने के जाने की खुशी ऐसे मनाई जा रही है बोतलों बोतलें गटकाई जा रही हैं। बहाना अच्छा है पीने का युवाओं में क्या किशोरों में भी पीने का […]

वर्ष की आखिरी रात है थर्टी फर्स्ट मना रहे हैं लोग, मुर्गियां, बकरियां काट कर खुशियां मना रहे हैं लोग। किसी का नया वर्ष आ रहा है किसी प्राणी का सब कुछ जा रहा है, […]

मन में हिम्मत रख सदा, हिम्मत है हथियार, हिम्मत वाला आदमी, हो जाता है पार। हो जाता है पार, सफलता पा जाता है, साहस से वह कठिन, विजय पाता जाता है। कहे ‘कलम’ हमेशा, हौसला […]

न जाइये इस तरह छोड़कर राह में, हम तो मर जायेंगे आपकी चाह में। बात मत कीजिये और से इस तरह हम तो हो जायेंगे खाक फिर डाह में। आइये बैठिए नेह से देखिए, अन्यथा […]

बिना तुम्हारे इस ठंडक में बिस्तर से उठने का मन नहीं है, आ जाओ ना, चली आओ, उनके हाथ उनके साथ, ताजगी बनकर नाराजगी तजकर, अन्यथा उठने में हैं असहाय, आ जाओ ना चाय।

शुभकामनायें, मित्रवर नववर्ष की हैं आपको, आपके होंठों में खिलती नित नयी लाली मिले, गीत में संगीत में अंतस व बाहर भीत में, धर्म में भी कर्म में भी नीति में और रीति में नित […]

गरीब को भी इंसान समझना है तुम्हें क्या पता कब कहाँ मिल जायें भगवान तुम्हें। भूख क्या होती है यह भी समझना है तुम्हें, इंसान हो इंसानियत को भी समझना है तुम्हें। मिली है बुद्धि […]

ठंड में लब फटे से रहते हैं आजकल वे कटे से रहते हैं, दूर कितना भी चले जायें पर दिल व साँसों से सटे रहते हैं। कभी करीब आते हैं फिर कभी दूर हटे रहे […]

वही दिल जुड़ाता है करीब लाता है, फिर वही इस तरह से दूरियां बढ़ाता है। वो रब हमें इस तरह खेल ही खेल में कभी मिलाता है कभी गम बढ़ाता है। हम तो बस चाहते […]

अपनी आँखों में लगाकर रखिये थोड़ा काजल, बहुत ही रमता है, हम भी पहचान लेंगे रस्ते में मुँह में तो मास्क बंधा रहता है। जो भी शॉपिंग करोगे सब की सब एक थैले में भर […]

ठंडक बढ़ रही है लगातार केवल तेरा अहसास गला रहा है जिंदगी में जमी बर्फ को, सर्द हवाएं नाजुक गालों से टकराकर अपने पैरों के निशान छोड़ रही है काले काले टिपके जैसे निशान, मेरी […]

इस भरी रात में आये निंदिया मीत तू रागिनी सुना दे ना ये जो दिनभर की आपाधापी थी तू मधुर बोल से भुला दे ना। जिन्दगी में सुबह से रात हुई रात से फिर सुबह […]

वो लोट-पोट हो रहा था जमीन पर, जिस तरह केंचुआ तिनके से छूने पर फड़फड़ाने लगता है, वैसे वह बेचैनी से फड़फड़ा रहा था। किसी का तो बेटा रहा ही होगा अब इस तरह नशे […]

ठंड थी खूब पहाड़ों की ठंड, पानी मे कंकड़ जम जाते हैं पानी के नल तक फट जाते हैं, वो बाज़ार में भटकने वाला शराबी बेचैन था, जुगाड़ में था कुछ पीने को मिले तो […]

चल रही आंधियां हैं थपेड़े ठंड के हैं, लिख रहा बेजुबानी भाव कुछ मंद से हैं। फिजाँ झकझोरने को पास कुछ भी नहीं है नैन सूखे हुए हैं होंठ कुछ बन्द से हैं। नहीं हो […]

मुहब्बत के नशे में चूर रहना चाहता हूँ ए जिन्दगी मैं नफ़रतों से दूर रहना चाहता हूँ। इंसान हूँ, कमियां भी हैं, अच्छाइयाँ भी हैं, मगर जैसा भी हूँ इंसानियत को पास रखना चाहता हूं। […]

आ मेरे मीत आ जा बात मन की बता जा उग रहे भाव हैं जो मेरे मन को दिखा जा। छिपाना छोड़ दे तू कोपलें चाहतों की समझ जाता है मन यह दिशाएं आहटों की। […]

प्रेम वह है जो आंखों में, मन में दूजे के प्रति उमड़ चाहत के बीज उगा देता है, विरक्त और बुझे मन में, तत्क्षण अनुराग जगा देता है। प्रेम वह है जो सिंचित कर, मन […]

गीत भँवरे ने गाया मैं वहां चुप खड़ा था उसकी लय में बहक कर मन मेरा गुनगुनाया। सुगंधित सी हवा फूल ने जब बिखेरी, नासिका में समाई मन मेरा मुस्कुराया। देख तिरछी नजर से त्वरित […]

हौसला रख, न घबरा काम ले हिम्मत से तू जिन्दगी आसान होगी मंजिलें कदमों में होंगी। हो निराशा जब कभी दिल बैठ सा जाये अगर, तू जगाना खुद की हिम्मत मुश्किलें आसान होंगी। आँख भर […]

एक छोटे से ढाबे के बाहर खड़ी होकर वो गुहार कर रही थी, रख लो ना इसे काम पर, ग्यारह बरस का हो गया है यह, माँज लेगा चाय के गिलास, धो देगा जूठे बर्तन […]

गुनगुनी धूप है इस ठंड में थोड़ा सहारा, अन्यथा हम बर्फ बनकर ठोस हो जाते। इस गली में गुजरते आपने देखा हमारी झोपड़ी को अन्यथा हम गम भरे बेहोश हो जाते। इन दिनों मन जरा […]

मन मेरे! कीट सा पतंगे सा इस तरह से अंधेरी रातों में रोशनी तरफ की न खिंचते जा झूठ के हाथ यूँ न बिकते जा। ओ कलम! हाथ मेरे आकर अब न रुक वेदना को […]

तृष्णा तुम भी अद्भुत हो मन में इतना रम जाती हो, ये भी मेरा वो भी मेरा सब कुछ मेरा हो कहती हो। पूरी कभी नहीं होती हो जीवन भर आधी रहती हो, नश्वर जीवन […]

कर सकूँ यदि भलाई नहीं, तो बुराई करूँ क्यों भला आपको दे सकूँ यदि नहीं कुछ तो खुटाई करूँ क्यों भला। हो अगर कोई मुश्किल समय काम में कुछ नहीं आ सकूँ तब मुझे हक […]

आत्मीयता कहीं खो गई है, वह शहर की गलियों में रो रही है। किसी को किसी से मतलब नहीं है, समन्वय की बातें खो गई हैं। सहभागिता के भाव ही नहीं हैं, एक दूसरे की […]

भारी ठंड है वे सिंधु बॉर्डर पर धरने पर हैं, कई बुजुर्ग किसान धरने पर हैं। दस वर्ष के बच्चे तक धरने पर हैं। ठिठुरन है लेकिन वे अड़िग धरने पर हैं। देश की सत्ता […]

माता-पिता को भूलकर तू चैन में खुद को समझ मत आज तेरा वक्त है फिर वक्त बदलेगा समझ ले । आज तू अपने में खुश है दूर बैठा है शहर में अपने बच्चे और पत्नी […]

रखो न हीन भावना बुलंद भाव से चलो, सदैव सिर उठा रहे कभी नहीं कहीं झुको। झुको उधर जिधर लगे कि सत्य की है भावना, सिर उधर झुके न जिधर झूठ की संभावना। तोलना किसी […]

क्या कोई हमें बतायेगा वो कौन निर्दयी होगा जंगल में आग लगाकर घर में चैन से सोया होगा। लपटों से जिंदा जलकर जो खाक हो रहे थे प्राणी, उन निरपराध जीवों की ऐसे निकल रही […]

मैं कभी तो खूब रोना चाहता हूँ, ठंड में मैं आग पीना चाहता हूँ, रात भर अकड़ा हुआ बेजान मत समझो, अभी तो और जीना चाहता हूँ। पैदा हुआ कैसे कहाँ कब क्या न जाने, […]

खुद को नफा दिलाओ मगर जान बूझकर नुकसान दूसरे का करो ठीक नहीं है। चोरी छिपे गलत करो व साफ बन फिरो भगवान की नजर है तुम्हें देख रही है। कितनी ही निगाहें गड़ाइयेगा और […]

जो चलता है हरदम, सत्य पथ पर, उसे किसकी परवाह, क्यों हो डर। दूजे की उन्नति पर, प्रसन्न जो, वही दिशा देता है, जमाने को। बेकार में निराश न हुआ कीजिये, तुम दुआ दीजिये बस, […]

गांव छूट गया मैं शहर में आ गया याद छूटी ही नही मन गांव में ही रह गया, तन शहर में आ गया। वो खेतों की हरियाली, चिड़ियों की चहक, झींगुरों का संगीत, सावन के […]

खिल रही है धूप दिन में तो जरा राहत सी है, रात काटूं किस तरह से भीति की आहट सी है। आपको मौसम सुहाना लग रहा होगा भले ही पर मेरे मन की उमंगें आज […]

परिश्रम पथ पर कष्ट हैं, उनसे नहीं डरना तुम्हें, कंटकों को रौंधना है, लक्ष्य पाना है तुम्हें। विघ्न-बाधाएं अनेकों राह में आती रहेंगी, तोड़ने उत्साह को कुछ अड़चनें आती रहेंगी। कर निरुत्साहित तुम्हें निज मार्ग […]

जिंदगी की चली दौड़ है भागने में लगे आप-हम प्यार करने की फुर्सत नहीं है रोटियां खोजनी हैं जरूरी। पालना जिसको परिवार है उसको कैसे भी करके स्वयं को काम में है खपाना, कमाना रात-दिन […]

मौन का मतलब समझते हो पथिक? यह दवा है दर्द की जो दर्द को ज्यादा चढ़ाकर कम किया करती है मन का। आप तो बस खो गए मन खोजता ही रह गया आपका चेहरा नयन […]

साँस से भाप उड़ती रही, आपको भी दुराशय से देखा यह नजर पाप करती रही। मन किसी और पथ पर रमा था जीभ कर करके दिखावा निरन्तर नाम का जाप करती रही। पुष्प सुन्दर खिला […]

जिन्दगी में कमाते रहते हैं खूब रूतबा, व खूब पैसे हम जमा पूँजी को गिनते रहते हैं जमा में और जमा करते हैं। जोड़ने का नहीं है अन्त कोई, लालसा का नहीं है अन्त कोई, […]