अपने सुख दुःख की पोटली को रख किनारे में हमारे सुख दुःख को अपना जीवन बनाया पिताजी ने ही हमे सब कुछ सिखाया कल तक चलना नहीं आता था चलना आपने सिखाया आज ज़िन्दगी की […]

वीर जवानों की ये शहादत भूल नहीं हम पाएंगे ड्रैगन की औलाद तुझे हम जमकर धूल चटाएंगे मिट जाएगा नक्शा तेरा, कहीं नजर ना आयेगा तूने यदि पत्थर फेंका तो हम तिरसूल चलाएंगे। चमगादड़ तुझको […]

आज भी उसकी खैरियत की दुआ करता हूं उसकी तस्वीर को होंठों से छुआ करता हूं बेवजह ही वो सजाती है जनाजा मेरा उसके एहसास में मैं खुद को धुवां करता हूं शक्ति त्रिपाठी देव

आन बान शान में जले मेरी जवानी, लहू के कतरे को देख तड़पे मेरी जिंदगानी। अहर्निश के वादों को मैं संजो कर‌ रखता, कभी भूल सकता नहीं वीरों की बलिदानी।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

तन्हा सफर में मैं आगे बढ़ रहा हूं, मजबूरी की गठरी लेकर चल रहा हूं। वादें पुरा करने को पैदल सफर कर रहा हूं, अपने कदमों से गिन गिन कर दूरी तय कर रहा हूं।। […]

आ गया वक्त अब रहस्य उजागर करने का, यथार्थ के चक्कर में समय ना बर्बाद करो। साधक बनकर देश का कल्याण करो, सांत्वना देकर परेशान आत्मा पर उपकार करो।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

दिल का हाल काश तुम मेरे संग चलते। काश तुम मेरे रंग में ढ़लते।। काश तुम मेरे होंठों के मुस्कान बनते। काश तुम मेरे प्यारे से मेहमान बनते।। काश तुम मेरे सपनों के नाल बनते। […]

देशवासियों योग करो तन मन से निरोग रहो, आयुर्वेद योग के अलौकिक गुणों को अपनाकर । अपने इम्यून सिस्टम को हम सभी मजबूत करें, आओ एक उपकार करें योग के गुणों को बतलाकर।। महेश गुप्ता […]

आज योग दिवस ही नहीं पिता दिवस भी है तथा संगीत दिवस भी है। पिता के लिये कुछ शब्द:- 🌷🌷🌷🌷🌷 पिता वो दरख्ता है जो बचपन को छांव देता है। आये कोई भी मुश्किल हाँथ […]

हे मां शारदे करो मेरा अभिनन्दन स्वीकार, अज्ञानता को दूर कर करो मातृ हम पर उपकार। हाथ जोड़ विनती करूं शीश झुका करूं प्रणाम, नव कण्ठ स्वर चेतना का भर दो मां शारदे भण्डार।। ✍महेश […]

योग करो निरोग रहो का आन्दोलन चलाना है, घर घर को जागरूक करके अलख जगाना है, नित सुबह और शाम योग करना व करवाना है। तन को निरोगी बनाकर रोग मुक्त भारत बनाना है।। ✍महेश […]

योग दिवस:- योग करके अपने मानसिक, शारीरिक और संवेगात्मक तीनों अवस्थाओं का विकास कीजिए। योग से अन्तर्मन को निर्मल कीजिए। योग जीवन का वह अलौकिक दर्शन है जो हमें मोक्ष की ओर ले जाता है। […]

हृदय की वेदना जब सीमा के पार हुई कोशिशें बहुत कीं कम करने की, पर वो शमशीर की धार हुई तब लेखनी चल पड़ी मेरी, दर्द कम करने के लिए दिल के जज्बातों को जब […]

क्या माँ ने कभी विशेष दिन ही ममता लुटाया है। क्या माँ ने मात्र किसी खास दिन ही खिलाया है। क्या पिता ने कोई दिन देखकर जरूरतें पूरी की, या फिर केवल एक दिन सही […]

धर्मनीति व राजनीति के आगोश में समा गया है देश। उन्नति के ओर क्या बढेंगे यहाँ बदले है सब अपने भेष ।। अब मानव में मानवता नहीं पहरेदार भी अब सच्चा नहीं। ए वीर सुभाष […]

उठाई थी कलम कुछ अनसुलझे सवाल लिखने के लिए। अपने दिल के ज़ज्बात ना जाने कब लिखने लगी। लोग कहते हैं कि मैं बहुत अच्छा लिखने लगी। बस जितनी तकलीफें मिलती रहीं तुझसे, “मेरी कलम […]

21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक बधाई योग गीत – करो निरोग काया | ये योग साधना की है अजीब माया | कभी बचाए कोरोना कभी करे निरोग काया | कपालभाती और प्राणायाम […]

कविता- हमारा अभिमान | नहीं बिकेगा देश मे चीन का सामान | रहेगा हमारा समान हमारा अभिमान | लेकर धन हमसे हमे आँख दिखाता | घुसकर जमाईं हमारी हमे धमकाता | बनेगा आत्मनिर्भर हमारा हिनूस्तान […]

क्यूँ आज सूरज हो गया निस्तेज वह पहले जैसी बात नहीं। हवा भी चल रही है मद्धम-मद्धम उसमें भी पहले जैसी बात नहीं। न जाने क्यों बेरुखी कर रहे हैं सब मौसम के साथ कोई […]

विपक्ष की गंदी राजनीति, हक से बेशक करो। सैन्य बल कि शौर्यता पर, नाहक ना शक करो। जो तुम निशस्त्र वीरों को ज्ञान बाँट रहे। तुम्हारे पूर्वजों का बोया ही वह काट रहे। हाथ अब […]

जिनके नाम से दुश्मन थर थर कांपा करते है बलिदान हुए वीर जवानो को हम सब नमन करते है ये सच्चे देश भक्त है ऐसे नहीं जायेंगे दुश्मनो को अपनी रूह से भी हराएंगे देश […]

ये भाग- दौड़ के किस्से अजीब होते हैं, सबके अपने उद्देश्य और औचित्य होते हैं। कभी शिक्षा कभी जीवन की नव आशा में, सिर्फ बेटियाँ ही नहीं, बेटे भी घर छोड़ते हैं। जीवन में सबके […]

ना जाने कब नींद से जागी आँखें? रात भर रोकर सूजी हैं कितनी आँखें। बिता तो लेंगे हम ज़िन्दगी तेरे बगैर भी पर तुझे देखकर ज़िंदा हैं ये मेरी आँखें।

तेरे बिन जिंदगी कैसे बताऊंगी तू तो दूर चला गया पर मैं दूर कैसे जाऊंगी। मेरी हर सांस की अमानत हो तुम समझ नहीं आता तुझ बिन कैसे जी पाऊंगी।

किसी की कद्र करनी है तो जीते जी कीजिए जाने के बाद तो हर कोई दुःख जता देता है. जब इंसान जीवित रहता है और किसी दूसरे से कोई उम्मीद करता है तो उसे कोई […]

चुप हो जा मेरी माता बीच तिरंगे तेरा लाल सो रहा। भारत माँ का रक्षक थककर चैन की नींद सो रहा।। सपने में भारत माँ संग खुशियों की खेती है बो रहा।

कलम की लड़ाई आज हम भी करेंगे। जनताओं में चेतना सैनिकों में साहस देश भक्ति का भाव आज सबमें भरेंगे। कलम की लड़ाई आज हम भी करेंगे।। कलम की आंसू आज शोला बनेंगे। दुश्मनों के […]

कब कोई सिपाही ज़ंग चाहता है। वो भी परिवार का संग चाहता है। पर बात हो वतन के हिफाजत की, न्यौछावर, अंग-प्रत्यंग चाहता है। पहल हमने कभी की नहीं लेकिन, समझाना, उन्हीं के ढंग चाहता […]

ए रवि, शरहद पे शहीद होने वाले । थे वे सभी , वतन के रखवाले।। हिन्दुस्तान , क्यों न नाज़ करे। जब सपूत ही निकले, वतन के मतवाले।। दिल्लगी करना, हमने सिखा ही कहाँ । […]

सैनिक के शव से बोली उसकी पत्नी:- माँग सूनी रह गई क्यूँ तूने छुड़ा लिया दामन? अभी-अभी तो रूह जुड़ी थी। क्यूँ तूने छुड़ा लिया दामन? अभी-अभी तो साथ चले थे। क्यूँ तूने छुड़ा लिया […]

भारत माँ की खातिर कितनी माताओं की कोख उजड़ी। भारत माँ विपदा में पड़ी। हर गली में पसरा सन्नाटा हर चौखट सूनी पड़ी। भारत माँ विपदा में पड़ी। किस किस को खोकर रोये धरती यही […]

एक सैनिक ऐसा भी होगा! जिसनें प्रेम किया होगा अपने प्रेम का इजहार किया होगा! जब आया होगा छुट्टी पर तो यह वादा किया होगा। अगली बार जब आऊँगा तुझको ही प्रिया बनाऊँगा । इस […]

कितना कष्ट होता है जब एक सैनिक शहीद होता है । पूरा देश रोता है । हर गली रुदन करती है । एक अशांत-सी पीड़ा मन में घर करती है । रोती है धरती जब […]

हाय कितनों ने जान गँवाई! उस चीन ने जमीन के टुकड़े की खातिर कर दी नीच-सी हरकत । खुद मरा और मेरे प्यारे देशभक्त सैनिकों ने भी वीरगति पाई । हाय कितनों ने जान गँवाई!

क्यूँ नहीं देती है सरकार सैनिकों को दुश्मन को सीधे गोली मारने की आजादी? वो बस राह देखते हैं आदेश की और खाते रहते हैं सीने पर गोली। उनकी शहादत पर हम कब तक बहायें […]

यह कैसे अच्छे दिन आए हैं? एक तरफ कोरोना मानव को निगलने पर तैयार खड़ा है। दूसरी ओर सीमा पार दुश्मन खड़ा है। इस महामारी को देखकर भी, चीन का पेट नहीं भरा है। इसीलिए […]

विनयचंद यूँ रो रो कर कितने को श्रद्धांजलि दोगे। आँसू कम पड़ जाऐंगे तेरे आखिर कितना रोओगे।। सभी शहीदों के खातिर अब अपना शीश झुकाता हूँ। एक जन्म क्या हर जन्मों में आभार तेरा फरमाता […]