अपने आवाज को बुलंद करके देखो, अपने वाणी में मधुरता घोल करके देखो। पावनता में तुम एक बार जी कर देखो, रिश्तों को हवा पानी खाद एक बार दे कर देखो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

शिखर की ऊंचाईयों को टकते सभी, पांव के छाले खून का रिसाव दिखता नहीं। मेहनत हौसले को दुनिया समझती नहीं, यहा के लोग बड़े जालिम है तरक्की देखते नहीं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

समाज में धोखेबाजों का लगा अंबार है, असमाजिक तत्वों से भरा संसार है। उग्रता में बह रहा देश का अहंकार, चरित्र के आन बान पर टिका यह संसार है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

आदर्श के बल पर ही टीका है संसार, आदर्श से ही चल रहा रिति व्यवहार। नजर खतरों का अबइशारा हो गया, नजर से नजर मिला कर धोखाधड़ी कर रहा।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

पगड़ी मत उछालों बीच बाजार में, पग होता है शान नेक इंसान का। झूठ का दामन पकड़ जलील ना करो, इंसानियत का गला घोंटना काम है शैतान का।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

नेता जी मिठी बाणी बोले लगता है चुनाव आया है, भरी दोपहरी मेड़ पर डोले लगता तनाव छाया है। याचना में भैया बाबू करके मांगे वोट दिन दुखी बन, जीतते चुनाव तेवर बदले सलाह देते […]

हर कदम साथ देने का वादा किया सिर्फ दो ही कदम चलके छोड़ दिया। तूने खाई थी कसमे साथ जीने की मौत आने से पहले हीं क्यों तोड़ दिया।। बड़ी आश से मैंने पकड़ाई थी […]

हम बसाएंगे अपना घरौंदा कहीं… हम परिंदे हैं एक जगह रुकते नहीं… जहाँ मिलती हैं खुशियाँ जाते हैं वहाँ हम गमों में घरौंदा बनाते नहीं… चुनते हैं तिनके घोसले के लिए.. जिंदगी भर कहीं हम […]

इंतजार किया जी भर कर उनसे मिलने की कोशिश भी की, कहाँ रह गये वो जिन्होने हर वादा निभाने की कसम भी ली। आसान भी तो नही है सूर्य की किरणों की तरह बिखर जाना, […]

अब उठ नौजवान तुझे कुछ करना है जगमगाते दीप से सूरज की तरह चमकना है दिल जो कहे वो करना है ज़िंदा मछली की तरह धारा के विपरीत तैरना है ज़िन्दगी गिराएगी कभी भटकाएगी कहदे […]

मैं ‘पत्थर’ हो गया हूँ पर वो पत्थर नहीं जिसे ‘पूजा’ जाय, बस एक ‘साधारण पत्थर’, पर साधारण पत्थर होना ही क्या ‘आसान’ है? देखने में आसान लग सकता है, पर वो पत्थर कभी ‘मैग्मा’ […]

सितमगारों की बस्ती में सही मेरा भी नाम हो जाए मेरी नींदें छीन कर चैन से सोने वाली आज के बाद तेरी नींद भी हराम हो जाए किया था वादा हमसे तुम्हें याद ना करेंगे […]

ये उम्र, ये मजबूरियाँ और रोटी के तमाशे, फिर लेकर निकला हूँ पानी के बताशे। बाज़ार के एक कोने मे दुकान सजा ली, बिकेंगे खूब बताशे ये मैने आस लगा ली। सबको अच्छे लगते है […]

अब कहां हमसे दीवाने रह गये प्रेम की परिभाषा और मायने बदल गये,  तब न होती थी एक- दूजे से मुलाकाते,  सिर्फ इशारों मे होती थी दिल की बातें,  बड़े सलीके से भेजते थे संदेश […]

आज कुछ पुरानी सौगात मिली मैंने अपने कमरे की तलाशी ली। तो कुछ किताबें धूल में लिपटी हुई, कुछ खत, कुछ गुलाब के फूल सूखे हुए कुछ तस्वीरें, कुछ तोहफे और कुछ बन्द लिफाफे मिले। […]

हिन्द जवान मात्र जवान नहीं, ये संकट मोचक है, दुश्मनों को धूल चटाने वाली सेना है, मिटने ओर मिटाने वाली सेना है, इन्हें घेरना लोमड़ी के वस का नहीं है, निहत्थे में शेर, अस्त्र में […]

इन सुर्ख अधरों को मेरे गालों तक मत लाना चाहत और बढ़ जाएगी प्यार की अपनी जुल्फों को अब और मत लहराना रात लंबी हो जाएगी इंतजार की तड़पते रहेंगे उम्र भर मगर जुबां से […]

समाज में स्त्रियों की दशा देखकर मेरे मन में उठे विचार:- माँ मुझे विवाह नहीं करना। पति की परछाई बनकर, पति के पीछे-पीछे नहीं चलना। माँ मुझे विवाह नहीं करना। अपने कलेजे के टुकड़े(संतान) पर, […]

तेरे-मेरे बीच में वो पहले जैसी बात नहीं रही। ना रही वो बातें, वो मुलाकात नहीं रही। ख्वाहिशों के समंदर पड़ गए सूखे-सूखे रीत में प्रीत में वो पहले जैसी बात नहीं रही। मुश्किलें अब […]

मेरी यादों के लम्हे चुन-चुन कर सृजन मत करो जिंदा लाश हूं मैं मेरे अर्थहीन शरीर से लगन मत करो बेनूर हो जाएंगी यह निगाहें जो अभी चमकती है भूल जाओ मुझे खुद को इस […]

समस्त देश आज सेना के सम्मान में खड़ा है। पता नहीं तू किस मानसिकता से विरोध में अड़ा है। राजनीति के मौके, और भी आएंगे भविष्य में, विरोधाभास भूल प्रमाण दो, हृदय तुम्हारा भी बड़ा […]

अपने सुख दुःख की पोटली को रख किनारे में हमारे सुख दुःख को अपना जीवन बनाया पिताजी ने ही हमे सब कुछ सिखाया कल तक चलना नहीं आता था चलना आपने सिखाया आज ज़िन्दगी की […]

वीर जवानों की ये शहादत भूल नहीं हम पाएंगे ड्रैगन की औलाद तुझे हम जमकर धूल चटाएंगे मिट जाएगा नक्शा तेरा, कहीं नजर ना आयेगा तूने यदि पत्थर फेंका तो हम तिरसूल चलाएंगे। चमगादड़ तुझको […]

आज भी उसकी खैरियत की दुआ करता हूं उसकी तस्वीर को होंठों से छुआ करता हूं बेवजह ही वो सजाती है जनाजा मेरा उसके एहसास में मैं खुद को धुवां करता हूं शक्ति त्रिपाठी देव

आन बान शान में जले मेरी जवानी, लहू के कतरे को देख तड़पे मेरी जिंदगानी। अहर्निश के वादों को मैं संजो कर‌ रखता, कभी भूल सकता नहीं वीरों की बलिदानी।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

तन्हा सफर में मैं आगे बढ़ रहा हूं, मजबूरी की गठरी लेकर चल रहा हूं। वादें पुरा करने को पैदल सफर कर रहा हूं, अपने कदमों से गिन गिन कर दूरी तय कर रहा हूं।। […]

आ गया वक्त अब रहस्य उजागर करने का, यथार्थ के चक्कर में समय ना बर्बाद करो। साधक बनकर देश का कल्याण करो, सांत्वना देकर परेशान आत्मा पर उपकार करो।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

दिल का हाल काश तुम मेरे संग चलते। काश तुम मेरे रंग में ढ़लते।। काश तुम मेरे होंठों के मुस्कान बनते। काश तुम मेरे प्यारे से मेहमान बनते।। काश तुम मेरे सपनों के नाल बनते। […]

देशवासियों योग करो तन मन से निरोग रहो, आयुर्वेद योग के अलौकिक गुणों को अपनाकर । अपने इम्यून सिस्टम को हम सभी मजबूत करें, आओ एक उपकार करें योग के गुणों को बतलाकर।। महेश गुप्ता […]

आज योग दिवस ही नहीं पिता दिवस भी है तथा संगीत दिवस भी है। पिता के लिये कुछ शब्द:- 🌷🌷🌷🌷🌷 पिता वो दरख्ता है जो बचपन को छांव देता है। आये कोई भी मुश्किल हाँथ […]

हे मां शारदे करो मेरा अभिनन्दन स्वीकार, अज्ञानता को दूर कर करो मातृ हम पर उपकार। हाथ जोड़ विनती करूं शीश झुका करूं प्रणाम, नव कण्ठ स्वर चेतना का भर दो मां शारदे भण्डार।। ✍महेश […]

योग करो निरोग रहो का आन्दोलन चलाना है, घर घर को जागरूक करके अलख जगाना है, नित सुबह और शाम योग करना व करवाना है। तन को निरोगी बनाकर रोग मुक्त भारत बनाना है।। ✍महेश […]

योग दिवस:- योग करके अपने मानसिक, शारीरिक और संवेगात्मक तीनों अवस्थाओं का विकास कीजिए। योग से अन्तर्मन को निर्मल कीजिए। योग जीवन का वह अलौकिक दर्शन है जो हमें मोक्ष की ओर ले जाता है। […]

हृदय की वेदना जब सीमा के पार हुई कोशिशें बहुत कीं कम करने की, पर वो शमशीर की धार हुई तब लेखनी चल पड़ी मेरी, दर्द कम करने के लिए दिल के जज्बातों को जब […]

क्या माँ ने कभी विशेष दिन ही ममता लुटाया है। क्या माँ ने मात्र किसी खास दिन ही खिलाया है। क्या पिता ने कोई दिन देखकर जरूरतें पूरी की, या फिर केवल एक दिन सही […]

धर्मनीति व राजनीति के आगोश में समा गया है देश। उन्नति के ओर क्या बढेंगे यहाँ बदले है सब अपने भेष ।। अब मानव में मानवता नहीं पहरेदार भी अब सच्चा नहीं। ए वीर सुभाष […]

उठाई थी कलम कुछ अनसुलझे सवाल लिखने के लिए। अपने दिल के ज़ज्बात ना जाने कब लिखने लगी। लोग कहते हैं कि मैं बहुत अच्छा लिखने लगी। बस जितनी तकलीफें मिलती रहीं तुझसे, “मेरी कलम […]

21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक बधाई योग गीत – करो निरोग काया | ये योग साधना की है अजीब माया | कभी बचाए कोरोना कभी करे निरोग काया | कपालभाती और प्राणायाम […]

कविता- हमारा अभिमान | नहीं बिकेगा देश मे चीन का सामान | रहेगा हमारा समान हमारा अभिमान | लेकर धन हमसे हमे आँख दिखाता | घुसकर जमाईं हमारी हमे धमकाता | बनेगा आत्मनिर्भर हमारा हिनूस्तान […]

क्यूँ आज सूरज हो गया निस्तेज वह पहले जैसी बात नहीं। हवा भी चल रही है मद्धम-मद्धम उसमें भी पहले जैसी बात नहीं। न जाने क्यों बेरुखी कर रहे हैं सब मौसम के साथ कोई […]

विपक्ष की गंदी राजनीति, हक से बेशक करो। सैन्य बल कि शौर्यता पर, नाहक ना शक करो। जो तुम निशस्त्र वीरों को ज्ञान बाँट रहे। तुम्हारे पूर्वजों का बोया ही वह काट रहे। हाथ अब […]