काश में समंदर की गहराई में आराम से पड़ी होती तुम होते कान्हा मेरे चमकते मोती और मैं तुम्हारी राधा सीप होती.
काश में समंदर की गहराई में आराम से पड़ी होती तुम होते कान्हा मेरे चमकते मोती और मैं तुम्हारी राधा सीप होती.
चकाचौंध वाली जिंदगी पा ली मैंने अब ना करना पड़ता भूखे पेट बसर पर जो खुली आंखों से देखा था सपना तयना कर पाया उसकी परछाई तक का भी सफर.
मैं बेटी हूँ नसीबवालो के घर जनम पाती हूँ कहीं “लाडली” तो कहीं उदासी का सबब बन जाती हूँ नाज़ुक से कंधो पे होता है बोझ बचपन से कहीं मर्यादा और समाज के चलते अपनी […]
समझदार जब से अपनी नज़र मे बेहिसाब-सा मैं लापरवाह हो गया हूँ, सबको लगता है कि अब मै बहुत समझदार-सा हो गया हूँ।।
ख़ुदा पर जो भी बंदा यकीं दिखाता है। तलातुम में फँसी वो सफीना बचाता है। कठपुतलीयों की डोर है उसके हाथों में, जाने कब, कहाँ, कैसे, किसे नचाता है। जो किरदार उम्दा निभा गया रंगमंच […]
कदर कर लो यारो “ईश्वर ने जो दिया है उसकी कदर कर लो यारो, सम्भाल लो जिन्दगी इसकी फिकर कर लो यारो। सबको सब कुछ नही मिलता पर कुछ तो सोचो, तुमको जो मिला वो […]
रोज हजारों अफसाने गढ़े जाते तुम्हारे रोने पर… खिलखिलाने पर… नगमे लिखे जाते, तुम्हारे फूल से होंठों के ….मुस्कुराने पर। तुम्हारे मिलन पर, बिछोह पर, प्रेम पर , बेचारगी पर….। हर पल हर कदम हजारों […]
मिट गये तेरे दीवाने वतन के लिए-2 आंख दिखा के न जाये,आंच आने न पाए सर कटाते रहेंगे इसके क़फ़न के लिए मिट गये तेरे दीवाने वतन के लिए-2 हिन्दू-मुस्लिम हो भाई,क्या सिक्ख क्या ईसाई […]
वारिस था एकलौता उसका, नाजो से पाला था उसने, दी थी शिक्षा अच्छी उसकी, क्या क्या जतन किए थे उसने, लायक आदमी बनाने के लिए उसे, मालूम क्या था उसे, जाकर विदेश भूल जाएगा उसे, […]
छलक- छलक आंखों ने दिल का हाल जताया। गीले-सूखे जज्बातों को फिर आज जगाया। दिल की धड़कन ने मध्यम -मध्यम राग सुनाया। मैं जिंदा हूं! मुझको ऐसा एहसास कराया। एक कप की प्याली ने… … […]
अपनी ज़िंदगी फिर सजा ना सकूंगा। प्यार का साज फिर बजा ना सकूंगा। क्या मैं इतना मजबूर हो गया हूं, कि तुम्हें फिर बुला ना सकूंगा। क्या तुम इतनी दूर हो गई हो मुझसे, कि […]
गया वख्त जो अक्सर गुज़रता नहीं तमाम रात थोडा हँसा कर थोडा रूला कर अपनापन जता गया जाते जाते कह गया मैं यही हूँ तेरे साथ फिर कभी तन्हाइयों में दस्तक दे जाऊंगा जब कभी […]
हां कहती, नहीं ना कहती हो, छोड़ रखा बीच मझधार में। सारी जिंदगी बीता दूंगा मैं, सनम बस तेरे इंतज़ार में। नादान बन कहती, तुमसे प्यार कहां है। होंठों पर ना है, और दिल में […]
जीवन जीने की कला सीख लो जग से सब कुछ मिल जाएगा यहाँ बिना किसी मौल के अपना बनाना है तो सरल ह्रदय बन लोगों से मिल स्नेह और विश्वास बाँट दे सब में अपने […]
मेहनतकश औरत खुशियाँ किसी तख्तोताज की मोहताज़ नही होती, धन दौलत ही खुशियों का प्रतिमान नही होती। होठों पर मुस्कान गरीब के भी सज सकती है, खुशियाँ सिर्फ अमीरो की जागीर नही होती। मेहनतकश औरत […]
कहा था तुमसे , किताब ना बनो ! पर नहीं माने तुम। शायद! अच्छा लगता होगा तुमको, किसी के द्वारा पढ़ा जाना। चौराहे पर इश्क लड़ाने का शौक है तुम्हे। जब देखो यहां वहां कबूतर […]
जद्दोजहद में जीवन के अनमोल लम्हेरुठते चले गए, और मैं बेखबर मोहरों के चाल में उलझी, पढ़ाव दर पढ़ाव उलझती चली गयी, जीत -हार से क्या मिले, चाहे जितनी शीतल बयार चले, एक झोंका गर […]
मैं प्यासा था, समंदर में, दो अंजुली प्यास, खो आया । बड़ा आरोप लगा मुझ पर, मैं अपना आप खो आया ।। समंदर नें, उदासी को, मेरी आंखों में जब देखा । उदासी घुल गई […]
मै भीड़ मे नही हूँ शामिल,मेरा जिन्दगी जीने का अन्दाज़ निराला है। मुझे दुनिया के दिखावे से कही ज्यादा अपना ‘ऐटिट्यूड’ प्यारा है।।
जाने कैसे दौर से गुजर रहा हूँ मैं, वक़्त के हर मोड़ पे लड़खड़ाता हूँ, वो बन्दा ही जख्म-ए-संगीन देता है, जिसको पूरे दिल से मैं अपनाता हूँ ।। *नील पदम् *
जब दुःशासन खींच रहा था, द्रुपद सुता की साड़ी। शीश झुकाए सब पांडव थे विलख रही थी नारी।। विलख रही थी नारी धर्म धुरंधर भी थे मौन। युद्ध हुआ महाभारत का जिम्मेवार हुआ फिर कौन।।
लोग कहते हैं , मैं अपने पापा जैसे दिखती हूँ, एक बेटे सा भरोसा था उनको मुझपर मैं खुद को भाग्यशाली समझती हूँ। मैं रूठ जाती थी उनसे, जब वो मेरे गिरने पर उठाने नहीं […]
फिर आई वो ठिठुरन की रात, वो कुहासो भरा सवेरा, वो सिली सिली ठंड की रात, फिर आई वो याद गरम गरम चाय की चुस्की वाला सवेरा, तेरा मुझे चिढाना, और रूठना मेरा, फिर तेरा […]
पहली ही नजर में पूरी हो आस, ख़त्म हो जैसे बरसों की तलाश। जिसके वास्ते था मैं बेकरार, शायद इसे ही कहते हैं प्यार। प्यार में नज़रों की, ज़ुबाँ होती है, ख़ामोश हाले-दिल बयां होती […]
सूरज की किरणे भी सुबह-सुबह कयामत ढ़ा रही है, पूछ रही है,कैसे है वो?जिनकी तुम्हे याद आ रही है।
तबकी बात और है, ना करो तबकी बातें, थे तब भी लेकिन, जख्म हँसते ना थे। होंगे सांप तब भी, यकीनन आस्तीनों में, रहते थे खामोश, तब ये डसते ना थे ।। Copyright@ नील पदम्
सागर के सीने से निकले थे, काल सरीखे नाग। मुम्बई में बरसाने आये थे, जो जहरीली आग ।। रण रिपु छेड़ रहा था लेकिन, हम थे इससे अन्जान। छब्बिस ग्यारह दिवस ले गया, कई निर्दोषों […]
वो बोगेनविलिया की बेल रहती थी उपेक्षित, क्योंकि थी समूह से दूर, अलग, अकेली एक तरफ; छज्जे के एक कोने में जब देती थीं सारी अन्य लताएँ लाल, पीले, नारंगी फूल, वो रहती थी मौन, […]
तुम अपना घर ठीक से ढूंढना ,कुछ वहीं छूट गया मेरा ढूंढ़ना उसे , अपने किचन में जहाँ हमने साथ चाय बनाई थी तुम चीनी कम लेते हो ये बात तुमने उसे पीने के बाद […]
हाथ की लकीरों का क्या?बनती है और बिगड़ जाती है। भरोसा मेहनत पर रखो, किस्मत खुद ही सुधर जाती है।।
हुनर रखता हूँ दर्द-ए-दिल छिपाने का पर मेरे अरमान मचल रहे है, मेरे अश्क़ो पर बारिश की बूंदे भी अब तो बेअसर से दिख रहे है। उनसे मिलने को अब तो हम उन्ही से फरियाद […]
जब से अपनी नज़र मे बेहिसाब-सा मैं लापरवाह हो गया हूँ, सबको लगता है कि अब मै बहुत समझदार-सा हो गया हूँ।।
ब्रह्ममुहुर्त में जगना सीखो दिन करो जो मेहनत। निशा काल आराम करो तो श्रेष्ठ रहेगी तेरी किस्मत।।
अमृत बेले बिस्तर छोड़ो दिन में करो न आलिस। देर रात न जागो तो बन जाओगे खालिस।।
ठिठुरती रातों में वो हवाएँ जो सर्द सहता है। किसे बताएँ मुफ़्लिसी का जो दर्द सहता है। ज़मीं बिछा आसमां ओढ़ता, पर सर्द रातों में, तलाशता फटी चादर, जिसपे कर्द रहता है। पाँव सिकोड़, बचने […]
क्यू है राब्ता मुझसे? दूर चले जाने के बाद। आशिकी का नशा करते हो क्या? दिल जलाने के बाद। क्यों आज भी नजरें चुराकर चुपचाप देखते रहते मुझको ! क्या महसूस करना चाहते हो? तुम […]
मैंने तो तुझे रहमदिल समझा था पर तुम तो बड़े बेरहम निकले। सिर्फ़ जख्म दिखाने मैं आया था पर तेरे कुचे से घायल हम निकले।।
अगर आग घर में लगाए कोई पानी से उसको बुझा देंगे हम। लगाए जो जीवन में आके कोई इन अश्कों से कैसे बुझाएगे हम।।
” देशहित में जो प्राण हते, वही माई का लाल हैं। सीमा पर करे सुरक्षा,जागे दिन हर रात है। उन सपूतो को वन्दन करता,मेरा देश महान है। उन्ही के कारण हम है सुरक्षित, उन्ही से […]
बुलाती रही तुम्हें पर गौर न किया मेरी आवाजों पर खुशनसीबी है मेरी ए जिंदगी जो तेरी निगाह पड़ी मेरे अल्फाजों पर कहा जिंदगी से मैंने एक बार रुक तो सही मैं जरा खुल कर […]
“रिश्तो में छाँव सा है दोस्ती का मान, इससे मिलता है हर पल अभिमान। मित्र हर परिस्थिति में बढ़ाता है हाथ, कर्ण ने दिया समर में दुर्योधन का साथ। श्रीकृष्ण ने सुदामा संग मित्रता निभाई, […]
टूटे प्रेम अनादर से मिला सके न अल्लाह। मोती टूटे ना जुड़े कित लेपन कर लाह।।
किताबों में दबे गुलाबों की, अपनी अलग दास्तां होती है। बगैर कुछ कहे ख़ामोशी से, उनकी कहानी बयां होती है। भले ही वह सूख जाए, पर सदा जवान होती है। सम्भाल कर रखने वाले की, […]
बिना पंख की बेटी होती फिर भी कहते परी मेरी। बेटा दूर नजर से हो फिर भी कहते छड़ी मेरी।।
पिता नहीं कोई राजा बेटा राजकुमार हीं होता। दुर्लभ दर्शन मिले जहाँ ऐसा एक प्यार हीं होता।।
पत्थर से बन कर रह गई जख्मों को सहकर भी रोई नहीं तुमने ही दिल कहीं और लगा लिया वरना तुमसे अजीज तो आज भी कोई नहीं.
तुमने बसा ली अपनी दुनिया मुझे तो किसी छत का भी सहारा नहीं चाह कर भी मैं तुम्हारा हाल ना पूछ सकू कहीं कह दो की अब ये हक तुम्हारा नहीं.
मेरे दिल का हाल बुरा है इसका इल्जाम तुम पर लगाती हूं पिया ना यकीन तो हो चलो मेरी बढ़ती धड़कन तुम्हें सुनाती हूं
दुनिया चाहे लाख खूबसूरत है सिंगार चाहे खूब करें पर सादगी की अपनी ही बात है पुराने भददे कपड़ों में भी वह कुछ अलग सी लगती है जाने उसमें ऐसी क्या बात है
बदला खूब लिया उसने मुझसे मुड़ कर देख मुझे चली गई मुस्कुरा कर थोड़ा सा दिल का दर्द मुझे दे गई
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