जाने कैसे दौर से गुजर रहा हूँ मैं, वक़्त के हर मोड़ पे लड़खड़ाता हूँ, वो बन्दा ही जख्म-ए-संगीन देता है, जिसको पूरे दिल से मैं अपनाता हूँ ।। *नील पदम् *
जाने कैसे दौर से गुजर रहा हूँ मैं, वक़्त के हर मोड़ पे लड़खड़ाता हूँ, वो बन्दा ही जख्म-ए-संगीन देता है, जिसको पूरे दिल से मैं अपनाता हूँ ।। *नील पदम् *
जब दुःशासन खींच रहा था, द्रुपद सुता की साड़ी। शीश झुकाए सब पांडव थे विलख रही थी नारी।। विलख रही थी नारी धर्म धुरंधर भी थे मौन। युद्ध हुआ महाभारत का जिम्मेवार हुआ फिर कौन।।
लोग कहते हैं , मैं अपने पापा जैसे दिखती हूँ, एक बेटे सा भरोसा था उनको मुझपर मैं खुद को भाग्यशाली समझती हूँ। मैं रूठ जाती थी उनसे, जब वो मेरे गिरने पर उठाने नहीं […]
फिर आई वो ठिठुरन की रात, वो कुहासो भरा सवेरा, वो सिली सिली ठंड की रात, फिर आई वो याद गरम गरम चाय की चुस्की वाला सवेरा, तेरा मुझे चिढाना, और रूठना मेरा, फिर तेरा […]
पहली ही नजर में पूरी हो आस, ख़त्म हो जैसे बरसों की तलाश। जिसके वास्ते था मैं बेकरार, शायद इसे ही कहते हैं प्यार। प्यार में नज़रों की, ज़ुबाँ होती है, ख़ामोश हाले-दिल बयां होती […]
सूरज की किरणे भी सुबह-सुबह कयामत ढ़ा रही है, पूछ रही है,कैसे है वो?जिनकी तुम्हे याद आ रही है।
तबकी बात और है, ना करो तबकी बातें, थे तब भी लेकिन, जख्म हँसते ना थे। होंगे सांप तब भी, यकीनन आस्तीनों में, रहते थे खामोश, तब ये डसते ना थे ।। Copyright@ नील पदम्
सागर के सीने से निकले थे, काल सरीखे नाग। मुम्बई में बरसाने आये थे, जो जहरीली आग ।। रण रिपु छेड़ रहा था लेकिन, हम थे इससे अन्जान। छब्बिस ग्यारह दिवस ले गया, कई निर्दोषों […]
वो बोगेनविलिया की बेल रहती थी उपेक्षित, क्योंकि थी समूह से दूर, अलग, अकेली एक तरफ; छज्जे के एक कोने में जब देती थीं सारी अन्य लताएँ लाल, पीले, नारंगी फूल, वो रहती थी मौन, […]
तुम अपना घर ठीक से ढूंढना ,कुछ वहीं छूट गया मेरा ढूंढ़ना उसे , अपने किचन में जहाँ हमने साथ चाय बनाई थी तुम चीनी कम लेते हो ये बात तुमने उसे पीने के बाद […]
हाथ की लकीरों का क्या?बनती है और बिगड़ जाती है। भरोसा मेहनत पर रखो, किस्मत खुद ही सुधर जाती है।।
हुनर रखता हूँ दर्द-ए-दिल छिपाने का पर मेरे अरमान मचल रहे है, मेरे अश्क़ो पर बारिश की बूंदे भी अब तो बेअसर से दिख रहे है। उनसे मिलने को अब तो हम उन्ही से फरियाद […]
जब से अपनी नज़र मे बेहिसाब-सा मैं लापरवाह हो गया हूँ, सबको लगता है कि अब मै बहुत समझदार-सा हो गया हूँ।।
ब्रह्ममुहुर्त में जगना सीखो दिन करो जो मेहनत। निशा काल आराम करो तो श्रेष्ठ रहेगी तेरी किस्मत।।
अमृत बेले बिस्तर छोड़ो दिन में करो न आलिस। देर रात न जागो तो बन जाओगे खालिस।।
ठिठुरती रातों में वो हवाएँ जो सर्द सहता है। किसे बताएँ मुफ़्लिसी का जो दर्द सहता है। ज़मीं बिछा आसमां ओढ़ता, पर सर्द रातों में, तलाशता फटी चादर, जिसपे कर्द रहता है। पाँव सिकोड़, बचने […]
क्यू है राब्ता मुझसे? दूर चले जाने के बाद। आशिकी का नशा करते हो क्या? दिल जलाने के बाद। क्यों आज भी नजरें चुराकर चुपचाप देखते रहते मुझको ! क्या महसूस करना चाहते हो? तुम […]
मैंने तो तुझे रहमदिल समझा था पर तुम तो बड़े बेरहम निकले। सिर्फ़ जख्म दिखाने मैं आया था पर तेरे कुचे से घायल हम निकले।।
अगर आग घर में लगाए कोई पानी से उसको बुझा देंगे हम। लगाए जो जीवन में आके कोई इन अश्कों से कैसे बुझाएगे हम।।
” देशहित में जो प्राण हते, वही माई का लाल हैं। सीमा पर करे सुरक्षा,जागे दिन हर रात है। उन सपूतो को वन्दन करता,मेरा देश महान है। उन्ही के कारण हम है सुरक्षित, उन्ही से […]
बुलाती रही तुम्हें पर गौर न किया मेरी आवाजों पर खुशनसीबी है मेरी ए जिंदगी जो तेरी निगाह पड़ी मेरे अल्फाजों पर कहा जिंदगी से मैंने एक बार रुक तो सही मैं जरा खुल कर […]
“रिश्तो में छाँव सा है दोस्ती का मान, इससे मिलता है हर पल अभिमान। मित्र हर परिस्थिति में बढ़ाता है हाथ, कर्ण ने दिया समर में दुर्योधन का साथ। श्रीकृष्ण ने सुदामा संग मित्रता निभाई, […]
टूटे प्रेम अनादर से मिला सके न अल्लाह। मोती टूटे ना जुड़े कित लेपन कर लाह।।
किताबों में दबे गुलाबों की, अपनी अलग दास्तां होती है। बगैर कुछ कहे ख़ामोशी से, उनकी कहानी बयां होती है। भले ही वह सूख जाए, पर सदा जवान होती है। सम्भाल कर रखने वाले की, […]
बिना पंख की बेटी होती फिर भी कहते परी मेरी। बेटा दूर नजर से हो फिर भी कहते छड़ी मेरी।।
पिता नहीं कोई राजा बेटा राजकुमार हीं होता। दुर्लभ दर्शन मिले जहाँ ऐसा एक प्यार हीं होता।।
पत्थर से बन कर रह गई जख्मों को सहकर भी रोई नहीं तुमने ही दिल कहीं और लगा लिया वरना तुमसे अजीज तो आज भी कोई नहीं.
तुमने बसा ली अपनी दुनिया मुझे तो किसी छत का भी सहारा नहीं चाह कर भी मैं तुम्हारा हाल ना पूछ सकू कहीं कह दो की अब ये हक तुम्हारा नहीं.
मेरे दिल का हाल बुरा है इसका इल्जाम तुम पर लगाती हूं पिया ना यकीन तो हो चलो मेरी बढ़ती धड़कन तुम्हें सुनाती हूं
दुनिया चाहे लाख खूबसूरत है सिंगार चाहे खूब करें पर सादगी की अपनी ही बात है पुराने भददे कपड़ों में भी वह कुछ अलग सी लगती है जाने उसमें ऐसी क्या बात है
बदला खूब लिया उसने मुझसे मुड़ कर देख मुझे चली गई मुस्कुरा कर थोड़ा सा दिल का दर्द मुझे दे गई
ना कोशिश करो जलाने की पानी से दीए रोशन नहीं होते खामोश रहकर सुलझा लो सभी उलझने शोर से कभी मसले हल नहीं होते.
रात कितनी भी घनी हो सुबह हो ही जाती है चाहे कितने भी बादल घिरे हो सूरज की किरणें बिखर ही जाती हैं अंत कैसा भी हो कभी घबराना नहीं क्योंकि सूर्यास्त का मंज़र देख […]
विनयचंद रे कर सदा, नारी का सम्मान। पूजित होते ये जहाँ, रमते तहँ भगवान।।
पुराण अठारह लिख गए, वेदव्यास भगवान। परोपकार बड़ पुन्य है, परपीड़ा पाप महान।।
मुझे एहसान नहीं प्यार चाहिए। मुझे रहम नहीं एतबार चाहिए। तुम ही मेरे दिल की सुकून हो, मुझे तड़प नहीं करार चाहिए। बगैर तुम्हारे अब जीना है मुहाल, मुझे तसव्वुर नहीं दीदार चाहिए। बरसों से […]
गाँव की जमीं बेच दी, पुश्तैनी मकां बेच दिया। शहर की चकाचौंध खरीदी, खुशियों का जहां बेच दिया। मिट्टी की सौंधी महक, चिड़ियों की मधुर चहक। नीम की ठंडी छाँव, मिट्टी में सने पाँव। खेतों […]
मात पिता की कर वंदन। सेवा सतत सहित निज तन मन धन। होवे आयु बल विद्या यशवर्द्धन ।।
एक पुत्र गुणवान रहे, मूरख ना दस बीस । बहुत सितारे ना करे, एक चन्द्र की रीश।।
मै भीड़ मे नही हूँ शामिल,मेरा जिन्दगी जीने का अन्दाज़ निराला है। मुझे दुनिया के दिखावे से कही ज्यादा अपना ‘ऐटिट्यूड’ प्यारा है।।
कैसे जिओगे अपनी जिंदगी रह गया हो जिंदगी का एक ही दिन अगर बड़ा प्यारा जवाब दिया आशिक ने मोहब्बत के सवाल पर मैंने तो बनाया तुम्हें हर पल अपनी जिंदगी जीने की वजह हर […]
प्यारे बच्चों,प्यारे बच्चों आओ मेरे पास, दूर वहाँ क्यो बैठो हो तुम हो क्यो इतने उदास? आओ मिलकर पाठ पढ़े कुछ सीखे नयी बात, मिल जुलकर हम साथ रहे और मन में हो विश्वास। प्यारे […]
हाथ की लकीरों का क्या?बनती है और बिगड़ जाती है। भरोसा मेहनत पर रखो, किस्मत खुद ही सुधर जाती है।।
जो नज़रो से परख ले वो माँ होती है। दर्द को दिल में जो रख ले वो माँ होती है। कर कोई काम तू बुरा खुदा से चाहे हो छुपा जो तेरा चेहरा भांप ले […]
याद आ जाते है अक्सर सितम वो भी जो हमे देख मुस्कुराते थे आज वो हमसे मुहं छुपाते हैं ।
वो क्या महसूस करेंगे जिनके दिल में भी दिमाग होता है। दिल की जगह रिश्तों में दिमाग ही लगाते हैं ।
तुम्हें मालूम है हमको मानना खूब आता है । तो आखिर ये बताओ तुम क्यूँ हमसे हमेशा रूठ जाते हो।
आपको रंग डालेगे हाँथ में रंग है पीला। पहले सूखा लगायेंगे भर के पिचकारी में गीला। आप जब गुस्से में आकर के हमपे तिलमिलओगे आपका साँवला मुखड़ा कर देंगे बैंगनी-नीला।
बजे ढोलक बजे नगमे मचे हुढ़दंग होली में रंगी धरती रंगा अम्बर । उड़े है रंग होली में कोई गुब्बारे से खेले तो कोई मरे पिचकारी पड़ी हैं पान की छींटे चढ़े है भंग होली […]
देकर हमको दर्द वो सो रहे हैं । अपनी-अपनी किस्मत है वो हँस रहे हैं और हम रो रहे हैं ।
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