आवाज़ कोई भी होगी तुम तक जाने नहीं दूँगा, तुमको अपनी पकड़ से कहीं दूर जाने नहीं दूंगा, बड़ी मशक्कत के बाद मैंने तुम्हें कमाया है दोस्त, किसी के कहने से यूँहीं तुमको गवाने नहीं […]

गुंजन है धड़कनों में! यह किसके पदचापों की आवाज है? क्या यह तुम हो? मेरे कालिदास! जिन्हें बंद आंखें भी पहचानती हैं। क्यों आए अचानक आज इतने चुपचाप? मेरे मन की आंखें और धड़कनों के […]

रेत का महल, पल दो पल में ढह गया। आशियाँ अरमानों का पानी में बह गया। तिनके जोड़कर बनाया था जो घोंसला, बस वही, तूफानों से लड़ कर रह गया। वह दरिया है, जो बुझा […]

किया प्यार तुमसे, मैं करता रहूँगा। रस्म- ए-वफा को निभाता रहूँगा।। किया……. सूरत तुम्हारी मैं दिल में बसाई । अपना बनाने की चाहत है आई।। मिलो न मिलो मुझसे बुलाता रहूँगा। किया प्यार तुमसे मैं […]

आते नहीं मुझसे मिलने तुम हमसे अक्सर ये गिला किया करते छोड़ दिया है उन गलियों में जाना जिनमें हम कभी मिला करते थे चाह कर भी तेरे दर पे ना आ सके तेरी सलामती […]

बत्ती लाल नीली पीली का फर्क जानते नहीं, कुछ मेरे देश के युवा खुद को पहचानते नहीं, जिंदगी के चौराहे पर खड़े ट्रैफिक हवलदार, जैसे खुद के बनाये नियमों को मानते नहीं॥ राही अंजाना

मैं समंदर हूँ ऊपर से हाहाकार पर भीतर अपनी मौज़ों में मस्त हूँ मैं समंदर हूँ दूर से देखोगे तो मुझमें उतर चढ़ाव पाओगे पर अंदर से मुझे शांत पाओगे मैं निरंतर बहते रहने में […]

हे कांता! कौन सी मिट्टी से बनी हो तुम अपनी इच्छाओं का दमन कर कैसे रह पाती हो हंसती मुस्कराती तुम? वाकई बेमिसाल हो तुम। हे स्त्री! कैसे हर परिस्थिति में खुद को ढाल कर […]

बज़्म ए महफ़िल में तेरी घूमते मिलेंगे, थक जायेगें जो तेरी तस्वीर चूमते मिलेंगे, तू एक फूल है साथ रहे जब तक अच्छा है, वो गैरमौजूदगी में तेरी खुशबू सूँघते मिलेंगे, रातभर सोते रहेंगे जो […]

जो जैसा दिखता है, वो वैसा होता नहीं है। दूध का जला बगैर फुंके, छाछ भी पीता नहीं है।। लोग चेहरे पर चेहरा लगाए होते हैं, सूरत से सीरत का पता चलता नहीं है। मुंह […]

चले भी आओ मनमीत मेरे बहार- ए-गुलशन बुला रहा है। सजाई महफिल है प्रीत मेरे बहार- ए-गुलशन बुला रहा है।। नजरों के आगे तुम्हारा डेरा धड़कनों में समाए हुए हो। जस्न-ए-मुहब्बत करीब अपने काहे को […]

मेरे महबूब को देख, चाँद भी शरमाया है। मेरा माहताब जो ज़मीं पर उतर आया है। चाँद भी कहीं, देखो बादलों में छुप गया, अक्स देख तेरा, रश्क से मुँह छिपाया है। ऐ चाँद, तेरी […]

सावधान करती हूं कवियों को ना लेना पड़ जाए लिखने से जोग हवा झूठ की चल पड़ी है सच्चे शब्दों से रुठे हैं लोग. कितना समझा लोगे तुम उनको जमाना बहुत ही संगदिल है जिस […]

कैसे बताएं दर्द का आलम क्या होता है लिखने के लिए कवी खुद को कितना नोचता है रचना शुरू होती है कलम की नोक से और अंत पूर्ण विराम (!)पर होता है. घिस घिस कर […]

उड़ने नहीं दोगे आज तो कल उड़ना भूल जाएंगे, परिंदे अपनी ही शाख से मिल जुलना भूल जाएंगे, घर बनाने के हुनर के साथ जो पैदा हुए हैं बन्दे, गर पिंजरे में बन्द रहे तो […]

जो दिल में उतर जाए ऐसे जज़्बात लिखता हूँ, रातों की नींदें चुरा ले ऐसे ख्वाब लिखता हूँ। हकीम नहीं हूँ मैं कोई साहब, पर दिलो दिमाग पर असर कर जाए ऐसे अलफ़ाज़ लिखता हूँ। […]

इस तन्हाई के रेले में, आ जाते हो तुम खयालो में, याद तेरी दिल से जाती नहीं, कहां हो तुम खबर आती नहीं, कैसे दूं मैं दिल को सुकून कि मुकद्दर में अब तुम नहीं […]

अपनी ही आजादी के आदी बन गए जाने हम क्यों बागी बन गए बेबसी की रस्सी पर लटक कर कई ख्वाब मेरे खुदकुशी कर गए. धकेलो कितनी भी जोर से मुझे संभलना सीख गई हूं […]

पति के बटुए पर अक्सर ही नज़र टिकाई जाती थी, पति जो भी कमाये वो पत्नी हाथ कमाई जाती थी, भूख लगने पर रोटी जो चूल्हे में ही पकाई जाती थी, चार लोगों को बैठाकर […]

इस तन्हाई के रेले में, आ जाते हो तुम खयालो में, याद तेरी दिल से जाती नहीं, कहां हो तुम खबर आती नहीं, कैसे दूं मैं दिल को सुकून कि मुकद्दर में अब तुम नहीं […]

दिले-नादाँ, तू इतना परेशाँ क्यूँ है। खता क्या हुई, इतना पशेमाँ क्यूँ है। इज़हारे-इश्क, कोई गुनाह तो नहीं, तेरे चेहरे की रंगत, फिर हवा क्यूँ है। इंतज़ार तो कर, इकरारे-ज़वाब का, यकीं तो रख, ख़ुद […]

चलो देर से ही सही उसे समझ तो आया था आधी रात को खामोशी में खुले आसमान के निचे, चाँद सितारों की मौजूदगी में मेरे यार ने मुझे गले तो लगाया था। याद है मुझे […]

वह भी मुझे चाहती है यह सोच हम बेबाक हो गए प्यार में गिरते ही दुनिया की नजरों में नापाक हो गए मुस्कुरा कर उसने हमें देखा हमें लगा हम प्यार में आबाद हो गए […]

मल्टीनेशनल कंपनियों के लालच से बचों भाइयों यह बे ज़रुरत की चीज़ों से आपका घर भड़ देंगे लोन और क्रेडिट कार्ड की लालच से बचों भाइयों इनसे घर उजड़ते देखा है मैंने खुदा ने जैसा […]

ये चाँद गर न होता होती ये काली रातें। दो प्रेमियों के दिल की रहती अधूरी बातें।। नौका विहार नाहीं नहीं प्यार प्यार होता। मस्ती में मस्त निशचर उपद्रव हजार होता।। मायूस ये चकोरा बिन […]

ये चाँद गर न होता होती ये काली रातें। दो प्रेमियों के दिल की रहती अधूरी बातें।। नौका विहार नाहीं नहीं प्यार प्यार होता। मस्ती में मस्त निशचर उपद्रव हजार होता।। मायूस ये चकोरा बिन […]

ओ रैना, तुझे मैं क्या कहूं? रात कहूं, रैना कहूं या निशा कहूं, मिलता है दिल को सुकून, साये में तेरे, मिट जाती है सारी थकान, साए में तेरे, प्यारे लगते हैं नजारे, जब टिमटिमाते […]

चलो रस्मों रिवाज़ों को लांघ कर कुछ दिल की सुनी जाये कुछ मन की करी जाये एक लिस्ट बनाते हैं अधूरी कुछ आशाओं की उस लिस्ट की हर ख्वाहिश एक एक कर पूरी की जाये […]

हमें तो पता ही न था, ये नशा क्या शय है। हिज्र-ए-महबूब के बाद, बस मय ही मय है। दुनिया हमारी शराफ़त की मिसाल देती थी, शरीफ़ों मे ही नहीं, रिंदों के बीच भी गये […]

यह सब बहाने ही हैं कि वक़्त नहीं। इतना भी मसरूफ़ कमबख़्त नहीं। मिला करो कभी कभार, जो हमसे करते हैं प्यार। इतना भी दिल को करो सख्त नहीं। यह सब बहाने ही हैं कि […]

याद तुम्हे मै अब नहीं ऑंखें इंतजार की करती है भूल अब तो अश्कों पर भी मेरा बस नहीं आँसू गिरकर बन गए सूखी मिटटी मे धूल.

नन्ही सी परी थी तुम, जब आई थी गोद में मेरे, सपने जो संजोए थे मैंने, एक बेटी हो प्यारी सी, वो कर दिया था पूरा, मेरी गोद में आकर तूने, न जाने कितनी लोरियां […]

चलो चांद पर चलकर बैठेंगे, कुछ नैन मटक्का खेलेंगे। क्या दिल में है अरमान तेरे! क्या दिल में है अरमान मेरे! तारों की छैयां बैठेंगे, हम आंखों में बस देखेंगे। तुम भी पढ़ना मैं भी […]

दिन गुजर जाता है सदा सुबह शाम वाला। वक्त का घोड़ा अगर होता लगाम वाला।। कोई कहीं भी इसको सशक्ति खींच लेता। चाबुक भला क्यों न मारे हिलने नहीं वो देता।। पल भर कहीं न […]