रिश्ता जोड़कर कोई तोड़ने की आदत नहीं मुझको, दिल के सीधे रस्ते को मोड़ने की आदत नहीं मुझको, काँच के आईने में चेहरा देखकर खुश हो लेता हूँ मैं, उसकी नज़रों में नज़ारे छोड़ने की […]
रिश्ता जोड़कर कोई तोड़ने की आदत नहीं मुझको, दिल के सीधे रस्ते को मोड़ने की आदत नहीं मुझको, काँच के आईने में चेहरा देखकर खुश हो लेता हूँ मैं, उसकी नज़रों में नज़ारे छोड़ने की […]
कितनी मन्नतें माँगी, तब तुझसे मिलना हुआ, मगर मिलकर भी, हमारा मिलना ना हुआ।
लगाकर गले से तुझको दूरियाँ मिटानी थीं, कितनी गहरी हैं ये नज़दीकियाँ दिखानी थीं, तूने नज़रें मिलाई नहीं जिस अंजाने राही से, उसे तुझे हवाओं की सरगोशियाँ सुनानी थी।। राही अंजाना
भटकते फिर रहे हैं जंगलों में शांति के पंछी, इन्हें दो आसरा मत व्यर्थ में बातें बनाओ तुम, सरकते जा रहे इन पेड़ों के घरोंदों से ये पंछी, इन्हें दो सहारा मत अर्थ की रातेँ […]
जिस खेत मे पानी दे रहे थे हम बरसो से । लोग कहते है वो बंजर थी ज़मीन बरसो ।।
दुश्मनों का सर्वनाश जवानों ने ठाना है। नेस्तेनाबूत आतंकियों का ठिकाना है।। क्या सोचा, कुछ भी कर बच निकलोगे, घर में घुसकर मारना आदत पुराना है। दुश्मनों का सर्वनाश जवानों ने ठाना है।। आतिशबाज़ी का […]
हम वह नशा हैं, जो कहीं बिकते नहीं। जिसे लत लग जाए तो फिर छुटते नहीं। कीमत मेरी तो फकत प्यार ही है दोस्तों, लगा लो लत, दस्तकस कहीं रुकते नहीं। दुनिया में कोई कमी […]
छिपाकर किताबों में कोई मेरी तस्वीर भूल गया, दबाकर पन्नों में जैसे कोई मेरी तकदीर भूल गया, बैठा रहा मैं यूँही किसी पैदल सा गुलाम बनकर, के बिसात पर चलने की मेरी तदबीर भूल गया।। […]
उस आसमानी को मैं ज़मीनी बुला बैठा, उसकी शिद्दत में मैं खुद को भुला बैठा, आराईश में जिसकी मैं साँझ सवेरे बैठा, उसकी मोहब्बत में मैं खुद को घुला बैठा, मेरे जिस्म से मेरी रूह […]
जख़्म तो बहुत दिए तुमने, मगर मलहम लगाना भूल गयी याद तो रोज आती थी आपको मेरी, लेकिन आँसु बहाना भूल गयी जब दुनिया में आपके पास कोई न हो तब मुझे बुला लेना लेकिन […]
आँखों की खाई को तुमने बेहता समंदर बना दिया इस प्यार को ठुकराके, मुझे आवारा भवंडर बना दिया
साथ तो तू मेरे हर वक्त रहा करती है हाँ …. वो बात अलग है की पहले तुम मेरी आँखों के सामने रहा करती थी और अब मेरी यादों के सामने रहा करती हो
आँखों के झरनो में तेरी याद बाहा करती है पलके मूँद बस ये फ़रियाद कहा करती है एक दिन बस मेरी जिंदगी से मिला दे तेरे लिए ये साड़ी जवानी बयां करती है
एक बार रुके कदम फिर चलने लगे उनकी रूह की आग में हम पिघलने लगे हाथ अगर होता उनका मेरे हाथ में तो जहान सारा बदल देता लेकिन अकेले ही गिरके हम समलने लगे एक […]
तुम ज़िंदगी से जीते नहीं,मगर लड़े तो थे. यह बात कम नहीं कि तुम जिद पर अड़े तो थे. गम तो हमेशा रहेगा कि बचा ना सके तुम्हे, वरना हमे बचाने तुम तो वहाँ खड़े […]
जब हम साथ है तो फासलों का ज़िक्र क्यों करें डर के शागिर्द में जिंदगी बसर क्यों करे
मुखौटे के पीछे चेहरा छुपाया करते हैं, झूठ बोलने वाले सच गुमाया करते हैं, गुमराह करने की चाहत में आईने को, ऑंखें आँखों से अक्सर चुराया करते हैं, दिन के उजाले में सच हुआ नहीं […]
कब कोई सिपाही ज़ंग चाहता है। वो भी परिवार का संग चाहता है। पर बात हो वतन के हिफाजत की, न्यौछावर, अंग-प्रत्यंग चाहता है। पहल हमने कभी की नहीं लेकिन, समझाना, उन्हीं के ढंग चाहता […]
भटकते फिर रहे हैं जंगलों में शांति के पंछी, इन्हें दो आसरा मत व्यर्थ में बातें बनाओ तुम, सरकते जा रहे इन पेड़ों के घरोंदों से ये पंछी, इन्हें दो सहारा मत अर्थ की रातेँ […]
कभी दिल से दिल मिलाकर तो देखो उस के लिए अपने अरमान जगाकर तो देखो जालिम आंखों से तो हर कोइ मुमुस्कुरा लेता है लेकिन कभी मोहब्बत की राहो मे आकर तो देखो जो बात […]
ये झुकी हई आंखों से मानो सुनहरी शाम सी लगती हो ये हसीन चेहरा एक खिलता गुलाब सी लगती हो किसी की जान न ले लेना आपकी मुसकान की तलवार से हर मेहखाना का कभी […]
ये प्यारी मुस्कान आपकी पहचान बन जाए खिलता चेहरा लोगो के लिए ये शराब बन जाए ये होठ ये पलकें और ये गाल मानो मुझसे यह कह रहे हैं की खोजा इन सब में और […]
पतंगे को दीपक की आहोशी में जाकर अच्छा लगा, ज़िन्दगी को मौत की मदहोशी में आकर अच्छा लगा, बन्द रही थी सर्द रातों में कहीं वीराने में जो मोहब्बत, आज खुलेआम उसे गर्मजोशी में आकर […]
बस यूँही हम मिले और मिलते रहे, थे कली फिर भी फूलों से खिलते रहे, रिश्ते जितने ही हमसे उलझते रहे, उतना ही प्रेम में हम सुलझते रहे, रोका हमको बहुत हम रुके ही नहीं, […]
अपनी हथेली पर शहीदों के नाम की मेंहदी रचाता रहा हूँ मैं, खुद ही के रंग में शहादत का रंग मिलाता रहा हूँ मैं, हार कर सिमट जाते हैं जहाँ हौंसले सभी के, वहीं हर […]
एक माँ की गोद में एक माँ के लाल आ गए, दोनों ही माँ की आँखों में आसूँ हाल आ गए, रंग माथे दुरंगा लगा कर ख़ुशी से भेजा जिन्हें, वो लिपटकर तिरंगे में आज […]
“नव वर्ष की शुभकामनाएं ” ————————— नव वर्ष की शुभकामनाएं / बच्चों में उत्साह जगाएं | प्रांगन मंदिर संस्कृति अपनाएँ / देवी को सुमधुर गीत सुनाएँ || भगवा ध्वज की पताकायें | तिलक चन्दन टीका […]
“पुलवामा शहीदों को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजली” पीठ पे वार करना, तुम्हारी पुरानी कुनीति है। आमने – सामने की रण, तुमने कब जीती है। कायरता के प्रमाण से तुम्हारे, अनभिज्ञ नहीं, पराजय की, सदैव तुम्हारे हृदय में […]
सच की दीवारों पर झूठ की तस्वीरें दिखाई गईं, जब भी सर उठाया तो बस शमशीरें दिखाई गई, बैठा ही रहा मैं भी शहंशाहों सा चौकड़ी लगाकर, एक के बाद एक मुझे सबकी तकदीरें दिखाई […]
इक पूरा इंसान था ये सारा जहान एक हाथ काट गया बंगाल और दूसरे हाथ पाकिस्तान बिच में रह गया मेरा भारत महान कश्मीर पर हमला करके क्या करता है तू खुद पे गुमान दूध […]
हसीनों से क्या माँगे कोई जो नज़र ही नहीं मिलाती मर मिटे उसके लिए कोई जो जहर ही नहीं पिलाती !
प्यार करने की कोई वजह नहीं होती दिलजलों के लिए कोई जगह नहीं होती !
बहुत खूब लिखती हैं आप जैसे कोई कद्रदान मिला आपकी सायरी पढ़कर लगता है जैसे वरदान मिला !
लिखने को बहुत है पर कोई वजह तो मिले मिलने को बहुत है पर कोई जगह तो मिले !
Always try to be a good friend and never try to be a lover.
मैं नहीं कहता कि मैने किसी से प्यार नहीं किया, हाँ किया मगर किसी ने भी मुझे स्वीकार नहीं किया !
Love is natural law, no body can avoid it.
कविता बहती है कविता तो केवल व्यथा नहीं, निष्ठुर, दारुण कोई कथा नहीं, या कवि शामिल थोड़ा इसमें, या तू भी थोड़ा, वृथा नहीं। सच है कवि बहता कविता में, बहती ज्यों धारा सरिता में, […]
तुम अपना न सही तो पराया ही कह दो, के मुझे झूठे मुँह अपना साया ही कह दो, इससे पहले के बन्द हो न जाएँ ये आँखे, था मुझे तुमने दिल में बसाया ही कह […]
मरता किसान जमीं को खोदकर अपना आसमान ढूंढते है पसीने की हर एक बूँद से अनाज उगाते है सबके मोहताज होने के बाद भी यह किसान हम सब की भूख मिटा जाते है सूखापन जमीं […]
कुछ बीते पलों की बात थी उनसे हुई पहली मुलाकात थी रुक तो गया था वह शमां क्योंकि झुकी हुई पलकों की वो पहली शुरुआत थी कुछ बीते पलों की बात थी…. दीदार का वह […]
जमीं को खोदकर अपना आसमान ढूंढते है पसीने की हर एक बूँद से अनाज उगाते है सबके मोहताज होने के बाद भी यह किसान हम सब की भूख मिटा जाते है सूखापन जमीं के साथ-साथ […]
“हम खुद काम जल्दी कराने के लिये रिश्वत देते है फिर देश मे भ्रष्टाचार बहुत है ये सोच कर हमे बुरा क्यो लगता है…………. हम होटलो मे बढी ही शानसे छुटु को आवाज़ देते है […]
सांसों की आवाज़ एक दूजे को सुनाई जाती है, होटों पर अक्सर ही ख़ामोशी दिखाई जाती है, एक चेहरे पर एक चेहरा कुछ इस कदर चढ़ता है, के जिस्म पर जैसे किसी कोई रूह चढ़ाई […]
फिज़ा में खुशबू, पहचानी सी है। छिपी कहां, मुझमें तू सानी सी है। ढूंढे उसे जो खुद से अलग हो , मैं जिस्म और तू रूहानी सी है। सूखी, बंजर जिंदगानी थी पहले, मैं तपता […]
हसीनों की वादियों में बदसूरतों को भी रहने दीजिए, दर्द कितना है फ़िज़ाओं में ज़रा हमें भी सहने दीजिए ! जानते हैं वक़्त है आपका पर हमें भी थोड़ी पनाह दीजिए, मारना है तो फिर […]
जो भी जी में आए फेकिए जनाब तवा पे अपनी रोटी सेकिए जनाब गाय के नाम पे इंसानों को बाँटिए फिर तमाशा गौर से देखिए जनाब बाकी सब को भुला दीजिए आप बस खुद का […]
Pyar woh hain jo ankhon mein ansu aane na dein, Jo dhund laaye har ek khushi har ek ghum mein.
Tumhe nahi pata… kab tumhaari karmo nazar meri nazar se milte hi dil mein utar jaati hai… Uss roshani ko ghere syaah raat sa kaajal meri mehfil e shaam ban jaati hai… Tumhe nahi pata… […]
शरद की बारिस में, शुभ्र प्रभा भीग रही है, एकांत से आँगन में , वो खड़ी सोच रही है, वह आभास कहाँ? जो मिथक मिटाये, खाली दालान पड़ा, कौन हक् जाताये? मिट्टी की ये महक […]
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.