ये झुकी हई आंखों से मानो सुनहरी शाम सी लगती हो ये हसीन चेहरा एक खिलता गुलाब सी लगती हो किसी की जान न ले लेना आपकी मुसकान की तलवार से हर मेहखाना का कभी […]

पतंगे को दीपक की आहोशी में जाकर अच्छा लगा, ज़िन्दगी को मौत की मदहोशी में आकर अच्छा लगा, बन्द रही थी सर्द रातों में कहीं वीराने में जो मोहब्बत, आज खुलेआम उसे गर्मजोशी में आकर […]

बस यूँही हम मिले और मिलते रहे, थे कली फिर भी फूलों से खिलते रहे, रिश्ते जितने ही हमसे उलझते रहे, उतना ही प्रेम में हम सुलझते रहे, रोका हमको बहुत हम रुके ही नहीं, […]

अपनी हथेली पर शहीदों के नाम की मेंहदी रचाता रहा हूँ मैं, खुद ही के रंग में शहादत का रंग मिलाता रहा हूँ मैं, हार कर सिमट जाते हैं जहाँ हौंसले सभी के, वहीं हर […]

एक माँ की गोद में एक माँ के लाल आ गए, दोनों ही माँ की आँखों में आसूँ हाल आ गए, रंग माथे दुरंगा लगा कर ख़ुशी से भेजा जिन्हें, वो लिपटकर तिरंगे में आज […]

“नव वर्ष की शुभकामनाएं ” ————————— नव वर्ष की शुभकामनाएं / बच्चों में उत्साह जगाएं | प्रांगन मंदिर संस्कृति अपनाएँ / देवी को सुमधुर गीत सुनाएँ || भगवा ध्वज की पताकायें | तिलक चन्दन टीका […]

“पुलवामा शहीदों को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजली” पीठ पे वार करना, तुम्हारी पुरानी कुनीति है। आमने – सामने की रण, तुमने कब जीती है। कायरता के प्रमाण से तुम्हारे, अनभिज्ञ नहीं, पराजय की, सदैव तुम्हारे हृदय में […]

सच की दीवारों पर झूठ की तस्वीरें दिखाई गईं, जब भी सर उठाया तो बस शमशीरें दिखाई गई, बैठा ही रहा मैं भी शहंशाहों सा चौकड़ी लगाकर, एक के बाद एक मुझे सबकी तकदीरें दिखाई […]

इक पूरा इंसान था ये सारा जहान एक हाथ काट गया बंगाल और दूसरे हाथ पाकिस्तान बिच में रह गया मेरा भारत महान कश्मीर पर हमला करके क्या करता है तू खुद पे गुमान दूध […]

कविता बहती है कविता तो केवल व्यथा नहीं, निष्ठुर, दारुण कोई कथा नहीं, या कवि शामिल थोड़ा इसमें, या तू भी थोड़ा, वृथा नहीं। सच है कवि बहता कविता में, बहती ज्यों धारा सरिता में, […]

तुम अपना न सही तो पराया ही कह दो, के मुझे झूठे मुँह अपना साया ही कह दो, इससे पहले के बन्द हो न जाएँ ये आँखे, था मुझे तुमने दिल में बसाया ही कह […]

मरता किसान जमीं को खोदकर अपना आसमान ढूंढते है पसीने की हर एक बूँद से अनाज उगाते है सबके मोहताज होने के बाद भी यह किसान हम सब की भूख मिटा जाते है सूखापन जमीं […]

कुछ बीते पलों की बात थी उनसे हुई पहली मुलाकात थी रुक तो गया था वह शमां क्योंकि झुकी हुई पलकों की वो पहली शुरुआत थी कुछ बीते पलों की बात थी…. दीदार का वह […]

जमीं को खोदकर अपना आसमान ढूंढते है पसीने की हर एक बूँद से अनाज उगाते है सबके मोहताज होने के बाद भी यह किसान हम सब की भूख मिटा जाते है सूखापन जमीं के साथ-साथ […]

“हम खुद काम जल्दी कराने के लिये रिश्‍वत देते है फिर देश मे भ्रष्‍टाचार बहुत है ये सोच कर हमे बुरा क्यो लगता है…………. हम होटलो मे बढी ही शानसे छुटु को आवाज़ देते है […]

सांसों की आवाज़ एक दूजे को सुनाई जाती है, होटों पर अक्सर ही ख़ामोशी दिखाई जाती है, एक चेहरे पर एक चेहरा कुछ इस कदर चढ़ता है, के जिस्म पर जैसे किसी कोई रूह चढ़ाई […]

फिज़ा में खुशबू, पहचानी सी है। छिपी कहां, मुझमें तू सानी सी है। ढूंढे उसे जो खुद से अलग हो , मैं जिस्म और तू रूहानी सी है। सूखी, बंजर जिंदगानी थी पहले, मैं तपता […]

हसीनों की वादियों में बदसूरतों को भी रहने दीजिए, दर्द कितना है फ़िज़ाओं में ज़रा हमें भी सहने दीजिए ! जानते हैं वक़्त है आपका पर हमें भी थोड़ी पनाह दीजिए, मारना है तो फिर […]

जो भी जी में आए फेकिए जनाब तवा पे अपनी रोटी सेकिए जनाब गाय के नाम पे इंसानों को बाँटिए फिर तमाशा गौर से देखिए जनाब बाकी सब को भुला दीजिए आप बस खुद का […]

शरद की बारिस में, शुभ्र प्रभा भीग रही है, एकांत से आँगन में , वो खड़ी सोच रही है, वह आभास कहाँ? जो मिथक मिटाये, खाली दालान पड़ा, कौन हक् जाताये? मिट्टी की ये महक […]

ज़िंदगी तुम बहुत ही खूबसूरत हो… ………………..++++……………….. ज़िंदगी तुम बहुत ही खूबसूरत हो… सूनसांन बंजर राहों से हो कर गुज़रती हो फिर भी हँसती खिलखिलाती हो क्योंकि……. ज़िंदगी तुम बहुत ही खूबसूरत हो… किसी की […]

इस कागज़ी बदन को यकीन है बहुत दफ्न होने को दो ग़ज़ ज़मीन है बहुत तुम इंसान हो,तुम चल दोगे यहाँ से पर लाशों पर रहने वाले मकीं* हैं बहुत भरोसा तोड़ना कोई कानूनन जुर्म […]

क्या कभी किसी को देखा है ? दर्द से छटपटाते हुए। क्या कभी सुना है तुमने किसी को चुप-चाप चिल्लाते हुए। कठिन बड़ा है उस बेटी की आह को सुन ना, कठिन बड़ा है उस […]

“महिमा अनंत है महलों में दिये की बिस्तर पर तकिये की बारात मे दूल्हे की घर मे चूल्हे की महिमा अनंत है बागों मे माली की ससुराल में साली की महफ़िल में शराब की बाद […]

तुम बॉलिवुड अभिनेत्री सी, मैं भागलपुर का अभियंता। तुम भरी विद्वता की चर्चा, मैं चुटकुलों का सन्ता बन्ता। तुम झांसी की रानी जैसी, मैं धरने पर बैठी ममता। तुम कॉर्पोरेट की लीडर, मैं जनधन खाते […]

इन्तेक़ाम से इंतज़ार ही बेहतर हैं उम्मीद का दामन पकड़कर थोड़ा चैन से बैठो कभी ना कभी उसे तुम याद आओगे इस अहसास से ज़िन्दगी देखोगे तुम काट पाओगे इंतेज़ार की ताकत को नज़रअंदाज़ ना […]

कोई ज़मीं बेचता, कोई आसमां बेचता । दौलत के नशे में चूर, ये ज़हां बेचता । कब परवान चढ़ा, मोहब्बत मुफ्लिशी का, दौलत मोहब्बत का है, आशीयां बेचता । दर-दर की ठोकरें, मुफ्लिशी के हालात, […]

होते ही सुबह तेरी तस्वीर से मिलता हूँ। अपनी तमन्नाओं की ज़ागीर से मिलता हूँ। नज़रों को घेर लेता है यादों का समन्दर- चाहत की लिपटी हुई जंजीर से मिलता हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

आज फ़िर हाथों में जाम लिए बैठा हूँ। तेरे दर्द का पैगाम लिए बैठा हूँ। वस्ल की निगाहों में ठहरी हैं यादें- आज फ़िर फुरक़त की शाम लिए बैठा हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

अपनी हथेली पर शहीदों के नाम की मेंहदी रचाता रहा हूँ मैं, खुद ही के रंग में शहादत का रंग मिलाता रहा हूँ मैं, हार कर सिमट जाते हैं जहाँ हौंसले सभी के, वहीं हर […]

के शायद मुझको ही मेरी बात कहनी नहीं आती, के इस दिल से कोई आवाज़ ज़हनी नहीं आती, गुजरता है ये दिन मेरा यूँहीं ख्वाबों ख्यालों में, मगर सच है के मुझसे रात ही सहनी […]

ना होली-दिवाली ना ईद रमजान। एक ही जश्न हिफाजत-ए-हिंदुस्तान। गर हो जाऊं शहीद सरहद पे ‘देव’, पहना देना बतौर कफन तिरंगा-महान। गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

ममता के मन्दिर की जो मूरत है,दिखने मे बड़ी भोली सूरत है उस माँ को प्रणाम, माँ के चरणों मे प्रणाम। सूना-सूना लगता हे उसके बिना घर-आँगन, खुद से भी ज्यादा करती हे अपनों का […]

तिनको का घोसला था मेरा बरसात में डय गए सपनो के पर थे मेरे उड़ने से पहले बर्बाद हो गए माध्यम वर्ग का यही होता हैं सपनो को नतीजो से तोला जाता हैं सभी अवःल […]

दिन और रात के बीच हुई मुलाकात समझनी होगी, कितनी गहरी है ये बात ज़रा एक बार समझनी होगी, शांत रहे तो जिसने भी चाहा चोट जमाकर के मारी, पर एक दिन तो औजारों की […]

बदलते राजनीति से मेरी कलम भी मज़बूर हुईं।। ना चाहते हुए भी मेरे विचारों में शामिल हुई।। राजनीति बदल रही है.. हर आँख में मटक रही है.. सपने सिंहासन के दिखा रही है। सच झुठ […]

ये पेशानी पे जो लकीरें सी खिंची हुईं है, आँखों के तले बेनूर रातें सी बिछीं हुईं हैं, ये जो कांपते हाथों में काँच की चूड़ियाँ हैं, ऐश-ओ-आराम से जो ताउम्र की दूरियाँ हैं, ये […]