हां माना मै कमजोर हूं कि जरा सी बात पर भी आंसू छलका देती हूं पर आंसू छुपाकर मुस्कुराना भी आता है मुझे

तेरा तसव्वुर मुझे जुनून देता है। तेरे सिवा कुछ नहीं सुकून देता है। रातों को जगाती है तेरी तमन्ना- तेरा हुस्न दिल को मज़मून देता है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

वीर थे अधीर थे सरहद के जलते नीर थे, इस देश के लिए बने तर्कश के मानो तीर थे, भगतसिंह राज गुरु सहदेव ऐसे धीर थे, बारूद से भरे हुए ये जिद्दी मानव शरीर थे। […]

महिला दिवस शिव की शक्ति बनकर तूने हर क्षण साथ निभाया नारी, पिता- पती के घर को तूने हर एक क्षण महकाया नारी, हर युग में अपने अस्तित्व का तूने एहसास कराया नारी, प्रश्न उठे […]

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की, समस्त महिलाओं को ससम्मान शुभकामनाएँ, छोटी सी रचना के माध्यम से प्रेषित है – नारी में शक्ति है, नारी से भक्ति है, यह वस्तु नहीं मात्र उपभोग की। नारी रूप बलिदान, […]

कागज़ की सीढ़ी बनाकर चढ़ते नज़र आते हैं, जो पढ़ते हैं अक्सर वही बढ़ते नज़र आते हैं, किसी कलम की स्याही सा जिंदगी में चलने वाले, ख्वाबों को हकीकत का सच गढ़ते नज़र आते हैं।। […]

नमन आज़ादी के परवानों का। वंदन क्रांति वीर जवानों का।। भगत, सुखदेव क्रांति वीरों के, इंक़लाब का डंका बजता था। ‘तिलक’ के विचारों का तिलक, राजगुरु के भाल सजता था। आज़ाद भारत का सपना, दिलों […]

तुम्हें गुलाब लिखूं या फिर कंवल लिखूं। जी चाहता है तुझ पर एक ग़ज़ल लिखूं। गुल लिखूं, गुलफ़ाम या लिखूं गुलिस्तां, या फिर तुम्हें महकता हुआ संदल लिखूं। तन्हाई छोड़ बना लूं तुम्हें शरीक-ए-हयात, ज़िंदगी […]

अभियान नवगीत ” ———————— बांधे सर पे मस्त पगड़िया राह कठिन हो,चलना साथी दुराचार ख़तम करने अब उतार चलो काँधे की गाँती आन ,बान और शान हमारे अच्छे- सच्चे हैं वनवासी दिलों – दिलों को […]

हाथों की लकीरें तितलियाँ बन उड़ीं, जब जी चाहा उनका जिधर तन उड़ीं, बंद मुट्ठी में बड़ा दम घुटता था कहकर, रंग हाथों में छोड़ वो सुनहरा ठन उड़ीं।। राही अंजाना

तेरे सिवा नज़र में कोई तस्वीर नहीं है। तेरे सिवा ख़्याल की कोई जागीर नहीं है। चाहत के हर पन्ने पर परछाई है तेरी- तेरे सिवा ख्व़ाब की कोई ताबीर नहीं है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

ताबिश ए जलन ने जला कर रख दिया, भीतर ही भीतर मुझे गला कर रख दिया, फूंकता रहा हवा जिस चिंगारी में हर दिन, उसी धुँए ने फिर मुझे घुला कर रख दिया, मोहब्बत किसको […]

न अक्षर चुराने दिया न अक्स चुराने दिया, मैंने दिल में बैठा जो न सख्श चुराने दिया, बदलते रहे लोग चेहरे के मुखौटे आये दिन, मैंने अपनी मोहब्बत का न नक्श चुराने दिया, जुम्बिश अश्क […]

ये कहानी यूँहीं अल्फ़ाज़ों में बयाँ होगी नहीं, बस दो चार किताबी पन्नों में जमा होगी नहीं, एहसास ज़मी पर आसमानी करने वाले सुनो, मोहब्बत ज़ंजीरों में जकड़ कर जवाँ होगी नहीं, रास्ते राहों में […]

सुकूने-तलाश में भटकते, कई नगर कई गांव मिले। आरज़ू है बस यही, तेरी जुल्फ़ों की छांव मिले। तेरे इंतज़ार में, कई ज़ख्म लिए बैठा मैं दिल में, या रब ना अब, जुदाई का और कोई […]

जोड़ कर हाथों को यहाँ योग बनाया जाता है, मन को कर एकाग्र यहाँ मनोयोग बनाया जाता है, सम्बन्धो में बंधने को यहाँ योग मिलाया जाता है, जीवन मृत्यु का गहरा यहाँ संयोग बनाया जाता […]

रात के सन्नाटा मुझसे कुछ कह रहा था आज वो आंसू बनकर मेरी आँखों से बह रहा था सौ तो गए थे मेरे सब चाहने वाले बस वो ही अकेला मेरे साथ रो रहा था……..

देखते ही देखते सारे जवाब खो गये, ज़मीन पे लेटते ही सारे ख्वाब सो गये, उठाये थे ज़माने ने सावल जितने भी, हकीकत से मिले सारे हिजाब हो गये।। राही अंजाना

आईना आईने के पार देखने की कोशिश में टूट गया, ख्वाब ख्वाबों के पार देखने की कोशिश में छूट गया, छिपाया मगर छिपा न सका सनम से मोहब्बत अपनी, के चेहरा चेहरे के पार देखने […]

भांप गया सत्य बात ,जो मानता नहीं सच कहे ‘मंगल ‘देश में,दुश्मन बड़ा वही ! भूख – प्यास जकड़न भल ,भरमता कहा सही पूजी मिली प्यार की ,ठुकराता चला कहीं | सम्मान रिश्तों का नहीं […]

रिश्ता जोड़कर कोई तोड़ने की आदत नहीं मुझको, दिल के सीधे रस्ते को मोड़ने की आदत नहीं मुझको, काँच के आईने में चेहरा देखकर खुश हो लेता हूँ मैं, उसकी नज़रों में नज़ारे छोड़ने की […]

लगाकर गले से तुझको दूरियाँ मिटानी थीं, कितनी गहरी हैं ये नज़दीकियाँ दिखानी थीं, तूने नज़रें मिलाई नहीं जिस अंजाने राही से, उसे तुझे हवाओं की सरगोशियाँ सुनानी थी।। राही अंजाना

भटकते फिर रहे हैं जंगलों में शांति के पंछी, इन्हें दो आसरा मत व्यर्थ में बातें बनाओ तुम, सरकते जा रहे इन पेड़ों के घरोंदों से ये पंछी, इन्हें दो सहारा मत अर्थ की रातेँ […]

दुश्मनों का सर्वनाश जवानों ने ठाना है। नेस्तेनाबूत आतंकियों का ठिकाना है।। क्या सोचा, कुछ भी कर बच निकलोगे, घर में घुसकर मारना आदत पुराना है। दुश्मनों का सर्वनाश जवानों ने ठाना है।। आतिशबाज़ी का […]

हम वह नशा हैं, जो कहीं बिकते नहीं। जिसे लत लग जाए तो फिर छुटते नहीं। कीमत मेरी तो फकत प्यार ही है दोस्तों, लगा लो लत, दस्तकस कहीं रुकते नहीं। दुनिया में कोई कमी […]

छिपाकर किताबों में कोई मेरी तस्वीर भूल गया, दबाकर पन्नों में जैसे कोई मेरी तकदीर भूल गया, बैठा रहा मैं यूँही किसी पैदल सा गुलाम बनकर, के बिसात पर चलने की मेरी तदबीर भूल गया।। […]

उस आसमानी को मैं ज़मीनी बुला बैठा, उसकी शिद्दत में मैं खुद को भुला बैठा, आराईश में जिसकी मैं साँझ सवेरे बैठा, उसकी मोहब्बत में मैं खुद को घुला बैठा, मेरे जिस्म से मेरी रूह […]

जख़्म तो बहुत दिए तुमने, मगर मलहम लगाना भूल गयी याद तो रोज आती थी आपको मेरी, लेकिन आँसु बहाना भूल गयी जब दुनिया में आपके पास कोई न हो तब मुझे बुला लेना लेकिन […]

साथ तो तू मेरे हर वक्त रहा करती है हाँ …. वो बात अलग है की पहले तुम मेरी आँखों के सामने रहा करती थी और अब मेरी यादों के सामने रहा करती हो

आँखों के झरनो में तेरी याद बाहा करती है पलके मूँद बस ये फ़रियाद कहा करती है एक दिन बस मेरी जिंदगी से मिला दे तेरे लिए ये साड़ी जवानी बयां करती है

एक बार रुके कदम फिर चलने लगे उनकी रूह की आग में हम पिघलने लगे हाथ अगर होता उनका मेरे हाथ में तो जहान सारा बदल देता लेकिन अकेले ही गिरके हम समलने लगे एक […]

तुम ज़िंदगी से जीते नहीं,मगर लड़े तो थे. यह बात कम नहीं कि तुम जिद पर अड़े तो थे. गम तो हमेशा रहेगा कि बचा ना सके तुम्हे, वरना हमे बचाने तुम तो वहाँ खड़े […]

मुखौटे के पीछे चेहरा छुपाया करते हैं, झूठ बोलने वाले सच गुमाया करते हैं, गुमराह करने की चाहत में आईने को, ऑंखें आँखों से अक्सर चुराया करते हैं, दिन के उजाले में सच हुआ नहीं […]

कब कोई सिपाही ज़ंग चाहता है। वो भी परिवार का संग चाहता है। पर बात हो वतन के हिफाजत की, न्यौछावर, अंग-प्रत्यंग चाहता है। पहल हमने कभी की नहीं लेकिन, समझाना, उन्हीं के ढंग चाहता […]

भटकते फिर रहे हैं जंगलों में शांति के पंछी, इन्हें दो आसरा मत व्यर्थ में बातें बनाओ तुम, सरकते जा रहे इन पेड़ों के घरोंदों से ये पंछी, इन्हें दो सहारा मत अर्थ की रातेँ […]

कभी दिल से दिल मिलाकर तो देखो उस के लिए अपने अरमान जगाकर तो देखो जालिम आंखों से तो हर कोइ मुमुस्कुरा लेता है लेकिन कभी मोहब्बत की राहो मे आकर तो देखो जो बात […]