सभी मित्रों का आत्माभिवादन मीठे स्वरों में , मधुर जिंदगी मिल जाती है। स्वरों की वसंती बहार में , जिंदगी खिल जाती है।। दुख- दर्दों की लू -लपटों में जो झुलस जाएँ, स्वरों की चिकित्सा […]

मां तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो सुख-दुख, खुशी-गम हर परिस्थिति में थामें हाथ बिन कुछ कहें ही समझती, मेरे दिल की हर बात मां तुम मेरे लिए ईश सम्‍य हो ।। धैर्य, संतोष व […]

पैदा कलम से कोई कहानी की जाए, फिर जज़्बातों की तर्जुमानी की जाए! खिलावे हैं खुद भूखे रहकर बच्चों को माँ-बाप के नाम ये जिंदगानी की जाए! ग़म से तो हाल ही में ही बरी […]

गजल वक्त का वक्त क्या है पता कीजिए | बाखुदा हूं ‘ खुदा बाखुदा कीजिए | दर्दे – दिल आज मेरे मुखालिब रहे | सुखनवर से उन्हें ‘ आशना कीजिए | चांद तक की अदा […]

पथ पर चलना, विचलित न होना हे युवा! तुम भ्रमित न होना उषाकाल के संवाहक तुम सफल राष्ट्र के निर्वाहक तुम क्षणिक विघ्न से द्रवित न होना हे युवा! तुम भ्रमित न होना। ★★★★★★★★★★★ प्रखर […]

ग़मगीन लम्हों का मुस्कुराना हुआ है —————————————- कोई एहसास दिल को छुआ है मुमकिन है,आपका आना हुआ है ख़्वाबों की धुन्ध छँटने लगी इक फ़साने का, हक़ीक़त होना हुआ है सिसक रही तन्हाई भी हँस […]

समझाये उन्हें क्या, जो अपनी बातों से मुकर गए । वो करते रहे, गैरो की परवाह जिनके अपने आशियाने उजड़ गए । कभी मिलोगे तुम, दिल से भी हमसे या मुहोब्बत के ज़माने गुजर गए… […]

कुछ संघर्ष को भी सीख ले फिर जिंदगी को तू जीत ले, कभी मुश्किलों की हार से कभी तजुर्बे की मार से हौसला थोड़ा सा डिग जाएगा फिर भी तू लड़ता जाएगा कुछ संघर्ष को […]

जब तक है जीवन तब तक इस की सेवा ही आधार रहे विष्णु का अतुल पुराण रहे नरसिंह के रक्षक वार रहे हे प्राणनाथ! हे त्रयंबकम! शिव शंभू के शिव सार रहे हम रहे कभी […]

बिछड़ा जो फिर तुमसे तनहा ही रह गया, ग़म-ए-हिज़्र मे अकेले रोता ही रह गया। मुसलसल तसव्वुर में बहे आँसू भी खून के शब् में तुझे याद करता, करता ही रह गया! मैंने शाम ही […]

साहब की हवाई सैर पर एक मतला और एक शेर देखे। कू-ए-वतन में उड़न तश्तरी मोड़िये ना, साहब विदेश घूमने की जिद छोड़िये ना! इंसाफ दिलाके आसिफा की रूह को फिर, अनशन स्वाति मालिवाल का […]

नमस्कार दोस्तों आप सब देख रहे हैं आज कल बच्चियों के साथ कुछ बहेशी दरिन्दे जो कर रहे हैं दो शब्द आज लिखने पर मजबूर हो गया ऐसे कुकर्म करते जरा भी शर्म क्या तुझे […]

सोज़िशे-दयार से निकल जाना चाहता हूँ, हयात से अदल में बदल जाना चाहता हूँ! तन्हाई ए उफ़ुक़ पे मिजगां को साथ लेके, मेहरो-माह के साथ चल जाना चाहता हूँ! आतिशे-ए-गुज़रगाह-ए-चमन से हटकर, खुनकी-ए-बहार में बदल […]

मयस्सर कहाँ हैं सूरते-हमवार देखना, तमन्ना हैं दिल की बस एक बार देखना! किसी भी सूरत वो बख्शा ना जायेगा, गर्दन पे चलेगी हैवान के तलवार देखना! सज़ा ए मौत को जिनकी मुत्ताहिद हुए हैं […]

क्या था क़सूर मेरा????? (पीड़ित बेटी आसिफ़ा के सवाल) 1.गहन गिरवन सघन वन में बहुत खुश अपने ही मन मे मूक पशु पक्षी के संग में था बसा परिवार मेरा….. पूछना में चाहती हु क्या […]

क्या था क़सूर मेरा????? (पीड़ित बेटी आसिफ़ा के सवाल) 1.गहन गिरवन सघन वन में बहुत खुश अपने ही मन मे मूक पशु पक्षी के संग में था बसा परिवार मेरा….. पूछना में चाहती हु क्या […]

सिर्फ एक तसवीर है , एक चेहरा है जानता नहीं हूँ कि कौन थी वो , पर आँखों में नूर देख यकीन से कहता हूँ कि जो भी थी , जैसी भी थी अच्छी थी वो , […]

बदलते रहते हैं ज़ुबा लोग पल दो पल में कई बार, मगर एक चेहरा बदलने में मुकम्मल वक्त लगता है, छुपाने से छिप जाते हैं राज़ सिरहाने में कई बार, मगर झूठ से पर्दे उठ […]

कोख़ से मैं कितना बचती रही, दुनिया में ला कर तुमने ठुकराया, शर्म मुझे है ऊपरवाले की इस रचना पर जहाँ जिस्म के भूखों को मैंने कदम-कदम पे पाया।। -मनीष

किनारे पर भी रहूँ तो लहर डुबाने को आ जाती है, बीच समन्दर में जाने का हौंसला हर बार तोड़ जाती है, दिखाने को बढ़ता हूँ जब भी तैरने का हुनर, समन्दर की फिर एक […]

वो परछाईं सा साथ चलता रहा है, कभी दिखता तो कभी छिपता रहा है, दिन के उजाले की शायद समझ है उसको, तभी अंधेरे में ही अक्सर मिलता रहा है, कभी चाँद सा घटता तो […]

उसकी आबरु को यहाँ छीन लिया जाता हैं, जिस देश मे”बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ” का नारा दिया जाता हैं, हर छोटे मसले पर यहाँ बड़े फैसले होते हैं, बस अहम बात को दबा दिया जाता हैं, […]

✍?(गीताज) ?✍ ———$—— ✍ विषाक्त है आज परिवेश देख। आक्रोश मे सुप्त आवेश देख।। कण कण मे है गुस्सा आलम मे नव क्रोध है धरती कुम्हला रही क्षण मे चढा अवरोध है पल बना है […]

✍?(गीताज ) ?✍ ——-$——- ✍ विष मय है आज देख परिवेश। आक्रोश मे घुला है सुप्त आवेश।। कण कण मे गुस्सा आलम मे नव क्रोध धरती है कुम्हलाई पल बना है अबोध क्षण बना है […]

भैय्या माँ के आशीर्वाद से आज मेरी रचना राष्ट्रीय समाचार पत्र “दैनिक वर्तमान ” मे प्रकाशित हुई है । जिससे मेरे साहित्यिक क्षेत्र को बल संबल प्राप्त हुआ है । आपके आशीर्वाद का आकांक्षी आपका-: […]

#जालियाँवाला_बाग़ #13अप्रैल कुछ दाग़ लगे जो इतिहास पे, वो दर्द बहुत दे जाते हैं, किस्से जब उसके सामने आते रूह तब-तब फिर काँप सी जाती है रोती है आत्मा मेरी भी जब जिक्र उस मंजर […]

लिकं पर मेरी ग़ज़ल सुने डॉ सुजीत जी की आवाज़ में और चैनल सब्सक्राइब जरूर करे । दोस्तो में लिकं शेयर करना ना भूले । आपका लकी निमेष  

बचपन से ही जीवन के रंग में, मैं धीरे धीरे ढ़ल लेती थी, छोटे छोटे पैरों से अक्सर, मैं खुद अपने दम पर चल लेती थी, रिश्तों की एक मोटी चादर को, मैं साँझ सवेरे […]

जो करता रहा इंतज़ार पल पल, आज हर पल का वो हिसाब माँगता है, दिल के रिश्तों की कीमत और प्यार का खिताब माँगता हैं, कितना बदल गया है वो, हर बात पर अब ईनाम […]

प्रचंड ज्वार लाओ नव चेतना जगाओ इतिहास नव रचो तुम नित नव कुसुम खिलाओ तुम हो अखंड दीपक बुझने की बात छोड़ो इतिहास के रचयिता इतिहास फिर से मोड़ो

आसमान में पतंग, यारों का कोई यार नहीं दिखता, आज के रिश्तों में वो गहरा कोई प्यार नहीं दिखता, मिलते हैं ख़्वाबों में आकर चेहरे अंजाने अक्सर, मगर हकीकत में चेहरा कोई क्यों साफ़ नहीं […]

चुप्पियाँ कहती हैं कितना बोलता हूँ मैं, सपने कहते है कितना जागता हूँ मैं, रास्ते कहते हैं कितना ठहरता हूँ मैं, लम्हें कहते हैं कितना सिमटता हूँ मैं, चादर कहती है कितना लिपटता हूँ मैं, […]

✍?(अंदाज)?✍ —–$—– ✍ जिंदगी मे व्यवहार जिंदा रखिए जिंदगी मे सुसंस्कार जिंदा रखिए रूठना मनाना क्रम है जीवन का रूठकर भी नेह धार जिंदा रखिए सच्चे प्रेम की परिभाषा यही है नेह का श्रद्धा आपार […]

जख्म दबा – कर मुश्काता हूं | चुप रहकर मैं चिल्लाता हूं | मेरी बातें खुल न जाये | बातों से ‘ मैं बहकाता हूं | घर में ‘ आग लगा मत देना | पानी […]

हुआ हूँ ख़ाक यहां रह गया ‘ धुआं मेरा | किसी में दम है तो रोको ये कारवां मेरा | सभी ये कहते है अक्सर ज़मीन मेरी है | कोई ये क्यों नही कहता है […]

**मत करो देर”** मत करो देर , झटपट पाट दो , दिल की दरारों को । जमाना क्या कहेगा ,समझ़ो, जमाने के इशारों को । जिदों का यह अड़ियली रुख ,बहुत ज्यादा, नहीं अच्छा , […]

हमने चाहतों को सजाना छोड़ दिया तेरे जाते ही जमाना छोड़ दिया क्यों हम टूटते ही चले जा रहे हैं लगता है उसने बनाना छोड़ दिया नींद भी हमें अब कम आती है ख्वाबों ने […]

अँधेरे और रौशनी के बीच का फर्क मिटाना चाहती हूँ, माँ की कोख से निकल बाहर मैं आना चाहती हूँ, जो समझते है बोझ मैं उनको जगाना चाहती हूँ, कन्धे से कन्धा मिलाकर अब दिखाना […]

“”***जगत् का कल्याण हो “** *************** हे मात भवानी ,जग कल्याणी, भव का रूप सँवारो । भक्त जनों को, दैहिक दैविक, भौतिक तापों से उद्धारो। जब कृपा सभी पर बरसाती, सारे संकट मिट जाते । […]

कच्ची मिट्टी के जैसी मै धीरे धीरे धँसती हूँ मै लडकी हूँ इस आँगन की तब ही इतनी सस्ती हूँ   लोग लगाएगें बोली मेरी बडे सलीके  से लोग तमाशा देखेगें कि मै कितने में […]