बदलते रहते हैं ज़ुबा लोग पल दो पल में कई बार, मगर एक चेहरा बदलने में मुकम्मल वक्त लगता है, छुपाने से छिप जाते हैं राज़ सिरहाने में कई बार, मगर झूठ से पर्दे उठ […]
बदलते रहते हैं ज़ुबा लोग पल दो पल में कई बार, मगर एक चेहरा बदलने में मुकम्मल वक्त लगता है, छुपाने से छिप जाते हैं राज़ सिरहाने में कई बार, मगर झूठ से पर्दे उठ […]
कोख़ से मैं कितना बचती रही, दुनिया में ला कर तुमने ठुकराया, शर्म मुझे है ऊपरवाले की इस रचना पर जहाँ जिस्म के भूखों को मैंने कदम-कदम पे पाया।। -मनीष
किनारे पर भी रहूँ तो लहर डुबाने को आ जाती है, बीच समन्दर में जाने का हौंसला हर बार तोड़ जाती है, दिखाने को बढ़ता हूँ जब भी तैरने का हुनर, समन्दर की फिर एक […]
वो परछाईं सा साथ चलता रहा है, कभी दिखता तो कभी छिपता रहा है, दिन के उजाले की शायद समझ है उसको, तभी अंधेरे में ही अक्सर मिलता रहा है, कभी चाँद सा घटता तो […]
उसकी आबरु को यहाँ छीन लिया जाता हैं, जिस देश मे”बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ” का नारा दिया जाता हैं, हर छोटे मसले पर यहाँ बड़े फैसले होते हैं, बस अहम बात को दबा दिया जाता हैं, […]
भंवरों को नहीं भाता मकरंद तितलियां करती क्रंदन फिजा जो रुत बदल रही है अब हर कली धूप में जल रही है |
✍?(गीताज) ?✍ ———$—— ✍ विषाक्त है आज परिवेश देख। आक्रोश मे सुप्त आवेश देख।। कण कण मे है गुस्सा आलम मे नव क्रोध है धरती कुम्हला रही क्षण मे चढा अवरोध है पल बना है […]
✍?(गीताज ) ?✍ ——-$——- ✍ विष मय है आज देख परिवेश। आक्रोश मे घुला है सुप्त आवेश।। कण कण मे गुस्सा आलम मे नव क्रोध धरती है कुम्हलाई पल बना है अबोध क्षण बना है […]
भैय्या माँ के आशीर्वाद से आज मेरी रचना राष्ट्रीय समाचार पत्र “दैनिक वर्तमान ” मे प्रकाशित हुई है । जिससे मेरे साहित्यिक क्षेत्र को बल संबल प्राप्त हुआ है । आपके आशीर्वाद का आकांक्षी आपका-: […]
#जालियाँवाला_बाग़ #13अप्रैल कुछ दाग़ लगे जो इतिहास पे, वो दर्द बहुत दे जाते हैं, किस्से जब उसके सामने आते रूह तब-तब फिर काँप सी जाती है रोती है आत्मा मेरी भी जब जिक्र उस मंजर […]
लिकं पर मेरी ग़ज़ल सुने डॉ सुजीत जी की आवाज़ में और चैनल सब्सक्राइब जरूर करे । दोस्तो में लिकं शेयर करना ना भूले । आपका लकी निमेष
बचपन से ही जीवन के रंग में, मैं धीरे धीरे ढ़ल लेती थी, छोटे छोटे पैरों से अक्सर, मैं खुद अपने दम पर चल लेती थी, रिश्तों की एक मोटी चादर को, मैं साँझ सवेरे […]
जो करता रहा इंतज़ार पल पल, आज हर पल का वो हिसाब माँगता है, दिल के रिश्तों की कीमत और प्यार का खिताब माँगता हैं, कितना बदल गया है वो, हर बात पर अब ईनाम […]
प्रचंड ज्वार लाओ नव चेतना जगाओ इतिहास नव रचो तुम नित नव कुसुम खिलाओ तुम हो अखंड दीपक बुझने की बात छोड़ो इतिहास के रचयिता इतिहास फिर से मोड़ो
आसमान में पतंग, यारों का कोई यार नहीं दिखता, आज के रिश्तों में वो गहरा कोई प्यार नहीं दिखता, मिलते हैं ख़्वाबों में आकर चेहरे अंजाने अक्सर, मगर हकीकत में चेहरा कोई क्यों साफ़ नहीं […]
✍? ( अंदाज ) ?✍ —–$—‘ ✍ न हताश रख न उदास रख जिंदगी मे बस तू आस रख प्रतिकूलता से न तू डर कभी हौसला जीवन मे खास रख असफता पल है निखार का […]
चुप्पियाँ कहती हैं कितना बोलता हूँ मैं, सपने कहते है कितना जागता हूँ मैं, रास्ते कहते हैं कितना ठहरता हूँ मैं, लम्हें कहते हैं कितना सिमटता हूँ मैं, चादर कहती है कितना लिपटता हूँ मैं, […]
✍?(अंदाज)?✍ —–$—– ✍ जिंदगी मे व्यवहार जिंदा रखिए जिंदगी मे सुसंस्कार जिंदा रखिए रूठना मनाना क्रम है जीवन का रूठकर भी नेह धार जिंदा रखिए सच्चे प्रेम की परिभाषा यही है नेह का श्रद्धा आपार […]
गुजरती जाती है जिंदगी चुपके से लम्हो में छुपकर बहुत ढूढता हूं इसे, मगर कभी मिलती ही नहीं
जख्म दबा – कर मुश्काता हूं | चुप रहकर मैं चिल्लाता हूं | मेरी बातें खुल न जाये | बातों से ‘ मैं बहकाता हूं | घर में ‘ आग लगा मत देना | पानी […]
इक फरियाद थी मेरे दिल की आरजू थी इक दबी दबी सी सब अधूरी ही रह जायेंगी कह कर गया था वो अभी
हुआ हूँ ख़ाक यहां रह गया ‘ धुआं मेरा | किसी में दम है तो रोको ये कारवां मेरा | सभी ये कहते है अक्सर ज़मीन मेरी है | कोई ये क्यों नही कहता है […]
**मत करो देर”** मत करो देर , झटपट पाट दो , दिल की दरारों को । जमाना क्या कहेगा ,समझ़ो, जमाने के इशारों को । जिदों का यह अड़ियली रुख ,बहुत ज्यादा, नहीं अच्छा , […]
हमने चाहतों को सजाना छोड़ दिया तेरे जाते ही जमाना छोड़ दिया क्यों हम टूटते ही चले जा रहे हैं लगता है उसने बनाना छोड़ दिया नींद भी हमें अब कम आती है ख्वाबों ने […]
है अभी तूफान गर मेरी सफलता के पथ पर पर अब नहीं रुक सकता मैं जो हो चुका हूँ अग्रसर हूँ पथिक ऐसा जो नहीं रुक सकता ऐसे हारकर अंधेरी रात है तो क्या हुआ […]
अँधेरे और रौशनी के बीच का फर्क मिटाना चाहती हूँ, माँ की कोख से निकल बाहर मैं आना चाहती हूँ, जो समझते है बोझ मैं उनको जगाना चाहती हूँ, कन्धे से कन्धा मिलाकर अब दिखाना […]
सारा का सारा सागर हो , फिर भी , प्यास अधूरी । अगर भाग्य में प्यास लिखी , यह.किस्मत की मजबूरी। जानकी प्रसाद विवश
“”***जगत् का कल्याण हो “** *************** हे मात भवानी ,जग कल्याणी, भव का रूप सँवारो । भक्त जनों को, दैहिक दैविक, भौतिक तापों से उद्धारो। जब कृपा सभी पर बरसाती, सारे संकट मिट जाते । […]
कच्ची मिट्टी के जैसी मै धीरे धीरे धँसती हूँ मै लडकी हूँ इस आँगन की तब ही इतनी सस्ती हूँ लोग लगाएगें बोली मेरी बडे सलीके से लोग तमाशा देखेगें कि मै कितने में […]
तेरी आँखों के बिस्तर पर अपने प्यार की चादर बिछा दूँ क्या? तेरे ख़्वाबों के तकिये के सिरहाने मैं सर टिका लूँ क्या? कर दूँ मैं मेरे दिल के जज़्बात तेरे नाम सारे, दे इजाज़त […]
सर्दी गर्मी या वर्षा हो, चाहे अमावस रात हो हैं अडिग हर तूफानों में, चाहे पौष की ठंडी रात हो खड़े रहते हैं सरहद पर, चाहे गोली की बौछार हो मौत से होता है मिलन […]
✍?(अंदाज) ?✍ ——-$—— ✍ विकराल बन तू महाकाल बन मिसाल बन तू बेमिसाल बन अनंत अकूत अद्भुत साहस धर प्रचंड प्रबल प्रतिरुप विशाल बन बुराईया मिटा हटा कुरूप रीतियां संरक्षक सुसंस्कृती का ढाल बन सभ्यता […]
Hanju paa vich kalam de… Main eh shabad likhe ne lokan bhane geet hone…. main te dard likhe ne….
प्यार की कैद से रिहाई रव करे न कभी । इश्क की रिहाई से ,मौत भली होती है । – जानकी प्रसाद ‘विवश’
“दरारें दिल की” ******** दरारें दो दिलोंकी दिख न जायें, दुनिया वालों को। प्यार से पाट लो, कहीं प्यार न बदनाम हो जाए ।
आप जैसे, प्यारे मित्रों से जीवन सुहाना होता है। न चाह कर भी, जीवन जीने का बहाना होता है। जानकी प्रसाद विवश
✍?(अंदाज) ? —–($)—- ✍ दुःख मे भी मुस्कुराना सीखिए गम मे भी खिलखिलाना सीखिए उलझने आये चाहे जितने भी रंज मे भी मचल जाना सीखिए संताप है सब प्रारब्ध कर्मो का यह समझ सब्र लाना […]
✍?(अंदाज ) ?✍ —–($)—- ✍ हौसला बुलंद रखो धीर मन मे आयेगी बहार जरूर चमन मे नैराश्य को सदा ध्वस्त करो मेहनत संवारो हमेशा तन मे सर्वोच्चता सिध्द सव॔ श्रेष्ठ करो उत्साह रखो पल-पल यौवन […]
अभय गान अपने वाणी का मै स्वर आज सुनाता हूँ ले समसीर लेखनी की मै रण नवगीत सुनाता हूँ माँ वीणा पाणी के चरणो मे मै शीश झुकाता हूँ माँ रणचंडी के झंकृत की मै […]
“**भेद खोल दिया”** ^^^^^^^^^^^^^ भेद पायल ने दिल का खोल दिया , घुघरुओं ने भी क्या क्या बोल .दिया । बेखुदी बेसुधी तन मन की, सारी लाँघ गई , प्यार ने जिंदगी को , प्यारा […]
लफ्ज ही है जो कतराते है कागज पर उतरने से वरना अहसासो का दरिया तो साथ लिये फिरते है
बन्द पिंजरे से उड़ जाने का अरमान लिए बैठे हैं, कुछ परिंदे अपनी आँखों में आसमान लिए बैठे हैं, बनाये थे जो कभी रिश्ते इस ज़ालिम ज़माने से, आज उसी की बनाई सलाखों में नाकाम […]
✍? (अंदाज ) ?✍ ——-($)—— ✍ विद्रूपता का सव॔ विनाश करो कण -कण मे दृढ विश्वास भरो शौर्यशिलता का प्रतीक तुम बुद्धि मे विवेक गुण खास धरो चिंतन करो स्वास्थ्य मंथन करो सुखद सम्भाव रहे […]
खुद ही से खुद ही के परिचय की तलाश में, लोग भटकते हैं दरबदर कस्तूरी की तलाश में, यूँ तो तय हैं सभी किरदार कहानी के मगर, हर मोड़ पर बदलते हैं चेहरे नए चेहरे […]
सिर्फ़ अपनी झूठी शान दिखाते हैं लोग दिल छोटा रखते हैं इमारत बडी बनाते हैं लोग नफ़रत दिल मे है प्यार जताते है लोग अपने सच से हैं बेख़बर ओरो को आईना दिखाते हैं लोग […]
मेरा जिक्र उनसे न करना कुमार वो पगली हंसते हंसते रो पड़ेगी ❥ कुमार अरविन्द ( गोंडा )
मेरा जिक्र उनसे न करना कुमार वो पगली हंसते हंसते रो पड़ेगी ❥ कुमार अरविन्द ( गोंडा )
जो लगे कब्र पे पत्थर हैं बराबर कर दे ऐ खुदा मेरे बराबर मेरी चादर कर दे ❥ कुमार अरविन्द ( गोंडा )
मुझे यकीन है की इक रोज़ तेरा भी सवेरा होगा, अंधेरो का कोई साया ना होगा! इक रोज़ तेरा भी सब कुछ होगा, कुछ ना होने को कुछ ना होगा! इक रोज़ चाहा है जैसा […]
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