शाम हो गई तुम्हे खोजते माँ तुम कब आओगी जब आओगी घर तुम खाना तब ही तो मुझे खिलाओगी, रात भर न सो पाई करती रही तुम्हारा इंतजार सुबह होते ही बैठ द्वार निगाहें ढूंढ […]

कम्बख्त वो हमारे सामने बेवजह ही मुस्कुरा गऐ बेवजह ही हम उनकी बाहोँ में आ गऐ खबर न थी जमाने को इस नए चमन से रिश्ते की हम भी बेखबर जमाने से नैना लड़ाते चले […]

तलबगार है कई पर मतलब से मिलते हैं ये वो फूल हैं जो सिर्फ मतलबी मौसम में खिलते हैं रोक लगाती है दुनिया तमाम इन पर पर देखो मान ये इश्कबाज पक्के जो पाबंदियों में […]

काश भ्रष्टाचार न होता ,फिर भलों का दिल न रोता कानून ढंग से काम करता, काश भ्रष्टाचार न होता। लोकतंत्र भ्रष्ट न होता, रिश्वत का तो नाम न होता संसद ढंग से काम करता, काश […]

जो और कोई कह ना पाए कर ना पाए और कोई ऐसा जज्बा लिए संग में चलता है अकेला कोई। उसके पास अनूठी क्षमता और अनोखा ज्ञान है सदा ही कागज पर अपने रचता अलग […]

माँ तुम दिल में ठान लो कि मुझको दुनिया में लाओगी इस बार दुनिया कि मान कर मुझको नहीं मिटाओगी। क्या हक नहीं है मेरा माँ इस दुनिया में आने का क्या अरमान नहीं है […]

जमाने में रहे पर जमाने को खबर न थी ढिंढोरे की तुम्हारी आदत न थी अच्छे कामों का लेखा तुम्हारा व्यर्थ ही रह गया हमसे साथ तुम्हारा अनकहा सा कह गया जीतना ही सिखाया हारने […]

हर एक तनहा लम्हे में एक अर्थ ढूँढा करती थी| हर अँधेरी रुसवाई में गहरा अक्श ढूँढा करती थी | मैं मेरी परछाई में एक शख्स ढूँढा करती थी| मेरी मुझसे हुई जुदाई में कुछ […]

वाह रे दुनिया ! मै चीखा–चिल्लया तेरी बातों से। “हाँ” मै चीख रहा हूँ,चिल्ला रहा हूँ,मेरा कोई औकाद नही किसी पर अवाज उठाने की! केवल जख्मों के छालों से सदा सुने है,सिसक -सिसक कर सोई […]

हमे तो मालुम था, पतझड़ मे पत्ते भी साथ छोड़ देते है,देखकर मेरी तबाही को अपनो भी साथ छोड़ देते है!! बस तु तो चलती हुई मुशाफीर थी- ये मतलबी दुनिया बाप को भी छोड़ […]

संघर्षों में जीवन की तू परिभाषा कहलाती है, रंग बिरंगी तितली सी तू इधर उधर मंडराती है, खुद को पल- पल उलझा कर तू हर मुश्किल सुलझाती है, खुली हवा में खोल के बाहें तू […]

अब मुझे मेरी जिन्दगी या श्मशान चाहिए!! गरीब हूँ मालिक मुझे मेरा सम्मान चाहिए । मै रोता रहता हूँ अमीर के अत्याचारो से,धिन जाती है मुझे अपने उपर हो रहे” मुझे समानता का अधिकार अपने […]

वस्ती की पुकार ———————————– डरावना–डरावना सी भय लगी इस वस्ती मे। चार–पाँच लफँगा हर मोड़ पर खड़ा इस वस्ती मे। कितना राज छुपाए डरा–डरा सा हूँ खादी पहने वाले के बच्चे बनकर लफँगा खड़े इस […]

गजल : कुमार अरविन्द नहीं तकदीर में जो मेरे क्यों फिर जुस्तजू करते | मेरी किस्मत में क्या है वो पता जाकर के यूं करते | रखी इज्जत हमेशा है जिसने अपना समझकर तो | […]

मुहँ लटकाए आख़िर तू क्यो बैठा है इस दुनिया में जो कुछ भी है पैसा है दुख देता है घर में बेटी का होना चोर -उचक्का हो लड़का पर अच्छा है कुछ भी हो औरत […]

मुहँ लटकाए आख़िर तू क्यो बैठा है इस दुनिया में जो कुछ भी है पैसा है दुख देता है घर में बेटी का होना चोर -उचक्का हो लड़का पर अच्छा है कुछ भी हो औरत […]

कुछ न कुछ टूटने का सिलसिला आज भी ज़ारी है इस दुनिया का डर प्यार पे आज भी भारी है।। टूटकर बिखरना, बिखरकर समिटना आज भी जारी है, पर पड़ जाए ना दरार इस बात […]

इतने हैं तेरे रूप के मैं सबको गिना नहीं पाउँगा, खोल कर रख दी पल्लू की हर एक गाँठ तुमने, मैं तुम्हारे प्रेम का किस्सा सबको सुना नहीं पाउँगा, डर कर छिप जाता था अक्सर […]

जो ऊँगली पकड़ चलाती है, जो हर दम प्यार लुटाती है, जो हमको सुलाने की खातिर, खुद भूखी ही सो जाती है, खेल खिलौने कपड़े लत्ते जो हमको दिलवाती है, खुद एक ही साड़ी में […]

न तुम हो न हम हैं फिर भी वो एहसास हर दम है, इशारों से बातें करना, मंद-मंद न चाह के भी मुस्कुराना, तेरी हर एक हलचल को मुझे तेरे करीब लाना, जिंदगी आज कुछ […]

अब तो संभलो…! —————————- स्वार्थ के हर रंग मेें रंग गया है दिल…..देखो और मुस्कुराकर कह रहें हैं— ये दुनियाँ कितनी रंगीन है……!! “मतलब” के रस्से से अब बँध गया है तन…….देखो प्यार के वो […]

चन्द अल्फाज़ो में बयां होगी नहीं, ये कहानी किताबों में जमा होगी नहीं, यूँही सरेआम हो जायेगी दास्ताँ सारी, बस दो एक रोज़ में हवा होगी नहीं, मुहब्बत पुरानी है लम्बी टिकेगी दोस्तों, ये ज़िन्दगी […]

गजल : कुमार अरविन्द चले आओ मेरी आंखों का पानी देखते जाओ | कहानी है तुम्हारी ही , निशानी देखते जाओ | मैं जिन्दा हूं तुम्हारे बाद भी तुमको तसल्ली हो | कफ़न सरका के […]

रोज मेरे ख्वाबो में आकर क्यों चली जाती हो। पास ना होके दूर से सता के क्यो चली जाती हो।। ********* जब्बभी सोचता हूँ कुछ पल सोलू रातो को। आके यादों में निंद चूरा कर […]

बनाकर कागज़ की कश्तियाँ पानी में बहाते नज़र आते थे, एक रोज़ मिले थे वो बच्चे जो अपने सपने बड़े बताते थे, बन्द चार दीवारों से निकलकर खुले आसमान की ठण्डी छावँ में, इतने सरल […]

…..बढ़ रहा है क्यों–?? —————————- प्यार दिखता नही,नफ़रत घटती नहीं तक़रार का अंगार बढ़ रहा है क्यों…? इंसानियत मिलती नहीं,हैवानियत मिटती नहीं संस्कारों का बिखराव बढ़ रहा है क्यों..?? क्या चाहता मानव वर्तमान का– क्यों […]

माँ, मैं तुम्हारी गलतियों को फिर नहीं दोहराउंगी मैं अपने बेटों को औरत की इज़्ज़त करना सिखाऊंगी माँ,मैं तुम्हारी गलतियों को फ़िर नहीं दोहराउंगी औरत होने का मतलब डरना नहीं मैं अपनी बेटियों को सिखाऊंगी […]

तू जो होती माँ मैं कभी ना रोती माँ मैं भी स्कूल में सबके साथ तेरे बनाए पराठे खाती..माँ सब बच्चो की तरह मैं भी ठहाके लगाती..माँ तू जो होती माँ मैं कभी ना रोती.. […]

चल अाज सब कुछ भुला के एक मज़ा सा करते हैं, तफ़रीकें मिटा के दिल-ओ-दिमाग़ को एक रज़ा सा करते हैं, दुनिया की सुद्ध में बुद्ध खो बैठे हैं, चल आज खुद को खुदी का […]

✍?अंदाज ?✍ ——-$——– ✍ न करो चमन की बरबाद गलियां कुचल के सुमन रौंद कर कलियाँ पुरुषार्थ है तुम्हारा तरूवर लगाना बागो मे खिलाना मोहक तितलियां आगाज करो नव राह बदलाव के गुलशनो मे रहे […]

✍?(अंदाज) ?✍ ——-$—— ✍ नूर हो तुम आफताब हो तुम लहर हो तुम लाजवाब हो तुम मेरे चाहते दिल की तमन्ना जवाॅ दिलकश गजब शबाब हो तुम जिसे समझा मैने दिल से अपना मुक्कमबल सच्चा […]

✍?(अंदाज )?✍ ———-$———- ✍ उठ जाग मत थक हार इंसान तू मानवीय औकात निखार इंसान तू है तू प्रचंड शक्ति शाली बलवान आत्म ज्ञान परख संवार इंसान तू मानवता का न गिरने दे स्तर यहाॅ […]

✍?(अंदाज )?✍ ———$——- ✍ घोर कलियुग है देख पाप प्रबल चंहुदिश क्षुद्र देख विद्रूप दलदल दूषित जल घना हवाएं प्रदूषित मन मे मैल देख बेईमानी सबल स्वभाव मे मिठास बोली मे छल दिखावा ठोस देख […]

इश्क़ में हैं गुज़रे हम तेरे शहर से तनहा, महब्बत के उजड़े हुए घर से तनहा! हम वो हैं जो जीये जिंदगी भर से तनहा, और महशर में भी जायेंगे दहर से तनहा! तख़्लीक़े-शेर क्या […]