मैं हूं मनमौजी, बात कहूं मैं मन की सीधी सपाट कहता है, श्रीधर सनकी
मैं हूं मनमौजी, बात कहूं मैं मन की सीधी सपाट कहता है, श्रीधर सनकी
ये आप भी देखें है कि बस मुझको भरम है हर शख़्स परेशान है खुलकर नहीं मिलता कुमार अरविन्द ( गोंडा )
आइने में नजर न आयेंगे ऐसे चेहरे बना रहा हूं मैं ❥ कुमार अरविन्द ( गोंडा )
मिल जायेगी ताबीर मेरे ख्वाबों की एक दिन, या ख्वाब बिखर जायें कुछ कह नहीं सकता। बह जाउं समंदर में तिनके की तरहं या फ़िर, मिल जाये मुझे साहिल कुछ कह नहीं सकता। इस पार […]
✍? (अंदाज )?✍ ✍ नव पल परिवेश का अहवान हो अंतर्मन मे नैतिक उत्थान हो जीवन है जग मे एक भीषण युद्ध विजय भाव का मन मे उफान हो निज लक्ष्य मिले हो सबका भला […]
✍? (अंदाज ) ?✍ ——($)—– ✍ बिषमताओ से टकराना जरूरी है संघर्ष के जल से नहाना जरूरी है जीवन है गतिमान लय का रूप जिंदगी मे संवर जाना जरूरी है प्रतिकूलता है वक्त का इम्तहान […]
ख्वाबो की ख्वाहिशो ने मार डाला, हमको तो वारना जीना तो हमे भी आता था, उनकी तरह झूठ का !
गजल सबको रस्ता दिखा रहा हूं मैं | साथ ‘ मिट्टी उड़ा रहा हूं मैं | इन दरख्तों में अब भी जिंदा हूं | अपना साया मिटा रहा हूं मैं | मुझको लाकर लिटा गए […]
सोचा था जिंदगी इक पूरी किताब होगी मगर ये तो चंद लफ़्जों में ढ़लकर रह गयी|
//ग़ज़ल// जवां धडकनो को धड़कने दो यारों। जरा आशिकी औऱ बढ़ने दो यारों।१ महकता रहे गुल चमन प्यार का ही, फि़जा रुत सुहानी बहकने दो यारों ।२ करें प्यार इतना …समन्दर से गहरा, मुहब्बत जरा […]
गजल है चाह मिलूं उससे जो अक्सर नहीं मिलता | दीवार घरों में है मगर घर नहीं मिलता | ये आप भी देखें है कि बस मुझको भरम है | हर शख़्स परेशान है खुलकर […]
✍?अंदाज ?✍ ——-($)—— ✍ आलस्य न प्रमाद धर तनाव न अवसाद धर ऊमंग रख नस-नस मे उत्साह का स्वाद रख तरुणाई की बेला है जीत भाव आगाध रख संघर्ष से घबरा नही तरंगित शंखनाद रख […]
डूबती कश्तियों के सहारे बैठ कर क्या होगा, समन्दर के इतने किनारे बैठ कर क्या होगा, तैरना है तो लहरों के बीच जाना ही होगा, यूँ डर के दायरे में सिमट कर क्या होगा।। ~ […]
अपनी पलकों को इतना मत झपकाया कर, तू मेरे दिल को इतना मत धड़काया कर, हर बात तेरी किसी ज़ुबां की मोहताज तो नहीं, तू चुप रहकर भी अपने एहसास मुझे बताया कर, हवाओं को […]
✍? अर्जुन ?✍ ✍ अ– अन्याय /अनैतिकता विरोधी न्याय नैतिकता संपोषक ।। र– रक्षक मानवीय संवेदना सव॔धर्म समभाव संरक्षक ।। जु — जुझारू कम॔शील न्यायिक मानवता समरसता घोषक।। न– नमनीय जीवन चरित्र बनाके परमार्थ का […]
✍ ? गजल ?✍ ——-($)——- ✍ रक्त से सनी धरती लाल देख चहुंओर हाहाकार हाल देख समरसता जल रही धूं धूं कर सद्भावना है बदहाल देख हिंसा आतंक का है जोर प्रबल छल-कपट का रुप […]
अनुभव की राहों पर चलकर खुद मैंने भी देखा है, अपनों को अपनों से छलते खुद मैंने भी देखा है, आसमान को धरती से मिलते खुद मैंने भी देखा है, ख़्वाबों को यूँ पूरी रात […]
अभी और बनना बाकि है, अभी और बिगड़ना बाकि है , जिन्दा है यहाँ कौन-कौन सबको ये साबित करना बाकि है, जीने के लिए खुद के अभी खुद का मरना बाकि है !
तू याद रख सके मुझे जिंदगी भर कुमार आ तुझे कुछ इस तरह मोहब्बत कर लूं ❥ कुमार अरविन्द ( गोंडा )
दफन होने से पहले, एक बार ये काम करके देखना! जो जुस्तजू हो, जीने की तो मुझपर भी मरकर देखना! आदत जो ना हो शिकायत करने की तो पास मेरे बैठकर देखना! चाहत जो ना […]
Kaash life me ek rewind button hota ! Meri har galti Ko sudharneka Mere pass fir ek mauka hota Agar life me ek rewind button hota! Har Khushi k haasen Lamhe Ko Do Baar jeena […]
Samandar me mana gaharai hoti hai, magar Jwar bhata bhi aata hai Daba kr naa rakh jauk-e – junoon ko e nadan Woqt aane pr har raaj khul jaata hai
मेरी कविता लफ़्जों को नहीं अहसासों को जोड़ती है तोड़ती है अकर्मण्य बेड़ियों को लोगों को जोड़ती है
सुकूँ कुछ ऐसा मिलना चाहिए जिंदगी को, जैसे तेरे नर्म हाँथो पे मेरे हाँथ होने का एहसास हो।। -मनीष
✍? गजल ?✍ ✍ तू ही हैअर्जुन आवाज सुन परिवेश का दर्दे साज सुन छटपटा रही धरती देख तू माहौल का क्रंदन आज सुन तेरे शौर्य मे बंधा है वर्तमान नव नीति का रम्य नाज […]
✍? गजल ?✍ —–(*)—– ✍ जग मे कुछ कर जाना जरूरी है जीवन मे मुस्कुराना जरूरी है चाहे हो कष्ट संकट गहनतम धैर्य से निकल जाना जरूरी है जग का काम है करना अवरोध बुद्धि […]
आदमी में घमंड इस कदर हैं चढ़ा।, छोड़ इंसानियत,खुन……. बहाता रहा। हौसला रंजिशों का ….बढ़ा हर तरफ । माँ बहन से न रिस्ता …..न नाता रहा।, खाब को क्या कहूँ?, नींद भी डर गया , […]
कुछ कहती नहीं बहुत कुछ कह जाती है कविता, खामोश दिखती है पर बहुत बोल जाती है कविता, चन्द शब्दों से नहीं एहसासों से बुनी जाती है कविता, खुद बंधती नहीं मगर सबको बाँध जाती […]
ख़ुशियों के पल में तो ख़ुशियों ने बख़ूबी साथ निभाया, और जब-जब मन निराश हुआ तब-तब क़लम के माध्यम से बनी कविता ने शांति का एहसास कराया, मैं अपनी कलम के हर एक सफर को […]
मित्रो! अभी हाल ही मे शहीद हुए हमारे देश के चार सैनिको को ,अपनी कविता के माध्यम से श्रद्धासुमन अर्पित करते हुये, मैने आप तक ए कविता पहुचाने की कोशिश की है अगर आपको ये […]
✍? गजल ?✍ ——-($)——- ✍ आओ धरती पे चरण रखो पाथ॔ संत साधुओ को तारो निस्वार्थ बिलखता पल विषाक्त क्षण मे विषैले हवाओ को टारो साक्षाथ॔ छल-बलयुक्त विकृत इस दौर मे दिखाओ अपना सच्चा पुरुषार्थ […]
“मैं ढूंढता रहा” :::::::::::::::::: मैं ढूंढता रहा, उस शून्य को, जो मिलकर असंख्य गणना बनते । मैं ढूंढता रहा , उस गाथा को , जिस की अमर प्रेम हर दिशाओं में गूंजते । और मैं […]
“गीत” :::::::::::: हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। दूर देश विदेश भय हैं वो मन का मेरे प्रिय साजन। हे! री सखी कैसे करू मै, स – श्रृंगार मन यौवन। हे!री सखी […]
✍?गीत ?✍ ✍ प्रणय निवेदन मेरे तू ही प्रीत है। तू ही आरजू है तू ही मीत है।। रस्मे वफा की कसम तेरी याद है इस दिल मे सिवा नही कोई मेरे चाहत-ए-महफिल मे मेरे […]
अन्धेरा होकर भी अन्धेरा होता नहीं मेरे घर में, मैं जुगनू हूँ दोस्त रौशनी अपने साथ रखता हूँ।। राही (अंजाना)
✍? गजल ?✍ —–($)—– ✍ सत्य असत्य मे क्या सच्चाई है ईमान बेईमान के बीच लड़ाई है इंसान का इंसान मे नही विश्वास मानव का मानव के बीच खाई है परिवेश मे घुला है जहर […]
बांधकर बेड़ियों से कोमल पैरों को खींच कर, घर की चौखट के बाहर वो कभी जाने नहीं देते, हिम्मत जो जुटाती है बेटी कोई पढ़ने को, तो उसके कदमों को आगे कभी वो जाने नहीं […]
वज़्न – 122 122 122 122 अर्कान – फऊलुन फऊलुन फऊलुन फऊलुन बह्र – बह्रे मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम काफ़िया – आ (स्वर) रदीफ- है। मेरें दामन मे दर्द का सिलसिला है। रहा हर सफ़र जिन्दगी […]
✍? गजल ?✍ ——-($)——- ✍ मेरी जिंदगी का निखार तू है मेरी मुस्कान का प्रसार तू है तेरी चाहत का मै हूं दिवाना मेरी मुहब्बत का आधार तू है मेरी कल्पना तमन्ना मेरी तू मेरी […]
Tum dikhti ho har rat ek khwab ki tarah Jise dhoond raha hu sadiyo se us javab ki tarah Kabhi dekhi hai raat ke andhere ko cheerti hui kirne Vaise hi sama jaati ho mujhme […]
अभी तो उनसे हमारी बात कहां हुई…. दिन तो हुआ मगर रात कहां हुई…. वह हमारे तो हो गए यादों में ही सही…. अभी तो अश्कों की बरसात कहां हुई…. गमों के कारवां लेकर आ […]
कफ़न का ही इँतजाम कर दो | दो गज की जमीं नाम कर दो | दफन कर के मुझको जमीं में | मुझे गुल से गुलफाम कर दो | चलें आयेंगे देखने मुझको | ये […]
तुम देह नहीं तुम देहाकार हो देह में हो देह से मगर पार हो क्या दिखायेगा रूप दर्पण तुम्हारा देखो अंतर में, खुलेगा राज सारा शाश्वत सौंदर्य ज्योति पारावार हो देह में हो देह से […]
इश्क को माना खुदा है | देख लो क्या क्या सजा है | उन गुलों को क्यूं मसल दूं | जो मेरा भी हमनवा है | मुश्कुराहट देख के मेरी | आइना मुझ पर फिदा […]
“गीत” :::::::::::: हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। दूर देश विदेश भय हैं वो मन का मेरे प्रिय साजन। हे! री सखी कैसे करू मै, स – श्रृंगार मन यौवन। हे!री सखी […]
मैं अल्फ़ाज़ हूँ तेरी हर बात समझता हूँ, मैं एहसास हूँ तेरे जज़्बात समझता हूँ, कब पूछा मैने की क्यूं दूर हो मुझसे, मैं दिल रखता हूँ तेरे हलात समझता हूँ…
चलो मिलकर प्रेम के कुछ रंग- ो-रस चख लो हर धर्म की परिभाषा का ये नाम रख लो गर चाहते हो हिंदुस्तान को खुशहाल देखना तो, तुम्हारे अल्लाह मुझको दे दो , तुम मेरे राम […]
सुबह सुबह घर के आँगन में वो फुदक फुदक इठलाती थी, गोरैया चिड़िया जब अक्सर हमसे मिलने आती थी, विलुप्त हो रही है जो पंछी वो चूँ चूँ करके गाती थी, छोटे छोटे बच्चों को […]
ज़िंदा हूँ,कि–मेरा प्यार तुम हो ————————————— तेरे दिल में याद बनकर समां जाऊंगा तेरी आँखों में नशा बनकर छा जाऊंगा क़शिश की सरहद से दूर ना जा पाओगे– मैं खुशबू बनकर एहसास की— —तेरी साँसों […]
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