तुमको हमदर्द बनाया हमने कुछ इस तरह दिल को दर्द बनाया हमने सालों रहे तेरी मोहब्बत में बिगड़े संभल गये जब धोखा खाया हमने…
तुमको हमदर्द बनाया हमने कुछ इस तरह दिल को दर्द बनाया हमने सालों रहे तेरी मोहब्बत में बिगड़े संभल गये जब धोखा खाया हमने…
मुहोब्बत में इतने अश्किया न बनिये, मुहोब्बत है कोमल, संभल कर ही चलिये। मुहोब्बत हो दोनों तरफ तब नफा है, नहीं तो मुहोब्बत सजा ही सजा है।
खुले आसमान तले सुकून मिलता है बंद कमरे में घुटन होती है जब नींद के आगोश में होता है जहान प्रज्ञा किसी की यादों में बहुत रोती है…
हँसते-हँसते चले जाएगे जहान से हम बस एक बार तुम मुस्कुरा के मुझे देख लो आ ही जाओगे मेरी बातों में अपनी रातें सजाकर देख लो….
हँसते-हँसते चले जाएगे जहान से हम बस एक बार तुम मुस्कुरा के मुझे देख लो आ ही जाओगे मेरी बातों में अपनी रातें सजाकर देख लो….
मिन्नतें खूब कर लेंगे इबादत खूब कर लेंगे तू एक बार तो सही तुझे बाँहों में भर लेंगे…
जो सुख-दुख में साथ देते हैं, रिश्ते बस, वे ही नहीं होते, रिश्ते तो वे भी हैं, जो अपने पन का अहसास देते है ..
आसमान अधूरा है सितारों के बिना ये दिल अधूरा है तेरी दोस्ती के बिना
उसे रूठने में एक पल भी नहीं लगा मनाने में उसे कुर्बान रात-दिन कर दिये हमने..
छलक कर आँख से आँसू पन्नों पर बिखर गया हर तरफ ढूंढता है दिल वो मोती किधर गया….
अचरज भरा आकाश है कहीं धूप है कहीं छांव है आसमान की चादर में सितारों के बूटे हैं बादलों के घोड़े हैं जो दौड़ते हैं इधर-उधर जुगनू भी अपनी प्रेयसी को ढूंढते हैं रात भर […]
बातों का सिलसिला कुछ यूं ख़त्म हो गया, कि कायनात से दूरियां, मांगी होंगी उसने ।।
तीर, तलवार और तंज की धार से, जब निष्प्राण हुआ शरीर अनुप्रास ही दिखे कवि को, यहां घायल पड़ा शरीर ।। *****✍️गीता*****
ओस की बूंद अब तुम भी न दो यूँ ठेस पांवों में अभी तो चुभ रहे हैं हम कई पैनी निगाहों में।
बेरुखी से बड़ी सजा ही नहीं , खता क्या थी, पता ही नहीं वो इस कदर दूर हो गए , कभी पास भी थे क्या, अब तो ऐसा लगता ही नहीं ।।
चले जाएंगे तेरी अंजुमन से हम, सुना है किसी के जाने से सूना नहीं होता ।। *****✍️गीता*****
ना मुस्कुराएंगे कभी वैसे, मुस्कुराते थे कभी जैसे कुछ टूट सा गया है अंदर , दिखाई देगा नहीं बाहर से ।।
क्या ग़लत है क्या सही, बात बस इतनी सी है तुमने वो समझ लिया, जो हमने कहा ही नहीं ।।
न कह मुझसे सुनाने को नज्म कोई मुहब्बत की सयाना हो रहा हूँ अब ज़रा सा शर्म करता हूँ।
अधूरे अरमानों की झांकी आज गुजरी मेरे दरम्यां से इक जिंदगी जो जी नहीं, वो देखी आज मैनें
डगमगा जाते हैं कदम आजकल एक जरा से झोंके से मगर, एक वक्त था जब हमारे इरादे बुलंद हुआ करते थे..
हुनर सब में है बस तराशने की जरूरत है हीरा बन सकता है हर पत्थर बस पारखी नजर की जरूरत है…
जिंदगी की आरजू में दफ्न हो गये सुकून के कुछ पल थे और कुछ अधूरे ख्वाब !!
जरा सोंच कभी हम ना हों तेरी जिंदगी में कोई गम ना हों कैसे कटेगा वक्त तेरा अगर जुबां हो पर लफ्ज ना हों.
आखिर डूब ही गया ख्वाबों का महल, कितनी दफा रोंका था दिल ने समुंदर पर आशियां बनाने से…
रोज यूं ही नहीं बन जाते हैं अफसाने नये-नये लकीरें वक्त की बनती बिगड़ती रहती हैं…
हैं कितनी कड़वाहटें मन भरी आजकल किसी को देखकर नफरत के दिल में ज्वार उठते हैं…
यूं तो बड़े -बड़े तूफ़ानों से भी गुज़र जाती हूं और कभी एक आंसू , से भी पिंघल जाती हूं । *****✍️गीता *****
औरत का सम्मान , कुछ इस कदर किया जाए सरक जाए गर पल्लू गलती से, तो, झुका नजर को लिया जाए ।
कल ही दर्द ने मुझसे रो कर कहा, बहुत सहन कर लिया मुझे तुमने। खुदा से अब ये इबादत है, रुबरु हो जाए सारी खुशियां तुमसे ।
किसी से किया कोई वादा, उसको निभा रहे हैं जीने की चाह नहीं है, बस, जिए जा रहे हैं . *****✍️गीता*****
होते ना अगर तुम, तो छोड़ देते ये दुनियां हम कभी की…. वो हंस दिए, और बोले,.. तो हम हैं ना, ना कहना ..,ये अब कभी भी.. *****✍️गीता*****
कर्म का पेड़, खुदा के जैसा, परख के फल वो देता है, किसी को कड़वा, किसी को मीठा, मगर मिलता हमेशा मेहनत का है।
बदनाम बहुत हुए,वो लोग; जिन्होंने इश्क निभाया है, अंगार कोयले-सा है ये रस्ता, तड़पा बहुत, इस पर , चलकर जो आया है।
तनहाई का आलम पूरा हिमालय हो गया, अब दो दिलों का मिलन , क्षितिज-सा लगता है।
बहुत शिकायतें करती हूं मैं, जानते हो तुम। फिर भी कभी शिकायत नहीं करते।
वो सिक्सर की तरह लगी, आ सीने पर, दिल जीरो पर, बोल्ड हो गया, खुशी मिली, आईपीएल की तरह, मगर मैच हमारा , टाई हो गया।
रात का पागलपन भी देखो! खत्म होती ही नहीं रात भर, जब होता था, सुकून , तब सोता था, मगर अब , नींद की हिम्मत भी देखो! आती ही नहीं रात भर।
ये जो वक्त का सितारा है, वो बेहिसाब- सा बदलता है , और जब बदलता है, तो सारी कयानात बदलती है, फिजाएं भी बदलती हैं, और इंसान भी बदलता है।
कोहरा देख कर , मैं इक पल को रुकी थी, मैं बढ़ती रही आगे, और कोहरा छंटता गया… *****✍️गीता*****
कभी जाहिर करना आया ही नहीं, तुम्हारे लिए मेरा प्यार। अब तक खामोश है….. मेरे लब।
समेटते हुए , आ रहे हैं हम, आज भी , उन दिल के टुकड़ों को, जो वर्षों पहले टूटा था।
नाकामी की दस्तक पढ़ ली मैंने, फिर भी इंतजार करेंगे। हम अपनी कामयाबी का…..
बेजुबान हम न थे, बस बोलना न आया।
यह कौन-सी शाम है, यह कौन-सी रात है। जो न ढलती है, जो न कटती है। बिन तेरे यह जिंदगी हर-पल, सिमटती है….
मुस्कुराकर खत्म कर देती जीवन गाथा, पर उम्मीदों नहीं सोने न दिया।
ज़िन्दगी में जो ख़ुशी मिली है ए दोस्त, बिन तेरे उस खुशी का क्या करूं….. उसमें मुझे तेरा साझा भी चाहिए।
सारी रात लड़े हम तेरी यादों से सारी रात बहस करी तेरे वादों से और सुबह तेरे मीठे सपनों ने सुला दिया… *****✍️गीता *****
एक तेरे बगैर ही न गुजरेगी ये ज़िंदगी…., मैं क्या करूं सारे जमाने की खुशियाँ लेकर….
आजकल हर्फ़ ब हर्फ तोल परख कर लिखतीं हूं न जाने कौन सा मायना निकाल ले दुनिया!!
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