करता है कौन, किससे प्यार यहाँ ? प्यार तो है दो दिलों का व्यापार यहाँ… जिसमें अपनी पूंजी कोई और लगाता है पर उसका मुनाफा कोई और उठाता है…

कितनी शिद्दत से हम तुझे चाहते थे तुझको अपना नसीब मानते थे.. ********************************* तुमने हमें छोंड़कर गैरों को मोहब्बत बक्शी पर हम तो फकत तुझे अपना मानते थे..

भागते रहे अक्सर हम उन लोगों के पीछे जिन्हें हम प्यार करते थे ! पर कुछ हाथ ना आया सिर्फ मायूसी के सिवा अब बस हम उनकी कद्र करते हैं जो हमारी कद्र करते हैं…

दिल टूट जाने के बाद भी प्यार है तुमसे ऐसा क्यों है नहीं जानती हूँ मैं बस इतना ही मालूम है मुझे कि आज भी बेपनाह तुझे चाहती हूँ मैं…

कतल कर दो मेरा तुम, ज़रा सी फुरसत निकाल के यूं इंतजार में तुम्हारे, हमसे तड़फा नहीं जाता… *****✍️गीता

लोग कहने है मुहब्बत किसी १ से होता है। क्या इस युग में भी किसी १ से ही होता है।।

कौन कहता है कागज के फूलो से , कभी खुशबू आ नहीं सकती है। मैं कहता हूँ – क्या तुमने कभी, कागज के फूलो पे सच्चे मन से- महबूबा के नाम लिख कर देखा है।।

तुम नहीं हो तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता तन्हाई से निकलने का रस्ता नहीं मिलता गुजरा जाता है यूं तो दिन धीरे-धीरे पर जिन्दगी तुझ बिन बिताना अच्छा नहीं लगता…

तुम नहीं हो तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता तन्हाई से निकलने का रस्ता नहीं मिलता गुजरा जाता है यूं तो दिन धीरे-धीरे पर जिन्दगी तुझ बिन बिताना अच्छा नहीं लगता…