तुमसे दूर जाने के बहाने बहुत हैं साहब!! ————————————————- पर तुम्हारे पास आने के बहाने ढूंढते हैं हम
तुमसे दूर जाने के बहाने बहुत हैं साहब!! ————————————————- पर तुम्हारे पास आने के बहाने ढूंढते हैं हम
ये बेचारा दिल बस तुम पर मरता है पागल है जो तुमसे इतना प्यार करता है तुम्हारी बेरुखी से तो मौत अच्छी है पर ये दिल एक तेरी ख्वाहिश में धड़कता है…
करता है कौन, किससे प्यार यहाँ ? प्यार तो है दो दिलों का व्यापार यहाँ… जिसमें अपनी पूंजी कोई और लगाता है पर उसका मुनाफा कोई और उठाता है…
वो आज कहने लगे हमसे लौट आओ फिर से मेरी जिन्दगी में बहार लौट आएगी… मैंने एक धुन में कहा- मैं गुजरा वक्त हूँ साहब जो घड़ी बीत गई फिर ना लौट आयेगी…
एक दिल कहता है, फिर एक मर्तबा किसी से इश्क़ कर। दूसरा दिल कहता है, ए नादान पुरानी दास्तां से तो डर।।
चल घटा जो हुआ इश्क़ में, शायद अच्छा ही हुआ। कम से कम नादान दिल, तीर ए नजर से तो बचा।।
मुहब्बत में मुकाम तो मिलता है मुकद्दर वालों को। हम बेवजह ही आज़माए अपनी सोए मुकद्दर को।।
कितनी शिद्दत से हम तुझे चाहते थे तुझको अपना नसीब मानते थे.. ********************************* तुमने हमें छोंड़कर गैरों को मोहब्बत बक्शी पर हम तो फकत तुझे अपना मानते थे..
क्या कहें अब जब तू खफा ‘मैं फकीर और तू खुदा’ इबादत में तेरी मिट गया मेरा मजहब और मेरा खुदा…
ऐ खुदा ! क्यों है तू खफा किस बात की तू मुझे देता है सजा मेरा मुकद्दर रूठा मुझसे हमदम हुआ जबसे जुदा…
मेरे जज्बातों की कद्र कभी नहीं की उसने फकत आँसुओं की सौगात दी उसने हम उसी की खातिर मिट गये यारों! मेरे वजूद की कभी ना फिक्र की जिसने…
भागते रहे अक्सर हम उन लोगों के पीछे जिन्हें हम प्यार करते थे ! पर कुछ हाथ ना आया सिर्फ मायूसी के सिवा अब बस हम उनकी कद्र करते हैं जो हमारी कद्र करते हैं…
पैर जमीं पर ही रहने दो मेरे क्योंकि अक्सर आसमान की ऊंचाइयों से अपने दिखाई नहीं पड़ते…
थोड़ी देर के लिए थम गई थीं साँसें जब रुक गया था वो चलते-चलते, मुड़कर देखा एक बार जब उसने हम सहम गये और मध्यम हो गई साँसें.
कोई उसे जान से भी ज्यादा चाहा था किसी बेवफा को। उसने पल में ही तोड़ दिए सपने हंसते हंसते किसी को।।
ए मेरे दोस्त मुझे यह गम नहीं कि तुम मेरे न हो सके, गम तो इस बात की है कि तुम मुझे कभी समझ न सके।
यूं देखकर भी क्यों अनजान बनते हो देवता हो दिल के क्यों हैवान बनते हो मैं जानती हूँ तुम क्या हो क्यूं सबके सामने महान बनते हो..
वो हमसे कतराने लगें हैं धीरे- धीरे दूर जाने लगे हैं दिल में उनके जगह नहीं बची है हमारे लिए, तभी तो हमसे नजरें चुराने लगे हैं…
रास्ते के पत्थर समझ के, ठोकर मार कर चले गए वो। हम किनारे पे खड़े रहे, किसी के हो कर गुजर गए वो।।
खुद को जला के हम, अपनी प्यास कहाँ बुझा पाए। समंदर भी मुझे देख कर , अपनी धारा बदलती जाए ।।
दीदार करके उसका मैं पाक हो गई मेरी मोहब्बत से जिन्दगी आबाद हो गई करता रहा वो मेरे इजहार का इन्तजार पर मैं किसी और की बाँहों का हार हो गई..!!
जाने क्या सोंचती रहती हूँ बस उसके ही खयालों में खोई रहती हूँ जिन्दगी अब फुर्सत कहाँ देती है अपनी उलझनों में ही उलझी रहती हूँ…
दिल टूट जाने के बाद भी प्यार है तुमसे ऐसा क्यों है नहीं जानती हूँ मैं बस इतना ही मालूम है मुझे कि आज भी बेपनाह तुझे चाहती हूँ मैं…
रावण जलाया तो क्या जलाया, दिल के रावण जलाओ तो जाने । तुम्हारी ढकोसला षडयंत्र को हम, अपनी सुरक्षा कवच क्यों माने।।
चलो इश्क़ की दरिया में कूद कर देखते है। सुनता हूँ नीली गहराई का कोई अंत नहीं है।।
एक रास्ता मय़खाने की ओर दूसरा रास्ता शबाब की ओर। उतावला दिल किधर जाए इधर जाए या उधर जाए।।
ना जाने आप में ऐसा क्या है जो सबका मन हर लेते हो… थोड़ी देर बैठो जिसके करीब उसके दिल में घर कर लेते हो..
खामोशियों की भी, होती है एक ज़ुबान कह जाती हैं बहुत कुछ.. बस, सुनने वाला चाहिए… *****✍️गीता
हमें तो गंज्यालों से कूटा गया सुल्याठों में कहां दम था।। मेरा खुट्टा तो रड़ा वहाॅ जहाॅ कच्यार कम था।। 😃😃😃😃😃😃😃😃
हम बदला नहीं लेते किसी से, बस, निकाल कर के इस दिल से, उसे भूल जाते हैं.. *****✍️गीता
एक तमाचा सा खाया, ऐ ज़िन्दगी आज कोई बात नहीं, ज़िन्दगी कुछ सिखा ही गई… *****✍️गीता
सुनते हैं, किसी के जाने से, ज़िन्दगी अधूरी नहीं होती मगर ये भी सच है कि, उसकी कमी पूरी नहीं होती.. *****✍️गीता
कतल कर दो मेरा तुम, ज़रा सी फुरसत निकाल के यूं इंतजार में तुम्हारे, हमसे तड़फा नहीं जाता… *****✍️गीता
फुरसत से करेंगे हम, कभी बातें मोहब्बत की लम्हे भी चुराए बहुत, ज़िन्दगी में फुरसत ही ना मिली *****✍️गीता
लोग कहने है मुहब्बत किसी १ से होता है। क्या इस युग में भी किसी १ से ही होता है।।
कौन कहता है कागज के फूलो से , कभी खुशबू आ नहीं सकती है। मैं कहता हूँ – क्या तुमने कभी, कागज के फूलो पे सच्चे मन से- महबूबा के नाम लिख कर देखा है।।
जब हुई आँखों से, अश्कों की बरसात। तब याद है मुझे,थी वो बरसात की रात।।
सोते समय तुम हमें याद करना दवा नींद की बन सुकूँ-चैन देंगे। अगर स्वप्न में दिख गए आपको हम, आवाज देना, मुस्कान देंगे।
अगर तुम होते तो और उम्मीद होती जीने की ————————————————– बहाने चार होते दुनिया से दिल लगाने के|
जो मेरा जिक्र किया करता था वो ही मेरी फिक्र किया करता था हम उसकी कद्र किया करते थे वो मेरी कद्र किया करता था
तुम नहीं हो तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता तन्हाई से निकलने का रस्ता नहीं मिलता गुजरा जाता है यूं तो दिन धीरे-धीरे पर जिन्दगी तुझ बिन बिताना अच्छा नहीं लगता…
तुम नहीं हो तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता तन्हाई से निकलने का रस्ता नहीं मिलता गुजरा जाता है यूं तो दिन धीरे-धीरे पर जिन्दगी तुझ बिन बिताना अच्छा नहीं लगता…
हम तुम्हें भूल गये! यह गलतफहमी पालकर बैठे थे एक दिन आ गये तुम अचानक सामने तब से दिल हार कर बैठे हैं..
दिखे शांत सरोवर का उर, भीतर हो रही हलचल रह-रह कर उठती हैं लहरें, बता रही व्याकुलता प्रतिपल.. *****✍️गीता
दिल फेंक आशिक़, सड़क पे अक्सर मिल ही जाते है। गर बोलो दो मीठी बातें तो, जल्द ही मजनू बन जाते है।।
चारों तरफ अंधेरा छाया है मेरे पीछे ये किसका साया है डर लगता है मुझको ले लो अपनी बाँहों में कई सालों बाद ऐसा मौका आया है
चारो दिशाओं में आज मतलबी इंसान बसते है। तभी तो आज हमारे मन में नफरत ही पलते है।।
मैं दोस्तों के अंजुमन में, अर्शे बाद आया हूँ। खुद को थाम लीजिए मैं फिर वही दिल लाया हूँ।।
हम उऩ पलों को याद करते हैं खाली-खाली जब अपने दिल को पाते हैं.. बरस पड़ता है आँखों से पानी जब तुम्हारी मीठी बातों को याद करते हैं..
तुम हरकतों से कहाँ बाज आओगे जब जी चाहेंगा मुझको सताओगे.. सारी मजबूरियां समझते हो मेरी फिर भी मेरी नाकामयाबी का फायदा उठाओगे..
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