तुम जाओगे ,कल नहीं; आज चलें जाओ, छोड़ जाओ, रोकूंगा नहीं, मगर काम ज़रा-सा करके जाओ, फिर कभी टोकूंगा नहीं। ये यादें जो घर बनाएं बैंठी है दिल में, ज़रा मेहरबानी ! ले जाओ, फिर […]
तुम जाओगे ,कल नहीं; आज चलें जाओ, छोड़ जाओ, रोकूंगा नहीं, मगर काम ज़रा-सा करके जाओ, फिर कभी टोकूंगा नहीं। ये यादें जो घर बनाएं बैंठी है दिल में, ज़रा मेहरबानी ! ले जाओ, फिर […]
ये गिले -शिकवे कहूं तो मित्रता में लाजमी हैं, प्यार कम होगा नहीं, जो कल दिखे थे आज भी हैं।
‘देनी होगी ताकत अब दरख्तों को ज़िंदा रहने की, वो आज हमारी राख को मिट्टी समझ बैठे हैं..’ – प्रयाग मायने : दरख्तों को – पेड़ों को
अगर मैं गलत निकली तो कुछ भी हार जाऊंगी, लगा लो शर्त मुझसे तुम यकीनन हार जाओगे..
मेरी क्या मजबूरियां हैं कैसे बताऊं तुम्हें! मेरी सखियां भी कहती हैं तुम बात क्यों नहीं करती …
कैसे होगा ऐतबार उन्हें वफा पर मेरी, आजकल बहुत झूठ बोलती हो ! वो कहा करते हैं…
जब तुम्हारे और मेरे रास्ते अलग हैं तो मेरे रास्तों में आकर कांटे क्यों बिछाते हो? कोई मोहब्बत नहीं है हमसे अगर तो एहसान जताते क्यों हो?
फौज की तादात बढ़ाने से कुछ नहीं होगा चीन जंग जीतने के लिए शेर-सा जिगरा होना चाहिए..
आजकल वह बड़ा बेचैन रहते हैं.. हम जो जरा हँसकर किसी से बोल देते हैं..
मेहनत करने वाले मंजिल को पा जाते हैं और बेचारे कामचोर गाल पीटते रह जाते हैं..
जो नाउम्मीदी की डगर से गुजरते हैं वो ही शक्स पतन की बात करते हैं..
मंजिल पाने के लिए मैंने किसी से खैरात नहीं मांगी.. अपनी मेहनत से बुलंदियां हासिल की हैं..
बड़ी बदनामियां उठाने के बाद आज मैं फिर मुस्कुराई… एक अर्से के बाद जब मेरी जान लौट आई…
हम तो आपकी चाहत में , फ़लक से सितारे तोड़ कर लाए है । जरा चाँद से हो गई है नाराजगी, बस यही आपसे कहने आए है ।।
नाउम्मीदी से अश्क का गहरा रिश्ता है। तभी तो बने है वो आज का फरिश्ता।।
पत्थर समझ के ए ज़माना, मुझे ठोकर पे ठोकर न मार। कभी कभार पत्थर भी बन जाता है तलवार की धार।।
🌹🌹आते रहा करो हुकुम है हजूर का🌹🌹 अब कैसे कहें मिलने को हम खुद भी तरसते रहते हैं
कभी नाउम्मीद हो जाती हूं जब उनसे, फकत दो बूंद गिरती हैं मेरी आंख से। चैन सा आता है, बहुत पानी है बॉडी में ,मेरा क्या जाता है। ———— फकत मतलब केवल विज्ञान के अनुसार […]
‘हैं जबकि और भी कितने ही दर ज़माने में, क्यूँ फकत मेरे ठिकाने को चली आती हैं.. कितने मौजूद मददगार हैं यहाँ तेरे, मुश्किलें बस ये दिखाने को चली आती हैं..’ – प्रयाग मायने : […]
आपको सपने में देखा क्या गलत देखा बताओ, दूर हमसे से हो गए हो, स्वप्न ही तो बन गए हो।
गंगा स्वच्छ है तो देश स्वच्छ है। यानी नारी ही देश की गंगा है।। इनके ही पवित्रता से । हर दिन नया प्रभात उगा है ।।
‘ दिल पर जो गुज़री थी उसे कुछ और ही रंग दे दिया मैंने, आजकल बहुत खुश हूँ किसी ने पूछा तो कह दिया मैंने..’ – प्रयाग
चलो एक बार हम फिर से दिखावा आज करते हैं तुम पूँछो की कैसे हो ? हम कह दें की अच्छे हैं। अब तो रातों में रोना भी हमको खूब आता है बस एक बार […]
नारी के अनेक रुप मिले। इसलिए पुरुष नारी से जले।।
वक्त के सिकन्दर से पूछो दोस्त कितनी ताक़त है वक्त में । ठोकरें खा के भी वक्त को झुकने नहीं दिया इस ज़माने में।।
गम की दरिया में मुझे दरियादिली नहीं मिला। जो भी मिला सब एहसान फ़रामोश ही मिला।।
‘अब इतनी ऊँची अपनी हैसियत बना डाली, कभी न खत्म हो वो कैफियत बना डाली.. तेरी यादें, तेरी हसरत का वो एहसास जुदा, पुरानी चीज़ें थी बस मिलकियत बना डाली..’ – प्रयाग मायने : कैफियत […]
बेबसी का सैलाब कुछ ऐसा आया , सब रिश्तों को बहा ले गया, तंगी कुछ ऐसी हुई कि, हर कोई हमसे; तंग-सा हो गया, और जनाब!कोरोना तो वैसे ही; हैं बदनाम ;आजकल कोरोना से बुरा […]
अनजाने में इश्क का गुनाह कर दिया बंदिशों से खुद को रिहा कर दिया पाक रूह कहकर कभी सजदा करने वाले अब कहते हैं मोहब्बत ने तबाह कर दिया
हम बेकार में ही परेशान हो गए उनकी नजर अंदाजी से उनकी ख्वाहिश तो हमसे दूर हो हमें अर्श पर पहुंचाने की थी
नज़रंदाजी को तेरी मैं मजबूरी समझती थी.. तेरी बेवफाई को ये प्रज्ञा प्यार कहती थी..
तेरे दर्द के बाद सोंचती हूँ मैं क्यों जन्म दिया ऊपर वाले ने मुझे !! ठोकर खाने के लिए या तुलसीदास बनने के लिए !!
मेरे दामन को सरेआम दागदार कहता है, गंदी नाली का कीड़ा है तू गंगाजल को अपवित्र कहता है..!!
‘बेदिल किसे कहें, ज़माने को या खुदा को ? ‘वो’ जो कुछ देता है नही, या ‘वो’ जो छीन लेता है..’
मुझे जख्म लगते ही वो सिलने बैठ जाता था… बात इतनी-सी थी कि वो बिना धागे के सिलता था…
तुम्हें नहीं मालूम , मगर मंसूबों को तेरे , मैं जान लेता हूं, रहता हूं परेशान, मगर; फिर भी खुद को हर हाल में , संभाल लेता हूं, और इत्तेफाक से तुम्हारी आंखों और लफ्जों […]
तेरे दिल में अगर जगह मिल पाती हम बेघर न समझती ये दुनिया
चले थे मेरे साथ साजन घर से यह कह के। निभाएंगे साथ हम रिश्ते है सौ जन्म के।। थक गए है आज कुछ ही दूर पैदल चल के। मत हो उदास ए दिल जो मुहब्बत […]
जित्थे वेखां ते मेनू तू ही नज़र औंदी है, के जेया तू ही रूह तू ही जिगर होंदी है.. तेनू सौ रब दी मेनू छड न कदे वी जाणां, मेनू हर वक्त हूण तां तेरी […]
‘समंदर समझ रहा था कि मौजें यूँ ही बनी, आँसू हुए शुमार कुछ, तब जाके कहीं बनी..’ – प्रयाग मौजें – लहरें शुमार – गिनती में शामिल होना
इतने मशरूफ हो गए हम औरों में ए- ज़िंदगी… कि भूल ही गए… तुझ पर हमारा भी तो कोई हक था। 😞😒💔 HEMANKUR❤️
तेरे प्यार का दर्पण हूं, मुझे पर रखना छोड़ दे| कब तक सताएगी तू मुझे, अब मुझे परखना छोड़ दे|(1) इश्क किया हूं कोई गुनाह नहीं तुझे चाहा हूं क्या विश्वास नहीं| आ गले लगा […]
चंद लम्हे यादों के, जीना सिखा गए वरना, ज़िन्दगी जीना आसान नहीं होता।
फिर वही ढलती गोधूलि मन में एक एहसास जगा दिया। नादान था दिल, बिना सोचे दिल दग़ाबाज़ को दे दिया।।
आंखों में नमी है,मगर रोती नहीं हूं मैं, किसी से किया हुआ,एक वादा पुराना याद आया।
‘मैं अपनी याद तेरे दामन से समेट लूँ तो मगर, तेरे हिस्से की कोई खुशी न साथ आ जाए..’ – प्रयाग
हम दो जिस्म एक जान हो कर भी ज़माने को हम कहाँ झुका पाए आज फिर ज़माना मुहब्बत पे भारी पड़ी आखिरी बार भी तुम्हें कहाँ गले लगा पाए।
ए कविता चल आज कवियों के अंजुमन में। शायद दीदार के क़ाबिल हो जाए उनके अंजुमन में।।
‘ज़िंंदगी को इतनी हसरत से नही देखा कभी, जितनी तेरा साथ पाने की है मुझमे आरज़ू..’ – प्रयाग
‘बुझा गया है कोई, मैं चिराग था पहले, जो जगह आज बंज़र है, बाग था पहले.. बदल ली करवट कुछ इस कदर तकदीर ने, डरता हूँ आज धुएँ से, मैं आग था पहले..’ – प्रयाग
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