तुम जाओगे ,कल नहीं; आज चलें जाओ, छोड़ जाओ, रोकूंगा नहीं, मगर काम ज़रा-सा करके जाओ, फिर कभी टोकूंगा नहीं। ये यादें जो घर बनाएं बैंठी है दिल में, ज़रा मेहरबानी ! ले जाओ, फिर […]

जब तुम्हारे और मेरे रास्ते अलग हैं तो मेरे रास्तों में आकर कांटे क्यों बिछाते हो? कोई मोहब्बत नहीं है हमसे अगर तो एहसान जताते क्यों हो?

कभी नाउम्मीद हो जाती हूं जब उनसे, फकत दो बूंद गिरती हैं मेरी आंख से। चैन सा आता है, बहुत पानी है बॉडी में ,मेरा क्या जाता है। ———— फकत मतलब केवल विज्ञान के अनुसार […]

‘हैं जबकि और भी कितने ही दर ज़माने में, क्यूँ फकत मेरे ठिकाने को चली आती हैं.. कितने मौजूद मददगार हैं यहाँ तेरे, मुश्किलें बस ये दिखाने को चली आती हैं..’ – प्रयाग मायने : […]

गंगा स्वच्छ है तो देश स्वच्छ है। यानी नारी ही देश की गंगा है।। इनके ही पवित्रता से । हर दिन नया प्रभात उगा है ।।

वक्त के सिकन्दर से पूछो दोस्त कितनी ताक़त है वक्त में । ठोकरें खा के भी वक्त को झुकने नहीं दिया इस ज़माने में।।

‘अब इतनी ऊँची अपनी हैसियत बना डाली, कभी न खत्म हो वो कैफियत बना डाली.. तेरी यादें, तेरी हसरत का वो एहसास जुदा, पुरानी चीज़ें थी बस मिलकियत बना डाली..’ – प्रयाग मायने : कैफियत […]

बेबसी का सैलाब कुछ ऐसा आया , सब रिश्तों को बहा ले गया, तंगी कुछ ऐसी हुई कि, हर कोई हमसे; तंग-सा हो गया, और जनाब!कोरोना तो वैसे ही; हैं बदनाम ;आजकल कोरोना से बुरा […]

तुम्हें नहीं मालूम , मगर मंसूबों को तेरे , मैं जान लेता हूं, रहता हूं परेशान, मगर; फिर भी खुद को हर हाल में , संभाल लेता हूं, और इत्तेफाक से तुम्हारी आंखों और लफ्जों […]

तेरे प्यार का दर्पण हूं, मुझे पर रखना छोड़ दे| कब तक सताएगी तू मुझे, अब मुझे परखना छोड़ दे|(1) इश्क किया हूं कोई गुनाह नहीं तुझे चाहा हूं क्या विश्वास नहीं| आ गले लगा […]

हम दो जिस्म एक जान हो कर भी ज़माने को हम कहाँ झुका पाए आज फिर ज़माना मुहब्बत पे भारी पड़ी आखिरी बार भी तुम्हें कहाँ गले लगा पाए।

‘बुझा गया है कोई, मैं चिराग था पहले, जो जगह आज बंज़र है, बाग था पहले.. बदल ली करवट कुछ इस कदर तकदीर ने, डरता हूँ आज धुएँ से, मैं आग था पहले..’ – प्रयाग