Category: शेर-ओ-शायरी

  • सच की जमीन…

    सच की जमीन पर,
    हम भी चल ना पाए ,
    और औरों से उम्मीद लगा रखी है।

  • इमारतें

    इमारतें मजबूत हो तो,
    साथ सभी का होता है,
    वरना खंडहरों को,
    कौन अपना आशियाना बनाता है।

  • ये तन्हाइयां

    ख़त्म हो जाएंगी एक दिन ये तन्हाइयां,
    मिल जाएगी मंज़िल, दूर होंगी रुसवाईयां..

  • बेख़बर

    जनवरी से दिसंबर गुजर गए,
    उस बेख़बर को खबर ही नहीं।
    उसे क्या पता इश्क़ करने वाला
    कोई आशिक़ ज़िंदा है भी या नहीं।।

  • ख्वाईश

    दिल के आगरे में मैं भी एक ताजमहल बनाउंगा।
    पत्थर ना सही संगदिल से ही महल को सजाउंगा।।

  • बेफिक्र

    बेफिक्र रहना आदत थी उनकी ,
    कब जिम्मेदारियों ने दस्तक दी पता ना चला ।

  • तलब

    तलब लग गई उनकी ,
    उस प्याले की तरह है ,
    जो हर बार इंतजार करता है
    कि वो उसे फिर से भर दे।

  • निराली दुनिया..

    बहुत निराली है ये दुनिया प्रज्ञा !
    यादों की बात तो करती है पर
    याद नहीं करती…

  • बीते कल

    हम उनमें थे — वो मुझमें थे, उफ़ !!!! , वो क्या दिन थे।
    जब हम रुठ जाते थे, तब वो चाँद सितारे तोड़ लाते थे।।

  • पुरानी हवेली

    कई वर्षों से इस पुरानी हवेली में कोई आया ही नहीं।
    जो भी आया मैं गैर समझ कर उसे अपनाया ही नहीं।।

  • गम

    वफा के बदले उनके शहर में”अमित”बेवफ़ाई ही मिला।
    चलो गम को भुलाने के लिए मयख़ाने में मय तो मिला।।

  • वो आये दबे पांव से यूं

    वो आये दबे पांव से यूं
    कानों ने तो कुछ सुना नहीं
    मगर दिल ने सब सुन लिया

  • ये कैसा कारवां

    ये कैसा कारवां जो कभी खत्म ना हुआ,
    वह उम्मीद कभी न धुंधली हुई और न मिटी ,
    वह साथ पाने का जज्बा अभी भी बरकरार है।

  • हैसियत क्या थी मेरी…

    हैसियत क्या थी मेरी पूछिए मत,
    बस किताब के कोरे पन्ने थे ,
    लिखते रहे अपनी रूबानी,
    जब बनी ना कोई गजल ना कोई नज़्म,
    फटकर सिमटकर पैरों तले बस कुचले गए।

  • आज कर दूं, आंखें नम

    आज कर दूं, आंखें नम या समंदर कर दूं ,
    मेरे भीतर का वो दर्द ; कैसे संदल कर दूं।

  • वजह हुआ करती है..

    ‘वजह हुआ करती है नज़रों के झुक जाने में,
    बेबाक आँखों में शर्मिन्दगी का सलीका नही होता..
    वो तोड़ सकते हैं मेरे यकीं को किसी भी वक्त मगर,
    बेरुखी जताने का ये आखिरी तरीका नही होता..’

    – प्रयाग

  • जज़्बाते – दिल

    अजीब सी है ये ज़िन्दगी,
    कभी, फूलों सी कोमल लगी।
    कभी शमशीर की धार हुई,
    दिल के जज्बातों को जब- जब किया बयां,
    एक कविता हर बार हुई ।

  • ज़िन्दगी

    ऐ ज़िन्दगी सुन, शिक्षक दिवस मुबारक हो,
    तू भी मेरी गुरू है, बहुत कुछ सिखा दिया ।

  • तमाशा

    तराशने वालों ने, पत्थर को भी तराशा है,
    नदानों के आगे हुआ, हीरे का भी तमाशा है।

  • आदत

    अच्छे इंसान की भी एक आदत बुरी पाई,
    हर किसी को समझा अच्छा, बस यही मार खाई ।

  • जवाब

    हर क्यूं का जवाब नहीं होता,
    हर जवाब लाजवाब नहीं होता ।
    यूं तो हम ख्वाब देखते हैं बहुत सारे,
    पर, हर ख्वाब तो पूरा नहीं होता ।

  • टुट कर बिखरी नहीं….

    टूट कर बिखरी नहीं,
    सांस है अभी थमी नहीं।
    थक चुकी है जीवन आशा ,
    फिर भी लौ बुझी नहीं।

  • कभी पल-पल…..

    कभी पल-पल इबादत करते थे मेरी,
    अब किसी गैर की आयत हो गए।

  • झांकते बादल

    तेरी खिड़की से झांकते बादल,
    तेरे हाथों में चलती कलम ।
    बड़ी ही अद्भुत लगती हमें,
    कुछ लिखते ही रहते हो हरदम ।

  • कलम कहे

    कलम कहती है,बोल दूं,
    क्या राज़ दिलों के खोल दूं।
    “गीता” चाहे वो मौन रहे,
    नज़र लग जाती है, कौन कहे।

  • कामयाब आशिक़

    ए दोस्त —- जो इश्क़ में बदनाम होते है।
    दरअसल वही आशिक़ कामयाब होते है।।

  • नादान आशिक़

    झील में उतरने से पहले काश मैं गहराई को नाप लेता।
    अब दलदल में फंसता जा रहा हूँ काश कोई बचा लेता।।

  • बद से बदनाम

    हम उनके लिए “मीर”, बद से बदनाम होते गए।
    वो नादान मुझे इम्तहान पे इम्तहान लेते गए।।

  • अश्क

    उनकी आँखों से ,अश्क क्या गिरी।
    मैं समझा मुझ पे, बिजली गिरी।।

  • मुस्कुराओ अन्यथा हम रुष्ठ हैं

    मारकर फूल मत समझो
    कि हम संतुष्ट हैं।
    मुस्कुराओ अन्यथा हम रुष्ठ हैं।
    क्या करें मासूमियत से आपकी,
    ये चिढ़ाते नैन क्या कम दुष्ट हैं।

  • मगर से हो तुम

    बहुत देर से ही सही मगर,
    समझ में आया,
    मगर से हो तुम,
    मेरे झील से जीवन में।

  • जब कहोगे तब चले जायेंगे

    बिन बुलाये मेहमान हैं हम
    जब कहोगे तब चले जायेंगे।
    घर आपका है,
    हम खुद का समझ बैठे थे,
    आपको अपना समझ बैठे थे।

  • कड़वे बोल सुन सुन कर

    कड़वे बोल सुन सुन कर,
    तेरे, मैं हो गया पागल।
    है ऐसा क्या कि तब भी,
    मैं तेरा सम्मान करता हूँ।

  • नहीं होती है रात

    नहीं होती है रात , सिर्फ सूरज के डूबने से।
    रात तब भी होती हैं ,
    जब उम्मीद नहीं, दिखती…तुम्हें पाने की।

  • नींद

    पलकों पर नींद बिखरी पड़ी होती है ,
    फुर्सत में समेट कर सोते हैं।।

  • ये किनारे

    ये किनारे दूर होते गए ,
    सिर्फ शकों के सैलाब से।।

  • आगज़नी किसकी है..

    ‘उलझ पड़ें न कहीं हम, के इस ज़िन्दगी से,
    अपनी क्या बनेगी, आज तक बनी किसकी है..
    इसलिए रखता हूँ हर आतिश को खुद में दफन,
    कहीं वो पूछ न बैठे कि आगज़नी किसकी है..’

    – प्रयाग

    मायनें :
    आतिश – चिंगारी

  • अभिलाषा

    प्रेम नगरी में मैने प्रेमा से पूछा प्रेम के क्या है परिभाषा। शर्माती हुई कही “ए अजनबी क्या है तेरा अभिलाषा”।।

  • खुदा के लिए

    मत आना मेरे मैयत में ,
    अश्क समंदर बन जाएंगे ।
    डर है क़यामत के ए नूरी,
    कब्र भी मुझे ताने ही देंगे।।

  • फ़िज़ाओं के बदलने का इंतज़ार..

    ‘फ़िज़ाओं के बदलने का इंतज़ार किसको है,
    रुसवा शख्सियत हूँ मैं ऐतबार किसको है..
    आज दर-बदर हूँ तो ये भी सोचता हूँ,
    चलो देखता हूँ मुझसे प्यार किसको है..’

    – प्रयाग

    मायने :
    रुसवा – बदनाम

  • अरमान

    जब तुम गेसूओं में गुलाब गूंथते थे।
    तब मेरे अरमान के फूल खिलते थे।।

  • तुझको हवाले

    पत्थर पे लकीर, खींचने वाले।
    खुद को किया, तुझको हवाले।।
    संवार दे तू , या बर्बाद कर दे।
    जो भी दे, हंस हंस के दे।

  • साजिशें

    साजिशें भी थीं, सामने गुनहगार भी थे।
    जवाब हमारे पास, तैयार भी थे।
    हम चुप रह कर सब सहते रहे,
    थोड़े नादान ही सही हम,मगर
    थोड़े समझदार भी थे।

  • सलाम

    तेरी दुआओं को सलाम,
    तेरी वफाओं को सलाम।
    तेरे दर से जो आई,
    उन हवाओं को सलाम।

  • खुशियों के बीज

    चलो छुपा कर रखते हैं,
    खुशियों के बीज ,
    बो देंगे कभी;
    अगर गम बढ़ जाए,
    ज़रा हंस लेना तुम ,
    और हम भी मुस्कुराएं

  • कितना चले! कितना रुके!

    कितना चले !कितना रुके! ,
    हम जिंदगी के सफर में ,
    ये कोई नहीं पूछता ,
    मगर लोग अक्सर पूछते हैं,
    मंजिल के कितने करीब हो!

  • हर शाम इतनी मीठी ना होती

    हर शाम इतनी मीठी ना होती,
    अगर तुम ना होते ,
    खुश तो होते हम,
    पर खुशनसीब ना होते,
    गुजारिश है बस इतनी तुमसे,
    इस मुस्कान को खोने मत देना,
    खुशनुमा किया है हृदय को,
    तो कभी इसे रोने मत देना।

  • क्यों निभा रहे हैं हम

    क्यों निभा रहे हैं हम,
    इस झूठे रिश्ते को,
    जहां वो हमें अपना नहीं मानते,
    और हम उन्हें पराया नहीं।

  • थाम कर तुम्हारा हाथ….

    थाम कर तुम्हारा हाथ ,
    आज भी चलना चाहते हैं,
    चाहे दूरी कितनी भी हो,
    साथ निभाना चाहते हैं।

  • कुछ इस तरह चला…

    कुछ इस तरह चला;
    यू मोहब्बत का सिलसिला,
    ना तुमको इसका एहसास था,
    ना मुझको इसका गम,
    हम दोनों मसरूफ रहे,
    इसे बेवजह निभाने में।

New Report

Close