जिंदगी जिस राह पर चल रही है, उसकी कोई मंजिल नहीं है, कश्ती साहिल पे थी सही, मजधार में डूब रही है, कत्ल हुआ है सर-ए-आम, पर तू मेरा कातिल नहीं है।

जिंदगी जिस राह पर चल रही है, उसकी कोई मंजिल नहीं है, कश्ती साहिल पे थी सही, मजधार में डूब रही है, कत्ल हुआ है सर-ए-आम, पर तू मेरा कातिल नहीं है।

मन को सम्भाल कर रखा है तेरी यादों को सहेज कर रखा है आँख में आँसू रोज आने लगे हैं, क्योंकि जो कल मेरा था वो आज किसी और का हो चुका है।

पियक्कड़ों के शहर में शरबत ढूंढ रहा हूं खारे सागरों से मीठा पानी पुकारता रहा हूं अपने हाथों से अंजुली भर के पानी पिलाती हो मुझे मैं वही छोटा सा तालाब अपने घर रोज चाहता […]

छुपाकर ही रखना बेबसी, मानुष ! दिल ए इज़हार मत करना, कर लेना बातें,परछाईं से अपनी, जमाने को दीदार मत करना, और बैठे हैं लोग खोल कर कानों को, दर्द ए इक़रार मत करना, माना […]

रौशनी से नहा रहा है आज नूर महल, मुद्दत बाद निकला है चाँद मेरे शहर मे । ए फीज़ा तुझे है काली घटा की कसम, नज़र न लगाना तू मेरे नूर महल में।।

अब आ ही गए हो तुम तो दुश्मन की जरूरत ना रहेगी बैठे बैठे बहुत वक़्त गुजर गया लगता है अब फुरसत ना रहेगी नाम तुम्हारा भी सुना था बड़ा देखने की हसरत अधूरी ना […]

काली मुलायम उड़ती जुल्फें तेरी, इश्कबाज़ों पे कयामत ढाती है। जब चले तू खुली वादियो में, घटा की नियत भी बदलती है।।

जख्मों को हमारे वह कुरेदते जा रहे हैं, कुछ इस तरह वह मुझे आजमा रहे हैं। मेरी रूह में सांस धुंधली हुई जाती, हम उनकी मोहब्बत के कर्जदार होते जा रहे हैं।

अभिमन्यु नहीं है मगर चक्रव्यूह वैसा है कहते नहीं बनता जीवन ये कैसा है खड़े हैं कुरुक्षेत्र में लड़ने के लिए कमाना और बचाना चाहते पैसा है

यादों की मरहम भी क्या मरहम है। बेरहम भी मरहम पर जीने लगे है।। काश.. यह मरहम मर्ज़ नहीं होते। हम और आप आज कैसे जी पाते।।

धार्मिक कैसे कहे जो धर्म के नाम पर लड़ जाते हैं मत पाने के लिए कुछ लोग दंगे करवाते हैं चोला पहनने से कोई संत नहीं होता धार्मिक वो है जो प्रेम के दीपक जलाते […]

तू रहे आबाद कोई गम ना हो तेरी आंखें दर्द से कभी नम ना हो हमनें बहुत देखें हैं अपने जीवन में दुख ईश्वर से प्रार्थना है तेरे जीवन में वैसा कभी मंजर ना हो।

आजकल सावन में सारहीन अकविताओ का प्रभाव हो गया है शायद श्रेष्ठ कवि होने का दावाव हो गया है कवियों का मौन कुछ कहता है मन में भी कोरोना का घेराव हो गया है

तुम्हारी नाराजगी को मैं हरगिज समझती हूं अपनी गलतियों को भी खूब समझती हूं पर इंसान हूँ गलती तो हो ही जाती है अपनों से ही तो शिकायत जाती है

न जाने कब घर से बाहर निकल पाएंगे कब तक कोरोना योद्धा मारे जाएगे दिल की धड़कन बढ़ जाती है समाचार सुन आखिर कब तक लोग सदा के लिए सो जाएगे

पैसा कमाने के चक्कर में अपनो को भूल गए मिल गए पैसे तो सेठ जैसे फूल गए सब कुछ नहीं है पैसा एहसास हुआ जब हम भगवान् की स्कूल गए