नफरत नहीं उगेगी यहां प्रेम बोया जाता है संप्रदाय है नहीं जो भाई को लड़ाता है सज्जन का वेश लेकर रावण है फिर चला होगा न हरण सीता को मारना भी आता है और

हर बार पड़ी जिसको मुह की खानी है पर छोडता नहीं तू क्यूँ शैतानी है अस्तित्व ही मिट जाएगा धरा से तुम्हारा इक्कीसवीं सदी के हम हिंदुस्तानी है

जिसने सदा ही शांति का संदेश दिया है विश्व गुरु के पद पर आसीन किया है आए कई तूफान जिनका सामना किया भारत ने सुधा देकर भी विष को पिया है

मानो अगर मानव संसार ही परिवार है फिर क्यूँ उठा रहे बंदूक औ तलवार है इंसानियत के नाते सहयोग सबका करना कर्तव्य कर संसार में करना तुम्हें अधिकार है

अपनो से कैसी प्रतियोगिता हम हार जाएंगे आँगे बढ़ेगे अपने हम मल्हार गाएंगे तुम्हारी ऊंचाइयों की छाँव में रहकर हम जीने के लिए तुमसे उपहार पाएंगे

वो भी योद्धा है जो जंग के मैदान में हार जाते हैं पूंछता नहीं कोई समाज वाले भी मार जाते हैं सहानुभूति की जरूरत है हारे हुए योद्धा को पा जाए सहारा तो मंजिल के […]

मुह जो नहीं कह सकता वो कलम कहेगी जुल्म होगा तो चुप नहीं रहेगी कलम को मत मानो कमजोर हथियार अत्यचारियों के रक्त की धारा बहेगी

कविता विचारों को व्यक्त करने का बहाना है कविता सच्चाई को सुनना और सुनाना है कविता अक्सर बन जाती है अपने आप कविता संसार से रागात्मक संबंध बनाना है

एक रोटी के लिए अक्सर कुत्ते लड़ जाते हैं आदमी वो है जो मिलबाँट कर खाते हैं आदमी वो है भूखे रहकर मां की तरह खाते हैं बाद में पहले खिलाते हैं

रिमझिम रिमझिम बरस रहा पानी है चल रही शीतल हवा शाम ये सुहानी है हरी हरी घास से धरती करे मुस्कान कह रही प्रिय तम से मिलने की कहानी है

परिवर्तन प्रकृति का नियम है बदल जाएगा कोरोना संसार से सदा के लिए भाग जाएगा फिर से पटरी में दौड़ेगी समय की ट्रेन इंतजार कर फिर से हँसेगा और मुस्कुराएगा

दुख दर्द किसको सुनाए सब अपने मे खोए हुए हैं बुरा सपना देखकर जागे हम सब सोए हुए हैं मन का बोझ हल्का होता कुछ बाते करने से गैरों का क्या कहना जब अपनो से […]

गम के दौर में भी खुशी खोज लेना है बांट ले दुख दर्द अपनो का साथ देना है घर में हंसी खुशी का वातावरण रहे डूबे न नाव करना तैयार एक सेना हैं

घर की चारदीवारी से बाहर कब जाएंगे कोरोना से हार गयी जिंदगी इसे कब हराएंगे गति रुक गई है दुनिया की प्रश्न गूंजते हौसला के पंख फिर से कब आयेंगे

जारी रहता है जीवन में समस्याओ का आना जाना मुकाबला करो इनका मत बनाओ बहाना संघर्ष बिना जीवन में सौंदर्य नहीं आता गिरना स्वभाव है मगर फिर से संभल जाना

कर्म करते रहिए कभी बेकार नहीं जाते हैं आज नहीं तो कल कर्मो का फल पाते हैं हर काम के बदले पैसा न लीजिए रखिए सदा ही याद जो संस्कार सिखाते हैं

ये देश है हमारा इसे हमे ही बचाना है दअप‍हतर में हो या घर में मास्क तो लगाना है अनमोल है जीवन और देश हमारा सहयोग से सबके महामारी को हराना है

बने हुए रास्ते तकदीर वाले पाते हैं हम तो चलते भी हैं और रास्ते बनाते हैं शायद कोई करे पदचिन्ह का अनुकरण कांटो को हटाते हैं और फूल बिछाते हैं

मत सुनो उनकी जो नकारात्मकता से भरे है पतझड़ में तलाश करो अभी भी कुछ पेड़ हरे है भीम की तरह कमजोरियों में प्रहार करते रहे हौसला बढ़ाओ उनका जो घन की घोर घटाओं से […]

मत घबराओ सोचकर सांपों का डेरा हो गया है हैरान मत हो जानकार सपेरा हो गया है मत तलाश करो अंधेरे में दीपक और टार्च की जागो तो सही देश में सवेरा हो गया है

छिप गया है सूरज सवेरे फिर आएगा झूठ मत बोलो जमाना जान जाएगा झूठ को बना लोगे व्यवसाय तुम अगर सदा के लिए लोगों का विश्वास चला जाएगा

रिश्वत के बिना आजकल काम नहीं होते हैं सब योजना बेकार है जब दाम नहीं होते हैं बिगड़ी बनाने वाले होते हैं रिश्वत खोर कहते हैं सब कुछ दौलत अब राम नहीं होते हैं

बेटी के बाप के घर में दहेज का दानव आया है छीन कर खुशियाँ उसकी अपना घर बसाया है इक्कीसवीं सदी में भी जारी है ये अभिशाप बेटी के दोनों पक्षों को जिसने नर्क बनाया […]