नफरत नहीं उगेगी यहां प्रेम बोया जाता है संप्रदाय है नहीं जो भाई को लड़ाता है सज्जन का वेश लेकर रावण है फिर चला होगा न हरण सीता को मारना भी आता है और
नफरत नहीं उगेगी यहां प्रेम बोया जाता है संप्रदाय है नहीं जो भाई को लड़ाता है सज्जन का वेश लेकर रावण है फिर चला होगा न हरण सीता को मारना भी आता है और
हर बार पड़ी जिसको मुह की खानी है पर छोडता नहीं तू क्यूँ शैतानी है अस्तित्व ही मिट जाएगा धरा से तुम्हारा इक्कीसवीं सदी के हम हिंदुस्तानी है
हर बुर. कर्मो का परिणाम आएगा बोया अगर बबूल आम नहीं खाएगा सोच समझ कर ही कदम बढ़ाना भली राह चल वरना पछताएगा
शांति और एकता की जंग को लडा अहिंसा और प्रेम को जिसने किया बड़ा पिता कहकर जिनका सम्मान करते हैं जग में न दिखता कोई गाँधी जी से बड़ा
जिसने सदा ही शांति का संदेश दिया है विश्व गुरु के पद पर आसीन किया है आए कई तूफान जिनका सामना किया भारत ने सुधा देकर भी विष को पिया है
मां की ममता का कोई मोल नहीं, _________________________ कुदरत के नवाजे इस तोहफ़े से कोई तोहफा अनमोल नहीं।
मेरी तन्हाईयों को अब और ना सताओ मुझे रातों में अब और ना जगाओ यूँ तो हम भी तुम्हें इश्क करते हैं पर बार-बार मेरे दिल को यह एहसास ना दिलाओ।।
मानो अगर मानव संसार ही परिवार है फिर क्यूँ उठा रहे बंदूक औ तलवार है इंसानियत के नाते सहयोग सबका करना कर्तव्य कर संसार में करना तुम्हें अधिकार है
पाया है मानव तन तो उपकार कीजिए छोटे बड़े सभी से ही प्यार कीजिए उदर भरना जानवार भी जानते हैं खूब नफरत से नहीं प्रेम से अधिकार कीजिए
मिलता रहे प्यार अपनो से दूर ना हो कर न सके बात इतना मजबूर न हो समझे एक दूसरे के जज्बात को किसी भी परिस्थिति में क्रूर ना हो
मत करो प्रार्थना बाधाओं को आने दो मुकाबला करो और जाने दो हिम्मत रखो तो बाधा॒एं झुक जाती है कह दो बाधाओं से रोयेंगे नहीं गाने दो
नदी के किनारे है जीत और हार नदी का बहता पानी है तुम्हारा प्यार नौका की जरूरत नहीं साथ रहो पार कर जाएंगे नदी की मझधार
अपनो से कैसी प्रतियोगिता हम हार जाएंगे आँगे बढ़ेगे अपने हम मल्हार गाएंगे तुम्हारी ऊंचाइयों की छाँव में रहकर हम जीने के लिए तुमसे उपहार पाएंगे
मुश्किलों का दौर है घबराए गे नहीं घर के बाहर अभी जाएगे नहीं छुआ छूत की बीमारी आई है सावधान रहेगे तो पछताएगे नहीं
वो भी योद्धा है जो जंग के मैदान में हार जाते हैं पूंछता नहीं कोई समाज वाले भी मार जाते हैं सहानुभूति की जरूरत है हारे हुए योद्धा को पा जाए सहारा तो मंजिल के […]
मुह जो नहीं कह सकता वो कलम कहेगी जुल्म होगा तो चुप नहीं रहेगी कलम को मत मानो कमजोर हथियार अत्यचारियों के रक्त की धारा बहेगी
सहयोग, श्रम, शांति बहुत जरूरी है करते रहे प्रयास भले मजबूरी है मानवता के आभूषण है तीनो इनके बिना मानवता अधूरी है
कविता विचारों को व्यक्त करने का बहाना है कविता सच्चाई को सुनना और सुनाना है कविता अक्सर बन जाती है अपने आप कविता संसार से रागात्मक संबंध बनाना है
एक रोटी के लिए अक्सर कुत्ते लड़ जाते हैं आदमी वो है जो मिलबाँट कर खाते हैं आदमी वो है भूखे रहकर मां की तरह खाते हैं बाद में पहले खिलाते हैं
मन को परेशान मत करो गंदे विचारों से सीख लिया करो कुछ नदी के किनारों से मस्तिष्क में आएगे भूकंप के झटके बच कर रहना चाहिए घर की दीवारों से
रिमझिम रिमझिम बरस रहा पानी है चल रही शीतल हवा शाम ये सुहानी है हरी हरी घास से धरती करे मुस्कान कह रही प्रिय तम से मिलने की कहानी है
परिवर्तन प्रकृति का नियम है बदल जाएगा कोरोना संसार से सदा के लिए भाग जाएगा फिर से पटरी में दौड़ेगी समय की ट्रेन इंतजार कर फिर से हँसेगा और मुस्कुराएगा
आजकल मन बहुत उदास है ना जाने इसे किसकी तलाश है मुश्किल भरे दौर को बनाना खूबसूरत और खास है
दुख दर्द किसको सुनाए सब अपने मे खोए हुए हैं बुरा सपना देखकर जागे हम सब सोए हुए हैं मन का बोझ हल्का होता कुछ बाते करने से गैरों का क्या कहना जब अपनो से […]
गम के दौर में भी खुशी खोज लेना है बांट ले दुख दर्द अपनो का साथ देना है घर में हंसी खुशी का वातावरण रहे डूबे न नाव करना तैयार एक सेना हैं
घर की चारदीवारी से बाहर कब जाएंगे कोरोना से हार गयी जिंदगी इसे कब हराएंगे गति रुक गई है दुनिया की प्रश्न गूंजते हौसला के पंख फिर से कब आयेंगे
मुस्किल घड़ी में भी हम घबराए नहीं भगवान् से दूर कभी जाए नहीं वक्त बुरा है इंतजार कर रहे हैं क्यूँकि अभी अच्छे दिन आए नहीं
मत गंवाओ जीवन खाने और सोने में मत गंवाओ जीवन हँसने और रोने में हर काम का हिसाब देना पड़ेगा जान मतलब तो कुछ निकाल इंसान होने में
क्या पाया नहीं तूने क्या माँग रहा है कब का हुआ सवेरा अब जाग रहा है भगवान् के सम्मुख ख़ुद का कर समर्पण रनछोण दास जैसे क्यूँ भाग रहा है
जारी रहता है जीवन में समस्याओ का आना जाना मुकाबला करो इनका मत बनाओ बहाना संघर्ष बिना जीवन में सौंदर्य नहीं आता गिरना स्वभाव है मगर फिर से संभल जाना
मत डरो रात से सुबह आएगी सदा नहीं रहा कोई कैसे रह जाएगी गम में डूबी हुई दुनिया फिर से खिलखिलाएगी और मुस्कुराएगी
बरसात के पानी को मत व्यर्थ बहाना जलाशय और सोक्पीट खूब बनाना पानी बिना सब सून कमी दूर कीजिए हरहाल में जल का स्तर है बढ़ाना
वतन में भ्रष्टाचार भारी है सांसो की चल रही मारा मारी है दे नहीं सकते जो ऊंचे ऊंचे दाम दुनिया से जाने की उनकी ही बारी है
कैसे करें विश्वास लोग घात करते हैं सावधान उनसे जो मीठी बात करते हैं एक विश्वास ही जिन्दगी जीने का सहारा था लोग सोने के हिरण जैसे मुलाकात करते हैं
कर्म करते रहिए कभी बेकार नहीं जाते हैं आज नहीं तो कल कर्मो का फल पाते हैं हर काम के बदले पैसा न लीजिए रखिए सदा ही याद जो संस्कार सिखाते हैं
ये देश है हमारा इसे हमे ही बचाना है दअपहतर में हो या घर में मास्क तो लगाना है अनमोल है जीवन और देश हमारा सहयोग से सबके महामारी को हराना है
बने हुए रास्ते तकदीर वाले पाते हैं हम तो चलते भी हैं और रास्ते बनाते हैं शायद कोई करे पदचिन्ह का अनुकरण कांटो को हटाते हैं और फूल बिछाते हैं
सत्ता के मद में हो गए चूर चूर हैं जनता से आजकल वो दूर दूर हैं भर लो उड़ान कितनी ऊँची आकाश में आना पड़ा धरा में जितने भी शूर हैं
माना कि तुम इस बार फिर से हार गए हो बस जीतने की सोचो मझधार गए हो साहस में कमी अपने आने नहीं देना हर हार से कुछ कमियाँ सुधार गए हो
नहीं मिल रही राह तो बनाकर तुम चलो सुन लो सभी की सुनाकर तुम चलो चलना ही जिंदगी है यह भूलना नहीं मंजिल अभी दूर है सब भुलाकर तुम चलो
मत सुनो उनकी जो नकारात्मकता से भरे है पतझड़ में तलाश करो अभी भी कुछ पेड़ हरे है भीम की तरह कमजोरियों में प्रहार करते रहे हौसला बढ़ाओ उनका जो घन की घोर घटाओं से […]
मत घबराओ सोचकर सांपों का डेरा हो गया है हैरान मत हो जानकार सपेरा हो गया है मत तलाश करो अंधेरे में दीपक और टार्च की जागो तो सही देश में सवेरा हो गया है
छिप गया है सूरज सवेरे फिर आएगा झूठ मत बोलो जमाना जान जाएगा झूठ को बना लोगे व्यवसाय तुम अगर सदा के लिए लोगों का विश्वास चला जाएगा
रिश्वत के बिना आजकल काम नहीं होते हैं सब योजना बेकार है जब दाम नहीं होते हैं बिगड़ी बनाने वाले होते हैं रिश्वत खोर कहते हैं सब कुछ दौलत अब राम नहीं होते हैं
बेटी के बाप के घर में दहेज का दानव आया है छीन कर खुशियाँ उसकी अपना घर बसाया है इक्कीसवीं सदी में भी जारी है ये अभिशाप बेटी के दोनों पक्षों को जिसने नर्क बनाया […]
हमें तो करोना ने लुटा, तक़दीर तो बहुत बलवान था। एक दीप गलती से जली वहाँ, जहाँ आंधी तूफान था।।
बदलते रिश्ते में हमने अपनो से नफरत देखी है। खुदा की कसम ए दोस्त बहुत ही नाइंसाफ़ी है।।
बापू की नहीं सुनते आजाद की सुन ले तू है गुलाब तो काँटे सभी चुन ले नरम गरम दल में अब एकता हुई अब नाश हो आतंक का चलना है ये धुन ले )(2) एककीस्वी […]
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