Sher-o-Shayari

बहुत दिनों बाद

बहुत दिनों बाद सावन के द्वार आया पहले की तरह इसको अपना ही पाया सभी कवि लोगों को नमस्कार है सावन की आयी जो बहार है »

और एक दिन

और एक दिन दे दिये शब्द सारी व्यथाओं को लिख डाली एक कविता अपनी पहली कविता … »

कभी लहरों को गौर से देखा है

समंदर के किनारे बैठे कभी लहरों को गौर से देखा है एक दूसरे से होड़ लगाते हुए .. हर लहर तेज़ी से बढ़कर … कोई छोर छूने की पुरजोर कोशिश करती फेनिल सपनों के निशाँ छोड़ – लौट आती – और आती हुई लहर दूने जोश से उसे काटती हुई आगे बढ़ जाती लेकिन यथा शक्ति प्रयत्न के बाद वह भी थककर लौट आती .बिलकुल हमारी बहस की तरह !!!!! »

लफ्ज़ो को बढ़े करीने से सजाया है

लफ्ज़ो को बढ़े करीने से सजाया है इस नज़्म में नूर ए इश्क़ को बहाया है कुछ समन लाकर रख दिये है इसके करीब अपने होठों से हमने इसे गाया है »

वही पुरानी तसल्ली

कोई साथी नहीं अपना, बेगाने लाख होते हैं , जो होते हैं दिलो के आग, वही तो राख होते हैं। »

शायर Rajneeshy

मैं वो तस्वीर नहीं जो आइने से गुजर जाता हूँ खुश्बू भी नहीं जो लोगो मे बिखर जाता हूँ बिखरती हैं शामे दिन निकलने से पहले मै शायरी हूँ जो हर पन्ने पे उतर जाता हूँ »

उनके होने से

उनके होने से ही मौसम में बहार आ जाती है अहसास ए इश्क से रूह भी सिहर जाती है »

नारी की दशा बहोत ही विचित्र सी है

नारी की दशा बहोत ही विचित्र सी है है देवी पर क्यों अपवित्र सी है ? है हर जीवन का स्रोत… पर जीते जी स्वयं मृत सी है »

कसम से हर जुबाँ से दर्द मिला

कसम से हर जुबाँ से दर्द मिला कभी नज़रों से वो दर्द मिला न जाने कब बदलेगा ये हालात नारी होने का हर दर्द मिला »

मै अपने साये में धूप लेकर चलती हूं

मै अपने साये में धूप लेकर चलती हूं तेरे लिये छाव फैलाये चलती हूं तू कभी मिल जाता है मुझे अगर तेरे पाव के नीचे हाथ बिछाये चलती हूं »

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