Category: शेर-ओ-शायरी

  • शेर

    नजाने कब ख़तम होगी ज़द्दो ज़हद ज़िन्दगी की,
    अभी टॉक उलझा हूँ ज़िन्दगी क सवालो मे।

    अंदाज़ उसका बे मिसाल था,बेवफाई उसने की,
    मगर मई बदनाम था।

    ज़िन्दगी ने बहोत कुछ सीखा दिया मुझक।,
    इस छोटी सी उम्र में,
    किया ख़ुशी किया ग़म,कोण अपना कोण पराया,
    बुरे वक़्त में कोई अपना नहीं होत।

    ज़िन्दगी होने हमेसा अपनों के लिए गुज़ारी है,
    चंद कागज़ के टुकड़े ने पराया कर दिय।

    ज़िन्दगी एक खोवाइशों का समंदर है,
    हर खोवैसे पूरी हूँ ये ज़रूरी तो नही।

  • उदास चेहरे

    उदास रहा है चेहरा उदास रहेगा
    तुझे खो कर के ये कभी ना हँसेगा

  • आसमां भी तेरे आगे झुक जाएगा

    दुनिया क्या कहेगी ये सोचेगा तो रुक जाएगा
    सफलता के लिए तपना पडे़गा , जितना तपेगा उतना निखर जाएगा
    मेहनत के बल पर ये जमाना क्या आसमां भी तेरे आगे झुक जाएगा

  • Aarzu

    Aarzu

    Mana ki Zindagi ek kowaishon ka samandar hai,har khowaishe puri hon ye zaruri to nahi.
    ———————-
    Na jane kab khatam hogi jaddo-zahad zindagi ki,abhi talak uljha hun zindagi k sawalo me.

  • कितनी बार सोंचा….

    कितनी बार सोंचा तुम्हारे बारे में ना सोंचूं,
    यही सोंचते सोंचते रात हो गई।

  • Sabka bhla soch k

    Sabka bhla soch k itna achha krte krte;
    Apna itna bura kr gyi, pta hi na chla…
    Ek naariyal ka kirdaar tha mera, Kyu mera vajood unhe pathar-sa dikha…
    Dil roya andron bhot, maano kasoor mera bhi tha;
    pr bhla to humesha apno ka hi chupa rehta,
    Fir kyu mere apno ko mere baare mein itna bhi na pta chla… #Sh€€t@l

  • saliqe se hawaon mein jo khushbu ghol sakte hain

    सलीक़े से हवाओं में जो ख़ुशबू घोल सकते हैं
    अभी कुछ लोग बाक़ी हैं जो उर्दू बोल सकते हैं

    ~ मुहम्मद आसिफ अली

  • मुस्कुराना तो हम भी नहीं छोड़ेंगे।

    पैर थक गए हैं तेरी ठोकरों से,
    ए जिंदगी!
    मगर कहता! हौसला इन पैरों का,
    ज़फ़र तो हम भी नहीं छोड़ेंगे।
    और तेरे सितमों का कहर,
    पहाड़ ही क्यों ना बन जाए,
    मुस्कुराना तो हम भी नहीं छोड़ेंगे।
    — मोहन सिंह मानुष

  • बारिश की फुहार

    बारिश की एक फुहार से,

    सुखे पेड़ में भी जान आ जाती है

    और जब होता है जिक्र प्यार का,

    मुझे मेरी मां याद आ जाती है।
    —मानुष

  • तेरे नाम

    तकलीफ अंदर के शोर से है,
    तनहाई तो यूँ ही बदनाम होती है।
    गिरता है खारा जल जब भी ऑंख से,
    वह सुबह वह शाम, तेरे ही नाम होती है॥
    _______✍गीता

  • इन्तज़ार

    इन्तज़ार की भी एक हद होती है,
    ————————–
    आज इन्तज़ार की सारी हदें पार कर दी हमनें…

  • सही गलत

    तुम भी सही थे और हम भी सही थे,
    बस समय की मार थी और
    सारे पैतरे गलत थे।

  • तकलीफें

    हम अपनी तकलीफें किसी को बता नहीं सकते,
    कोई तमाशा ना बना दे
    मेरी बेबसी का
    इसलिए किसी को दिल के छाले दिखा नहीं सकते।

  • नासमझ

    मेरी शराफत को लोग मेरी
    कमजोरी समझते हैं
    नासमझ है वह लोग जो मुझे नासमझ समझते हैं।

  • संस्कार

    गूंगी नहीं हूं मैं
    मुझे भी बोलना आता है
    बस मेरे संस्कार मुझे मौन कर देते हैं।।

  • कातिल

    जिंदगी जिस राह पर चल रही है,
    उसकी कोई मंजिल नहीं है,
    कश्ती साहिल पे थी सही,
    मजधार में डूब रही है,
    कत्ल हुआ है सर-ए-आम,
    पर तू मेरा कातिल नहीं है।

  • कातिल

    जिंदगी जिस राह पर चल रही है,
    उसकी कोई मंजिल नहीं है,
    कश्ती साहिल पे थी सही,
    मजधार में डूब रही है,
    कत्ल हुआ है सर-ए-आम,
    पर तू मेरा कातिल नहीं है।

  • स्वयं की कमियाँ

    एक दूसरे पर उंगली उठाते-उठाते
    जीवन गुजर जाता है,

    पर एक कवि ही है जो स्वयं की कमियों को ढूंढ पाता है।

  • मन

    मन को सम्भाल कर रखा है
    तेरी यादों को सहेज कर रखा है
    आँख में आँसू रोज आने लगे हैं,
    क्योंकि जो कल मेरा था वो आज
    किसी और का हो चुका है।

  • कहाँ से देगा

    जो सावन में भी न मिल पाया
    वो ये माह कहां से देगा

    इस महीने का तो नाम ही “सितम-बर” है
    ये रहम कहां से देगा

    मेरा हकीम तो खुद बीमार है
    वो मरहम कहां से देगा

    “तुम भी मुझसे प्यार करते हो”
    इतना सुकूं कोई और वहम कहां से देगा

  • दुनियादारी

    पियक्कड़ों के शहर में शरबत ढूंढ रहा हूं
    खारे सागरों से मीठा पानी पुकारता रहा हूं
    अपने हाथों से अंजुली भर के पानी पिलाती हो मुझे
    मैं वही छोटा सा तालाब अपने घर रोज चाहता हूं

    जो सीखा दुनियां से वही आजमा रहा हूं
    इन आँख के अंधों के शहर से कहीं दूर
    एक गांव है अक्ल के अंधों का
    वहीं कुछ सपने थोक के भाव बेच रहा हूं

    एक वक्त था कि वक्त भी नहीं था खुद के लिए
    आज बेवक्त यूँ ही जिए जा रहा हूं
    थक गया इन घड़ियों की दुकानों में ढूंढते ढूंढते
    एक अरसे से अच्छा सा वक्त ढूंढ रहा हूं ।

  • दिल ए इज़हार मत करना।

    छुपाकर ही रखना बेबसी,
    मानुष !
    दिल ए इज़हार मत करना,
    कर लेना बातें,परछाईं से अपनी,
    जमाने को दीदार मत करना,
    और बैठे हैं लोग खोल कर कानों को,
    दर्द ए इक़रार मत करना,
    माना कि मन हल्का होता है
    जताने से,
    मगर बहुत मशग़ूल है लोग आजकल उड़ाने में,
    हमदर्द तो अब अपनों में नहीं मिलते
    गैरों पर भी विश्वास मत करना,
    दर्द ए इक़रार मत करना।

  • आईना और तदबीर

    ऐ दोस्त दुनिया में प्रेम करने वालों की तकदीर बदलती रहती है।
    आईना तो वही रह जाता है मगर तदबीर बदलती रहती है।।

  • मेरे लिए

    कब से उठाए बैठी हूँ अपनी घूंघट
    उनके दीदार के लिए ।
    एक वो है ख्वाबों में आशियाना तलाशते है मेरे लिए।।

  • तेरे लिए

    यहां जान बहुत सस्ती है,
    नहीं दुंगा!
    मैं जीने आया हूं तेरे लिए।
    और चांद तारों का क्या हैं करना!
    मैं खुशियां लाया हूं तेरे लिए।
    — Manush

  • अश्क और लिबास

    अश्क और लिबास

    शायद मेरे ज़नाज़े के पीछे
    अश्क बहाती हुई कोई आ रही है।
    एक झलक देखें तो किस लिबास में
    मेरी ज़नाज़े के संग आ रही है।।

  • फुर्सत

    फुर्सत

    एक सुबह चाय ने मुझ से कहा
    फुर्सत हो तो क्यों नहीं बैठ जाते।
    तुम्हारे मन मस्तिष्क को हम
    अंदरुनी ताजगी से भर देते।।

  • मंजिल मिल गई

    मंजिल मिल गई

    हम उन पर शेर लिखते गए
    हमज़ेली भी दीवानी होती गई।
    ख्वाबों के सिलसिला ऐसी चली
    ज़िन्दगी की नई मंजिल मिल गई।।

  • नूर महल

    नूर महल

    रौशनी से नहा रहा है आज नूर महल,
    मुद्दत बाद निकला है चाँद मेरे शहर मे ।
    ए फीज़ा तुझे है काली घटा की कसम,
    नज़र न लगाना तू मेरे नूर महल में।।

  • ज़ौक में

    अब आ ही गए हो तुम तो
    दुश्मन की जरूरत ना रहेगी
    बैठे बैठे बहुत वक़्त गुजर गया
    लगता है अब फुरसत ना रहेगी
    नाम तुम्हारा भी सुना था बड़ा
    देखने की हसरत अधूरी ना रहेगी
    हमसे मिलना तभी जब बड़े गुस्से में हो
    जौक में मिल गए तो दुश्मनी की आदत न रहेगी

    जौक:मजे

  • मेरे अपने

    हम गिरें भी तो वहीं
    जहां इर्द-गिर्द मेरे अपने थे।
    शायद ना थी खबर हमें
    रेत पर बने मेरे सपने थे।
    वीरेंद्र

  • दो गज़ ज़मीन

    अश्कों के समंदर में ए खुदा
    मुझे सिर्फ दो गज ज़मीन दे दे।
    गर करने लगे वह अपनो से बेवफ़ाई
    तब,ज़माना मुझे उसी में दफ़ना दे।।

  • नियत

    काली मुलायम उड़ती जुल्फें तेरी,
    इश्कबाज़ों पे कयामत ढाती है।
    जब चले तू खुली वादियो में,
    घटा की नियत भी बदलती है।।

  • कर्जदार होते जा रहे हैं

    कर्जदार होते जा रहे हैं

    जख्मों को हमारे वह
    कुरेदते जा रहे हैं,
    कुछ इस तरह वह
    मुझे आजमा रहे हैं।
    मेरी रूह में सांस
    धुंधली हुई जाती,
    हम उनकी मोहब्बत के
    कर्जदार होते जा रहे हैं।

  • गुरूर है मुझे

    गुरूर है मुझे

    गुरूर है मुझे अपने
    चांद से चेहरे पर,
    किसी की आरजू मुझे
    बेदाग करती है।

  • मेरा साया

    मेरा साया

    तू ऐसा रम गया मन में
    ना कुछ अब तो पराया है,
    मैं तेरी रूह जैसी हूँ और
    तू मेरा साया है।

  • मेरा गीत बन कर तो देख….

    मेरा गीत बन कर तो देख….

    कभी झांक कर देख मेरी नजरों में
    हो जाएगा तू दीवाना।
    एक बार दिल में आकर तो देख
    आ तुझे मैं लबों से छू लूं
    तू कभी मेरा गीत बन कर तो देख।

  • मुस्कान

    उफ़ ये बेरूखी वो तो इक झलक के प्यासे हैं
    किस्मत से कमज़ोर हैं मुस्कान भी न पा सके

  • खेल

    जिंदगी इक खेल है कोई पास कोई फेल है
    शिकायत न रहे किसी से सभी से मेरा मेल है

  • तारीफ

    उनकी तारीफ में कोई कैसे कुछ लिखे
    नजरों को उनसे हटना ही जब मंजूर नहीं

  • अभिमन्यु नहीं है

    अभिमन्यु नहीं है मगर चक्रव्यूह वैसा है
    कहते नहीं बनता जीवन ये कैसा है
    खड़े हैं कुरुक्षेत्र में लड़ने के लिए
    कमाना और बचाना चाहते पैसा है

  • राम नाम गाए

    राम चरित मानस को मन में दोहराए
    मिल कर के लोग सब सीता राम गाए
    कलयुग में केवल ये नाम ही आधार है
    सुमिर सुमिर भव से पार उतर जाए

  • भगवान् हमारे

    बनाए रखना हिम्मत भगवान् हमारे
    आते रहे हरदम हम आपके द्वारे
    भक्तो के रक्षक भगवान् आते हैं
    मीरा और राधा के जैसे नहीं पुकारे

  • तूफान

    आते नहीं तूफान तो कश्ती पार हो जाती
    जीत जाते जंग नहीं हार हो जाती
    आते रहे तूफान अब तैर जाएंगे
    सोचा नहीं था दुनिया बीमार हो जाती

  • मास्क लगाए

    अंधेरा बहुत है आओ दीपक जलाएं
    कोरोना महामारी को मिलकर हराए
    दूर रहने में ही बचेगी जान अब
    बिना संकोच के हम सभी मास्क लगाए

  • शब्द

    सम्हाल कर बोले शब्द वापस नहीं आएंगे
    पता है आपको कितना दिल दुखाएगे
    बोलो गे अगर मीठे शब्द तो
    घाव भरने वाला मरहम बन जाएगे

  • मतलब के यार

    मतलब कि दुनिया में मतलवी यार मिले
    एक बार नहीं हर बार है मिले
    दुश्मन अच्छे हैं ऎसे दोस्तो से
    हम उम्मीद करते हैं उनसे सच्चा प्यार मिले

  • तलाश

    जिस्म के कद्रदान तो कई होंगे,
    हमें तो रूह-ए-उन्स की तलाश है।

  • दोस्ती

    कछुआ और खरगोश दौड लगाएगे
    अधूरे हैं दोनों मंजिल कैसे पायेगे
    मुश्किलें हो जाएगी आसान
    जब दोनों दोस्त हो जाएंगे

  • कपूत

    सब कुछ मान कर जो पालते रहे
    बीपत्तियों का काँटा निकालते रहे
    बुढ़ापा मे वो असहाय हो गए
    कपूत घर से बाहर निकालते रहे

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