शेर-ओ-शायरी

गुज़रे पल..

गुज़रे पलों को याद ना कर, ख़ुदा से उनकी फ़रियाद ना कर जो नसीब में है वो होकर रहेगा, तू कल के लिए… अपना आज बरबाद ना कर.. »

*वही एहसास*

थकान नहीं मुझे,आराम चाहिए तू दूर नहीं, मेरे पास चाहिए आंख लग जाए आज जी भर के मेरी, मां, तेरी गोदी का वही एहसास चाहिए.. *****✍️गीता »

दिल का दीप

न होती हर रात अमावस की न होती हर रोज दिवाली है। जब दीप जले दिल का दिलबर समझो उस रोज दिवाली है।। »

दीदार

अब चलें काफी रात हो गई । आपसे मेरी दो बातें हो गई।। वक्त और ठंड के तकाजा है। चलो आप से दीदार तो हो गई।। »

मैं भी चौकीदार!

इश्क़ ने हमें बर्बाद किया; फिर भी दिल ने; खुद को आबाद किया।-२ अरे! ना आती है , तो ना आए ! नींदें रात को, मैं भी चौकीदार ! गर्व से! मोदी जी को याद किया। »

मैखाने

मुखौटे से भरे हुए मैंखाने हैं…. किस पे भरोसा करें यहां तो अपने ही बेगाने हैं। »

*जज़्बात छिपाए बैठे हैं*

आज वो नज़र चुराए बैठे हैं, जज़्बात अपने छिपाए बैठे हैं, हमसे छिपा ना पाएंगे जज़्बात लेकिन, जाने क्यूं शर्त लगाए बैठे हैं .. *****✍️गीता »

निःशब्द

हम हर किसी में कमियां ढूंढते थे, जब आईने के सामने आए तो निःशब्द हो गये.. »

बेचैन से हैं हम

बहुत उंगली उठाते थे हम उस पर, आज वो चला गया तो भी बेचैन-से हैं हम.. »

वो इतना भी बुरा नहीं था

जब वो रोता हुआ घर से गया तो समझ आ गया हमको, वो इतना भी बुरा ना था जितना हम उसे समझते थे.. »

आँसुओं की परवाह

रो रहा था वो भी रो रहे थे हम भी.. लेकिन ना उसे हमारे आँसुओं की परवाह थी और ना हमें उसके जाने की.. »

वो रुक नहीं सकता था..

हालात इतने भी बुरे ना थे कि वो रुक नहीं सकता था, हम इतने भी मजबूर ना थे कि उसे रोंक नहीं सकते थे.. »

मुखौटे

मुखौटे लगा कर, आए हैं कुछ लोग महफ़िल में आज का, मज़मून क्या है.. *****गीता »

तहे-दिल से शुक्रिया

तहे-दिल से शुक्रिया ! मोहब्बत में जो रुसवा किया तुमने, ————————————————- हम तो बर्बाद हो जाते जो थोड़ा प्यार दे देते… »

बहाने ढूंढते हैं हम

तुमसे दूर जाने के बहाने बहुत हैं साहब!! ————————————————- पर तुम्हारे पास आने के बहाने ढूंढते हैं हम »

**बेचारा दिल**

ये बेचारा दिल बस तुम पर मरता है पागल है जो तुमसे इतना प्यार करता है तुम्हारी बेरुखी से तो मौत अच्छी है पर ये दिल एक तेरी ख्वाहिश में धड़कता है… »

दो दिलों का व्यापार

करता है कौन, किससे प्यार यहाँ ? प्यार तो है दो दिलों का व्यापार यहाँ… जिसमें अपनी पूंजी कोई और लगाता है पर उसका मुनाफा कोई और उठाता है… »

‘गुजरा वक्त’

वो आज कहने लगे हमसे लौट आओ फिर से मेरी जिन्दगी में बहार लौट आएगी… मैंने एक धुन में कहा- मैं गुजरा वक्त हूँ साहब जो घड़ी बीत गई फिर ना लौट आयेगी… »

पुरानी दास्तां

एक दिल कहता है, फिर एक मर्तबा किसी से इश्क़ कर। दूसरा दिल कहता है, ए नादान पुरानी दास्तां से तो डर।। »

महफूज

चल घटा जो हुआ इश्क़ में, शायद अच्छा ही हुआ। कम से कम नादान दिल, तीर ए नजर से तो बचा।। »

बेवजह

मुहब्बत में मुकाम तो मिलता है मुकद्दर वालों को। हम बेवजह ही आज़माए अपनी सोए मुकद्दर को।। »

गैरों को मोहब्बत

कितनी शिद्दत से हम तुझे चाहते थे तुझको अपना नसीब मानते थे.. ********************************* तुमने हमें छोंड़कर गैरों को मोहब्बत बक्शी पर हम तो फकत तुझे अपना मानते थे.. »

‘मेरा मजहब और मेरा खुदा’

क्या कहें अब जब तू खफा ‘मैं फकीर और तू खुदा’ इबादत में तेरी मिट गया मेरा मजहब और मेरा खुदा… »

मेरा मुकद्दर

ऐ खुदा ! क्यों है तू खफा किस बात की तू मुझे देता है सजा मेरा मुकद्दर रूठा मुझसे हमदम हुआ जबसे जुदा… »

मेरा वजूद

मेरे जज्बातों की कद्र कभी नहीं की उसने फकत आँसुओं की सौगात दी उसने हम उसी की खातिर मिट गये यारों! मेरे वजूद की कभी ना फिक्र की जिसने… »

हम कद्र करते हैं

भागते रहे अक्सर हम उन लोगों के पीछे जिन्हें हम प्यार करते थे ! पर कुछ हाथ ना आया सिर्फ मायूसी के सिवा अब बस हम उनकी कद्र करते हैं जो हमारी कद्र करते हैं… »

आसमान की ऊंचाई

पैर जमीं पर ही रहने दो मेरे क्योंकि अक्सर आसमान की ऊंचाइयों से अपने दिखाई नहीं पड़ते… »

साँसें

थोड़ी देर के लिए थम गई थीं साँसें जब रुक गया था वो चलते-चलते, मुड़कर देखा एक बार जब उसने हम सहम गये और मध्यम हो गई साँसें. »

हंसते हंसते

कोई उसे जान से भी ज्यादा चाहा था किसी बेवफा को। उसने पल में ही तोड़ दिए सपने हंसते हंसते किसी को।। »

मुझे यह गम नहीं

ए मेरे दोस्त मुझे यह गम नहीं कि तुम मेरे न हो सके, गम तो इस बात की है कि तुम मुझे कभी समझ न सके। »

“दिल का देवता”

यूं देखकर भी क्यों अनजान बनते हो देवता हो दिल के क्यों हैवान बनते हो मैं जानती हूँ तुम क्या हो क्यूं सबके सामने महान बनते हो.. »

वो कतराने लगे हैं

वो हमसे कतराने लगें हैं धीरे- धीरे दूर जाने लगे हैं दिल में उनके जगह नहीं बची है हमारे लिए, तभी तो हमसे नजरें चुराने लगे हैं… »

थी जुस्तजू दिल को मगर…

रास्ते के पत्थर समझ के, ठोकर मार कर चले गए वो। हम किनारे पे खड़े रहे, किसी के हो कर गुजर गए वो।। »

हाय रे किस्मत

खुद को जला के हम, अपनी प्यास कहाँ बुझा पाए। समंदर भी मुझे देख कर , अपनी धारा बदलती जाए ।। »

“बाँहों का हार”

दीदार करके उसका मैं पाक हो गई मेरी मोहब्बत से जिन्दगी आबाद हो गई करता रहा वो मेरे इजहार का इन्तजार पर मैं किसी और की बाँहों का हार हो गई..!! »

अब फुर्सत कहाँ

जाने क्या सोंचती रहती हूँ बस उसके ही खयालों में खोई रहती हूँ जिन्दगी अब फुर्सत कहाँ देती है अपनी उलझनों में ही उलझी रहती हूँ… »

बेपनाह

दिल टूट जाने के बाद भी प्यार है तुमसे ऐसा क्यों है नहीं जानती हूँ मैं बस इतना ही मालूम है मुझे कि आज भी बेपनाह तुझे चाहती हूँ मैं… »

सुरक्षा कवच

रावण जलाया तो क्या जलाया, दिल के रावण जलाओ तो जाने । तुम्हारी ढकोसला षडयंत्र को हम, अपनी सुरक्षा कवच क्यों माने।। »

नीली गहराई

चलो इश्क़ की दरिया में कूद कर देखते है। सुनता हूँ नीली गहराई का कोई अंत नहीं है।। »

दो रास्ते

एक रास्ता मय़खाने की ओर दूसरा रास्ता शबाब की ओर। उतावला दिल किधर जाए इधर जाए या उधर जाए।। »

थोड़ी देर

ना जाने आप में ऐसा क्या है जो सबका मन हर लेते हो… थोड़ी देर बैठो जिसके करीब उसके दिल में घर कर लेते हो.. »

खामोशियां

खामोशियों की भी, होती है एक ज़ुबान कह जाती हैं बहुत कुछ.. बस, सुनने वाला चाहिए… *****✍️गीता »

शायरी (गढवाली हास्य)

हमें तो गंज्यालों से कूटा गया सुल्याठों में कहां दम था।। मेरा खुट्टा तो रड़ा वहाॅ जहाॅ कच्यार कम था।। 😃😃😃😃😃😃😃😃 »

बदला..

हम बदला नहीं लेते किसी से, बस, निकाल कर के इस दिल से, उसे भूल जाते हैं.. *****✍️गीता »

तमाचा

एक तमाचा सा खाया, ऐ ज़िन्दगी आज कोई बात नहीं, ज़िन्दगी कुछ सिखा ही गई… *****✍️गीता »

ज़िन्दगी अधूरी…

सुनते हैं, किसी के जाने से, ज़िन्दगी अधूरी नहीं होती मगर ये भी सच है कि, उसकी कमी पूरी नहीं होती.. *****✍️गीता »

कतल

कतल कर दो मेरा तुम, ज़रा सी फुरसत निकाल के यूं इंतजार में तुम्हारे, हमसे तड़फा नहीं जाता… *****✍️गीता »

फुरसत

फुरसत से करेंगे हम, कभी बातें मोहब्बत की लम्हे भी चुराए बहुत, ज़िन्दगी में फुरसत ही ना मिली *****✍️गीता »

लोग कहने है मुहब्बत किसी १ से होता है। क्या इस युग में भी किसी १ से ही होता है।। »

……. क्या तुमने कभी

कौन कहता है कागज के फूलो से , कभी खुशबू आ नहीं सकती है। मैं कहता हूँ – क्या तुमने कभी, कागज के फूलो पे सच्चे मन से- महबूबा के नाम लिख कर देखा है।। »

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