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Geeta kumari

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Geeta kumari

@Geeta kumari • Joined Jun 2020 • Active 9 months ago

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Geeta

by Geeta kumari

हे प्रभु..

August 10, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

हे प्रभु,
कभी जन्म लो इस धरा पर ,
बन कर एक इंसान।
फ़िर महसूस करो उस दर्द को,
जब बिछुड़ जाए निज संतान।
अब इसके आगे क्या कहूँ,
खुलती नहीं जुबान।
खिसक गई पैरों तले ज़मीं,
और फट गया आसमान॥
______✍गीता

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by Geeta kumari

वृक्ष हैं कुदरत का वरदान

August 8, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

वृक्ष हैं कुदरत का वरदान,
इन्हें क्यों काट रहा इन्सान।
वृक्ष होंगे तो होगी हरियाली,
वसुंधरा पर होगी खुशहाली।
नियत समय पर वर्षा आएगी,
सूखी धरती भी अन्न उपजाएगी।
वृक्ष देते औषधि, फल और फूल,
धारण करें धरा की धूल।
वृक्ष बनाऍं पर्यावरण का संतुलन,
अति आवश्यक है इनका संवर्द्धन॥
_____✍गीता

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by Geeta kumari

आसमाॅं भी रो दिया सुन कर मेरी दास्ताँ

August 8, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

आसमाॅं भी रो दिया,
सुन कर मेरी दास्ताँ ।
हमने कहा चाॅंद तारों से,
कोई दूर न हो अपने प्यारों से।
ये दर्द बहुत ही गहरा है,
लगता है वक्त ही ठहरा है।
जो गया,वह लौट कर नहीं आता है,
कोई न जाने वहाँ कैसा पहरा है।
अब उसके बिना बितानी होगी,
कैसी वो जिन्दगानी होगी।
यह सोच के दिल घबराता है,
उसके बिन जीना ही नहीं आता है।
दायित्व और भी हैं लेकिन,
कैसे पूरे कर पाऊँगी।
संगी साथी सब समझाते हैं, पर..
कैसे यह विष पी पाऊँगी॥
_______✍गीता

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by Geeta kumari

वृक्ष हैं कुदरत का वरदान

August 7, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

वृक्ष हैं कुदरत का वरदान,
इन्हें क्यों काट रहा इन्सान।
वृक्ष होंगे तो होगी हरियाली,
वसुंधरा पर होगी खुशहाली।
नियत समय पर वर्षा आएगी,
सूखी धरती भी अन्न उपजाएगी।
वृक्ष देते औषधि,फल और फूल,
धारण करें धरा की धूल।
वृक्ष बनाऍं पर्यावरण का संतुलन,
अति आवश्यक है इनका संवर्द्धन॥
_____✍गीता

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by Geeta kumari

मात-पिता की सेवा

August 6, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

भेजकर आश्रम में माता-पिता को,
वह बहू-बेटा बहुत खुश हो रहे थे।
चुपचाप चल दिए वे बुजुर्ग दंपत्ति,
घर को छोड़ते वक्त बहुत रो रहे थे।
सोच कर मुसीबत गई घर से,
वो बहू-बेटा राहत महसूस कर रहे थे।
बारह बरस का पुत्र उनका,
चुपचाप सब देख और समझ रहा था।
बोला, माँ मैं शादी नहीं करूंगा,
क्यों मेरे लाल ऐसा क्यों बोलता है
शादी करेंगे तेरी, बहू आएगी घर में,
देखना कितनी रौनक लाएगी घर में।
कोई लाभ नहीं है माँ ,
जब तुम दादा-दादी बन जाओगे
फिर तुमको भी आश्रम जाना होगा,
कैसे सब कुछ सह पाओगे ।
तब ऑंख खुली उसके मात-पिता की,
शर्मिंदगी से गर्दन झुक गई
उनके अंतर के पाट खुले,
मन के सारे मैल धुले
जो बोओगे वही काटना है।
बोले, बस अब और नहीं,
अब मात-पिता को घर लाना है।
मात-पिता की सेवा करके,
बस अब पुण्य कमाना है॥
____✍गीता

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by Geeta kumari

भीग गया मन म्हारा

August 5, 2021 in गीत

सावन में,
पड़ी जब बरखा की फुहार,
मौसम भी बदल गया
और ठंडी चली बयार ।
चिरैया फुदक रही वृक्षों पर,
मेघों ने गाया राग मल्हार।
रिमझिम बूंदें बरस रही हैं,
भीगा ऑंगन सारा ।
भीगे सारे बाग बगीचे,
भीगा दुपट्टा सारा ।
केश भी भीगे, वेष भी भीगे
भीग गया मन म्हारा॥
______✍गीता

म्हारा का अर्थ है… हमारा

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by Geeta kumari

दोस्त

August 1, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

मिलते हैं कुछ फ़रिश्ते ज़िन्दगी में,
बना देते हैं रिश्ते ज़िन्दगी में,
साथ निभाऍं हॅंसते-हॅंसते,
ज़िन्दगी में।
टूट जाए जब दिल, जिगर
हो कर निराश, हम जाऍं बिखर,
तब करते हैं वो बहुत फ़िकर।
कीमती समय अपना देकर,
हौसला नहीं टूटने दें मगर।
करते हैं मदद इक आह पर,
पलकें बिछा दें राह पर
जिन्हें दर्द का एहसास हो,
पड़े जरूरत तो वो पास हो,
वजह बनें मुस्कान की,
दर्द की बन जाऍं दवा,
हो उन पर अभिमान
उन्हें हम दोस्त कहते हैं ज़िन्दगी में..
मिलते हैं कुछ फ़रिश्ते ज़िन्दगी में॥
______✍गीता

मित्रता दिवस की शुभकामनाएँ

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कड़वी दास्ताँ..

July 31, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कुछ लोग रोटियाँ सेकने आ गए जब जलने लगा मेरा मकाॅं।
किसी के नुकसान की ,
यही है कड़वी दास्ताॅं।
बुझाने आग ,
एक हाथ भी नहीं आया ।
देने को मेरा साथ,
कोई साथ भी नहीं आया।
तमाशा बना दिया है जख़्म को मेरे
देखने सब आते हैं,
कोई मरहम नहीं लाया॥
_____✍गीता

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by Geeta kumari

जब जीवन की हो अंधियारी रात

July 24, 2021 in गीत

मोहब्बत की अद्भुत है दास्तान,
कब शुरू हुई और
कब चढ़ी परवान।
चाॅंद तारों की ख्वाहिश नहीं है,
बस मिले मधुर मुस्कान ।
या फ़िर हो सुगन्धित फूल,
कुछ कम हों हृदय के शूल।
जब ऑंखें नम हों जाऍं मीत,
कह देना तुम कोई गीत।
जब जीवन की हो अंधियारी रात,
रौशन कर देना, देकर साथ।
नहीं रहेंगी फिर ऑंखें नम,
मिट जाऍंगे सारे दर्द-ओ-ग़म॥
_____✍गीता

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by Geeta kumari

आपकी ख़ामोशियाँ

July 21, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

आप कुछ कहें न कहें,
सब कुछ कह जाती हैं हमसे,
आपकी ख़ामोशियाँ।
ख़ुशियों का इज़हार भी करती और
बता देती हैं आपकी परेशानियाँ,
आप कितना भी छुपा लो,
ग़म और ख़ुशी कितना भी दबा लो,
आपकी सुनती ही नहीं हैं..
चुगली कर जाती हैं हमसे,
आपकी खामोशियाँ॥
____✍गीता

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आपकी ख़ामोशियाँ

July 21, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

आप कुछ कहें न कहें,
सब कुछ कह जाती हैं,
आपकी ख़ामोशियाँ।
ख़ुशियों का इज़हार भी करती और
बता देती हैं आपकी परेशानियाँ ।
आप कितना भी छुपा लो,
ग़म और ख़ुशी कितना भी दबा लो,
आपकी सुनती ही नहीं हैं..
चुगली कर जाती हैं हमसे,
आपकी खामोशियाँ॥
____✍गीता

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रिमझिम बूंदें

July 20, 2021 in गीत

रिमझिम बूंदे बहुत हैं बरसीं,
अखियाँ तुझे देखन को तरसीं।
बिजली चमक रही है चम-चम,
बरस रहा है पानी छम-छम।
नभ में काली बदली छाई,
शीतल पवन याद ले आई।
सूर्य नहीं आज अम्बर में,
बादल कर रहे मनमानी,
भीगी मेरी चूनर धानी॥
_____✍गीता

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by Geeta kumari

बहुत दिन बीते..

July 19, 2021 in गीत

दिल से नहीं निकली,
तेरे चले जाने की बात।
सुकून से नींद नहीं आई किसी रात।
बुरा वक्त बीत जाता है ,
यही सुनते आए थे..
हमारा नहीं बीत रहा है,
कैसे हुए हालात।
ऑंखों में रहती है तस्वीर तेरी,
रुठ सी गई है तक़दीर मेरी
भुला ही नहीं पाती हूँ,
तेरी याद बहुत आती है
कैसे सम्भालूँ दिल और
कैसे सम्भालूँ जज़्बात
आ जाऊँ तेरी दुनियाँ में मुझे पता बता दे,
बहुत दिन बीते..
नहीं की तुझसे कोई बात॥
____✍गीता

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शीतल पवन का झोंका

July 16, 2021 in गीत

आहिस्ता-आहिस्ता मौसम बदल रहा है।
एक शीतल पवन का झोंका मुझसे बोल रहा है..
‘मुझे तेरा ताप है कम करना’,
फिर ना ऑंखें नम करना।
हिय में छुपाकर ग़म अपने,
तुम धीरे-धीरे कम करना ।
बादल बना कर लाऊँगा,
नेह नीर बरसाऊँगा ।
हृदय की तपिश कम करके,
तेरे अधरों पर फ़िर से
मुस्कान सजाऊँगा॥
_____✍गीता

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बीती बातें

July 15, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

बीती बातों को याद कर,
मत कुरेदना अपने घावों को।
ह्रदय में ही रहने देना,
अपने हृदय के भावों को ।
मरहम नहीं लगाती दुनियाँ,
मरहम की मत करना आस।
केवल ज़ख्म देखना चाहती है,
नहीं करे दर्द का एहसास॥
______✍गीता

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हे कवि..

July 14, 2021 in गीत

हे कवि,
तुम लिखना मत छोड़ना
कोई कुछ भी कहे कभी कलम मत तोड़ना l
तुम से ही सीख ले रहा,
यह सारा संसार है
अपने गीतों से जग दिखलाना,
तुम्हारे कांधे पर भार है
कवि का कार्य तो लेखन है,
तुम्हारी रचनाएँ समाज का दर्शन हैं
उषाकाल की हो लाली,
यह वृक्षों की हरियाली
नभ में सितारे टिमटिमाते
चन्द्र भी रोशनी बिखराते
गीत तुम्हारे दिखलाते हैं,
झरने और सरिता
या पर्वतों पर बर्फ गिरने की लिख दो एक कविता l
हे कवि कविता से सदा जुड़ा रहे दामन,
प्रभु का तुम्हें यह उपहार है पावन॥
______✍गीता

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जलधार..

July 13, 2021 in गीत

चढ़ा आषाढ़ श्याम घन घिर आए,
आ कर खूब नीर बरसाए।
किसी अपने के बिछोह में,
नैन नीर मेरे भी आए।
ऑंचल भीगा, नयन भी भीगे,
यादें आईं अपार।
इधर मेरे नैना बरसे,
उधर गिरी जलधार॥
____, ✍गीता

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कैसे….

July 9, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कैसे बांध बनाऊँ नयनों में,
अन्दर से सैलाब है आया
कैसे भूलूँ तेरी यादों को
एक माँ का मन यह जान न पाया
जुल्म हुआ है….
एक माँ के जीवन में,
कैसा दर्दनाक दिन दिखलाया॥
____✍गीता

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by Geeta kumari

ख़ामोशियाँ

July 6, 2021 in मुक्तक

यूँ तो ख़ामोशियों की
कोई ज़ुबान नहीं होती लेकिन…
प्रेम में ख़ामोशियों को समझना
बहुत मायने रखता है l
अगर एक दूजे की ख़ामोशियों को
भी नहीं समझ पाए तो….
लफ्ज़ तो लफ्ज़ हैं,
कितना भी बोलो सब अर्थहीन है॥
______✍गीता

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by Geeta kumari

मेरी ज़िन्दगी में…..

July 6, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

जब अपनी ख़ामोशियों में,
सुनती हूँ आपकी ख़ामोशियाँ
सुकून के कुछ पल,
महसूस करती हूँ यहाँ l
सोचती रहती हूँ मैं यदा-कदा,
मेरी ज़िन्दगी में आप न आते तो क्या होता….
बेचैन सी इस ज़िन्दगी में…
आप हो दर्द की दवा,
आप हो ग़म की दुआ
आपसे कुछ मन की कहकर,
चैन पाती हैं मेरी बेचैनियाँ l
जब भी अपनी ख़ामोशियों में,
सुनती हूँ आपकी ख़ामोशियाँ॥
_______✍गीता

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ये कौन चित्रकार है

July 6, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

ये कौन चित्रकार है
जिसने रंग बिखेरे नभ में
इन रंगों से प्रेरित होकर
गीत आ गए मेरे लब पे
हरे भरे वृक्ष बनाकर
यह सुन्दर संसार रचाया
हृदय में इतना प्रेम भरा क्यूँ,
कोई बिछड़ जाए तो चैन न आया
कैसी यह लीला है तेरी
मानव मन तो समझ न पाया
______✍गीता

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अद्भुत छटा

July 3, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

नभ में बादल घुमड़ रहे हैं,
पंछी भी इधर-उधर उड़ रहे हैं l
वृक्षों की ड़ाली पर बैठी,
कोयल कुहू-कुहू करती l
लगता है बरखा आएगी,
धरा की प्यास बुझा जाएगी l
पेड़-पौधे सब झूम रहे हैं,
वृक्ष लताओं को चूम रहे हैं l
कैसी अद्भुत छटा निराली,
धरती पर होगी हरियाली॥
____✍गीता

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गरम हवा

July 2, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

गरम हवा बन कर लू,
तन-मन को जला रही है l
कैसे बाहर निकलूँ मैं घर से,
यह धरा को भी तपा रही है l
एक बारिश को तरसता,
आज क्यूँ है मेरा मन l
अभी तो ज्येष्ठ बाकी है,
आएगा कब सावन॥
____✍गीता

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चिकित्सक दिवस

July 2, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

आज चिकित्सक दिवस पर,
चिकित्सकों को है नमन l
शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण,
लगा रहे सबको वैक्सीन l
कठिन समय में देते साथ,
रोगी का थामें हैं हाथ l
तन-मन को देते सुकून,
दिल्ली हो या देहरादून l
इस कठिन दौर में भी ना करते आराम,
चिकित्सकों को कर बद्ध प्रणाम॥
_____✍गीता

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तप रही है धरा

June 28, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

तप रही है धरा,
तप रहा गगन है l
तपा-तपा सा,
मेरा भी मन है l
बीतता ही नहीं है,
आया यह कैसा मौसम है l
प्रभात का कंचन भानु भी,
दे रहा है तपन l
एक पवन के शीतल झोंके को,
तरस गया है मेरा मन॥
_____✍गीता

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by Geeta kumari

सच्चा दोस्त

June 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

उदास शामों में,
सुकून के रंग भर दे l
बिन कुछ कहे सुने ही,
मन की कर दे l
ग़म के तिमिर में,
चुपके से आकर
रौशन कर दे जो,
चिराग सुकूँ का l
जल में गिरा अश्क भी पहचान ले,
वही सच्चा दोस्त है तू जान ले॥
—–✍गीता

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by Geeta kumari

अम्बर का एक बादल

June 23, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

गर्म रेत पर मैं चल रही थी,
भानु की तपिश भी मुझे खल रही थी l
तभी अम्बर में एक बादल का टुकड़ा,
छाता सा बन मुझ पर छा गया l
तपते तन-मन को आराम आ गया,
मेरी तड़प में कुछ विराम आ गया॥
………✍गीता

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अमृत

June 20, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

हलाहल मिला था तो,
अमृत भी मिलेगा
समुंद्र मंथन में,
सब कुछ मिलेगा l
घबराना नहीं है,
हिम्मत है रखनी
हमें ज़िन्दगी की जंग जीतनी है l
जब बढ़ जाएं बुरी शक्तियाँ ज्यादा,
हमें मिल-जुल कर इनको हराना हैl
डरना नहीं है किसी कीमत पर इनसे,
अपने मनोबल से इनको डराना है ॥
______✍गीता

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समुंद्र मंथन

June 20, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

आसुरी शक्तियों का जोर है अभी,
इनको मिटाना है शोर करें सभी
करना है समुंद्र मंथन,
हाँ, निकलेगा पहले हलाहल
मगर बहेगी अम्रृत धारा भी
यही समय की माँग है,
सत्मार्ग पर चलें सभी
जीतेंगे हम सत्मार्ग पर चल कर ही
विरोध करेंगी शक्तियां आसुरी,
बजाएंगे कान्हा फ़िर से बांसुरी
हरि धुन में खो जाना है,
मानवता का सबको पाठ पढ़ाना है
मति भ्रम फैला रहे हैं असुर,
मकसद है इनका, केवल विनाश का
इनके मकसद को विफ़ल कराना है,
सत्मार्ग और सच्चाई की ज्योति जलाना है

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by Geeta kumari

तेरी यादें

June 19, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

ज़िन्दगी को जहर की तरह
पी रही हूँ l
रोज तिल-तिल मर रही हूँ,
मगर जी रही हूँ l
ज़िन्दगी की आधी ख़ुशियाँ छिन गई हैं,
आधी को देख कर ही जी रही हूँ l
गोद में खेली वो गुड़िया मेरी,
उसकी जुदाई जाने कैसे सह रही हूँ
याद तू आती है हर वक़्त मुझको,
मगर यह बात किसी से कह नहीं रही हूँ l
जीवन लगने लगा है बोझ लेकिन,
फ़िर भी मैं इसको ढ़ो रही हूँ l
तू नहीं आएगी अब कभी मेरी बिटिया,
फ़िर भी तुझे याद करके मैं रो रही हूँ

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by Geeta kumari

रौशनी…

May 10, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

नई रौशनी कर रही है
तेरा इंतजार यॅंहा ।
तू है वहाॅं,
उसे भी तेरा इंतजार है।
आजा लौट कर,
बहुत सुनहरी दुनियाँ है,
तेरे लिए सजाया है
प्रभु ने सुखद संसार यहाँ॥
____✍गीता

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by Geeta kumari

जि़न्दगी की ओर

May 10, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

मैं अर्धविक्षिप्त अवस्था में थी,
निकाल कर ला रही हूँ धीरे-धीरे स्वयं को ।
मेरे पाॅंव में डाली हुई आपकी नेह की डोर,
लेकर आ रही है मुझे जिंदगी की ओर।
आपके नेह का ऑंचल सदा,
करता रहा रक्षा मेरी।
भेजी थी जो आपने मेरे लिए दुआएँ सभी,
वो मिल रही हैं मुझ को,
दे रही हैं बल वापिस लौटने का।
हाथ बढ़ाकर छू लूॅंगी जिंदगी को,
यह वादा है मेरा।
दो कदम कठिन है मगर,
मैं करूॅंगी पार, धीरे ही सही,
आऊंगी लौटकर ,
आपकी नेह की पकड़ कर डोर,
ऐ, जिंदगी तेरी ओर
ऐ, रौशनी तेरी ओर॥
_____✍गीता

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मोबाइल चलने लगा

April 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

इन्सान की रफ्तार थम गई,
और मोबाइल चलने लगा।
मोबाइल के सहारे ही,
कुछ वक्त कटने लगा।
बात करनी हो किसी से,
तो मोबाइल काम आया।
आजकल इसके बिना,
ना किसी ने चैन पाया।
जा नहीं सकते कहीं भी,
अब अपनी इच्छा से हम।
कोरोना ने आतंक मचाया,
हे प्रभु कैसा समय है आया॥
_____✍गीता

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राहुल और सिमरन का वार्तालाप

April 25, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

राहुल बोला..
यह कोरोना कहाँ की बीमारी आई है,
इसने कैसी आफत मचाई है।
इन्सान, इन्सान से डरने लगा,
अदृश्य जीवों से मरने लगा।
बस घर में ही पड़े रहो,
चलाते रहो मोबाइल।
ना कहीं आने के रहे,
ना कहीं जाने कि रहे।
ढीली हुई है पेंट भी
निकल-निकल भगती है।
कमजोर किया है कोरोना ने इतना,
अब तो हर चोट दिल पर लगती है।
फ़ेफ़ड़ों ने भी दे दिया जवाब है,
यकीन मानो यह बीमारी बड़ी खराब है।
फिर राहुल ने देखा..
बिना मास्क के ही,
सिमरन जा रही थी।
राहुल ने पूछा सुन जरा,
मास्क कहाँ है बता तेरा।
क्रोध में झिड़क गई सिमरन,
राहुल को हुई बहुत उलझन।
अब राहुल सोच रहा है,
ऐसा क्या बोल दिया मैंने,
जो यूँ झिड़क गई सिमरन॥
______✍गीता

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by Geeta kumari

आप सदा यूॅं ही मुस्काऍं

April 24, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

आपकी मुस्कान से,
नयनों के दीप रौशन हुए।
महक उठा ऑंखों का काजल,
मुस्कुरा उठे लब मेरे।
मुझसे जुदा होने की बातें,
न करना कभी हमदम।
जुदा होकर आपसे ,
जी कर क्या करेंगे हम।
रब से है यही दुआऍं,
आप सदा यूॅं ही मुस्काऍं॥
____✍गीता

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Geeta

by Geeta kumari

कोरोना से पीड़ित है देश

April 24, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

देश में मचा हाहाकार है,
बीमारों की भरमार है।
ऑक्सीजन और दवा की कमी हुई,
चिकित्सक भी लाचार हैं।
रैड लिस्ट में आया हिंदुस्तान,
बचा लो बीमारों की जान।
कोरोना से पीड़ित है देश,
कोरोना लेकर आया है नया भेष।
आधे से ज्यादा देश बीमार है
कैसे इस स्थिति से निपटा जाए,
यह संकट गहराता जाए।
दिन-रात चिकित्सक कर रहे देखभाल हैं,
रोग नियन्त्रण के बाहर हुआ
रोगियों के बुरे हाल हैं।
कोरोना ने बहुत पसारे पैर हैं,
बिना मास्क के जो घूमेगा
उसकी नहीं अब ख़ैर है।
“दो गज़ दूरी, मास्क जरुरी”
जो यह नियम अपनाएगा,
वही अछूता रहे रोग से,
वरना कोरोना की गिरफ्त में आ जाएगा॥
_____✍गीता

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Geeta

by Geeta kumari

यह जीवन जीना जग में साथी..

April 23, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

यह जीवन जीना जग में साथी,
नहीं है सहज सरल।
ज़ालिम यह दुनियाँ है,
पीना पड़ता है गरल।
कोई-कोई ही इस दुनियाँ में,
हॅंसकर साथ निभाता है।
आगे को जाते देख अक्सर,
यह जमाना जल जाता है।
जो साथ निभाते हैं,
वही सच्चे साथी कहलाते हैं।
निकलती है उनके लिए,
सदैव दिल से दुआएँ।
दूर से नमस्ते उनको,
जो आकर दिल दुखाऍं।
पानी के बुलबुले सी,
छोटी सी है ज़िन्दगी
क्यों बैर भाव रखें किसी से,
कर लें प्रभु की बन्दगी॥
_____✍गीता

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Geeta

by Geeta kumari

कविता ऐसी कहो कलम

April 23, 2021 in गीत

कविता ऐसी कहो कलम,
प्रफुल्लित हो उठे मन।
दुखी ह्रदय में खुशियों के फूल खिलें,
बिछुड़ों के हृदय मिलें।
कभी प्रकृति का हो वर्णन,
कविता ऐसी कहो कलम।
देखें उषा की लाली को,
सुबह की पवन मतवाली को।
आलस्य त्याग उठ जाना है,
एक गीत भोर का गाना है।
जब अरुणोदय हो अम्बर में,
दिनकर बिखेर रहे हों स्वर्ण-रश्मियाँ
वह सुन्दर दृश्य दिखे सभी को,
उसे देखने को आतुर हों सबकी अखियाँ।
आलस छोड़ ऐसी भोर के हों दर्शन,
कविता ऐसी कहो कलम॥
_____✍गीता

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by Geeta kumari

इस तरह हम पृथ्वी दिवस मनाऍंगे

April 22, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

ऑक्सीजन की कमी हुई है देश में,
मार रही है बीमारी, कोरोना के भेष में।
प्रदूषित होती जा रही है धरा,
वृक्ष लगाकर आओ बनाऍं इसको हरा।
ऑक्सीजन के सिलेंडर लेते हो,
तुम कुछ दाम देकर।
फल भी खाओ ऑक्सीजन पाओ,
मात्र कुछ वृक्ष लगाकर।
प्रकृति हमें कितना देती है,
अब इसका दोहन बन्द करो।
कराह रही है धरती माता,
इतना तुम मत गन्द करो।
स्वच्छ करनी है वसुंधरा,
यह वादा निभाऍंगे।
स्वच्छता की रौशनी में,
धरा को जगमगाऍंगे।
बन्द करेंगे प्लास्टिक का उपयोग,
धरा पर वृक्ष लगाऍंगे।
वादा है इस तरह हम,
पृथ्वी दिवस मनाऍंगे॥
____✍गीता

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by Geeta kumari

मन के भीतर करो उजाला

April 22, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

जब बदलियाॅं भरी जल से,
वह बारिश बन बरसने लगी।
जब पुष्प में आया सुवास,
पवन में सुगन्धि बिखरने लगी।
जब दीपक को जलने का बल मिला,
वह प्रकाशित हो उजाला देने लगा।
बिन कोई प्रयास किए ही,
सब स्वत: होने लगा।
जो आपके भीतर ही है,
वही आप दे पाऍंगे।
ख़ुशियाँ हों या फ़िर हो ग़म,
उजाला हो या फिर हो तम।
जो भी होगा वही करोगे वितरित,
मन के भीतर करो उजाला,
ना करना मन विचलित॥
_____✍गीता

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by Geeta kumari

मुस्कुरा उठे लब मेरे

April 22, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

मुस्कुरा उठे लब मेरे,
देख कर नभ में तारे।
मुस्कुरा उठे लब मेरे,
देख उषा की लालिमा।
भोर की ठॅंडी बहती पवन,
प्रफुल्लित कर गई है मन।
ये परिन्दों का चहचहाना,
कह रहा कविता कोई।
प्रातःकाल ही चाहता है,
आज मेरा मन गुनगुनाना॥
_____गीता

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by Geeta kumari

राम जी के जन्म दिवस की बधाई

April 21, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

राम जी के जन्म दिवस की,,
आज सबको है बधाई।
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को,
अयोध्या में खुशी थी आई।
प्रथम बार पिता बने राजा दशरथ,
प्रथम बार माता बनीं कौशल्या माई।
सभी देशवासियों को,
आज राम-जन्म की बधाई।
हर्षित हुए थे सुर ,नर मुनि जन,
सुनकर राम-जन्म का संदेश।
झूम उठी थी अयोध्या नगरी,
हर्षित हुआ था सम्पूर्ण देश।
कोई कर रहा है पूजा,
किसी के घर हो रहा हवन।
श्री राम जी के जन्म दिवस पर,
गीता का करबद्ध शत् शत् नमन्॥
_____✍गीता

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by Geeta kumari

हमारा घर

April 21, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

पूरब हो या हो पश्चिम,
उत्तर हो या हो दक्षिण।
घर हमारा हमें देता हर्ष है,
घर के बाहर तो संघर्ष ही संघर्ष है।
हम जीवन के सुख-दुख,
घर में ही बाॅंटते हैं।
बाहर मिलते हैं विरोधी,
रास्ते भी काटते हैं।
चिलचिलाती धूप और तूफानों से,
बचाता है हमें हमारा घर।
ठॅंड के मौसम में,
गर्माहट दिलाता है घर।
अपनी मर्जी से जीना सिखाता है घर,
रात को चैन की नींद सुलाता है घर।
घर से अधिक समय के लिए,
चले जाते हैं अगर कहीं
दुनियाँ के किसी भी कोने में हों,
तब याद बहुत आता है घर॥
_____✍गीता

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by Geeta kumari

आओ पृथ्वी दिवस मनाऍं

April 20, 2021 in Poetry on Picture Contest

अन्न एवम् जल प्रदान करने वाली,
वसुन्धरा को नमन्।
पृथ्वी के संरक्षण हेतु,
आओ उठाऍं कुछ कदम।
पृथ्वी पर पवन हो रही अशुद्ध,
आओ वृक्ष लगाऍं हम।
इस धरा को और भी,
हरा बनाऍं हम।
आओ पृथ्वी दिवस मनाऍं,
पृथ्वी को हरा-भरा बनाऍं।
धरती माॅं कितना देती है,
क्या कभी अनुमान लगाया है।
मात्र एक बीज बोने पर,
एक वृक्ष उग आया है।
फल, फूल देता है हमको
मिलती उसकी छाया है।
प्लास्टिक आदि कूड़े कचरे से,
मानव ने धरा को मलिन किया।
श्वास अवरुद्ध हुई धरा की,
रक्षा हेतु अब कोई कदम उठाना है।
वृक्षारोपण करना है सबको,
पृथ्वी दिवस मनाना है।
प्रकृति ने यह पृथ्वी,
ऐसी नहीं बनाई थी।
चारों और हरियाली थी,
बहुत ख़ुशहाली छाई थी।
मानव ने अपने हित हेतु,
सब वन-उपवन नष्ट किए
वहाँ बसने वाले जीवों को,
निज स्वार्थ हेतु कष्ट दिए।
संतुलन बिगड़ गया धरा का,
प्रकृति ने प्रकोप बरसाया है।
कोरोना के रूप में,
महारोग यह आया है।
अपनी जीवन शैली में,
अब सुधार हमको लाना है
इस धरा को स्वच्छ बनाना है।
प्रयत्न करेंगे हम सभी तो,
अवश्य सुधार आएगा।
यह धरा ही ना रहेगी तो,
सब धरा का धरा रह जाएगा॥
____✍गीता

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Geeta

by Geeta kumari

श्रमिकों पर फ़िर टूटा कहर

April 19, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

श्रमिकों पर फ़िर टूटा कहर,
चल दिए छोड़ कर शहर।
काम नहीं है क्या खाऍंगे,
यही सोच गाॅंव जाऍंगे।
क्या करें बेचारे मजदूर,
लाॅकडाउन में हुए मजबूर।
लाॅकडाउन भी जरूरी है,
इनकी भी मजबूरी है।
कोरोना ने मचाया कोहराम है,
इन्सान डर रहा इन्सान से,
मुश्किल में है ज़िन्दगी,
जीवन नहीं आसान है॥
_____✍गीता

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Geeta

by Geeta kumari

हमने सीख लिया है

April 19, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

अरि के आगे अडिग रहना है,
नहीं अरि से झुकना है।
हिम की ऊॅंची चोटी से,
यह हमने भी सीख लिया है।
फलों से लदी डाली ही अक्सर,
झुकती देखी दरख़्तों की।
सीधे खड़े अकड़े ठूॅंठ को,
कोई ना स्वीकार करे
ना फल है ना फूल है,
ना कोई सुगन्ध तो
कैसे कोई ॲंगीकार करे।
इसीलिए दरख़्तों से हमने,
झुकना सीख लिया है।
तेज़ ऑंधियों से हर कोई बचता,
तूफानों से बचने का ढूॅंढे रस्ता।
पवन के ठॅंडे हल्के झोंकों को,
जब हमने महसूस किया तो
कोमल भाव में रहना, बहना
हमने उस से सीख लिया है।
सूर्य, चन्द्र बाॅंटें निज उजाला,
बिना किसी स्वार्थ के
उनको देखकर हमने भी,
निस्वार्थ सेवा करना सीख लिया है।
पॅंछी को उड़ते देख गगन में,
यह ख़्याल आया है मन में
मंज़िल की ओर निर्बाध कदम से,
जैसी पॅंछी का उड़ना हो
पर फैला कर हमने भी,
लक्ष्य की ओर बढ़ना सीख लिया है।
______✍गीता

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by Geeta kumari

नभ का एक तारा

April 18, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

नभ में एक तारा टूटा,
और धरा पर तार।
चाॅंदनी मद्धम हुई,
चाॅंद हुआ लाचार।
कभी दिखता कभी छिप रहा है,
नभ के उस तारे को,
चाॅंद ढ़ूंढ़ रहा है।
वह सच्चाई थी या,
था कोई बुरा स्वप्न
चाॅंद गगन में घूम-घूम कर,
सोच रहा है॥
____✍गीता

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by Geeta kumari

यह कोरोना है देशवासियों..

April 16, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कोरोना का कहर हुआ,
गली-गली हर शहर हुआ।
आ गई है दूजी लहर,
कोरोना ने कितना बीमार किया।
दर्द दिया लाचारी दी,
बहुत बड़ी बीमारी दी
परेशान बहुत किया इसने,
कितनी बड़ी महामारी दी।
फ़िर भी, किसी को पिकनिक मनानी है,
किसी को नदी नहानी है।
यह कोरोना है देशवासियों,
भीड़ नहीं लगानी है।
जब तलक है महामारी यह,
मास्क भी लगाना है,
दो गज दूरी बनानी है।
नम्बर आए जब आपका,
वैक्सीन लगवानी है॥
_____✍गीता

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by Geeta kumari

चन्दा की नगरी में..

April 15, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

चन्दा की नगरी में ले चल प्रीतम,
चुनरी में सितारे जड़वाऊॅंगी।
चाॅंद की रौशनी में,
तुम्हारे संग जश्न मनाऊंगी।
दो-चार सितारे अलग से लूॅंगी,
तुम्हारे कुर्ते में लगवाऊॅंगी।
दोनों घूमेंगे चमचम करते,
पायल की छम-छम से तुम्हें रिझाऊॅंगी।
चन्दा की नगरी में ले चल प्रीतम,
थोड़ी सी चाॅंदनी भी लाउॅंगी।
रोज लगाकर मुख पर अपने,
तुम्हारे आगे इतराउॅंगी।
चन्दा की नगरी में ले चल प्रीतम,
चुनरी में सितारे जड़वाऊॅंगी।
____✍गीता

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by Geeta kumari

मेघा आए रे

April 15, 2021 in गीत

मेघा आए रे आए रे,
ऐसी पड़ी फुहार।
भीगी मेरी कॅंचुकी,चुनरिया
नीर गिरे भरमार।
श्याम वर्ण के मेघा बरसे,
खूब गिरी जल-धार।
इतनी तो होली पर भी ना भीगी,
जितनी भीगी बारिश में इस बार।
मोर भी नाचे कोयल भी कूके,
बादल गाऍं राग मल्हार॥
____✍गीता

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