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nitu kandera

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nitu kandera

@nitu • Joined Sep 2019 • Active 6 years ago

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nitu

by nitu kandera

दिल की आरजू

December 2, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

तुमने मेरे दिल में
दर्द ऐसा भर दिया
कि मैंने खुद के ही दिल
का कत्ल कर दिया.

पहले दिल में मेरी
सांसों को थाम रखा था
अब मैंने हाथों में
दिल को थाम रखा है.

मेरे साथ जीने की थी
मेरे दिल की आरजू
अनदेखा कर दिया उसे
जो मेरी तेरे साथ जीने की थी आरजू.

मेरे दिल ने कहा…
चाहे मुझ में बेहिसाब दर्द है
पर मेरी सांसों को मुझसे दूर ना करो
अपनी चाहत के लिए मुझे मरने पर मजबूर ना करो.

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nitu

by nitu kandera

सूखे गुलाब

November 30, 2019 in शेर-ओ-शायरी

जिंदगी की ताजगी
अब महसूस करता हूं सिर्फ ख्वाबों में
सूख गए वो गुलाब
जो छुपा कर रखे थे किताबों में.

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nitu

by nitu kandera

लावा

November 30, 2019 in शेर-ओ-शायरी

कभी तेरे प्यार का लावा था रगों में
जिसमे कई हसरतें जलकर मर गई
आज उस लावे के साथ-साथ
माशूका की नजरें भी सर्द पड़ गई.

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nitu

by nitu kandera

बसर

November 30, 2019 in शेर-ओ-शायरी

तुम सरेआम कहती हो
मैं बुरा मेरा दिल बुरा
क्या वह वक्त भी बुरा
जो तुम्हारा मेरे दिल में गुजरा.

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by nitu kandera

जिंदगी

November 30, 2019 in शेर-ओ-शायरी

जिस जिंदगी में तुम साथ हो
उसी जिंदगी में मुझे बार-बार है जन्म लेना
सकून मुझे मिल जाए तब जन्नत का
खुदा वो जिंदगी मुझे एक दिन की और देना.

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by nitu kandera

मोती

November 30, 2019 in शेर-ओ-शायरी

काश में समंदर की गहराई में
आराम से पड़ी होती
तुम होते कान्हा मेरे चमकते मोती
और मैं तुम्हारी राधा सीप होती.

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by nitu kandera

चकाचौंध

November 30, 2019 in शेर-ओ-शायरी

चकाचौंध वाली जिंदगी पा ली मैंने
अब ना करना पड़ता भूखे पेट बसर
पर जो खुली आंखों से देखा था सपना
तयना कर पाया उसकी परछाई तक का भी सफर.

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by nitu kandera

जिंदगी

November 26, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

बुलाती रही तुम्हें
पर गौर न किया मेरी आवाजों पर
खुशनसीबी है मेरी ए जिंदगी
जो तेरी निगाह पड़ी मेरे अल्फाजों पर

कहा जिंदगी से मैंने
एक बार रुक तो सही
मैं जरा खुल कर दो जी लूं
पर अजीब है जिंदगी
बिना कुछ सुने चलती ही जा रही है

जिंदगी ने कहा..
मैं एक पल ठहरी हूं
दौड़ कर थक गए हो तो
मेरे साथ ही चल दो.

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by nitu kandera

अजीज

November 25, 2019 in शेर-ओ-शायरी

पत्थर से बन कर रह गई
जख्मों को सहकर भी रोई नहीं
तुमने ही दिल कहीं और लगा लिया
वरना तुमसे अजीज तो आज भी कोई नहीं.

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by nitu kandera

हक

November 25, 2019 in शेर-ओ-शायरी

तुमने बसा ली अपनी दुनिया
मुझे तो किसी छत का भी सहारा नहीं
चाह कर भी मैं तुम्हारा हाल ना पूछ सकू
कहीं कह दो की अब ये हक तुम्हारा नहीं.

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by nitu kandera

पिया

November 25, 2019 in शेर-ओ-शायरी

मेरे दिल का हाल बुरा है
इसका इल्जाम तुम पर लगाती हूं पिया
ना यकीन तो हो चलो
मेरी बढ़ती धड़कन तुम्हें सुनाती हूं

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by nitu kandera

खूबसूरत

November 25, 2019 in शेर-ओ-शायरी

दुनिया चाहे लाख खूबसूरत है
सिंगार चाहे खूब करें
पर सादगी की अपनी ही बात है
पुराने भददे कपड़ों में भी
वह कुछ अलग सी लगती है
जाने उसमें ऐसी क्या बात है

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by nitu kandera

बदला

November 25, 2019 in शेर-ओ-शायरी

बदला खूब लिया उसने मुझसे
मुड़ कर देख मुझे चली गई
मुस्कुरा कर थोड़ा सा
दिल का दर्द मुझे दे गई

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by nitu kandera

मसले

November 25, 2019 in शेर-ओ-शायरी

ना कोशिश करो जलाने की
पानी से दीए रोशन नहीं होते
खामोश रहकर सुलझा लो सभी उलझने
शोर से कभी मसले हल नहीं होते.

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by nitu kandera

गांव की बेटी

November 25, 2019 in लघुकथा

दिन की शुरुआत अंगीठी के
उठते धुएं से शुरू होती
पकाती परिवार के लिए रोटी
फिर भी सुने समाज की खरी-खोटी
थक जाए कितना भी तू
फिर भी आराम ना लेती
देख तुझे मैं यही कहती
कैसे यह सब है करती
मेरे गांव की तू बेटी.
मीलो चलती पानी भरकर लाती
रख घड़ा जमी पर फिर से
दोपहर का खाना बनाती
रख गमछे में प्याज और चार रोटी
फिर से खेत की तरफ रवाना होती
खिलाकर रोटी पिलाकर पानी
पति की प्यास बुझाती
ले हसिया हाथ में कटाई में लग जाती
वह थकी मांदी होकर भी काम करती रहती
पता नहीं कैसे यह सब कर पाती
मेरे गांव की तू बेटी.
दिहाड़ी लेकर जमीदार से
घर की ओर जाती
फिर से पकाती और
परिवार को खिलाती
झाड़ पोंछ उन्हीं कपड़ों को
नहाकर पहन लेती
जैसे वो हो कुछ भी नहीं
ऐसे वो सोती
गहरी नींद में जाकर वह
खुद ही अपना अस्तित्व खो देती
इतना सब करके भी
वो कोई वजूद ना पाती
थक कर ऐसे सोई है वो
चिंता उसे कोई ना सताती
बच्चों से लिपट कर बस चैन से
हर रोज वो सो जाती
पता नहीं कैसे यह सब कर पाती
मेरे गांव की तू बेटी.

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by nitu kandera

सवाल जवाब

November 25, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

कैसे जिओगे अपनी जिंदगी
रह गया हो जिंदगी का
एक ही दिन अगर
बड़ा प्यारा जवाब दिया
आशिक ने मोहब्बत के सवाल पर
मैंने तो बनाया तुम्हें हर पल
अपनी जिंदगी जीने की वजह
हर साल तुम्हारे साथ बिताया
एक ही दिन की तरह
गुमान आशिक को बहुत हुआ
मोहब्बत के जवाब से
अश्कों का गिरना कम ना हुआ
दोनों की ही आंख से
मोहब्बत ने कहा तुम्हारे प्यार में
मै इस कदर डूबी हूं
खुदा से हर वक्तबस
यही दुआ मै करूं
जिस जिंदगी में तुम साथ हो
उसमें मुझे बार-बार है जन्म लेना
सकून मुझे मिले जन्नत का
ए खुदा वो जिंदगी मुझे
एक और दिन की देना.

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by nitu kandera

दिल का हाल

November 24, 2019 in शेर-ओ-शायरी

वों पढ़ लेते हैं
आंखों ही आंखों में
मेरे दिल का हाल
ना बता चाहूं उनको
मुझ पर क्या बीता इस साल
क्यों ना उनसे कुछ दूरी बढ़ा ली जाए
ना पढ़ सके वों मेरे मन को
क्यों ना उन से आंखें चुरा ली जाए.

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by nitu kandera

सावन

November 23, 2019 in शेर-ओ-शायरी

सावन कि बारिश का
खूब फायदा उठाया मैंने
बहा दिए पानी मे वो लम्हे
जो थे मेरी यादों में
और कश्ती बना कर
तिरा दिए तेरे खत
जो कभी छुपा कर रखे थे
मैंने किताबों में.

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by nitu kandera

मोहब्बत का फसाना

November 23, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

खो गया था मैं अपने आप में ही
और तेरी याद में तड़पता रहा
इतने सालों बाद तेरी गलियों में कदम रखा
नाम लेकर तेरा पुकारता तुझे भटकता रहा.

इस उम्मीद में कि तुम कहीं तो मिलोगे
मैं जोर से आवाज लगाता रहा
ढूंढा वो चौबारा, देखा वो गलियारा
बार-बार चक्कर तेरे चौराहे के लगाता रहा.

क्या भूल गए लोग
अब हमारी मोहब्बत का फसाना
रवैया ऐसा है उनका
मानो कह रहे हो दोबारा इन गलियों में ना आना.

कहीं से आकर मुझे पत्थर लगा
समझ लिया कि गुजरे जमाने की आहट मिल गई
किसी को आज भी याद है हमारी मोहब्बत
यह सोच दिल को राहत मिल गई.

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by nitu kandera

पहचान

November 22, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

जिंदगी की दौड़ में ना पहचान पाए
अपने और अनजानो को
क्या खाक तजुर्बा पचपन का
जो पहचान ना पाए शैतानों में से इंसानों को.

मोहब्बत अगर किसी से है तुम्हें तो
क्या उसके जज्बात दूर से ही जान लोगे
खुशियों में तो साथ हो सके पर क्या
बारिश में भी उसके आंसू पहचान लोगे.

गरीब जिंदगी के रंगमंच का
सबसे बड़ा खिलाड़ी होता है
पहचान सके तो पहचान कर दिखाओ
जो दर्द पर्दे के पीछे होता है.

नादान होता है आईना सोचता है
उसके अंदर तुम्हारा अक्स छुपा होता है
गलतफहमी यह जानकर टूटती है तब
कि चेहरे के पीछे भी एक चेहरा छुपा होता है.

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मंजिल

November 22, 2019 in शेर-ओ-शायरी

इस वक्त हवा मेरे खिलाफ है
पर हौंसले मेरे बढ़ते रहेंगे
मै कितना भी थक जाउ
कदम मेरे वक्त के साथ
मंजिल की सीढ़ियां चढ़ते रहेंगे.

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by nitu kandera

ज़ख्म

November 20, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

कहते हैं वक्त के साथ हर जख्म भर जाता है
पर वो जख्म कैसे भरे जो तुम हमें दे गए
मांग लिया होता दिल अपने आप ही दे देते
पर तुम सीना चीर कर निकाल ले गए.

ए जिंदगी कुछ शिफारिस लगा उनसे
समझ नहीं आता जियूं या मरूं
बिन दिल के धड़कन का क्या करूं
इस खाली जगह को अब मै कैसे भरुं.

दुख क्या होता है आज मुझे समझ में आया
जब ना मिले कभी तपते रेगिस्तान में छाया
दुख को रेत की तरह समझा और मुट्ठी से गिराया
बिसात क्या थी इसकी मेरी जिंदगी में जिसे मैंने
ठोकर मार कर धूल समझ उड़ाया.

बेवफा वो कैसी है गहरा दर्द देकर भी
दूर खड़ी मुस्काए
कह दो ना इस दर्द को तुम्हारी तरह बन जाए
ना मुझे याद करें और ना मेरे करीब आए.

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ईश्क की जायदाद

November 19, 2019 in शेर-ओ-शायरी

मैंने कहा मै इश्क में बर्बाद हो गई
और मुझे ना चैन ना सुकून ना एतबार मिला
मुकदमा मुझ पर इश्क की तरफ से चला
भले ही तुम्हे ये सब ना मिला
पर बेवफाईयां,रुसवाईयां
और दर्द का बड़ा सा हिस्सा
तो तुम्हें इश्क की जायदाद में मिला.

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by nitu kandera

इश्क

November 19, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

बच निकलते हैं इश्क के चंगुल से
जो लोग बेवफा होते हैं
गिरते वही लोग मोहब्बत में
जो इसकी गहराइयों से अनजान होते हैं
कुछ प्यार के मिलने पर आबाद होते हैं
और कुछ बिछड़ने पर बर्बाद होते हैं
दिल तोड़ देने वाले अक्सर
चैन से सोया करते हैं.

टूटी मै ऐसे कि..
फिर ना घाव मेरा कोई सिला
बिखर गई धूल की तरहा
बेकरारियाँ, बेचैनियां
और बहुत सा दर्द भी मिला
यह कह नहीं सकती कि
इश्क में मैं पूरी तरह बर्बाद हो गई
इश्क में तड़प कर तो मुझे बहुत कुछ मिला.

ढूंढती हर जगह सकून
दिल बहुत ही तड़पने लगा
फरमाया लोगों ने भटकना है बेकार
जनाब, इस मर्द की नहीं कोई दवा
एक दिन जला दिए दर्द भरे उसके खत
इश्क के धुए में ना कोई सांस ले सका
किसी एक दिलजले की वजह से
मिली पूरे जमाने को दिल लगाने की सजा.

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by nitu kandera

बेज़ुबान

November 18, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

एक आवाज आई
हमें प्यार है तुम से
खिंचा चला गया मैं वहां
और होश मेरे थे गुम से.

कुछ भी पूछो तो
मुस्कान होठों पर वो रखती थी
बस देखती रहती मुझे
क्योंकि वो बोल नहीं सकती थी.

ना पन्नों में लिखी जाती
ना इश्क की कोई जुबां होती
होठों से कुछ ना कहती
आंखों से ही हाल-ए-दिल बयां कर देती.

पर सच्चा प्यार तो
मन की बात आंखों से ही पड़ता है
गिले शिकवे कितने भी हो
इशारों इशारों में ही झगड़ा है.

समझ गया मैं
तेरे दिल में जो मेरे लिए
मोहब्बत बेजुबां थी
अब मिली मुझे वो मोहब्बत
जो तेरी बाहों में बेपनाह थी.

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by nitu kandera

अक्स

November 17, 2019 in शेर-ओ-शायरी

हमें जुदा करने का फैसला वक़्त का था
इसमें ना कसूर तेरा ना मेरा था
पर तेरे गालो पे चमकते अश्कों मे
अक्स क्यों क्यों मेरा था.

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by nitu kandera

बच्चा

November 16, 2019 in लघुकथा

एक बच्चा,अपने मन से कुछ बनना चाहता था
पर मां-बाप की ही उस पर चलती रही.

जैसा हम कहते हैं वैसा ही करो
और उसकी इच्छाएं है यूहीं आग में जलती रही.

ख्वाब टूट गए उसके तो हकीकत में क्या जिएगा
यही सोच उसके दिल और दिमाग में चलती रही.

ख्वाब उसके टूट चुके थे
रिवायत ये बचपन से ही चलती रही.

वह तो कई साल पहले ही मर गया था
पर लाश पचपन तक चलती रही.

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nitu

by nitu kandera

डरना मना है

November 16, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

डरना मना है उनका
जो मैदान जीतने चल पड़े
डटकर खड़े तूफानों में
ना माथे पर कभी बल पड़े.

दिए की लौ को क्या खौफ
मौत के झरोखों का
जो खुद ही जलकर जी रहा
उसको क्या डर हवा के झोंकों का.

बनाते बेखोफ घोंसले ऊँची डाल पर
उन्हें सांप की परछाइयों से डर नहीं लगता
उड़ते फिरते बदलो के पार
उन्हें आसमान की ऊंचाइयों से डर नहीं लगता.

पूरे वेग से बहती नदी भी
बहकर सागर में मिल जाती
सख्त धूप में तप कर
कच्ची मिट्टी भी पत्थर बन जाती है.

दुश्मन तुम्हें हरा दे दो
वो तुम्हारी दाद के लायक है
जो ठोकर खाकर भी खड़ा हो जाए
वही सबसे बड़ा महानायक है.

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by nitu kandera

वक्त्त

November 15, 2019 in मुक्तक

सावधान करती हूं कवियों को
ना लेना पड़ जाए लिखने से जोग
हवा झूठ की चल पड़ी है
सच्चे शब्दों से रुठे हैं लोग.

कितना समझा लोगे तुम उनको
जमाना बहुत ही संगदिल है
जिस तरह गीले कागज पर
शब्दों का लिख पाना मुश्किल है.

सच्चा साथ निभा कर
दुआएं बहुत सी ले आना
धन दौलत कमा कर क्या करोगे
मुश्किल है इसको ऊपर ले जाना.

झूठ का चाहे कितना भी चढ़े फितूर
सच की राह पर चलना हुजूर
वक्त तो रेत की तरह फिसलता रहता है
एक दिन वक्त भी बदलेगा जरूर.

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by nitu kandera

कवि का हाल

November 14, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

कैसे बताएं दर्द का आलम क्या होता है
लिखने के लिए कवी खुद को कितना नोचता है
रचना शुरू होती है कलम की नोक से
और अंत पूर्ण विराम (!)पर होता है.

घिस घिस कर जब कलम को हम
हाल-ए-दिल अपना लिखने लगते हैं
दर्द मुझे होता है और जाने क्यों?
आँसू दूसरों की आंखों से बहने लगते हैं.

हौसला टूटने की बात कहूं तो लोग
सूखी टहनियों की तरह टूट कर बिखरने लगते हैं
टूटते हैं हम आईने की तरह
और लोग टूटे टुकड़ों को समेटने लगते हैं.

जोकर की तरह खुशियाँ बखेर दूँ तो
लोग खिलखिला कर हंसने लगते हैं
उन्हें खुश करने के लिए कलम की नोक तोड़ दूं तो
कवी पैदा होने में कई जमाने लगते हैं.

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nitu

by nitu kandera

बागी

November 14, 2019 in मुक्तक

अपनी ही आजादी के आदी बन गए
जाने हम क्यों बागी बन गए
बेबसी की रस्सी पर लटक कर
कई ख्वाब मेरे खुदकुशी कर गए.

धकेलो कितनी भी जोर से मुझे
संभलना सीख गई हूं मैं
मुझे जलाना मुश्किल होगा
कागज की तरह भीग गई हूं मैं.

ऐ खुदगर्ज जमाने जो तुम मेरा दिल ना दुखाते
तो मेरे शब्द यूं शोले ना बरसाते
उडूं मै आसमान में या तेरुं बहती नदी में
मिले हो तुम हमेशा मेरी राह में जाल बिछाते.

कलम की नोक को सूई की तरह चुभाया
दुश्मनों के साथ-साथ अपनों को भी रुलाया
जान लो यारो मैं तो हूं बागी
जो रिश्ते निभाने के लिए भी ना होते राजी.

सब सूखा बंजर सा दिखता मुझे
चाहे कितनी भी हरी-भरी हो वादी
जो ना किसी से सहमत हो
वो मैं ही हूँ एक बागी.
✍️✍️✍️✍️नीतू कंडेरा ✍️✍️✍️✍️✍️

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बर्बाद हो गए

November 14, 2019 in शेर-ओ-शायरी

वह भी मुझे चाहती है
यह सोच हम बेबाक हो गए
प्यार में गिरते ही
दुनिया की नजरों में नापाक हो गए
मुस्कुरा कर उसने हमें देखा
हमें लगा हम प्यार में आबाद हो गए
दुनिया ने कहा जी नहीं हुजूर
आज से तुम प्यार मे बर्बाद हो गए.

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मुहब्बत

November 13, 2019 in शेर-ओ-शायरी

मेरी मासूम मोहब्बत को
प्यार का तोहफा दे गए
बदले मे बेचेनियाँ बेकरारियाँ दी
और जन भी साथ ले गए

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by nitu kandera

भूल

November 13, 2019 in शेर-ओ-शायरी

याद तुम्हे मै अब नहीं
ऑंखें इंतजार की करती है भूल
अब तो अश्कों पर भी मेरा बस नहीं
आँसू गिरकर बन गए
सूखी मिटटी मे धूल.

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by nitu kandera

कामयाबी

November 12, 2019 in मुक्तक

ठोकर लगने पर भी
आगे मैं बढ़ता जाऊंगा
कैसा भी हो कामयाबी का रास्ता
हर तरीके को अपनाउँगा
जरूरत पड़ी तो
खुद को मैं जलाऊंगा
छू लूंगा आसमान
धुआं मैं बन जाऊंगा

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by nitu kandera

पहचान

November 12, 2019 in हाइकु

अगर मैं होती गरीब किसान की उपजाऊ भूमि
बंजर होने पर जरूर दुत्कार दी जाती

मैं होती कुमार के चाक मिट्टी
उसी के दिए आकार में ढल जाती

मैं होती माली के बाग का फूल
मुरझाने के लिए गुलदस्ते में छोड़ दी जाती

मैं होती किसी महल की राजकुमारी
विवाह के बाद छोड़ उसे मै आती

कहने को तो होती मै लक्ष्मी घर की
पर अलमारी के लॉकर की चाबी बनकर रह जाती

चाहे चिल्लाऊं मै खूब जोर से
फिर भी मन की व्यथा ना कह पाती

चाहे मैं होती किसी जज का हथोड़ा
फिर भी मेरी पहचान ना होती

बनाती फिर भी रसोई में रोटी
सोचती काश ! कोई मेरी भी कोई पहचान होती….

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by nitu kandera

नाक घुसाओगे

November 12, 2019 in मुक्तक

अगर धर्मात्मा इतने ही हो तुम
तुम्हें पूरा हिंदुस्तान दिलवाएँगे
पर करनी होगी देश की सेवा
हर गली में नारा लगवाएँगे
तुम बस भड़काने वालों में से हो
जो आग लगाकर पीछे हट जाएंगे
बनवा दो पूरे भारत में
इंसानियत के मंदिर मस्जिद
करोड़ों लोगों की दुआएं तुम्हें दिलवाएंगे
पर तुम्हें वास्ता अलगाव से है
बस अयोध्या की 66 करोड़ एकड़
जमीन मे ही अपनी नाक घुसाओगे.

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by nitu kandera

राम -हनुमान

November 12, 2019 in गीत

साथ जुड़े है
उनके नाम
राम के संग- संग
बोलो जय हनुमान
प्यार मे खोए
है हनुमान
जय हनुमान
जय श्री राम
पतित पावन
सीता राम
काज बनाओ
हे प्रभु राम
राम के संग संग
बोलो जय हनुमान.

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by nitu kandera

वजूद

November 11, 2019 in Other

मैं हूं अपने परिवार का हिस्सा
या फिर हूं बीते कल का किस्सा
खुद को पानी की तरह हर आकार में ढाल दूँ
अपनों के लिए खुद की इच्छाओं को टाल दूँ
पहचान बनाने के वास्ते
करू मैं जतन सभी
ढूंढूँ मंजिल पाने के रास्ते
क्या मिलेगा मुझे वजूद कभी?
पिता से मिला मुझे नाम
सिर्फ पुत्री ही बनकर रह गई
पति से मिला उपनाम
घर में ही मेरी पहचान खो गई.

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by nitu kandera

सच्चाई

November 11, 2019 in लघुकथा

मुंह में राम बगल में छुरा लिए आते हो
अपनी गंदी राजनीति से सबको लड़वाते हो
क्या फर्क पड़ता है कि तुम हिंदू हो या मुसलमान
अपने उन्ही मेले हाथों से
शांति के कबूतर उड़ाते हो
अल्लाह के बंदे, भगवान की रचना है हम
क्यों अयोध्या को आधा-आधा कटवाते हो
अगर सच्चे इंसान हैं हम तो
फिर क्यों तुम घबराते हो
इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है
कि तुम नमाज पढ़ते हो या फिर दिए जलाते हो.

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by nitu kandera

अयोध्या

November 11, 2019 in मुक्तक

इंतज़ार मे सब खड़े है
जाने क्या निकलेगा अयोध्या की गहराई में.
जैसे-जैसे खुदाई गहरी होती जाती है
लोगों के दिल की धड़कन बढ़ती जाती है
जाने अब क्या निकल आएगा खुदाई में.
परिणाम अपने आप ही निकल आएगा
देखे कितना सच है किसकी
कितनी सच्चाई मे.
अयोध्या को खोदने की जरूरत कभी ना पड़ती
वही स्मारक बन जाते
हिन्दू मुसलमान की यादों की अच्छाई में.

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nitu

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सात चिड़ियों का बसेरा

November 8, 2019 in लघुकथा

एक बाग में था पेड़ हरियाणा
विशालकाय, सुंदर, मतवाला
बैठा हो जैसे साधना में तपस्वी कोई
सम्पूर्ण, समृद विशाल हृदय वाला.

जागृत हो जाता होते ही सवेरा
जिस पर था सुंदर साथ चिड़ियों का बसेरा
खाकर फल उसके चिड़ियों ने
बीजों को जग में जा बखेरा.

किसी चिड़िया का पहली डाल पर बसेरा
किसी का था ऊंची अटारी पर डेरा
सुंदर चिड़ियों का परिवार बढा
पेड़ दिखने लगा और भी घनेरा.

बीत गए कई साल खुशी से
उड़कर आकर बैठती बस उसी पे
घूमती फिरती सभी खुले आसमान में
चिड़ियों का ना था वास्ता जमी से.

एक दिन ऐसा तूफान आया
पेड़ ऐसा बुरा चरमराया
टूटी कई टहनियां उसकी
चिड़ियों का दिल बहुत घबराया.

घबराई तो है वो प्रकृति की चाल से
दुखी भी है वों सभी पेड़ के इस हाल से
लड़ना पड़ेगा तो वह लड़ेंगी काल से है
पर चिड़ियों का बसेरा ना उड़ेगा कभी तेरी डाल से.

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हैप्पी बर्थडे सांध्या

October 31, 2019 in लघुकथा

इतने सालो से अपने कंधो पे
जिम्मेदारी माँ की ले रखी है
माँ की तू बेटी है
घर की तू तरक्की है
अनपढ़ माँ की अब तू इकलौती
कलम और तख्ती है
किस तरहा सुधर गया जीवन
दुनिया हक्की बक्की है.

जो तेरे कर्म मे था
परिश्रम तूने गहन किया
कई मुश्किलें सर आन पड़ी
सभी को तूने सहन किया
गरीबी मे साथ दिया माँ का
फटे कपड़ो को भी पहन लिया
छोड़ना ना कभी
जो माँ का हाथ थाम लिया
आज के दिन तूने जन्म लिया
हैप्पी बर्थडे मेरी बहन संध्या.

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तू मेरा छोटा भाई है

October 30, 2019 in मुक्तक

जब तू पालने मे खेलता था
कई खिलोने तेरे सराहने रहते थे
खुश होती तुझे देख- देख
मेरे नन्हे हाथ तेरे सर को सहलाते रहते थे.

जब तू थोड़ा बड़ा हुआ
मेरे खेल का साथी मुझे मिल गया
टॉफी,चॉकलेट बांटकर खाने वाला
साझी मुझे मिल गया.

साथ स्कूल जाते थे
साथ पढ़ाई करते थे
साथ मे लंच, साथ मे खेल
साथ मे स्कूल का काम करते थे.

स्कूल बदल गया
सब्जेक्ट बदल गए
अलग राहों पे आना -जाना हो गया
कुछ ही सालो बाद तू
मुझसे भी लम्बा हो गया.

आज फिर से भैया दूज पर
वही बातें याद आई है
मै तेरी बड़ी बहन हूँ
और तू मेरा छोटा भाई है.
✍️✍️✍️✍️नीतू कंडेरा ✍️✍️✍️✍️

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nitu

by nitu kandera

जीवन जीना

October 25, 2019 in मुक्तक

जीवन बहुत कठिन है गरीबो का
आगे बढ़ना मुश्किल है शरीफों का
सीखना जरुरी है जीवन के सलीखो का
डटकर खंडन करती हूँ बेईमान तरीको का.

सिर्फ मांगने से हक मिलता कभी ना
पैसे के आगे सस्ता है बहुत पसीना
आभारी हूँ मै अपनी माँ की जिसने
सिखाया मुझे ये जीवन संघर्ष से जीना.

गरीबी के साथ कैसे है जीना
तुमने मुझे बचपन मे ही सीखा दिया
न्याय के लिए आवाज उठाओ
इस सोच ने बाग़ी मुझे बना दिया.

सवाल करती हूँ खुद से और सबसे
मेरा भी रास्ता वही, तुम्हारा जहाँ है
तुम्हे तो मिला इन रास्तो मे सब कुछ ही
पर मुझे तो मिला मेरा हक भी कहाँ है?

मै बुराई से लड़ रही
दुनिया की सीख पढ़ रही
धकेलते पीछे मुझे बार बार
फिर भी मै आगे बढ़ रही.

✍️✍️✍️✍️नीतू कंडेरा✍️✍️✍️✍️✍️

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nitu

by nitu kandera

कामना

October 21, 2019 in गीत

हे अहोई अष्टमी माता
अपने पुत्र के लिए मै
करती हूँ तुमसे यही कामना
रक्षा उसकी सदा करना
मुश्किलों से हो जब भी उसका सामना

हे अहोई अष्टमी माता
अपने पुत्र के लिए मै
करती हूँ तुमसे यही कामना.

सदा सुखी वो रहे
कमी ना हो खान पान की
राह उसे उज्वल देना
जग ख्याति हो मान सम्मान की.

हे अहोई अष्टमी माता………
………………
लम्बी उम्र वो जिये
देना उसे अच्छा स्वास्थ्य
माँ मै चाहूँ तुमसे यही
तुम हो मेरी आराध्य.

हे अहोई अष्टमी माता…. ..
………..
सुन्दर चरित्र, स्वच्छ वाणी
अच्छी मिले उसे संगती
कृपा माँ उसपर अपनी करना
देना उसे तीव्र सम्मति.

हे अहोई अष्टमी माता…….

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nitu

by nitu kandera

रामायण

October 20, 2019 in Other

पढ़कर रामायण का हिंदी अनुवाद
पाखंडी भी खुदको विद्वान समझते है
भड़काते लोगो को और कहते
हम रामायण को पढ़ते है.

रामायण का पाठ ही
पतितो को पावन कर दे
बुराई मिटा दे मन की
मन में राम नाम को भर दे.

राम नाम से पत्थर भी तिर जाये
ये तो सबको पता है
जितना सम्मान राम को मिला
क्या भगवान बाल्मीकि को भी मिला है?

ऊंच नीच, मार काट में
धर्म ही आज खो गया है
लिखी जिसने रामायण
अब वो ही अपवित्र हो गया है.

आसरा मिला सीता माँ को
तुम्हारे ही अशीष तले
लव कुश को शिक्षा मिली
तुम्हारे सहारे हम भी पले
प्राण जाये पर
रघुकुल की रीति यूहीं चले.

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nitu

by nitu kandera

देश का कण- कण- स्वर्ण महान है

October 15, 2019 in मुक्तक

हिमालय ताज सर पर सजा
डटकर खड़ा अम्बर में सटा
स्थिरता जिसकी पहचान है
ऐसा ही हर भारतीय का रुझान है
क्योंकि इस देश का कण-कण-सवर्ण महान है

नम्र ह्रदय उच्च विचार
मानते हम अतिथि को भगवान है
प्रतिभा ऐसी कूट -कूट भरी
जानकर दुनिया भी हैरान है
क्योंकि इस देश का कण-कण-स्वर्ण महान है.

सुन्दर- नदिया, बहते -झरने
स्वर्ग से लगी सीढ़ी के समान है
सुंदरता फैली हर कण मे
मुश्किल करना इसका बखान है
क्योंकि इस देश का कण कण- स्वर्ण- महान है.

ऊँचा सोचते बुरे विचारों से अनजान है
किस तरहा निकलना है मुश्किलों से
जनता देश का बच्चा -बच्चा विद्वान है.
हिम्मत लिए बढ़ते चलते आगे
भारत हौसलों का मैदान है
क्योंकि इस देश का कण -कण -स्वर्ण महान है
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳नीतू कंडेरा 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

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by nitu kandera

दलित

October 11, 2019 in लघुकथा

इस आजाद भारत में
आज भी मेरी वही दशा है.
छुआ – छूत का फंदा
आज भी मेरे गले में यूहीं फंसा है.
मै हूँ दलित गरीब
भेदभाव का शिकंजा मेरे पैरो में कसा है.
मै तिल तिल कर जी रहा
समाज मेरे बुरे हाल पर हंस रहा है.
ये मत भूलो, जिस घर में तुम हो रहते
वो मेरी दिहाड़ी मजदूरी से ही बना है.

फसल उपजाऊ सबकी भूख मिटाऊँ
पर खुद भूख से मै ही लड़ता हूँ.
साथ चलने का हक़ भी मै ना पाऊं
पर सबके उठने से पहले सड़के साफ मै ही करता हूँ.
जात के नाम पर वोटो से कितना खुद को बचाऊ
पर राजनीती का अखाडा मै ही बनता हूँ.
महलो तक का भी निर्माण मैंने किया
पर आज भी मै झोपड़े में ही बसता हूँ.
हजारों इमारतें बना चुका
पर एक ईंट जितना मै सस्ता हूँ.

हजारों साल हो गए सहते -सहते
नींच जात होने के अपमान मे
ना कभी आगे बढ़ने दिया
अछूत होने के गोदान ने
जाने क्यों रोंद कर रखना चाहा
पैरो तले इंसान को ही इंसान ने
अब समानता का अधिकार
मुझे दिया है सविधान ने
उससे पहले तो जीने का हक
मुझे दिया है उस भगवान ने

🌋🌋🌋नीतू कंडेरा🌋🌋🌋🌋

Tags: मजदूर दिवस पर हिंदी कविता, मजदूर पर हिंदी कविता 11 Comments »

nitu

by nitu kandera

घमंडी इंसान

October 4, 2019 in Other

गुमान ना करना खुद पर
घमंडी दुनिया में बहुत से देख लिए
गुमान ना चट्टानों का रहा
जिसने नदिया के आगे घुटने टेक दिए
नदी ने टुकड़े कर चट्टान के
नालो में बहाकर फेंक दिए

जंगल को बहुत गुमान था खुदपर
ऊँचे वृक्षों को उसने क्षितिज तक फैला दिया
जंगल के घमंडी सर को
आग ने खुका दिया
आग ने जाला उसे खाक में मिला दिया

घमंडियो का राजा मनुष्य
हीरे मोती जोड़कर
बन गया धनवान
काम का ना काज का
बनने चला भगवान
पर बुरे काम करके
बन भी ना सका इंसान

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