अब बहुत हो गया
March 16, 2020 in Other
अब बहुत हो गया लेती हूँ मैं विदा
कल फिर लेकर आऊंगी
कुछ अल्फ़ाजों की लड़ी
प्रीत से भीग जायेगा तन-मन तुम्हारा
लग जायेगी आँसूओं की झड़ी।
by Pragya
March 16, 2020 in Other
अब बहुत हो गया लेती हूँ मैं विदा
कल फिर लेकर आऊंगी
कुछ अल्फ़ाजों की लड़ी
प्रीत से भीग जायेगा तन-मन तुम्हारा
लग जायेगी आँसूओं की झड़ी।
by Pragya
March 16, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
वो तो गूलर का फूल लगता है
मेरे दिल का फ़ितूर लगता है ।
ना शाम लगता है ना सुबह लगता है
सर्दी की दोपहर वो लगता है ।
वो तो भीगा गुलाब लगता था
वो तो भीगा गुलाब लगता है
मेरा दर्पण तो वही है लेकिन
चेहरा कितना उदास लगता है ।
वो तो छूते ही चीख उठता है
कितना कोमल है फूल टेसू का
दर्द मेरा बढ़ गया है अब इतना
फूल से प्यारा शूल लगता है ।
वो रजनीगंधा है महकता है
जाने दिन-रात किसके दामन में
मेरी किस्मत में नहीं है फिर भी
मुझको मेरा नसीब लगता है ।
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by Pragya
March 16, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
तुम्हारी चादर में लिपटे
कुछ शक के दाग थे।
तुम मेरी मंज़िल और
तुम्ही हमराज थे।
क्या थे दिन और
क्या लम्हात थे।
कुछ अंजाम और
कुछ आगाज़ थे।
इल्जाम लगा किस्मत और
हालात पर हम तो,
बचपन से ही बर्बाद थे।
सुबह हुई तो देखा
तकिये पर पड़े सूखे,
अश्कों के दाग थे।
वो खिड़कियाँ अब
बन्द ही रहती हैं ,
जिनके दीदार के कभी
हम मोहताज़ थे।
अर्सा हुआ ना मिले उनसे
जिनके हुआ करते कभी हम
तलबगार थे।
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by Pragya
March 16, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
जरा देखूं तो सही
तुम्हारे दिल में उतर कर
दिल है अभी या दिल है ही नहीं
दिल है तो उसमें पत्थर हैं
या मांस के कुछ लोथड़े भी हैं
एहसास है या है ही नहीं
मैं हूं या हूं ही नहीं
या हृदय विहीन हो तुम
जो मुझसे प्यार नहीं
मेरा एहसास नहीं
कोई जज्बात नहीं
जरा देखूँ तो सही
तुम्हारे दिल में उतर कर
मैं हूं या मैं हूं ही नहीं।
यदि मैं हूँ तो अपने
एहसास छुपाते क्यूँ हो
भली महफिल में रूसवा
कर जाते क्यूँ हो।
जरा देखूँ तो सही
मै तुझे स्वीकार हूँ या
हूँ ही नहीं
तू गुनहगार है या
निर्दोष—–
ज़रा देखूं तो सही
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by Pragya
March 16, 2020 in शेर-ओ-शायरी
उनके आने की खबर से
मैं यूँ बेचैन हो गई
खिड़की से देखती रही
दरवाज़ा खोलना भूल गई
by Pragya
March 16, 2020 in शेर-ओ-शायरी
पर्त दर पर्त तू खुलता जा रहा है
ये दिल तुझसे दूर होता जा रहा है
by Pragya
March 16, 2020 in शेर-ओ-शायरी
किताब जब खोलोगे
तुम यादों की
मेरा नाम सबसे नीचे होगा
पन्ने जब पलटोगे वफ़ा के
मेरा ही चेहरा दिखेगा
by Pragya
March 16, 2020 in शेर-ओ-शायरी
पहले खफ़ा थे हम उनसे
अब वो निभा रहे हैं
जितना मैं पास जाऊँ
उतना ही दूर जा रहे हैं
by Pragya
March 16, 2020 in शेर-ओ-शायरी
वो मुझे यूँ रुला रहा है
जैसे याद कर रहा है ।
यूँ देखता है जैसे
मुझे प्यार कर रहा है ।
by Pragya
March 16, 2020 in शेर-ओ-शायरी
तेरी एक अच्छाई बताऊँ:-
अगर तू बेवफा ना होता तो
मैं शायर ना होती
कदर खुशियों की कैसे जानती
जो रात भर ना रोती ।
by Pragya
March 16, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
वो मुझे कुछ यूँ चाहता था
कि मेरी साँसो से मुझे पहचान लेता था
एक दिन उसके दोस्तों ने पूंछा
क्या है तुम्हारी ख्वाहिशे——
उसने छोटी सी लिस्ट सुनाई
जिसमें पहला नाम भी मेरा था
और आखरी भी——
वो मुझे कुछ यूँ चाहता था—-
मेरे मुँह से निकले अल्फ़ाज
मेरे चेहरे से जान लेता था—‘
by Pragya
March 15, 2020 in शेर-ओ-शायरी
रोंक लिया है हमनें
अपने आप को
जैसा चाहते थे तुम
मैनें खुद को बना लिया
by Pragya
March 15, 2020 in शेर-ओ-शायरी
बहारें आने वाली थीं लेकिन ना आई
कली जो खिलने वाली थी
शाख पर ही ना आई
by Pragya
March 15, 2020 in शेर-ओ-शायरी
कौन जाने यहाँ किसको
सब व्यस्त हैं खुद में
किसी से क्या शिकायत जब
तू खुद ही तेरे मद में
by Pragya
March 15, 2020 in शेर-ओ-शायरी
कौन जाने यहाँ किसको
सब व्यस्त हैं खुद में
किसी से क्या शिकायत जब
तू ही खुद ही तेरे मद में
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by Pragya
March 15, 2020 in शेर-ओ-शायरी
छिपा कर ज़ख्म घूमती हूँ
तेरे दिए हुए
तड़प उठती है तन्हाई
किसी का हाथ पड़ने से
by Pragya
March 15, 2020 in शेर-ओ-शायरी
धुँधली यादों की परछायी
छुपाने की जो कोशिश की
मिट गई सांसों की रेखा
लिपट कर आ गयी यादें
by Pragya
March 15, 2020 in शेर-ओ-शायरी
भूल जाऊँ मैं सब कुछ
नामुमकिन है ये
खुद को भुला सकना मेरे बस में फिर भी है
तेरा नाम मिटा सकना नहीं बस में नहीं हद में
by Pragya
by Pragya
March 15, 2020 in मुक्तक
रात भी खत्म हो गई
बस तेरा जिक्र बाकी है
तूने तो मुझे मार डाला
पर मेरी साँस बाकी है
by Pragya
March 15, 2020 in शेर-ओ-शायरी
कोशिश नाकाम ही रही
गज़ब फ़ितूर छाया है
लगता है क्यूँ ऐसा
तेरा अक्श आया है
by Pragya
by Pragya
March 15, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
बादल गरज़ यूं रहे थे
के बरस ही जायेंगे
बिज़ली कड़क के
हमको तेरी याद दिला रही
कुछ
बर्फ के टुकड़े पड़े है
सड़क पर—–
बूँद तो बरस रही हैं स्नेहिल
झीसियाँ थी पड़ रही
मसल रही थी चैन—
सब कहीं थी शान्ती
और था रात का पहर
जुगनू भीग जाने कहाँ
छुप गए सभी–
सब थे स्वप्न में खोये
अम्बर रहा टपक।
उफ़ कितनी बर्फ की
चादर बिछी श्वेत वस्त्र सी
श्याम- श्याम रात थी
बर्फ़ में छुपी।
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by Pragya
March 15, 2020 in शेर-ओ-शायरी
इत्मिनान से पढ़िए
— मेरे दिल के हैं अल्फ़ाज़—
हर बात का मतलब नहीं होता
कभी तो दिल से काम लीजिये
तू ही तू बस नज़र आयेगा
हर नफ़स ।
by Pragya
March 15, 2020 in शेर-ओ-शायरी
तेरे शहर में मेरा कितना नाम हो गया
तेरे नाम से जुड़कर मेरा चर्चा आम हो गया
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by Pragya
March 15, 2020 in शेर-ओ-शायरी
थक के चूर
—-हो गई है रात—
बादल गरज़ रहे हैं
है इतना शोर फिर भी
जाने कैसे लोग सो रहे हैं
by Pragya
March 15, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
अब जीवन का अवकाश रहेगा
कल से मेरे पास रहेगा
__________क्षुब्ध होकर
अपंग से तेरे बोल के टेसू
अब ना सूखेगे मेरे आँगन में
______कुसुम का बंदन
ना महकेगा प्राणवायु के दामन में
गलियारों की उड़ती_ _ _धूल
ना पड़ेगी निर्विघ्न मुख पर
____व्यथित मन की
वेदना को अब ना बूंदे
महकायेँगी—-‘
निस्तेज यौवन पर अब
प्रीतम की छटा ना छायेगी
सुखद जीवन की कल्पना
में अब ना दंश आएगा
निस्पंंदन करती नब्ज़ में
मेरा अतरंगी अब ना
गुनगुनायेगा_ __ _ __
अब ना होगी कोई
अभिलाषा और ना
कोई स्पंदन…..
क्यूँ कि अब से जीवन का अवकाश
रहेगा……..।
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by Pragya
March 15, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
ए ज़िन्दगी अब तेरी
आरज़ू ना रही
मेरी सासें इक डोरी सी हैं
पर मन की वो तिजोरी ना रही
अब तक तो गनीमत थी पर अब तो
माँ भी सुनाती है
तू मेरी थी पर अब मेरी ना रही
ए ज़िन्दगी अब मुझे
तेरी ज़रूरत ना रही।
by Pragya
March 15, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
हम मुर्दा हैं या जीवित तुम्हें कोई
फर्क नहीं
तुम्हें इस बात का कोई इल्म नहीं
के हम किस हाल में रहते हैं
सब दिल का खेल है
तुम्हें मेरे जीवन की भी खबर नहीं
मगर तू मेरी हर
नब्ज़ में धडकता है
और हर साँस में महसूस
होता है
रूबरू होने का मौका नहीं
देती दुनिया
पर तू तो हर एहसास में
रहता है मौजूद
बस दिल का फर्क है
तेरा किसी और की खातिर धडकता है
मेरा तेरे लिये धडकता है
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by Pragya
March 15, 2020 in शेर-ओ-शायरी
ना झूठे थे मेरे वादे ना झूठी थी
मेरी कसमें
तुमने इल्जाम दे देकर
मेरे दिल को दुखा डाला
by Pragya
March 15, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
अम्बर झुका हुआ है
और वसुंधरा है बसंती
कोपल की तरह प्रस्फुटित हो रहा है मन
हर शाख पर खिल रहा है
सुमन ।
हर पत्ता बूटा भीगा है लतपत है
उपवन
वृन्त से पृथक हो
झूमता है मन-गगन
प्राणवायु भर रही है
लहरों की छुअन
गीत क्षुभ्ध हैं और
हरित है वसन
by Pragya
March 15, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
ख़ुशी से मेरा पता दे रही है
यह कैसी उदासी है
जो दिल छू रही है
सब छोड़ गए मेरा साथ
पर यह नहीं छोड़ती जानती हूं
यही है मेरी हमराज़
कोई जिंदगी में नहीं टिका
पर यह उदासी है मेरे पास
रात की तन्हाई हो
चाहे दिन का उजाला हो
यह उदासी ही है
मेरी सौगात कैसी उदासी है
जो रहती है हर वक्त मेरे पास
यह जानते हुए भी एक दिन मुझे
छोड़ कर चली जाएगी
लेकिन फिर कुछ वक्त बाद मेरे वापस आ जाएगी
by Pragya
March 14, 2020 in गीत
तोहरे प्यार में होखे दीवानी
बड़ा नीमन लागेले
कवने जतन से तोहका मनावे
कुछ ना समझ में आवेले
by Pragya
March 14, 2020 in शेर-ओ-शायरी
बढ़ी कीमत चुकाई मैने प्यार की
तुझे रास ना आयी तो मैं क्या करूं
by Pragya
March 14, 2020 in शेर-ओ-शायरी
बढ़ी कीमत चुकाई मैनें प्यार की मगर
तुझे रास ना आत
आयी तो मै क्या करूँ
Comments Off on बढ़ी कीमत
by Pragya
March 14, 2020 in शेर-ओ-शायरी
धूप मल ही रहे थे
तुम्हारे प्यार की
कि तुम तुमने दिल से
बेदखल कर दिया देखो
मेरे प्यार की शाम हो गई
by Pragya
March 14, 2020 in शेर-ओ-शायरी
भिगोकर बादाम दूध में
केसर छिड़क दिया
खुदा ने कुछ यूं ही
तुमको बनाया होगा
अफसोस ना कर तेरा रंग श्याम है
मैंने कुछ ऐसे भी लोग देखे हैं
जो दिल के काले होते हैं
by Pragya
March 14, 2020 in शेर-ओ-शायरी
मैंने कोई धोखा नहीं दिया तुम्हें
तुमको ही धोखा हुआ
अफसोस इस बात का है
कि तुम्हें इस बात का कोई इल्म नहीं
by Pragya
March 14, 2020 in मुक्तक
ख्वाइशों के जुगनू पकड़कर
बोतल में बंद कर दिए
चिराग दिल के बुझाए बैठे हैं
रफ्ता रफ्ता चल रही हैं सांसें
सारे ख्वाब छुपाये बैठे हैं
by Pragya
March 14, 2020 in शेर-ओ-शायरी
आसमान के चादर में
लिपटे अनगिनत सितारे हैं
चांद फिर भी तन्हा है,
जबकि लाखों उसके दीवाने हैं।
by Pragya
March 14, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
काश! तुम मेरी
मजबूरियाँ समझ पाते
जो मेरे दिल में था
वो कह पाते
क्यूँ सिमट जाती मेरी
ज़िन्दगी यूँ कोने में
क्यूँ दर्द होता मेरे सीने में
ना हम अपनी मजबूरी का
हवाला देते
ना घूंट कर अश्कों का
प्याला पीते
रहा करते हम तेरे सीने में
ना खालिश होती
यूँ मेरे ज़ीने में ।
by Pragya
March 14, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता
वो आया था घर
बहुत ही शान्त था
खूबसूरत आंखें और मुस्कुराहट
जब मेरी तरफ देखा तो
उन नज़रो में छुपे
हजारों सवाल थे
by Pragya
by Pragya
by Pragya
by Pragya
by Pragya
March 12, 2020 in मुक्तक
मैनें हर रिश्ते को शिद्दत से निभाया है
जिसने मुझे प्यार किया उसे अपनाया है
जिसने दिल से जाना चाहा उसे,
उसे रब का वास्ता भी दिलाया है ।
by Pragya
March 12, 2020 in Other
तेरा नशा कोरोना वायरस की तरह फैल तो गया
तू दिल में बिन बुलाए मेहमान की तरह
आ तो गया मगर कान खोल कर सुन ले
मेरा प्यार कैंसर है
मरने के बाद ही जायेगा ।
Tags: कोरोना पर कविता 12 Comments »
by Pragya
March 12, 2020 in शेर-ओ-शायरी
😉उनका दिल इतना नादान है
😘जिसे भी देखता है मोहब्बत हो जाती है 🤐🤐
by Pragya
March 12, 2020 in शेर-ओ-शायरी
ए दोस्त! मुझमें कभी इतनी हिम्मत ना आयी
बस तुझे दूर से देखती रही कभी पास ना आयी
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