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Rishi Kumar

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Rishi Kumar

@Rishi_Kumar • Joined Aug 2020 • Active 4 years ago

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Rishi Kumar

by Rishi Kumar

ना समझ संतान

March 2, 2022 in Other

कहानी-ना समझ संतान
पैतृक संपत्ति से कुशल किसान रहता था, अनेक पशुओं तथा कृषि यंत्रों के साथ एक सुनहरे भवन का मालिक था, किसान के दो पुत्र प्रवेश तथा आवेश, दोनों पुत्रों की शादी हो गई थी, प्रवेश के पास चार संतान राजेश, राकेश, सुधा, पूनम, तथा पत्नी का नाम सीमा था, छोटे पुत्र की पत्नी का नाम गरिमा था और बच्चों का नाम आकाश और प्रकाश था,
किसान के दोनों पुत्र अशिक्षित ,दुष्ट ,अहंकारी व नशेड़ी थें,
किसान के दोनों बच्चों के बच्चों की परवरिश व शिक्षा से संबंधित देखरेख किसान के हाथ में था, किसान का सपना था धन इकट्ठा करके अपने इन छोटे बच्चों को अच्छी शिक्षा देना है , किसान का यह सपना धरा का धरा रह गया ,वृद्धा अवस्था में जाने के कारण किसान खेती तथा अन्य काम करने में असमर्थ होने लगा ,किसान के पुत्र घर का पैसा शराब जुआ गलत संगति में खर्च करना शुरू किए, कुछ दिन बाद पैसा खत्म होना शुरू हुआ ,प्रवेश की हालत शराब के कारण बिगड़ गयी, इसी बीच किसान की मृत्यु हो जाती है, दोनों पुत्र पूर्ण रूप से मनमानी हो गयें खेती गिरवी तथा सारे पशु बिक गए ,इसी बीच प्रवेश की हालत शराब के कारण बहुत बिगड़ गई, हॉस्पिटल में भर्ती हुआ, महंगे इलाज के कारण कृषि यंत्र तथा बचीं खेती भी गिरवी हो गयी, प्रवेश का परिवार पूर्ण रूप से गरीब बेबस लाचार मजदूर परिवार बन गया, घर के लोग दाने दाने के लिए मोहताज हो गए, छोटे भाई की पत्नी गरिमा ने परिवार में अलगाव की शुरुआत किया ,वह अपना परिवार लेकर मायके चली गई ,अब राजेश पढ़ने की उम्र में मजदूरी करने लगा, मां और बेटी भी मजदूरी करने लगीं ,समय अपने गति पर बढ़ता रहा, पिता तथा परिवार की हालत में थोड़ा सुधार हुआ ,कुछ समय बाद डॉक्टर ने प्रवेश को पूर्ण रूप से स्वस्थ बताकर अस्पताल से छुट्टी दे दिया, राजेश के सहयोग मां सीमा ने मनिहारन का काम शुरू किया, गांव-गांव ,घर-घर जाकर सामान बेचना शुरू की, बहन सुधा ने ब्यूटी पार्लर तथा सिलाई कढ़ाई बुनाई का कोर्स करना शुरू की ,राजेश बहुत पहले ही मजदूरी का काम छोड़ करके मोटर मैकेनिक का काम सीख लिया था ,इसी बीच ईश्वर ने खुशियों से खिलते हुए परिवार में एक हादसे को प्रकट किया ,राजेश की सबसे छोटी बहन पूनम एक्सीडेंट में खत्म हो जाती है, एक बार पुनः इस परिवार में शोक की लहर दौड़ आती है, परिवार इस सदमे से निकल कर पुनः अपने उसी मार्ग पर बढ़ता रहा ,अब पिता प्रवेश भी घर के सामने चाय पान की छोटी दुकान चलाना शुरु किया, देखते देखते पुनः पूरा परिवार विकास की ओर बढ़ने लगा ,छोटे पुत्र राकेश का दाखिला अंग्रेजी स्कूल में हुआ ,(जो किसान सपना था) सुधा कोर्स खत्म करने के बाद घर पर ही दुकान डाल कर अच्छा पैसा कमाना शुरू की, अब सभी के सहयोग से बड़ा भाई राजेश भी अपनी खुद की दुकान डाल कर अपना व्यवसाय छोटे स्तर पर शुरू किया, देखते देखते पूरा परिवार फिर से सुख शांति तथा विकास की ओर बढ़ चला, पैतृक संपत्ति जो गिरवी थी खेती तथा अन्य उसे छुड़ाया गया,प्रवेश की पत्नी को सरकारी आवास मिलता है और पैसा घर से लगा करके एक सुंदर सा घर बनवाते हैं, और सरकारी बैंक से लोन लेकर ट्रेक्टर तथा इत्यादि खेती के लिए मशीन खरीद लिये,प्रवेश अपनी पुरानी गलती को याद करके अपने भाई को समझाने, उसके ससुराल गया तथा वापस लाकर दोनों मिलकर पुनः खेती तथा खुद का व्यवसाय करना शुरू किए,
सारांश-आज प्रवेश का परिवार पूर्ण रूप से स्वस्थ ,स्वच्छ ,सुंदर ,सामाजिक-आर्थिक शैक्षिक रूप से विकास की ओर अग्रसर व खुशहाल है.
———–
नाम- ऋषि कुमार प्रभाकर
पता- खजुरी खुर्द कोरांव
प्रयागराज उत्तर प्रदेश

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Rishi Kumar

by Rishi Kumar

बाढ़

March 2, 2022 in Other

कहानी-बाढ़
————–
सूरज निकलने वाला ही था कि बारिश रिमझिम शुरू हो गई| दोपहर होते-होते बारिश विकराल रूप धारण कर ली चारों तरफ बादल में गड़गड़ाहट बिजलीओं की लपटें, ऐसा प्रतीत होने लगा आज बादल ही फट जाएंगा, कोई भी व्यक्ति घर से बाहर न निकल सका, इतने में रेडियो पर फरमान सुनाया गया की आज अधिक बारिश होने के कारण पुराने बांध का पानी खोला जा रहा है ,सभी क्षेत्रवासी उचित सुरक्षित जगह पहुंचने का कष्ट करें, मुगरी चाची यह सुनकर रोने लगी उसकी पूरी छत टपक रही थी, इतने में दीवाल का पिछला हिस्सा ढह गया मुगरी चाची और रोने लगी ,एक बेसहारा विधवा संतान विहीन आखिर अब क्या करें कौन सहारा बने यही सोच कर बहुत रो रही है, देखते देखते नदी नाले नहर सड़क के ऊपर गली मोहल्ले में पानी घुसने लगा ,अब चाची जाए तो कहां जाए, चाची की आवाज सुन रास्ते में जा रही भीड़ से एक नवयुवक (राशिद) डंडे के सहारे मदद करने के लिए मुगरी चाची के पास आया ,चाची रो मत चलो चलते हैं ,हां लल्ला… भगवान तुझे बहुत बड़ा बनाएं ,चाची अपने पास एक झोला भी लिया उसमें अपना चश्मा अपने पति की तस्वीर तथा कुछ गहने, पानी का बहाव अधिक होने के कारण चाची फिसल कर सभल जाती है लेकिन झोला हाथ से छूट जाता है ,झोला पकड़ने के लिए राशिद बिना कुछ सोचे आगे बढ़ गया रास्ते का सही अनुमान ना होने से बगल के नाले में गिर जाता है ,और झोला पकड़ कर बहने लगता है, काफी दूर चला गया यह देखकर चाची उसे चोर चोर कहने लगती है ,इतने में बाढ़ राहत दल चाची को सरकारी टेंट मे ले जाते हैं, राशिद बह करके दूसरे गाँव पहुंचा मल्लाहओ की मदद से राशिद को बचाया गया, उसके हाथ में झोला देखकर पुलिस प्रशासन को खबर दिया गया, प्रशासन आकर के राशिद के प्राथमिक स्वास्थ्य उपचार के लिए सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य टेंट में उपचार के लिए ले जाते हैं ,चाची के दिए बयान रिपोर्ट के आधार पर पुलिस राशिद को पकड़ने में सफल हुई ,चाची को बुलाया जाता है पहचान के लिए राशिद का बयान सुनकर के चाची शर्मिंदगी महसूस करती है, राशिद की बहादुरी सुन करके चाची के आंखों में आंसू आ जाता है ,चाची के चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है ,चाची के पति की तस्वीर जो चाची को मिल जाती है, चाची सबके सामने राशिद को अपना दत्तक पुत्र मानती है सब कुछ ठीक हो जाने पर चाची सारी संपत्ति अपने राशिद पुत्र के नाम करके उसी के संग रहने का फैसला सुनाती है ,राशिद भी बिना मां बाप का था ,वह भी किसी के यहां नौकरी किया करता था, अब राशिद के खुशी का ठिकाना ना रहा ,उसे मां के रूप में जो चाची मिल गयी , चाची भी अत्यंत खुश है की बाढ़ के आड़ में उसे साहसी बहादुर इमानदार एक पुत्र मिल गया चाची पुलिस प्रशासन को धन्यवाद देती है,
— ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’
कोरांव प्रयागराज

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Rishi Kumar

by Rishi Kumar

🙏प्रार्थना 🙏

March 2, 2022 in हिन्दी-उर्दू कविता

मेरा शोक हर लो,
मेरा दोष हर लो,
जैसे पिया आपने जहर को
वैसे मेरे!हर दुख के आंसू पी लो
——
ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’
पता-खजुरी खुर्द,तह.कोरांव, प्रया.

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Rishi Kumar

by Rishi Kumar

शिक्षा ग्रहण करो, संत ज्ञानेश्वर भीमराव बनो

March 2, 2022 in Other

शिक्षा ग्रहण करो,संत ज्ञानेश्वर भीमराव बनों
—————————————————-
यदि मन में अभिलाषा है किसी विशेष कार्य, वस्तु ,लक्ष्य, पद प्रतिष्ठा के लिए और धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं, तब स्वाभाविक है कि आने वाले समय में आपको असफलता का स्वाद चखना पढ़ेगा। अभिलाषा पूर्ण करने के लिए उचित प्रबंधन, समय ,श्रम, विश्वास, जैसे अनेक हथियारों का निवेश व संग्रह करना होगा अन्यथा अंत में निराशा ही हाथ लगेगी । जैसे यदि आपकी इच्छा विद्यार्थी जीवन में उच्च पद की नौकरी सरकारी या प्राइवेट प्राप्त करना है, तो आप का प्रथम कर्तव्य होगा धैर्य ,समझ, गहराई से लगन पूर्वक अध्ययन करना।अच्छे अंकों के साथ परीक्षा उत्तीर्ण करें, आपके अंक आपको विश्वास और सफलता के लिए ऊर्जा प्रदान करेंगे । इस उम्र में आप को सभी पहलुओं से पहले अपने माता-पिता व गुरु का आज्ञाकारी पुत्र व शिष्य बनकर कार्य करना चाहिए| संस्कार ,शिक्षा , कहीं से भी मिले ग्रहण करो, बड़ों का उपदेश सुनो,अपनी वाणी पर नियंत्रण रखो और सकारात्मक चिंतन में प्रगतिशील रहो ।दया, धर्म परोपकार आदि बातों को सीखना समझना चाहिए| इसके साथ विद्यार्थी जीवन में अंधा प्रेम, अमर्यादित शब्द, द्वेषपूर्ण कार्य-भाव, अर्धमरुपी बीज तन मन में ना बोये।नफरत ,जातिवाद,धर्मवाद,क्षेत्रवाद ,रंग,लिंग, आदि अवगुण जो मानवता के खिलाफ है या इसी के आड़ में नया मंच ,राजनैतिक समाजिक संगठन अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहीं हैं | उनसे दूरी बनाना परम आवश्यक है।
आज समाज में नयी बुराइयां मानव को दानव बनाने में अग्रसर है| इससे भी सावधान सचेत रहना है, प्रेम युद्ध नहीं सिखाता, संगत बुरा मार्ग नहीं दिखाता, ज्ञान मन को कुंठित नहीं करता, शब्द सर को झुकने नहीं देते ।यदि आपने तन-मन,कर्म-वचन, पर नियंत्रण और सकारात्मकता का भाव पाल रहे हो तो अपका भविष्य उत्तम है । यह आपको महान क्रांतिकारी दार्शनिक बनने की ओर अग्रसर करेगा | कम समय में ही आप एक अच्छी ऊंचाई को छू सकते हो । ऐसी बातों का संग्रह करना व किताबों को पढ़ना है, जो दुख-सुख,जीवन-मरण, सत्य-असत्य ,धर्म-अधर्म, स्वर्ग-नर्क, पाप-पून्य, शुभ-अशुभ,आदि बातों का खंडन कर सकें,मानवीय गुणों में वृद्धि व पाखंड अंधविश्वास पर कुठाराघात करते हुए विज्ञान को बढ़ावा दे सकें।
ज्ञान उम्र का मोहताज नहीं है ।प्रतिभा किसी विशेष जाति में निश्चित नहीं है ।जो भी चाहे कम उम्र में शिक्षा के द्वारा उत्तम आदर्श ,पद, प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकता है व समाज में उपयोगी बन सकता है । विज्ञान सत्य है -धर्म गलत है ,भगवान असत्य है-प्रकृति सत्य है।संसार को नया दर्शन,इतिहास,भूगोल के लिए मार्ग बना सकते हो, संपूर्ण जगत के लिए एक नया जीवन दर्शन खड़ा कर सकते हो। नए पथ, पंथ ,धर्म-समाज का निर्माण व परिभाषा बदल सकते हो और गढ़ सकते हो, धर्म ग्रंथों को कटघरे में खड़ा करके सवाल कर सकते हो, सभी धर्म ग्रंथ का गहन अध्ययन करके एक नए पंथ का निर्माण कर सकते हो। इन सब बातों के लिए प्रथम आवश्यक शर्त है, एकाग्र चित्त, हसमुंख, जिज्ञासु बनकर,अंबेडकर, विवेकानंद, स्वामी दयानंद सरस्वती, संत ज्ञानेश्वर ,एकलव्य के भातीं शिक्षा ग्रहण करना, ब्रहमचर्य जीवन व्यतीत करना ,एक मन, एक लक्ष्य, और एक जीवन शैली के साथ,मानवता भरे विचारों का पालन,अध्ययन तथा खोज के लिए प्रयत्नशील रहना आवश्यक है ।शिक्षा मनुष्य की प्रकृति ,प्रवृत्ति तथा संपूर्ण ब्रह्मांड से ,ज्ञान-विज्ञान से, ध्यान-धर्म से, योग-संयोग से ,आदि का शिक्षा दीदार कराने के लिए तत्पर हो जाएगी।शिक्षा आपको अल्प समय में मानव से महामानव बनाने में सहयोग देती है । शिक्षा, शब्द -भेदी बाण के समान विजय दिलाने में कार्य करेगी,
बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर जी ने कहा- शिक्षा वह शेरनी का दुध है जो पियेगा वह दहाड़ेगा, अब फैसला आप सबके हाथ में है ।
—————
ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’
पता-खजुरी खुर्द कोरांव प्रयागराज उत्तर प्रदेश
संपर्क-6391617530

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Rishi Kumar

by Rishi Kumar

🙏प्रार्थना 🙏

March 2, 2022 in हिन्दी-उर्दू कविता

मेरा शोक हर लो,
मेरा दोष हर लो,
जैसे पिया आपने जहर को
वैसे मेरे!हर दुख के आंसू पी लो
——
ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’
पता-खजुरी खुर्द,तह.कोरांव, प्रया.

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Rishi Kumar

by Rishi Kumar

गुलाब जल

February 19, 2022 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- गुलाब जल
————————-
चाहत न थी,
अब जीने की
बस तुम्हें देखा
दुआ करने लगा जीने की,

साकी दे-
प्याला तो,
नशा चढ़े|
भर नजर-
देख ले यह हसीना,
जाम से बढ़कर नशा चढ़े,

नजर से नजर मिला दे,
पागल भी घायल हो जाये,
मै देखा नही अप्सरा मेनका को,
मुस्कुरा दे यह नजर झुकाकर
जन्नत की परियां भी कायल हो जाये|

यह होठ –
प्रातः की ऊषा है,
खीलती कली में गुलाब है,
आंख की पूतली ऐसे लग रही,
जैसे महताब की चादनी चमक रही|

तुम्हें बनाने में
कितना समय लगाया होगा,
हर काम छोड़ करके
खुदा सबसे पूछ- पूछ के बनाया होगा|

पूर्ण बनाकर तुम्हें
जब गौर से देखा होगा,
देख सुरत को-
खुदा भी बहुत रोया होगा,
चेहरे पर कहीं भी दाग नही है
सच मे!गंगा जल या-
गुलाब जल से चेहरा धोया होगा|
—————————————–
कवि-ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’
पता खजुरी कोरांव प्रयागराज

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Rishi Kumar

by Rishi Kumar

दार्शनिक

December 16, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

दार्शनिक
————-
जीवन मेरा दर्शन है,
कर्म मेरा पथ प्रदर्शक है,
मुड़ कर देखा बचपन को
जन्म से बच्चा दार्शनिक है,

उसमें गति मति थी,
प्रकृति उसके करीब थी,
था सब कुछ जन्म से ही
जैसे बालक खुद का निधान है,

जिज्ञासा से भरा था,
आश्चर्य में डूबा था,
उंगली पकड़ के चलना सीख रहा
पथ-पग से ताल मिला कर
संदेह के संग बढ़ रहा था,

सबके पास दर्शन है,
दर्शन का अर्थ देखना है,
कहते इसे फिलास सोफिया-
ज्ञान से प्रेम,
जिसका सारांश है,

दर्शन में-
ज्ञान विज्ञान है,
लौकिक-पारलौकिक
परमतत्व की पहचान है,
संसार के सब वाक्यों अर्थों का
दर्शन में ही सारांश है,

जग का सबसे बड़ा दर्शनशास्त्र,
बच्चों के बचपन में है,
जग का सबसे बड़ा दार्शनिक,
हर घर का बच्चा है,

जो आज बने हैं,
घर के दीवारों पर टंगे हैं,
जिन्हें पढ़कर दुनिया महान बने
उन्हें पढ़ाने वाले थे !

बालक के संवाद में,
है सौ सवाल उसके हाथ में,
बालक के सवाल में-
ना अंत और शुरुआत है,
भय विरोध दमन की चिंता नहीं,
क्या बालक महान दार्शनिक नहीं है ?

जो जाना नहीं,
राग- ताल- हाल -काल को,
सच बोला बिना देखे किसी के भाल को,
जिसे पथ का कोई ज्ञान नहीं,
जवाब दे दो छोड़ दो झूठी शान को,

सच बालक महान है,
सबके घर-घर दार्शनिक हैं,
है दर्शन का जन्म जिज्ञासा से अगर,
बच्चों से बड़ा जिज्ञासु जग में कौन है !!
————————————————-
कवि-ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’
पता-खजुरी खुर्द कोरांव
जिला-प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

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Rishi Kumar

by Rishi Kumar

धर्म के ठेकेदार

June 16, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता-धर्म के ठेकेदार
——————————
इस मुस्कुराहट में
कौन सी जात छुपी है,
चेहरे की कोमलता में
कौन सा धर्म छुपा है,

आज बता दो-
धर्म के ठेकेदारों,
इसके बालों को-
कौन से भगवान ने बनाया है,
खिलखिलाते इसके होठों को देखो,
क्या इस मुस्कुराहट को इंसान ने बनाया है

हाँ! इंसान बना सकता नहीं,
कुरूप को सरूप बना सकता नहीं,
बना सकता है मूरत और मजहब की दीवार,
पर मूरत को जिंदा सूरत बना सकता नहीं,

जब तुम कुछ कर सकते नहीं,
फिर क्यों नौनिहाल बच्चों को,
बेजुबान पंछी को भी
बेजुबान पशुओं को भी
धर्म अधर्म बताया है,
इंसान को इंसान से
घसीट मजहब में बांटा है,

चांद सूरज तारा
पोखर कुआं सरिता का किनारा,
वायु जल आकाश धरा
यह सभी निस्वार्थ है सबके लिए,
आदि समय से मानव हित में रहा,

फिर कौन सा ज्ञान-
हासिल कर लिया,
जब प्रकृति ने नहीं बांटा-
फिर क्यों आपस में बंटवारा कर लिया,
इस बंटवारे के चक्कर में-
इन बच्चों की मुस्कान भी,
जलती मजहबी आग के हवाले कर दिया,

अब हवा नहीं नफरत की बयार बह रही,
अगर भगवान है तो उससे मेरी फरियाद है
क्यों तेरे रहते हर इंसान की मुस्कान जल रही है
———————————————————
कवि ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-
पता खजुरी खुर्द (चैनपुरवा)
कोरांव प्रयागराज उत्तर प्रदेश

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by Rishi Kumar

मेरा प्यार, बुजुर्ग का ज्ञान

May 28, 2021 in Other

मेरा प्यार, बुजुर्ग का ज्ञान
—————-
किसी बुजुर्ग ने,
एक सवाल पूछा,
जिसका जबाब-
उम्र भर ना दे पाऊगा,

बेटा! ऐसा कौन सा
ज्ञान हासिल किया है,
जो आज उसकी
बेटी ले के भागा है,

कैसे जबाब दू प्यार हैं
बुजुर्ग ने सवाल पूछा, ज्ञान का हैं,
———
कवि-ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-

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by Rishi Kumar

साया तेरा

May 27, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- साया तेरा
———————–
माँ क्यों रो रहीं हो
अब तक क्यों जाग रही हो,
कसम तेरी माँ मुझे भूख नही
उठो क्यों छुप छुप के रो रही हो,

मेरे कपड़े की, क्यों चिंता करती हैं,
क्या आंचल तेरा किसी कपड़े से कम है,
मेरे भूख प्यास की चिंता तुमको,
क्या कभी एक पल अपने –
भूख प्यास की चिंता तू करती है,

चाह तेरी मै स्वस्थ रहूं
चाह तेरी मै मस्त रहूं,
एक बात दो माँ मेरी,
तुम स्वस्थ नही मै कैसे स्वस्थ रहूं,

मेरे कंधे अभी मजबूत नही,
होटल भीख शिवा कहीं काम नही,
माँ मेरा शोषण हो जाएगा
मेरी अंगुली पकड़ो मुझे रास्ते का ज्ञान नहीं,

मत मुझे अकेले छोड़ा करो
अपने साथ सदा रखा करो,
कुछ गीत सीखा दो मां मुझको
मैं गीत सुनाऊं, कोई पैसा देगा मुझको,

वह दिन मेरा अंतिम हो,
जब तेरे बारे में ऐसी मेरी इच्छा हो
सब दुख सह तुम्हें पालूंगी
है चाह मेरी तेरे कंधे पर बस्ता हो

मैं तेरी निर्माता हूं
मात-पिता और भ्राता हूं,
मेरी गहराई धैर्य क्या जानोगे
मैं मां हूं इसलिए दुख पाती हूं,

ए आंसू मुझे बताते हैं,
तुम पढ़ो इसलिए बह जाते हैं,
मत साथ रखों बेटे को
बह बह के मुझे बताते हैं,

ए आंसू सब सुख मुझे दिख लाते हैं
ए आंसू तुझे बढ़ने का मार्ग बनाते हैं,
बेटा भीख मांग कर तुझे पढ़ाऊंगी
गरीबों के घर से भीमराव निकलते हैं
———————————————
कवि ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-

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by Rishi Kumar

सुझाव

May 25, 2021 in Other

आप लोगो से अनुरोध है की सावन मंच एक बार सभी कवियों का परिचय समारोह का आयोजन करे
ताकि सभी सदस्य एक दुसरे के बारे में जान सके तथा साहित्य में कौन कितना योगदान दिया है यह भी जान सके
1- जीवन परिचय
2- साहित्य परिचय
3- आपकी रचनाएँ ग्रंथ
4- पुरस्कार, उपाधि
इत्यादि चीजें सावन मंच पर उपलब्ध कराएं

अगर किसी को दुख हुआ है तो माफी चाहता हूं 🙏

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by Rishi Kumar

मुक्तक

May 20, 2021 in मुक्तक

किसका शौक पूरा हुआ है,
गम खुशी में जीवन रहा है,
जो दिखावा कर रहे जमाने में,
खुशी के लिए बहुत कुछ सहना पड़ रहा है,

हालत ने पटका ऐसे,
जो कल जी रहें थे राज शाही जैसे,
जो सब्जी में पनीर मशरूम खाते थे
वो स्वास्थ्य के लिए गोमूत्र पीते टानिक जैसे,

कोई राजा से फकीर हो गया,
कोई जुआ खेल अमीर हो गया,
कोई लैला के लिए मजनू बना,
कोई परिवार छोड़ देश हित में शहीद हो गया,
——–
कवि ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-

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Rishi Kumar

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मुक्तक

May 17, 2021 in मुक्तक

मुक्तक
—————-
मै मुर्गी खाऊ
वो पाप बताते हैं
वो कुकुरमुत्ता खाएं
गर्व से स्वाद बताते हैं

आगे से निकला पीछे से निकला
उसका ऐसा वैसा स्वाद बताते हैं,
शाकाहारी मांसाहारी कह करके
सुबह शाम भोग लगाकर सोते हैं,

अब कुछ भक्त अंधभक्त बोलेंगे
धर्म जाति के नाम पर रोयेंगे,
सच कहने ना सुनने की हिम्मत है
चीनी खाएं गुड़ में दोष दिखाएंगे,
——–
कवि-ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-

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by Rishi Kumar

कविता- कुष्ठ रोग से पीड़ित माँ

May 13, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- कुष्ठ रोग से पीड़ित माँ
—————————————
साहब मुझको पैसा दे दो
बच्चों को मेरे भोजन दे दो
ठंड लगती है भारी अब तो
इन बच्चों को कपड़ा दे दो

क्या है गरीबी जाने बच्चे
हालत को क्या पहचान बच्चे,
कुष्ठ रोग की रोगी मैं हूं
मेरे रोग को क्या जाने बच्चे

तन पर कपड़ा जो भी मेरे
जिनसे मांगी, देते बिचारे
सुबह से हाथ फैलाए बैठी हूं
मेरे बच्चों की कोई मदद करें

भूख सताती ठंड सताती है
मुझको सताती मेरी बीमारी है
बच्चा भी मेरा देख रहा
क्या कोई रोटी देखकर जाता है

देखो मां कोई आ रहा है
हाथ पसारो वह दे रहा है
मां के आंखों में आंसू आ गए
भीख न देकर डांट रहा है

भूख के मारे एक पेट पकड़कर बैठा है
भूख प्यास से एक अंगुली चाट रहा है
भाग गरीबी भारत से तू
साथ में रहकर भीख मांगना सीख रहे है

शिक्षा स्वास्थ्य की इन्हे जरूरत है
जग में मां से सुंदर ना कोई मूरत है
हर हालत में, माँ बच्चों को पालेगी
मां की पूजा हो यह सब की जरूरत है
———————————————–
कवि-ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-

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Rishi Kumar

by Rishi Kumar

हाथ से

May 8, 2021 in Other

क्या छिपा रही हो हाथ से,
क्या देख रही हो आख से,
लग रहा जुखाम हुई आपको
जो नाक पोछ रही हो हाथ से,
———
✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-

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Rishi Kumar

by Rishi Kumar

हाथ से

May 8, 2021 in Other

क्या छिपा रही हो हाथ से,
क्या देख रही हो आख से,
लग रहा जुखाम हुई आपको
जो नाक पोछ रही हो हाथ से,
———
✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-

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Rishi Kumar

by Rishi Kumar

व्यंग्य

May 8, 2021 in Other

व्यंग्य
——————
लड़कीया खुबसूरत होती है,
लड़के गरीब अमीर होते है,
लड़कीयो की संपत्ति सुंदरता है
लड़कों की खूबसूरती पैसा है,
इसलिए विचार करो
लड़कों तुम धन कमाओ
इतना कमाओ रोज तुम,
सपना चौधरी को घर पे नचाओ तुम
————
✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-

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Rishi Kumar

by Rishi Kumar

शान्ति के दूत हो

May 8, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता-शान्ति के दूत हो
——————————–
शांति के दूत हो
जीवन के स्त्रोत हो,
अशोक तुम महान हो,
प्रिय दर्शी राजा
सबके सम्मान हो,
शोषित उपेक्षित के,
तुम ही उत्थान हो,
कुल का गौरव,
बुद्ध के संदेश हो,
विश्व विजेता तुम,
शांति के प्रतीक हो,
उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम,
फैलाएं बुद्ध का संदेश हो,
सर्व धर्म रक्षा करते,
हिस्ट्री में महान हो,
कलिंग का युद्ध देख,
बुद्ध ओर चल दिए,
अस्त्र शस्त्र छोड़कर,
बुद्ध भक्त बन गए,
शिक्षा स्वास्थ्य सब खातिर,
राज्य खजाना खोले,
नाली सड़क चारों ओर,
बाग लगवाये,
पशु पक्षी जीव जन्तु,
सब के लिए न्याय नियम था,
प्रजा हित समय रख ,
सब के लिए प्यार था,
बेटा और बेटी,
धम्म का प्रचार किये,
चारों ओर शांति फैले,
बुद्ध का संदेश दिये,
—————————
ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-

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Rishi Kumar

by Rishi Kumar

बुद्ध भक्त भीमराव

May 8, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- बुद्ध भक्त भीमराव
————————————
बुद्ध भक्त भीमराव,
आपको फिर से आना होगा,
उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम,
भारत को बौद्धमय बनाना होगा,
अशोक चंद्रगुप्त के सपनों को,
भारत के घर-घर पहुंचाना होगा,
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई,
सबको बुद्ध का उपदेश सुनाना होगा,
सब का दुख सुख हो जाए,
अष्टांगिक मार्ग पर चलना बताना होगा,
जाति धर्म पाखंड छोड़ू,
नफरत इर्ष्या द्वेष को छोड़ू,
अनुचित खर्चा नशा को छोड़ू,
छोड़ू भगवान भरोसे रहना ,
हाथ पकड़कर मंदिर की जगह ,
शिक्षा मंदिर में ले चलना होगा,
तेरे अनुयाई लाखों हैं,
कोई चर्च में जाता,
कोई मंदिर में जाता,
जाता कोई दुनिया के आडंबर में,
कहे ऋषि सब कुछ करना,
बुद्ध भीम के शरण में रहना,
जीवन उत्तम से उत्तम हो जाएगा,
जब कोई तुम्हें सताएगा,
भगवान से पहले –
तुम्हें बचाने संविधान खड़ा हो जाएगा,

———————————————
कवि-ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-

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राम मेरे आदर्श है

May 8, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- राम मेरे आदर्श हैं
———————————–
राम मेरे आदर्श हैं भाई
भारत माँ के पुत्र हैं भाई,
जीसस मोहम्मद गुरु नानक बुद्ध से पहले
राम दुनिया के भगवान हैं भाई,
रघुकुल के प्राण हैं,
शबरी निषाद की जान हैं,
माँ सीता के प्राण प्रिय हैं
भक्त हनुमान के भगवान हैं,
अहिल्या की पहचान हैं,
सुग्रीव के वरदान हैं,
पापी बालि के लिए काल,
पुत्र अंगद के अभिमान हैं
जटायु के सम्मान हैं,
नर नील के आदर्श हैं,
भक्त विभीषण के छांव हैं
सुपर्णखा के लिए सबक राम हैं,
हम दुनिया के मजहब में,
उलझे हुए इंसान है,
मैं भारतीय ईसाई होकर भी,
राम से ही मेरी पहचान हैं,
मानो चाहे जिस धर्म भगवान को,
राम जैसा मर्यादित पुरुष कहाँ मिलेगा,
वैरी, वैरी के भाई का शुभचिंतक हो,
दुनिया में ऐसा भगवान कहाँ मिलेगा,
——————————————–
✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-

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माँ पिता होगी

May 8, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- मां पछताई होगी
——————————–
मां बहुत पछताई होगी,
बेटी को जन्म देकर रोई होगी,
पढ़ी अखबार में-
दो वर्षीय बच्ची के रेप की घटना जब,
मां बच्ची को सीने से लगाकर रोई होगी,
लाखों मन्नत कुलदेवता को याद किया,
रहे सुरक्षित बेटी के लिए दुआ किया,
आंखों में भर भर के आंसू रोती है,
रोते-रोते बेटी को लेकर सो जाती है,
पछताती है जब,
बेटी के लिए मन्नत मांगा था,
मां रोते-रोते अंधी होती,
जब एक दरिंदा बेटी पर एसिड फेंका था,
मां सोच रही है,
मै मर जाती बचपन में तो अच्छा था,
मेरे कोख बेटी ना आती तो अच्छा था,
मेरी इज्जत बच जाती आज सवेरे,
घात लगाए यदि खेत में ना बैठा होता,
दीया संस्कार भारी था,
फूलों में उसे पाला था,
सुंदर इतनी जैसे ताजमहल की मूरत हो,
मूरत को बदसूरत कर दिया,
जब उसे सोशल मीडिया पर बदनाम किया,
सब लोग हंसे,
दुनिया भर की सवाल करें,
मां रोते-रोते पागल हो गई,
जब उसके बेटी को-
लोगों ने बदचलन कहा,
सून भारत के लोग सभी
ऋषि भी तुमसे पूछ रहा,
जग गलती बेटी में देखें
बेटे को क्या सजा दिया,
शासन को सौंप जरा
करके नपुंसक छोड़ जरा,
बेटी से हमदर्द है तुमको,
बेटे को घर से बाहर करके दिखा
—————————————–
✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-

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कमाई करो

May 8, 2021 in मुक्तक

प्यार से पहले
कमाई करो
धन हो या शिक्षा
उसकी रोपाई करो,
भूखे कभी न रहोगे
ठग कभी न जाओगे,
दुनिया तुम्हें रुलाएंगी,
है ज्ञान तो रोने से बच जाओगे,
शिक्षा- संघर्ष सवाल देती है
धन- स्वाद, वस्त्र साधन देता है,
जीवन को उत्तम से उत्तम रखना चाहो
सिर्फ शिक्षा के प्रेमी के संग मिलकर रहना है
✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-

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तरस आता है

April 14, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- तरस आता है
——————————————
हे गरीबी
तुझ पर –
तरस आता है,
क्या बिगाड़ तू पाई इंसान का|
चाहे तू और
बर्बाद कर दे,
चाहे तू और
भिखारी कर दे,
जो इच्छा हो
तेरी आज कर दे,
कंगालो की
तरह उसे बना दे,
बीमारों की
तरह उसे बना दे,
एक दिन ठीक होकर
काम पर जाएगा
बोल गरीबी क्या बिगाड़ पाई तू इंसान का|
आज उसे
मिट्टी में मिला दे,
चाहे उसे
रोड पर कर दे,
चाहे उसे
खेत में कर दे,
हां रोएगा-
छठ भर सही
पर सोएगा,
बोल गरीबी ,क्या बिगाड़ पाई तू इंसान का, सुबह-सुबह,
भीख मांगने जाएगा,
जो मिलेगा,
पकवान समझ खाएगा,
दाने दाने के लिए तरसे वह,
अस्तित्व के खातिर भटके वह,
लाख ठोकर मिले उसे,
सब के आगे हाथ फैलाता है,
दिन में उसे कुछ मिल जाता है,
गरीबी कुछ नहीं कर पाई तू,
किसी को मिटा नहीं पाई तू,
मरा होगा कोई भूख से अगर,
गरीबी तेरी यह कृपा नहीं,
मौत दुख सुख जीवन की सच्चाई है,
जब सोचता हूं तो ,
गरीबी तुझ पर तरस आता है,
गरीबी बचा अपने वजूद को,
कोई ठान ना ले
तुझे भगाने को,
अपने वंश से
तेरा अस्तित्व मिटाने को,
फिर कहां जाएगी तू,
उसके जीवन घर में स्थान नहीं पाएगी तू,
————————————————-
कवि ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’

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राम

April 13, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता -राम
—————-
राम तुम्हें फिर आना होगा
आओ बाण उठाना होगा
आतंकवाद से मुक्त बना
भारत को आर्यावर्त बनाना होगा
चाहे पाक के पाले आतंकी हों
चाहे जम्मू के पत्थरबाज ही हों
रोती है घर-घर सीता
आओ खत्म करो चाहे दाऊद इब्राहिम हों
राम तुम्हें आना होगा
देश की हर सीता को सुरक्षित रखना होगा
युद्ध करो भारत के घर घर रावण से
देश का शासन संभालना होगा
शबरी निषाद को गले लगाना होगा
भारत में रेपिस्ट की बाढ़ चली है
भारत में तानाशाहों की सरकार बनी है
संसद के कुर्सी पर बैठे हैं अपराधी
आओ राम –
संसद को अपराधीयों से मुक्त बनाना होगा
कोई गुंडा – कोई चोर, कोई बलात्कारी है
करके घोटाला उद्योगपति बना है
इस समस्या का हल कैसे होगा
राम तुम्हें आकर बताना होगा
मनीषा बाल्मिक का रेप हुआ था
उसके संग बड़ा अत्याचार हुआ था
शासन इतनी गंदी निकम्मी था
आधी रात को तेल से अंतिम संस्कार हुआ था
परिजन मुँह को देख न पाए बेटी का,
नेता ने राम तुम्हारे नाम पर वोट लिया
जनता को जाति धर्म में छोड़ दिया
ऐसी स्थिति में राम तुम्हें आना होगा
कोई घटना अब ना घटे
इसलिए आकर रामराज्य स्थापित करना होगा
——————————————————–
✍✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-

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मोह छोड़ कर थप्पड़ मारो

April 13, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- मोह छोड़ कर थप्पड़ मारो
———————————————
मां मुझको
चलना सिखा दे,
डगमग करते पैर मेरे
अंगुली पकड़ के राह दिखा दे,
बहुत बड़ी गलती किया हूं,
सभ्यता संस्कारों को भूल गया हूं,
आदर्शों से मुंह मोड़ हूंँ,
मां!इंसान नहीं शैतान बना हूं,
तेरे हर थप्पड़ को भूल गया हूं,
आ कान पकड़कर थप्पड़ मार,
पास बैठा कर हर बात बता,
संस्कारों का मन में दीप जला,
परमारथ की बात सीखा का,
जन नायक राष्ट्र नायक,
वीर पुरुष की कथा सुना,
रोज उठकर दादा दादी का,
घर के सभी बड़े, बुजुर्गों का,
सुबह शुबह प्रणाम करने की बात सिखा,
घर का काम करूं,
खेती बाड़ी का ध्यान रखूं,
पशुओं का भी ख्याल रखूं,
कुल समाज रिश्तेदारों का सम्मान करु,
ना किसी से करूं झगड़ा,
ऐसी मुझको बात सिखा,
बड़ी नादानी कर बैठा हूं,
दारू पीकर नाली में गिर गया हूं,
हालत मेरी ऐसी है,
कुल की इज्जत धो चुका हूंँ,
मां मेरी तुम वैद्य बनो,
नशा मुक्ति की दवा बनो,
मोह छोड़कर थप्पड़ मारो,
मेरी जीवन की राह बनो
——————————
✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-

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होगा कोई लोभी

April 11, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता-होगा कोई लोभी
——————————-
होगा कोई लोभी,
होगा कोई ना समझ,
जो तुम्हें खरीदे रुपयों में
वरना तुम्हारी कीमत चवन्नी से भी कम है,
अरे….
होगा कोई आंख का अंधा,
जो तुम्हारी सूरत को ,उगता चांद कहे,
मेरी नजर में तुम बदसूरत सूरत हो,
क्योंकि कवि बिन देखे कुछ नहीं कहता।
होगा कोई कामी पुरुष,
दिल में जगह पाने के लिए,
सच्चाई ना कहके के बढ़ाई करें,
लंगड़ी काली कानी बदसूरत को भी,
अप्सरा मेनका से तुलना करें,
बात बात पर तुम्हें हँसाये
सपनों में लेकर चांद पर जाए,
सच्चाई को देखता नहीं
मां बाप का पैसा तुम पर उड़ाए,
खरीदी होती कुछ किताबें,
तुम्हें देता मुझे एतराज नहीं,
एतराज मुझे इस बात से है,
तुमने उसे घुमाया-
पर पढ़ने के लिए कहा नहीं
वो अंधा था,
वो पागल था,
बंदे में हर गुण था,
लोगों को कैसे परखे,
उसमें यह समझ नहीं था,
परखा होता तुम्हें अगर,
यह अच्छे घर की निशानी नहीं,
यह अच्छे संस्कारों में पली नहीं
यह रावण की बहन इच्छाधारी सूपनखा है
किसी अच्छे भाई की बहन नहीं है,
मेरे देश की हर बेटी,
सीता मरियम राधा मीरा-
के पद चिन्हों पर चलती है,
यदि कोई उल्लंघन करके चलती,
और रावण की बहन है
विभीषण की बहन नहीं|
—————————————
कवि-ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-

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माँ और कवि

April 11, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता – मां और कवि
—————————-
मां और कवि में ,
अंतर इतना,
सीता और बाल्मिकी में,
अंतर जितना,
मां सुधा अगर है,
कवि पारस पत्थर है,
मां सरिता गर है,
कवि सागर की गहराई है,
मां गंगा सी निर्मल,
या मानस की चौपाई है,
कवि ब्रह्म समान,
कवि ने ही मां की महिमा बतलाई है,
यदि मां प्रेम की मूरत है,
कवि मां की महिमा की सूरत है,
मां बच्चों की जरूरत है,
कवि दुखियों की जरूरत है,
जान गई रोने से,
बच्चे को भूख लगी है या टट्टी,
कवि जान गया रोने से,
दिल जलता आग की भट्टी से,
मां हर्षित होकर रोती है,
बच्चे को पाकर सोती है ,
कवि खुद की व्यथा लिख कर सोता है,
दुनिया सुनकर हंसती है,
मां आंखों में आंसू भर कर
गाल पर थपकी देती है,
कवि शोक लहर में हो करके,
कविता बैठ के लिखता है,
मां रो भी दे आकार बने,
कवि सौ ग्रंथ लिखे,
ना आकार बने,
बने आकार,
प्रकार कई,
मां के हर शब्दों में,
प्यार कई,
कवि और मां पर कविता लिखना,
मेरे बस की बात नहीं ,
कहें ऋषि मैं हार गया,
तुकबंदी से चलता काम नहीं,
————————————-
✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’

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आलसी तू आलसी है

April 11, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- आलसी तू आलसी है
————————————–
आलसी तू आलसी है
तू बेरोजगार नही है
आलस छोड़ काम कर
वरना तेरी खैर नही है,
डिग्री हैं डिप्लोमा हैं
है पास तेरे कोई हुनर,
कुछ नहीं है तो क्या कर सकता
भैंस चरा और खेती कर,
वक्त नहीं बिगड़ा है
वक्त नहीं गुजरा है,
बात मेरी मान
कुछ सीख अभी समय बहुत है,
बाल काटना सीख अभी,
वाहन चलाना सीख अभी,
वाहन बनाना सीख अभी,
कर्ज ले सरकारी तू-
पर काम शुरू कर आज अभी,
सस्ता वाला काम बताऊं,
हलवाई का काम सीख ले,
इससे अच्छा काम बताऊं,
चाय पान का धंधा कर ले,
छोड़ आलसी आलस करना,
दुनिया में तू भी नाम कमा,
सब्जी की दुकान लगा ले,
कम पूंजी में अच्छा कमा,
जितना मेहनत आज करे तू,
उतना सुख बच्चे पाएंगे,
वरना वह भी किसी की भैंस चरायेंगे
बैठ के तेरे संग बीड़ी फूंकेगें,
घर छोड़ के परदेश चला जा,
कारखानों में काम मिलेगा,
समय बिताने से अच्छा है,
परदेसी बन हर काम मिलेगा,
———————————
✍✍ऋषि कुमार प्रभाकर

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खबर ले ले

April 7, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- खबर ले ले
————————-
कोई तो हो खबर ले ले,
कहां थे अब तक-
यह सवाल पूछ ले,
वक्त का हिसाब मांगे,
साथ रहने का साथ मांगे,
हो फोन जब व्यस्त मेरा,
फोन पर ही दो बात कह दे,
वक्त गुजार रहे या,
औरों को वक्त दे रहें,
क्या बात है आजकल,
हमसे जो दूर हो रहें ,
रुठ जाए इसी बात पर,
उसे मनाने के लिए –
हम कई उपाय कर रहे,
पुरानी बातों को याद करके
पहले मिलन का वही गीत गा रहे,
नाराजगी दूर हो जाए,
पुराने पत्रों को हम चुम रहें,
हंसाने के चक्कर में
गाल पर एक चाटा मिला,
बेशर्म इंसान हो-
सुनने को यह शब्द मिला,
ठमक के नखरे के संग
बिस्तर पर लेट जाए,
बुद बुदाये क्रोध दिखाएं
कोई तो हो मुझसे रूठ जाए|कोई तो हो……
रूठ जाए हम उसे मनाए ,
प्यार में उसके गीत गाए,
सर दुख रहा है, तुम भी न खाओ,
कमरे से यह आवाज आए,
लाल किला कुतुब मीनार
ताजमहल की बात करूंगा,
शिमला रांची नैनीताल,
गोवा चलने की बात करूंगा,
सर पर हाथ फेर कर उसे मनाऊं,
पकड़ कर हाथ की उंगली उसे उठाऊं,
झटक दे हाथ मेरा-
फिर पास बैठ कर ,उसे मनाऊं
नाराजगी इतनी बड़ी हो जाए,
बिना गलती स्वीकार किए-
ना माफी पाऊं,
फिर उठे साथ चले
क्रोध पीकर प्यार दिखाएं,
कोई तो हो!
रूठे और मनाने का-
हमें भी अवसर दे जाए| कोई तो हो……..
——————————————————-
**✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’—

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बिल्ली की पूछ

April 7, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

बिल्ली की पूंछ
——————-
रुकी कलम अगर
भूत भविष्य बिखर जाएगा
रखो न हाथ गिरवी,
जमाना भूखे बच्चों को-
व्रती बता जाएगा,
जिन्हें शुद्ध पानी नसीब नहीं,
उन्हें बोतल का-
पानी पीने की सलाह दे जाएगा,
अब तो खबर बेखबर हुई
टीवी पर झूठी बहस हुई
रोजगार भ्रष्टाचार
रेप हत्या एसिड,
संसद में अपराधियों की संख्या बढ़ रही,
जनहित के मुद्दे सब गायब हैं,
हीरोइन की शादी, नेता की नींद,
सरकारी संपत्ति बेचने की डील,
किसकी बेटी भागी किसके साथ है
अश्लील जोक्स कार्टून,
निरोध,जापानी तेल से भरा अखबार है
बिल्ली की पूंछ
पर बहस हो रही है
टीवी पर कुछ बड़ाई कर रहे हैं
संसद में कुछ लड़ाई कर रहे हैं
एक आंख मारता
एक भक्ति के नाम पर झूठ बोलता,
जहां पशुओं से अधिक
इंसान की कीमत गिर गई,
गाय से अधिक-
भैंस की कीमत हो गई,
किसान भी कितना लाचार है,
गाय का दूध बिके ना साठ रुपए में,
गोमूत्र बिके सौ रुपए में,
इन पर बहस कौन करेगा,
मां भारती का दर्द कौन लिखेगा,
भूखे नंगे सो रहे जो फुटपाथ पर
उनका दर्द कौन लिखेगा,
हमें कुछ हाथ जुबा गिरवी लग रहे हैं
कविता को हथियार बनाकर,
‘ऋषि’ क्या तुम भी स्वतंत्र निष्पक्ष
हर मौसम में हर प्रकार की
जनहित से जुड़ी कविता लिख रहे ।
———————————————
**✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’—

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भारत रत्न तथा नोबेल

April 7, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- भारत रत्न तथा नोबेल
——————————————
मेरे बाद ख्वाब
सजाएगा कौन,
बुझते हुए दिए को
जलाएगा कौन,
सपना था ,
भारत रत्न नोबेल का,
अब इसे जीतकर लाएगा कौन,
अगर मेरा जीवन अधूरा रहा,
मेरे कुल वंश से पूरा करेगा कौन,
कोई तो होगा-
सपने को साकार बनाएं
संघर्षों से राह बनाएं
आज नहीं तो कल
जीत कर इनाम लाएं
मिट्टी में जो बोया है
रात दिन जो खोया है
सपने लेकर सोता हूं,
सुबह उठा खुद को
खाली पाता हूं,
मायूस कभी हुआ नहीं,
साहस से सपना देखा,
सपने की खातिर आलस्य कभी भी किया नहीं,
होगा कोई कुनबे में ही,
जो मेरा इतिहास पढ़ेगा,
मेरे कुनबे से ही
मेरे सपनों को पंख भी देगा,
साहित्य लिखूं साहित्य पढूं
पढ़ लिख कर यह काम करेगा कौन,
मैं जवानी में बीमार हूं,
लगता है आखिरी शाम है,
यह छोटा सा काम करेगा कौन,
मेरे कुल वंश से नोबेल लाएगा कौन,
अभी ख्वाब की शुरुआत थी
कर्म संग ज्जबात थे,
हौसले कभी टूटे नहीं,
सपने में इतने अधिकार थे,
ईश्वर से वरदान मांगता हूं,
अपने कुल वंश में यह काम मांगता हूं,
यह छोटा सा संघर्ष करेगा कौन,
————————————–
कवि ऋषि कुमार प्रभाकर

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फोन चोरी हुआ

April 6, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- फोन चोरी हुआ
——————————–
सुनो भाई,
कब तक गुजारोगे,
जीवन में चोरी करके,
मेरा या गैरों का-
फोन चुरा करके,
इस काम से क्या
जीवन सुधर जाएगा,
चोरी करके –
धन से घर भर जाएगा,
या समाज में
प्रतिष्ठा या सम्मान बढ़ जाएगा,
आखिर क्यों करते हो चोरी –
क्या यह रोटी कपड़ा मकान है,
कुछ को रोटी नसीब नहीं
बुरी दशा में चोरी की नहीं
मांग लेता है भिख कहीं
ढूंढ लेता है काम कहीं
भाग जाता है परदेस कहीं
थोड़े से पैसे के लिए-
कभी भी चोरी किया नहीं
किसी काम को करने में
आलस कभी भी किया नहीं
किया नहीं खुद को कभी,
खुदा के नजरों में बदनाम,
दे रहा हूं वचन तुम्हें
सदा अटल रहूंगा,
छोड़ दो चोरी करना
ना तुम्हें कोई चोर कहेगा
भटके हुए इंसान हो
मैं भी तुम्हें जीसस की तरह माफ करूंगा
————————————————
✍️कवि ऋषि कुमार प्रभाकर

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माफी एक हुनर है

April 4, 2021 in मुक्तक

माफी एक हुनर है,
सत्य अहिंसा का पूरक है,
राम कृष्ण ईशा को प्यारा है,
बच सकते है शान तुम्हारे
बिगड़े काम बने तुम्हारे
झुक कर देखो एक बार,
बागों में फूल खिले रोज तुम्हारे,
दो गांव की इज्जत आज बचे
सभ्यता संस्कृति फूल फले
दे दो माफी ले लो माफी
सच कांटों में भी फूल खिले
……………………………
कवि ऋषि कुमार प्रभाकर

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मित्रता में राम हो मित्रता में श्याम हो

April 4, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

मित्रता में राम हो
मित्रता में श्याम हो
बस अंगुली पकड़ के चलने दो
दिल में अपने रहने दो,
सत्य वचन, सत्य के प्रेमी,
ना बड़बोला,
हक है इतना
सब कुछ कहना,
स्व हित परहित,
सब कुछ कहना,
डांट प्यार से,
मां भाई बनकर ,
कान पकड़कर ,
गाल पर थप्पड़ देना,
गुरु का डंडा
मां के मुख से निकली वचन है गंगा
भाई पिता के हाथों का डंडा,
है सुधा संस्कार विजय का झंडा,
दादी तेरा डांट मिले,
बाबा के मुख से गाली,
तुम जो कहते अनुभवों से ,
हम जो करते बिन अनुभव से,
इसीलिए रूठ जाता हूं ,
फिर से मुझे आज संभालो
कच्चा घड़ा हू,
कच्चा घड़ा के जैसे टूट जाता हूं
————————————–
कवि ऋषि कुमार प्रभाकर

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अपना सावन

April 4, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

सावन तुमसे माफी है
माफी दिनकर कालिदास के बच्चों से है,
काफी दिन मै दूर रहा
दूर कारण-
फोन मेरा चोरी हुआ था,
अभी फोन लिया नही
पर सावन तुमसे दूर हुआ नही,
कहां गए सब ,
सावन आज बुलाता है,
पतझड़ जैसे दिखता है,
देख अस्तित्व को रोता है,
गालिब के बच्चों,
कालिदास के बच्चों
बच्चन की मधुशाला पीकर
क्या भटक गए हो,
कोई टैगोर की धरती से था,
कोई जम्मू कश्मीर से था,
कोही पूरब पश्चिम से था,
कोई दिनकर की धरती से था,
कोई प्रयागराज से था,
कोई कन्याकुमारी से था,
कहां गए सब सावन पूछ रहा है,
गर्मी जाति वर्षा आती,
वर्षा मे सावन पतझड़ जैसा लगता है
आओ मिलकर एक काम करें,
सावन के माध्यम से जनता से संवाद करें,
उसके हित की बात करें
देश धर्म का उत्थान करें,
हर कष्टों का उपचार करें ,
बिग बिगड़ी बातों को नजरअंदाज करें ,
सब मिलकर के सावन को कविता से भर ,
————————————————
कवि ऋषि कुमार प्रभाकर

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सब कुछ झूठा

April 4, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

सूरज जलकर
कब रोया
संध्या रातों मे
कब सोई
गुलमोहर का
साख से झरना
कब बंद हुआ
दशरथ माझी का
हथौड़ा कब बंद हुआ,
क्यों रोता है मूरख बंदे
सत्य प्रकृत ,
प्रकृत अनोखा,
बस लड़ना सीख
सब कुछ झूठा
………………
कवि ऋषि कुमार प्रभाकर

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पर्यावरण क्या है

January 28, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता-पर्यावरण है क्या
——————————-
सभी सुनो,
पर्यावरण है क्या,
क्या इसकी परिभाषा है,
प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से,
जीव जंतु मानव –
जिससे प्रभावित हो,
उसी को कहते पर्यावरण है|
अंबर भू धूप हवा
पानी वर्षा भूख अकाल
दूषित जल कोयला कंकड़
मोरम मिट्टी अंबर बिजली
सब पर्यावरण के अंश ही है|
मानव जिससे पीड़ित होगा,
मानव जिससे हर्षित होगा,
दूषित जिससे अंबर होगा,
सरिता जिससे सूखी होगी,
सागर की सारी मछली-
पानी में रहकर भूखी होगी,
या पानी पीकर मरती होगी,
समझ जरा जग के बंदे
कांटा उपवन पर्वत नंगे,
जल थल अंबर सब दूषित है,
यह बात सभी पर्यावरण के अंतर्गत है
———————————————
–✍️ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’—

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चार आने की संपत्ति को

January 28, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता-चारआने की संपत्ति को
—————————————
चार आने की संपत्ति को
रुपये में खरीदा था
खरीदा उस वक्त मैंने
जब बाजार में भाव गिरा था,
मैं बाजार में
नया खरीददार
बोली लगी, मैं समझ नहीं पाया
सस्ती वस्तु को ,ऊंचे दाम में खरीद लाया,
अब रोता हूं माथा पीट कर
क्रोधित हूं खुद अपनी समझ पर
मंडी में कई खरीददार थे,
सबकी नजर थी वस्तु पर , किसी ने खरीदा नहीं
जितने खरीददार मित्र थे
कमी किसी ने बताई नहीं
अब बदबू से परेशान हूं
मक्खियों से परेशान हूं
परेशान हूं इस बात से
पूंजी गई ,गया समय मेरा
छूट गए ग्राहक मेरे
टूट गए खुद रिश्ते मेरे
संभल जाओ अभी वक्त है
वरना गंदगी के कारण तुम्हारा
प्राण भी रूठ जाएगा
——————————-
कवि ऋषि कुमार “प्रभाकर”

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Rishi Kumar

by Rishi Kumar

आपसे दूर हूं

January 28, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता-आपसे दूर हूं
————————-
पापा मैं आपसे दूर हूं
आपके आशीष से भरपूर हूं,
कमबख्त काम ने घेरा है मुझे
ऐसा बंधक है बनाया
न गांव आ सकता
ना शहर छोड़ सकता,
गांव में जब आता हूं,
शरण स्नेह पाता हूं,
सरकार अब तुम दया करो,
मां बाप से बच्चों को न अलग करो,
शहर के जैसा गांव में भी,
अच्छी, सस्ती ,सुविधा ,युक्त,
यूनिवर्सिटी की व्यवस्था करो,
क्यों जाएं दूर शहर
प्रेम पर ना ढाओ का कहर,
मात-पिता संग रहने दो
उनकी आज्ञा में चलने दो
मम्मी पापा का छांव मिलेगा,
स्नेह संस्कार से हर बालक,
उच्च आदर्शों के संग आज्ञाकारी बनेगा,
ना कोई फिर
एसिड फेंके,
ना हत्या –
ना जुर्म करें,
बाल अपराध घट जाएगा,
जिस दिन से मम्मी पापा का –
पैर छूकर, बच्चा कॉलेज विश्वविद्यालय जाएगा
————————————————-
कवि-ऋषि कुमार प्रभाकर

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by Rishi Kumar

बावरी

January 27, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता-बावरी
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सुन बावरी
क्यों लड़ती है मुझसे,
एक दिन रूठ जाऊंगा,
तूझे क्या पूरा शहर छोड़ जाऊंगा,
संग में कॉलेज आना जाना,
पार्को में समय बिताना,
होटल में खाना खाना,
फोन पर चैटिंग करना
मेरे खातिर मम्मी पापा से,
चैटिंग नंबर रोज मिटाना,
छत से छिप छिप कर बातें करना,
फिर किसके संग करेगी तू,
जब मैं ही ना रहूं इस दुनिया में,
इसीलिए तो कहता हूं
जब तक हूं मिल ले मुझे से,
जब तक हूं लड़ ले मुझसे,
कहती नहीं क्यों नहीं मन की बात
मैं समझ गया अब
क्यों लड़ती है मुझसे
चल चाह तेरी मैं पूरी कर दूँ,
मम्मी पापा को आज बुला ले,
सिंदूर से तेरी मांग सजा दूं,
मरने का श्राप सदा देती है
क्रोध में आ कर लड़ती है
जिस दिन भर दूँ, मांग मैं,
करवा चौथ का व्रत रखकर,
रहूं सुहागन ईश्वर से वरदान भी मागेगी,
————————————————-
**✍️ ऋषि कुमार प्रभाकर—

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Rishi Kumar

by Rishi Kumar

जहर पिला दो

January 27, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता-जहर पिला दो
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जहर पिला दो
जहर खिला दो
मम्मी पापा उपकार करो
जन्म नहीं देना मम्मी
दर्द मेरा एहसास करो
मुझ नन्हीं बच्ची पर
हवसी रहम नहीं करता है,
मन की प्यास बुझा कर के
मुझ को आग हवाले करता है
रोती हूं खून से लथपथ
मुंह में कपड़ा होता है
मुंह पर चांटा मार रहा
कुत्तों सा नोच रहा होता है
चाह नहीं मां मैं भी आऊं
आंचल में तेरे दूध मैं पाऊं
होगा मां भला तेरा-
दूध के संग जहर पिला दो,
बचपन बीते संग संग तेरे,
मिले सयानी सब के संग,
जात पात के भेंट चढ़ जाऊंगी
जिस दिन मम्मी तुम सबको
अपने कान्हा का पता बताऊंगी
समय के संग
सुंदरता आए,
सुमन भी अपनी,
पहचान बनाए
क्या दोष मेरा आप बता दो
एसिड से तन है जलता
इससे बचने का उपाय बता दो,
घुट घुट के मरने से अच्छा है
झुक झुक के चलने से अच्छा है,
मां मुझको बचपन में ही जहर पिला दो,
खान-पान वेशभूषा पर
मां आज भी पाबंदी है
देश मेरा आजाद हुआ है
निर्भय होकर मुझे –
चलने की आजादी नहीं है
जहर पिला दो
भ्रूण हत्या कर दो
मां मैं तेरी प्यारी गुड़िया हूं,
दुख नहीं मुझको
मैं तेरे हाथों से मर जाऊंगी,
मां समझ मुझे,
फिर धरती पर लाना मुझे
सब कुछ सह सकती हूं
पर रेप का दर्द नहीं सह पाऊंगी,
—————————————–
कवि-ऋषि कुमार प्रभाकर–

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मुझे वरदान दो

January 23, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता -मुझे वरदान दो
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वरदान दो वरदान दो
मुझे वरदान दो,
उठी है जो लहर मुझ में
हो विकट रूप जैसा
गति तेज सुनामी जैसा
साकार हो आकार हो
प्रकार हो ,मेरे ना विपरीत हो,
वह काम दो ,जिससे नाम हो
मेरे काम से पहचान हो,
ईश्वर तुझ से ही आशा है
ऐसा मुझे वरदान दो, वरदान……
तूफान के वेग जैसा
चिड़ियों के उड़ान जैसा
हमें दो ताकत ऐसी
गिद्ध में नेत्र ज्योति जैसी
आकाश में विस्तार जैसी
सरिता की धार जैसी,
पृथ्वी के धैर्य जैसा
मेरा पहचान हो ऐसी
ऐसा मुझे वरदान दो,
वरदान दो….
हो गंगा की लहर मुझ में
आप सबका पाप धूल जाए
हो ऊंचाई हिमालय सी
हवा शत्रु को रोक पाए
मातृभूमि की सेवा में
जीवन अर्पण कर जाएं
मेरा सुख सबके सुख में
सच्चा सुख मातृभूमि की रक्षा में
सबको प्यारा हो
ऐसा मेरा जीवन दर्शन हो, वरदान दो…
——————————————————–
**✍️ऋषि कुमार प्रभाकर

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भाई खुश हो

January 19, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता-भाई खुश हो
————————–
भाई खुश हो,
आज तुम्हारा जन्मदिन है,
मैं तो तुमसे दूर हूं
मेरा आशीष तुम्हारे साथ है,
प्यार मिले ,
सत्कार मिले,
सम्मान मिले,
मिले जगत से –
खुशियों का सार मिले,
खुदा से बस इतना कहती हूं
हर सुख तुम्हें आज मिले,
हर बाधा तुमसे दूर रहे-
बनो सदा हिमगिरी जैसे
रक्षक बनकर खड़े रहो,
विशाल बनो अंबर जैसे
सूरज जैसा तेज रखो,
क्या दू गिफ्ट तुम्हें
कुछ समझ नहीं आता है ,
प्यार भरे आशीष को
शुभ संदेशों को भाई स्वीकार करो,
साहस रखो सैनिक जैसे
विचार रखो गांधी जैसे,
राह चुनो बुद्ध की जैसी,
गर ज्ञानी ,भारत शुभचिंतक बनना हो तो
बनाना विवेकानंद के जैसे,
खूब पढ़ो,
सद्गुण संस्कार रखो,
नैतिक आदर्शों से भरे रहो,
सर्वज्ञान संपन्न बनो,
मम्मी का आज्ञाकारी पुत्र बनो,
एक दिन-
बनो बाग के माली तुम,
देश समाज कुल परिवार की
अच्छे से करो रखवाली तुम,
स्वस्थ रहो, मस्त रहो ,खुशहाल रहो,
जहां रहो ,शीतल छाया चांद की जैसा लिए रहो,
—————————————————-
✍️-ऋषि कुमार प्रभाकर–

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खाएंगे

January 17, 2021 in मुक्तक

मुक्तक-खाएंगे
——————
अब बनाने वाले ही खाएंगे ,
कोई खाने वाला रहा नही,
लगता है, सब दावत मे गए,
या घर सब, रुठ के छोड़ गए
पर गए कहां यह पता नही,
पता होता तो हम उन्हें बुलाते,
अब घर सूना सूना लगता है,
कवियों के बिन सावन अपना
रुखा रुखा सा लगता है|
जो जुड़े हुए हैं ईश्वर उनके साथ रहो,
जो जुड़ कर चले गए –
ईश्वर उनको मेरा पैगाम सुना दो,
कोई याद किया है
कविता शायरी गजल गीत,
पढ़ने के लिए उत्सुक है,
———————————
**✍️ ऋषि कुमार प्रभाकर–

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कब्र पर आकर

January 17, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- कब्र पर आकर
———————-
दौड़ रही हूं,
इधर उधर,
ढूंढ रही हूं,
डगर डगर,
पूछ रही हूं,
नगर नगर,
कोई मुझको,
पता बता दो,
मेरे साजन का,
घर बता दो|
कहाँ बसे हो
मुझे छोड़ कर,
आओ फिर से,
मिल जायें
हो दर्शन –
अगर तुम्हारा,
सब कष्ट मेरे मिट जायें,
हंसना लड़ना
कितना अच्छा था,
जब तुम रूठे
मैंने रोज मनाए,
जब मैं रूठी,
मेरे लिए तुम
खीर पकाए,
डरते डरते
ले आते पास मेरे,
सोना सोना कहके
सौ बातों से मुझे मनाते,
अपने हाथों से मुझे,
खीर खिलाते,
ठुकरा दी जब खीर तुम्हारी,
झट आंखों में आंसू भर लेते,
मुझे पता है
मैं मिल नहीं पाऊंगी,
यह मेरा पागलपन मेरा प्यार है,
सुबह शाम कब्र पर आकर
खुद से बातें करती हूं
——————————
—-✍️ऋषि कुमार प्रभाकर–

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क्या खोज रहे हो

January 12, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- क्या खोज रहे हो
——————————–
क्या खोज रहे हो,
कहाँ भटक रहे हो,
अंदर सुख हैं-
बाहर सुख नहीं हैं
खुद को मजबूत बना
हरदम लड़ अपने से,
जिस दिन विजय तू पायेगा,
ज्ञानेंद्रिय व कर्मेंद्रिय सहित
मन मति मद चित्त रूह पर
उस दिन ब्रह्म समान हो जाएगा,
न्याय सभ्यता प्रेम करुणा,
अनेका अनेक गुण-
धर्म , ज्ञान-विज्ञान ,दर्शन से
ऊपर उठकर-
राष्ट्र प्रगति विश्व प्रगति में,
जल जनहित पर्यावरण में
ज्ञान की गंगा तुमसे ही
होकर निकलेगी|
——————————-
—ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’—

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by Rishi Kumar

विश्व पटल पर हिंदी चमके

January 10, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता-विश्व पटल पर हिंदी चमके
——————————————
विश्व पटल पर
हिंदी चमके
ऐसा राग सुनाता हूं,
दुनिया भर के लोग सुनो
क्यों हिंदी में कविता लिखता हूं,
जब दुनिया में
कोई भगवान नहीं
हरि ने दुख हरा नारी का
असुर खींच रहा था पल्लू
हरि ने चीर बढ़ाकर-
लाज बचाई नारी का,
दुनिया में जब दर्द बढ़ा
भारत से एक धीर बढ़ा,
दुख का निवारण तब होगा
बुद्ध शरण में जाना होगा,
दुनिया जिसमें शौक रखे,
महावीर उसे इनकार करें,
नग्न ही रहकर संदेश दिया,
कामुकता उनको छू न सकी
ऐसे-ऐसे धीरे-वीर थे भारत में,
ईश्वर भी माथा टेके गुरु चरणों में,
शिष्यों में कुछ शिष्य हैं ऐसे,
गुरु प्रतिमा सम्मुख विद्या सीखें,
दुनिया जब शून्य से शून्य रही,
तब भारत ने शून्य दिया,
भारत देश निराला है
बहुभाषी कई संस्कृत वाला है,
आयुर्वेद मिलेगा
योग मिलेगा,
वैदिक ज्ञान सहित-
गुरुकुल का इतिहास मिलेगा,
चंद्रगुप्त की धरती है यह,
युद्ध छोड़ जो-
बुद्ध का उपदेश दिया
उस अशोक की धरती है यह,
सारी महिमा संस्कृत में
संस्कृत, हिंदी भाषा की जननी है,
क्यों न गाऊँ हिंदी मैं
मेरी मातृभाषा हिंदी है
सर्वत्र रहे यह हिंदी
विश्व पटल पर मेरी हिंदी हो।
————————————
**✍️ ऋषि कुमार प्रभाकर

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by Rishi Kumar

कवि का धर्म

January 9, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

मुक्तक-कवि का धर्म
————————-
कवि का कोई
धर्म नहीं हो सकता है,
मंदिर मस्जिद चर्चो में
भगवान नहीं हो सकता है,
दुख को दुख कहता है जो
सुख को सुख कहता है जो
खुद के ,चाहे औरों पर हो,
सबके आंसू को आंसू समझे,
लाख मुसीबत आए उस पर,
सत्य के सिवा कुछ ना समझे
जो मानव को नीच बताएं
वह इंसान नहीं हो सकता है,
गाली बकते नारी को जो,
ईश्वर से आशीष नहीं पा सकता है,
सम्मान करो अपमान नहीं
इंसान बनो भगवान नहीं
भक्त-मित्र बनो सुदामा जैसे,
मत भक्त बनो रावण जैसे,
गीत लिखो या प्रीत लिखो,
हार लिखो या जीत लिखो,
लिखना जो भी सोच समझ के लिख
देश धर्म जनता के सब हित में लिख
———————————————
—-ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’

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by Rishi Kumar

ग़ालिब

January 7, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- गालिब
——————-
कवि जागो
लेखक जागो,
जागो जग के
शायर सब ,
रोयेंगे कल
यदि आज नहीं
जागे हम|
प्रकृति हमारा
खंडहर हो रहा
कल कहाँ से
उपमा लायेंगे
जब फूल नहीं
बागों में,
सुगंध नही
फूलों में,
निर्मल जल की
आस नहीं,
बोतल से-
मिटती सबकी
प्यास नही|
सूख रही
सरिता सारी
रोती आज
धरा भी है
बे मौसम
वर्षा होती है
प्यासी धरती
रहती है।
जंगल में आग लगी
कई जीव बलिदान हुए
हो व्याकुल जल से हिरनी,
क्या लोग सभी –
सागर का खारा पानी पीएं
सावन में अब
जोश नहीं
बसंत में अब वो
फूल नहीं,
पतझड़ में
वर्षा होती है
वर्षा में अब,
वर्षा नहीं
नव कवि
‘दिनकर’ के बेटों
‘वर्मा’ के सब
बच्चें सुनो
कलम उठा
गीत बना,
क्यों चुप हो
ग़ालिब के बच्चों
आओ मिलकर सब
एक काम करें
पर्यावरण पर
हम कविता
तुम शायरी,
और कोई गीत लिखें।
—————————–
—ऋषि कुमार प्रभाकर

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by Rishi Kumar

पीपल का वृक्ष

January 6, 2021 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता -पीपल का वृक्ष
—————————-
जीवन जीने का आधार क्या है,
हर धर्मों का सार क्या है,
मानव क्या पाता है,
जीवन में क्या खोता है|
वृक्ष लगाओ संदेश मिला है,
रोग मिटेंगे, वैज्ञानिकों ने बताया है|
मंदिर की सुंदरता बढती है
जब पीपल नीम की छांव मिले,
आओ वृक्ष लगाकर उपकार करें,
भारत मां का सिंगार करें|
गेंदा, गुड़हल और गुलाब,
खिले चमेली सुंदर बाग|
देव शरण कैसे जाएं,
कहां से बेल के पत्ते लाएं|
भवन बने हैं चारों ओर,
वृक्ष नहीं है एक भी ओर|
बढ़ई से पूछो,
हमें किन किन कामों में लाया है|
ताजमहल हो ,या लाल किला-
या मस्जिद, रावण, राम की मंदिर हो,
खिड़की दरवाजा चौखट किस से बनता है?
कहे ऋषि अब कृपा करो,
गगन व धरा पर दया करो|
शोध करो विकास करो,
जीवों पर अब दया करो|
सभी धर्मों के लोग सुनो
पीपल का वृक्ष लगाओ
मुफ्त में 24 घंटे ऑक्सीजन पा‌‌ओ,
——————————————–
**✍️ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’——-

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