भोजपुरी देबी गीत 1 – बिना दरसन जाइब ना |

April 2, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी देबी गीत 1 – बिना दरसन जाइब ना |
केवन करनवा भुलइली माई बेटवा करे पुकार हो |
बिना दरस जाइब ना माई छोडब ना तोर दुयार हो |
अबोध बलकावा माई पूजा पाठ नाही जानीला |
जगदंबा जगजननी माई तोहके हम मानीला |
देई डा दर्शनवा माई दे दा आफ्ना दुलार हो |
केवन करनवा भुलइली माई बेटवा करे पुकार हो |
सोनवा के थारी हम उतारी आरती माई के |
फूल अड़हुलवा चरनवा चढ़ावे भारती माई के |
सिरवा चरनिया झुकाई माई के पूजे सब संसार हो |
केवन करनवा भुलइली माई बेटवा करे पुकार हो |
तुही हउ लक्षमी काली शारदा भवानी |
किरीपा करा हमपर भूली हमरो नादानी |
सबके तू कईलु माई करा हामरो विचार हो |
केवन करनवा भुलइली माई बेटवा करे पुकार हो |
बरम्हा विष्णु महेश माई तोहरे के पूजेले |
दुनिया चलाई कईसे तोहरे से पुछेले |
भारती डुबत नईया मईया लगा दा तानी पार हो |
केवन करनवा भुलइली माई बेटवा करे पुकार हो |
केवन करनवा भुलइली माई बेटवा करे पुकार हो |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

भोजपुरी देबी गीत 7 –जय हो माई दुर्गा भवानी |

April 2, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी देबी गीत 7 –जय हो माई दुर्गा भवानी |
जय हो माई दुर्गा भवानी |
तोहरे बा दिहल माई हमरो जवानी |
जय हो माई दुर्गा भवानी |
ऊंचे रे पहड़वा माई सच्चा दरबार बा |
बैशनों देवी पूजे माई सारा संसार बा |
महिमा तोहार का केतना बखानी |
जय हो माई दुर्गा भवानी |
बिंध्याचल मे माई मोर बिंधवासिनी कहाली |
दखिनेश्वर मे काली माई सबसे पुजाली |
कामख्या मे माई के अजबे कहानी |
जय हो माई दुर्गा भवानी |
शक्तिधाम सीतला कासी अन्नपूर्णा सब जानेला |
शारदा भवानी मैहर तोहरो सीढ़िया सब चढ़ेला|
दुनिया मे सबसे बाड़ू माई महाग्यानी |
जय हो माई दुर्गा भवानी |
मुंबादेवी मुम्बई काली घाट काली माई |
पूजी जे तोहके माई मनचाहा फल पाई |
माफ करा भारती माई सगरो नादानी |
जय हो माई दुर्गा भवानी |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

भोजपुरी देबी गीत 6 – माई के मंदिरवा हो |

April 2, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी देबी गीत 6 – माई के मंदिरवा हो |
भागत परात अइली माई के मंदिरवा हो |
बड़ा डर लागे कोरोनवा मन के अंदरवा हो |
खनक खनक बाजे माई काँच चूड़िया |
चमक चमक साजे माथे सिनुर बढ़िया |
डमक डमक बाजे ढ़ोल झाल मंदरवा हो |
भागत परात अइली माई के मंदिरवा हो |
बनी दुलहिनिया माई कईली सोरहो सिंगार |
रूपवा निरखी तोहार होई गईले उंजियार |
दम दम दमके माइके ललका ओहरवा हो |
भागत परात अइली माई के मंदिरवा हो |
बड़ी बड़ी अँखिया दुईगो कमल फुलवा |
कारी कारी केसिया लामी झूले झुलवा |
सोना के मुकुटवा माथे ललका चदरवा हो |
भागत परात अइली माई के मंदिरवा हो |
मह मह महके चम्पा चमेली गजरा मे |
छन छन छनके किरीपा तोहरे अँचरा मे |
मुंहवा के तेज जईसे चमके बिजरी बदरवा हो |
भागत परात अइली माई के मंदिरवा हो |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

भोजपुरी देबी गीत 5 – चुनी रे चुनी ना |

April 2, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी देबी गीत 5 – चुनी रे चुनी ना |
भगता के भाव बुझिला मनवा सोची रे सोची ना |
मईया मनावे भगता गावेले पचरा नाची रे नाची ना |
सोनवा के रथवा साजल लाल अड़हुलवा |
हाँकी दिहली ना चले लागल शेरवा झूमी रे झूमी ना |
ऊंचे रे पहड़वा लागल मइया के आसनवा |
करे शेरवा गरजनवा घुमी रे घुमी ना |
सोने के कलशवा साजल पुजल सारा जमनवा |
झूमी रे झूमी ना करे लोगवा माई दरशनवा|
घुमी रे घुमी ना |
निमिया के डार मईया लागल हरियर पतइया |
झूमी रे झूमी ना
करे मईया के वनदनवा झूमी रे झूमी ना |
केवन फुलवा लोभइलू माई केवन फुलवा ना |
चूमी रे चूमी ना
चढ़े माई के चरनिया चूमी रे चूमी ना |
लाल अड़हुलवा भावे मईया के बेला फुलवा ना |
चूमी रे चूमी ना
चढ़े मईया के चरनिया चूमी रे चूमी ना |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

हिन्दी राम भजन 9 – श्रीराम कहाते है |

April 2, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

चैत्र नव रात्र के अवसर पर रामनवमी मे श्रीराम भजन
हिन्दी राम भजन 9 – श्रीराम कहाते है |
श्रीराम तुम्हारे चरणों मे हम भाव चढ़ाते है |
प्रभु आप मर्यादा पुर्षोतम श्रीराम कहाते है |
मानव जन जग मे मानव रूप अवतार लिया |
बनके धनुषधारी दानव दैत्य संघार किया |
अवतार दिवस को हम राम नवमी मनाते है |
श्रीराम तुम्हारे चरणों मे हम भाव चढ़ाते है |
जग का हो कल्याण तुमने वन प्रस्थान किया |
धर रूप सन्यासी सबरी केवट उत्थान किया |
जिन चरणों ने तारा अहिल्या चरन पुजाते है |
श्रीराम तुम्हारे चरणों मे हम भाव चढ़ाते है |
महिमा तेरी अपरम्पार पभू बरनी ना जाये |
जग का किया उद्धार लेखनी ना लिखाये |
भारती कहे जय श्रीराम अब हम सिर नवाते है |
श्रीराम तुम्हारे चरणों मे हम भाव चढ़ाते है |
रावण को मार स्वर्ग पहुंचाया माँ सीता छुड़ाया |
फिर आओ भारत मे राम भक्तो ने तुमको बुलाया |
अयोध्या मे हम सब अब तेरा दरबार सजाते है |
श्रीराम तुम्हारे चरणों मे हम भाव चढ़ाते है |

श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286
व्हात्सप्प्स -8210525557

हिन्दी देबी गीत 8 – शरण तुम्हारे |

April 2, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

चैत्र नव रात्र के अवसर पर देवी भजन
हिन्दी देबी गीत 8 – शरण तुम्हारे |
लाया हूँ माता धार आँसुओ शरण तुम्हारे |
भक्त पड़ा है आज माता चरन तुम्हारे |
निर्मल भाव माता निर्मल है काया |
चरणों मे तेरे मैंने सिर को झुकाया |
तेरे सिवा माता रहु मै किसके सहारे |
लाया हूँ माता धार आँसुओ शरण तुम्हारे |
जग ने ठुकराया मुझको किसी ने न पुकारा |
तेरे शरण मे मिला मुझको आज है सहारा |
बीच भवर मे नईया मेरी लगाओ अब तो किनारे |
लाया हूँ माता धार आँसुओ शरण तुम्हारे |
करू कितनी गलती आखिर बेटा माँ मै तेरा |
कर दो माफ गलती मेरी बेटा माँ मै तेरा |
छोदूंगा कभी ना माँ मै कभी पाँव तुम्हारे |
लाया हूँ माता धार आँसुओ शरण तुम्हारे |
जब भी पुकारा तुमको माता गले है लगाया |
रोता आया जब भी माता तूने है मुझे हँसाया |
भारती है बेटा माता हरदम है तुझको पुकारे |
लाया हूँ माता धार आँसुओ शरण तुम्हारे |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286
व्हात्सप्प्स -8210525557

गजल- कोरोना कहर

March 31, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

गजल- कोरोना कहर
माना की कोरोना कहर बड़ा मगर आया नहीं |
सारा जहाँ दहसत मे हिन्द मगर छाया नही |
फानूस बनके करता हिफाजत वजीरे आलम |
ठहर गया वो लोकडाउन से कुछ कर पाया नहीं |
मिल रहा वतन जंगे कोरोना हर खासो आम |
जीत लेंगे जंग क्या हुआ गर कुछ खाया नहीं |
है सजग सब कर्मबीर जान अब बचाने सबकी |
घर कैद जिंदगी और बेटा घर पहुँच पाया नही|
खींच दिया लक्ष्मण रेखा दहलीज वजीरे आलम|
माकां मे कैद आदमी कोरोना से मर पाया नहीं |
मुंह पे नकाब जेब सेनेटाइजर लेकर जाना बाहर |
रखना दूरिया तुम लोगो साथ कोरोना लाया नहीं |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

भोजपुरी देबी गीत 4 – डरावेला कोरोनवा |

March 31, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी देबी गीत 4 – डरावेला कोरोनवा |
डरावेला कोरोनवा डोले सारा जग संसार हो |
भगावा मारी त्रिशूलवा इहे माई विनती हमार हो |
चिनवा से आइल माई वाइरस कोरोनवा |
नमवा से काँपे सबकर थरथर परनवा |
करा किरीपा फिर से आवे देशवा मे बहार हो |
डरावेला कोरोनवा डोले सारा जग संसार हो |
मोदी जी देशवा लोकडाउन लगा दिहले |
निकलेना केहु घर से सबके सुना दिहले |
अँखिया तीसरी खोली कोरनवा करा संघार हो|
डरावेला कोरोनवा डोले सारा जग संसार हो |
आईल चैत्र नवरतनवा रखी कईसे कलशवा |
पड़ल संकट मे परान हमरो सगरो देशवा |
दूर होइहे दुखवा सबकर तोहरो महिमा अपरंपार हो |
डरावेला कोरोनवा डोले सारा जग संसार हो |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

भोजपुरी धोबी गीत – भगा देता बैरी केरौना |

March 31, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी धोबी गीत – भगा देता बैरी केरौना |
नाक करे सुकुर पुकुर बुखार ना उतरौना |
बलम हो भगा देता बैरी केरौना |
धीरज धरा धनिया बहरी पाँव ना उठौना |
मोर सुनरो हो भगा देईब बैरी केरौना |
जाइके बज़रिआ मसकिया ले आइहा |
हथवा धोवे वाला सबुनिया ले आइहा |
बलम हो ला देता नवका बिछौना |
बलम हो भगा देता बैरी केरौना |
सगरो देशवा मे लागल बा करफू नजरिया |
बंद भईले स्कूल कालेज बंद बा बज़रिआ |
मोदी जी लगवले देशवा मे लोकडौना |
मोर सुनरो हो कैईसे लियाई नवका बिछौना |
मोर सुनरो हो भगा देईब बैरी केरौना |
निकलबू जे बहरिया केरोना लग जाई |
घरवे मे रही के पहिले जनवा बचाई |
जनवा जे बची त लीआ देईब बिछौना |
मोर सुनरो हो भगा देईब बैरी केरौना |
बलम हो भगा देता बैरी केरौना |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

कविता – भारत जानता है |

March 31, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता – भारत जानता है |
कोरोना हो या सेना दुशमन लड़ना भारत जनता है |
एटम हो वाइरस दुशमन लड़ना भारत जानता है |
प्रधान मंत्री मोदी जी ने जो कहा वो करेंगे हम |
काहे का डरना रोना धोना लड़ना भारत जानता है |
बचना कैसे रहना कैसे कोरोना सब हमने जान लिया |
नमस्ते कहना हाथ धोना मुंह जाली लगाना भारत जानता है |
बाबा रामदेव ने कहा योग करो हम रोज करेंगे |
नित्य शुबह प्राणायाम कपालभाती करना भारत जानता है |
करो या मरो मत डरो परीक्षा की घड़ी हमारी है |
बिना घबड़ाये हर महामारी निपटना भारत जानता है |
सदा सजग रहो सबको सजग करो भीड़ से अलग रहो |
होगा जो सरकारी फरमान चलना भारत जानता है |
गए जो बिदेश कमाने भाई वो भी घर वापस आने लगे |
पहले अपनी जांच सबसे अलग रहना भारत जानता है |
बंद है अभी सभी स्कूल कालेज माल बाजार जरूरी है |
खुल जाएँगे सभी थोड़ा धीरज धरना भारत जानता है |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

कोरोना बुरा है

March 31, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

कोरोना बुरा है
पास बुलाये कोई पास जाना बुरा है |
बुलाकर दे दे तुमको कोरोना बुरा है |
पास जाना अगर हाथ न मिलाना मगर
गले मिल गये लग जाये कोरोना बुरा है|
मिलना मिलाना तदबीज़ है करना जरूरी |
लगाया न नकाब सांस समाये करोना बुरा है|
जाना जहाँ तुमको जाओ जरूर मगर |
हाथ हर चीज तुमको लगाना बुरा है |
उम्र मात्र कुछ लम्हो कोरोना वाइरस की |
मर जाएगा वो बिना हाथ धोये खाना बुरा है|
सर्दी जुकाम खांसी बुखार हो भी जाये अगर |
जाकर डॉक्टर से ना इलाज कराना बुरा है |
तुम अकेले नहीं साथ तुम्हारे कई जान है |
बचके रहो मज़ाक कोरोना उड़ाना बुरा है |
वक्त हैं बुरा वतन जतन मगर टल जाएगा |
हम हिन्द आवाम कोरोना ना हराना बुरा है |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

भोजपुरी चइता गीत 4 – आज केरोनवा भगाइब ये रामा |

March 18, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी चइता गीत 4 – आज केरोनवा भगाइब ये रामा |
आज केरोनवा हम भगाइब ये रामा |
भारत देशवा |
सबकर जनवा हम बचाइब ये रामा|
भारत देशवा |
चिनवा से आइल ई पापी केरोनवा |
हरी लेला सबकर धईके परनवा |
मारी इनके माटी मे मिलाइब ये रामा|
भारत देशवा |
आज केरोनवा हम भगाइब ये रामा |
भारत देशवा |
मुहवा मे जलिया पहिनिया ये भईया |
सर्दी खांसी बुखरवा से बचिहा ये भईया |
नमवा केरोनवा देशवा मिटाइब ये रामा |
भारत देशवा |
करिहा नमस्ते हथवा केहु ना मिलइहा |
गंदा मत रहिहा हथवा हरदम धोइहा |
जाइके डॉक्टर साहेब जांचिया कराइब ये रामा |
भारत देशवा |
आज केरोनवा हम भगाइब ये रामा |
भारत देशवा |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

हिन्दी गजल- तेरा इंतजार तो है |

March 14, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिन्दी गजल- तेरा इंतजार तो है |
तू मुझे चाहे न चाहे दिल तेरा तलबगार तो है |
तूझे तलब मेरी हो न हो मुझे तेरा इंतजार तो है |
जब भी वक्त मिले आवाज दे देना तुम मुझे |
तू साथ चले न चले तेरी याद मेरी पतवार तो है |
लब कुछ कहे न कहे आंखे सच बया करती है |
मै खुश हूँ सच मे तुझे मुझसे बहुत प्यार तो है |
तू रहे जहा भी मेरी यादे चैन से रहने न देंगी |
ठुकराकर मेरी मोहब्बत तू मेरा गुनाहगार तो है |
क्या कहू तुझसे जो तूने वादे किए थे बहुत |
जमाना जाने न जाने तू मेरा राजदार तो है |
अपनी हुश्नों जवानी का गरुर है बहुत तुझको |
बागो भवरा की फूल को कभी दरकार तो है |
अपने महबूब को मान खुदा सर आंखो भारती |
कबुल नहीं मेरी मोहब्बत तू मेरा सरकार तो है |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

भोजपुरी गजल- ठीक नईखे |

March 14, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी गजल- ठीक नईखे |
दिल लगाके दिल तोड़ल केहु के ठीक नईखे |
प्रीत लगाके मुंह मोड़ल केहु से ठीक नईखे |
कईली केतना प्यार तोहसे का काही हम |
छोड़ हमरा दिल दुशमन से जोडल ठीक नईखे |
राज क बात बा राज ही रहे दा अब |
बेवफा तू गाड़ल मुरदा उखाड़ल ठीक नईखे |
आँख से आँख मिला के देखा एक बार |
लहरात प्यार क गागर फोड़ल ठीक नईखे |
रख़ब तोहके अपने दिल मे करेजा नियन |
करेजा के कागज नियन फाड़ल ठीक नईखे |
तोहरे एक मुस्कान हजार जान कुर्बान बा |
कदरदान के मजधार मे छोडल ठीक नईखे |
रहा हरदम जवान जईसे गुलाब के बगान |
आशिक मेहरबान के निचोडल जान ठीक नईखे |
हमरी आँख के आँसू के मोल तू का जनबू |
यार टुटल घाव दिल के कूदेरल ठीक नईखे |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

भोजपुरी चइता लोक गीत -3- बयार पुरवा ये रामा

March 14, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी चइता लोक गीत -3- बयार पुरवा ये रामा
लगे लागल आम के टिकोरवा ये रामा |
चइत मासे |
बहे लागल बयार पुरवा ये रामा |
चइत मासे |
मसूरी मटर खूब गदराई गइली |
पीयर सरसो अब नियराई गइली|
मगन कोयल गाए गनवा ये रामा |
चइत मासे |
पाकल बाली गेहूँ खेतवा लहराये |
पागल पपीहवा पीहू पीहू गाये |
चुये टप टप महुआ रस मदनवा ये रामा |
चइत मासे |
अँखियाँ मे नसा चढ़ल गोड्वा न जमीन पड़े |
बहकल बदनवा सजनवा कहा कहे |
मदन सतावे गोरी नजरवा ये रामा |
चइत मासे |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

भोजपुरी चइता लोक गीत 2- काला तिलवा ये रामा|

March 12, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी चइता लोक गीत 2- काला तिलवा ये रामा|
(श्रिंगार रस)
गोरी-2 गलिया मे काला -2 तिलवा ये रामा|
हथवा मे शोभेला सोना के कगनवा ये रामा |
गोरी-2 गलिया मे काला -2 तिलवा ये रामा|
बरछी कटारी बा तोहरी नजरिया |
घायल करेलु सगरो बज़रिआ,तनी सोचा |
कारी बदरिया काली केसिया ये रामा |
मथवा पर चमकेला लाल बुंदवा ये रामा |
गोरी-2 गलिया मे काला -2 तिलवा ये रामा|
ये जान जुल्मी तोहरी ऊमीरिया |
दावे लागल मोर जीनिगिया ,तोहरे प्यार मे |
नागिन लचके तोहार चलिया ये रामा |
अँचरा के ऊड़ावे बैरी पवनवा ये रामा|
गोरी-2 गलिया मे काला -2 तिलवा ये रामा|
ये गोरी मीठ मिसरी तोहार बोलिया |
कनवा मे झूमे खूब कनबलिया |
चान चमके तोहरे मूहवा ये रामा |
दंतवा मे दमके मोतिया के दनवा ये रामा |
गोरी-2 गलिया मे काला -2 तिलवा ये रामा|
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

भोजपुरी चइता लोक गीत 1-बितले फगुनवा ये सइया

March 12, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी चइता लोक गीत 1-बितले फगुनवा ये सइया
बितले फगुनवा ये सइया ,
गऊआ लागल कटनिया के ज़ोर |
कईसे होइहे गेंहू के कटनिया मोर |
गऊआ लागल कटनिया के ज़ोर |
सुना-2 मोर परदेशी बालम
धईके आवा जल्दी रेलगड़िया |
चलल जाई खेतवा होते रे भोर |
गऊआ लागल कटनिया के ज़ोर |
सुना -2 मोर लेहुरा देवरवा |
चलावा ना दिन रात मोबइलिया |
करबा ना किसनिया खइबा का कौर |
गऊआ लागल कटनिया के ज़ोर |
सुना -2 मोर छोटकी ननदिया |
घूमा जनी तू खाली खरीहनवा |
मिली करा तू कटनिया माना न बतिया मोर |
गऊआ लागल कटनिया के ज़ोर |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

भोजपुरी होली 13 -करे ले ठिठोली रे कान्हा |

March 7, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी होली 13 -करे ले ठिठोली रे कान्हा |
करेले ठीठोली रे कान्हा कदमिया पर चढ़ी के |
रंगवा नहवावे रे सखिया गगरिया मे भरी के |
बड़ा रे ई बाउर लागे जमुना के पनिया हो |
मीठी फुसलाई कहे आवा राधा रनीया हो |
मारी पिचकारी ये सखिया अँचरा के धरी के |
करेले ठीठोली रे कान्हा कदमिया पर चढ़ी के |
केतनों लुकाई रे बनवा खोजी हमे ले ले हो |
झटके से आई कान्हा अंकवारी भरी ले ले हो |
डूबी मरी जाई रे सखिया जमुना मे डूबी के |
करेले ठीठोली रे कान्हा कदमिया पर चढ़ी के |
काहे लगवला कान्हा राधा संग पिरितीया हो |
रुकमनी के धई हथवा कईला काहे घतीया हो |
उठाई लेता हमके बिधना जईती हम मरी के |
करेले ठीठोली रे कान्हा कदमिया पर चढ़ी के |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

भोजपुरी होली 12- बड़ा डर लागे केरोनवा से |

March 7, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी होली 12- बड़ा डर लागे केरोनवा से |
रंगवा लगाइब न अबिरवा लगाइब |
बड़ा डर लागे केरोनवा से |
अबकी फगुनवा खेलब ना होली ये भौजी |
बड़ा डर लागे केरोनवा से |
गलवा ना छूअब ना अँचरा के रंगब |
ना हथवा मिलाईब फगुनवा से |
साली से खेलब ना सरहज से खेलब |
केकरा से खेलब हम होलिया ये भौजी |
बड़ा डर लागे केरोनवा से |
झारखंड मे खेलब ना बिहार मे खेलब |
दिल्ली मे खिल्ली उढ़ावे केरोनवा ये भौजी |
कान्हा रंग बरसावे बरसनवा मे |
सर्दी से बची की खांसी से बची |
बीमारी से बची की महामारी से बची ये भौजी |
केकेरो ना देहिया सटाइब जजनवा से |
घरवा ना खेलब बहरिया ना खेलब |
खेलब ना होलिया बहरिया ये भौजी |
रंगवा लगाइब खरीहनवा मे |
पुआ ना खाइब पकवनवा ना खाइब |
घोरी भंगिया मुहवा ना चढ़ाइब ये भौजी |
बड़ा डर लागे केरोनवा से |
ना हथवा मिलाईब फगुनवा से |

श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

हिन्दी गजल- निभाते चले गए |

March 7, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिन्दी गजल- निभाते चले गए |
हम अपनी वफा निभाते चले गए |
वो मुझसे दूरिया बढ़ाते चले गए |
शामिल था उनकी खुशी ओ गम |
मेरे वक्त वो मुंह चिढ़ाते चले गए |
प्यार के सिवा कुछ नहीं दुनिया मे |
वो आग दुश्मनी क्यो बढ़ाते चले गए|
तन्हा आना जाना मगर जरूरत सबकी |
नीसा रिश्तो ज़िंदगी मिटाते चले गए |
तन्हा रहना दोस्त जरूरी हंसी के लिए |
दिल अजीज दोस्तो दुखाते चले गए |
पसीना जरूरी दो वक्त रोटी के लिए |
चाह ज्यादा छवि खुद गिराते चले गए |
कर लो चराग रोशन अंधेरों डर जाओगे |
उम्मीदों के दिये सारे बुझाते चले गए |
तुम देवता न शैतान अकेले रह लोगे |
हर रिश्ता जरूरी कीमत सुनाते चले गए |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

हिन्दी गीत- देख लेना |

March 7, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिन्दी गीत- देख लेना |
कीमत मेरी मोहब्बत तुम समझ न पाओगे |
याद मे मेरी तड़पते रह जाओगे देख लेना |
जिंदगी मुझसा दोस्त शामिल न कर पाओगे|
तन्हाइयों ढूंढते रह जाओगे मुझे देख लेना |
मेरी पाक मोहब्बत को मजाक बना डाला |
पाक साफ रिश्तो को ताख चढ़ा डाला |
होगी जरूरत हाथ मलते रह जाओगे देख लेना |
प्यार मुझसा किया न करेगा कोई |
जान सिर्फ तुम पर दिया न मरेगा कोई |
मेरा वफा सिला ना दे पाओगे देख लेना |
अपनी हुशनों जवानी नाज बहुत करते हो |
मुझसे दूर बहुत दुर खूब रहते हो |
हाथ रख दिल मचलते रह जाओगे देख लेना |
याद मे मेरी तड़पते रह जाओगे देख लेना |

श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

हिन्दी गीत- तेरे रूप का सिंगार करूँ |

March 7, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिन्दी गीत- तेरे रूप का सिंगार करूँ |
तेरे रूप का सिंगार करूँ |
तुझपे दिल निसार करूँ |
आंखो मे काजल लगा दूँ |
पांवो मे पायल पहना दूँ |
तेरी बांहों दिल बहार कर दूँ |
तेरे रूप का सिंगार करूँ |
बाली तेरे कानो मे पहनाऊंगा |
कील हीरे की नाक मे लगाऊँगा |
तेरे दिल मे जीवन गुजार सकूँ |
तेरे रूप का सिंगार करूँ |
चम चम बिंदिया लगाऊ माथे पे |
खन खन कंगना पहनाऊ हाथो मे|
तू है मेरी यही विचार करूँ |
तेरे रूप का सिंगार करूँ |
काँच की चूड़िया कोमल कलाइयो मे |
सुन के खनके मेरी याद तन्हाइयों मे |
तेरी आंखो मे वीहार करूँ |
तेरे रूप का सिंगार करूँ |
माला फूल चम्पा गले मे डालू मै |
काली जुल्फों फूल गजरा साजू मै |
हर गम तुझसे किनार करूँ |
तेरे रूप का सिंगार करूँ |
चाँद तारे सजा दूँ तेरी चुनरी मे |
तुझसे ही दिल लगाउँ ना दूसरी मे |
सुखी मै तेरा संसार करूँ |
तेरे रूप का सिंगार करूँ |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

सईया अइले ना भवनवा

March 2, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी होली 11 – सईया अईले ना भवनवा |
होली खेले तरसे मोर मनवा ना |
सइयाँ अइले ना भवनवा |
सबकर लऊटी अइले सजनवा ना |
उड़ेला गुलाल अब गगनवा |
छोड़ा नोकरिया सइया घरे चली आवा |
होलिया मे सइया जनी छछनावा |
धक धक धड़के मोर परनवा हो |
सइयाँ अइले ना भवनवा |
सइया तोहरी याद मोर बरसे नजरिया |
फागुन मे रंगवा खेले तरसे गुजरिया |
पगली कहे हमके जमनवा हो |
सइयाँ अइले ना भवनवा |
अइबा जे घरवा सोरहो सिंगार हम करब |
रंगवा अबिरवा तैयार हम करब |
खेलब संगवा होली इहे बा अरमनवा हो |
सइयाँ अइले ना भवनवा |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
गीतकार /कवि /लेखक
ढोरी ,बोकारो ,झारखंड
मोब -9955509286

जोगिरा

March 2, 2020 in भोजपुरी कविता

जोगिरा
केवन देश मे जनम लिए घनश्याम |
केवन देश मे जनम लिए राम भगवान |
जोगिरा सारा रा रा रा रा |
गोकुला मे जनम लिए घनश्याम |
अयोध्या नगरी जनम लिए राम भगवान |
जोगिरा सारा रा रा रा रा |

केवन देश के नेता गरजे करे ऐलान |
थर थर काँपे दुशमन बचावे आपण जान |
जोगिरा सारा रा रा रा रा |
भारत देश के नेता गरजे करे ऐलान |
पड़ोसी देश के दुश्मन बचावे आपन जान |
जोगिरा सारा रा रा रा रा |

केवन देश के झण्डा फहरे ऊंचा आसमान |
केतना रंग मे रंगल देशवा करे गुमान |
जोगिरा सारा रा रा रा रा |
हिन्द देश के झण्डा फहरे ऊंचा आसमान |
तीन रंग मे रंगल तिरंगा देशवा करे गुमान |
जोगिरा सारा रा रा रा रा |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
गीतकार /कवि /लेखक
ढोरी ,बोकारो ,झारखंड
मोब -9955509286

हिन्दी होली गीत – मत तरसाओ ना |

February 29, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिन्दी होली गीत – मत तरसाओ ना |
होली मे तुमको ना छोड़ेंगे हम ,
मुझे मत तरसाओ ना |
अबकी फागुन तुमको लगाएंगे रंग |
मुझे मत तड़पाओ ना |
गोरे गालो गुलाल लगाएंगे हम सारा |
रंग देंगे कोरी चुनरिया गोरी हम तुम्हारा |
डलवा लो रंग अबकी तुम रानी ,
मत छिप जाओ ना |
होली मे तुमको ना छोड़ेंगे हम ,
मुझे मत तरसाओ ना |
आओ खेले होली दोनों खेल रहा जमाना |
बच ना पाओगी हमसे मत बनाओ बहाना |
भर लेंगे बाहो मे तुमको जानी |
तुम मत इठलाओ ना |
होली मे तुमको ना छोड़ेंगे हम ,
मुझे मत तरसाओ ना |
मस्ती मे झूमे होली हम खेले संग |
चुनरी भिंगा लो चोली रंगा लो रंग |
संतोष भारती का यही है कहना |
जालिम दिल ना जलाओ ना |
होली मे तुमको ना छोड़ेंगे हम ,
मुझे मत तरसाओ ना |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

हिन्दी कविता- बसंत आने लगा |

February 26, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिन्दी कविता- बसंत आने लगा |
बागो मे फूल कलियों बाहर अत्यंत आने लगा |
मस्त मदन लिए अंगड़ाई देखो बसंत आने लगा |
शरद ऋतु शने शने बिगत अब होने लगी |
धूप की नरमी अब गर्मी मे बदल जाने लगी |
गरम लिहाफ छोड़ मौसम सुखांत आने लगा |
मस्त मदन लिए अंगड़ाई देखो बसंत आने लगा |
फूलो भवरों की गूंज अब गुंजने को है |
बहारों पराग पवन संग अब महकने को है |
चिड़ियों चह चह दिग दिगंत गाने लगा |
मस्त मदन लिए अंगड़ाई देखो बसंत आने लगा |
पिया तू कहा पपीहा बिरह राग गाएगा |
सजनी को याद सजन बहुत अब आयेगा |
खुमार मदहोसी जीव जंत छाने लगा |
मस्त मदन लिए अंगड़ाई देखो बसंत आने लगा |
टोली जवानो की राग फाग अब गाएँगे सब |
झाल मजीरा माँदर झूम अब बजाएँगे सब |
ऋतुराज स्वागत पुस्प पंथ बिछाने लगा |
मस्त मदन लिए अंगड़ाई देखो बसंत आने लगा |
प्रीतम की प्यारी भर नयनो मे मद सारी |
मीठे कोयल की कुक उठे मन हुक नर नारी |
हिय प्रिय मधुर मिलन गीत कंठ गाने लगा |
मस्त मदन लिए अंगड़ाई देखो बसंत आने लगा |
झर झर निर्झर झरते झरने पवन |
बयार पुरवा बढ़ाए तन बदन अगन |
गंध केसर महक योवन आनंद सुहाने लगा |
मस्त मदन लिए अंगड़ाई देखो बसंत आने लगा |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

भोजपुरी होली गीत 2-हमके फगुनवा मे

February 26, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी होली गीत 2-हमके फगुनवा मे |
हमके फगुनवा मे ना तरसावा हो गुजरिया |
तोहार रंग देईब ओढनी मारी पिचकरिया |
हमके फगुनवा मे ना तरसावा हो गुजरिया |
खेलबू नाही होरी त करब बलजोरी |
आवा खेला होरी बना जनी रानी भोरी |
मना जे करबू त बेकार होई उमरिया |
हमके फगुनवा मे ना तरसावा हो गुजरिया |
रंगवा लगाइब तोहके अबिरवा लगाइब |
भरी अंकवरिया तोहके गरवा लगाईब |
तू हउ राधा मोर हम हई सावरिया |
हमके फगुनवा मे ना तरसावा हो गुजरिया |
आईल फगुनवा बहे फगुनी बयार हो |
मस्त महीनवा बढ़े हमरो प्यार हो |
तोहरे पर लागल गोरी हमरो नजरिया |
हमके फगुनवा मे ना तरसावा हो गुजरिया |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

भोजपुरी होली गीत 1-सगरो फगुनिया |

February 26, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी होली गीत 1-सगरो फगुनिया |
आवा गोरी रंग देई तोहरो बदनीया |
देखा चढ़ल सबके सगरो फगुनिया |
रंगे केहु गाल गुलाबी |
केहु रंगे बाल शराबी |
रंगवा लगाला ना होई खराबी |
रंगवा हउवे प्रेमवा के चाबी |
बोला गोरी रंग देई तोहरो ओढ़निया |
आवा गोरी रंग देई तोहरो बदनीया |
चढ़ल केहु पर फागुन क नसा |
चढ़ल केहु पर होली क नसा |
चढ़ल केहु पर सजनी क नसा |
महकल काहे फागुन गोरी तोहरो जवनिया |
आवा गोरी रंग देई तोहरो बदनीया |
केहु खेले होरी भर पिचकारी |
गुलाल उढ़ावे केहु झोरी झारी |
केहु बजावे झाल मंजीरा |
केहु गावे झूमी खूब जोगिरा |
मन करे रंग देई गोरी तोहरो नथुनीया |
आवा गोरी रंग देई तोहरो बदनीया |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

भोजपुरी होली गीत 3-मस्त फागुन |

February 26, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

भोजपुरी होली गीत 3-मस्त फागुन |
आया है मस्त फागुन
उड़ती है तेरी चुनरिया |
सर सर बहती है मह मह महकति है हवा |
तुझे रंग लगाऊँगा मै हर हाल मे |
होली खूब खेलूँगा आज मै |
चलो मनाए फागुन |
आया है मस्त फागुन
उड़ती है तेरी चुनरिया |
सर सर बहती है मह मह महकति है हवा |
बागो बहारों कलियाँ खिलने लगी |
फागुन महीने गोरी मचलने लगी |
गोरी तू अन्जान मत बन |
आया है मस्त फागुन
उड़ती है तेरी चुनरिया |
सर सर बहती है मह मह महकति है हवा |
तेरी अंगड़ाई मन बहकने लगा है |
खेलूँगा होली दिल मचनले लगा है |
संतोष भारती है तेरा सजन |
आया है मस्त फागुन
उड़ती है तेरी चुनरिया |
सर सर बहती है मह मह महकति है हवा |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

हिन्दी गजल- वतन को बचाने चले है |

February 26, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिन्दी गजल- वतन को बचाने चले है |
लगा मजहबी आग आज वो वतन जलाने चले है |
भड़का सियासी चिंगारी वो वतन मिटाने चले है |
भरा नहीं दिल उनका फैला दंगा फसाद देश मे |
है कितने हमदर्द उनके लोगो सब दिखाने चले है |
करते बात देशहित हाथ दुशमनों मगर मिलाते है |
लगा देश बिरोधी नारा रोज मजमा लगाने चले है |
जवानो की शहादत पर ओढ़ लेते है खामोशिया |
मौत दुशमनों पीट छाती वो मातम मनाने चले है |
करते राजनीति पर करते काम देशद्रोहियों वाला |
सियासत ऐसी हाथ दुशमनों वो मिलाने चले है |
मंदिर मस्जिद गिरजा गुरुद्वारा से मतलब नहीं |
आए चूनाव सिर माथे चंदन वो चमकाने चले है |
फिक्र अपनी नहीं फिक्र वतन की करता है वो |
रहे भारत सलामत उम्र अपनी वो खपाने चले है |
टुकड़े गैंग या हो टोली गदारों वो डरता ही नहीं |
आवाम समझ भगवान सिर वो झुकाने चले है |
चलना साथ तुम भी चलो पहले दिल मैल दूर करो |
सबका साथ सबका विश्वास वतन वो बचाने चले है |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

हिन्दी गजल-संग जो चले होते |

February 26, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिन्दी गजल-संग जो चले होते |
दो कदम तुम दो कदम हम संग चले होते |
तन्हा न मै तन्हा न तुम कभी दोनों रहे होते |
याद किया होता गर दिल से कभी तुमने मुझे |
कभी ख्वाबो मे ही सही हम दोनों मिले होते |
सिवा तेरी यादों के पास मेरे कुछ बचा नहीं |
साथ दिया न वक्त वरना इश्क फूल खिले होते |
कास की लौट आते हमारे वो बीते हुये लम्हे |
मै तुम्हारा तुम हमारे अब मीत बन चले होते |
ये मजबूरियाँ ये दूरियाँ खलती बहुत है मुझे |
दिल लगाया न होता न हम तेरे दिलजले होते |
छोड़ चुके हो मेरा साथ मेरे शहर को तुम |
लौट आते तुम मोहब्बते गुल फले फुले होते |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

हिन्दी गजल- हम सहने लगे |

February 26, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिन्दी गजल- हम सहने लगे |
तेरे बेगैर तन्हा ही हम रहने लगे |
याद तेरी अश्क आंखो बहने लगे |
हुआ रुसवा शहर कोई बात नहीं |
लेके तेरा नाम आशिक कहने लगे |
रुसवाइयों से कभी मै डरता नहीं |
बिछड़ न जाये बात हम डरने लगे|
मै आशिक तेरा कबुल करता हूँ मै |
आप साथ छोड़ मगर क्यो चलने लगे |
साथ छोड़ दोगे कभी मैंने सोचा नहीं |
लेके तेरा नाम पल पल यूं मरने लगे |
सहने को सह लूँ हर जुल्म मै जमाने |
तेरे इश्क हर सितम हम सहने लगे |
लिखे जो कलाम ख्याल मे तेरे हम |
समझ तुझे बार बार उसे पढ़ने लगे |
लौट आएगा तू मुझे यकीन है बहुत |
रोज रातो ख्वाब नए खूब सजने लगे |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

भोजपुरी होली 10- अपना सजनवा रे |

February 26, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी होली 10- अपना सजनवा रे |
उनके चढ़ल बाड़े मस्त फगुनवा रे |
गोरी रंग देली अपना सजनवा रे |
फागुन मे गोरिया के चढ़ल बाड़े मस्ती |
मिलतू तू बहिया मे भरती |
होलिया मे बहकल जोबनवा रे |
गोरी रंग देली अपना सजनवा रे |
चढ़ते फगुनवा उनकर गदरल जवनिया |
फगुनी बयार उनकर फरकल बदनिया |
खेले होली संग पियवा अंगनवा रे |
गोरी रंग देली अपना सजनवा रे |
नेहिया लगाके काहे कइलू दगाबाजी |
होलिया मे सईया संगे करेलु कलाबाजी |
देखि देखि भारती छछने परनवा रे |
गोरी रंग देली अपना सजनवा रे |
उनके चढ़ल बाड़े मस्त फगुनवा रे |
गोरी रंग देली अपना सजनवा रे |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

हिन्दी गजल- उसे बुझाओ लोगो |

February 26, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिन्दी गजल- उसे बुझाओ लोगो |
टूट रहे जो रिश्ते भाईचारे उसे बचाओ लोगो |
खींच रही जो दिवार दुश्मनी उसे गिराओ लोगो |
जल रहा जो मकान वो हमारा और तुम्हारा भी |
धु – धु हो रहा शहर सारा उसे बुझाओ लोगो |
बढ़ाके दिलो दूरिया छुप गए सियासतदान कही |
दहक रहा घर उनका भी उन्हे दिखाओ लोगो |
उन्माद उत्पात और आगजनी कोई हल नहीं |
मजहबी मर्ज की दवा कोई है बताओ लोगो |
वो भी क्या दिन थे हर बात हम गले मिलते थे |
अब भी वही जज्बाये दिल हाथ मिलाओ लोगो |
हो जूजून खुशहाली वतन उन्माद सही नहीं |
भूल नफ़रतों गुबार गुल मोहब्बत खिलाओ लोगो |
है मौके की तलास दुशमन की हम लड़ मरे |
हम एक थे एक रहेंगे जरा उसे बताओ लोगो |
जुम्मन का जुम्मा दिनु की दिवाली संग मनाएंगे |
घर का मसला मिल खुद ही सुलझाओ लोगो |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

भोजपुरी होली 9 – कारी केसिया के झार |

February 23, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी होली 9 – कारी केसिया के झार |
बहे लागल फागुनी बयार |
मह मह महके अमवा मोजरवा |
छन छन छनके महुआ के कोचवा |
अईले नाही सईया तोहार |
गोरिया कारी केसिया के झार |
पियर सरसो फुला गईली |
हरियर मटर गदराई गईली |
झीनी झीनी बहे पुरवा बयार |
गोरिया कारी केसिया के झार |
बैरी पवनवा दरदिया बढ़ावे बदनवा |
महुआ के कोचवा चुएला मदनवा |
सजनी चले अचरा के उड़ाय |
गोरिया कारी केसिया के झार |
फुलवा फुला गईले भवरा लोभाई गईले |
चढ़ते फगुनवा सजनवा कोहाई गईले |
सजनी करेली सोरहो सिंगार |
गोरिया कारी केसिया के झार |
बहे लागल फागुनी बयार |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

भोजपुरी होली 8–सड़िया ले अइह |

February 23, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी होली 8–सड़िया ले अइह |
सड़िया ले अइह लाल लाल |
ये सइया आ गईले फगुनवा |
होलिया मे रंगब तोहरो गाल |
ये सइया आ गईले फगुनवा |
सड़िया के संगवा लाल चुनार ले अइह|
औरी ले अइह चूड़िया लाल लाल |
ये सइया आ गईले फगुनवा |
गुलाल ले अइहा सईया अबीरवो ले अइह |
रंगवा ले अइह लाल लाल |
ये सइया आ गईले फगुनवा |
कंगना ले अइह सईया कनबलिया ले अइह |
टिकुली ले अइह लाल लाल |
ये सइया आ गईले फगुनवा |
सड़िया ले अइह लाल लाल |
ये सइया आ गईले फगुनवा |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

भोजपुरी होली 7– आज भारत मे होली |

February 23, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी होली 7– आज भारत मे होली |
आज भारत मे होली रे सखिया |
सिमवा चलावे जवान गोली रे सखिया |
आज भारत मे होली रे सखिया |
केकर मजाल भारत अँखिया देखावे |
झट से जवान उनकर नसिया दबावे |
सिमवा पर खेले भर झोरी रे सखिया |
आज भारत मे होली रे सखिया |
जब केहु ललकारे देश के जवनवा |
मारी दुशमनवा उनकर हरी लेले परनवा |
होलिया खेले ले मारी गोली रे सखिया |
आज भारत मे होली रे सखिया |
जीती के जंगवा खेले रंग पिचकरिया |
देशवा के होली देखि दुशमन फाटल नजरिया |
खुनवा से खेले बीर होली रे सखिया |
आज भारत मे होली रे सखिया |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

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भोजपुरी होली 6 -दिल्ली मे उड़ेला अबीर |

February 23, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी होली 6 -दिल्ली मे उड़ेला अबीर |
दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |
मोदी जी महनवा छप्पन इंची सिनवा |
बदले देशवा के तकदीर |
दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |
जबसे ई भईले प्रधान मंत्री देशवा |
आगे टीके नाही केवनों बलबीर |
दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |
जब जब ललकारे पापी पाकिस्तनवा |
मारी देले ओकरा के शमशीर |
दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |
होला जय जयकार भारत के जमनवा |
बांधी दीहले दुशमन के जंजीर |
दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |
अमित साह खेले खोली मशीनगनवा |
होलिया खिलावे सेना पूरी औरी खीर |
दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

भोजपुरी पारंपरिक होली 5-भंगिया पिये ना जा |

February 23, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी पारंपरिक होली 5-भंगिया पिये ना जा |
भोला भंगिया पिये ना जा |
कहे गौरा भोला भंगिया पिये ना जा |
भोला भंगिया पिये ना जा |
पीना जो होतो भोला लस्सी तू पिला |
आके अबीर गुललवा लगा जा |
भोला भंगिया पिये ना जा |
खाना जो हो तो खीर पूड़ी तू खा जा |
जहर धतुरवा ना खा |
भोला भंगिया पिये ना जा |
खेलना जो हो होरी गौरा संग खेला |
गणेश कार्तिक के रंगवा तू दे दा लगा |
भोला भंगिया पिये ना जा |
लगाना हो समाधि तो कैलास पर लगावा |
भूतवन बैतलवन होरी खेले तू कहा |
भोला भंगिया पिये ना जा |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

भोजपुरी पारंपरिक होली 4-कान्हा संग होली

February 23, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी पारंपरिक होली 4-कान्हा संग होली
सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |
हरदम करे उ बलजोरी |
जब हम जाई जमुना किनरवा |
देले मोर मटकी के फोरी |
सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |
जब हम जाई फूल लोढ़े बगिया |
खींचे मोर अँचरा के कोरी |
सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |
जब हम जाई यमुना के बिचवा |
करे मोर सड़िया के चोरी |
सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |
जब हम जाई ब्रिन्दा रे बनवा |
बंसिया बजाई नचावे राधा गोरी |
सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |
जब हम जाई दहिया लेईके बज़रिआ |
कहे चला कदमवा के ओरी |
सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

भोजपुरी पारंपरिक होली 6 -दिल्ली मे उड़ेला अबीर |

February 10, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी पारंपरिक होली 6 -दिल्ली मे उड़ेला अबीर |
दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |
मोदी जी महनवा छप्पन इंची सिनवा |
बदले देशवा के तकदीर |
दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |
जबसे ई भईले प्रधान मंत्री देशवा |
आगे टीके नाही केवनों बलबीर |
दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |
जब जब ललकारे पापी पाकिस्तनवा |
मारी देले ओकरा के शमशीर |
दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |
होला जय जयकार भारत के जमनवा |
बांधी दीहले दुशमन के जंजीर |
दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |
अमित साह खेले खोली मशीनगनवा |
होलिया खिलावे सेना पूरी औरी खीर |
दिल्ली मे उड़ेला अबीर ,सुना लोग |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

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भोजपुरी पारंपरिक होली 5-भंगिया पिये ना जा |

February 10, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी पारंपरिक होली 5-भंगिया पिये ना जा |
भोला भंगिया पिये ना जा |
कहे गौरा भोला भंगिया पिये ना जा |
भोला भंगिया पिये ना जा |
पीना जो होतो भोला लस्सी तू पिला |
आके अबीर गुललवा लगा जा |
भोला भंगिया पिये ना जा |
खाना जो हो तो खीर पूड़ी तू खा जा |
जहर धतुरवा ना खा |
भोला भंगिया पिये ना जा |
खेलना जो हो होरी गौरा संग खेला |
गणेश कार्तिक के रंगवा तू दे दा लगा |
भोला भंगिया पिये ना जा |
लगाना हो समाधि तो कैलास पर लगावा |
भूतवन बैतलवन होरी खेले तू कहा |
भोला भंगिया पिये ना जा |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

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भोजपुरी पारंपरिक होली 4-कान्हा संग होली

February 10, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी पारंपरिक होली 4-कान्हा संग होली
सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |
हरदम करे उ बलजोरी |
जब हम जाई जमुना किनरवा |
देले मोर मटकी के फोरी |
सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |
जब हम जाई फूल लोढ़े बगिया |
खींचे मोर अँचरा के कोरी |
सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |
जब हम जाई यमुना के बिचवा |
करे मोर सड़िया के चोरी |
सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |
जब हम जाई ब्रिन्दा रे बनवा |
बंसिया बजाई नचावे राधा गोरी |
सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |
जब हम जाई दहिया लेईके बज़रिआ |
कहे चला कदमवा के ओरी |
सखी खेलब ना कान्हा संग होरी |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

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भोजपूरी लोकगीत (पूर्वी धुन ) – तोहरो संघतिया

January 29, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपूरी लोकगीत (पूर्वी धुन ) – तोहरो संघतिया
याद आवे जब तोहरो संघतिया |
करे मनवा तनवा के झकझोर |
बिसरे नाही प्रेमवा के बतिया ,
बरसे मोरे नयनवा से लोर |
याद आवे जब तोहरो संघतिया |
कइके वादा हमके बिसरवला |
तोड़ी नेहिया के बहिया छोडवला |
सुनाई केतना हम आपन बिपत्तिया |
मिले नाही हमके कही ठोर |
याद आवे जब तोहरो संघतिया |
तोड़े के रहे काहे दिलवा लगवला |
सुघर काहे हमके सपना देखवला |
साले हमके तोहार सावर सुरतिया |
चले नाही केवनों दिलवा प ज़ोर |
याद आवे जब तोहरो संघतिया |
भूखियो न लागे हमके नींदियों ना लागे |
मखमल के सेजिया कटवा जस लागे |
सही केतना हम लोगवा ससतिया |
तरवा गिनत हमके होई जाला भोर |
याद आवे जब तोहरो संघतिया |
जिनगी डुबवल भवरिया सवरिया |
बिरह के अगिया जरे ई गूज़रिया |
नागिन जईसे डसे कारी रतिया |
भरीला तू भर अंकवरिया माना बतिया मोर |
याद आवे जब तोहरो संघतिया |
करे मनवा तनवा के झकझोर |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

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हिन्दी ओज कविता-अभिनन्दन बना लेंगे |

January 26, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिन्दी ओज कविता-अभिनन्दन बना लेंगे |
मिट्टी वतन सिर माथे चन्दन बना लेंगे |
ऊंचा तिरंगा भारत सदा वंदन बना लेंगे |
रंगी शहीदो खून आजादी नमन उनको |
कुर्बानी शहीदों हम वचन बंधन बना लेंगे|
आजाद भारत आ पहुंचा किस मुकाम तक |
बिगड़े हालात इसे ब्रिज नन्दन बना लेंगे |
लाख तूफानो बुनियाद कोई हिला न सका |
हर वीर जवानो हिन्द अभिनन्दन बना लेंगे |
चाल चलता दुशमन मगर पार पाता नहीं |
मोदी अमित डोभरवाल दुश्मन क्रंदन बना लेंगे |
जड़े जमी भारत जमीन पाताल हिलाना मुश्किल |
पहरेदार ऊंचा हिमालय दीवार वतन बना लेंगे |
है हर खासो आम दीवाना हिन्द का बहुत |
मिल सब दुशमनों वतन दुख भंजन बना लेंगे |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

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हिंदी गजल- अब सफा कीजिये |

January 18, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिंदी गजल- अब सफा कीजिये |
टूटे रिश्तो मे जान बाकी हो अगर ,
प्यार से सींचकर अब वफा कीजिये |
काँच के जैसा होता है दिल का रिस्ता यहा |
टूट न जाये दील अब बचा कीजिये |
लाखो मिल जाएँगे सबको सबकी जवानी मे |
ढल जवानी हमसफर अब ढूंढा कीजिये |
तेरी दौलत के खातिर है चाहने वाले कई |
करता कौन मोहब्बत अब पता कीजिये |
हुशनों जवानी के है सब भूखे यहा |
जल जाये जवानी जुल्मो न खता कीजिए |
दिल की बात दिल मे न रखिए जनाब |
गर हो शिकायत कोई अब रफा कीजिये |
मिल गया जो दिल का रिश्ता उसे कबुल करो |
गर हो गई भूल कोई अब दफा कीजिये |
टूटे रिश्तो मे जान बाकी हो अगर ,
प्यार से सींचकर अब सफा कीजिये |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

मोब /वाहत्सप्प्स -9955509286

हिन्दी गजल- मुझको भुलाए है |

January 18, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिन्दी गजल- मुझको भुलाए है |
दिल मे क्यो मेरे आप समाये है |
ख्वाब आंखो क्यो आप दिखाये है |
जिधर भी देखिये आप का नजारा है |
क्या बताए कैसे मैंने रैन बिताए है |
होके बेखबर आप चैन से सोते है |
रातो को जाग आँसू मैंने बहाये है |
अंजुमन मे हम तन्हा नजर आते है |
दिल लगा क्या खोये क्या पाये है |
हुआ रुसवा तेरे खातिर जमाने मे |
तेरे नाम लोगो ने कितना सताये है |
तड़पता है दिल आपकी नजर को |
कर लूँ दीदार पलके हम बिछाए है |
हसीन जलवा नजरों हटता ही नहीं |
आप मगर मुझको क्यो भुलाए है |
चाहा खबर न लगे प्यार जमाने को |
हंगामा शहर अब क्या छिपाए है |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

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हिन्दी गीत- क्यो हुआ

January 18, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिन्दी गीत- क्यो हुआ
मुझे पहली बार प्यार हुआ |
यार क्यो हुआ |
झूठा ही कोई दिलदार हुआ |
यार क्यो हुआ |
मैंने चाहा नहीं मैंने सोचा नहीं |
हुआ क्या मुझको पता नही |
क्यो उसका मुझे इंतजार हुआ |
यार क्यो हुआ |
था मै बेपरवाह कितना मजा था |
होगी उसकी चाह किसको पता था |
मै क्यो इतना लाचार हुआ |
यार क्यो हुआ |
धड़कने नाम उसका लेती है |
बिना उसके न जागती न सोती है |
मै उसका बड़ा तलबगार हुआ |
यार क्यो हुआ |
हर जगह हर शय वो दिखता है |
हर पल दिल मेरे वो रहता है |
काया मुझे उससे प्यार हुआ |
यार क्यो हुआ |
मुझे पहली बार प्यार हुआ |
यार क्यो हुआ |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

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भोजपुरी गीत- काहे भुला गइलू |

January 18, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी गीत- काहे भुला गइलू |
दिलवा लगाके काहे भुला गइलू |
भईल केवन कसूर काहे कोहा गइलू |
तोड़ दिहलु दिलवा काँच के टुकड़ा जईसन |
लगे सुरतिया टोहार चाँद के मुखड़ा वईसन |
छोड़ी हमके काहे रुला दिहलु |
दिलवा लगाके काहे भुला गइलू |
पवन झंकोरा उड़े केसिया बड़ा निक लागे |
चमचम चमके लाल बिंदिया बड़ा निक लागे |
कोमल दिलवा ठोकर लगा गइलू |
दिलवा लगाके काहे भुला गइलू |
आवा तोहे दिलवा के रानी हम बनाइब |
प्रेमवा के गितिया गाई के हम सुनाइब |
बिना रे कसूर काहे दगा दिहलु |
दिलवा लगाके काहे भुला गइलू |
सथवा निभाइब हमसे किरिया खियाला |
छोडब नाही संग तोहरो बतिया पतीयाला |
केवन सवरिया गोरी लोभा गइलू |
दिलवा लगाके काहे भुला गइलू |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

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भोजपुरी लोकगीत (पूर्वी ) – सालेला ये राम |

January 18, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी लोकगीत (पूर्वी ) – सालेला ये राम |
अब ना सहब ये मोदी जी ,
देश बिरोधी घतिया ,दुशमन के बोलीया ,
लागेला ये राम ,दुशमन के बोलिया |
अस मन करे उनके देशवा भगवती ,
सविधनवा के बतिया याद आवेला ये राम |
लागेला ये राम ,दुशमन के बोलिया |
होते यदि दुश्मन बहरिया ,
उनके गोलिया चलवती ,देशवा के लोगवा
सालेला ये राम दुशमन के बोलिया |
लागेला ये राम ,दुशमन के बोलिया |
जाये के पड़ी एक दिन सिमवा के ओरिया।
मनवा जहिया ले बांधेला ये राम |
लागेला ये राम ,दुशमन के बोलिया |
दंगा करावे रोज धरना लगावे खूब |
बांटेला ये राम देश धरमवा जतिया |
लागेला ये राम ,दुशमन के बोलिया |
केतनों लगइहे अगिया, जरी नाही देशवा कहियो |
भावेला ये राम सबके मोदी के बतिया |
लागेला ये राम ,दुशमन के बोलिया |
मिली जुली रहिहे लोगवा, चलिहे नाही केवनों जोतवा |
भगावेला ये राम मोदी जी देशवा बिपतिया |
लागेला ये राम ,दुशमन के बोलिया |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

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