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Shyam Kunvar Bharti

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Shyam Kunvar Bharti

@shyam kunvar • Joined Oct 2019 • Active 4 years ago

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

श्रीराम भजन – प्रभु श्रीराम आएंगे|

November 13, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

श्रीराम भजन – प्रभु श्रीराम आएंगे|
जला लो हर घर मे दिया आज श्रीराम आएंगे|
काट बनवास संग सीता आज भगवान आएंगे |

किया बद्ध दैत्यो का मानव उद्धार किया |
खाकर जूठा बैर सबरी संदेश संसार दिया |
चढ़ बीमान पुष्पक मार्ग वो आसमान आएंगे |
जला लो हर घर मे दिया आज श्रीराम आएंगे|

मनाओ सब दिवाली घर भी सजालो अपना |
जगमग हर गाँव शहर द्वार लिपालो अपना |
सजाओ फूलो से अयोध्या देव मेहमान आएंगे|
जला लो हर घर मे दिया आज श्रीराम आएंगे|

मारकर रावण को लंका मे सीता को छुड़ाया है |
किया अधर्म का नास राज विभीषण दिलाया है |
आज सब मिलकर सियाराम गुणगान गाएँगे |
जला लो हर घर मे दिया आज श्रीराम आएंगे|

करेंगे श्रीराम जब कृपा घर लक्ष्मी वास होगा |
बढ़ेगी शुख शांति रिद्धी सिद्धि निवास होगा |
गाओ श्रीराम का भजन बन धनवान जाएँगे |
जला लो हर घर मे दिया आज श्रीराम आएंगे|

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी सरस्वती वंदना – मईया दया कईदा |

November 10, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी सरस्वती वंदना – मईया दया कईदा |
रात दिन मईया तोहरे नामवा के जापी ,
हमपे दया कइदा |
तनी देतु दर्शनवा मईया दया कइदा |
रात न चयन पड़े दिन ना चयनवा |
तोहरे के देखे खातिर तरसे नयनवा |
अबोध बलकवा हमके गोदिया मे राखी |
हमपे दया कइदा |
तनी देतु दर्शनवा मईया दया कइदा |
बिदद्या के देवी माई देलु सबके ज्ञान हो |
बुद्धि लरकाई माई हम हई नादान हो |
अज्ञानी अनाड़ी हमहु कही बात सांची |
हमपे दया कइदा |
तनी देतु दर्शनवा मईया दया कइदा |
हंस के सवारी शारदा हथवा मे बिनवा |
बल बुद्धि दे दा हमके फेरा हमरो दिनवा |
लिखी लिखी गीतिया नाम तोहरो हम बाँची |
हमपे दया कइदा |
तनी देतु दर्शनवा मईया दया कइदा |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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by Shyam Kunvar Bharti

कविता- उजाला घर मे हो |

November 6, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- उजाला घर मे हो |
मन मे जले दीप उजाला हर घर मे हो |
अंधेरा न कही जगमग हर शहर मे हो |
चमके ललाट राष्ट्र रहे चमक तिरंगे की |
सीमा बम धमाका कोई थोड़ा उधर मे हो |
बच्चो के हाथ फुलझड़िया तन नए कपड़े |
ऊंचे मकानो दिये रौनक थोड़ी इधर मे हो |
जले दिये घर सबके मकान टूटा ही सही |
खुशियो की चमक अब सबके नजर मे हो |
कच्चा या पक्का घर रंगोली सजेगी सबके |
मने दिवाली हिन्द लक्ष्मी हर बसर मे हो |
आओ मिल जलाए दिये दिल भी मिलाये |
सुख संपत्ति संपदा शांति हर गुजर मे हो|
मिले रिद्धी सिद्धि नित्य लक्ष्मी वास रहे|
दुख दुर्भिक्ष दूर असर भारती हर बहर मे हो |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी कविता- बचावल ना गइल |

October 29, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी कविता- बचावल ना गइल |
होत रहे ज़ोर सरेआम अबला
केहु मान बचावल ना गइल |
ले लिहस कातिल जान
केहु पानी आँख बहावल ना गइल |
जात धरम देख करे राजनित,
ई केवन नित चले लागल |
मर्यादा हिन्दी मुस्लिम एक समान ,
केहु ज्ञान बतावल ना गइल |
मजहब पसंद के चाही ,
छिंक आई त हो हल्ला मचावे लगिहे |
आपन सरकार सजात गइल इज्जत ,
केहु धरना लगावल ना गइल |
मुजरिम गैर जात उनका मूह ना खुली |
केवनों अबला जानो इज्जत चल जाय ,
केहु हल्ला मचावल ना गइल |
बेहू बेटी के इज्जत से का मतलब |
भोट मिली की ना मिली जरूरी बा |
अइसन मतलबी बेईमान नेता ,
केहु लात से लतियावल ना गइल |
जब जाई इज्जत आपन बहू बेटी के ,
देखिहे लोग उनकर कुदल फांदल |
समाज के कलंक कल्लू ,
केहु बोटी बोटियावल ना गइल |
औरत आबरु समान हिन्दू मुसलमान ,
मान बेटी स्वाभिमान देश के बात पते की ,
केहु साँच पतियावल ना गइल |
बीच सड़क लूटा जाये इज्जत अबला ,
देखत रहे तमासा ई कइसन सरकार |
पकड़ के मुजरिम बेड़ि मे ,
केहु जेल धकियावल ना गइल |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी गजल – जिनगी अब जहर भइल |

October 27, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी गजल – जिनगी अब जहर भइल |
तोहसे प्यार भइल घाव अब कहर भइल |
खा के धोखा आशिक एहर ना ओहर भइल|
रूप के चाँदनी मे प्यार के आसरा खोजली |
रूप मिलल ना चान इश्क बे डहर भइल |
मासूम चेहरा मे दिल पत्थर कइसे होला |
बेवफा के दगा जिनगी अब जहर भइल |
प्यार कइल केवन कसूर बा बतावा केहु |
टुटल दिल हमार प्यार अब बे कदर भइल|
दिल तोड़ही के रहे सपना देखवलू काहे |
ठुकरा दिहलु हमके तमासा शहर भइल |
कीमत आशिक पत्थर दिल ना जाने कबों |
ना जनलु जिनगी भारती कईसे गुजर भइल|

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी देवी पचरा गीत- खपरवा के धार |

October 23, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी देवी पचरा गीत- खपरवा के धार |
काली मईया करबे ना हो पूजनवा तोहार |
तोहके देइब हम खपरवा के धार |
काली बा सुरतीया बाकी बाडु तू दयालु |
रुपवा भयावह माई कमवा कृपालु |
लेई ला पूजनवा ना हो करा मोर उद्धार |
तोहके देइब हम खपरवा के धार |
लाली लाली जीभिया लंबी काली केसिया |
मथवा पर बिंदिया सोहे बड़ी बड़ी अँखिया |
जग कल्यानी मईया खोला ना हो केवाड़ |
तोहके देइब हम खपरवा के धार |
रक्त बीज खुनवा माई खप्पर मे पियलु |
भगतन के दुखवा माई पल मे हर लिहलु |
देवी मईया करतू ना हो भारती विचार |
तोहके देइब हम खपरवा के धार |
श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी देवी पचरा गीत- आपन तू पूजनवा |

October 21, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी देवी पचरा गीत- आपन तू पूजनवा |
लेला लेला ये मईया आके आपन तू पूजनवा |
शेरवा सवार होके देवी लेला तू असनवा |
लेला लेला ये मईया आके आपन तू पूजनवा |
सोनवा के दीयना माई सोनवा के थरिया |
गईया के घिउया माई दरसन देबू कहिया |
होला जय जय कार तोहरो सगरो जमनवा |
लेला लेला ये मईया आके आपन तू पूजनवा |
सोनवा के रथवा सोना कंगना माई हथवा |
सोनवा कटार लाली बिंदिया माई मथवा |
रोई चरनिया गिरे माई तोहरे भारती ललनवा |
लेला लेला ये मईया आके आपन तू पूजनवा |
निमिया के डार माई झुलवा लगावेली |
फुलवा से सजल मालिन पेगवा लगावेली |
झूमी झूमी मालिन गावे पचरा माई के भजनवा |
लेला लेला ये मईया आके आपन तू पूजनवा |
लाल सेनुरवा चमके दमके माई के सुरतिया |
हहरत आवे देवी चहकत देवी के मुरतिया |
पूजी पूजी तोहके लोगवा नाचे होइके मगनवा |
लेला लेला ये मईया आके आपन तू पूजनवा |
श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी देवी गीत-चला माई के दुअरिया |

October 20, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी देवी गीत-चला माई के दुअरिया |
मोर करेजउ हो चली चला माई के दुअरिया |
लाल अड़हुलवा सेनूर चढ़ईहा ललकी चुनरिया |
मोर करेजउ हो चली चला माई के दुअरिया |
नव दिन नव रूप मे दुर्गा माई आवेली |
शैलपुत्री ब्रम्हचारिणी चंद्रघंटा उ कहावेली |
कुस्मांडा स्कंधमाई कार्तिकायिनी डलिहे नजरिया |
मोर करेजउ हो चली चला माई के दुअरिया |
सातवाँ रूप कालरात्रि आठवाँ महागौरी रूप हो |
नौवा सिद्धिदात्री चढ़ावा दिया बाती धूप हो |
सुनर हउवे रूपवा माई बना देवी के पुजरिया |
मोर करेजउ हो चली चला माई के दुअरिया |
छोड़ा पिया माया मोह लगावा नेह माई मे |
नौ दिन बरत उपवास धियान लगावा माई मे |
दरसन पूजन कइके बना मोर बाँके सवारिया |
मोर करेजउ हो चली चला माई के दुअरिया |
अबकी अस्टमी नवमी एके दिन आई हो |
हवन आरती कइके नौ कन्या भोगा कराई हो |
खुश होइहे दुर्गा माई करीहे सुफल उमरिया |
मोर करेजउ हो चली चला माई के दुअरिया |
श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

हिन्दी देवी गीत – भक्ति दान दे दो |

October 19, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिन्दी देवी गीत – भक्ति दान दे दो |
हे प्रमेशवरी हे दुर्गेशवरी भक्ति दान दे दो |
काली कपालिनी दैत्य दलिनी शक्ति दान दे दो |
जगत जननी माँ अम्बे जगदम्बे तुम हो |
दुख हरनी सुख करनी माँ अम्बे तुम हो |
हे प्रकाशीनी आनंद करनी मुक्ति दान दे दो |
हे प्रमेशवरी हे दुर्गेशवरी भक्ति दान दे दो |
माँ शारदा कालिका कमला तेरा ही रूप है |
वैषणों बिंध्यवाशिनी काम रूप अद्द्भुत है |
हे माँ छिन्नमस्तिका मुझे रक्षित दान दे दो |
हे प्रमेशवरी हे दुर्गेशवरी भक्ति दान दे दो |
भय हारिणी कस्ट निवारिणी तुम ज्ञान दायिनी |
भक्त भव तारिणी जग कल्याणी सिंह वाहिनी |
चंड मुंड दामिनी मुझ संकट युक्ति दान दे दो |
हे प्रमेशवरी हे दुर्गेशवरी भक्ति दान दे दो |
कर कमल शंख चक्र कटार धर तुम आओ |
नैन विशाल काली केस कमर कर तुम आओ |
चरण धुली मस्तक भारती अर्पित दान दे दो |
हे प्रमेशवरी हे दुर्गेशवरी भक्ति दान दे दो |
श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

कविता- प्रेम रस – दिल मे रहता हूँ |

October 14, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- प्रेम रस – दिल मे रहता हूँ |
दुनिया के दुखो से तुम्हें कही दूर लिए चलता हूँ |
आओ प्रिये हर नजर के असर दूर किए चलता हूँ |
चाँदनी रात है खुला आसमान ठंडी हवा बह रही |
सितारो की महफिल मिल जाओ फिजाँ कह रही |
हर तरफ शांती सकुन खुशबू रात रानी महकी है |
बना लो सेज नर्म हरी घास जुलफ़े तेरी बहकी है |
उतर आया चाँद गोद मेरी दावे से मै कहता हूँ |
भूल जाओ गम सारे आओ आज दूरिया मिटा दो |
समा लो मुझे जुल्फों के साये गोद सिर लिटा दो |
डूब जाऊँ तेरी गहरी झील सी आंखो की गहराई |
नजरो से उतर तूने दिल मे मेरी जगह है बनाई |
हसीन वादियो तेरी गजल को दिल से पढ़ता हूँ |
तेरे बदन की खुशबू को और भी महक जाने दो |
सोये हमारे अरमानो को और भी बहक जाने दो |
पूनम की चाँद हो तुम लरजते लबो फरियाद हो |
हुश्न ए मल्लिका तुम आज हर बंधनो आजाद हो |
नहीं कोई दोनों के बीच मै तेरे दिल मे रहता हूँ |
एहसास तेरी गर्म साँसो का हो रहा है मुझे बहुत |
मदहोसी का आलम अब छा रहा है तुझमे बहुत |
पाक मोहब्बत हमारी जज़बातो को संभाले रखना |
हो जाये गुनाह कोई दोनों खुद को संभाले रहना |
मोहब्बत और मोहब्बत सिर्फ मै तुमसे करता हूँ |
श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी देवी गीत (धोबी गीत ) – होई माई के नजरिया |

October 13, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी देवी गीत (धोबी गीत ) – होई माई के नजरिया |
मुंहवा काहे फुलवलु गोरी चला मेला के डहरिया |
हम घुमाइब तोहके ना झारखंड बोकारो के शहरिया |
हम घुमाइब तोहके ना झारखंड बोकारो के शहरिया |
सड़िया ले अइली तोहके काजर टिकुली ले अइली |
अलता पावडर संगवा तोहके चानी पायल ले अइली |
ले अइली तोहके ना रानी चम चम चमके चदरिया |
हम ले अइली तोहके ना |
हम घुमाइब तोहके ना झारखंड बोकारो के शहरिया |
लागल लोक डाउन गोरी असो मेलवा ना लगिहे |
दुर्गा पूजा होई बाकी झूला खेलवा ना होइहे |
कहा घुमाइब तोहके ना गोरी मेला के बजरिया |
कहा घुमाइब तोहके ना|
हम घुमाइब तोहके ना झारखंड बोकारो के शहरिया |
मेलवा ना चला गोरी तोहके मूर्ति हम देखाइब |
दुर्गा माई के चरनिया केरा नारियर चढ़ाइब |
मन से पुजवा करिहा ना होई माई के नजरिया |
मन से पुजवा करिहा ना |
हम घुमाइब तोहके ना झारखंड बोकारो के शहरिया |
साल भर पर आइल गोरी माई दुर्गा के पुजनवा |
नवरातन भूखा तू हु गावा देवी माई के भजनवा |
मनसा पूरा होइहे ना भरी खाली तोर अंचरिया |
मनसा पूरा होइहे ना |
हम घुमाइब तोहके ना झारखंड बोकारो के शहरिया |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

भोजपूरी देवी गीत- देवी के चरण मे |

October 12, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपूरी देवी गीत- देवी के चरण मे |
चला पिया चली जा बाजार होखेला पूजा नवरातन मे |
कीनिहा माई के सिंगार चढ़ईहा देवी के चरण मे |
नौ दिन पिया तू उपवास बरत करिहा |
नौ रूप माई के दरसन खूब करिहा |
ओढ़ईहा चुनरी ओहार पिया माई के चरण मे |
कीनिहा माई के सिंगार चढ़ईहा देवी के चरण मे |
शेरवा सवार माई खूब लहरत अइहे |
खुश होइहे देवी तोहके खूब वर दिहे |
भगतन बदे लिहली दुर्गा अवतार चला माई के शरण मे |
कीनिहा माई के सिंगार चढ़ईहा देवी के चरण मे |
रोज रोज पिया चंडी पाठ करईहा |
नवमी के दिन नौ कन्या खियईहा |
होई जाई तोहरो उद्धार मगन रहा माई के भजन मे |
कीनिहा माई के सिंगार चढ़ईहा देवी के चरण मे |
पंडित जी बुलाई धूप हवन करईहा |
माई के चरनिया गिरि मथवा झुकईहा |
देवी दुर्गा होला जय जय कार सारा जग मण्डल मे |
कीनिहा माई के सिंगार चढ़ईहा देवी के चरण मे |
श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी देवी पचरा गीत- करा तू अंजोर |

October 7, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी देवी पचरा गीत- करा तू अंजोर |
अब नाही अइबु त कब माई अइबु ,
बलकवा रोवे बड़ी ज़ोर |
भारती पुकारे ले अवतू ये काली माई |
जीनिगिया मे करा तू अंजोर |
सुनीला पुकार तू हमरो ये काली माई |
रहिया ना लउके केवनो ओर |
एक वर दिहा दूसर वर दिहा ,
तीसरे उद्धार करा माई मोर |
भारती पुकारे ले अवतू ये काली माई |
जीनिगिया मे करा तू अंजोर |
चंड मुंड मरलु तू रक्तबीज मरलु ,
महिषा सुर के कइलु संघार |
दुखवा हमार कब टलबू ये काली माई |
डगमग नईया बाड़े मोर |
भारती पुकारे ले अवतू ये काली माई |
जीनिगिया मे करा तू अंजोर |
कालन के काल माई भगतन ढाल माई |
काटी अनहरिया करा तू अंजोर |
काली काली केसिया लाली लंबी जीभिया |
लहरत आवा माई होला बड़ी शोर |
भारती पुकारे ले अवतू ये काली माई |
जीनिगिया मे करा तू अंजोर |
छोडब ना चरनीया काली कलकत्ता वाली |
लाल अड़हुलवा होलु तू वीभोर |
लाल सेनुर केरा नारियर चढ़ाइब |
लाली चूड़िया खनके बड़ी ज़ोर |
भारती पुकारे ले अवतू ये काली माई |
जीनिगिया मे करा तू अंजोर |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी कविता- राजनीति होखे के चाही |

October 6, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी कविता- राजनीति होखे के चाही |
केहु मरे चाहे जिये राजनीति होखे के चाही |
केहु आबरू लूट जाये राजनीति होखे के चाही |

औरत ना ई खिलौना हई जब चाहे खेल ला |
जान ना जाए केहु मऊत के मुंह धकेल दा |
इनकर इज्जत जाये राजनीति होखे के चाही |

बेटी भईली का भइल कुल क मर्यादा बाड़ी |
माई बाप क दुलार पूचकार उ जयादा बाड़ी |
नाम नीलाम हो जाये राजनीति होखे के चाही |

समाज आज कहा से कहा आ गईल भईया |
देवी जस नारी दुशमन महा हो गईल दईया |
दूरदसा नारी हो जाये राजनीति होखे के चाही |

खिसकल जमीन आपन पाये के मौका मिलल |
नाम मीडिया मे खूब चमकावे के चौका लगल |
न्याय नारी उफर जाय राजनीति होखे के चाही |

बलात्कार भइल की अत्याचार पहीले जान ला |
भड़के ना कही दंगा जात पांत बात मान ला |
देश संपत्ति लूटे चाहे टूटे राजनीति होखे के चाही |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

कविता- शास्त्री गांधी से सीख लो |

October 4, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- शास्त्री गांधी से सीख लो |
लड़ा जाता कैसे जंगे आजादी गांधी से सीख लो |
सत्य अहिंसा की कैसी आजादी गांधी से सीख लो |
छोड़ धन दौलत रूप संत का बना लिया उसने |
कैसे हो बुलंद हौसला सबका गांधी से सीख लो |
साबरमती का संत कपड़ा सूत चरखा चलाया |
राम रहीम एक है गाया कैसे गांधी से सीख लो |
जाड़ा धूप गरमी सब पहन धोती सहता रहा |
लड़ा कैसे अंग्रेज़ो एक संत गांधी से सीख लो |
अवतरित हुये आज सादगी के प्रतीक शास्त्री |
थर्राया दुशमनों घर घुस कैसे शास्त्री से सीख लो |
हुई अचानक मौत शास्त्री देश बड़ा मर्माहत हुआ|
खड़ा पंक्ति पुत्र फार्म भरा शास्त्री से सीख लो |
रह प्रधान मंत्री शास्त्री ने पद न दुर्पयोग किया |
गुजारा तंख्वाह पर कैसे सब शास्त्री से सीख लो |
गांधी शास्त्री भारत के गौरव संत महापुरुष हुये |
बढ़ाया कैसे भाल भारत गांधी शास्त्री से सीख लो |
श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी गजल- जब बसर होला |

September 26, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी गजल- जब बसर होला |
केहु के नेह मे देह के ना खबर होला |
प्रेम के रोग ह ई बड़ा जहर होला |
केतनों समझावे केहु कबों ना मानेला |
बहक जाला कदम अइसन ई डहर होला |
प्यार तोहसे ना करी ई का कहलू तू |
चाहे करा रुसवा तनको ना असर होला |
दिहला काहे दिल तू बोला ये बिधाता |
निकसे ना केहु दिल जब उ ठहर जाला |
मिले प्यार मे धोखा ई का जरूरी बा |
खा के ठोकर भी ना केहु सुधहर जाला |
बनल दुशमन जमाना राह मोहब्बत मे |
प्यार भइला के रूप ना उमर होला |
प्यार ना करी त का करी दुनिया मे |
बहे आँख से आँसू दिल केहु बसर होला |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

साई भजन – तुही तू है |

September 23, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

साई भजन – तुही तू है |
साई तेरी दुआ से दुनिया मे रोशनी है |
गर कर दे तू करम यहा कुछ नहीं कमी है |
तेरी रहमतों से कायम ये दुनिया जहा है |
जिधर भी देखो हर तरफ नूर तेरा वहा है|
साई बाबा हर तरफ तुही तू है |
गर तू न होता बाबा कुछ भी न होता |
तेरे मुरीदों को क्या क्या न हस्र होता |
साई बाबा हर तरफ तुही तू है |
डाल दे तू नजर जिधर उधर कमाल हो जाये |
अन्धो को आंखे गूंगे की बोली धमाल हो जाये |
साई बाबा हर तरफ तुही तू है |
कहा से तू आया सिर्डी मे धुनि रमाया |
हर दुखियो के दुख तूने पल मे भगाया |
साई बाबा हर तरफ तुही तू है |
होके मजबूर तेरी चौखट सिर झुकाने आया |
दिल के दर्द साई बाबा को सुनाने आया |
साई बाबा हर तरफ तुही तू है |
अब तेरे सिवा न कोई यहा सहारा मेरा |
अंधेरी जिंदगी मेरी करो उजियारा मेरा |
साई बाबा हर तरफ तुही तू है |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी ग़ज़ल -का कसूर बा

September 22, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी गजल – का कसूर बा |
आँख से बहल आँसू तू पानी कहा सब मंजूर बा |
बहल काहे ई पानी बतावा हमार का कसूर बा |
कईल तोहसे प्यार का ई गुनाह हो गईल बोला |
तोड़ दिहलु दिल हमार धंसल करेजा नासूर बा |
सोचली सजाइब प्यार के दुनिया तोहरे संग हम |
तोड़ के सपना चल दिहलु कईल दगा जरूर बा |
गड़े ना कबों काँटा पाँव दिल बिछवली आपन |
कुचल दिहलु मोर करेजा तोहरे इश्क के शुरुर बा |
मरम दिल बुझतु करम करतू ना तू कबों अइसन |
साँच आशिक हई छोडब ना साथ दिल मजबूर बा |
तू हमार जान हमार परान सब कुछ तुही तू बाड़ू |
तोहरे प्यार के हमरो ये जान सबसे गुरूर बा |
अँखिया मे समा के दिल मे काहे उतर गइलू |
कइसे करी हम प्यार हमरो कुछउ ना सहुर बा |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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by Shyam Kunvar Bharti

मुक्तके – दौलत आखिरी |

September 20, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

मुक्तके – दौलत आखिरी |
पाँच गज कफन दो गज जमीन दौलत आखिरी |
लाखो करोड़ो की चाह हंगामा बदौलत आखिरी |
आना जाना खाली हाथ लड़ाई किस बात की है |
सब कुछ रह जाएगा यहा नाम सोहरत आखीरी |
और कुछ नहीं
सत्य शिव और सुंदर वही और कुछ नहीं |
छंटा घटा जटा समंदर वही और कुछ नहीं |
बाग बागीचा फूल भवरे झरने नदी सुंदर |
गगन मगन जल पवन वही और कुछ नहीं |
कुछ किया क्या |
परारब्ध भोग लिया फिर न हो कुछ किया क्या |
छूटे जनम मरण जरण बंधन कुछ किया क्या |
जप तप योग ध्यान नहीं कर्म नेक जरूरी है |
तन मे काम क्रोध मद लोभ शमन किया क्या |
राई राई हिसाब
कर लो छुपकर बुराई देख लेगा वो प्रमेश्वर है |
तीनों लोको का नियंता कर्त्ता धर्त्ता वो महेश्वर है |
भले बुरे कर्मो का फल लेखा जोखा रखता है |
पाई पाई राई राई होगा हिसाब वो पीठाधीश्वर है |
श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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by Shyam Kunvar Bharti

गजभोजपुरी गीत- चुनरिया संभाला सजनी |ल

September 19, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी गीत- चुनरिया संभाला सजनी |
बरसेला बदरा झीर झीर चुनरिया संभाला सजनी |
चिकन भुईया जइहा ना गिर उमरिया संभाला सजनी|
रही रही चमकेले बदरा मे बिजुरिया |
भरी भरी नजरा मे तरसेले गुजरिया |
लौटी सइया अइहे ना फिर गगरिया संभाला सजनी |
दुअरा पर ठाड़ गोरी निहारे ली डहरिया |
कब अइहे निर्मोही मोर बाँके सवरिया |
बहावे गोरी अँखिया नीर नजरिया जुड़ाला सजनी |
सगरो गगनवा छाईल कारी बदरिया |
पिया घरे नाही गोरी जिनगी अनहरिया |
बयार बरखा जिया अधीर सेजरिया संभाला सजनी |
छाए घटा घनघोर हिया भय लागे बड़ी ज़ोर |
गरजे बदरवा पिया बिन पड़पे जिया मोर |
अईले साजन खियावा खीर पजरिया बुलाला सजनी |
बरसेला बदरा झीर झीर चुनरिया संभाला सजनी |
चिकन भुईया जइहा ना गिर उमरिया संभाला सजनी|

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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by Shyam Kunvar Bharti

गजल

September 18, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हर तरफ तेरे नजारे नजर आ रहे है |
तेरे इश्क के इशारे नजर आ रहे है |
हुश्न ऐसा चाँद फीका हुआ जाता है |
अंधेरों हुश्न करारे नजर आ रहे है |
आंखो शराब का सागर लहराता है |
हुश्न इश्क किनारे नजर आ रहे है |
तब्बशुम लबो गुलाबी जिगर पार है |
बिखरी जुलफ़े कारे नजर आ रहे है |
देख जलवा ए हुश्न ईमान खतरे मे है |
ईमान वाला हम बेचारे नजर आ रहे है|
तुमसे पहले कोई याद न बेकरारी थी |
शामों शहर तेरे सहारे नजर आ रहे है |
वक्त ऐसा न गुजरा जब तेरी याद आई |
दिल लूटा गम के मारे नजर आ रहे है |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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by Shyam Kunvar Bharti

हिन्दी दिवस आज आया

September 14, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिन्दी दिवस की हार्दिक बधाई |
कविता- हिन्दी दिवस आज आया |
हिन्दी दिवस आज आया ,सरे हिन्द परचम लहराया |
हर भाषा की सरताज है हिन्दी सबने झण्डा फहराया |
भोजपुरी गुजराती मराठी बंगाली पंजाबी बहने सगी है |
तमिल मलयालम आसामी उडिया उर्दू सजने लगी है |
मिलकर बहने भाषाओ हिन्दी को सर माथे है लगाया |
आज नहीं हर दिन हिन्दी दिवस मिल हम मनाएंगे |
तद्भव तत्सम देशज बीदेशज शब्दो हिन्दी सजाएँगे |
भारत ही नही बिदेशों गैर हिंदीओ ने हिन्दी अपनाया |
प्रेमियो की प्रेम है हिन्दी कवियों की भाव है हिन्दी |
रसिको की जान है हिन्दी ,हिन्द की शान है हिन्दी |
विविधता मे अखंड भारत को हिन्दी एक है बनाया |
दिनकर निराला प्रेमचंद सहाय ने हिन्दी सवारा था |
शुभद्रा की कविता हिन्दी अंग्रेज़ो कहर बरपाया था |
देवकी नंदन खत्री की तिलस्म हिन्दी पढ़ना सिखाया |
हिन्दी दिवस आज आया ,सरे हिन्द परचम लहराया |
श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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by Shyam Kunvar Bharti

कविता- ज्ञान दाता |

September 5, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई |
कविता- ज्ञान दाता |
ज्ञान दाता विज्ञान दाता तुम ही हो |
हे गुरु प्रकाश दाता मुक्ति दाता तुम ही हो |
जीवन मे अंधेरा बहुत था तुमसे पहले|
था घना कोहरा तुम्हारी दृस्टी से पहले |
मूल्य कुछ भी न था मेरा संसार मे |
खा रही थी हिचकोले नाव मजधार मे |
देवता मेरे माता पिता तुम ही हो |
उससे पहले माँ मेरी गुरु बन गई |
मेरे अवगुण दूर करने की ठन गई|
गिरना उठना चलना बोलना सिखा |
कौन क्या बताया बचपन गोद मे बिता |
मुझ अज्ञानी चरण धूल दाता तुम ही हो |
शिक्षक गर जहा मे न होते |
हर तरफ मूढ़ अज्ञानी भटक रहे होते |
गुरु की महिमा अद्द्भुत अनमोल है |
गुरुबीन जीवन अधूरा सत्य बचन बोल है |
समाज सुधारक राष्ट्र निर्माता तुम ही हो |
हे गुरु प्रकाश दाता मुक्ति दाता तुम ही हो |
श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी बिरह गीत – करी केकेरा प सिंगार बलमु |

September 1, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी बिरह गीत – करी केकेरा प सिंगार बलमु |
कईला काहे हमसे अइसन तू प्यार बलमु |
छोड़ी दिहला हमके तू मजधार बलमु |
तोहरे बिना लउके हमके सगरो अनहरिया |
अंसुवे मे डूबल जाता हमरो उमरिया |
कइला काहे हमसे तू नैना चार बलमु |
छोड़ी दिहला हमके तू मजधार बलमु |
तन औरी मन राजा तोहके सब सउपली|
मन के मंदिरवा तोहे देवता नियन पुजली |
दगाबाज बनला काहे मोर दिलदार बलमु |
छोड़ी दिहला हमके तू मजधार बलमु |
गाँव के बगइचवा संझवा रोज हमके बुलवला |
प्यार वाली झूठ बतिया से हमके भरमवला |
नेहिया सौतिनिया लगाई भइला तू गद्दार बलमु |
छोड़ी दिहला हमके तू मजधार बलमु |
हम नाही जनली कबों दगा हमसे करबा |
भरी मंगीया सेनुरवा छाँव अँचरा मोर रहबा |
छोड़ी परईला करी केकरा प सिंगार बलमु |
छोड़ी दिहला हमके तू मजधार बलमु |
श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी कविता – बाबू बालू खोट दिखाई |

August 28, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

भोजपुरी कविता – बाबू बालू खोट दिखाई |
सागर मे मोती मिलेला डूबी जे उहे पाई |
मेहनत क फल मीठा जे करी उहे खाई |
राजनीति किचर होला गोड़ डाल के देखा |
किचर कमल खिले सब मोदी ना बन पाई |
पीठ पीछे करे बुराई मुहवा खियावे मिठाई |
मुहवा बतियाई बुराई मइल सब धुली जाई |
नौ मन ना तेल होई न राधा नचिहे कबों |
मिताई चीन पाक भारत बाल न बांका होई |
का बरसा जब कृषि सुखानी बात सयानी |
पढे के बेरिया इंटा पाथे साहेब ना बन पाई |
आईला हरी भजन करे ओटन लगे कपास |
कहे दारोगा चोरी रोकब गिनन लगे पाई |
नाच ना आवे आँगन टेढा कड़वी बात कठोर |
पूल पुलिया भवन गिरा बाबू बालू खोट दिखाई |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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by Shyam Kunvar Bharti

गणेश वंदना – श्री गणेश वंदन |

August 22, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

गणेश वंदना – श्री गणेश वंदन |
गौरी नंन्द्न शंकर सूत करे सब श्री गणेश वंदन |
हाथी मस्तक मंगल दस्तक तेरा सत अभिनंदन |

मूषक वाहन लड्डु भोग करते सदा भक्त निरोग |
धूप दीप नैवैद्द सिंदूर अर्पण करो मस्तक चन्दन |

मंगल कर्त्ता बिघ्न्हर्त्ता दुख दूर कर्त्ता हर ओर चर्चा |
आओ गजानन लगाया स्वर्ण आसन हे दुख भंजन |

शिव शंकर के प्यारे ललना बुद्धि का क्या कहना |
दे दो बल बुद्धि सुख शांति चंद्र भाल भय भंजन |

प्रथम होती श्री गणेश पूजा तुमसा न कोई देव दूजा|
दानव संघारकर्त्ता दरिद्र तृप्ति कर्त्ता जय सुख नंदन|

होगा जहा महाराज का आसान चले न बैरी डासन |
गोर बदन मस्तक रोड़ी चन्दन कोटी कोटी है वंदन |

शुभ लाभ देते दाता रिद्धी सिद्धि के हो स्वामी तुम |
मंगल करो कोरोना मारी करो तुम भारत देव भंजन|

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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by Shyam Kunvar Bharti

ओज कविता – बिरो की धरती भारत |

August 20, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

ओज कविता – बिरो की धरती भारत |
बिरो की धरती भारत बिरो से कभी खाली न होगी |
राष्ट्र पर प्राण करेंगे न्योछावर जननी सवाली न होगी |
भ्रमजाल मायाजाल लोभ लालच मे कभी आएंगे नहीं |
डर भय मोह ममता वस रन छोड़ कभी भागेंगे नहीं |
जलती रहेगी मसाल देश भक्ति कभी खाली न होगी |
तन जाये तोपे मिसाइल बंदुके बीरो डरना आता नहीं |
रण ललकारे हिन्द की सेना पीठ दिखाना आता नहीं |
राम कि धरती दुशमन पर हो विजय दिवाली न होगी |
कितना गिनाऊ विरो की गाथा रामायण लिख जाएगी |
लक्ष्मी राणा चौहान नाम लिखने कलम घिस जाएगी |
अर्जुन भीम भिस्म बिरो धरती कभी खाली न होगी |
फड़कती है भुजाए दुशमन की सुनकर ललकार सदा |
जवाने हिन्द है शेरे हिन्द करते शेरो की हुंकार सदा |
लूटा देंगे जान जमी पर क्यो फिजा मतवाली न होगी |
एक दो नहीं सभी लाल करे बलिदान जननी भारत की |
बहने भाई नारिया सिंदूर करे कुर्बान हो रक्षा भारत की |
रक्त रंजीत हो करे सिंगार क्यो धरती लाली न होगी |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी गजल- जान जिआन हो जाई |

August 10, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी गजल- जान जिआन हो जाई |
दिल लगाके जनी ठुकरावा जान जिआन हो जाई |
मनके बात भइबो ना कइल राती बिहान हो जाई |
चार दिन के जिनगी के केवन जान बा ठिकाना |
आँख मिला के मुंह मोड़बू दिल लहूलुहान हो जाई |
न जाने केवना मोड़ पर धई लेई कोरोना के जाने |
लहरत खेत के ना सिंचाई नुकसान किसान हो जाई |
गगरी भरी त छलकबे करी रुकले ना रुकी कबों |
मोहब्बत के जाम छलक दिल घाव नीसान हो जाई |
कसूर अँखियन के सजा दिल के ना दिहल जाला |
साँच आशिक दगाबाजी मे पीस के पिसान हो जाई |
बिना तोहरे जियब कईसे पतीयाला साँच कहिला |
सनम भारती जान संग बिधना के बिधान हो जाई |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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कविता – रक्षा का वादा |

August 3, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता – रक्षा का वादा |
राखी का धागा भाई का बहना को रक्षा का वादा |
रहेगा अजर अमर प्यार भाई बहन का जियादा |
फूलो कली नाजो से पली बहना सबका दुलार है |
खुश रहे ताउम्र रंगो भरा हो जीवन न हो सादा |
आया कोरोना राखी का त्योहार आया आऊ कैसे |
भेजा संग राखी सेनेटाइजर मास्क का लिफाफा |
प्यार और दुलार के अलावा तुझे और मै क्या दूँ |
नजर न लगे खुशियो तेरी किसी इक्षा है खासा |
आए हर बरस ये त्योहार राखी का संग तू आए |
न तू मुझको भूले न मै यही हम दोनों रहे इरादा |
तिलक चंदन लगा दे कलाई मेरी राखी तू सजा दे |
आरती उतार तू मेरी और मै न रहे पास निरासा |
मिठाई जैसी मीठी तेरी जिंदगी संग तेरा सुहागा |
तू कहे न कहे तेरा दुख मै जान लूँगा सुन बहना |
जब भी पड़े जरूरत मेरी भाई भारती पास आजा |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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हिन्दी गीत – रिमझिम बरसात |

August 2, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिन्दी गीत – रिमझिम बरसात |
रिमझिम बरसात आ गई |
प्यारी तेरी याद आ गई |
बुँदे तन को भिंगा गई |
प्यारी तेरी याद रुला गई|
छाए नभ मे बादल काले काले |
याद मे तेरी दिल हुये छाले |
घर आँगन हवा बलखा गई |
प्यारी तेरी याद आ गई |
भिंगी हवा बहे ठंडी ठंडी |
आह निकले दिल मंदी मंदी |
झोंका फुहार अरमा जगा गई |
प्यारी तेरी याद आ गई |
तुम होते तो संग भिंग लेते |
तेरे आँचल की छाँव सर रख लेते |
भिंगा मौसम तू कहा खो गई |
प्यारी तेरी याद आ गई |
मोहाब्बत की डाली दिल का झूला बनाते |
इशक के झूले पर तुझको हम झूलाते |
तेरी बांहों की रस्सी झूला गई |
प्यारी तेरी याद आ गई |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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भोजपुरी कजरी – दूर रहा नटरू |

July 30, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी कजरी – दूर रहा नटरू |
देशवा मे आइल रफाइल तेज तर्रार हो |
सिमवा से हमरे तनी दूर रहा नटरू |
जहा जहा भिड़वा हमसे चोट खुब खईबा |
जमीनिया अकाशवा सगरो मार खइबा |
डूबी जहजीया तोहरो मजधार हो |
सिमवा से हमरे तनी दूर रहा नटरू |
फईलाई के कोरोना होशियार मत बुझिहा |
होई जब चढ़ाई बैरी कोना जनी लुकिहा |
देशवा के लगे जवान घातक हथियार हो |
सिमवा से हमरे तनी दूर रहा नटरू |
जईसे सवनवा मे गरजे ले बिजुरिया |
तकले से जरी जइबा हिन्द के नजरिया |
झूलवा झुलाइब मिसाइल रफ्तार हो |
सिमवा से हमरे तनी दूर रहा नटरू |
अकसवा मे घेरे जईसे कारी बदरिया |
घेरीहे जवनवा ना लौकी तोहके डहरिया |
बनी भारत देशवा दुनिया के सरदार हो |
सिमवा से हमरे तनी दूर रहा नटरू |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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कविता – कारगिल की चोटी से |

July 27, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता – कारगिल की चोटी से |
घुस आया धोखे से दुश्मन
पर बिरो ने मार भगाया था |
दिया जवाब करारा उनको ,
छट्ठी दूध याद कराया था |
काँप उठे हृदय कायरो ,
हिन्द जवानो की ललकारो से |
थर थर थर्राए विरो के यलगारों से |
चुन चुनकर मारा सबको
मौत की नींद सुलाया था |
लाख लगाया ज़ोर दुशमन ने |
भारत पर ज़ोर चल न सका |
चाहा धकेल पीछे कर दे विरो
थक हारा पाँव भारत हिल न सका |
विजय हुई जवानो ने झण्डा,
कारगिल की चोटी से लहराया था |
सत सत नमन वीर शहिदों ,
नमन है तुम्हारी जननी को |
सदा अमर रहेगा नाम तुम्हारा |
जबतक आबाद रहेगा हिन्द हमारा |
विश्व विजयी है हिन्द देश ,
विरो ने दुशमन याद दिलाया था |
श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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कविता- आरती उतारा हमने |

July 25, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- आरती उतारा हमने |
साल सैकड़ो श्रीराम तिरपाल मे आरती उतारा हमने |
धूप गर्मी बरसात मे प्रभु भिंगी आंखो निहारा हमने |
भगवान को भी जाना पड़ेगा कोर्ट के दर पता न था |
तारीख पर तारीख साल दर साल राह गुजारा हमने |
करोड़ो लाखो मंदिर है भगवान श्रीराम सारी दुनिया मे |
श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या किया न कही गवारा हमने |
आजादी है सबको बने सुंदर दरबार उसके भगवान का |
लड़ना पड़ा साल सैकड़ो मंदिर को जीता दुबारा हमने |
अयोध्या है काबा चर्च गिरिजा गुरुद्वारा हर हिन्दू का |
श्रीराम सबके सबकी अयोध्या है सबको पुकारा हमने |
बने भब्य मंदिर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम सब राम बने |
स्थापित हो राम राज्य भारत राम नीति सवारा हमने |
समाप्त हो रही घड़िया इंतजार फिर से दरबार सजेगा |
फहरेगा झण्डा श्रीराम अयोध्या लिया कोर्ट सहारा हमने |
श्रीराम लखन भरत शत्रुघ्न बिराजे संग सीता अयोध्या |
राम लला आए मन्दिर अपने हर राह हिन्द बुहारा हमने |
श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
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भोजपुरी गजल- मन भईले बौराइल| |

July 24, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी गजल- मन भईले बौराइल| |
काढ़ी करेजा हथेली थमाइ तबो ना उनके बुझाइल |
प्यार मे उनका पागल भईली दिल भइल घाइल |
हटेला ना अँखियाँ से रूपवा तोहार का करी हम |
हंसला से मुहवा मोती झरे लेली जान मुसकाइल |
तोहरा जोहत सांझ ढली गईली हो गईले अनहार |
वादा कइके काहे ना अइलू हमरो मन मुरझाइल |
लहरावेलु कन्हिया कारी केसिया बदरा लगले लजाये |
चाल चलेलु हिरनी जस जंगल मन भईले बौराइल|
याद मे तोहरी बरसे नयन बहरा सावन के फुहार |
आके हमके गरवा लगा ल मनवा फुले ना समाइल |
सुना सुना लागे जग बिना तोहरे हिया हहरत बा |
जिनगी आई बहार गोरी जब आके अंगना सजाईल|

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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कविता- सदा बहार के जंगल

July 22, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- सदा बहार के जंगल
पैर रख कर सिर पर किसी के ,
चढ़ जाओगे ऊंचाइयों पर जरूर
गिरोगे जब जमीन पर ही मगर |
सिर की जगह कंधा का
सहारा लिया होता गिरते गर
तुम कोई थाम लिया होता |
देखो सदाबहार के वनो को |
हर पेड़ लंबा होता है |
आसमान की ऊंचाइयों को
छु रहा होता है |
मगर कोई किसी को दबाता नाही |
खींचकर पैर जमीन गिराता नहीं |
आगे निकलने की होड़ लगाते है |
होड़ होड़ मे सारा जंगल
सदाबहार बन जाता है |
एक दूसरे को साथ लिए
सबसे लंबा और ऊंचा हो जाता है |
हम तो इंसान है पेड़ नहीं |
एक दो पेड़ नहीं
सारी दुनिया को संग लेकर
ऊंचाइयों को छू लेंगे |
एक दूसरे के कंधे से कंधे मिलाकर |
बिना किसी को सताये
बिना किसी को रुलाये |
हमे सदा संग चलना है |
श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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हिन्दी सावन शिव भजन 20 – गाता है जग सारा |

July 21, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिन्दी सावन शिव भजन 20 – गाता है जग सारा |
चम चम माथे चमके चन्दा बहे जटा बीच गंगा धारा |
शिव शंकर की महिमा गाता है जग सारा |

मृग की छाला पहन के भोला ध्यान लगाए |
शमशान भस्म लगाके महाकाल कहलाए |
भांग धतूरा खा के भोला,करते है सदा गुजारा |
शिव शंकर की महिमा गाता है जग सारा |

महल अटारी छोड़ के शिव कैलाश धुनि रमाए |
भूत बैताल के संग मे ताता थइया नाच नचाए |
तीनों लोक के स्वामी भोला ,कर दो उद्धार हमारा |
शिव शंकर की महिमा गाता है जग सारा |

जटा जुट के धारी बाबा तुम हो डमरू धारी |
लटके गले भुजंगा कर शोभे त्रिशूल धारी |
दुखियो के दुख सारे ,करते तुम न्यारा वारा |
शिव शंकर की महिमा गाता है जग सारा |

पार्वती संग बिराजे गणेश कार्तिक गोद मे साजे |
बसहा नंदी शिव सवारी पूजे सब देव त्रिपुरारी |
डगमग डोले नैया लगा दो ,शिव अब किनारा |
शिव शंकर की महिमा गाता है जग सारा |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी सावन शिव भजन 19 – दरबार रे ननदी |

July 18, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी सावन शिव भजन 19 – दरबार रे ननदी |
जोहत रहली हम सावन के फुहार रे ननदी |
चला चली देवघर के दरबार रे ननदी |
अबले ना अइले सइया लोक डाउन लगी गईल |
अबकी सवनवा देवघर मेला बंद हो गईल |
कइसे होइहे सभकर बेड़ापार ये ननदी |
चला चली देवघर के दरबार रे ननदी |
भोला हउवे दानी उनकर आसरा बा लागल |
बाबा दरसनवा खातिर मनवा भईले पागल |
हहरेला हिया हमरो करी भोला के गुहार रे ननदी |
चला चली देवघर के दरबार रे ननदी |
सास ससुर संगे शिव के हम मनाइब |
घरवा मे पूजा करब बेलपत्तवा हम चढ़ाइब |
बोल बम बोली बोली करब हम मनुहार रे ननदी |
चला चली देवघर के दरबार रे ननदी |
महिमा होई बोला बाबा कोरोना भागी जाई |
हमरे भारत देशवा सबकर भाग जागी जाई |
बहरे से सइया करे भोला जय जय कार रे ननदी |
चला चली देवघर के दरबार रे ननदी |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

गजल- असर दिखाने के बाद |

July 17, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

गजल- असर दिखाने के बाद |
समझा क्या खोया पाया तुझसे बिछड़ जाने के बाद |
लूट गया सब कुछ मेरा एक तेरे गुजर जाने के बाद |
दिया जवाब मुक्कम्मल दुशमनों घुस आए सीमा पर |
शेरे हिन्द है जवान सबक मिला कहर खाने के बाद |
जिंदगी भी कोई चीज है बचाना जरूरी सबको बहुत |
ढाता कहर कोरोना लोगो शहर अंदर आने के बाद |
चला रहा बंदूक रख कंधे नेपाल पाक के चीन भारत |
आयेगा जलजला तुझपर जमाने समर जाने के बाद |
लाख समझाओ कोई संभलता नहीं बेफिक्र कोरोना से|
बीमार आम और खास कोरोना असर दिखाने के बाद |
कीमत उनकी जिंदगी की भेज रहा जिंहे सीमा पाक तू |
कब समझेगा कीमत आदमी पूरा निपट जाने के बाद |
सुन ले ललकार बाहुबली मोदी चीन अपनी छाती पर |
दहाड़ा राजनाथ ने दुबारा लगा अकड़ ठिकाने के बाद |
श्रीराम थे अयोध्या के नेपाल कभी प्रभु ठिकाना न था|
क्यो सबको भरमा रहा मानेगा तू चपट खाने के बाद |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी निर्गुण भजन 3 – सुगनवा जइहे |

July 14, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी निर्गुण भजन 3 – सुगनवा जइहे |
बितली उमरिया मोर कइली ना करमीया थोर |
पपवा करमिया करे परेशान |
सुगनवा जइहे लगवा जब भगवान |
इ तनवा माटी हवे तनको ना विचार बाटे |
जगवा से मुहवा मोड़ माया इ संसार बाटे |
काहे पाछे पछतावा नाही मन भरमावा|
मन निर्गुण ब्रम्ह लगाके होजा तू इंसान |
सुगनवा जइहे लगवा जब भगवान |
दया दान कइला नाही रास रंग रहला चाही |
बात गुरु सुनला नाही मनमानी कइला चाही |
केहु ना सतावा कबों मनवा अबहिन जवान |
सस्ता सउदा पटाके बन जा तू धनवान |
सुगनवा जइहे लगवा जब भगवान |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी निर्गुण भजन 1-धियान करे दा |

July 9, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी निर्गुण भजन 1-धियान करे दा |
सोनवा के बदनवा रामा जनी करा जियनवा रामा |
मनवा भजे दा भजनवा भीतरे तनवा |
रमे रमाए दा ये मोरे रामा |
ब्रमहवा मे मनवा लगाये दा |
कोरी चदरिया बितल उमरिया |
असही ना बीत जाएदा |
बुद्धि बा नदनवा रामा बहके मोर मनवा रामा |
तन के सुगना अबहीन रहे दा |
मनवा भजे दा भजनवा भीतरे तनवा |
संगे धियान करे दा |
गुण अवगुण गिने दा ये मोरे रामा |
बचल उमरिया तपाये दा |
सही भइल ना करमवा रामा ,पूछिहे मोर सजनवा रामा |
पाप पुनवा अबहीन गिने दा |
मनवा भजे दा भजनवा भीतरे तनवा |
संगे धियान करे दा |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी कविता (श्रिंगार रस )- चित चितवत |

July 4, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी कविता (श्रिंगार रस )- चित चितवत |
चंचल रूप चित चितवत निखरत निरखत नैन हारे |
बिजुरी सम चमकत दमकत हिय प्रिय चैन हमारे ||
लपकत डोलत झुकत कटी कोमल डोलत कमल डार |
पाँव रखत पायल छम छम छमकत बोलत हिय हाय ||
चपल पलक झपकत गिरत उठत बिजुरी गिरि जाय |
पडत नजर जिस ओर रखी हिय हाथ हाय चिल्लाय ||
गजरा महकत कजरा दहकत रोम रोम पुलकत जाय |
अधर धरत मुसकात मन मोहिनी कपोल हरसत हर्षाय ||
कमर कटिली कारी केस जस नागिन बलखत लहरात |
चाल चलत हिरनी वन कुलांचत उछलत देह भहरात ||
राग अलापत कोकिल बोलत गोरी कंठ सुरीली बोलत |
कांपत अधर रसीले धिरकत टप मिसरी मीठ घोलत ||
पवन वेग जब आंचर लहरत अवलोकत जीय सिहरत |
उड़त गिरत नभ डोलत कर कपाल धरी हिय अचरज ||
नख सीख उतरत स्वर्ग परी सम पिय पिय खोजत |
प्रेम रस घोलत जोहत कत तुम श्याम मुरली सोहत ||

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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by Shyam Kunvar Bharti

गजल- उजाला हो जाये |

July 4, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

गजल- उजाला हो जाये |
कभी हमारे भी घर आइये अंधेरों मे उजाला हो जाये |
आपके रूप की चाँदनी मे अंधेरों का मुंह काला हो जाये |
फैला है हर तरफ कोरोना हम आए तो आए कैसे |
कैसे निकलु बच के कही कोरोना निवाला हो जाये |
सारे दावे सबके धरे के धरे रह गए वो बढ़ता ही गया |
ऐसा न हो वो लड़ते रहे और उसका बोलबाला हो जाये |
बड़ा गुमान था उसको अपनी चाल औ पैंतरा बाजी पर |
बंद हो गये सारे एप औ धंधा उसका दिवाला हो जाये |
कहता कुछ और करता कुछ और बड़ा चालाक है वो |
कब्जा करता गैरो जमीन खुद देश निकाला हो जाये |
चाल तेरी चलेगी नहीं घिर चुका तू अपने पड़ोसियो से |
तू आजा अब हिन्द की पनाह भारत रखवाला हो जाये |

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी सावन शिव भजन 10 – तोहरे इंतजार मे ना |

July 2, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी सावन शिव भजन 10 – तोहरे इंतजार मे ना |
नईया पड़ गइली भोला मोर मजधार मे |
बाबा तोहरे इंतजार मे ना |
शिव के पूजे नर नारी |
गावे भजन दुनिया सारी |
केहु गाँजा भांग चढ़ावे |
केहु गंगा जलधार मे |
बाबा तोहरे इंतजार मे ना |
तू बाड़ बाबा बैजनाथ |
तू त हउवा औघडनाथ |
केहु दुधवा भोग लगावे |
केहु भिंगे बरखा बहार मे |
बाबा तोहरे इंतजार मे ना |
बिन दरसन हम ना जाइब |
बाब चरनिया सिरवा नवाइब |
केहु बेल पत्तर फूल चढ़ावे |
केहु मनावे मनुहार मे |
बाबा तोहरे इंतजार मे ना |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /गीतकार / समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

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by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी सावन शिव भजन 9 – गाँजा के चिलमिया |

July 1, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी सावन शिव भजन 9 – गाँजा के चिलमिया |
बाबा बदनाम ही पिये मे गाँजा के चिलमिया |
गंजवे ने रूसाइ दीया गौरा जी भवनिया |
बाबा को भगतो का नसा |
भगतों का बाबा का नसा |
तो किसी को देवघर का नसा |
भगत औरी भोला होखे सावन मे मगनिया |
बाबा बदनाम ही पिये मे गाँजा के चिलमिया |
किसी को विश्वनाथ का नसा |
किसी को पशुपतिनाथ का नसा |
तो किसी को हरिहर नाथ का नसा |
डमरू बजाई नाचे बाब बनिके नचनिया |
बाबा बदनाम ही पिये मे गाँजा के चिलमिया |
किसी को गौरीनाथ का नसा |
किसी को औघड़नाथ का नसा |
तो किसी को जटाधारी का नसा|
गावे लोगवा झूमी भोला बाबा के भजनिया |
बाबा बदनाम ही पिये मे गाँजा के चिलमिया |

श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /गीतकार / समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

हिन्दी सावन शिव भजन 2 -भोला जी की भंगिया |

June 30, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिन्दी सावन शिव भजन 2 -भोला जी की भंगिया |
भोला जी की भंगिया ,गौरा जी की परेशानिया |
मन मन रोती है गुस्सा करती है |
भंगिया पिसती है गणेश जी की अम्मा |
भोला जी की भंगिया ,गौरा जी की परेशानिया |
भंगिया मै पीऊँगा जल्दी डालो कमंडल मे |
भंगिया ना पिलाऊँगी देखे देव भूमंडल मे |
चलो देवघर बाबा धाम मे |
भोला जी की भंगिया ,गौरा जी की परेशानिया |
बच्चे अभी छोटे है गणेश कार्तिक अच्छे है |
बच्चो ना बिगाड़ो मन के अभी कच्चे है |
लो पी लो ठंडी लस्सीया |
भोला जी की भंगिया ,गौरा जी की परेशानिया |
डमरू डम डम बजाऊँगा बम बम नाचुंगा |
झम झम सावन बरसेगा बाबा धाम रहूँगा |
कावरियों बोलो बम बम |
भोला जी की भंगिया ,गौरा जी की परेशानिया |

श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

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by Shyam Kunvar Bharti

हिन्दी सावन शिव भजन 1- बाबा बैजनाथ के धाम मे |

June 27, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

हिन्दी सावन शिव भजन 1- बाबा बैजनाथ के धाम मे |
चलो सब कावर लेके बाबा बैजनाथ के धाम मे |
सुल्तानगंज से जल लेकर चढ़ाये बम बम भगवान मे |
अबकी कावर मे सब दूर दूर चलना है |
मास्क मुंह मे लगाकर बोल बम कहना है |
भगाकर रहेंगे बाबा भोला वाइरस को समशान मे |
चलो सब कावर लेके बाबा बैजनाथ के धाम मे |
चलो चलो गोरीया चलो जल्दी देवघर नगरिया |
बोल बम रटते रटते बनो तुम कावरिया |
बाब बैजु मार भगायेंगे चिनियों को हिंदुस्तान मे |
चलो सब कावर लेके बाबा बैजनाथ के धाम मे |
हर हर गंगा भोला पहने मृग के छाला बोलबम |
धुआ उड़ाए गाँजा चिलम पिये भांग के प्याला बोलबम |
जीवन सफल हो जाएगा बड़ी शक्ति है बाबा के वरदान मे |
चलो सब कावर लेके बाबा बैजनाथ के धाम मे |

श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

योग गीत – करो निरोग काया |

June 20, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
की हार्दिक बधाई
योग गीत – करो निरोग काया |
ये योग साधना की है अजीब माया |
कभी बचाए कोरोना कभी करे निरोग काया |
कपालभाती और प्राणायाम की क्या तारीफ करे |
कर अनुलोम बियोम सांस अंदर बाहर करे |
करे मजबूत दिल पेट रोग जड़ से है भगाया |
कभी बचाए कोरोना कभी करे निरोग काया |
करो सूर्य नमस्कार शुबह हर अंग खिलाये |
करे सुंदर तनमन मानव मंद मुसकाए |
लगे बदन जैसे खिली धूप है नहाया है |
कभी बचाए कोरोना कभी करे निरोग काया |
योग ही ऐसा साधन जब चाहो तब कर लो |
नए पुराने रोगो जड़ से ही खतम कर लो |
चलो कर ले सब योग रोग कर लो सफाया |
कभी बचाए कोरोना कभी करे निरोग काया |
देव ऋषि मुनि नित्य योग किया करते थे |
बिन दवा उपचार के निरोग रहा करते थे |
देख योग की महिमा सारे विश्व ने अपनाया |
कभी बचाए कोरोना कभी करे निरोग काया |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

कविता- हमारा अभिमान |

June 20, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- हमारा अभिमान |
नहीं बिकेगा देश मे चीन का सामान |
रहेगा हमारा समान हमारा अभिमान |
लेकर धन हमसे हमे आँख दिखाता |
घुसकर जमाईं हमारी हमे धमकाता |
बनेगा आत्मनिर्भर हमारा हिनूस्तान |
दिया धोखा जवानो पर आघात किया|
तोड़ वर्षो की संधि विश्वासघात किया|
निहत्थे जवानो से किया घमासान |
अपने पड़ोसी हर देश रिस्ता बिगाड़ा है |
मौका पा गैरो जमी चीनी झण्डा गाड़ा है |
धूल चटाएँगे चिनियों हिन्द के जवान |
करो बहिस्कार सब चीनी सामानो का |
फेर दो पानी सब दुश्मन अरमानो का |
जाये न जाया जवानो का बलिदान |
जल जमीन आकाश भारत पाँव पसारा |
बीर जवानो बज रहा जग खूब नगाड़ा |
नहीं भूलेगे धोखा तेरा चीन बेईमान |

श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

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by Shyam Kunvar Bharti

भोजपुरी कविता – तड़पत रही हम दिनरात |

June 17, 2020 in भोजपुरी कविता

भोजपुरी कविता – तड़पत रही हम दिनरात |
रिमझिम बरसत बा बरसात |
तड़पत रही हम दिनरात |
पिया बिना बुनीया ना सुहात |
तड़पत रही हम दिनरात |
गरजत बरसत अईले असढ़वा |
लहकत दहकत हमरो जियवरवा |
कही हम केकेरा से दिलवा के बात |
तड़पत रही हम दिनरात |
चमके बिजुरिया गगनवा मे |
अगिया लगे हमरे तनवा मे |
पिया परदेशी हाली घरवों ना आत |
तड़पत रही हम दिनरात |
झमझम अंगना बरसेला पानी |
टपटप चुएला टूटल दलानी |
निर्मोही बलम दरदियो ना बुझात |
तड़पत रही हम दिनरात |
मखमल के सेजिया मे कंटवा गड़ेला |
बरिस बरिस के पोसल देहीया गलेला |
भिंगल भुईया मोर पउया बिछलात |
तड़पत रही हम दिनरात |

श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

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Shyam Kunvar

by Shyam Kunvar Bharti

कविता- जितना जरूरी है |

June 17, 2020 in हिन्दी-उर्दू कविता

कविता- जितना जरूरी है |
हो रहा युद्ध कोरोना से हमारा जितना जरुरी है |
इंसानियत के दुश्मन वाइरस का मिटना जरूरी है |
सबका साथ सबका विश्वास अब जिताएगा हमे |
नियम लॉक डाउन चलना कोरोना सिखाएगा हमे |
लेगा सांस अंतिम कोरोना लास खींचना जरूरी है |
कोरोना युद्ध खत्म भी न हुआ चीन सीमा चढ़ा |
हमारी जमीन नाम अपने बही खाते करने लगा |
दगाबाज दुशमन चीन छाती चढ़ पीटना जरूरी है |
समझा भारत को बच्चा गच्चा खा रहा है चीन |
औरो की तरह भारत को भी धमका रहा है चीन |
धुर्त्त मक्कार दादागिरी जमीन घसीटना जरूरी है |
शहीद हुये जवान हमारे जमीन जवान चीन गिरा |
सत सत नमन शहीदो चोट दुगुनी खूब चीन दिया|
चुरकर अंहकार छवि चीन दुनिया गिरना जरूरी है |
सह पाकर नेपाल चीन की भूल भारी कर रहा है |
रोटी बेटी का रिश्ता हमारा अब गद्दारी कर रहा है |
नेपाल भारत अटूट रिश्ते का अब बचना जरूरी है |
दुशमन पाक दाल अब गल नहीं रही चाल बिफल |
आतंक आका के पीट रहे सब मोहरे है कर्म कुफ़ल |
मारकर रोज इनके आतंकी पैरो मसलना जरूरी है |

श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286

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