दिल फरेबी का आलम कुछ इस कदर छाया, दिल देकर भी दिलदार गद्दार नजर आया।
दिल फरेबी का आलम कुछ इस कदर छाया, दिल देकर भी दिलदार गद्दार नजर आया।
“हमन परबुधिया नोएन गा” ************************** जांगर पेरत पसीना चुचवावत, भुइय्या के छाती म अन उगावत, चटनी बासी के खवैय्या आवन न, येहर धान के कटोरा हावे गा, हमन परबुधिया नोएन रे, सुघ्घर छत्तीसगढ़िया आवन गा […]
जीवन में एक वक्त ऐसा भी आता है जब रिश्ते भी टूट जाते हैं और फ़रिश्ते भी काम नहीं आते
भोजपुरी गीत = बलमुआ ना अईले | धक धक धड़के मोर छतिया | हे सखी मोर बलमुआ ना अईले | नींदिया ना आवे सारी रतिया | हे सखी मोर बलमुआ ना अईले | लोगवा कहेला […]
इन तीखी नजरो से देखा ना करो दिल बहक जाएगा उम्र तो अठारह के पार है जवानी में फिसल जाएगा फिर न कहना ये तुमने क्या कर दिया दिल के बहक जाने में हूइ खता […]
चलो हम भी बनाए एक ताजमहल दिल के आगरा में। शाहजहाँ जैसे बनाउंगा एक महल दीवानो के कब्र में ।।
मुझे ताउम्र ये मलाल रहेगा तुम क्यों आये थे मेरी ज़िन्दगी में ये सवाल रहेगा जो सबक सिखा गए तुम वो बहुत गहरा है चलो प्यार गहरा न सही पर उसका हासिल सुनहरा है गैरों […]
राह में रोडे़ है ए नारी तुझे चलना ही होगा। दुःख सहने वाली ए देवी तुझे जीना ही होगा।। माना कि, पुरूष के हाथों तू हमेशा छलती आई। फिर भी हर हाल में तुझे मुकाबला […]
अडकून पडलेली चांदणी शेवटी तुटून जाते। नेहमीच्या त्रासातून कायम सुटून जाते।
भोजपुरी देवी:- कवन मैया गोर बाड़ी गीत कवन मैया गोर बाड़ी हमका पता ना कवन मैया गोर बाड़ी। निमिया के डाल पर झूला पर बा हमार मैया झूललबाड़ी हमका पता बा। सोने की थाली में […]
विलख रही धरती आसमान भी रो रहा। देख के अनाचार को भगवान भी सो रहा।।
कोरोना योद्धा सभी वंदनीय हैं। पर ना जाने क्यों कुछ अराजकता तो इन पर पत्थर फेंकते हैं, जिन पर फूलों की वर्षा करनी चाहिए । हर पल तत्पर होकर इस महामारी में अपनी देशभक्ति निभा […]
करोना योद्धा सभी वंदनीय हैं। पर ना जाने क्यों कुछ अराजकता तो इन पर पत्थर फेंकते हैं, जिन पर फूलों की वर्षा करनी चाहिए । हर पल तत्पर होकर इस महामारी में अपनी देशभक्ति निभा […]
औरत खिलौना नहीं उसमें भी जान होती है…. औरत होती है ममता की मूर्ति प्यार की उपमा हजारों फूलों की खुशबू विद्यमान होती है उसमें…. औरत पैरों की जूती नहीं सिर का ताज है… तपती […]
औरत खिलौना नहीं उसमें भी जान होती है औरत होती है ममता की मूर्ति प्यार की उपमा हजारों फूलों की खुशबू विद्यमान होती है उसमें औरत पैरों की जूती नहीं सिर का ताज है तपती […]
भोजपुरी काव्य :- तोहरे बिन ज़िनिगिया सूनल बा हमार …. केकरा से हम बोलब बतियाइब केकरे संग ज़िनिगिया बिताइब तोहरे बिन ज़िनिगिया सूनल बा हमार…. साज श्रिंगार तोहरे बिन अधूरा बा तोहरे संग ही साजेला […]
कभी इन राहों पर भी आया करो… क्या ये भी बैरन हैं तेरी मेरी तरह….
कोई तकलीफ नहीं है हमको उजालों से बस ज़िन्दगी के अँधेरे से डर लगता है रोज़ ही रूठना रहता था तुम्हारा भी बिछड़ने में गम ना होगा चलो अच्छा है तुम भी कहां रहे हो […]
नकाब चेहरे पर लिपटा है शोख लगता है…. ये उतर जाता तो बा-खुदा क्या आलम होता….
हम भी ताजमहल बना सकते हैं पर क्या करें:- हमसे रिश्तों की कब्र नहीं खोदी जाती
मेरे दर्द सिर्फ मेरे हैं इन्हें अपनी आँखों का पता क्यों दूँ तरसे और बरसे इन्हें अपने दर्दों से वो लगाव क्यों दूँ मेरा अंधापन मेरी आँखों को चुभता है पर अपने लिए फैसलों पर […]
भोजपुरी देशभक्ति गीत-भारत देशवा हमार | जहा बहे गंगा निर्मल धार | उहे बाटे भारत देशवा हमार | उत्तर हिमालय गगनवा के चूमे | दखिन सगरवा लहरवा मे झूमे | लहकल खेतवा बहे पूरवा बयार […]
कविता- कौन जानता था | कर्मवीर होंगे बेचैन अपने घर कौन जानता था | राह निहारेंगे कब ताला खुलेगा कौन जानता था | आयेगा ऐसा भी एकदिन देखेगी दुनिया दुर्दिन | इसान खुली हवा को […]
क्यूँ मुझसे नज़रे चुराते हो क्यूँ अपना प्यार छुपाते हो नींद नहीं आती तो फिर क्यूँ मेरे ख्व़ाब सजाते हो
कहाँ खो गई तेरी इन्सानियत ओ इन्सान कहलाने वाले। गन्दी हो गई क्योंकर नीयत ओ इन्सान कहलाने वाले।। हर सुख सुविधा भोजन पानी सुलभ तुम्हारे घर में है। फिर काहे का झगड़ा भैया बोले आज […]
वो बैठते हैं आजकल मेरे रकीबों के साथ जिनके हाथों में रहता था मेरा हाँथ बुरा नहीं लगता है मुझे पर अच्छा भी नहीं प्रतीत होता है क्या करूँ दिल दिल ही दिल में रोता […]
उनके मस्त अदाओं के जाल में,हम गिरफ्तार हो गए। जुस्तजू के मेले में हमारी मुकद्दर, हम से ही खफ़ा हो गए।। वफा से बे -वफा बनेंगे वो , हमने ऐसा सोचा ही कब था । […]
एक ऐसी ईद भी आई एक ऐसी नवरात गई जब न मंदिरों में घंटे बजे न मस्जिदों में चहल कदमी हुई बाँध रखा था हमने जिनको अपने सोच की चार दीवारों में अब समझा तो […]
तीन मित्र थे अपने वफादारी के परम मिसाल। मरणासन्न होकर मैं तीनों से पूछा एक सवाल।। कौन चलोगे मेरे साथ किसको पास सदा मैं पाऊँगा? बहुत दिया मैं साथ नहीं अब तेरा साथ निभाऊँगा। बोला […]
नजर मिला के मेरे हमराज़ वहाँ छोड़ा । देखने आते हैं दो गुलाब जहाँ तालकटोरा।। ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, इश्क़ -ए-राहत के दवा लाया जब इन्दौर से। उतरने लगा तब इश्क़ -ए- जुनून मेरे सिर से।।
ये जो लोग मेरी मौत पर आज चर्चा फरमा रहे हैं ऊपर से अफ़सोस जदा हैं पर अन्दर से सिर्फ एक रस्म निभा रहे हैं मैं क्यों मरा कैसे मरा क्या रहा कारन मरने का […]
Samundar kehta hai nadi se zara mujhme mil jayeye Aaram se bathiye zara apna haal to bataeye Wo bole haal to bata denge zara ek cup chai to layeye Sirf chai se baat nhi banegi […]
आज सोंचा जाकर उनसे थोड़ी गुफ्तगू कर लूँ तभी पीछे से उनकी भाभी आ गयीं हाय तौबा!
ना वास्ता किसी से रखते हैं लोग…… फिर जाने क्यूँ जिन्दगीं से खेलते हैं लोग….. हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं क्यूँ तैश में ही अक्सर रहते हैं लोग….. किसी की ज़िंदगी से […]
रात के अंधेरे में मुंह छुपा कर चलने वाले . एक न एक दिन तुम्हें उजाले में आना ही पड़ेगा। अपने किए करनी के हिसाब ए चतुर इन्सान, दुनिया के सामने तुझे रखना ही पड़ेगा […]
जब मै अपना नब्ज दिखाया “मीर ” को। उसने कहा इश्क़ -ए -बुखार है आपको।।
गलतफहमियों के बीज अविश्वास से पनपते हैं अधसुनी बातों को लोग पूरा सच समझते हैं बड़े तो हो चले हैं हम अपनी नजरों में प्रज्ञा ! ना जाने लोग क्यों मुझे अभी छोटा ही समझते […]
पांडव चले वनवास को ,लिए द्रोपदी साथ। हृदय भरा प्रतिशोध एक, है अनाथ के साथ।।
फेक न्यूज़ और सोशल मीडिया के सहारे, हमारा ही फैलाया है ये सारा अफवाहतंत्र वोट बैंक और सत्ता के बहाने, ढूंढ लेती है मुनाफे उसमे राजतन्त्र निहत्थे और बेक़सूर इंसान को, बिन अपराध के ही […]
बेकद्रों की महफ़िल मे कद्रदान ढूंढ रहा हूँ अनजान लोगो मे अपनी पहचान ढूंढ रहा हूँ अंधेरा करने वालों से रौशनी की मांग कर रहा हूँ काली हुई रात मे रोशन जहान ढूढ रहा हूँ […]
आदाब मुफ़लिसों को क्यों मिली है जिंदगी बारहा ये सोचती है जिंदगी ज़िंदगी जैसे मिली ख़ैरात में ऐसे उनको देखती है जिंदगी इस जहाँ में बुज़दिलों के वास्ते बस क़ज़ा है, तीरगी है ज़िन्दगी ख़ुदकुशी […]
ग़ज़ल दौलत नहीं, ये अपना संसार माँगती हैं ये बेटियाँ तो हमसे, बस प्यार माँगती हैं दरबार में ख़ुदा के जब भी की हैं दुआएँ, माँ बाप की ही खुशियाँ हर बार माँगती हैं माँ […]
कानून के रक्षक भी अब भक्षक हो गए , करें भरोसा आखिर किस पर? खाकी वर्दी भी गुलाम बन हुक्म बजाती सफेदपोश की। काले कोट के जेब बड़े हो गए, करें भरोसा आखिर किस पर? […]
मानवता का वास है या फिर दानवता का त्रास है। दुनिया के हर बसर को देखा मतलबपरस्ती हीं अब खास है।।
जुआ का अगला एक दाव होता कब अनुकूल किसी के। सीख सदा देता इतिहास चाहे होवे भूल किसी के।।
निर्दोष समर्थ गुरू को भी पीटा था नादान किसान। छत्रपति से माफ कराकर गन्ने का दिया खेत बथान।। संत सदा से इस दुनिया में होते दया धर्म के मूल। ‘विनयचंद ‘कभी होना ना इनके प्रतिकूल।।
चौसर खेलने वाले भी जग में पूजे जाते हैं राज़-काज,अनुज,पत्नी और प्रजा सर्वस्व दांव पर रखकर भी एक भी बाजी ना जीते सर्वस्व हार ही जाते हैं समय की विडम्बना देखो ऐसे लोग भी धर्मराज […]
अंधा समाज और अंधी कानून। मिलकर किया आस्था का खून।।
अंधा समाज और अंधी कानून। मिलकर किया आस्था का खून।।
खुद को साध रहा जो मानव औरों के कल्याण को। सुख-सविधा और परिजन त्याग दिए अरमान को।। ऐसे साधु सन्यासी को पीट -पीटकर मार दिया। दुख इतना है यही है रोना आस्था को भी मार […]
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