नियत

काली मुलायम उड़ती जुल्फें तेरी, इश्कबाज़ों पे कयामत ढाती है। जब चले तू खुली वादियो में, घटा की नियत भी बदलती है।।

आधुनिका नारी

नारी के नवोन्मेष पर ————————– चाँद ने पलकें उठा कर देख तो लिया है अब~ पश्चिम से आते प्रकाश को, पर आधुनिका को यह स्वीकार्य…

चीख

मेरी बेसुध, बेजान पड़ी रूह बेआबरू हुआ जिस्म आज फना हो रहा है जा रहा है अन्तरिक्ष की वृहद सैर पर, जीवन में कुछ लूटेरों…

तुम्हारे हाथ

नदियाँ- सागर, सहरा- पहाड़, पानी-प्यास, सूखा- बरसात, तितली-फूल, छाया- धूप पंछी- आकाश, जंगल- उजाड़ सबकी पीड़ाओं को आश्रय दिया है तुम्हारे हाथों ने कहो प्रेम!…

बेटी का तर्पण

रुक गई सांस, भर आया हृदय दुख के सागर में मन डूब गया व्यथित हुआ भारी हुई पलकें तुझसे मिलने को मन छटपटाने लगा.. कैसे…

कागजी प्रेम

कागजी प्रेम,कागज़ के कुछ पन्नों तक ही सिमट कर रह जाता है। कुछ आंशिक शब्दों से शुरू होकर, आंशिक ही रह जाता है। विश्वास की…

रूबरू

कष्टों में कोई कमी न हो मेरे प्रभु पर उन्हें सहने की क्षमता भी तूं जब भी मुसीबतों से दबा मैं कभी अवाक था मुझे…

मनमर्जियां

चल देते हैं दिल को राहतें करते हैं कुछ मनमर्जियां सपनों को लगा दे पंख जी ले अपनी जिंदगी ना करें दुनिया की फिक्र हो…

ये तय है

जुनून है तेरे दिल में हम तो अपना घर बनाएंगे तुझ में डूब जाएंगे तुझी में खो जाएंगे करे कोशिश अगर जुदा करने की हमें…

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