जीवन ज्योति

जीवन ज्योति की एक ललित सरिता बहे सुंदर सुकोमल कविता बने, हो चहुँ ओर प्रकाश फैला हुआ मेरी लेखनी में वो बात रहे। नहाए हुए…

दीपावली

जो सितारों को मुँह चिढाएँगे, आज वो दीप हम जलाएँगे। आँख दुनिया की चौंधियाएँगी, इस कदर रोशनी लुटाएँगे। जीते हैं अबभी जो अँधेरों में, उनको…

धन

धन का होना बहुत जरूरी है, धन से ही जिंदगी की भौतिक जरूरतें पूरी होती हैं। वर्तमान दौर में धन पर सम्मान टिका है, धनवान…

गुड़

गुड़ पिघल गया था मीठा सा जल हुआ, तुमने हमारे हेतु जब की थी जरा दुआ। गुड़ थे हम पिघल गए थे उस प्यार की…

तुम्हारे बिना..

सूनी-सूनी सी फ़िज़ाऍं हैं, सूनी सी सब दिशाऍं हैं। आप नहीं हैं मेरी ज़िन्दगी में अगर, सूनी-सूनी सी लगती है ड़गर। हमें ही हमारी नहीं…

“करवा चौथ”

करवा चौथ के नाम पर जो झूठ बोलते हैं खा पी के भूखे रहने का ढोंग करते हैं उनसे अच्छे तो हम हैं साहब! व्रत…

लेखन

मन के भाव लिखा करती हूँ, ज़िन्दगी की धूप और छाॅंव लिखा करती हूँ। कभी “खुशियाँ” तो कभी, “घाव” लिखा करती हूँ। आभार आपका आप…

तकलीफें

हम अपनी तकलीफें किसी को बता नहीं सकते, कोई तमाशा ना बना दे मेरी बेबसी का इसलिए किसी को दिल के छाले दिखा नहीं सकते।

नासमझ

मेरी शराफत को लोग मेरी कमजोरी समझते हैं नासमझ है वह लोग जो मुझे नासमझ समझते हैं।

एक दुआ

एक दुआ है खुदा से कि खुदा ऐसे ख्वाब ना दिखाएं जो पूरे ही ना हो ऐसे लोगों से ना मिलाए जो कभी अपने ना…

वनवास की असहज यात्रा पर आर्यन ( गीत )

अब आर्यपुत्र आर्यन सिंह का हृदय सांसारिक वस्तुओं से हटकर बैराग्य की तरफ आकर्षित होने लगा सो उन्होने विशुद्ध सरल भावनाओं को लेखनी के माध्यम…

बरसात

सर्द पवन का झोंका लेकर, आई ये बरसात है। बे मौसम ही आई लेकिन, कुछ तो इसमें बात है। भीगे सारे बाग-बगीचे, भीगे पुष्प और…

दशहरा

मन के रावण को मारने के लिए, दशहरा मनाया जाता है। किस-किस ने रावण को मारा कौन राम-मय हो कर आया है। दशहरा शुभ हो….…

आहुति

आहुति ——– अम्मा! तुमसे कहनी एक बात.. कैसे चलीं तुम? बाबूजी से दो कदम पीछे… या चलीं साथ। कैसे रख पाती थीं तुम बाबूजी को…

अधूरा आसमा

सभी पाठको और सभी लेखकों और कवियों को प्यार भरा प्रणाम। आप सबके प्रेणना से मैने भी कुछ लिखना शुरू किया है। आप सबके आशीर्वाद…

गुनाह

हम गलत हैं या सही हमें कुछ भी पता नहीं पता बस इतना चला है ये दिल मचल चला है फिर एक बार गुनाह करने…

कातिल

जिंदगी जिस राह पर चल रही है, उसकी कोई मंजिल नहीं है, कश्ती साहिल पे थी सही, मजधार में डूब रही है, कत्ल हुआ है…

कातिल

जिंदगी जिस राह पर चल रही है, उसकी कोई मंजिल नहीं है, कश्ती साहिल पे थी सही, मजधार में डूब रही है, कत्ल हुआ है…

शिक्षक

मैं शिक्षक हूँ मुझसे अपेक्षा समाज करता है। मैं सत्य बोलूँ, सादा रहूँ , सादा पहनू , कम बोलूँ , खर्च ज्यादा करूँ। छात्रों को…

सिंहवाहिनी मां दुर्गा**

सिंहसवारी मां अष्टभुजाधारी पालनहारी–१ ममतामयी सौभाग्य प्रदायिनी भवमोचनी–२ वरदायिनी विमल मति देती पीडा़ हरती–३ जगजननी बारंबार प्रणाम है प्यारा धाम–४ करूं विनती मां झोलियां भरती…

सुविचार-7

कभी-कभी लगता है हम दुनिया के सबसे बदकिस्मत इन्सान हैं पर°° जब अपने हाथ पैरों को सही सलामत देखते हैं तो अमीरी का एहसास होता…

सुविचार-5

संसार में ईश्वर के बाद एक कवि ही है जो हथेली पर सूरज उगा सकता है और पथ्थर पिघला सकता है ये काम साधारण मानव…

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