बैठा हुआ था मैं निरुत्तर सा होकर, कि किसी की आवाज़ आई पूछा, तो कही, मैं हूँ “तन्हाई” आपका साथ निभाने को आई शून्यता सी होठों पे मुस्कुराहट ने धाक जमाई हँसी आई, कहा मैंने […]

अच्छे दिन…! अच्छे लोग तो खुश हो ही रहे हैं अच्छे दिनों से ..!. आशा बहुत अच्छा जो हो रहा है और भी होगा…! बुरे लोगों के बुरे दिन आये हैं बरबादी के …! ना […]

क्यूँ मनुज अबोध , बोध तुझमे ही सब क्यों करता है खोज , शोध तुझमे ही सब अविराम गति तू , विश्राम तुझमे ही सब –विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)–

देख मनुज संसार में , कोई नहीं किसी का मतलब की दुनिया ये सारी कौतुक ब्रह्म विधि का मत सोच मनुज कि तू निर्बल है तुझमे परम प्रभु का बल है नश्वर्य जग में पग […]

सृजन के साथ विनाश जुड़ा है विनाश के साथ सृजन सुख दुःख का संगम है मानव का यह जीवन मरण के साथ जनम है जनम के साथ मरण वैसा भाग्य बनेगा जैसे जिसके कर्म –विनीता […]

–शहीद– भवर मैं खड़े होकर , तूफानों से टकराते हो अँधेरे में रह कर , चिराग देश का जलाते हो सुख सम्पति निज सपनो की , हस कर बलि चढ़ाते हो कली मैं सब कपूत […]

अपनी अनुजा का अंगरक्षक होता है ईश्वर का दिया अनमोल उपहार होता है अपनी जीत को भी न्योछावर करता है हर इच्छा को वो पूरी करता है सर आँखों पर अपनी बैठाकर रखता है अगर […]

प्रभु अब तो बुला ले प्रभु अब तो अपने पास बुला ले छल -कपट की इस दुनियाँ में क्या बचा अब काम हमारा जहां जहान के सारे रिश्ते अपनी – अपनी कीमतें लिये रिश्तों के […]

कितने दरिंदगी के हाँथ है इस दुनिया में, कि अब इंसानियत का चेहरा शर्म से लाल है। और उस बच्ची का जिस्म खून से बदहाल है। दिल में ख्वाब थे,कन्धों पर किताबों का बोझ , […]

डर अब अँधेरी रातों से नहीं लगता, क्योंकि रातें अपने आगोश में सुला लेती है। डर तो रौशनी की किरणों से लगता है, क्योंकि रौशनी सब कुछ साफ़ साफ़ दिखा देती है।

बनाकर बातों से बातें, यहां बातें निकलती हैं, यूँ ही, ज़िन्दगी के सफर की रातें निकलती हैं, के जिंदा है जो ग़र कोई, तो अपनी वो ज़ुबाँ खोले, यहाँ बेजुबानों की जुबाँ से भी खुराफातें […]

बनाकर बातों से बातें, यहां बातें निकलती हैं, यूँ ही, ज़िन्दगी के सफर की रातें निकलती हैं, के जिंदा है जो ग़र कोई, तो अपनी वो ज़ुबाँ खोले, यहाँ बेजुबानों की जुबाँ से भी खुराफातें […]

बनाकर बातों से बातें यहां बातें निकलती हैं, बस यूँहीं जिंदगी के सफर की रातें निकलती हैं, भरकर बैठे रहते हैं कुछ लोग अपने अंदर इतना, के पूछो एक और बाहर भरमार कहानी निकलती हैं… […]

ये मतलबी दुनिया मुझे, अपना नही लगती। लोग कहते है,मै मगरूर हूँ, “” घमण्डी हूँ।। जब कर दिया अपनो ने घायल, जब चिल्लाये दुनिया के समाने करवा दिया जब गलती का एहसास, तब लोग कहने […]

मै जब से तेरी एक तस्वीर बनाने में वयस्त हूँ, मैं तब से अपने ही ख्यालों में वयस्त हूँ, रंग तो बहुत हैं ज़माने में मगर, मैं इंद्रधनुष के रंग छुड़ाने में वयस्त हूँ, चाँद […]

कश्ती पर सवार है जिंदगी ना जाने कब मिलेगा किनारा दूर से तो दिख रहा है खुबसूरत हर एक नजारा फ़िर रहा हूँ मैं मारा मारा दिल में है आशा पोहचु में उसी किनारे पे […]

मै जब से तेरी एक तस्वीर बनाने में वयस्त हूँ, मैं तब से अपने ही ख्यालों में वयस्त हूँ, रंग तो बहुत हैं ज़माने में मगर, मैं इंद्रधनुष के रंग छुड़ाने में वयस्त हूँ, चाँद […]

तेरे घर की गलियों में हम अक्सर भटका करते थे, तेरी नज़रों से छिपकर हम तुझको घूरा करते थे, साँझ सवेरे जब भी तू तितली बन मंडराती थी, रात अँधेरे जुगनू बन हम तुझको ढूंढा […]

मैं प्यादा हूँ मुझे प्यादा ही रहने दो, यूँ हाथी और घोड़ों से न भिड़ाओ तुम, मैं तो शतरंज का खिलाड़ी हूँ दोस्त, मुझे सांप सीढ़ी में न उलझाओ तुम।। राही (अंजाना)

जब तुमने मिलना छोड़ दिया, दिल ने धकड़ना छोड़ दिया, राह फ़िज़ाओं ने बदली पुष्पों ने खिलना छोड़ दिया, बहक उठा मन का पंछी कदमों ने लहकना छोड़ दिया, जब से रुस्वा हुई मन्ज़िंल “राही” […]

तेरे घर की गलियों में हम अक्सर भटका करते थे, तेरी नज़रों से छिपकर हम तुझको घूरा करते थे, साँझ सवेरे जब भी तू तितली बन मंडराती थी, रात अँधेरे जुगनू बन हम तुझको ढूंढा […]

सोंचता हूँ अपनी एक नई दुनियाँ बना लूँ, जिसमे अपनी ही मनचाही तस्वीरें लगा लूँ, खुशियों के बिस्तर बिछा लूँ और दुखों को अपने घर का रस्ता भुला दूँ, सूरज चँदा को अपनी छत पर […]

न दिन खरीद पाओगे न रात बेच पाओगे, इन हाथों में न तुम अपने हालात बेच पाओगे, खरीदने की चाहत जो तुम दिल में सजाये हो, इन आँखों से तुम न ये ख्वाब बेच पाओगे, […]

गीत होठो पे समाने आ गये है प्रीत भावो के सजाने आ गये है ? चाह ले के आस छाके गा रही है साज ओढे ताल लुभाने आ गये है ? रीत गाने के सदाये […]