ढह गए कितने ही ईमान ऐ मकाँ एक बोतल की चाहत में, मगर बोतल ने बिक कर भी अपना ज़मीर नहीं छोड़ा।। – राही (अंजाना)
ढह गए कितने ही ईमान ऐ मकाँ एक बोतल की चाहत में, मगर बोतल ने बिक कर भी अपना ज़मीर नहीं छोड़ा।। – राही (अंजाना)
बैठा हुआ था मैं निरुत्तर सा होकर, कि किसी की आवाज़ आई पूछा, तो कही, मैं हूँ “तन्हाई” आपका साथ निभाने को आई शून्यता सी होठों पे मुस्कुराहट ने धाक जमाई हँसी आई, कहा मैंने […]
उनकी तरफ से तो इक इशारा भी ना हुआ… ऒर हम कम्बखत… उनसे इश्क़ कर बैठे हैं…. राजनंदिनी रावत
कई साल बीत गए लेकिन लोगों की “छोटी सोच” अभी तक “बड़ी” नहीं हुई…. उन्हें धर्म दिख रहा हैं…. दर्द में तड़पती बेटियाँ नहीं….
अच्छे दिन…! अच्छे लोग तो खुश हो ही रहे हैं अच्छे दिनों से ..!. आशा बहुत अच्छा जो हो रहा है और भी होगा…! बुरे लोगों के बुरे दिन आये हैं बरबादी के …! ना […]
माटी में , तू द्वीप पानी में, तू सीप राग में,तू गीत हार हूँ, तू जीत –विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)–
देखो सपूतों इस धरा पर, पैर न गैर जमने पाए कोई न अब लाल बिछड़े , कोई मांग उजड़ न पाए –विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)–
कर चुके भौतिक उपलब्धि , फिर भी मन उदास है बिंदु को सिंधु मिलन की, जनम जनम से प्यास है –विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)–
क्यूँ मनुज अबोध , बोध तुझमे ही सब क्यों करता है खोज , शोध तुझमे ही सब अविराम गति तू , विश्राम तुझमे ही सब –विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)–
देख मनुज संसार में , कोई नहीं किसी का मतलब की दुनिया ये सारी कौतुक ब्रह्म विधि का मत सोच मनुज कि तू निर्बल है तुझमे परम प्रभु का बल है नश्वर्य जग में पग […]
विधाता अब कौन सा कौतुक रचोगे क्या घटित को , अघटित कर सकोगे –विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर )–
सृजन के साथ विनाश जुड़ा है विनाश के साथ सृजन सुख दुःख का संगम है मानव का यह जीवन मरण के साथ जनम है जनम के साथ मरण वैसा भाग्य बनेगा जैसे जिसके कर्म –विनीता […]
ये कैसा युग परिवर्तन नर दे रहा नर को , मौत का निमंत्रण नहीं चाहिए ये परिवर्तन , नहीं चाहिए ये परिवर्तन –विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर )–
–शहीद– भवर मैं खड़े होकर , तूफानों से टकराते हो अँधेरे में रह कर , चिराग देश का जलाते हो सुख सम्पति निज सपनो की , हस कर बलि चढ़ाते हो कली मैं सब कपूत […]
अपनी अनुजा का अंगरक्षक होता है ईश्वर का दिया अनमोल उपहार होता है अपनी जीत को भी न्योछावर करता है हर इच्छा को वो पूरी करता है सर आँखों पर अपनी बैठाकर रखता है अगर […]
ये जिंदगी थोडा अपनी रफ़्तार को धीमा तो कर हम जब तक कुछ समझे तू और आगे निकल जाती है।।
एक तेरा ही प्यार निःस्वार्थ है माँ बाकी तो हर जगह स्वार्थ ही निहित है माँ।।
प्रभु अब तो बुला ले प्रभु अब तो अपने पास बुला ले छल -कपट की इस दुनियाँ में क्या बचा अब काम हमारा जहां जहान के सारे रिश्ते अपनी – अपनी कीमतें लिये रिश्तों के […]
जहाँ भी जाओ वही हर एक शख्स के अलग ही मुखौटा लगा होता है बाहर से कुछ दिखलाई पड़ता है अंदर से कुछ और ही होता है।।
कितने दरिंदगी के हाँथ है इस दुनिया में, कि अब इंसानियत का चेहरा शर्म से लाल है। और उस बच्ची का जिस्म खून से बदहाल है। दिल में ख्वाब थे,कन्धों पर किताबों का बोझ , […]
डर अब अँधेरी रातों से नहीं लगता, क्योंकि रातें अपने आगोश में सुला लेती है। डर तो रौशनी की किरणों से लगता है, क्योंकि रौशनी सब कुछ साफ़ साफ़ दिखा देती है।
बनाकर बातों से बातें, यहां बातें निकलती हैं, यूँ ही, ज़िन्दगी के सफर की रातें निकलती हैं, के जिंदा है जो ग़र कोई, तो अपनी वो ज़ुबाँ खोले, यहाँ बेजुबानों की जुबाँ से भी खुराफातें […]
बनाकर बातों से बातें, यहां बातें निकलती हैं, यूँ ही, ज़िन्दगी के सफर की रातें निकलती हैं, के जिंदा है जो ग़र कोई, तो अपनी वो ज़ुबाँ खोले, यहाँ बेजुबानों की जुबाँ से भी खुराफातें […]
बारिश के मौसम में कागज़ की कश्ती डूबने का इंतज़ार ही करती रह गयी। और ये बच्चे उड़ने के सपने लिए उस कागज़ को पढ़ते ही रह गए।
ज़िन्दगी की जंग के मैदान में, तुम भी खड़े हो मैं भी खड़ी हूँ। फ़र्क है तो इतना की मैं किसी को मारना नहीं चाहती, और तुम किसी और से मरना नहीं चाहते।
बनाकर बातों से बातें यहां बातें निकलती हैं, बस यूँहीं जिंदगी के सफर की रातें निकलती हैं, भरकर बैठे रहते हैं कुछ लोग अपने अंदर इतना, के पूछो एक और बाहर भरमार कहानी निकलती हैं… […]
ये मतलबी दुनिया मुझे, अपना नही लगती। लोग कहते है,मै मगरूर हूँ, “” घमण्डी हूँ।। जब कर दिया अपनो ने घायल, जब चिल्लाये दुनिया के समाने करवा दिया जब गलती का एहसास, तब लोग कहने […]
peeta nhi koi sharaab ,na cigar par har nasha jaanta huun… Jo sch me muskuraayen aur jo muskuraane ka bahana bnaaye ,aise har kisi ki mai dasaa jaanta huun Jaanta huun k har baar sapne […]
ढह गए कितने ही ईमान ऐ मकाँ एक बोतल की चाहत में, मगर बोतल ने बिक कर भी अपना ज़मीर नहीं छोड़ा।। राही (अंजाना)
कोई तो ऐसा मिले ‘खुदा’…. जब भी तेरे दर पे आऊँ…. उसके संग ही आऊँ ! राजनंदिनी रावत-राजपूत
मै जब से तेरी एक तस्वीर बनाने में वयस्त हूँ, मैं तब से अपने ही ख्यालों में वयस्त हूँ, रंग तो बहुत हैं ज़माने में मगर, मैं इंद्रधनुष के रंग छुड़ाने में वयस्त हूँ, चाँद […]
कश्ती पर सवार है जिंदगी ना जाने कब मिलेगा किनारा दूर से तो दिख रहा है खुबसूरत हर एक नजारा फ़िर रहा हूँ मैं मारा मारा दिल में है आशा पोहचु में उसी किनारे पे […]
मै जब से तेरी एक तस्वीर बनाने में वयस्त हूँ, मैं तब से अपने ही ख्यालों में वयस्त हूँ, रंग तो बहुत हैं ज़माने में मगर, मैं इंद्रधनुष के रंग छुड़ाने में वयस्त हूँ, चाँद […]
बातों में से बात निकलती है, चुप रहता हूँ आवाज़ निकलती है, शब्दों का ही खेल है मानो, जैसे समन्दर से सौगात निकलती है।
सड़कों पर खेल खुलेआम खेले जाते थे, होकर मिट्टी के रंग हम घर चले जाते थे, पिता की डाँट जब पड़ती थी अक्सर, माँ के आँचल में चुपके से हम छिप जाते थे, मुँह मोड़ […]
तेरे घर की गलियों में हम अक्सर भटका करते थे, तेरी नज़रों से छिपकर हम तुझको घूरा करते थे, साँझ सवेरे जब भी तू तितली बन मंडराती थी, रात अँधेरे जुगनू बन हम तुझको ढूंढा […]
मैं प्यादा हूँ मुझे प्यादा ही रहने दो, यूँ हाथी और घोड़ों से न भिड़ाओ तुम, मैं तो शतरंज का खिलाड़ी हूँ दोस्त, मुझे सांप सीढ़ी में न उलझाओ तुम।। राही (अंजाना)
जब तुमने मिलना छोड़ दिया, दिल ने धकड़ना छोड़ दिया, राह फ़िज़ाओं ने बदली पुष्पों ने खिलना छोड़ दिया, बहक उठा मन का पंछी कदमों ने लहकना छोड़ दिया, जब से रुस्वा हुई मन्ज़िंल “राही” […]
Badalna nahi aata humein mausam ki tarah, Har ek mausam mein tera intezaar karte hain.. Na tum samjh sako jise Kasam tumhari tumhe itna pyaar karte hain.
खुदा ने जब इश्क़ बनाया होगा,.,., तो खुद आज़माया होगा,.,., हमारी तो औकात ही क्या है,.,., इस इश्क़ ने खुदा को भी रुलाया होगा
तेरे घर की गलियों में हम अक्सर भटका करते थे, तेरी नज़रों से छिपकर हम तुझको घूरा करते थे, साँझ सवेरे जब भी तू तितली बन मंडराती थी, रात अँधेरे जुगनू बन हम तुझको ढूंढा […]
लड़ते लड़ते ज़माने की रीतिरिवाजों से थक गया हूँ, मगर कमाल ये ही की मैं अब भी किताब पढ़ता हूँ।। राही (अंजाना)
सोंचता हूँ अपनी एक नई दुनियाँ बना लूँ, जिसमे अपनी ही मनचाही तस्वीरें लगा लूँ, खुशियों के बिस्तर बिछा लूँ और दुखों को अपने घर का रस्ता भुला दूँ, सूरज चँदा को अपनी छत पर […]
न दिन खरीद पाओगे न रात बेच पाओगे, इन हाथों में न तुम अपने हालात बेच पाओगे, खरीदने की चाहत जो तुम दिल में सजाये हो, इन आँखों से तुम न ये ख्वाब बेच पाओगे, […]
अपनी मोहब्बत की इन्तहा तुम्हें क्या बताऊँ, गर हवा भी तुम्हें छूकर गुजरे तो शोले भड़कते हैं।। राही (अनजाना)
गीत होठो पे समाने आ गये है प्रीत भावो के सजाने आ गये है ? चाह ले के आस छाके गा रही है साज ओढे ताल लुभाने आ गये है ? रीत गाने के सदाये […]
आँखों की पहुंच से बाहर देखना होगा, एक बार तो समन्दर पार देखना होगा, मेरे आईने में वो मुझे नज़र नहीं आती, उसके आईने में मुझे यार देखना होगा, राही (अंजाना)
छोटी सी ख़ता पे दोस्ती तोड़ दे, रिश्तों के समन्दर का जो मुँख मोड़ दे, उम्मीदों पर टिकी हुई दुनियाँ छोड़ दे, वो सम्बन्ध ही क्या जो बन्धन छोड़ दे।। RAAHI
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