✍? गजल ?✍ —–(*)—– ✍ जग मे कुछ कर जाना जरूरी है जीवन मे मुस्कुराना जरूरी है चाहे हो कष्ट संकट गहनतम धैर्य से निकल जाना जरूरी है जग का काम है करना अवरोध बुद्धि […]

आदमी में घमंड इस कदर हैं चढ़ा।, छोड़ इंसानियत,खुन……. बहाता रहा। हौसला रंजिशों का ….बढ़ा हर तरफ । माँ बहन से न रिस्ता …..न नाता रहा।, खाब को क्या कहूँ?, नींद भी डर गया , […]

कुछ कहती नहीं बहुत कुछ कह जाती है कविता, खामोश दिखती है पर बहुत बोल जाती है कविता, चन्द शब्दों से नहीं एहसासों से बुनी जाती है कविता, खुद बंधती नहीं मगर सबको बाँध जाती […]

ख़ुशियों के पल में तो ख़ुशियों ने बख़ूबी साथ निभाया, और जब-जब मन निराश हुआ तब-तब क़लम के माध्यम से बनी कविता ने शांति का एहसास कराया, मैं अपनी कलम के हर एक सफर को […]

मित्रो! अभी हाल ही मे शहीद हुए हमारे देश के चार सैनिको को ,अपनी कविता के माध्यम से श्रद्धासुमन अर्पित करते हुये, मैने आप तक ए कविता पहुचाने की कोशिश की है अगर आपको ये […]

✍? गजल ?✍ ——-($)——- ✍ आओ धरती पे चरण रखो पाथ॔ संत साधुओ को तारो निस्वार्थ बिलखता पल विषाक्त क्षण मे विषैले हवाओ को टारो साक्षाथ॔ छल-बलयुक्त विकृत इस दौर मे दिखाओ अपना सच्चा पुरुषार्थ […]

“मैं ढूंढता रहा” :::::::::::::::::: मैं ढूंढता रहा, उस शून्य को, जो मिलकर असंख्य गणना बनते । मैं ढूंढता रहा , उस गाथा को , जिस की अमर प्रेम हर दिशाओं में गूंजते । और मैं […]

“गीत” :::::::::::: हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। दूर देश विदेश भय हैं वो मन का मेरे प्रिय साजन। हे! री सखी कैसे करू मै, स – श्रृंगार मन यौवन। हे!री सखी […]

✍? गजल ?✍ —–($)—– ✍ सत्य असत्य मे क्या सच्चाई है ईमान बेईमान के बीच लड़ाई है इंसान का इंसान मे नही विश्वास मानव का मानव के बीच खाई है परिवेश मे घुला है जहर […]

बांधकर बेड़ियों से कोमल पैरों को खींच कर, घर की चौखट के बाहर वो कभी जाने नहीं देते, हिम्मत जो जुटाती है बेटी कोई पढ़ने को, तो उसके कदमों को आगे कभी वो जाने नहीं […]

वज़्न – 122 122 122 122 अर्कान – फऊलुन फऊलुन फऊलुन फऊलुन बह्र – बह्रे मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम काफ़िया – आ (स्वर) रदीफ- है। मेरें दामन मे दर्द का सिलसिला है। रहा हर सफ़र जिन्दगी […]

✍? गजल ?✍ ——-($)——- ✍ मेरी जिंदगी का निखार तू है मेरी मुस्कान का प्रसार तू है तेरी चाहत का मै हूं दिवाना मेरी मुहब्बत का आधार तू है मेरी कल्पना तमन्ना मेरी तू मेरी […]

अभी तो उनसे हमारी बात कहां हुई…. दिन तो हुआ मगर रात कहां हुई…. वह हमारे तो हो गए यादों में ही सही…. अभी तो अश्कों की बरसात कहां हुई…. गमों के कारवां लेकर आ […]

कफ़न का ही इँतजाम कर दो | दो गज की जमीं नाम कर दो | दफन कर के मुझको जमीं में | मुझे गुल से गुलफाम कर दो | चलें आयेंगे देखने मुझको | ये […]

तुम देह नहीं तुम देहाकार हो देह में हो देह से मगर पार हो क्या दिखायेगा रूप दर्पण तुम्हारा देखो अंतर में, खुलेगा राज सारा शाश्वत सौंदर्य ज्योति पारावार हो देह में हो देह से […]

तेरी नजर में कबसे प्यार सा कुछ है! तेरी अदाओं में इजहार सा कुछ है! हर वक्त ढूंढती हैं किसी को करवटें, तेरी बाँहों को इंतजार सा कुछ है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

इश्क को माना खुदा है | देख लो क्या क्या सजा है | उन गुलों को क्यूं मसल दूं | जो मेरा भी हमनवा है | मुश्कुराहट देख के मेरी | आइना मुझ पर फिदा […]

“गीत” :::::::::::: हे!री सखी कैसे भेजूं , प्रिय को प्रणय निवेदन। दूर देश विदेश भय हैं वो मन का मेरे प्रिय साजन। हे! री सखी कैसे करू मै, स – श्रृंगार मन यौवन। हे!री सखी […]

मैं अपने सितमगर को सता कर आया हूँ! मैं आज उनको बेवफा बता कर आया हूँ! जख्मों को भूल जाना बहुत मुश्किल है मगर, मैं रास्ता मयखाने का पता कर आया हूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

मैं अल्फ़ाज़ हूँ तेरी हर बात समझता हूँ, मैं एहसास हूँ तेरे जज़्बात समझता हूँ, कब पूछा मैने की क्यूं दूर हो मुझसे, मैं दिल रखता हूँ तेरे हलात समझता हूँ…

चलो मिलकर प्रेम के कुछ रंग- ो-रस चख लो हर धर्म की परिभाषा का ये नाम रख लो गर चाहते हो हिंदुस्तान को खुशहाल देखना तो, तुम्हारे अल्लाह मुझको दे दो , तुम मेरे राम […]

हर किसी के दिल में किसी की आस है! जिंदगी में हर पल किसी की प्यास है! क्यों चाँद रहता है मगर तन्हाई में? जब चाँदनी की रोशनी उसके पास है! रचनाकार- #मिथिलेश_राय

सुबह सुबह घर के आँगन में वो फुदक फुदक इठलाती थी, गोरैया चिड़िया जब अक्सर हमसे मिलने आती थी, विलुप्त हो रही है जो पंछी वो चूँ चूँ करके गाती थी, छोटे छोटे बच्चों को […]

ज़िंदा हूँ,कि–मेरा प्यार तुम हो ————————————— तेरे दिल में याद बनकर समां जाऊंगा तेरी आँखों में नशा बनकर छा जाऊंगा क़शिश की सरहद से दूर ना जा पाओगे– मैं खुशबू बनकर एहसास की— —तेरी साँसों […]

? गजल ? ✍ तेरी नयन मदभरी गजब तेरी अदाएं रसभरी गजब मुस्कानो की पहचान नई तेरी सदाएं खरी-खरी गजब अंगड़ाई मे खिली मोहकता तेरी जुबां मे प्रीत भरी गजब चाहत मे ढला ईशक नवल […]

? गजल ? पाण्डव सा धैर्य धर्म मे संवरिए कौरव सा न अधम॔ मे संघरिए सांसारिक खुशी चाह के लिखे बेईमानी का न दामन धरिए सत्य सच्चाई संसार का है सुख निज को पहचान खुद […]

नयन अश्कों से भिगोता रहा हूं मैं जिन्दगी भर । गजल उनको ही सुनाता रहा हूं मैं जिन्दगी भर । दरख्ते उम्मीद अब है कहां लगतें तेरे जमी पर रकीबों सा अब तड़पता रहा हूं […]

ना जाने कितने मौसमों की हवा ली हमने, ना जाने कितने साँसों को सदा दी हमने, कहने को कह दी हर बात सरसराहट से हमने, ना जाने कितने ही दिलों को दवा दी हमने।। राही […]

बहुत दूर तलक जाकर भी कहीं दूर जा पाते नहीं, परिंदे यादों के तेरी मेरे ज़हन से उड़ पाते नहीं, बनाकर जब से बैठे हैं मेरी रूह पर घरौंदा अपना, किसी जिस्म पर चैन से […]

ये फेसबुक व्हाट्सएप्प की दुनिया से दूर मै तुम्हे पत्र वाला प्यार करना चाहती हूँ! उस पत्र का इंतज़ार करना चाहती हूँ जिसमे कितने भावनाओ को पिरोये होंगे तुम……उस एहसास को महसूस करना चाहती हूँ!! […]

एक दिन आसमां से गुजर जायेंगे | कब्र दर कब्र में हम उतर जायेंगे | आँधियों से ये कह दो रहें होश में | गर नही तो गुजर रौंदकर जायेंगे | लाख तूफ़ान दरिया उठाती […]

आज असफलता मेरी ज़िन्दगी को मिली हैं। बाते कुछ कम बयाँ करती आँखे मेरी। फिर भी यह थोडी़ सी गीलि हैं। क्योंकि आज असफलता मेरी ज़िन्दगी को मिली हैं।। कुछ कमियाँ, कुछ खामियाँ मुझ में […]

प्रातः अभिवादन “**गुणों की महक”** ***?**?**?? गुणों के गुलों की महक गुदगुदाए , गुणों की महक ,जिंदगी महक जाए। लगाएँ नयी पौध नित , सदगुणों की , वसंत आए ,आकर कभी भी न जाए। ******जानकी […]

रोग जाता ही नहीं कितनी दवा ली हमने | माँ के क़दमों में झुके और दुआ ली हमने | इस ज़माने ने सताया भी बहुत है मुझको | आग ये सीने की अश्कों से बुझा […]

रोग जाता ही नहीं कितनी दवा ली हमने | माँ के क़दमों में झुके और दुआ ली हमने | इस ज़माने ने सताया भी बहुत है मुझको | आग ये सीने की अश्कों से बुझा […]

मुफलिसी जहां की बस मैं जबान रखता हूं | आज हाथ में अपने आसमान रखता हूं | गौर कर जरा बस्ती पे कभी खुदा मेरे | हैं गरीब सब तो घर में दुकान रखता हूं […]

हर तरफ ही इश्क़ की कलियाँ खिला दी जायेगी | चाँद तारो की शरारत कुछ मिटा दी जायेगी | तुम कहो , तो चाँद – तारें आसमां से तोड़ दूँ | गर नही तोडूं मेरी […]

जिसतरह फूलों को मुस्कुराहट ढूंढ लेती है! मुझको तेरी यादों की आहट ढूंढ लेती है! जब घेरती हैं नजरों को तस्वीरें दर्द की, मुझको मयकशी की सुगबुगाहट ढूंढ लेती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

जोड़कर तिनका-तिनका घोंसला बनाने में, वक्त के साथ भावनाओं के मोती सजाने में, बड़ी हिफ़ाज़त से रखती है चिड़िया जिन परिंदों को, वो एक पल भी नहीं लगाते फिर अपने पर को फैलाने में, हवाओं […]

खोकर अपना वजूद फिर बनाने की कुब्बत रखता है, ये सूखा हुआ पेड़ फिर हरा हो जाने की सिफत(गुण)रखता है, उजड़ी हुई शाखों पर मत जाओ इसकी यारों, ये हर शख्स की साँसों में जीवन […]

अभी ज़िन्दगी की किताब के चन्द पन्नों को पटल कर देखा है। अपने बचपन को जैसे सरसरी निगाहों से गुजरते देखा है, यूँ तो खुशियों के पायदान के पृष्ठ पर आज पैर हैं हमारे, मगर […]

किसी रस्म किसी किस्म का ताला नहीं लगता, इस जीवन के पौधे पर कोई जाला नहीं लगता, जंक लग जाती है बाँधने वालों की ज़ुबाँ पे मगर, इस रूह की माटी पे कोई गाला (उत्सव) […]