आज संविधान दिवस है हमारा संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है… २६ नवम्बर २०१५ से डॉ० भीमराव अम्बेडकर के १२५वें जन्म दिवस से संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है… अम्बेडर जी […]

तुम्हारे सुधर जाने की गुंजाइश ही नहीं थी तो आखिर हम कोशिश कब तक करते ! रफ्ता-ऱफ्ता तुम पास आते गये हम भला दूर कैसे रहते ! रोंका तुम्हें, समझाया तुम्हें और भला हम क्या […]

अनाथ आश्रम ★★★★★★★ मेरे माँ-बाप कैसे होंगे यही सवाल अक्सर मस्तिष्क में गूंजता रहता है अक्सर मुझे वो काकी याद आ जाती हैं जिन्होंने मेरी परवरिश बचपन में की थी उस अनाथ आश्रम में बहुत […]

अतीत के फफोले *************** जीवन मेरा उलझा-उलझा सुलझी लट बालों की मैंने ना देखा सुंदर उपवन ना देखी प्रेम की सरिता निर्मल भूलवश मैं पड़ गई प्रेम के मायाजाल में सोंचा था मिलेगा सुख और […]

लावारिस बचपन ************** सड़कों पर भटक-भटक कर है कैसे बचपन बीता, और नहीं खाने को है एक निवाला मिलता… जाने कहाँ हैं मेरे माँ-बाप नहीं मैं जानू, मैं तो झुग्गी बस्ती को ही अपना घर-बर […]

आषाण की एकादशी को सभी देव सो जाते हैं… और कार्तिक की एकादशी को सभी देव जग जाते हैं… इसीलिए इस दिन को देवोत्थान एकादशी कहते हैं… आज के दिन विष्णु जी चारमास के बाद […]

आज है कार्तिक मास की एकादशी है तुलसी माँ का विवाह है… मेंहदी लगाकर मौली चढ़ाकर गोटे वाली चूनर ओढ़ाकर माता का किया श्रृंगार है आओ भक्तों मंगल गाओ तुलसी माँ का विवाह है… पैरों […]

उस माँ का दर्द कौन जाने ! जो अपने फर्ज के लिए अपने दुधमुहे बच्चे को घर छोंड़कर जाती है.. वो पुलिसकर्मी है अपनी ड्यूटी खूब निभाती है… कभी छोंड़ती मायके में कभी ससुराल में […]

बेंचकर सोना-चाँदी पीने चले अंग्रेजी देखो मानव के पतन का ये सुंदर दृश्य देखो दिन भर करें मजूरी रात में पीकर टुंन हैं देखो हिन्दू हो या हो मुस्लिम सब बैठे मयखाने में देखो दारू […]

बाबू जी की टूटी कुर्सी चरमर-चरमर करती है जब बैठो उस कुर्सी पर डाल की तरह लचकती है बाबू जी उस कुर्सी पर बैठ के पेपर पढ़ते हैं और साथ में बाबू जी चाय की […]

आज बहुत उदास होकर उसने मुझे पुकारा, मैं पास गई और उसे प्यार से सहलाया… उसने मुझसे कहा तुम मुझसे नाराज हो क्या ? या जिन्दगी की उलझनों से हताश हो क्या ? मैंने मुस्कुराते […]

रुक मुसाफिर ! रुक जरा ! मैं हूँ प्रेम का लबलब घड़ा. कीर्ति तेरे परिश्रम की कम नहीं फैली हुई है… राह में तेरे मुसाफिर देख ये प्रज्ञा’ खड़ी है सुन जरा ओ पथिक प्यारे […]

कवि नहीं शिल्पकार हूँ मैं ! एक ऐसा कवि, जो कागज पर अपनी भावनाओं भरी कलम से शब्दरूपी नक्काशी करता है.. जिसकी सुंदरता सिर्फ नेत्रों से दिखाई ही नहीं पड़ती बल्कि हृदय से महसूस भी […]

थकान है मगर दिल को आराम है आज मन भी बड़ा शान्त है थोड़ी तसल्ली भी है तुम्हारे साथ होने की खुशी भी है तुम्हारे कंधे पर सिर रखकर आज घण्टों रोती रही मैं सिर […]

वो मीठी बातें और मुलाकातें करते थे हम रात भर जो प्यार भरी बातें तुम जाने कितने तोहफे मुझे दिया करते थे, हर तोहफे में एक खत रखा करते थे.. उन खतों की बात निराली […]

अवधी देवीगीत:- ‘छठ पूजा स्पेशल’ ***************** ओ छठ मैया ! हमरी अरज सुनि लीजै… सात बरस मोरे ब्याह को होवै ललनवा तरसे मोर अंगनवा ओ छठ मैया ! दईदेऊ हमकऊ ललनवा… सास-ननद मोहे नाता मारैं […]

तुम मुझे प्यार नहीं करते हो यही सोंचकर मैं बहुत उदास थी ! तुम आये जब घर तो कुछ आस जगी.. मैंने जल्दबाजी में बनाई थी अपने लिये जो एक कप कॉफी थोड़ी पी ली […]

उलझनें रात को उबाती हैं दिन में नहीं तन्हाई रात को तड़पाती है दिन में नहीं.. पीर महसूस करने का वक्त दिन में नहीं मिल पाता है इसीलिए कवितायें रात को लिखती हूँ दिन में […]

ओ मेरे प्रियतम कान्हा !! मुझको तेरी बेरुखी से डर लगता है, तुम्हारी आँखों से साफ पता चलता है… तुम जिस तरह मायूस निगाहों से मेरी तरफ देखते हो, अपनी लाचारी साफ बयां करते हो… […]

चोरी से चुपके से तुम सब कुछ देखा करते हो मैं जानती हूँ तुम ऑनलाइन भी रहते हो जाने क्या बैठ गया है तुम्हारे मन में ! पास होकर भी तुम मुझसे कटते रहते हो […]

अगर राधा ना होती तो श्याम से प्रीत कौन करता ? अगर मीरा ना होती तो भक्ति के पद कौन गाता फिरता ? यही तो है प्रेम में हमेंशा नारियों ने अपने आपको सराबोर कर […]

अभी तक अस्तित्व पर ना कोई सवाल उठा था जो देखता था मुझको बस वाह ! करता था मेरी खुशियों की झोली बहुत थी भारी ख्वाबों में अपना उधार चलता था किस्मत की लकीरें मिट […]

मैं नन्हीं-मुन्हीं बच्ची हूँ अकल की थोड़ी कच्ची हूँ मां अपनी गोदी में सुला ले मैं तो तेरी बच्ची हूँ थक जाती हूँ खेल-खेलकर सब मुझको देखें हँस-हँसकर सब कहते हैं मैं अच्छी हूँ मैं […]

तमाशा नहीं जिन्दगी हकीकत है, जी लो जी भर के कल किसको फुर्सत है… रोज़ लड़ते हो तुम धन-दौलत के पीछे, उतना ही कमाओ जितनी जरूरत है.. यह धन-दौलत सब यहीं धरा रह जायेगा, जो […]

रात को ये कैसे-कैसे ख्वाब आते हैं ! तेरे खयाल मेरी रूह को छू जाते हैं बिस्तर ये जाने क्यूँ काटने को दौड़ता है ! तेरी यादों से मेरा तन-मन पिघलता है जागती हूँ रातभर […]

रात-दिन रतजगे किये हैं हमने इश्क में हम तो अपने यार की धूनी रमते हैं इश्क में…. लौटकर वो आएगा ये सोंचकर अभी खड़े जहाँ वो छोंड़कर गया वहाँ रुके हैं इश्क में…. कभी गिरे […]

गलतफहमियों में जीना अच्छा लगता है….. मुझको तेरा हर एक बहाना अच्छा लगता है….. कभी तू रोये कभी तेरी बातें मुझे रुलायें मुझको तेरा इठलाना अच्छा लगता है….. कभी नजर उठाकर तू बोले मुझसे तौबा […]

जरा-सा मजाक हमने क्या कर दिया आप तो रूठ गये.. जरा-सी तवज्जो हमने क्या दी आप तो रूठ गये.. कितना हुनर बख्शा है आपको ऊपर वाले ने हमने शरारत जो की आप तो रूठ गये..

तुम अपने हो तभी शिकायत कर देती हूँ जो मन में आता है कह देती हूँ तुम्हें हरगिज बुरा लगता है यह भी जानती हूँ पर तुम्हें अपना मानती हूँ तभी सब कुछ कह देती […]

तुम कितनी भोली हो बाला तेरा कितना रूप निराला मीठी-मीठी बातों से तुम मुझको रोज रिझाती हो सुबह होते ही तुम जाने कहाँ गुम हो जाती हो ! सांझ होते ही मैं तुम्हारी प्रतीक्षा करने […]

बैंगनी चूड़ियां ************** तुमने पहली मुलाकात में जो भेंट की थी बैंगनी चूड़ियां उनकी खनक आज भी कानों में गूंजती है जब टूटा था हमारा प्यार भरा रिश्ता एक गलतफहमी से तो चूंड़ियों का टूटा […]

आधुनिक नारी ने तोड़ दी हैं गुमनामी की जंजीरें बढ़ाई है अपनी ताकत अपनी मेहनत से पाया है बुलंदियों का आसमां कभी खैरात में नहीं मांगी उसने खुशियां नारी ने तो हमेशा से त्याग, तपस्या […]

तिरस्कृत महिला **************** तिरस्कार मनुष्य को जीवित ही मार देता है ये वह जहर है जो धीरे- धीरे असर करता है शेक्सपियर भी कह गये हैं मित्रों ! “बदला लेने और प्रेम करने में नारी […]

कल रात चाँद ने कहा मुझसे कुछ तो परेशानी है तुम्हें जो रोज़ चले जाते हो तुम समुंदर किनारे… जब रात को सब सो जाते हैं चादर तान के तो तुम मुझे देखते रहते हो […]

हम समझते थे इस चमन को अपना सदा और करते थे प्रीत इसकी धूल से गुजारते थे शाम इसकी गोद में घास पर बैठकर स्वर्ग पाते थे मगर हम परदेशी हैं यह चमन अपना नहीं […]

तुम्हारी बेरुखी को प्यार समझूं या खता समझूं तू ही बता ना आखिर क्या समझूं ? सामने आकर भी मुह फेर लेते हो बेबसी समझूं या बेवफाई समझूं तू ही बता ना आखिर क्या समझूं […]

बन पाता है जो मुझसे उतना योगदान मैं देती हूँ जितनी मेरी क्षमता है उतनी ही सेवा करती हूँ| थक जाती हूँ जब मैं ज्यादा बिस्तर पर पड़ जाती हूँ फिर तो अपने आप भी […]

द्वार पर खड़ी हूँ भीख दे दो सीख नहीं कुछ अन्न-जल दे दो तेरे बाल- बच्चे सलामत रहें, घर-द्वार फूले-फले, बड़ी भूंख लगी है कुछ खाने को दे दो सीख नहीं कुछ अन्न-जल दे दो… […]

गुलाबी सर्द रातों में तुम्हारी याद आती है तैरते हैं जब सितारे आसमान की गोद में, बिछा लेता है चाँद जब हिमालय पे बिस्तर और बरस पड़ती हैं ओस की बूंदें, तो मन मचलकर करता […]

हर सुबह होती है मुस्कुराते हुए रात होते-होते आँख भर आती है जिन्दगी की उलझनों में उलझती हूँ ऐसे कि जिन्दगी की शाम हो जाती है बेबसी, आँसू, रुसवाई के सिवा कुछ नहीं है मेरे […]

भाई दूज स्पेशल:-💟💟 ******************** जब मैं छोटी थी तो तू ही था जो उंगली पकड़ता था मेरी गिरती थी तो तू संभाल लेता था हाँ, आज थोड़ी लम्बाई बढ़ गई है पर बुद्धी आज भी […]

भाई दूज का दिन है बहनों प्यार लुटाओ प्यारे-प्यारे भाई को अपने हाथों से मिष्ठान खिलाओ… भाई-बहन के प्रेम का परिचय देता है यह त्योहार भाई से जो कुछ मांगे बहन तो भाई जाये सबकुछ […]

आजकल फुर्सत नहीं होती है जिंदगी बेवक्त मशरूफ रहती है… त्योहार का मौसम है मगर जाने क्यूं ! होंठों पर खामोशी पसरी रहती है….. है चारों ओर रिश्तों का ताना-बाना पर दिल में मायूसी फैली […]

बचकर चलो रे राही! घर के बाहर मौत खड़ी संभल चलाओ गाड़ी घर के बाहर मौत खड़ी…. हेलमेट लगाकर बाहर निकलो सीटबेल्ट भी बांध के निकलो चौपहिया या हो दो पहिया आँखें चौकन्नी करके निकलो […]